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Ludhiana: महाराजा रंजीत सिंह के किले और डेरा बाबा मुराद शाह दरगाह के कारण वीरवार का दिन लुधियानवियों के लिए है बेहद खास

हर शहर की अपनी अलग खासियत होती है। यह खासियत खाने-पीने की चीजों से लेकर घूमने वाली जगहों से संबंधित भी हो सकती है। पंजाब का लुधियाना शहर जो देश भर में कपड़ा उद्योग और इंडस्ट्रियल कामकाज की वजह से जाना जाता है, इस शहर में आपको इनके अलावा भी बहुत कुछ देखने को मिलेगा। अगर आप लुधियाना के आसपास हैं या इस रुट से गुजर रहे हैं तो आप यहाँ की कुछ खूबसूरत जगहों का अच्छे से लुत्फ़ उठा सकते हैं। लुधियाना एक ऐतिहासिक शहर है, क्योंकि ऐतिहासिक स्मारक लोधी किला यही स्थित है। इस शहर को सन् 1480 में मुस्लिम शासक सिकंदर लोदी द्वारा सतलुज नदी के तट पर बसाया गया था, लोधी की वजह से शहर का नाम लुधियाना पड़ा। आज हम फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल के इस ब्लॉग में आपको लुधियाना की  प्रमुख जगहों से रूबरू करवाएंगे।

लुधियाना से 15 किलोमीटर के दायरे में आप एक साथ कई प्रमुख जगह घूम सकते हैं। सबसे पहले टाइगर सफारी, बुध विहार हार्डिस वर्ल्ड, शनि गांव, मैयाजी सरकार की दरगाह और महाराजा रणजीत सिंह किला, यह सब जगह आपको समराला चौक से फिल्लोर के रास्ते में मिल जाएंगी लेकिन ध्यान रहे इन सभी जगहों को घूमने के लिए आपको वीरवार का दिन ही चुनना होगा। तभी इन प्रमुख जगहों को घुमा जा सकता है।

महाराजा रंजीत सिंह किला

महाराजा रंजीत सिंह किले के अंदर प्रवेश करने के लिए किसी भी तरह की टिकट की आवश्यकता नहीं होती है। एंट्री बिल्कुल फ्री होती है। मुख्य द्वार पर पुलिस के जवान आपको टेंपरेचर चेक करने के बाद अंदर जाने देते हैं। किला अंदर से बहुत ही अद्भुत और विशालकाय दीवारों के साथ एक अलग ही नजारा पेश कर रहा था। किले के दरवाजे किसी फिल्मी किले से बिल्कुल भी कम नहीं थे। सच में  फिल्मों में दिखने वाले किलों से भी एक अलग नजारा वहां पर देखने को मिल रहा था आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि महाराजा जीत सिंह किला भी केवल वीरवार वाले दिन ही खुलता है, क्योंकि इसके अंदर भी दरगाह स्थित है।

जहाँ  श्रद्धालु वीरवार वाले दिन ही आते है। किले के अंदर बड़ा-सा दरवाजा पार करने के बाद दरगाह आती है। आसपास पुलिस का पहरा दिखाई देता है। किले के अंदर पुलिस प्रशिक्षण केंद्र भी है। फोटोग्राफी करने की यहां सुरक्षा कारणों की वजह से सख्त मनाही है।आप फोटोग्राफी नहीं कर सकते हैं हालांकि लोग छुप-छुपा के एक दो फोटो ले रहे थे। अंदर एक संग्रहालय भी है।

डेरा बाबा मुराद शाह, नकोदर

लुधियाना से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित नकोदर में  डेरा बाबा मुराद शाह जी की दरगाह स्थित है जहाँ श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ती है। अक्सर लुधियानवी वीरवार वाले दिन नकोदर घूमने जाते हैं। डेरा बाबा मुराद शाह जी की दरगाह का नजारा बहुत ही भव्य है।

बाबा मुराद शाह के बारे में कुछ रोचक बातें हैं जिसके कारण यह दरगाह दुनिया भर में प्रसिद्ध है। बताते हैं  ”बाबाजी बिजली बोर्ड दिल्ली में एसडीओ के पद पर तैनात थे, उनके साथ एक मुस्लिम महिला काम करती थी। बाबा मुराद शाह जी का नाम पहले विद्यासागर था, वह उस मुस्लिम महिला से बेइंतहा मोहब्बत करते थे। एक दिन उस मुस्लिम महिला की शादी किसी और से तय हो गई। बाबा जी ने उस मुस्लिम महिला को कहा कि वह शादी करना चाहते हैं। मगर मुस्लिम महिला ने यह कहकर शादी करने के लिए मना कर दिया कि वह मुस्लिम नहीं है,अगर शादी करनी है तो पहले मुसलमान बनना पड़ेगा। बस फिर क्या था मुस्लिम महिला की बात बाबा जी को इतनी चुभी कि उन्होंने नौकरी छोड़ दी और वापस अपने गांव नकोदर की ओर चल दिए। रास्ते में उन्होंने वारिस शाह की हीर पुस्तक खरीदी,उसके बाद बाबाजी की जिंदगी में नया मोड़ आ गया। हीर पुस्तक पढ़ते-पढ़ते बाबाजी नकोदर अपने घर के पास पहुंचे तो रास्ते में बाबा शेरेशाह जी ने उनको आवाज लगाते हुए कहा कि ओह विद्यासागर कहां जा रहे हो बाबा जी उनके पास गए, फिर शेरशाह जी कहते हैं “क्यों मुसलमान नहीं बनना है”। इतना सुनते ही बाबाजी सोच में पड़ गए। वह सोचने लगे कि आखिर उनको मेरा नाम और मेरी बातें कैसे पता चली। बाबा जी ने मन में सोचा कि यह जरूर कोई रूहानी इंसान हैं। इसके बाद बाबा जी ने कभी मुड़ कर पीछे नहीं देखा और घर वार छोड़कर शेरेशाह जी की शरण में आ गए। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि बाबा शेरे शाह पाकिस्तान से आए हुए थे और जब वह पाकिस्तान लौट कर जा रहे थे तो जाते वक्त शेरे शाह जी ने कहा की मेरे जाने के बाद “तुम मेरे गद्दी के मालिक होगे और दुनिया तुम्हें मुराद शाह के नाम से जानेगी”। 24 साल की उम्र में बाबा मुराद शाह जी ईश्वर की भक्ति में इतना लीन हो गए कि मात्र 28 साल की उम्र में वह फकीर बन गए। मौजूदा समय में यहां की गद्दी पंजाबी सूफी गायक गुरदास मान के पास है।”(बाबा मुराद शाह वेबसाइट में छपे एक लेख के मुताबिक)

यहां पर वीरवार वाले दिन हजारों की संख्या में लोग आते हैं। यहां की साज-सज्जा बहुत ही अद्भुत है। वीरवार वाले दिन दरगाह में भंडारा दिन भर चलता रहता है। दरगाह के साथ ही बहुत बड़ी झील भी है जो कि मन को खूब शीतलता प्रदान करती है।

इस दरगाह तक आप बस और ट्रेन किसी भी तरह आसानी से पहुंच सकते हैं। लेकिन ट्रैन की की तुलना में आप यहाँ बस से आसानी से पहुँच सकते हैं।

 

Report by Pravesh Chauahan
Edited by Pardeep Kumar