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Hidimba Devi Temple: हिमाचल के मनाली में एकमात्र भीम की पत्नी हिडिंबा को समर्पित महाभारत युगीन मंदिर! 

Hidimba Devi Temple:

दिन में यहां दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन सुबह-सुबह या शाम के वक़्त जब हल्की-हल्की ठंडक, पेड़ों के बीच से छनकर आती रोशनी और घंटियों की आवाज़ मिलकर गूंजती है, तो इस जगह का जादू और भी बढ़ जाता है। कई लोग सिर्फ़ आध्यात्मिक वजह से नहीं, बल्कि यहां की वाइब, शांति और फ़ोटोग्राफ़ी के लिए भी बार-बार लौट कर आते हैं।

Hidimba Devi Temple:

हिडिंबा देवी मंदिर कहां है?

हिडिंबा देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िले में बसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन मनाली में स्थित है। यह मनाली के प्रसिद्ध मॉल रोड से लगभग 2 से 3 किलोमीटर दूर धुंगरी वन क्षेत्र Dhungri Van Vihar के बीचों-बीच है, जिसे लोकल लोग धुंगरी मंदिर भी कहते हैं। मॉल रोड से आप पैदल भी आराम से यहां तक पहुंच सकते हैं। हल्का चढ़ाई वाला रास्ता है, लेकिन इतना कठिन नहीं कि सांस फूल जाए। (कई लोग सिर्फ़ आध्यात्मिक वजह से नहीं, बल्कि यहां की वाइब, शांति और फ़ोटोग्राफ़ी के लिए भी बार-बार लौट कर आते हैं।)

Hidimba Devi Temple:

रास्ते में छोटे-छोटे कैफ़े, ऊनी कपड़ों की दुकानें और लोकल फोटोग्राफर कैमरा लिए खड़े नज़र आते हैं, जो आपकी पारंपरिक हिमाचली ड्रेस में तस्वीरें खींचने का ऑफर देते रहते हैं। मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी अनोखी वास्तुकला है। यह पूरी तरह पारंपरिक हिमाचली शैली की पगोड़ा Pagoda शैली में बना है। ऊपर की तरफ़ जाते हुए छोटी होती चार परतों वाली लकड़ी की छत, जिसमें तीन मंज़िलों पर देवदार की लकड़ी की टाइलें और सबसे ऊपर पीतल का शंकु-नुमा कलश लगा है। नीचे पत्थर और मिट्टी से बनी मोटी दीवारें, अंदर एक विशाल चट्टान, जिसे देवी का प्रतीक मानकर पूजा जाता है

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हिडिंबा देवी का महाभारत यगीन इतिहास

हिडिंबा देवी की कहानी सीधे महाभारत के समय से जुड़ती है। कथा के अनुसार, हिडिंबा और उसका भाई हिडिंब यहां के घने जंगलों में रहते थे। कहा जाता है कि हिडिंब बहुत शक्तिशाली और क्रूर था और उसकी शर्त थी कि जो भी उसे युद्ध में हराएगा, वही हिडिंबा का वर बनेगा। जब पांडव वनवास के दौरान इस क्षेत्र में पहुंचे तो हिडिंब ने उन पर हमला किया लेकिन भीम ने उसे परास्त कर दिया।

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हिडिंबा ने भीम की वीरता और नेक दिल स्वभाव से प्रभावित होकर उससे विवाह किया और उनसे घटोत्कच नाम के पराक्रमी पुत्र का जन्म हुआ। जिसने आगे चलकर कुरुक्षेत्र के युद्ध में अहम भूमिका निभाई। महाभारत के युद्ध के बाद जब पांडव आगे बढ़ गए, तो हिडिंबा ने मनाली में ही रहकर घोर तपस्या की। माना जाता है कि देवी ने वर्षों तक ध्यान लगाकर ऐसी आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त की कि धीरे-धीरे लोग उन्हें देवी स्वरूप मानने लगे। बाद में 1553 ईस्वी में कुल्लू घाटी के शासक महाराजा बहादुर सिंह ने इस गुफ़ा के ऊपर लकड़ी का यह भव्य मंदिर बनवाया, जो आज हिडिंबा देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है।

Hidimba Devi Temple:

खाना-पीना और रुकने की जगहें।

अब बात करते हैं उस चीज़ की जो हर यात्री के दिल के बहुत करीब होती है अच्छा खाना और आरामदायक ठहरने की जगह। हिडिंबा देवी मंदिर के आसपास का इलाका पुराने मनाली Old Manali से भी जुड़ता है, जहां आपको बजट गेस्ट हाउस से लेकर कॉज़ी होमस्टे और मिड-रेंज बुटीक होटल तक हर तरह का स्टे ऑप्शन मिल जाएगा।

Hidimba Devi Temple:

धुंगरी मंदिर रोड और सियाल क्षेत्र में कई ऐसे होटल हैं, जो मंदिर से पैदल दूरी पर हैं। सुबह बालकनी से बैठकर पहाड़ों को निहारिए और थोड़ी ही देर में मंदिर के दर्शन के लिए निकल पड़िए। अगर आप शांत माहौल चाहते हैं तो पुराने मनाली के पुल के उस पार वाले होमस्टे चुन सकते हैं, जहां कैफ़े कल्चर भी है और पहाड़ी गांव वाली सादगी भी। खाने की बात करें तो मंदिर के आसपास छोटी-छोटी दुकानों से लेकर अच्छे रेस्टोरेंट तक मिलते हैं। कई दुकानों पर आलू-पराठा, छोले-भटूरे, समोसा, पकोड़े और गरम-गरम चाय मिलती है, जो ठंडे मौसम में जान डाल देती है।

Hidimba Devi Temple:

हिडिंबा मंदिर तक कैसे पहुंचें?

मनाली पहुंचना आजकल काफी आसान हो गया है और शहर में आ जाने के बाद हिडिंबा देवी मंदिर तक पहुंचना तो और भी आसान। सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट भुंतर कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट है, जो मनाली से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। यहां से आप टैक्सी या बस लेकर लगभग डेढ़ दो घंटे में मनाली पहुंच जाते हैं। ट्रेन से आने पर नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन चंडीगढ़ है।

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वहां से मनाली के लिए लगातार वोल्वो, प्राइवेट और एचआरटीसी बसें उपलब्ध रहती हैं। रास्ता लंबा ज़रूर है, लेकिन व्यास नदी के साथ-साथ चलते घुमावदार पहाड़ी मार्ग, सुरंगें और बीच-बीच में छोटे कस्बे पूरे सफ़र को यादगार बना देते हैं। जब आप मनाली शहर में हों, तो मॉल रोड, सर्किट हाउस या पुराने मनाली के किसी भी हिस्से से हिडिंबा मंदिर तक टैक्सी, ऑटो या बाइक से आसानी से जा सकते हैं। मंदिर का टाइम आम तौर पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक बताया जाता है और प्रवेश पूरी तरह मुफ़्त है। बस पूजा या फोटोग्राफ़ी के लिए कहीं-कहीं छोटा-मोटा शुल्क लग सकता है।  

Hidimba Devi Temple:

मंदिर की सुंदरता और आसपास के आकर्षण

हिडिंबा देवी मंदिर की असली खूबसूरती सिर्फ़ इसकी इमारत में नहीं बल्कि उसके माहौल में है। मंदिर के चारों ओर फैला घना देवदार वन ऐसा आभास देता है मानो आप किसी प्राचीन रहस्यमयी जंगल में हों। पेड़ों की ऊंचाई इतनी ज़्यादा है कि कई जगह धूप सीधे ज़मीन तक नहीं पहुंच पाती है। हवा में ठंडक है, पत्तों की सरसराहट है और बीच-बीच में बजती घंटियों की आवाज़ कुल मिलाकर यह जगह मेडिटेशन के लिए भी परफ़ेक्ट लगती है। आसपास घूमने के लिए भी कई जगहें हैं।

Hidimba Devi Temple:

मंदिर से ज़्यादा दूर नहीं मनु मंदिर है, जो मनु ऋषि को समर्पित है। पुराना मनाली कैफ़े, ग्रैफ़िटी और हिप्पी-स्टाइल माहौल के लिए मशहूर है। यहां नदी के किनारे बैठकर कॉफ़ी पीना अपने आप में एक अनुभव है। थोड़ा आगे निकलें तो सोलंग घाटी आपको पैराग्लाइडिंग, ज़ोर्बिंग, स्कीइंग जैसे एडवेंचर देती है, जबकि रोहतांग पास की बर्फीली वादियां अलग ही दुनिया दिखाती हैं। शाम के समय जब मंदिर परिसर में हल्की-हल्की लाइट जलती है और देवदार के पेड़ों के बीच से पीली रोशनी झांकती है, तो पूरा नज़ारा सचमुच पोस्टकार्ड जैसा लगता है।

Hidimba Devi Temple:

फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से पांच यात्रा सुझाव

1. मंदिर जाने के लिए सुबह जल्दी या शाम को जाएं। इस समय भीड़ थोड़ी कम रहती है, रोशनी नरम होती है और फ़ोटो भी ज़्यादा सुंदर आती हैं।

2. फुटवियर आरामदायक पहनें मंदिर तक थोड़ी चढ़ाई और पत्थरों वाली सीढ़ियां हैं, हील या बहुत स्मूद सोल वाले जूते फिसल सकते हैं, खासकर बर्फ़ या बारिश में।

3. मंदिर परिसर में शांति का सम्मान करें। लोकल लोगों के लिए हिडिंबा सिर्फ़ टूरिस्ट स्पॉट नहीं, बल्कि कुलदेवी हैं, इसलिए ज़ोर-ज़ोर से म्यूज़िक चलाने, कूड़ा फेंकने या धार्मिक नियमों की अनदेखी करने से बचें।

Hidimba Devi Temple:

4. अगर आप फोटोग्राफ़ी या ड्रोन शूट करना चाहते हैं, तो पहले लोकल अथॉरिटी या पुजारी से अनुमति ज़रूर ले लें!

5. लोकल इकोनॉमी को सपोर्ट करें जहां हो सके, हिमाचली हस्तशिल्प, ऊनी टोपी, शॉल और स्थानीय खाने का स्वाद लें ताकि आपकी यात्रा सिर्फ़ आपके लिए नहीं बल्कि वहां के लोगों के लिए भी फायदेमंद बने।

खूबसूरती को आत्मसात करने का आसान ज़रिया

Hidimba Devi Temple:

हिडिंबा देवी मंदिर पर आने वाले ज़्यादातर लोग शुरू में इसे अपनी चेक-लिस्ट का एक मंदिर वाला पॉइंट मानकर आते हैं, लेकिन लौटते समय अक्सर उनके अंदर एक अजीब सी शांति और अपनापन भर पाया जाता है। शायद इसकी वजह है यहां का अनोखा कॉम्बिनेशन एक तरफ़ महाभारत की पुरानी कथा, दूसरी तरफ़ हिमाचली लोक-संस्कार, तीसरी तरफ़ देवदार के जंगल और बर्फ़ीली चोटियों का दृश्य और चौथी तरफ़ मंदिर के बाहर मुस्कुराते साधारण से चेहरे, जो आपको अपने-पन से आओ जी, दर्शन कर लो कहते हैं। हिडिंबा देवी मंदिर मनाली की रूह से मुलाक़ात का सबसे आसान ज़रिया है। यहां आप सिर्फ़ देवी से आशिर्वाद नहीं लेते बल्कि इस पूरी घाटी के इतिहास, संस्कृति और प्रकृति के साथ एक गहरा रिश्ता भी महसूस करते हैं। अगली बार जब आप मनाली की यात्रा प्लान करें तो सिर्फ़ रोहतांग और सोलंग को ही ट्रिप का हीरो मत बनाइए हिडिंबा देवी मंदिर भी आइए।

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