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जानिए भारत की एक ऐसी जनजाति के बारे में, जिन्होंने अब तक न नमक खाया है और न ही शक्कर का स्वाद चखा है

 सेंटिनली जनजाति (Sentinelese Tribe) – एक रहस्यमयी और प्राचीन आदिवासी जाति

सेंटिनली जनजाति उत्तर सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island) पर निवास करती है, जो अंडमान द्वीपसमूह का एक हिस्सा है। यह जनजाति दुनिया की सबसे अलग-थलग रहने वाली मानव समूहों में से एक मानी जाती है। इनका जीवन और संस्कृति लगभग 60,000 साल से बिना बदलाव के बनी हुई मानी जाती है।

अलगाव (Isolation)

सेंटिनली लोग बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं चाहते। वे हर बाहरी प्रयास को शत्रुता से जवाब देते हैं – तीरों और भालों से। सरकार ने उन्हें पूरी तरह अलग और संरक्षित रखा है; उनके द्वीप के 5–10 किलोमीटर के दायरे में जाना प्रतिबंधित है।

जनसंख्या

अनुमानित जनसंख्या: 50 से 150 के बीच (सटीक जानकारी नहीं है)। भारतीय जनगणना 2001 में इनकी कुछ तस्वीरें ली गई थीं, पर 2011 की जनगणना के बाद से कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ।

जीवनशैली

ये शिकारी और संग्रहकर्ता (Hunter-Gatherers) हैं। मछली पकड़ते हैं, शहद इकट्ठा करते हैं, जंगली फल खाते हैं। खेती या आग का उपयोग करते हैं या नहीं – इस पर शोधकर्ताओं में मतभेद है। लोहे का उपयोग करते हैं – समुद्र में बहकर आए मलबे से (जैसे नावों के टुकड़े)।ये लोग अंडमान के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहनी वाली निग्रिटो (अश्वेत तथा छोटे कद वाले) समुदाय के लोग हैं। वे बाहरी दुनिया से बिना किसी संपर्क के पूरी तरह से अलग-थलग हैं। लेकिन वर्ष 1991 में इस जनजातीय समुदाय द्वारा भारतीय मानव विज्ञानविदों और प्रशासकों की एक टीम से कुछ नारियल स्वीकार किये थे।

सेंटिनल जनजाति के लोग न खेती करते हैं और न ही जानवर पालते हैं। ये फल, शहद, कंदमूल, सुअर, कछुआ, मछली का सेवन करते हैं। इन्होंने अब तक न नमक खाया है और न ही शक्कर का स्वाद चखा है। कहा जाता है कि ये लोग आग जलाना भी नहीं जानते हैं।

अजीबोगरीब प्रथाएं – सेंटिनल जनजाति की विभिन्न प्रथाएं भीहैं जिसमें कुछ काफी रोचक हैं। जैसे, इन जनजातियों में यदि किसी की मृत्यु झोपड़ी में हो जाती है, तो उस झोपड़ी में कोई नहीं रहता। बीमार होने पर सिर्फ जड़ी-बूटियों और पूजा-पाठ का सहारा लिया जाता है। ये जनजातियां भूत-प्रेतों को भी बहुत मानती हैं। इनकी नजर में अच्छे और बुरे भूत होते हैं तथा वे इनकी पूजा भी करते हैं।

सुरक्षा और कानून

भारत सरकार ने 1956 में Andaman and Nicobar Islands Protection of Aboriginal Tribes Regulation (ANPATR) लागू किया। 2017 में विदेशियों के लिए भी सेंटिनली क्षेत्र में प्रवेश पूर्णतः निषिद्ध किया गया। इनसे संपर्क की कोशिश अपराध मानी जाती है।

By Five Colors Of Travel

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