जब हम एक घर में जन्म लेते हैं तब हमें एक परिवार मिलता है और एक परिवार हम इस दुनिया से बाहर खुद बनाते हैं। जिसमें खास तौर पर हमारे दोस्त शामिल होते हैं। दोस्त ही क्यों? क्योंकि ये कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनसे हम खुलकर सब कुछ कह देते हैं। हमें बहुत ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। कुछ वैसा ही तब होता है जब हम अपने मन के भावों और विचारों को कोरे कागज़ पर उतारते हैं।
लेकिन ट्रैवल के दौरान कैसे?
यूं तो अगर हम रात को सोने से पहले डायरी एंट्री करते हैं तो हमारा मन शांत हो जाता है, हमारे पूरे दिन की थकान उतर सकती है। लेकिन सोलो ट्रैवलिंग के दौरान इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। सोलो ट्रैवल यानी जब आप अकेले सफ़र करते हैं, जब सारा समय आपके साथ कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं होता। ऐसे में आपकी पहचान अनजान लोगों से भी होती है पर उनका साथ कुछ पल का होता है। इस वक़्त डायरी एंट्री करना आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। आप जब भी कुछ कहने या व्यक्त करने के इच्छुक हों, बस लिख दें। और लिखें ऐसे जैसे ये सिर्फ आप और आपकी इस वफ़ादार दोस्त के बीच ही रहने वाला है। सिर्फ आप दोनों के बीच।

आप अपने साथ एक छोटी डायरी या नोटपैड रख सकते हैं। जिसमें आप कभी भी लिख सकते हैं और चाहें तो बाद में इसे अपनी बड़ी डायरी में उतार लें और मज़ा लें अपनी सोलो ट्रिप का।