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Pinjore Garden – पिंजौर गार्डन- राजस्थानी और मुगल शैली का एक बेहतरीन उदाहरण

by Pardeep Kumar

भारत के हरियाणा राज्य में पंचकूला जिले में पिंजौर स्थित है और यहीं पर है राजस्थानी और मुगल शैली का एक बेहतरीन उदाहरण पिंजौर गार्डन। उत्तर भारत के सबसे प्राचीन और सबसे आकर्षक बागों में शामिल यह पिंजौर गार्डन 17वीं शताब्दी में मुग़ल शहंशाह औरंगजेब के शासन काल में वास्तुकार नवाब फिदाई खान द्वारा बनाया गया था।

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नवाब फ़िदई ख़ान उस दौरान मुग़ल सल्तनत में राज्यपाल के रूप में भी काम कर रहे थे। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि एक बार जब वह पिंजौर घाटी का दौरा कर रहे थे, तो वह इस घाटी की सुंदरता से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने यहीं इसी स्थान पर सुन्दर से बगीचे के डिजाइन को लागू करने का फैसला कर लिया। (Pinjore Garden)

बताते हैं फिदाई खान इस बाग़ का सुख ज्यादा नहीं भोग सका। और कुछ ही सालों में वापस लौटना पड़ा। तब पिंजौर के बागानों और आसपास की जमीनों को भुगतान के रूप में पटियाला राज्य को दे दिया गया। तब उस समय पटियाला के राजा अमर सिंह शासन कर रहे थे। पिंजौर के अधिग्रहण करने के उपरान्त उन्होंने इस बगीचे पर काम फिर से शुरू कर दिया। बाद में देश आज़ाद होने के उपरांत और हरियाणा राज्य बनने के बाद उनके बेटे, महाराजा यादवेंद्र सिंह ने पिंजौर गार्डन राष्ट्र को दान कर दिया और तभी से पिंजौर गार्डन को आम जनता के लिए खोल दिया गया।

पिंजौर गार्डन कैसे पहुंचे

पिंजौर गार्डन देश के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक चंडीगढ़ से तकरीबन 22 किलोमीटर दूर चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे पर पिंजोर कस्बें  में स्थित है।  चंडीगढ़ से आप बहुत ही आसानी से टैक्सी या कैब करके पिंजौर जा सकते हैं।

अगर आप रेलवे मार्ग से यहाँ आना चाहें तो कालका रेलवे स्टेशन से यह गार्डन लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

पिंजौर गार्डन को किसी समय मुगल गार्डन भी कहा जाता था। वास्तव में यह गार्डन मुगल वास्तुशिल्प कला का अद्भुत नमूना है। मुगल शैली से निर्मित इस गार्डन में हरी मखमली घास और रंग बिरंगे फूल पर्यटको को बरबस ही अपनी और आकर्षित करते हैं। पिंजौर गार्डन भारत में टैरेस गार्डन का एक अनोखा और अद्भुत उदाहरण है। बताते हैं कि पांडवों ने अपने निर्वासन के दौरान कुछ समय के लिए इस जगह आराम किया था।

पिंजौर गार्डन में चारबाग पैटर्न है और यह पारंपरिक मुगल शैली में बनाया गया है। आप अगर घूमने के शौक़ीन हैं या इतिहास के जानकार हैं तो जानते ही होंगे की मुगलों की बनाई अधिकतर इमारतें या स्मारक चार बाग़ पैटर्न पर आधारित हैं।

आपको बता दें यह गार्डन देश भर में टैरेस गार्डन के रूप में एक बेहतरीन मुकाम क्यों रखता है।

इस बगीचे में कुल सात छते हैं जो कुछ दूरी पर नीचे उतरते हुए एक के बाद एक बनी हुई हैं। लगभग 100 एकड़ में फैले इस बगीचे को बेहद खूबसूरती से सात छतों पर बनाया गया है। जैसे ही आप इस गार्डन में एंट्री करते हैं सबसे पहले आपको दिखाई देगी यहाँ की पहली छत। बगीचे का मुख्य द्वार इसी पहली छत पर खुलता है जहाँ से आप बगीचे में कल-कल करते पानी के झरने देख सकते हैं। इस छत को राजस्थानी-मुगल शैली में डिजाइन किया गया है। एंट्री करते ही मुख्य द्वार के ऊपरी हिस्से पर आपको राजस्थानी शैली की सुन्दर और बारीक़ नक्काशी दिखाई देगी। जो यहाँ आने वाले किसी भी टूरिस्ट का मन मोह लेती है।

जैसे ही आप कुछ कदम आगे चलेंगे आपको मुगल-राजस्थान शैली की वास्तुकला में निर्मित शीश महल दिखाई देगा। इस महल को इसके वास्तुकार फिदाई खान का दरबार कहा जाता है। इसी छत पर आपको पंक्तिबद्ध ऊँचे-ऊँचे पेड़ दिखाई देते हैं जो यहाँ आने वाले टूरिस्ट्स को गर्मियों में ठंडी छाया प्रदान करते हैं।

इसी शीशमहल के सामने दूसरी छत पर रोमांटिक रंग महल हैं जहाँ से आप इस बगीचे की सुंदरता का जी भर के आनंद ले सकते हैं। रंग महल फिदाई खान की बेगमो के मनोरंजन स्थल के रूप में बनाया गया था यहाँ से आप दूर दूर तक फैली खूबसूरत वादियां और प्रकृति के खुशनुमा नज़ारों का आनंद ले सकते हैं।

अगले टैरेस पर सुन्दर जल महल है, जिसमें एक वर्गाकार फव्वारा है। जल महल फिदाई खान की बेगमो  के स्नानगार के रूप में जाना जाता है। यहा आने वाले देशी विदेशी पर्यटक इस खुबसूरत महल की सुदंरता को निहारते रह जाते है।

जैसे-जैसे आप इस बगीचे में आगे बढ़ेंगे एक से बढ़कर एक मन मोहते फव्वारे और दुर्लभ किस्म के पेड़ पौधे बाहें फैलाएं आपका सहर्ष स्वागत करते दिखाई देंगे, बाग़ के सबसे निचले हिस्से में या यूँ कह लीजिये की सबसे निचली छत पर एक ओपन-एयर थिएटर है।

जहां संभवतः प्राचीन काल में कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दिया करते थे। यहाँ पर आपको बहुत सी फैमिलीज़  और कपल्स  क्वालिटी टाइम एन्जॉय करते हुए मिल जायेंगे। वनस्पतियों में विभिन्न प्रकार के सुगंधित फूलों के पौधे, आम के बाग, झाड़ियाँ और अन्य पेड़ हैं। रास्ते में चलने वाले पर्यटकों के लिए के लिए लम्बे वृक्ष छाया प्रदान करते हैं। यह गार्डन इतने नायब ढंग से बनाया गया है कि आप एक बार यहाँ आएंगे तो बस यहीं के होकर रह जायेंगे।

शिमला और कसौली जाने वाले सैलानी अक्सर कालका से पहले यहां की हरियाली देखकर ठहर जाते हैं। आमों की खुशबू को समेटे वास्तुशिल्प का यह अनूठा उदाहरण वास्तव में अभी भी मुगलकालीन इतिहास को संजोये हुए है।

पिंजौर गार्डन जाने का सबसे अच्छा समय

वैसे पिंजौर गार्डन की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय फरवरी से अप्रैल और अक्टूबर  से दिसंबर तक है क्योंकि इस दौरान मौसम सुखद रहता है। लेकिन आप हर साल जुलाई महीने में आयोजित होने वाले  मैंगो फेस्टिवल को भूलकर भी मिस नहीं करना चाहेंगे। इस त्यौहार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मैंगो प्रदर्शनी है जहाँ पूरे भारत में उगाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के आम मिलते हैं। इस फेस्टिवल के दौरान देश भर से पर्यटक आमों की अलग अलग वैराइटी  देखने उमड़ पड़ते हैं।

प्रवेश शुल्क

पिंजौर गार्डन की प्रवेश फीस एडल्ट्स के लिए 25  रु प्रति व्यक्ति है और 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है। यहाँ जाने से पहले एक बात अवश्य ध्यान रखिये यहाँ पर डीएसएलआर कैमरा ले जाना मना है अगर आप कैमरा ले जाना चाहते हैं तो उसके लिए आपको तक़रीबन 11 हज़ार रुपए पे करना पड़ेगा। आप अपना मोबाइल फोन अंदर ले जा सकते हैं।

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