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मेहरानगढ़ फोर्ट

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आप सभी जानते हैं भारत को मंदिरों का देश माना जाता है, लेकिन अगर भारत को ऐतिहासिक किलों का देश कहा जाये तो बिलकुल भी गलत नहीं होगा, क्योंकि देश का चाहे कोई भी हिस्सा हो उत्तर से लेकर दक्षिण तक आपको देश भर में 500 से भी ज्यादा किले देखने को मिल जाएंगे, जो देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। इनमें से कई किले सैकड़ों साल पुराने हैं, बहुत से किले तो ऐसे भी हैं, जो कब बने और इन्हें किसने बनाया, के बारे में कोई नहीं जानता। Mehrangarh Fort of Jodhpur आज हम आपको इस ब्लॉग में एक ऐसे ही किले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह किला भारत के सबसे पुराने और विशाल किलों में से एक है, जिससे भारत के समृद्धशाली अतीत की झलक मिलती है।(Mehrangarh Fort, Jodhpur) किले का ऐतिहासिक दृष्टिकोण इस किले को मेहरानगढ़ दुर्ग या मेहरानगढ़ फोर्ट के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के जोधपुर शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित यह किला करीब 125 मीटर की ऊंचाई पर बना है। अगर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो 15वीं शताब्दी में इस किले की नींव राव जोधा ने रखी थी, लेकिन इसके निर्माण का कार्य बाद में महाराज जसवंत सिंह ने पूरा किया। मेहरानगढ़ किले के बनने की कहानी कुछ इस तरह है कि राव जोधा जब जोधपुर के 15वें शासक बने, उसंके एक साल बाद ही उन्हें लगने लगा कि मंडोर का किला उनके लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने तत्कालीन किले से एक किलोमीटर दूर पहाड़ी पर एक किला बनवाने की सोची। उस पहाड़ी को ‘भोर चिड़ियाटूंक‘ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहां काफी संख्या में पक्षी रहते थे। आठ दरवाजों और अनगिनत बुर्जों से युक्त यह किला ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है। दूर से देखने पर ही आपको इस किले की विशालता का पता चल जायेगा। जोधपुर शहर के किसी भी हिस्से से आप इस किले को देख सकते हैं।  वैसे तो इस किले के सात ही द्वार(पोल) हैं, लेकिन कहते हैं कि इसका आठवां द्वार भी हैं जो रहस्यमयी है। और ऐसे रहस्यों के पीछे बहुत सी कहानियां जुड़ी होती हैं जिनको समझना आसान नहीं। किले के मुख्य द्वार  पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगवाई गई थीं। सुरक्षा के लिहाज़ से इस तरह की कारीगरी आपको कुछ दूसरे किलों में दिखाई देगी। चामुंडा माता का मंदिर किले में चामुंडा माता का मंदिर भी है, जिसे राव जोधा ने 1460 ईस्वी में बनवाया था। नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताते हैं जब राव जोधा ने अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर शिफ्ट किया था तब वह अपने साथ दुर्गा माता की मूर्ति को भी ले गए थे। इस मूर्ति को मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया गया था जिसे आज चामुंडा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहीं इसी जगह हर साल माता का प्रसिद्ध मेला भी लगता है जिसमे दूर दराज से हज़ारों श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं। किले की इमारतों की बनावट जब आप इस किले की इमारतों की बनावट देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे। महाराजा अजीत सिंह के शासन के समय इस किले की कई इमारतों का निर्माण मुगल डिजाइन में किया गया है। इस किले में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले सात विशाल दरवाज़ों के अलावा मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (फूल महल), दौलत खाना, शीश महल (दर्पण पैलेस) जैसे कई शानदार शैली में बने कमरें हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था। शीश महल, या हॉल ऑफ मिरर्स बेहद आकर्षक ढंग से बनाया गया है जो अपनी दर्पण के टुकड़ों पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। फेमस म्यूजियम मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है, जो भारत के मजबूत और गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है. मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राजस्थान  के बेहतरीन और फेमस म्यूजियम में से एक है., जिसमें राजा-महाराजाओं की पोशाकें और उनके हथियार रखे गए हैं. साथ ही, उनके रहन-सहन, दैनिक जीवन  और कल्चर से जुड़ी चीजें आज भी यहां मौजूद हैं जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी और आकर्षित जरूर करती है। मेहरानगढ़ किले के परकोटों से पूरे जोधपुर शहर का बेहतरीन नजारा आप देख सकते हैं. इस फोर्ट की दीवार 10 किलोमीटर तक फैली है और दीवार की ऊंचाई 20 फीट से 120 फीट तक है. वहीं, दीवार की चौड़ाई 12 फीट से 70 फीट तक है. ट्रेडिशनल बाजार  इस किले में पर्यटकों के लिए एक छोटा सा बाजार भी बनाया गया है जहाँ से आप राजस्थानी  पारम्परिक परिधानों और जूतियो के अलावा विभिन्न प्रकार के अन्य डेकोरेटिव आइटम्स की खरीदारी भी  कर सकते हैं। इसके अलावा इस किले के अंदर एक शाही रेस्टोरेंट भी मौजूद है, जहां पर आप अपने पार्टनर के साथ कैंडल लाइट डिनर का आनंद भी ले सकते हैं। इस किले की एंट्री टिकट पर व्यक्ति 200 रुपए है। क्योंकि यह किला आज भी जोधपुर के राज घराने के संरक्षण में है न की भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन, इसलिए यहाँ के रख रखाव के लिए टिकट की कीमत ज्यादा रखी गई है। लेकिन किला इतना शानदार है कि आपको लगेगा की टिकट के पैसे वसूल हो गए। कितना समय काफी रहेगा इस किले को देखने के लिएक्योंकि मेहरानगढ़ फोर्ट देश के सबसे पुराने और बड़े किलो में से एक है इसलिए इस पूरे किले को देखने के लिए आप तीन से चार घंटे मान कर चलिए। अगर आप ऐतिहासिक इमारतों और चीजों को पसंद करते हैं तब थोड़ा एक्स्ट्रा समय इसमें और जोड़ लीजिये। किले की बनावट, महल और विशेषकर यहाँ का म्यूजियम आपको जल्दी से यहाँ से रुख़्सत नहीं होने देगा। कैसे पहुंचें मेहरानगढ़ का किला मेहरानगढ़ किला पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर में स्थित है। वहीं, यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोधपुर जंक्शन है। । क्योंकि जोधपुर राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है इसलिए  यहां पर सड़क मार्ग से भी बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है। ———————————————— Some glimpses

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Rajgarh, Himachal Pradesh – The Most Complete Guide

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हिमाचल प्रदेश का राजगढ़ एक ऐसा टूरिस्ट प्लेस है जिसकी खूबसूरती यहां आने वाले टूरिस्ट्स को मंत्रमुग्‍ध कर देती है। नेचर लवर्स के लिए यह एक बेहतरीन जगह है। इस जगह का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां आकर आपको बिलकुल अलग ही अनुभव होगा।(Rajgarh, Himachal Pradesh) दिल्ली से दूरी (How to reach Rajgarh) हम सुबह करीब 5 बजे दिल्ली से रवाना हुए, और रास्ते का भरपूर आनंद लेते तकरीबन 4 बजे हम अपने डेस्टिनेशन राजगढ़ पहुंचे। सोलन से कंडाघाट होते हुए 45 किलोमीटर की दूरी तय करके आप यहाँ पंहुच सकते हैं। राजगढ़ दिल्ली से लगभग 340 किलोमीटर दूर है। गिरी नदी और सुनहरी शाम शाम के समय पहाड़ों में एक अलग-सा रंगीन मिजाज रहता है, ढलते सूरज की हल्की-हल्की रोशनी मन को मोह लेती है। रिजॉर्ट पहुंच कर हमने कुछ देर आराम किया और फिर निकल पड़े सामने बहती नदी की और, जहां और भी फैमिलीज और टूरिस्ट हमें दिखाई दिए। शाम के समय नदी किनारे बैठकर नेचर को निहारने का आनंद ही अदभुत है। शाम के समय पहाड़ों में एक अलग-सा रंगीन मिजाज रहता है, ढलते सूरज की हल्की-हल्की रोशनी मन को मोह लेती है। और पहाड़ों के ऐसे खूबसूरत नजारे देखने के बाद सफर की थकान छुमंतर हो जाती है। बस यही नजारें तो हम घुमक्कडों को पहाड़ों की और बार-बार खींच लाते हैं। जैसे-जैसे रात होने लगी तो हम अपने रिजॉर्ट  में वापस आ गए। हमें इंतज़ार था सुबह का, क्योंकि पहाड़ों में आकर भी सनराइज का आनंद नहीं लिया तो फिर यात्रा का कोई मज़ा नहीं। पहाड़ों के बीच से, बादलों से गुस्ताखी करते हुए सुबह-सुबह जब सूरज की किरणें आंखों में पड़ती हैं तो ऐसा लगता है, मानों आपका पूरा ट्रिप वसूल हो गया हो। सनराइज के दीदार के बाद हम निकले मॉर्निंग वॉक पर, पहाड़ों में सुबह का मौसम मानों देखते ही बनता है। चारों तरफ सिर्फ शांति, पक्षियों की और नदी के बहते पानी की आवाज आपके मन को पॉजिटिव एनर्जी से भर देती है, जिससे आपका पूरा दिन खुशनुमा बीतता है। आप जब भी पहाड़ों में आएं तो ये अनुभव जरुर लेंं। थान देवता मंदिर(Than Devta Temple) रास्ते में हमें एक मंदिर दिखाई दिया। यह मंदिर यहां के स्थानीय लोगों में बहुत फेमस है, यहां सब इस मंदिर को थान देवता मंदिर के नाम से जानते हैं। यहां के लोगों की मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में आकर पूजा करके थान यानी कपड़ा बांधकर मन्नत मांगता है तो उसकी मन्नत जरूर पूरी होती है। लोगों ने यहां बहुत सारे कपड़े बांधे हुए थे, जिससे इस मंदिर की शक्तियों का अंदाजा हो जाता है। आपको उत्तराखंड और हिमाचल के गांवों में ऐसे छोटे-छोटे सिद्ध मंदिर बहुत दिखाई देंगे। हमनें यहां के स्थानीय होटल व रिजॉर्ट से जुड़े हुए लोगो से रोजगार के मुददे पर बात की, कि किस तरह करोना के बाद यहां के रोजगार पर असर पड़ा। मॉर्निंग वॉक के बाद हम अपने रिज़ॉर्ट पहुंचे और ब्रेकफास्ट करने के बाद हमने अपने शेड्यूल के अनुसार राजगढ़ हिल्स की एक बेहद फेमस और खूबसूरत जगह बारू साहिब गुरूद्वारे की ओर अपना रूख किया। राजगढ़ से बारू साहिब गुरूद्वारे तक की दूरी लगभग 25 km है। राजगढ़ में एक लोकल मार्केट भी है, जहां आप अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकतें हैं। जब आप राजगढ़ सिटी से गुरुद्वारे की और जायेंगे तब आपको रास्ते में बेहद शानदार व्यूज देखने को मिलेंगे। खास बात यह कि यही देखने के लिए दूर-दूर से टूरिस्ट राजगढ़ हिल्स आते हैं। मानसून के मौसम में हरे भरे पहाड़ों के चारों और सफेद बादल उमड़ आते हैं, जिनको देखकर आपको लगेगा जैसे एक बार आप जन्नत में आ गए हों। हमनें रास्ते में रूककर नेचर को बहुत ही करीब से महसूस किया। यह नजारा कभी न भूले जाने वाले नजारों में से एक था। आप जब यहां आएं तो आप भी इन व्यूज का भरपूर आनंद ले सकते हैं। कुछ देर यहां रूकने के बाद हमारी गाड़ी नागिन जैसे बल खाते रास्तों पर बादलों को चीरते हुए आगे बढ़ी। बारू साहिब गुरुद्वारा(Baru sahib Gurudwara)  यहां पर लंगर हर समय चलता है और बहुत सारे बच्चे यहां सेवा भी करते हैं और पढ़ते भी है। यहां एक अकाल अकादमी भी है, जहां बच्चों को पढाई के साथ-साथ होस्टल सुविधा भी दी जाती है। यहां पर पहले हमनें दर्शन किये, फिर  कुछ देर बैठकर पाठ सुना, यक़ीनन मन को एकदम शांति का अहसास हुआ। आप जब भी राजगढ़ आए तो बारू साहिब गुरूद्वारे के दर्शन जरूर करें। यहां पर लंगर चख के हमनें वापस रिज़ॉर्ट की तरफ गाड़ी घूमा ली। रास्ते में हम एक पहाड़ी गांव में नेचर का आनंद लेने के लिए रुके तो हमें वहां एक महिला-मंडली स्वतंत्रता दिवस मनाती हुई दिखी, तो हमनें भी उनको ज्वाइन कर लिया और उनके साथ  मिल कर हमारा राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया। सभी ने देशभक्ति और पहाड़ी नाटी पर डांस किया, फ़ोटोज़  भी क्लिक करवाई। पहाड़ों और बादलों के बीच इस सेलिब्रेशन के यादगार क्षण अपनी यादों की किताब में इस तरह छप गए, जिनको कभी भूलाया नहीं जा सकता। हमनें वहां महिला-मंडल से बातचीत की और स्वतंत्रता दिवस को लेके उनके उत्साह के बारे में जाना। इसके बाद हमने यहां से रवानगी की और बढ़ चले अपने डेस्टिनेशन की और।

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Sahastradhara, Dehradun – All You Need to Know

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Pardeep Kumar पहाड़ों के इस नए सफर में आज हम आपको ले चलेंगे देहरादून की एक ऐसी खूबसूरत और टूरिस्ट्स की बेहद पसंदीदा जगह सहस्त्रधारा, जहां की बाइक राइड और नदी, खूबसूरत पहाड़ और हरे भरे घुमावदार रास्ते आपको बेशक ही लद्दाख से रूबरू करा देंगे। देव भूमि उत्तराखंड में अनेक पर्यटक स्थल हैं जो अपनी ख़ूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है उन्ही में से एक है देहरादून में स्थित सहस्त्रधारा। यहाँ देश भर से ही नही बल्कि विदेशो से भी पर्यटक यहाँ आते है और इसकी ख़ूबसूरती का लुत्फ़ उठाते हैं। यदि आप भी फैमिली ट्रिप की सोच रहे हैं तो आप इस जगह को जरूर एक्सप्लोर कर सकते हैं।(Sahastradhara, Dehradun) सहस्त्रधारा देहरादून का नेचुरल वाटरपार्क जब भी आप बाइक राइड पर सहस्त्रधारा तक जायेंगे तो यकीनन यहाँ आपको पूरी लद्दाख वाली वाइब्स महसूस होगी। घुमावदार रास्ते , सड़क किनारे बहती नदी, और नदी के ऊपर लगे सतरंगी झंडे, थोड़ी देर के लिए आप इस बेहतरीन नज़ारे को देखकर जन्नत सा फील करेंगे। क्लॉक टावर से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर सहस्त्रधारा एक लाजवाब पिकनिक स्पॉट है, जहां आप महादेव मंदिर के दर्शन से लेकर नदी और फॅमिली पिकनिक स्पॉट सभी तरह का लुत्फ़ उठा सकते हैं।(Sahastradhara, Dehradun) इस जगह की ख़ास बात यह है कि यहाँ आने वाला पानी प्राकृतिक रूप से बहता रहता है। और कहा जाता है कि यहाँ नहाने से स्किन रोग दूर हो जाते हैं। यहाँ चेंजिंग रूम और लॉकर की सुबिधा भी उपलबध है। यहाँ पहुँचने की सबसे खास बात कि जितना खूबसूरत सहत्रधारा है उतना ही बेहतरीन इसका सफर भी है शहर से 15 किलोमीटर दूर और 40 मिनट के सफर में इसकी खूबसूरती आपको लद्दाख से रूबरू करा देगी। How to reach –सहस्त्रधारा का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून है। फ्लाइट से उतरने के बाद आप कैब या टैक्सी की मदद से यहाँ तक आसानी से पहुँच सकते हैं। देहरादून ट्रैन और सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। शहस्त्रधारा पहुंचने के लिए आप अपनी पर्सनल गाड़ी या फिर आपको दर्शन लाल चौक से डायरेक्ट टैक्सी मिल जाएगी, इसके अलावा आप ऑटो बुक करके भी आ सकते है।शहस्त्रधारा के जिस पिकनिक स्पॉट पर हम पहुंचे उस जगह की खूबसूरती को बयान कर पाना बिलकुल भी आसान नहीं। यह जगह सच में किसी का भी दिल जीत लेने के काबिल है। यहाँ जैसे ही आप एंट्री करेंगे देवभूमि की झलक देता एक खूबसूरत सा मंदिर आपको दिखाई देगा। यहां दर्शन के साथ ही आप इसके अंदर गुफा में जरूर जाएँ। यह गुफा यहाँ आने वाले सैलानियों में अच्छी खासी फेमस है। सहस्त्रधारा को पूरे देहरादून के सबसे बेहतरीन और लाजवाब पिकनिक स्पॉट्स में से एक माना जाता है, और हो भी क्यों न मन को शांति देता मंदिर और मंदिर से निकलते ही एडवेंचर के लिए खूबसूरत नदी और नदी के सामने खाने पीने के लिए खूबसूरत सा कैफ़े। सब कुछ है यहाँ। Cafe & Snacks क्वालिटी टाइम स्पेंड करने का इससे अच्छा स्पॉट और क्या ही होगा। नदी के किनारे बने इस कैफ़े में आप स्नैक्स से लेकर पहाड़ों के बीच चाय या कॉफी का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं, और इसके के साथ एक छोटी से मार्केट भी आपको यहां देखने को मिलेगी। इस स्पॉट के ठीक थोड़ा आगे चलकर आप गर्मियों में वाटर पार्क का आनद भी ले सकते हैं। Sahastradhara, Dehradun Best Time to Visit बारिश के मौसम में सहस्त्रधारा की शानदार सुंदरता का सबसे अच्छा अनुभव किया जा सकता है। हालांकि यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का होगा।  Some Pics of Sahastradhara……

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Buddha Temple in Dehradun-Mindrolling Monastery

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Pardeep Kumar–Five Colors of Travel हेलो फ्रेंड्स, फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रवेल के इस नए ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। आज इस ब्लॉग में हम आपको लेकर आये हैं देहरादून के बुद्धा टेम्पल में…..वैसे तो देहरादून में घूमने लायक बहुत अच्छे स्थान हैं। मगर यदि आप देहरादून में कुछ अलग ढूढ़ रहे हैं, तो आपके लिए देहरादून का प्रसिद्ध बुद्ध मंदिर सबसे अच्छा विकल्प रहेगा। इसे सामान्य प्रचलित भाषा मे देहरादून का बुद्धा टेम्पल कहते हैं। यहाँ आकर आपको आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा साथ ही, बौद्ध कला और स्थापत्य कला का यह मंदिर बेजोड़ नमूना है। (Buddha Temple in Dehradun) देहरादून के क्लेमेनटाउन में स्थित बुद्धा टेंपल देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अच्छा खासा लोकप्रिय है। इसको मिंड्रोलिंग मोनेस्ट्री के नाम से भी जाना जाता है। पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल है , एक बार मंदिर में प्रवेश करने के बाद आप अपने संपूर्ण शरीर में शांति और आराम महसूस कर सकते है. एशिया की सबसे बडी Buddhist समाधि बौद्ध मंदिर का निर्माण 1965 में प्रसिद्ध “कोहेन रिनपोछे” और बौद्ध धर्म के धर्म की रक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए कई अन्य भिक्षुओं द्वारा किया गया था । यह मंदिर जापानी वास्तुकला शैली में बनाया गया है । बुद्धा मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि यह एशिया की सबसे बडी Buddhist समाधि है , हर साल हज़ारो की गिनती में देश – विदेश के टूरिस्ट यंहा दर्शन करने आते है | जिसमें लार्ड बुद्धा और गुरु पद्मसम्भावा (Guru Padmasambhava) की विशालकाय प्रतिमा है । मंदिर में स्थित बुद्धा जी की 103 feet की प्रतिमा बहुत ही सुन्दर और आकर्षण का केंद्र है । पहले तीन फ्लोर में लार्ड बुद्धा की सरूप पेंटिंग्स है , जिसमें बुद्धा जी के जीवन के बारे में दिखाया गया है । कैसे पहुंचे बुद्धा टेम्पलक्‍लेमेनटाउन स्‍थि‍त बुद्धा टेंपल देहरादून आइएसबीटी से सहारनपुर मार्ग पर सात किलोमीटर की दूरी पर स्‍थ‍ित है। यहां के लिए हर पांच मिनट बाद विक्रम चलते हैं। आप चाहें तो आइएसबीटी चौक से आटो भी बुक कर यहां तक पहुंच सकते हैं। बड़े क्षेत्र में तीन मंज‍िला बुद्धा टैंपल के दर्शन को सुबह से लोग पहुंचते रहते हैं, लेक‍िन शाम को यहां भीड़ अधिक बढ़ जाती है। हरे भरे मैदान और जंगल से सटे इस मंद‍िर पर‍िसर में व‍िभ‍िन्‍न जगहों पर कुर्सियां लगी हैं जहां आप बैठकर आनंद भी उठा सकते हैं। लोग यहां आकर सेल्‍फी के साथ इस पल को यादगार बनाते हैं। इसके अलावा मंद‍िर से बाहर न‍िकलते ही सड़क किनारे कई खाने पीने की दुकान भी हैं। जहां से आप अपनी पसंद के व्‍यंजन का लुत्फ़ उठा सकते हैं। आध्यात्मिक शांति वाला स्थलबुद्ध मंदिर देहरादून एक मधुर और आध्यात्मिक शांति वाला स्थल है। यहाँ आकर मन को सुकून मिलता है।यह मंदिर अपनी अदभुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की स्थापत्य कला जापानी कला से प्रेरित है। यहां आप इस प्रसिद्ध स्थापत्य कला और चित्रकला का आनन्द ले सकते हैं। रोलिंग मठयह बौद्ध मठ रोलिंग मठ के नाम से प्रसिद्ध है, यहाँ बड़े बड़े रोलर लगे हैं, जिनको घुमा कर आप भगवान बुद्ध से जीवन मे सुख और शांति की कामना कर सकते हैं।बुद्धा टेम्पल देहरादून में आप प्रसिद्ध तिब्बती भोजन विशेष मोमोज, चाउमीन और थोप्पा और अन्य पकवानों का आनन्द ले सकते हैं।बुद्ध मंदिर देहरादून से आप तिब्बती समान, कपड़े, सजावट की चीजे खरीद सकते हैं।

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The Most Haunted Places in India

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ऐसी जगह जो अपने खौफनाक किस्सों के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं और जिनका इतिहास आपको हैरान कर देगा(The Most Haunted Places in India) Research By Sakshi Joshi/ Edited by Pardeep Kumar भानगढ़ का किला,  Indian Ghost Town of Bhangarh और इस लिस्ट में सबसे पहले नंबर पर है राजस्थान का भानगढ़ फोर्ट।अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा भानगढ़ का किला अपने आप में बहुत लम्बा इतिहास समेटे हुए है। भानगढ़ का किला जयपुर और अलवर शहर के बीच सरिस्का से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस भव्य किले का निर्माण 17 वीं शताब्दी में राजा माधो सिंह, महान मुगल सेनापति, आमेर के मान सिंह के छोटे भाई द्वारा करवाया गया था। शाही महल के अलावा, भानगढ़ में 1720 तक 9,000 से अधिक घर थे जिसके बाद धीरे-धीरे ये आबादी में कम हो गई। पूरी बस्ती के साथ भानगढ़ किला लगातार तीन किलेबंदी और पांच विशाल दरवाजों से सुरक्षित था। इस किले के परिसर के भीतर भव्य हवेलियों, मंदिरों और सुनसान बाजारों के अवशेष हैं, जो किले की विराटता और समृद्धता का संकेत देते हैं। यह जगह भूत प्रेत की वजह से ज्यादा जानी जाती है, भानगढ़ किला फिर भी अपने शांत वातावरण, सुंदर अरावली पर्वत के कारण पर्यटकों की भीड़ को आकर्षित करता है। ऐसी ही यहाँ के लोगों में बेहद प्रचलित एक दूसरी कहानी राजकुमारी रत्नावती से जुड़ी है, जो बहुत सुंदर थी और देश के शाही परिवारों के कई प्रेमी काले जादू में माहिर थे। एक जादूगर को राजकुमारी से प्यार हो गया। जैसे ही राजकुमारी एक दिन अपने दोस्तों के साथ खरीदारी करने गई, जादूगर ने उसे इत्र या कहें कि परफ्यूम खरीदते हुए देखा और इत्र को एक प्रेम दवाई से बदल दिया। हालाँकि, राजकुमारी को जादूगर की चाल का पता चला और उसने दवाई को पास के एक विशाल पत्थर पर फेंक दिया। इसके कारण वह विशाल पत्थर जादूगर की ओर लुढ़क गया और उसकी कुचलकर मौत हो गई। लेकिन मौत के मुंह में जाने से पहले, उसने शहर को यह कहते हुए शाप दिया कि इसे जल्द ही नष्ट कर दिया जाएगा और कोई भी इसके परिसर में नहीं रह पाएगा। बाद में आक्रमणकारी मुगल सेनाओं द्वारा राज्य को बर्खास्त कर दिया गया, जिससे किले के सभी निवासियों को राजकुमारी रत्नावती के साथ मार दिया गया। जैसा कि इसे एक भूतिया स्थान माना जाता है, भानगढ़ का किला सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद पर्यटकों के लिए बंद रहता है। भानगढ़ किले की ये कहानियां इसलिए भी और अधिक खौफनाक लगती हैं क्योंकि ASI यानी Archaeological Survey of India ने भानगढ़ के किले को भारत की सबसे डरावनी जगहों में सबसे ऊपर रखा है। बाकायदा यहाँ इस विषय में सूचना पट लगाया गया है जिसमें ये साफ़ दर्ज़ है कि सूर्योस्त के बाद यहाँ किसी भी व्यक्ति का आना वर्जित है। अग्रसेन की बावली Agrasen ki Baoli,New Delhi दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में स्थित यह खूबसूरत अग्रसेन की बावली कब और किसके द्वारा बनाई गई इसका कोई स्पष्ट ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि कई इतिहासकारों का कहना है कि इसका निर्माण किसी और ने नहीं बल्कि अग्रोहा के महान राजा अग्रसेन द्वारा किया गया था। और फिर 14 वी शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण तुगलक वंश या लोधी वंश के दिल्ली पर शासन के दौरान किया गया। ऐसा कहा जाता है कि यहां पर कुएं के अंदर जानलेवा काला पानी है। यह आत्मघाती काला पानी लोगों को अपने वाश में कर लेता है। और इसके पास जाने पर यह लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर तक कर देता है। जैसे ही लोग सीढ़ियों से पानी की ओर जाते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें अपनी ओर खींच रही है। ऐसी कितनी ही कहानियां इस बावड़ी के बारे में अच्छी खासी प्रसिद्ध हैं। और कहते हैं ना कि इन्ही कहानियों से भूतिया किरदार गढ़े जाते हैं और ऐसी पुराणी सुनसान जगह डरावनी बन जाती हैं। लेकिन अग्रसेन की बावली को अक्सर दिल्ली की सबसे खूबसूरत जगहों में गिना जाता है। यह जगह फिल्म शूटिंग के लिए बॉलीवूड द्वारा बहुत पसंद की गई है। अग्रसेन की बावली को कई फिल्मों में दिखाया गया है और यह दिल्ली में प्रसिद्ध फिल्म शूटिंग स्थानों में से एक है। पुणे का शनिवारवाड़ा, Shaniwar Wada, Pune भले ही देश में बहुत से लोग शनिवार वाड़ा (महल) के बारे में न जानते हो। पर घुम्मकड़ और खासकर मराठी लोग इसके बारे में बखूबी जानती हैं। शनिवार वाड़ा महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है, जिसका निर्माण मराठा-पेशवा साम्राज्य को बुलंदियों पर ले जाने वाले बाजीराव पेशवा ने करवाया था। यह महल 1732 में यह पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था। कहा जाता है कि उस समय इसे बनाने में करीब 16 हजार रुपये खर्च हुए थे। तब के समय में यह राशि बहुत अधिक थी। उस समय इस महल में करीब 1000 लोग रहते थे। यह एक एतिहासिक महल है, जो कभी मराठा साम्राज्य की आन-बान और शान हुआ करता था, लेकिन आज से करीब 246 साल पहले इस महल में एक ऐसी घटना घटी थी, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। जिसकी वजह से ही लोग इस महल को रहस्यमय मानते हैं। कहते हैं कि इसी महल में 30 अगस्त 1773 की रात 18 साल के नारायण राव की हत्या कर दी गई थी, जो मराठा साम्राज्य के नौवें पेशवा बने थे। कहा जाता है कि उनके चाचा ने ही उनकी हत्या करवाई थी। आस-पास के लोगों का कहना है कि आज भी अमावस्या की रात महल से किसी की दर्द भरी आवाज सुनाई देती है, जो बचाओ-बचाओ चिल्लाती है। और यही कहानी इस जगह को डरावना बनाने के काफी है। आज भी लोग शाम के समय इस महल के आस पास से गुजरना भी नहीं चाहते। जैसलमेर का कुलधरा गांव, The Ghost Village बहुत सी जगह हैं जो अपने रहस्यमयी कारणों के चलते चर्चाओं में बनी रहती हैं। ऐसी ही जगहों में से एक है जैसलमेर का कुलधरा गांव। कहा जाता पिछले सैंकड़ों सालों से यह जगह शापित है। पर सवाल ये है कि ऐसा क्या हुआ था इधर कि सिर्फ एक रात में यहां लगभग 600 घरों

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Damdama Lake Gurugram

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हेलो फ्रेंड्स फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रवेल के इस नए ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। दिल्ली की भागदौड़ और रुटीन वर्किंग लाइफ से अगर आप बोर हो चुके हैं तो ये वीकेंड आपका यादगार हो सकता है क्योंकि आज हम आपको रूबरू कराएंगे दिल्ली NCR में स्थित एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट दमदमा लेक से(Damdama Lake Gurugram) कैसे पहुंचें-दोस्तों दिल्ली से लगभग 60 किमी और सोहना से लगभग 8 किमी दूर अरावली पहाड़ियों के बीचों बीच स्थित, यह जगह काफी शानदार है। दमदमा लेक तक जाने के लिए आपको दो घंटे का समय लग जाता है। जहां आप अपनी फॅमिली, फ्रेंड्स और कलीग्स के साथ खुशनुमा और क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। न सिर्फ क्वालिटी टाइम बल्कि कई एडवेंचरस एक्टिविटीज भी आप यहां कर सकते हैं।दमदमा लेक जितनी खूबसूरत है उतना ही खूबसूरत यहां तक पहुँचने का सफर। (Damdama Lake Gurugram) किसी तरह का एंट्री चार्जेज नहीं रास्ते में आपको सड़क के दोनों तरफ खेतों में लगी सरसों की खेती ये एहसास करा देगी कि असल में गांव क्या होता है। दमदमा लेक में किसी तरह का एंट्री चार्जेज नहीं है। और अगर आप अपनी गाड़ी से यहां आते हैं तो आपको पार्किंग चार्जेज के मात्र 40 रुपए पे करने पड़ेंगे।अंदर एंट्री करते ही, दायीं तरफ से लेक दिखाई देने लगती है। और इस लेक की खूबसूरती से आप आकर्षित हुए बिना रह ही नहीं पाएंगे। दूर दिखती अरावली की पहाड़ियां इस लेक की खूबसूरती को बेइंतहां बढ़ा देती हैं। एडवेंचर एक्टिविटीज यहां आप न सिर्फ लेक का आनंद ले सकते हैं बल्कि कई तरह की एडवेंचरस एक्टिविटीज भी कर सकते हैं। बोटिंग, ज़िप लाइन, गन शूटिंग, बॉल थ्रो और भी कई तरह की एक्टिविटीज का लुत्फ़ आप उठा सकते हैं। दमदमा लेक में एडवेंचर एक्टिविटीज जैसे गुब्बारे, कयाकिंग, साइकिलिंग, पैरा-सेलिंग, रॉक क्लाइम्बिंग भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां ऊंट सवारी का आनंद भी ले सकते हैं। आपको बता दें कि इस लेक में देश विदेश से अलग-अलग प्रजातियों पक्षी आते रहते हैं जोकि आपको विंटर सीजन में काफी मात्रा में दिखाई देंगे। सारस टूरिज्म काम्प्लेक्स रिसोर्ट इसके अंदर आपको सारस टूरिज्म काम्प्लेक्स रिसोर्ट भी मिल जायेगा जोकि हरियाणा टूरिज्म के अंतर्गत आता है। यह एक सरकारी रिसोर्ट है।रिसोर्ट में ऐंटर करते ही सामने आपको रिसेप्शन दिखाई देगा और उसके बगल में ही रेस्टोरेंट+ बार भी दिखाई देगा, जहां आप पार्टी और खाने पीने का आनंद ले सकते हैं।इसके अलावा अगर आप इस रिसोर्ट में स्टे करना चाहते हैं तो वो भी कर सकते हैं। यहां रूम्स भी काफी सुन्दर है, जिनका प्राइस है लगभग 2500 रुपए। आप दमदमा लेक की ऑफिसियल साइट में जाकर भी पहले से रूम बुक कर सकते हैं। दमदमा लेक जो कि एक काफी शानदार पिकनिक स्पॉट है जहां आप काफी अच्छा क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। पिकनिक, डे ट्रिप, फैमिली टूर आदि के लिए इस जगह को दिल्ली के आसपास के इलाकों में बेस्ट माना जा सकता है। तो आज के सफर में बस इतना ही। फिर मिलते हैं किसी नई जगह में किसी नई डेस्टिनेशन के साथ।

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Char Dham Yatra 2023 – Kedarnath, Badrinath, Yamunotri and Gangotri 

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The sacred Char Dham Yatra in Uttarakhand is one of the most popular Hindu pilgrimages in India.  उत्तराखंड की वादियों में विद्यमानमैं गंगा की धार हूंहिंदुत्व का सार हूंऔर बद्री का द्वार हूंमैं छोटी चार धाम हूं। हिन्दुओं का मान हूंउत्तराखंड की शान हूंमैं केदारनाथ में बस्ता पंच केदार हूंऔर लाखों की आस्था का प्रतीक हूंमैं चार धाम हूं भगवन शिव को हूँ समर्पितकेदारनाथ का धाम हूंविष्णु का हूं पवित्र स्थलहां, मैं ही बद्रीनाथ हूं छः महीने बाद खुलते कपाटश्रद्धालुओं का करता सत्कार हूंमैं चार धाम हूंमैं चार धाम हूं। हिंदू धर्म के पवित्र स्थलचार धाम यात्रा भारत की सबसे बड़ी और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है। (Char dham Yatra)जिसमें उत्तराखंड के गढ़वाल रीजन में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री की यात्रा शामिल है। लेकिन इस यात्रा को छोटी चार धाम यात्रा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि चार धाम की एक और यात्रा होती है। जिसमें उत्तराखंड का बद्रीनाथ, गुजरात में द्वारका, उड़ीसा में जगरनाथ पुरी, और तमिलनाडु का रामेश्वरम जैसे पवन स्थल शामिल हैं। हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य माना गया है। और ये माना जाता है कि चार धाम की यात्रा इस लक्ष्य तक पहुंचने की एक मंजिल है। Char Dham Yatra- Kedarnath, Badrinath, Gangotri, Yamunotri. हिमालय की गोद में बसा चार धामपहाड़ो की ऊंचाइयों और श्रद्धालुओं की सेफ्टी का पूरा-पूरा ध्यान रखते हुए यह मंदिर गर्मियों यानि अप्रैल या मई में खुलते हैं, और वहीं सर्दियों की सुरुवात यानि अक्टूबर और नवंबर में बंद हो जाते हैं। माना जाता है कि चार धाम यात्रा दक्षिणावर्त दिशा में पूरी करनी चाहिए और यही कारण है कि, इस चार धाम यात्रा की शुरुआत यमनोत्री से शुरू होती है और बद्रीनाथ में जाकर खतम होती है। श्रद्धालु कोई दो तीर्थ यात्रा जैसे सिर्फ बद्रीनाथ और केदारनाथ के दर्शन भी कर सकते हैं। Time to Visit Chardham Yatra चार धाम यात्रा यूं तो सिर्फ छः महीने खुलती है। गर्मियों में अप्रैल से मई तक इसके कपाट खोले जाते हैं। यमनोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमनोत्री धाम के कपाट 3 मई से 24 अक्टूबर 2023 तक खोले जायेंगे।दर्शन का समय सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक है। गंगोत्री मंदिर देवी गंगा को समर्पित यह मंदिर समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, गंगोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यहाँ से हरिद्वार 285 किमी और देहरादून 240 किमी है। गंगोत्री के कपाट खुलने का समय 3 मई से 25 अक्टूबर तक है।यहां मंदिर में पूजा सुबह चार बजे साथ शुरू होती है और शाम को सात बजे आरती के साथ समाप्त होती है |मंदिर सुबह 6 बजे तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित और हिमालय की गोद में स्थित यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र ताल से 3553 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। इस प्राचीन मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भी माना जाता है। केदारनाथ धाम 7 मई से 24 अक्टूबर 2023 तक खुलेगा |यहाँ सुबह 4 बजे महाभिषेक आरती होती है, और शाम 7 बजे आरती के बाद दर्शन बंद कर दिए जाते हैं।मंदिर सुबह 6 बजे तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खुलता हैं | बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से 3300 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। बद्रीनाथ के कपाट 8 मई से 20 नवंबर 2023 तक खोले जायेंगे |यहाँ अभिषेक पूजा सुबह 4 :30 बजे और सयन पूजा रात्रि 9 बजे होती हैं|मंदिर आम जनता के लिए सुबह 7 बजे खुलता हैं | कैसे करें चार धाम यात्रा का रजिस्ट्रेशनउत्तराखंड पर्यटन विभाग ने इस बार रजिस्ट्रेशन में श्रद्धालुओं के लिए कई विकल्प रखे हैं। आप पर्यटन विभाग की ऑफिसियल वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in के जरिये रजिस्ट्रशन करा सकते हैं। इसके अलावा वाट्सएप नंबर 8394833833, टोल फ्री नंबर 1364 और मोबाइल ऐप touristcare uttrakhand app के जरिए भी अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आसानी से करवा सकते हैं। आपको बता दें कि रजिस्ट्रेशन और पैकेज बुकिंग के बाद आप 21 दिन पर अपनी यात्रा कैंसल करते हैं। जिसमें आपके बुकिंग अमाउंट में से 30 प्रतिशत पैसे कट जाते हैं। इसके साथ ही 8 दिन पहले कैंसल करने पर 80 प्रतिशत राशि काटी जाती है, और यात्रा वाले दिन कैंसिल कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। यात्रा के दौरान कहाँ ठहरे ? (Where to stay During Chardham Yatra)चार धाम यात्रा के दौरान रुकने के लिए काफी होटल, गेस्ट हाउस, रिसॉर्ट्स, आश्रम, और धर्मशाला आदि आपको आसानी से मिल जाएंगे। लक्ज़री होटल्स से लेकर अफोर्डेबल रेंज के होटल्स भी आपको मिल जाएंगे। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार गेस्ट हाउस या होटल्स चुन सकते हैं। कैसे पहुंचे : (How to reach Char Dham)चारधाम यात्रा देहरादून या हरिद्वार से शुरू होती है। यात्रा शुरू करने के दो तरीके हैं – सड़क और हेलीकाप्टर। आप दोनों में से किसी भी साधन का उपयोग कर तीर्थ स्थलों तक जा सकते हैं।सड़क मार्गआप चार धाम यात्रा हरिद्वार, दिल्ली, ऋषिकेश,और देहरादून से शुरू कर सकते हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन इन पवित्र स्थानों से सबसे निकटम रेलवे स्टेशन है। जहां से आप सबसे पहले हरिद्वार में गंगा आरती कर इन पवित्र स्थलों तक पहुँच सकते हैं। हरिद्वार सड़क और रेल लाइन्स के ज़रिये दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड परिवहन और निजी बसें इन पवित्र तीर्थ स्थलों के लिए उपलब्ध हैं । आपको हिरद्वार, ऋषिकेश, और देहरादून से टैक्सी भी आसानी से मिल जाएगी। हेलीकॉप्टर द्वारादेहरादून सहस्त्रधारा हेलीपैड से चार धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध है। हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून से खरसाली तक है, जो यमुनोत्री मंदिर से लगभग 6 किमी दूर है। गंगोत्री मंदिर के लिए निकटतम हेलिपैड हरसिल हेलीपैड है, जो मंदिर से 25 किमी दूर स्थित है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के हेलिपैड मंदिर के पास ही स्थित हैं। Research by Sakshi Joshi/ Edited by Pardeep Kumar

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REASONS WHY YOU NEED TRAVEL INSURANCE

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अगर आप भी कर रहे हैं विदेश ट्रिप प्लान, तो ट्रेवल इंश्योरेंस का कवरेज है बेहद जरुरी। आजकल घूमने के शौकीन तो लगभग सभी लोग हैं, और फिर विदेश घूमने की बात करें तो विदेश घूमने का सपना तो हर किसी का होता है। कुछ काम के सिलसिले में विदेश निकल पड़ते हैं, तो कुछ मौज-मस्ती के लिए विदेश यात्रा पसंद करते हैं। पर अक्सर विदेश घूमने की तैयारियों में लोग एक सबसे अहम बात भूल जाते हैं, जो है “ट्रेवल इंश्योरेंस”। विदेश यात्रा करने वालों के लिए ट्रेवल इंश्योरेंस लेना बहुत जरुरी है तो क्या आप जानते हैं ट्रेवल इंश्योरेंस क्या होता है? और इसका काम क्या हैं? आज के इस ब्लॉग में फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल आपके लिए लेकर आया है ट्रेवल इंश्योरेंस से जुडी हर एक जानकारी । क्या होता है ट्रेवल इंश्योरेंस – किसी भी यात्रा के दौरान कब कैसी सिचुएशन फेस करनी पड़ जाए इससे हम बिलकुल अनजान होते हैं, और फिर विदेश जहां हमारी पहचान का कोई ना हो। ऐसी अपरिचित जगहों में लाइफ इंश्योरेंस, यात्रा के दौरान होने वाली तमाम मुश्किलों और रिस्क फैक्टर में मुआवजा देता है। इतना ही नहीं बल्कि अगर आपका बैग खो जाए या यात्रा के दौरान बीमार पड़ने जैसी हर सिचुएशन को भी यह कवर करता है। ऐसे में ट्रैवल इंश्योरेंस कराना आपके लिए हर लिहाज से काफी फायदेमंद रहता है, क्योंकि वो कहते हैं ना दुर्घटना कभी बता कर नहीं आती। सीधी भाषा में कहें तो ट्रेवल इंश्योरेंस एक जरुरी डॉक्यूमेंट हैं, जो विदेश यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार की एमरजेंसी में फायदेमंद रहता है। जैसे – मेडिकल खर्च के लिए कवरेज देना, मेडिकल कंडीशन में जाँच, अपने देश में सुरक्षित वापसी, चेक-इन सामान संबंधी बैरियर या चेक-इन सामान का पूरी तरह खो जाना, कनेक्शन फ्लाइट, एमरज़ेंसी में फाइनेंशियल सहायता जैसे खर्च शामिल होते हैं। आपको क्या जरुरत हैं ट्रेवल इंश्योरेंस की – क्या आपके मन में भी ये सवाल आ रहा है कि आपको क्या आवश्यकता हैं ट्रेवल इंश्योरेंस की। तो चलिए बात करते हैं इसके जवाब की। मेडिकल इमरजेंसी : किसी अनजान जगह में बेस्ट हॉस्पिटल और डॉक्टरों की जानकारी होना संभव नहीं। और विदेशों में मेडिकल खर्चे 2 से 3 गुना ज्यादा होते है। लेकिन अगर आपके पास इंश्योरेंस पॉलिसी है तो इसका पूरा खर्चा इंशोरेंस कंपनी देगी। इसके अलावा कभी ऐसा भी हो जाता है कि जिस जगह आप हो उस जगह कोई बेहतरीन मेडिकल सर्विस ना हो तो यह इंश्योरेंस कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि किसी नजदीकी हॉस्पिटल में समय से इलाज कराया जाए। थर्ड पर्सन कवरेज : अगर आपके कहने, जाने-अनजाने में किसी विदेशी का नुक्सान हो जाये जिसकी भरपाई आपको करनी पड़े तो आपको टेंशन लेने की जरुरत नहीं। क्योकि इसका मुवजा इंश्योरेंस कंपनी देगी। फ्लाइट संबंधी परेशानी : अगर आपको किसी कारण से फ्लाइट टिकट कैंसिल करनी पड़ जाए तो इंश्योरेंस के चलते आपके सारे पैसे रिफंड हो जायेंगे और अगर मान लीजिये आपकी फ्लाइट कैंसिल हो जाती है या डिले हो जाती है तो ट्रेवल इंश्योरेंस आपके बड़े हुए खर्चो को क्लेम में शामिल करते हैं। इसके अलावा भी बहुत से ऑफर आपको ट्रेवल इंश्योरेंस के दौरान मिल जाते है पर शर्त ये है कि आप किस ट्रेवल इंश्योरेंस कंपनी से इंश्योरेंस खरीद रहे हैं। क्योंकि बहुत सी कंपनी इन सभी नुकसानों को कवर नहीं करती। जैसे बजाज आलियांज़ इन सभी नुकसानों को कवर करता है -विदेश में मेडिकल एमरज़ेंसी, देरी से चलने वाली फ्लाइट संबंधी परेशानी,  देश/वीज़ा संबंधी आवश्यकताएं,  सामान का नुकसान/सामान मिलने में देरी, प्राकृतिक आपदाओं या फ्लाइट छूटने/ट्रिप कैंसलेशन,  पढ़ाई संबंधी रुकावट, फ्लाइट हाईजैक आदि।  इसलिए ट्रेवल इंश्योरेंस लेने से पहले दिए गए ऑफर्स के बारे में ठीक से जान लें। और यात्रा करने से पहले आपको ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ज़रूर खरीदनी चाहिए, ताकि आपकी यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित हो।  इतना ही नहीं, ट्रैवल इंश्योरेंस लेकर आप बिना किसी बाधा के अपनी यात्रा का आनंद उठा सकें।

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Best Water Parks in Delhi NCR

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Written by Sakshi Joshi/Edited by Pardeep Kumar लो आ ही गया मार्च का महीना और साथ में दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी भी और समझो हो गया दिल्ली में गर्मियों का आगमन। अब दिल्ली के मैक्सिमम लोग बस वीकेंड के इंतज़ार में होंगे और गर्मी से कुछ राहत पाने के लिए कोई-न-कोई ट्रिप तो जरूर प्लॉन कर ही लेंगे ताकि अपनी छुट्टियां शानदार बिता सकें और थोड़े दिन के लिए ही सही पर गर्मी से राहत मिल सके। पर वीकेंड पर अगर आप पहाड़ों का दौरा किए बिना ही अपना वीकेंड खुशनुमा और फुल एन्जॉय भरा बनाना चाहते हैं तो दिल्ली के वाटर पार्क्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यहां गर्मी से राहत के साथ-साथ आप अपनी फैमिली या फ्रेंड्स के साथ शानदार क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। तो आईये जानते हैं, दिल्ली एनसीआर के बेस्ट वाटरपार्कस और उनकी प्राइस टिकट्स। Best Water Parks In Delhi NCR फन एंड फ़ूड विलेज मस्ती भरे इस गांव में आप सभी का स्वागत हैदिल्ली और हरियाणा की सीमा के पास कापसहेड़ा में स्थित यह फन एंड फ़ूड विलेज, इस चिलचिलाती गर्मी और रोजमर्रा की थकान को दूर करने वाला एक लाजवाब स्पॉट है। बेस्ट वीकेंड पिकनिक स्पॉट के रूप में यह पूरे दिल्ली में मशहूर है। इसके अलावा यहां हर ऐज ग्रुप के लोगों के लिए राइड्स अवेलेबल हैं जिसमें आप अपनी फैमिली के साथ कुछ शानदार यादें और लाजवाब पल बटोर सकते हैं। आप यहां बहुत सारी वाटर राइड्स के साथ-साथ, अपने पूरे परिवार के साथ रेन डांस का आनंद भी ले सकते हैं। और आपको बता दें कि यहां सबसे लंबा वॉटर चैनल ‘लेजी रिवर’ है। ऑफर और पैकेज के हिसाब से अलग-अलग टिकट उपलब्ध हैं। जिसमें एडल्ट्स की टिकट 1000 रुपए और बच्चों की टिकट 500 रुपए है। ऑफर्स के लिए आप फन एंड फ़ूड विलेज की वेबसाइट चेक कर सकते हैं। कैसे पहुंचेअगर आप अपनी कार से यहां आना चाहते हैं तो आपकी कार आपको दिल्ली के किसी भी कोने से फन एंड फूड विलेज तक एक घंटे में पहुंचा देगी। आप जीपिएस मैप की सहायता से यहां आसानी से पहुँच सकते हैं। लेकिन अगर आप मेट्रो की सहायता से यहां आना चाहते हैं तो आपको द्वारका सेक्टर 21 मेट्रो स्टेशन तक जाना होगा। वहां से आप ऑटो के जरिए अगले 20 मिनट में इस मजेदार डेस्टिनेशन तक पहुंच सकते हैं। एडवेंचर आइलैंड रोहिणी में स्थित ये वॉटरपार्क दिल्ली वालों के सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय स्पॉट्स में से एक है। यहां आप रेन डांस, मैड थिएटर, बोटिंगिव डीजे, इंटरनेशनल राइड्स के साथ फैमिली एंटरटेनमेंट राइड्स, एडवेंचर स्पोट्र्स, किड्स फ्रेंड्ली प्लेस और आर्चरी जैसी कई एडवेंचर एक्टिविएज़ का आनंद ले सकते हैं। एडवेंचर आईलैंड रिठाला मेट्रो स्टेशन से पैदल दूरी पर रोहिणी दिल्ली में स्थित है। यहां का मेन आकर्षण जहाज के आकार का रेस्टोरेंट है जोकि काफी लोकप्रिय है। गर्मियों में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम और वाटर राइड्स का लुत्फ़ उठाने के लिए यह एक बेस्ट स्पॉट है। प्रवेश टिकट फ्री RIDES के साथ एडल्ट्स के लिए 600 रूपए है। यह 60 वर्ष और उससे ज्यादा ऐज वालों के लिए 350 रूपए है। और बिना राइड के टिकट 300 रुपये है। ऑफर्स के साथ यह टिकट्स बदलती रहती हैं। Adventure Island के अंदर बाहर के खाने और पीने के सामान की परमिशन नहीं है। पार्क में आप पानी के अलावा कोई भी खाने पीने की आइटम अंदर नहीं लेजा सकते।यहाँ के विशेष आकर्षण टैलेंट शोज़, महेंदी स्टाल्स, नेल आर्ट, बॉलीवुड डांस, रिंग डांस , और मैजिक शो जैसी कई एक्टिविटीज़ हैं। जस्ट चिल जब पूरे शहर में एडवेंचर और वाटर पार्क की बात आती है, तो दिल्ली के पास बहुत डेस्टिनेशंस हैं, जिनमें से जस्ट चिल वाटरपार्क माना जाना स्पॉट है। जस्ट चिल वाटरपार्क उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है, जो भीषण गर्मी से थक चुके हैं और ठंडक के लिए एक ब्रेक लेना चाहते हैं। वाटरपार्क होने के अलावा, यह एक एंटरटेनमेंट पार्क, एक एडवेंचर पार्क और एक एजुकेशनल पार्क भी है। स्विमिंग पूल से लेकर रेनबो, कैटरीना-ट्विस्ट, ब्लैक थ्रिल, गॉडजिला जैसी 12 और एडवेंचर एक्टिविएज़ का आनंद लें। इसके अलावा वाटर राइड्स भी आप बहुत सारी कर सकते हैं, जिनमें कैटरपिलर, स्विंग चेयर, बुल राइड, कोलंबस और अद्भुत पानी की सवारी के अलावा और भी बहुत कुछ शामिल हैं। यह पार्क एजुकेशन का खजाना भी देता है। आप अपने बच्चों को यह सीखने के लिए ला सकते हैं कि बकरी या गाय का दूध कैसे निकाला जाता है, साथ ही मिट्टी के बर्तन बनाना सीख सकते हैं। यहां ठहरने और आराम करने के लिए आप कमरे भी बुक कर सकते हैं। और अपने नियमित जीवन की हलचल से छुट्टी ले सकते हैं। फन, फ़ूड, एडवेंचर और एजुकेशन सब कुछ आपको यहां वर्थ प्राइस में मिलने वाला है। तो बिना किसी देरी के इस वीकेंड जस्ट चिल में एन्जॉय कीजिये।नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन समयपुर बादली मेट्रो स्टेशन है। इसके बाद आप कैब या ऑटो की सहायता से यहां पहुँच सकते हैं। वर्ल्डस ऑफ़ वंडर एडवेंचर पार्क हमेशा से ही बच्चों एडल्ट्स की पसंदीदा जगह रही है, जहां बिना किसी तनाव के सभी ऐज ग्रुप के लोग फुल एन्जॉय करते हैं। और ऐसे पार्क्स की कमी आपको दिल्ली एनसीआर में कभी महसूस नहीं हो सकती। ऐसे ही पार्क्स में से अपने अनोखे मनोरंजन के लिए प्रसिद्ध है वर्ल्डस ऑफ़ वंडर। वर्ल्ड-ऑफ वंडर में आप पेंट-बॉल, गो-कार्टिंग, एयर हॉकी और कई अन्य गतिविधियों का भी आनंद ले सकते हैं। नोएडा के ग्रेट इंडिया प्लेस मॉल के पास स्थित यह वॉटरपार्क आपको 26 तरह की वाटर राइड्स का फुल पैकेज प्रोवाइड करता है। साथ ही यह एक एम्यूजमेंट पार्क भी है। आप यहां गो कार्टिग भी होती है। वर्ल्ड ऑफ वंडर पार्टियों, सेमिनार और कंपनी के कार्यक्रम के लिए लॉन की सुविधा भी देता है। ये लॉन अपने आकार के कारण विशेष ध्यान आकर्षित करते हैं। इसके अलावा अगर आप इस पार्क के आस-पास कहीं घूमना चाहते हैं तो समय बिताने के लिए, पार्क के पास स्थित ग्रेट इंडिया प्लेस मॉल भी जा सकते हैं। वीकेंड और वीक डेज में बच्चों और बड़ों के लिए टिकट के दाम अलग-अलग है। बच्चों के लिए टिकट की शुरुआत 500 रुपए और