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Fatehpur Sikri – ऐतिहासिक शहर फतेहपुर सीकरी में देखने के लिए बहुत कुछ है खास

by Pardeep Kumar

भारतीय सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। राजा, नवाबों और यहां के दूसरे शासकों ने यहां एक से एक बेहतरीन महल बनवाए, इमारतें बनवाई और आलीशान किले बनवाए और कुछ राजा ऐसे भी हुए जिन्होंने पूरे शहर बसाये। ये शहर और उनमें स्थित ऐतिहासिक इमारतें कई राजवंशों के उत्थान और पतन के जीते-जागते उदाहरण हैं। और उन्हीं उदाहरणों में से एक है फतेहपुर सीकरी। आज के इस ब्लॉग में हम आपको बता रहें हैं फतेहपुर सीकरी शहर के बारे में।

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यह शहर आगरा से लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आगरा तक आप अपने बजट के अनुसार किसी भी मार्ग का चुनाव कर सकते हैं। आगरा शहर बड़े-बड़े शहरों से हवाई मार्ग, रेलवे लाइंस और नेशनल हाईवे से जुड़ा हुआ है। आगरा से फतेहपुर सीकरी का सफर आप किसी स्थानीय बस, टैक्सी या कैब से भी कर सकते हैं।

जानिए फतेहपुर सीकरी का इतिहास

मुगल सम्राट अकबर ने 1569 में शहर की स्थापना की और 1571 से 1585 तक इसे अपनी राजधानी बनाया। शहर के निर्माण में लगभग 15 साल लगे जहां अदालतों, महलों, मस्जिदों और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया। पहले इसका नाम फतेहाबाद था जहां फतेह का मतलब जीत होता है। बाद में इसका नाम बदलकर फतेहपुर सीकरी कर दिया गया। यहां उनके दरबारियों से नौ रत्नों का चयन किया गया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें फतेहपुर और सीकरी दो अलग-अलग जगह हैं।

फतेहपुर में आपको बुलंद दरवाज़ा, शैख़ सलीम चिश्ती की दरगाह और जामा मस्जिद जैसी खूबसूरत जगह देखने को मिलेंगी।

वहीं सीकरी अकबर का किला था जिसमें अकबर लगभग पंद्रह वर्षों तक रहा। यही वह जगह है जहाँ अकबर ने दीन-ए-इलाही धर्म की बुनियाद रखी। लेकिन पानी की भारी किल्लत के कारण अकबर ने फतेहपुर सीकरी को छोड़कर आगरा को अपनी राजधानी बनाया। अकबर ने चित्तौड़ और रणथंभौर को जीतकर 1569 में शहर की स्थापना की थी। शहर का निर्माण लगभग 15 वर्षों में पूरा हुआ और इसमें महल, हरम, कोर्ट और अन्य संरचनाएं शामिल थीं। आप देखेंगे कि शहर में इमारतों का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया था। शाही महल के मंडप ज्यामितीय रूप से अरब वास्तुकला से बनाये गए  हैं।

पानी की कमी और मुगलों और राजपूतों के बीच लगातार युद्धों के कारण अकबर ने यह शहर छोड़ दिया। फतेहपुर सीकरी तीन तरफ से दीवार और चौथी तरफ से एक झील से घिरा हुआ है। इमारतों की वास्तुकला मुगल और भारतीय खासकर हिंदू और जैन वास्तुकला पर आधारित थी। यहां कई उम्दा और खूबसूरत संरचनाएं जैसे मस्जिद, महल, मकबरे आदि हैं, जिन्हें टूरिस्ट देख सकते हैं। उनमें से कुछ के नाम हैं – बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद, इबादत खाना, जमात खाना, सलीम चिश्ती का मकबरा, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जोधा बाई पैलेस, पंच महल, बीरबल का घर, अनूप तलाओ, हुजरा-ए-अनूप तलाओ, नौबत खाना, पचीसी कोर्ट।

जब भी आप यहाँ घूमने आएं, अगर आप कपल्स हैं तब एक बात का अवश्य ख्याल रखिये शहर में एंट्री करते ही यहाँ के कुछ लोग आपको गाइड के रूप में बार्गेनिंग करते मिल जायेंगे, जो आपको अलग-अलग तरीके से चादर या कुछ अन्य चीजें खरीदने के लिए ठगने का प्रयास करेंगे। इन सबसे बचने के एक ही तरीका है आप सिर्फ ऑथोराइजड गाइड से बात करें।

जोधा बाई पैलेस

आप जैसे ही किले में एंट्री करेंगे बाईं तरफ आपको सबसे पहले जोधा बाई का महल दिखाई देगा। जोधा बाई का यह महल  रानीवास और जेनानी द्योढ़ी के नाम से भी जाना जाता है। महल विशाल है और दो मंजिला है।  महल का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा में स्थित है और बहुत ही शानदार है।

वैसे तो यह महल अकबर का हरम था जिसमें अकबर अपनी शाही बेगमों के साथ रहता था लेकिन  महल के निर्माण में प्रयुक्त हिंदू रूपांकनों से पता चलता है कि महल एक हिंदू महिला के लिए बनाया गया था। इसलिए शायद इसे जोधा बाई का महल समझा गया।

इस शानदार इमारत निर्माण में  नीले  रंग के टाइलों का प्रयोग किया गया था, जो कि मुल्तान से लाये गये थे। फ़तेहपुर सीकरी में जितने भी भवन थे उन भवनों के आकार में यह महल सबसे बड़ा है। अकबर ने जोधाबाई को ही मरियम-उज्जमानी का नाम दिया था। जहांगीर जोधा बाई के बेटा था जोधा बाई का यह महल गर्मी और सर्दी दोनों मौसमों के अनुकूल बनाया गया था।

पंच महल

पंच महल का निर्माण अकबर ने करवाया था। महल महिलाओं के हरम के पास था और इसे इस तरह से बनाया गया है कि यह गर्मियों के दौरान आराम प्रदान करता है। पंच महल एक पांच मंजिला महलनुमा संरचना है जिसमें हर मंजिल धीरे-धीरे आकार में घटती जाती  है।

नीचे से ऊपर की ओर जाने पर प्रत्येक मंजिल दूसरी से छोटी होती है।  प्रत्येक स्तंभ में एक जाली थी जहां से महिलाएं शहर में होने वाली घटनाओं को आसानी से देख सकती थी। इसमें कुल 176 स्तंभ हैं।

बीरबल का महल

बीरबल न केवल अकबर के नौ रत्नों में से एक था और बल्कि उसके सब मंत्रियों में सबसे खास भी था।

इसलिए बादशाह अकबर ने बीरबल के लिए महल बनवाया। यह महल अकबर की बड़ी रानियों- रुकैया बेगम तथा सलमा बेगम का निवास स्थान के रूप में भी इस्तेमाल किया गया था। यह दो मंजिला महल मुगल और फारसी वास्तुकला के आधार पर बनाया गया था।

खास महल

देखने में बेहद सुन्दर यह खास महल मुगल बादशाह अकबर का महल था। भूतल में दो कमरे हैं और पहली मंजिल में ख्वाबगाह है। भूतल के एक कमरे का उपयोग भोजन कक्ष के रूप में और दूसरे का उपयोग पुस्तकालय के रूप में किया जाता था।

एक झरोखा है जहां से अकबर आम जनता से संपर्क करता था। ख्वाबगाह महिलाओं के हरम से जुड़ा था और जाली से ढका हुआ था। इसी ख्वाबगाह के सामने अनूप तालाब भी बना है। यहाँ की छते अन्य महलों के अपेक्षाकृत नीची हैं।

अनूप तलाब

अनूप तलाव ख्वाबगाह के सामने बना एक तालाब है। टैंक लाल बलुआ पत्थर से बना है। उभरी हुई सीट के साथ बीच में जालीदार कटघरा है। एक जल कार्य प्रणाली थी जिससे टैंक को ताजे पानी से भरने के लिए जोड़ा गया था। पानी के अतिप्रवाह को रोकने के लिए टैंक को सुख ताल से भी जोड़ा गया था। टैंक के पैनल में जंगलों और बगीचों के दृश्य हैं।

यह तालाब बेहद खूबसूरत है और इसके बीचों बीच एक प्लेटफॉर्म बना हुआ है। कहा जाता है की इस प्लेटफार्म का प्रयोग संगीत सम्राट तानसेन के गायन के लिए किया जाता था। अनूप तलाव के आस पास ही मुग़ल बेगमों के खूबसूरत महल भी दिखाई देते हैं जिनकी दीवारों और छतों पर संगमरमर, लाल बलुआ पत्थर और कांच की बारीक़ कारीगरी और अदभुत वास्तुकला देखने को मिल जाएगी। कहते हैं इन छोटे महलों से ही वो खास बेगम तानसेन के संगीत और अन्य शाही क्रियाकलापों का आनंद लेती थी।

दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास

दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास परिसर के दो खास हॉल हैं। दीवान-ए-आम का इस्तेमाल स्थानीय जनता को संबोधित करने, उनकी शिकायतों को सुनने और निर्णय लेने के लिए किया जाता था, जबकि दीवान-ए-खास को शाही लोगों, दरबारियों और मेहमानों के साथ बैठकें करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

दीवान-ए-खास किले की वह इमारत है जिसका इस्तेमाल बादशाह शाही मेहमानों के स्वागत और शाही सभाओं के लिए करते थे। यह वह स्थान है जहाँ अकबर विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों से उनके विश्वासों और धर्मों पर चर्चा करता था। दीवाने खास में एक स्तम्भ पर विभिन्न धर्मों के प्रतीक बेहद सुन्दर ढंग से उकेरे गए हैं जो अकबर की उदार नीति का परिचय देते हैं।

इसी इमारत के सामने बिलकुल पास सोने और चांदी का खज़ाना कक्ष भी था जिसे आंख मिचौली के नाम से जाना जाता था। इमारत चौकोर आकार में है और लाल बलुआ पत्थर से बनी है। दीवान-ए-खास के चार मुख हैं और ये सभी दो मंजिला हैं।

इमारत के प्रत्येक कोने में चार अष्टकोणीय खोखे हैं। प्रत्येक कियोस्क में एक गुंबद होता है जो एक उल्टे कमल के साथ सबसे ऊपर होता है।

पचीसी कोर्ट

पचीसी शतरंज की तरह ही एक शाही खेल था जिसे मुग़ल शाषकों द्वारा खेला जाता था। बताते हैं इस खेल को खेलने के लिए अकबर ने एक पचीसी दरबार बनवाया था। काले और सफेद चेक के साथ एक मैदान बनाया गया था और खेल खेलने के लिए मोहरों के बजाय इंसानों का इस्तेमाल किया जाता था।

फतेहपुर सीकरी घूमने की टाइमिंग

फतेहपुर सीकरी लोगों के लिए सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है और शहर को घूमने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। यह सार्वजनिक छुट्टियों पर भी सभी दिनों में खुला रहता है। आप दीवान-ए-आम बुकिंग काउंटर के पास एक संग्रहालय भी देख सकते हैं। संग्रहालय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।

टिकट

जैसे ही आप फतेहपुर सीकरी पहुंचेंगे, आपको दो जगह दिखाई देंगी एक फतेहपुर जिसमें  आपको बुलंद दरवाज़ा, शैख़ सलीम चिश्ती की दरगाह और जामा मस्जिद जैसी खूबसूरत जगह देखने को मिलेंगी। इन जगहों के लिए  प्रवेश बिल्कुल निःशुल्क है वहीं फतेहपुर से लगभग पांच सौ मीटर दूर सीकरी है जो अकबर का किला था जिसमें दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जोधा बाई पैलेस, पंच महल, बीरबल का घर, अनूप तलाओ, नौबत खाना, पचीसी कोर्ट, ख्वाबगाह और अन्य महल मौजूद हैं।  यहाँ किले के प्रवेश द्वार पर टिकट काउंटर है जहाँ से भारतीय पर्यटकों के लिए 35 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 550 का टिकट है।

घूमने का सबसे अच्छा समय

फतेहपुर सीकरी में फरवरी से अप्रैल के बीच और जुलाई से नवंबर के बीच जाया जा सकता है क्योंकि यहां का मौसम बहुत ही सुहावना होता है बाकी के महीनों में, मौसम या तो बहुत गर्म या बहुत ठंडा होता है जो कि परेशानी का कारण बन सकता है।

फतेहपुर सीकरी किले तक कैसे पहुंचे?

फतेहपुर सीकरी में हवाई अड्डा नहीं है। रेलवे स्टेशन है लेकिन यह भी देश के बड़े शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ नहीं है क्योंकि यहां बहुत कम ट्रेनों का ठहराव है।लेकिन फतेहपुर सीकरी सड़क मार्ग से आसपास के शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है फतेहपुर सीकरी से आगरा मात्र  36 किमी और दिल्ली लगभग 243 किलोमीटर की दूरी पर है।

फतेहपुर सीकरी की सड़कों का रखरखाव अच्छी तरह से किया जाता है। यह शहर आगरा, दिल्ली, नोएडा, भरतपुर से जुड़ा हुआ है और टूरिस्ट  वोल्वो, डीलक्स और नियमित उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसें पकड़ सकते हैं।

Written by Pardeep Kumar

 

 

Glimpse of Fatehpur Sikri Fort