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Jantar Mantar-Jaipur- प्राचीन भारत की विश्व प्रसिद्ध खगोल विद्या का जीता जागता उदाहरण

by Pardeep Kumar

राजस्थान की राजधानी जयपुर में सवाई जय सिंह द्वारा बनवाया गया जंतर-मंतर यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल है। यहाँ पर मौजूद उपकरण और यंत्र बेहद पुराने होने के बावजूद भी आधुनिकता का प्रमाण देते हैं। इन बेहद पुराने उपकरणों से समय को मापा जाता है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें सिटी पैलेस, गोवर्धन मंदिर, हवा महल और भी कई सुन्दर और फेमस जगह जयपुर के जंतर-मंतर के आस-पास  ही कुछ क़दमों की दूरी पर स्थित है। गुलाबी शहर का लुत्फ़ उठाते हुए आप इन जगह का दीदार करके अपने सफर को हमेशा के लिए यादगार बना सकते है। जयपुर यात्रा के तमाम ब्लोग्स आप फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के ब्लॉग से पढ़ सकते हैं और अपनी यात्रा को बेहद आसान बना सकते हैं।

आपने कभी सूर्य तो कभी चंद्र ग्रहण के बारे में अवश्य सुना होगा, इन यंत्रो से भविष्य में आने वाले ऐसे ग्रहण के विषय में पता लगाया जाता है। वैसे भी जयपुर स्थित जंतर-मंतर  भारत के सबसे बेहतरीन वेधशालाओं में से एक है।

सवाई जयसिंह ने देश के अलग अलग स्थानों पर जंतर-मंतर जैसी वेधशालाओं का निर्माण करवाया। जयपुर के अलावा  उज्जैन, मथुरा, दिल्ली और वाराणसी में भी ऐसी ही वेधशाला का निर्माण करवाया था। इस कड़ी में पहली वेधशाला 1725 में दिल्ली में बनी। इसके 10 वर्ष बाद1734 में जयपुर में जंतर मंतर का निर्माण हुआ। इसके लगभग पंद्रह वर्ष बाद 1748 में मथुरा, उज्जैन और बनारस में भी ऐसी ही वेधशालाएं खड़ी की गईं

कहते हैं महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने जयपुर की वेधशाला का निर्माण करवाने से पहले विभिन्न देशों में अपने शांति दूत भेजे और वहां से खगोल शास्त्र पर उम्दा दर्जे की पांडुलिपियां मंगवाई, जिनसे उन्होंने खगोल विज्ञान को समझा।

जंतर मंतर की टिकट

जंतर-मंतर जयपुर में भारतीय एडल्ट्स  के लिए टिकट की कीमत 50 रुपए है और भारतीय स्टूडेंट के लिए 15 रुपए है। वही दूसरी तरफ विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट की कीमत ₹200 और फॉरेन स्टूडेंट के लिए 100 निर्धारित की गई है।

जंतर-मंतर जयपुर के खुलने का समय

जंतर-मंतर जयपुर के खुलने का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक है। यह हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है, और आप पूरे जंतर-मंतर को अच्छे से घंटे भर में देख सकते हैं।

कौन सा समय जंतर-मंतर जाने के लिए उपयुक्त रहेगा

किसी भी टूरिस्ट के लिए जंतर मंतर जाने का सबसे उपयुक्त समय दोपहर का है क्योंकि इस दौरान आप यहाँ मौजूद उपकरणों की कार्य प्रणाली को बेहतर समझ पाएंगे। सबसे बढ़िया है कि आप एक एक्सपर्ट गाइड की हेल्प लें।

जंतर मंतर में स्थित यहाँ के उपकरण आपको एक पल के लिए बांध देने की क्षमता रखते हैं और जैसे ही आप इनकी बनावट देखोगे, इनकी खूबियां देखते ही रह जाओगे। यहाँ पर बहुत सारे उपकरण हैं जो आपको अलग-अलग ज्यामितीय आकारों के दिखाई देंगे। यही वो उम्दा उपकरण हैं जो जयपुर के जंतर मंतर को दुनिया के बेहतरीन वेधशालाओं में से एक बनाते हैं।

सबसे पहले लेते हैं सम्राट यंत्र को

इसके विशाल आकार के कारण ही इसे सम्राट यंत्र नाम दिया गया। 90 फीट की ऊंचाई वाला यह यंत्र जंतर मंतर का सबसे बड़ा यंत्र है। इस यंत्र के ऊपरी हिस्से में एक छतरी बनी हुई दिखाई देती है। यह उपकरण ग्रह-नक्षत्रों में समय-समय पर होने वाली उथल-पुथल व समय का पता लगाने के बनाया गया है।

दिशा यंत्र

जंतर मंतर के ठीक बीचो-बीच आपको दिखाई देगा वर्ग के आकार की समतल भूमि पर लाल पत्थर से बना दिशा यंत्र, जिसके केंद्र से चारों दिशाओं की ओर समकोण बनाए गए हैं। जैसा कि नाम से जाहिर हो रहा है इस यंत्र द्वारा दिशाओं का पता लगाया जाता है। दिखने में भले ही यह साधारण सा ही लगे लेकिन इस यंत्र का भी अपना विशेष महत्त्व है।

जयप्रकाश यन्त्र

आपको जानकार हैरानी होगी कि खगोल विद्या में माहिर महाराजा जयसिंह ने ही जय प्रकाश यंत्रों का आविष्कार किया। अपनी बनावट में बेजोड़ यह यंत्र कटोरे के आकार के दिखाई देते हैं। जंतर मंतर में ये यंत्र सम्राट यंत्र और दिशा यंत्र के बिलकुल बीचो बीच बनाये गए हैं। इन यंत्रों से सूर्य की किसी राशि में अवस्थिति का पता चलता है। ये दोनो यंत्र एक दुसरे के पूरक हैं।

क्रांति वृत

क्रांति यंत्र का प्रयोग सौर मंडल में दिन के वक्त सूरज के चिन्हों को देखने के लिए किया जाता है। इस बेहद उम्दा प्रकार के और दिखने में भी खूबसूरत से यंत्र को देखे बिना आपकी जंतर मंतर की यात्रा अधूरी ही समझिये

ध्रुव दर्शक यंत्र

ध्रुवदर्शक यंत्र से ध्रुव तारे की स्थिति और दिशा ज्ञान के बारे में पता चलता है । उत्तर दक्षिण दिशा की ओर दीवारनुमा यह पट्टिका दक्षिण से उत्तर की ओर क्रमश: उठी हुई है।अगर आप इसके दक्षिणी सिरे पर आँख टिका कर देखेंगे तो उत्तरी सिरे पर ध्रुव तारे की स्थिति बिलकुल स्पष्ट होगी।

रामयंत्र

राम यंत्र में स्तंभों के वृत्त के बीच केंद्र तक डिग्रियों के फलक दर्शाए गए हैं। इन फलकों से भी महत्वपूर्ण और जरुरी खगोलीय गणनाएं की जाती थीं। जंतर मंतर की पश्चिमी दीवार के पास स्थित राम यंत्र में आपको दो यंत्र दिखाई देंगे। इन यंत्रों के दो लघु रूप भी जंतर मंतर में इन्हीं यंत्रों के पास स्थित हैं।

इसके अलावा आपको जयपुर के जंतर मंतर में अलग-अलग ज्यामितीय आकारों के  षष्ठांश यंत्र, नाड़ीवलय यंत्र, राशि वलय यंत्र और  चक्र यंत्र जैसे अन्य उम्दा और बेजोड़ यंत्र भी दिखाई देंगे। जंतर मंतर के ये उपकरण बेहद आकर्षक है और ये अपनी खूबी देखते ही बयान करते है

जब भी आप जयपुर के जंतर मंतर जाएँ एक बात का विशेष ख्याल रखें की जंतर मंतर जाने का सबसे उचित समय दोपहर का ही माना जाता है क्योंकि इस दौरान आप यहाँ मौजूद उपकरणों को न केवल बखूबी कार्य करते हुए देख पाऐंगे बल्कि  आप इनके कार्यों को उचित ढंग से समझ भी पाऐंगे।

Some Glimpse of Jantar Mantar, Jaipur