ब्रिटेन ने अपनी वीजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। 25 फरवरी 2026 से यूनाइटेड किंगडम (UK) में आने वाले ज्यादातर विदेशी यात्रियों को अब पारंपरिक पासपोर्ट स्टिकर की जगह केवल डिजिटल ई-वीजा जारी किया जाएगा। यानी अब पासपोर्ट पर लगने वाला वीजा स्टिकर धीरे-धीरे इतिहास बन जाएगा और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रिकॉर्ड के जरिए संचालित होगी। यह कदम देश की इमिग्रेशन प्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम बदलाव माना जा रहा है।
क्या है नया ई-वीजा सिस्टम?
नई व्यवस्था के तहत वीजा अब सीधे आपके डिजिटल प्रोफाइल से जुड़ा होगा, जिसे UK Visas and Immigration (यूकेवीआई) के आधिकारिक ऑनलाइन खाते के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि वीजा मिलने के बाद पासपोर्ट पर कोई स्टिकर, मुहर या कागजी प्रमाण नहीं दिया जाएगा। पूरा वीजा स्टेटस डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिसे जरूरत पड़ने पर एयरलाइंस और बॉर्डर अधिकारी ऑनलाइन सिस्टम के जरिए तुरंत सत्यापित कर सकेंगे। इससे फर्जी दस्तावेजों की संभावना कम होगी और प्रक्रिsया पहले से ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित मानी जा रही है।

इस नई डिजिटल प्रणाली में यात्रियों के लिए यह बेहद जरूरी होगा कि वे समय रहते अपना यूकेवीआई अकाउंट बनाएं और उसमें पासपोर्ट की सही व अद्यतन जानकारी दर्ज रखें। यदि आपने पासपोर्ट बदला है या उसकी अवधि बढ़वाई है, तो उस जानकारी को भी तुरंत अपडेट करना होगा। चेक-इन के समय एयरलाइन डिजिटल सिस्टम के जरिए ही आपके वीजा की वैधता की जांच करेगी। यदि आपके ऑनलाइन प्रोफाइल और पासपोर्ट विवरण में कोई भी असंगति पाई जाती है, तो बोर्डिंग में देरी या रोक जैसी समस्या सामने आ सकती है। इसलिए यात्रा से पहले अपनी डिजिटल प्रोफाइल की जांच करना अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा।
जानिए किन यात्रियों पर होगा असर?
25 फरवरी 2026 के बाद जारी होने वाला हर नया विज़िटर वीजा और अन्य अल्पकालिक वीजा सिर्फ ई-वीजा के रूप में ही दिया जाएगा। यानी अब पासपोर्ट पर पारंपरिक स्टिकर या कागज़ी वीजा नहीं लगाया जाएगा। हालांकि जिन यात्रियों के पास पहले से वैध स्टिकर वीजा मौजूद है, वे उसकी समाप्ति तिथि तक उसका इस्तेमाल कर सकेंगे। लेकिन इस तारीख के बाद आवेदन करने वाले सभी नए आवेदकों को पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से ही गुजरना होगा और उनका वीजा ऑनलाइन प्रोफाइल से जुड़ा रहेगा।

यह बदलाव उन देशों के नागरिकों को भी प्रभावित करेगा, जिन्हें अब तक पासपोर्ट में वीजा स्टिकर मिलता था। अब वीजा आवेदन भरने से लेकर बायोमेट्रिक प्रक्रिया, स्वीकृति और यात्रा के समय सत्यापन तक सब कुछ डिजिटल सिस्टम के जरिए होगा। एयरलाइंस और इमिग्रेशन अधिकारी ऑनलाइन डाटाबेस से ही वीजा की वैधता की जांच करेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम से फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी, सीमा नियंत्रण प्रणाली ज्यादा तेज़ और पारदर्शी बनेगी और यात्रियों को भी लंबे समय में अधिक सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।
डिजिटल वीजा के फायदे और सावधानियां
डिजिटल वीजा प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि अब वीजा खो जाने, पन्ना फट जाने या पासपोर्ट में स्टिकर खराब होने जैसी परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा। पहले कई बार ऐसा होता था कि वीजा स्टिकर को नुकसान पहुंचने पर यात्रियों को दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब पूरा वीजा रिकॉर्ड सुरक्षित डिजिटल सिस्टम में दर्ज रहेगा। जरूरत पड़ने पर एयरलाइंस और इमिग्रेशन अधिकारी सीधे ऑनलाइन डाटाबेस से वीजा स्टेटस की पुष्टि कर सकेंगे। इससे बॉर्डर चेक की प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले ज्यादा तेज़ और सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।
हालांकि इस नई व्यवस्था में यात्रियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका पासपोर्ट नंबर, जन्मतिथि, नाम की स्पेलिंग और संपर्क जानकारी UK Visas and Immigration (यूकेवीआई) के ऑनलाइन खाते में बिल्कुल सही और अपडेटेड दर्ज हो। यदि किसी कारण से पासपोर्ट बदला जाता है, तो नई जानकारी तुरंत प्रोफाइल में अपडेट करना जरूरी होगा। अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड और पासपोर्ट विवरण में अंतर पाया गया, तो चेक-इन या यात्रा के दौरान दिक्कत आ सकती है। इसलिए यात्रा से पहले अपने डिजिटल वीजा स्टेटस और व्यक्तिगत जानकारी की दोबारा जांच करना अब बेहद अहम कदम बन जाएगा।
क्यों किया गया यह बदलाव?
ब्रिटेन सरकार का साफ उद्देश्य अपनी इमिग्रेशन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। बदलते वैश्विक माहौल में सीमा सुरक्षा और यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार अब पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं से आगे बढ़ना चाहती है। डिजिटल सिस्टम के जरिए न केवल वीजा जारी करने की प्रक्रिया को तेज़ किया जा सकेगा, बल्कि डेटा की निगरानी और सत्यापन भी ज्यादा प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देशों ने ई-वीजा और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन जैसी व्यवस्थाएं अपनाई हैं, जिससे यात्रा प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनी है। इन्हीं बदलावों को देखते हुए United Kingdom भी अपनी सीमाओं को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाना चाहता है। सरकार का मानना है कि डिजिटल इमिग्रेशन प्रणाली से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होगा और यात्रियों को भी लंबी कतारों और कागजी झंझट से राहत मिलेगी। यह कदम भविष्य की यात्रा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना है?
अगर आप 2026 के बाद यूके की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करते समय डिजिटल प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ लें। समय पर अकाउंट बनाएं, सभी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करें और यात्रा से पहले अपने वीजा स्टेटस की ऑनलाइन पुष्टि जरूर कर लें।
कुल मिलाकर, 25 फरवरी 2026 से शुरू होने वाला यह बदलाव यूके यात्रा को अधिक डिजिटल और पेपरलेस बना देगा। हालांकि शुरुआत में यात्रियों को नई प्रणाली के साथ तालमेल बैठाना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में यह प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जा रही है।