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By Pardeep Kumar
नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल दोस्तों आपका स्वागत है आज के नए ब्लॉग में, फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल की टीम पहुंची है एक ऐसी डेस्टिनेशन को एक्सप्लोर करने जो पिकनिक स्पॉट होने से पहले एक मशहूर धार्मिक स्थल भी है। जी हां, दोस्तों हम बात कर रहे हैं दिल्ली के नज़दीक उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर की। (Garh Mukteshwar)

गढ़मुक्तेश्वर हिन्दुओं के लिए प्राचीन तीर्थ स्थल है। इस स्थान को गढ़मुक्तेश्वर इसलिए कहा जाता है क्योंकि कहते हैं यहीं भगवान शिव के गणों को पिशाच योनि से मुक्ति मिली थी। ग्रह मुक्तेश्वर गंगा नदी के किनारे स्थित है। यह स्थान हिन्दुओं के लिए संास्कृतिक व धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण है। आपको बता दे गढ़मुक्तेश्वर आम तौर पर पितरों के पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है। यहीं गढ़मुक्तेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान पर्व उत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक मेला आयोजित किया जाता है।

दिल्ली मुरादाबाद नेशनल हाईवे 24 पर हापुड से लगभग 35 कि0मी0 की दूरी पर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गढमुक्तेश्वर से 05 किमी दूरी पर गंगा नदी के किनारे बृजघाट स्थल स्थित है। आपको बता दें पिछले कई सालों से गढ़ मुक्तेश्वर को एक नए तीर्थ स्थल के रूप में बहुत तेजी से डेवेलोप करने के प्रयास किये जा रहे हैं।
यह जगह दिल्ली से लगभग 119 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हम सुबह 8 बजे दिल्ली से गढ़मुक्तेश्वर की ओर रवाना हुए। अभी एक दिन पहले ही बारिश हुई थी इसलिए मौसम ज्यादा गर्म नहीं था। इसलिए दो ढाई घंटे के सफर में कोई थकावट महसूस नहीं हुई। लेकिन फिर भी हम हापुड़ से निकलकर एक जगह चाय के लिए रुके। जब भी आप दिल्ली से हापुड़-मेरठ की तरफ जाते हैं तो हाईवे पर आपको शिवा ढाबा नाम से कई सारे ढाबे दिखाई देते हैं हमने भी एक ऐसे ही ढाबे पर रुक गर्मा गरम अदरक वाली चाय और ग्रिल्ड सेंडविच का आनंद लिया। कुछ भी हो सफर में चाय मिल जाये तो यात्रा वसूल सी हो जाती है।(Garh Mukteshwar)

गढ़मुक्तेश्वर से थोड़ा पहले ही सड़क के दोनों और काफी संख्या में मूढ़े और सरकंडों से बने ऐसे ही अलग-अलग फर्नीचर आइटम दिखाई दिए। अगर आप परम्परागत चीजों के शौक़ीन हैं तो आपको यहाँ घर के लिए खूब सारे वैरायटी में मूढ़े मिल जायेंगे। कीमत पांच सौ से शुरू होकर तीन चार हज़ार तक। आप थोड़ी बार्गेनिंग करेंगे तो आसानी से सही दाम में भी खरीद सकते हैं।

वहीँ थोड़ा आगे चलने पर हमें आम के बाग दिखाई दिए। सैंकड़ों आम हमारे सामने पेड़ों पर लदे हुए थे, मन कर रहा था कि बस इन सुंदर रसीले आमो को तोड़ कर खा ले। सफर में जब अचानक इस तरह की चीजे मिल जाएँ तो समझ लीजिये आपका सफर मुकम्मल। हमने बाग में बहुत सारे फोटोज क्लिक करवाएं और वीडियो भी बनाई। इसके बाद हम अपने सफ़र पर वापस निकल पड़े।

लगभग 3 घंटे सफर के बाद हम गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे। उससे थोड़ी दूर पहले ही हमने अपनी कार पार्क की। यहा कार पार्किंग का चार्ज 60 रुपए था।
थोड़ा पैदल चलते ही हम पहुंचे अपनी डेएस्टिनेशन पर। जहा सबसे पहले हमें दिखाई दी अमृत परिसर धर्मशाला। आपको बता दें कि यह गढ़मुक्तेश्वर की एकमात्र धर्मशाला है और इसे धर्मशाला ना कहकर एक अच्छा होटल कहे तो भी बेहतर होगा।


क्योंकि यहां के संचालक से बात करने पर पता चला कि यहां नॉर्मल रूम्स के अलावा ए सी रूम भी शामिल हैं जिनका किराया ₹1400 है। हमने यहां के संचालक से बात की और बातचीत में उन्होंने हमें कर गढ़मुक्तेश्वर के इतिहास ,उसकी पुरानी स्थिति और वहां के सौंदर्यीकरण के बारे में बताया। इसी धर्मशाला के ठीक दाहिनी ओर स्थित है गढ़ मुक्तेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक अमृत परिसर मंदिर। अगर आप यहाँ आते हैं तो यह मंदिर अवश्य देखिये, तीन मंजिला इस मंदिर में आप धार्मिकता और पौराणिकता दोनों के दर्शन कर लेंगे। हमने वहां के पुजारी से भी बात की और उन्होंने हमें मंदिर के इतिहास के बारे में विस्तार से बताया।
प्रसाद लेने के बाद हम निकले ब्रिज घाट की ओर।

गढ़मुक्तेश्वर का सबसे प्रसिद्ध घाट है- ब्रजघाट। ब्रजघाट घाट हिन्दू धर्म में उतना ही पवित्र माना जाता है जितना कि हरिद्वार में हर की पौड़ी, वाराणसी के घाट, प्रयागराज के घाट, अयोध्या और ऋषिकेश के घाटआदि। इसलिए गढ़मुक्तेश्वर का नाम हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में आता है।

आपको बता दे की गढ़मुक्तेश्वर के सौंदर्यीकरण का कार्य काफी अच्छी तरह से चल रहा है गढ़मुक्तेश्वर को हरिद्वार जैसा रूप देने की कोशिश की जा रही है और इसी को देखते हुए यहां घाट पर एक घंटा घर भी बनाया गया है जो कि देखने में हूबहू हरिद्वार में बने घंटाघर के जैसा दिखाई देता है। गढ़मुक्तेश्वर अधिक प्रसिद्ध नहीं है उसके बावजूद भी यहां हमें काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। कोई पिंडदान करने, कोई गंगा माता का आशीर्वाद लेने तो कोई अपने पाप धुलने यहां बड़ी श्रद्धा के साथ पहुंचा हुआ था।
यहां नदी में बोटिंग करने की सुविधा भी है आप नाव में बैठकर नदी के बीच में बने टापू पर जा सकते हैं। और वहां चाय कॉफी या कोल्ड ड्रिंक पीते हुए नदी के मनोहर दृश्य का आनंद ले सकते हैं। वास्तव में गंगा नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक नाव में जाना हमारे लिए बिलकुल खास अनुभव था। शांत बहती गंगा नदी और आसमान में छाए हल्के नीले बादल आपको एकबारगी ऐसा फील करवाएंगे जैसे कि आप जन्नत में आ गए हो।

हमारी नाव ब्रिज के नीचे एक सेल्फी प्वाइंट पर रुकी और हमने वहां पर कई सारी फोटोस और वीडियो ली। वहीँ बहुत सारे बच्चे ब्रिज के ऊपर से नदी में छलांग मार रहे थे। छोटे-छोटे बच्चों का यह करतब वाकई में अद्भुत था।

गढ़मुक्तेश्वर का विवरण हिन्दुओं के पुराणों जैसे भागवत पुराण, शिवपुराण और महाभारत जैसे ग्रथों में मिलता है।
गढ़मुक्तेश्वर में अपने पितरों का पिंडदान और तर्पण किया जाता है। गढ़मुक्तेश्वर पितरों का पिंडदान करने के बाद गया श्राद्ध करने की आवश्कता नहीं होती है। बताया जाता है कि पांडवों ने महाभारत के युद्ध में मारे गये अपने पितरों का पिंडदान गढ़मुक्तेश्वर में ही किया था। यहां कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को पितरों की शांति के लिए दीपदान करने की परम्परा भी रही है सो पांडवों ने भी अपने पितरों की आत्मशांति के लिए मंदिर के समीप गंगा में दीपदान किया था तथा कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक यज्ञ किया था। तभी से यहां कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगना प्रारंभ हुआ।

नदी किनारे कई छोटे छोटे बच्चे रस्सी में चुम्बक लगाकर पानी से सिक्के निकाल रहे थे। इसे आप कुछ भी कह लीजिये मजबूरी या परिवार चलाने का जरिया।
गढ़ मुक्तेश्वर में गंगा किनारे बहुत से मंदिर स्थित है जिसमें देवी गंगा को समर्पित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, गंगा मंदिर, मीराबाई की रेती, गुदडी मेला, बृज घाट, झारखंडेश्वर महादेव, कल्याणेश्वर महादेव का मंदिर आदि दर्शनीय स्थल हैं। गढ़मुक्तेश्वर में केवल बृजघाट में ही गंगा स्नान किया जाता है। यहाँ के नवनिर्मित गंगा घाट, फव्वारा लेजर शो, घंटाघर, गंगा आरती, प्राचीन हनुमान मंदिर, वेदांत मंदिर, अमृत परिषर मंदिर आकर्षण के मुख्य केंद्र हैं।
बृजघाट एवं आसपास के क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा घाट पर बहुत बडा ऐतिहासिक मेला लगता है। इस स्थल पर गंगा किनारे सायंकालीन आरती का दृश्य अत्यन्त ही मनोहारी होता है। क्षेत्र में स्थित वेदान्त मंदिर, गंगा मंदिर, हनुमान मंदिर, गंगाघाट तथा फलाहरी माताजी की कुटी आदि अन्य दर्शनीय स्थल है।

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