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Best Places To Eat In Chandni Chowk, Old Delhi

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चाँदनी चौक है दिल्ली के वर्ल्ड फेमस स्ट्रीट फ़ूड की पहचान अलग-अलग संस्कृतियों में रची बसी दिल्ली देश की शान और देश की जान मानी जाती है, फिर चाहे दिल्ली के लाजपत नगर की बात करें या चाँदनी चौक की, दिल्ली अपने आप में एक गहरा इतिहास समेटे हुए है। इसके अलावा अगर दिल्ली के मशहूर खान-पान की बात करें तो यहाँ न तो बंगाल का रोशोगुल्ला इतना फेमस है और ना ही हरियाणा का चूरमा। दिल्ली में सबसे फेमस है दिल्ली का “स्ट्रीट फ़ूड”। जी हाँ, दिल्ली का स्ट्रीट फ़ूड जहाँ आपको मुंबई की भेल पूरी, तिब्बतन मोमोज़, अमृतसरी कुलचा, इंदौर का पोहा, नई दिल्ली की चाट और भी लगभग सभी राज्यों के फेमस फ़ूड का जायका यहाँ हर गली में मौजूद मिलेगा। दिल्ली जितनी अपनी विरासत और ऐतिहासिक जगहों के लिए मशहूर है उतनी ही यहाँ के स्ट्रीट फ़ूड की महक देश भर में स्वाद का परिचय देते दिखाई पड़ती है। तो आज के इस ब्लॉग में हम आपको ले चलेंगे दिल्ली के ऐतिहासिक और मशहूर चाँदनी चौक में। जहाँ के स्ट्रीट फ़ूड का ज़ायका ऐसा है कि सिर्फ खुशबू से ही मुँह में पानी आ जाता है। Best Places To Eat In Chandni Chowk, Old Delhi चाँदनी चौक की इन 5 दुकानों का स्वाद दिल्ली में आपको और कहीं नहीं मिलेगा, तो चाँदनी चौक आकर यहाँ खाना बिल्कुल ना भूलें। दौलत की चाट : अगर कभी चाट की बात हो रही हो तो सभी के मन में कुछ तीखा, मसालेदार, चटपटा आने लगता है पर दौलत की चाट एक ऐसी चाट है जिसका स्वाद मीठा है। दौलत की चाट दिल्ली की सबसे मशहूर विंटर डैज़र्ट है जो सिर्फ अक्टूबर से मार्च के महीने में ही खाने को मिलती है दिल्ली के चाँदनी चौक में और जिसके चर्चे आप लोगों ने काफी सुने भी होंगे। चाँदनी चौक की लगभग हर गली में आपको दौलत की चाट के स्टाल्स लगे दिखाई देंगे। क्यों फेमस है – दौलत की चाट एक रहस्यमय मिठाई है जिसे कहा जाता है कि यह मुग़ल शासन के टाइम से बनायी जा रही है। इस चाट का सिर्फ सर्दियों में मिलने का यह कारण है क्योंकि इसकी रेसिपी में सर्दियों की ओस का इस्तमाल किया जाता है। जरूर आप भी सोच रहे होंगे की ओस से रेसिपी ये कैसे मुकम्मल है, पर यही तो खासियत है दौलत के चाट की। इसमें सबसे पहले दूध को उबाल कर बाहर ठण्ड में रख दिया जाता है जिससे ठंडा होने पर उबले हुए दूध के ऊपर ओस बैठ जाती है। इस मिठाई को अपने सुंदर दिखने के लिए लगभग आधे दिन और पूरी रात की आवश्यकता होती है, और इसे केवल 2-3 घंटे के लिए ही खुले में रखा जा सकता है। इस चाट को लखनऊ में निमिष और कानपूर में मलाई मक्खन के नाम से जाना जाता है। नटराज दही भल्ले : चाँदनी चौक की लगभग सभी दुकानें काफी पुराने समय से हैं। और उन्हीं में से एक है नटराज दही भल्ले जो 1940 से दही भल्लों का स्वाद परोस रही है। यहाँ चौबीसों घंटे लगी भीड़ आपको इसके स्वाद का गवाह दे देगी। नरम, दानेदार, और फुले हुए भल्ले और उसके बहार चढ़ी सुपर क्रिस्पी परत , लाल इमली की चटनी , और उप्पर से छिड़के मसाले। आ गया ना मुँह में पानी ?यहाँ के दही भल्ले जितने मशहूर हैं वाकई उतने स्वादिष्ट भी हैं। तो चाँदनी चौक जाकर दही भल्ले टेस्ट करना बिलकुल ना भूलें। पराठें वाली गली : चाँदनी चौक में सबसे मशहूर पराठें वाली गली का नाम तो न सिर्फ दिल्ली बल्कि देश भर में ही काफी मशहूर है। यहाँ पर आपको पराठों की 40-50 वैरायटी मिल जाएगी। और यहाँ के पराठों की खास बात यह है कि यहाँ पर बनने वाले पराठें देसी घी में डीप फ्राई किए जाते है, और यहाँ पर आकर आप पराठों में तेल की उम्मीद ना ही रखें तो बेहतर है। और एक चीज़ यहाँ पर खास है कि यहाँ पर सभी लगभग शुद्ध शाकाहारी पराठें ही बनाते हैं जिसमे ना ही प्याज शामिल है और न ही लहसून। इन पराठों को और स्वादिष्ट बनाने के लिए बादाम काजू और सूखे मेवे भी डाले जाते है। अगर आप खाने के ज़रा भी शौकीन हो तो थाली ख़त्म किए बिना आप यहाँ से उठ नहीं पाएंगे क्योंकि यही तो खास बात है पराठें वाली गली की। कुरेशी कबाब : जामा मस्जिद के पास, मीना बाजार के बिलकुल सामने अपनी विरासत जमाए कुरेशी कबाब नॉन वेज़ लवर्स का अड्डा है। वैसे तो यहाँ आपको अलग अलग तरह के कबाब खाने को मिल जायेंगे पर लजीज आनंद के लिए आप यहाँ कबाब रायते और चटनी के साथ आर्डर करें। यहाँ कबाब इतने टेस्टी हैं कि आप दुबारा यहाँ आए बिना रह नहीं पाएंगे और ये कबाब न सिर्फ टेस्टी बल्कि बजट फ्रेंडली भी है। ज्ञानी की हट्टी : तो क्या आप भी हैं रबड़ी के दीवाने हैं तो चल पड़िये ज्ञानी दी हट्टी में खाने। पुरानी दिल्ली के सबसे सीक्रेट फूड्स में से एक है ज्ञानी दी हट्टी जोकि अपने रबड़ी फालूदा के लिए सबसे ज्यादा जानी जाती है। दाल का हलवा, मूंग का हलवा, बादाम का हलवा, सूजी का हलवा और कई तरह की मिठाइयाँ इस जगह आपको मिल जाएँगी। तो इंतज़ार किस बात का है। चल पड़िये चाँदनी चौक की इन मशहूर जगहों में और चख लीजिये दिल्ली के स्ट्रीट फ़ूड का स्वाद।

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Best Places to Visit in Almora

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अल्मोड़ा(Almora) -कुमाऊँ का दिल वो क्या है ना, ये पहाड़ थोड़े मूडी होते हैंकभी सुबह सूरज की रौशनी के साथ उठ जाते हैंतो कभी बारिश की बूदों में आराम फरमाते हैंलेकिन जब इनका मूड ठीक होतो बस इनके पास निकल पड़ना चाहिएक्योकि तब जो इनकी खूबसूरती आपको सुकून देगीवो शायद ही कहीं नसीब होऔर फिर वो गाना भी तो हैमेरा फलसफा कंधे पे मेरा बस्ताचला में जहाँ ले चला मुझे रस्ता……. तो चलिए ले चलते हैं आपको पहाड़ों के एक नए सफर में। उत्तराखंड का एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है “अल्मोड़ा” जो कि कुमाऊँ रीजन में पड़ता है। जितना खूबसूरत ये हिल स्टेशन है उतना ही खूबसूरत यहाँ पहुँचने का सफर। तो इस सफर में जैसे ही हम नैनीताल पहुंचते हैं, हमें अहसास होने लगता है कि हाँ, अब हम पहाड़ों में ऐंटर कर चुके हैं । नैनीताल में चारों ओर पहाड़ों से घिरी एक बहुत ही खूबसूरत झील आपको मुख्य सड़क से ही दिखने लगती है और यहाँ रुके बिना आप अल्मोड़ा का सफर कर लें ये तो हो ही नहीं सकता। क्योंकि ये झील इतनी खूबसूरत है कि सबको अपनी ओर खींच ही लेती है। यहाँ ठहर कर आप झीलों से घिरे एक लाज़वाब हिल स्टेशन का आनंद ले सकते हैं। और फिर नैनीताल से लगभग 64 किमी दूर आता है एक लाजवाब हिल स्टेशन अल्मोड़ा।(Almora) अल्मोड़ा का इतिहासअगर बात करें कुमाऊँ के तीन पहाड़ी जिलों की तो अल्मोड़ा उनमें से एक है। और सांस्कृतिक नज़रिये से देखें तो अल्मोड़ा उत्तराखंड की “कल्चरल कैपिटल” कही जाती है। 1798 में गोरखाओं द्वारा चंद राजवंश पर आक्रमण किया गया, और 1814-15 के गोरखा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने अल्मोड़ा को अपना मुख्यालय बनाया और अच्छी संख्या में स्कूल, अस्पताल, चर्च और अन्य संस्थान खुल गए। आज यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक नगर और प्रशासनिक केंद्र है। यह शहर कुमाऊं के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव का मेल माना जाता है। (Almora) अगर अल्मोड़ा घूमने की बात करें तो इस शहर में ऐसी बहुत सी फेमस और रहस्मयी जगह हैं जो आपकी ट्रिप को यादगार बना देंगी। क्योकि ये शहर चारों ओर से मंदिरों से घिरा हुआ है, और इन मंदिरों की खासियत और खूबसूरती बाकी सभी हिल स्टशनों से अलग हैं। तो चलिए जानते हैं क्या खास है इन मंदिरों में – चितई गोलू मंदिर यहाँ गोलू देवता को न्याय का देवता कहा जाता है। और यहाँ की खास बात यह है की यहाँ लोग चिठ्ठी में अपनी मनोकामना लिखकर उसे टांग देते है और ऐसे अपनी विश पूरी होने की कामना करते है। मनोकामना पूरी होने पर यहाँ घंटी चढाने की परंपरा है। इसी के चलते इस मंदिर में हज़ारों घंटियाँ और हज़ारो चिट्ठियाँ आपको देखने को मिल जाएगी। यह मंदिर अल्मोड़ा से लगभग 8 km. की दूरी पर है। जागेश्वर धाम जागेश्वर धाम अपने आप में एक बहुत बड़ा और मशहूर मंदिर है, जो अल्मोड़ा से लगभग 40 km. दूर है। उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक जागेश्वर धाम देवदार के जंगलों के बीचों-बीच स्थित है। ये पूरे उत्तराखंड में सबसे बड़े मंदिरों का ग्रुप है। क्योंकि जागेश्वर धाम में लगभग 150 मंदिर स्थित है। और यही इस मंदिर की खासियत है। इसे चरों धामों के बाद पांचवा धाम कहा जाता है। पुरानी मनीयता के हिसाब से इसे भगवान शिव का तपस्थल मन जाता है। यहाँ हर साल सावन के महीने में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश भर से श्रद्धालु दर्शन करने आते है। डोल आश्रम नैनीताल से जब आप अल्मोड़ा की तरफ चलेंगे तो रस्ते में पहाड़ों के बीच, पेड़ों से घिरा हुआ यह बड़ा आश्रम रोड से ही आपको दिखाई देने लगेगा। अगर आप किसी शोर से दूर शांत माहौल में रहना पसंद करते है तो यह जगह आपके लिए बेस्ट साबित होगी। ताज़ी हवा, शांत माहौल, हरे-भरे पेड़, चिड़ियाओं के चहकने की आवाज बहुत ही पॉजिटिव वाइब्स ले आती है। ऐसी जगह आकर कोई भी अपना तनाव भूल जायेगा। यह आश्रम अल्मोड़ा से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा से 8 किमी दूर देवी गांव में यह मंदिर है, और लगभग दूसरी सदी का माना जाता है। यहाँ के स्थानीय लोग माँ कसार देवी की शक्तियों पर अटूट आस्था रखते है। यह मंदिर देवी गांव में कश्यप पहाड़ी पर गुफा नुमा स्थान में बना हुआ है। कहा जाता है कि इस मंदिर में माँ दुर्गा प्रकट हुयी थी और इसी वजह से यहाँ माँ दुर्गा को पूजा जाता है।अल्मोड़ा में मंदिरों के साथ साथ और भी बहुत सी जगहें घूमने लायक हैं। ज़ीरो पॉइंट, कटारमल सूर्य मंदिर, डियर पार्क, दुनागिरि मंदिर, ब्राइट एन्ड कार्नर, पंडित गोविन्द बल्लाभ पंत संग्रालय, और भी बहुत सी ऐसी जगहें है जहाँ जाकर आपकी ट्रिप मुकम्मल हो जाएगी। इसके अलावा अल्मोड़ा में चारों तरफ रानीखेत, चौकोरी, शीतलखेत, बिनसर, कौसानी और बागेश्वर जैसे कई शांत पहाड़ी शहर बास्ते हैं। अल्मोड़ा की फेमस मिठाईबाल मिठाई – अल्मोड़ा की “बाल मिठाई” के चर्चे तो देश भर में है। अल्मोड़ा की फेमस बाल मिठाई और सिंगोड़ी यहाँ की पहचान है। बाल मिठाई एक ब्राउन चॉक्लेट की तरह होती है जिसे खोये को भून कर बनाया जाता है, और बाहर से इसमें सफ़ेद चीनी के गोले लगाए जाते है। जिससे ये देखने में बहुत टेस्टी दिखाई पड़ती है। सिंगोड़ी – अब कुमाऊँ आकर सिंगोड़ी का स्वाद नहीं लिया तो क्या ही कुमाऊँ आना। खोया (गाढ़ा दूध) से बनी यह मिठाई एक अलग ही प्रकार से देखने को मिलती है, क्योंकि यह मिठाई बनने के बाद मोलू के पत्ते में लपेटी जाती है। और सोफ्टी आइसक्रीम की तरह इसका शेप बनाया जाता है। मोलू के पत्ते की ताजी महक और इलायची और नारियल के स्वाद वाले दूध का स्वाद आपको और किसी मिठाई में नहीं मिलेगा। और पूरे कुमाऊँ में ये मिठाई आपको सिर्फ अल्मोड़ा में मिलेगी। कल्चर ऑफ़ अल्मोड़ा : क्योंकि अल्मोड़ा कुमाऊँ रीजन में पड़ता है इसलिए अल्मोड़ा में पूरा कुमाऊनी कल्चर है। जैसे हिलजात्रा, छलिया डांस आदि। इसके अलावा यहाँ की भाषा भी कुमाऊनी है, और त्यौहार भी कुमाऊनी कल्चर में मनाये जाते है। कैसे पहुंचे अगर दिल्ली से अल्मोड़ा आने की बात करें

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दिल्ली के नजदीक पांच ऐसे पिकनिक स्पॉट जहां आप अपने दिन को बना सकते हैं यादगार और मस्ती भरा Anubhav Kumar – Five Colors of Travel जॉय गांव पिकनिक पार्क – यह पिकनिक स्पॉट बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबके लिए बहुत ही शानदार जगह है। यहां आपको एडवेंचर एक्टिविटीज के साथ-साथ एक ग्रामीण परिवेश मिलेगा जहां आपको एक सुकून की सांस ले सकते हैं और बड़े लोगों को अपने बचपन के दिन याद आ जाएंगे। कैसे पहुंचे – जॉय गांव पिकनिक पार्क झज्जर-बहादुरगढ़ रोड पर स्थित है। यह दिल्ली से लगभग 42 किलोमीटर और झज्जर से करीब 10 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। टिकट्स यहां पर 5 से 10 साल तक के बच्चों के लिए 650 रुपये की टिकट है और 10 से 60 साल तक के लोगों के लिए 1200 रुपये की टिकट है यदि आप 60 साल से ऊपर हैं तो आपके लिए 1000 रुपये का टिकट है। यहां पर खाना-पीना और सभी एक्टिविटीज इसी टिकट में शामिल है। 80 से भी ज्यादा एक्टिविटीज यहां आपको लगभग 80 से भी ज्यादा एक्टिविटीज करने का मौका मिलेगा। जो आपको बहुत ही आनंदित महसूस करवाएगा। यह पिकनिक पार्क हर रोज खुला रहता है। इस पिकनिक स्पॉट में आपको रात को रुकने की सुविधा भी है और यहां के कमरे बहुत ही शानदार है। यहां से आप आस-पास की हरियाली और खूबसूरत नजरों को महसूस कर सकते हैं। यकीनन यहां आकर आपका दिन बन जाएगा। चौखी ढाणी (Chokhi Dhani)- चौखी ढ़ाणी राजस्थानी कल्चर पर आधारित बहुत ही सुंदर जगह है। यहां आपको राजस्थानी लोक कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुति भी देखने को मिलेगी। यह हर ऐज ग्रुप के लोगों के लिए परफेक्ट जगह है। चौखी ढाणी सोनीपत और दिल्ली के बीच नेशनल हाईवे 1 पर स्थित है यह दिल्ली से लगभग 60 किलोमीटर की दुरी पर है। यहां पर बच्चों के लिए 500 रुपये का और बड़ों के लिए 700 रुपये का टिकट लगता है। खाना-पीना और सभी एक्टिविटीज इसी टिकट में शामिल है। यहां पर आप राजस्थानी जायकों का भरपूर आनंद ले सकते हैं। यह पिकनिक स्पॉट शाम को 6 बजे से लेकर रात के 11 बजे तक हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है। यहां आकर आपको सचमुच भरपूर आनंद का अहसास होगा। रंगमंच फार्म (Rangmanch Farms)– यह रंगमंच फार्म दिल्ली से लगभग 45 किलोमीटर दूर हरियाणा के फरुखनगर और गुड़गांव के बीच बुढेड़ा गांव में स्थित है। यहां आप अपनी पूरी फैमली के साथ एक दिन के ट्रिप पर आ सकते हो और यकीनन आपको भरपूर मजा आएगा। ये एक दिन का ट्रिप आपकी लाइफ के अच्छे पलों में शुमार हो जाएगा। यह फार्म दोपहर 12 से 7 और शाम को 4 से 10 बजे तक खुला रहता है। अगर आप यहां रात की खूबसूरत लाइटनिंग में एन्जॉय करना चाहते हैं तो आपके लिए 4 से 10 का टाइम बेस्ट टाइम रहेगा। इस खूबसूरत जगह में अंदर जाने के लिए एडल्ट को 1199 रुपये, कपल्स को 2299 रुपये का , बच्चों के लिए 649 रुपये का और सीनियर सिटीजन के लिए 999 रुपये का टिकट लेना पड़ेगा। इस टिकट में आपको रंगमंच का पूरा पैकेज मिलता है जिसमे सभी एक्टिविटीज और खान-पान शामिल है यहां के ग्रामीण परिवेश में आप एकदम पॉजिटिव एनर्जी से भर जाएंगे। लोहागढ़ फार्म (Lohagarh Farms)- अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा ये लोहागढ़ फार्म दिल्ली से लगभग 40 किलोमीटर दूर गुड़गाँव में स्थित है। अगर आप अपनी रोज की भागदोड़ भरी ज़िंदगी से परेशान हैं तो यह जगह आपके लिए यकीनन बहुत जबरदस्त होने वाली है। यहां आपको तरह-तरह के खेल, करतबबाज और लजीज खाने का पूरा पैकेज टिकट के साथ मिलेगा, जोकि बड़े लोगों के लिए 1100 रुपये और बच्चों के लिए 600 रुपये है। यहां पर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ पूरा दिन मस्ती कर सकतें हैं। यहां की थीम पुराने कल्चर पर आधारित है। जहां इस नए जमाने की दौड़ में लोगों को पुराना समय याद आता है प्रतापगढ़ फार्म – प्रतापगढ़ फार्म में आपको एक हरयाणवी गांव की झलक साफ़ दिखाई देती है। यह दिल्ली से करीबन 86 किलोमीटर दूर हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित है। यहां आप प्रॉपर गांव का आनंद ले सकतें है। इसकी एंट्री टिकट एडल्ट्स के लिए 1230 रुपये ( ऑनलाइन 1190 रुपये ) , बच्चों के लिए 690 रुपये ( ऑनलाइन 650 रुपये ) है। टिकट के इस पैकेज में इंडोर, आउटडोर गेम, तरह तरह की एक्टिविटीज और लजीज खान-पान शामिल है। यहां पर आपको इतना मजा आने वाला है कि आप इस दिन को भुलाए से भी नहीं भुला पाओगे।

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Best Tourist Places of Dehradun

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देहरादून – जहाँ से होकर जाता है जन्नत का रास्ता Written by Sakshi Joshi/Edited by– Pardeep Kumar उत्तराखंड की खूबसूरती से तो हर कोई वाकिफ है और बेशक ही उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून भी किसी जन्नत से कम नहीं है। इस बात का एहसास आपको इस ब्लॉग को पड़के हो जायेगा। देहरादून अपनी खूबसूरत वादियों, ऊँची पहाड़ियों, और मंदिरों के लिए काफी मशहूर है। इसके साथ-साथ देहरादून में बहुत सी ऐसी जगहें हैं जो उत्तराखंड की सुंदरता को साफ़ दर्शाती हैं, जैसे देहरादून का जिक्र होते ही मसूरी का नाम सभी के दिलों-दिमाग में घूमने लगता हैं। क्योंकि “पहाड़ो की रानी” में जो बात है वो देश के किसी दूसरे शहर में नहीं। ऐसी ही बहुत सी सुन्दर नदियाँ और पहाड़ों से घिरी जगहें देहरादून की खूबसूरती में चार-चाँद लगा देती हैं। बासमती चावल, चाय और लीची के बाग़ इस शहर की सुंदरता और प्रसिद्धता को दोगुना कर देते हैं। Best Places of Dehradun देहरादून के इतिहास की बात करे तो माना जाता है कि द्वापर युग में गुरु द्रोणाचार्य ने देहरादून शहर से 19 किमी पूर्व में देवदार पर्वत पर तप किया था। इसी से यह घाटी द्रोणाश्रम कहलाती है। इसके अलावा एक बहुत पुरानी कहावत के अनुसार देहरादून का नाम पहले द्रोणनगर था और यह कहा जाता था कि पाण्डव-कौरवों के गुरु द्रोणा ने इस स्थान पर अपनी तपोभूमि बनाई थी और उन्हीं के नाम पर इस नगर का नामकरण हुआ था। देहरादून 1842 में, डन सहारनपुर जिले से जुड़ा हुआ था और जिले के कलेक्टर के अधीनस्थ एक अधिकारी के अधीन रखा गया था, लेकिन 1871 से इसे अलग जिले के रूप में प्रशासित किया गया। अगर आप देहरादून घूमने का प्लान बना रहें हैं, तो इन फेमस जगहों में घूमना मिस ना करें क्योंकि जब आप इन्हें करीब से देखेंगे तो दिल दे बैठेंगे । सहस्त्रधारा बाइक राइड में अगर सहस्त्रधारा तक जाया जाये तो यहाँ पूरी लद्दाख वाली वाइब्स आपको महसूस होगी। सीधी रोड, रोड के किनारे नदी, और नदी के उप्पर लगे सतरंगी झंडे, थोड़ी देर के लिए आप इस नज़ारे में अपने होश खो बैठेंगे। सहस्त्रधारा, देहरादून का नेचुरल वाटरपार्क है जहां गर्मियों के मौसम स्वीमिंग का भरपूर आनंद आप ले सकते हैं। और स्वीमिंग के साथ साथ कई वाटर एक्टिविटी भी कर सकते है। इस जगह की ख़ास बात यह है कि यहाँ आने वाला पानी प्राकृतिक रूप से बहता रहता है। और कहा जाता है कि यहाँ नहाने से स्किन रोग , जैसे चर्म रोग , खाज , खुजली इत्यादि दूर हो जाते है। यहाँ चेंजिंग रूम और लॉकर की सुबिधा भी उपलबध है। जितना खूबसूरत सहत्रधारा है उतना ही बेहतरीन इसका सफर भी है शहर से 15 किलोमीटर दूरी पर 40 मिनट के सफर में इसकी खूबसूरती आपको लद्दाख से रूबरू करा देगी। शास्त्रधारा पहुंचने के लिए दर्शन लाल चौक से डायरेक्ट टैक्सी मिल जाएगी, या आप ऑटो बुक करवा कर भी आ सकते है। मसूरी “पहाड़ों की रानी” तो बेशक ही हैवन से कम नहीं। यहाँ पहाड़ों में बादल नीचे और आप उप्पर होंगे, चारों तरफ फौग, और ठण्ड से काँपते हाथों में चाय। अब आप ही बताइये कोई कैसे मसूरी से दिल न लगाए। इसके अलावा भी मसूरी में ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों में बर्फ़बारी, जगह-जगह निकले झरने आपकी यात्रा में चार-चाँद लगा देंगे। अगर आप एडवेंचर लवर हैं तो मसूरी में पैराग्लिडिन , ज़िपलाइन जैसे और भी बहुत से एडवेंचर प्लेस हैं। इतना ही नहीं यहाँ से केदारनाथ , बद्रीनथ और नीलगिरि पर्वत दूरबीन ] के माध्यम से देख पाएंगे और मसूरी भारत का 5 वा सबसे अच्छा हिल स्टेशन है जहाँ साल भर लाखों की संख्या में देश विदेश से टूरिस्ट यहाँ आते हैं। मसूरी ट्रिप के दौरान इन जगहों में जरूर जाएँ क्लाउड एन्ड, केम्पटी फॉल, लाल टिब्बा, जॉर्ज हिल। मसूरी , देहरादून से 35 किमी दूर है, आप यहाँ अपनी पर्सनल गाड़ी या कैब के माध्यम से आसानी से आ सकते हैं। व्यू पॉइंट सहत्रधारा के पास से ही रोपवे के द्वारा आप व्यू पॉइंट में जा सकते हैं। ऊँचे पहाड़ के ऊपर पहुंचते ही मानों स्वर्ग छूने सा महसूस होने लगता है, सुन्दर नज़ारे, खूबसूरत वादियाँ और सबसे ऊंचाई से नज़ारे देखने की खुशी एक रोमांच भरा माहौल बना देती है। इसके अलावा शहस्त्रधारा की बहती खूबसूरत नदी, चारो तरफ पहाड़ो से घिरे हुवे नज़ारे, और इस शांत माहौल में चिड़ियाओं का चहकना। हाँ तभी तो ये व्यू पॉइंट है। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो आपको इस प्लेस में जरूर जाना चाहिए क्योंकि यहाँ से बहुत ही शानदार पिक्चर कैप्चर होती है। मालदेवता वॉटरफॉल मालदेवता इन दिनों देहरादून का फेवरेट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। अगर आप दिल्ली से हैं तो ये जगह आपको बहुत पसंद आएगी क्योंकि यहां की खूबसूरत वादियां और कल-कल बहती नदी भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून का पल ले आती है। तो अगर आप देहरादून आ रहे हैं तो यहां का रुख जरूर कीजिए। चारों तरफ पहाड़ों से घिरा मालदेवता खासकर यंग जनरेशन की सबसे दिलचस्प जगह मानी जाती है। और इसी वजह से वीकेंड में यहां बहुत भीड़ रहती है। लोग यहां रेस्‍टोरेंट में जाने से ज्‍यादा खुद चूल्‍हा बनाकर खाना बनाना पसंद करते हैं। मालदेवता के सुन्दर नज़रों और नदी की आवाज आपको सुकून का अहसास करवा देगी। क्लेमेंट टाऊन क्लेमेंट टाउन एक जगह का नाम है जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा और फेमस बुद्धा टेम्पल स्थित है। बुद्धा टेम्पल को देहरादून के सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट में गिना जाता है। जो लगभग 2 एकड़ के ऐरिया में फैला हुआ है। यह स्तूप भारतीय कला सुंदरता को दिखता है। इस स्तूप को बनाने का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति के लिए किया गया जो ऑक्टूबर 2002 में बन कर तैयार हुआ। ये सप्ताह के सभी दिन सुबह 9 बजे खोला जाता है। इसके अलावा भी देहरादून में बहुत खूबसूरत जगहें हैं – फन वैली, ऍफ़.आर.आई , लच्छी बाला पिकनिक स्पॉट, टपकेस्वर टेम्पल, आदि। फ़ूड और कल्चरअगर देहरादून कल्चर की बात करे तो यहाँ आपको सबसे ज्यादा आबादी कुमाऊ और गढ़वाल की देखने को मिलेगी। तो यहाँ के कल्चर में कुमाऊनी और गढ़वाली कल्चर कहना शायद गलत नहीं होगा। फ़ूड की बात करें तो यहाँ हर तरह

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अगर चाहिए सुकून के पल तो आईये चलते हैं हिमाचल Written by – Sakshi Joshi/Edited by Pardeep Kumar देश भर में अगर बेस्ट हिल स्टेशनों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश सबसे पहले नंबर पर आता हैं। हिमाचल एक ऐसा राज्य है जहाँ देश भर के चहीते हिल स्टेशन मौजूद है, क्योंकि जहाँ पहाड़ों का सुकून, झरनों की झर-झर, कल-कल करती नदियाँ, और खूबसूरत नज़ारे, सब कुछ है तो इतनी खूबसूरत जगह से कोई कैसे दिल नहीं लगाएगा। यहाँ आपको बर्फीली पहाड़ियाँ, एडवेंचर, तिब्बती संस्कृति की झलक और भी लगभग बहुत कुछ देखने को मिलेगा, तभी तो इसे बेस्ट टूरिज्म प्लेस कहा जाता है। तो बात करते है हिमाचल में घूमने की मशहूर और बेस्ट जगहों के बारे में। जब भी हिमाचल घूमने की बात होती है हमारे दिलो-दिमाग में जो सबसे पहले नाम आता है वो नाम है “शिमला” शिमला : शिमला शब्द सुनते ही हर किसी के मन में एक खूबसूरत नज़ारा आने लगता है खासकर कपल्स के। हाँ बेशक, शोर- शराबे से दूर बर्फ से ढके पहाड़ और हरे-भरे घिरे हुए देवदार के पेड़ किसी भी पर्यटक को यहाँ एक बार आने पर मजबूर कर ही देते है। शिमला की बेस्ट प्लेसेज़ की बात करे तो उनमें सबसे मशहूर जगह है माल रोड।माल रोड – अगर हम माल रोड को शिमला का मेन शॉपिंग सेंटर कहें तो ये गलत नहीं होगा। माल रोड शॉपिंग के लिए काफी मशहूर है। यहाँ आपको खान-पान की काफी पुरानी और मशहूर दुकानें देखने को मिल जाएँगी। जिसमें आप हिमाचल की फेमस मिठाई सिड्डू का मजा भी ले सकते हैं। जब आप माल रोड घूमने निकलेंगे तो यहाँ आपको रेस्टोरेंट, कॉफी शॉप, और बहुत सी अलग-अलग दुकानें भी दिखाई देंगी।द रिज – माल रोड के किनारे दा रिज एक व्यू पॉइंट है जहाँ से आपको पूरे शिमला के बेहतरीन नज़ारे देखने को मिलेंगे। यहीं रिज रोड़ पर आपको नार्थ इंडिया का सबसे पुराना क्राइस्ट चर्च भी देखने को मिल जायेगा। जिसके सामने बड़े से मैदान पर हर साल सबसे बड़े समर फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। रिज पर महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी का स्टेचू है और अटल बिहारी वाजपेयी की हाल ही में स्थापित प्रतिमा भी देखने को मिल जाएगी जिसके आस पास बहुत सारे टूरिस्ट सेल्फी और फोटोग्राफी करते दिख जायेंगे।जाखू हिल : जाखू हिल्स इस पूरे हिल स्टेशन की सबसे ऊँची चोटी है। जहाँ आपको भगवान हनुमान का सुन्दर मंदिर दिखाई देगा। जाखू मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है यहाँ पर पाए जाने वाले सैंकड़ों बन्दर। यहाँ जाते समय इन बंदरों का विशेष ध्यान रखें क्योंकि ये आपके हाथ से जरुरी सामान भी छीन सकते हैं। यहाँ जाते समय आप अपने पर्स और अन्य कीमती सामान को संभाल के रखें। लक्कड़ बाजार : शिमला के इस फेमस बाजार में लकड़ी के आकर्षक और सुन्दर-सुन्दर सामान खरीदने को मिल जायेंगे। यहाँ न सिर्फ लड़की बल्कि सभी चीज़ों की दुकानें है पर इस बाजार की खासियत लकड़ी के सामानों से हैं, जिसे यादगार निशानी के तौर पे खरीदा जा सकता है। प्राकृतिक जड़ी बूटियाँ और सूखे मेवे भी आपको इस बाजार में मिल जायेंगे। चैल : चैल पहाड़ों की खूबसूरती के साथ-साथ पोलो और क्रिकेट लवर्स का पसंदीदा स्पॉट माना जाता है, क्योंकि यहाँ पर विश्व की सबसे ऊंचाई पर बना क्रिकेट स्टेडियम है, जिसका इस्तेमाल पोलो खेलने के लिए भी किया जाता है। चैल समुद्र तल से लहभग 2250 मीटर की ऊंचाई पर बसा है, इसलिए ये स्पॉट हाइकर्स के लिए जन्नत माना जाता है। अगर आप एडवेंचर लवर हैं तो ये आपके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है। चैल की खूबसूरती में चार चाँद लगा देता है काली माता का प्रसिद्ध मंदिर। यह मंदिर शिमला की सबसे ऊँची पहाड़ियों में से एक में स्थित है। जहाँ से आपको पूरे शिमला के बेहतरीन नज़ारे देखने को मिल जायेंगे। और अगर बात करें चैल के बाजार की तो यहाँ का बाजार उतना बड़ा नहीं है। पर आपको छोटा-मोटा जरूरत का सामान यहाँ मिल जायेगा। चैल के बाजार में जब आप घूमे तो अपने सामान का विशेष ध्यान दें क्योंकि यहाँ बहुत बन्दर है, जो आपका सामान झपट सकते हैं। सोलन वैली : सोलन वैली जाने वाले रूट पे सबसे पहले आपको नेहरुकुन्द मंदिर दिखेगा जहाँ आप दर्शन करते हुए जा सकते है।और इसी रूट में एक ब्रिज आपको दिखेगा जहाँ टेंगो चार्ली मूवी की शूटिंग भी हुई थी। सोलन वैली में जगह जगह आपको एडवेंचर एक्टिविटीज होती दिखाई देंगी। पैराग्लाइडिंग और बाइक राइड जैसी बहुत सी एक्टिविटीज़ आप यहाँ कर सकते है। और अगर आप दिसंबर या जनवरी के महीने में यहाँ आएँ तो यहाँ आपको बर्फ ही बर्फ दिखाई देगी जिसमें आप बहुत सी स्नो एक्टिविटीज़ कर सकते है। सोलन वैली की खूबसूरती बेशक ही हिमालय का अहसास करा ही देती है। सोलन जाकर जटोली शिव मंदिर में जाना बिलकुल ना भूलें। क्योंकि कहाँ जाता है की यह पूरे एशिया का सबसे ऊँचा मंदिर है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहाँ के पत्थरों को थपथपाने पर डमरू सी आवाज सुनाई देती है। इस मंदिर में हर तरफ अलग-अलग देवी देवताओ की मूर्तियां लगी हुई है। इसके अलावा मंदिर के ऊपरी हिस्से पर 11 फुट ऊंचा एक विशाल सोने का कलश स्थापित है, जो इसकी खूबसूरती को बेहद खास बना देता है। कुल्लू : इस खूबसूरत पर्यटक स्थल को देवताओं की घाटी और सिल्वर वैली भी कहा जाता है। कुल्लू की खूबसूरती से हर कोई वाकिफ है पर यह जगह बसंत के महीने में और भी खिल जाती है। सफ़ेद और गुलाबी फूलों से जो नज़ारा बन जाता है उसको शब्दों में बता पाना मुश्किल है। सिल्‍वर वैली के नाम से मशहूर यह जगह न सिर्फ सांस्‍कृतिक और धार्मिक स्पॉट बल्कि एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए भी मशहूर है। कुल्लू में प्रसिद्ध दशहरा फेस्टिवल का आयोजन हर साल बड़ी धूम-धाम से किया जाता है। इसके अलावा कुल्लू में याक की सवारी काफी मशहूर है। जो कि समुद्र तल से 6000 मीटर ऊपर की जाती है। कुल्लू के खूबसूरत नज़ारे याक की पीठ पर बैठकर देखने से और भी खुशनुमा माहोल बन जाता है। तीर्थन वैली : अगर आप शोर-शराबे से दूर शांत जगह की तलाश में है तो तीर्थन वैली

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Pithoragarh

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पिथौरागढ़ यानि छोटे कश्मीर में आपका स्वागत है Written by – Sakshi Joshi Edited by- Pardeep Kumar हरी-भरी पहाड़ियां, और बर्फ से ढके पहाड़ हैं, यहाँ खूबसूरत नज़ारे और हरयाली की भरमार है, रस्ते भले ही टेड़े है, पर लोग बड़े ही भोले है, पूछो जो रास्ता किसी से, मंजिल तक छोड़ने को तैयार हैं, पूछो- क्या नहीं है यहाँ, नाचनी है यहाँ, बिर्थी है यहाँ मुंश्यारी है यहाँ, बर्फ गिरती है जहाँ, जूलाघाट है यहाँ, खूबसूरत झरने है जहाँ, घिंघारू की झाड़ी है यहाँ, माता कोटगाडी है यहाँ, थल केदार में बैठा भोला भंडारी है यहाँ, आप फुर्सत निकाल कर देखने तो आओ कितनी सुन्दर खेती-बाड़ी है यहाँ। हाँ, यही तो है पिथौरागढ़। अगर कश्मीर अपनी बेइंतहां खूबसूरती के लिए मशहूर है तो इस मिनी कश्मीर की खूबसूरती भी किसी लिहाज़ में काम नहीं। और यकीन  मानिये  पिथौरागढ़ की चमक आपको अपना दीवाना बना ही देगी। दिल्ली से चलना शुरू करें तो टनकपुर पहुँचते ही खूबसूरत पहाड़ दिखाई देने लगते हैं और ठण्ड का एहसास होना भी शुरू हो जाता है। कुछ समय बाद इस सफर में थोड़ा चलने पर घाट का पुल आपको बता देगा कि आप पिथौरागढ़ में दस्तक दे चुके हैं। ‘देवभूमि’ है, तो शुरुवात मंदिर से होना तो जायज ही है। सड़क के किनारे गुरना माता का मंदिर पिथौरागढ़ की खूबसूरती की अपनी अलग पहचान देता है। यहाँ आने वाले सब यात्री एक बार दर्शन करने जरूर रुकते हैं और माता के आशीर्वाद से ही अपनी यात्रा की शुरुवात करते है। पिथौरगढ़ का इतिहास : अगर पिथोरा गढ़ के इतिहास की बात करें तो इसका पुराना नाम सोरघाटी है। सोर का अर्थ है- सरोवर। माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे। धीरे-धीरे सरोवरों का पानी सूखता चला गया और यहाँ पर पठारी भूमि का जन्म हुआ। पठारी भूमि होने के कारण इसका नाम पिथौरा गढ़ पड़ा, पर ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह राय पिथौरा की राजधानी थी। उन्हीं के नाम से इस जगह का नाम पिथौरागढ़ पड़ा। पिथौरागढ़ अल्मोड़ा की तहसील थी। इसी तहसील से 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़ ज़िला का जन्म हुआ। और इस पुरे ज़िला पिथौरागढ़ को सुचारु रुप से चलाने के लिए चार तहसीलों (पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचुला और मुन्स्यारी) का निर्माण 1 अप्रैल 1960 को हुआ। बेस्ट प्लेसेस ऑफ़ पिथौरागढ़ : जब आप पिथौरा गढ़ घूमने आएंगे तो यहाँ के कुछ बेहद पॉपुलर टूरिस्ट प्लेस हैं जहाँ आप नहीं गए तो समझिये आपकी यात्रा मुकम्मल नहीं हुयी। 1. मुंश्यारी : मुंश्यारी, पिथौरागढ़ का एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो कि बर्फीली पहाड़ियों और खूबसूरत नज़ारो के लिए मशहूर है। मुंश्यारी जाने की बात करे तो पिथौरागढ़ बाजार से मुंश्यारी की दूरी 129 किमी है। मुंश्यारी पहुँच कर आपको वैसे तो बहुत कुछ देखने को मिल जायेगा पर इन जगहों में जाना बिलकुल न भूले – बिर्थी फॉल, हेमकुंड, खलिया टॉप, नंदा देवी मंदिर। इसके साथ-साथ मुंश्यारी में स्थित पांच चोटियों से मिलकर बना पंचाचूली पर्वत ना सिर्फ मुंश्यारी बल्कि पिथौरागढ़ की भी शान है। 2. चंडाक : चंडाक को पिथौरागढ़ का दिल कहना गलत नहीं होगा क्योकि पूरे शहर के नज़ारे आप यहाँ से देख सकते हैं। पूरे पिथौरागढ़ में इससे बेहतर पिकनिक स्पॉट शायद ही कहीं होगा। ये पिथौरागढ़ से सिर्फ 7 किमी दूर है। यहाँ शहर का मशहूर रेस्टोरेंट है मेघना, जहाँ से आप पूरे पिथौरागढ़ का नज़ारा देख सकते हैं। चारों और  देवदार के पेड़ों से घिरी हुई पहाडियां किसी को अपना बना लेने के लिए काफी हैं। चंडाक की फेमस जगहें – मेघना, मोस्टमानू मंदिर, भुरमुनि वॉटरफॉल, प्लस पॉइंट, व्यू पॉइंट, ऑन द रॉक्स, ग्रीन आइलैंड आदि। पंचाचूली की बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ चंडाक से बहुत ही खूबसूरत दिखाई पड़ती हैं। यहाँ की खूबसूरती बेशक ही आपको अपना दीवाना बना देगी। 3. कामाख्या मंदिर : जूलाघाट मार्ग पर सैनिक छावनी के ठीक ऊपर कुसौली गांव की पहाड़ियों में यह भव्य मंदिर बना है। यह भव्य मंदिर माँ दुर्गा का है। यहाँ की खूबसूरती के तो क्या ही कहने जितना यह मंदिर सुन्दर है उतने ही सूर्यास्त और सूर्यौदय के बेहतरीन नज़ारे और दूसरी तरफ हरी भरी पहाड़ियाँ बेशक ही किसी भी नेचर लवर का दिल जीत लेती है। 4. थलकेदार मंदिर : थल केदार पिथौरागढ़ शहर से 16 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। भगवान शिव का यह पवित्र मंदिर एक फेमस धार्मिक स्थल है जो अपनी सुंदरता और पवित्र शिव लिंग के लिए प्रसिद्ध है। हर साल महा शिवरात्रि के अवसर पर यहाँ एक बड़ा मेला लगता है।  जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु देखने को मिलते है। यह मंदिर सोर घाटी के 8300 फीट ऊँचे पहाड़ की चोटी पर स्थित है।  5. धारचूला : धारचूला, भारत और नेपाल बॉर्डर पर स्थित पहाड़ियों और खूबसूरत वादियों से घिरा हुआ है जोकि पिथौरागढ़ से 90 किमी दूर स्थित है।  यहाँ की सबसे मशहूर और सुन्दर जगहे हैं – (ॐ) ओम पर्वत, नारायण आश्रम, चिरकिला डैम, आदि कैलाश।  कल्चर ऑफ़ पिथौरागढ़ : ऐपण : ऐपण कुमाऊं की एक लोकप्रिय आर्ट है। जिसमें घर के दरवाजों के कोनों  में चित्र बनाये जाते हैं, पूजा की थाल को भगवान के चित्र व अन्य तरीकों से सजाया जाता है. हिलजात्रा महोत्सव : पिथौरागढ़ में कुछ उत्सव सबके साथ मनाये जाते हैं, हिलजात्रा उनमें से एक है। यहाँ गौरा-महेश्वर पर्व के आठ दिन बाद हर साल कुमौड़ में हिलजात्रा का आयोजन किया जाता है। जिसे भारी मात्रा में लोग देखने आते है।  इस पर्व में मुखौटा पहने नृत्य नाटिका के रूप में लखिया भूत बनाया जाता है। जिसे महादेव शिव का सबसे प्रिय गण, वीरभद्र माना जाता है। लखिया भूत के आशीर्वाद को खुशाली का प्रतीक माना जाता है। छलिया डांस : कुमाऊनी कल्चर में जिस शादी में छलियाँ ना हो वह शादी अधूरी है। सुन्दर-सुन्दर तैयार हुवे छलिया की टीम मनो शादी में चार चाँद लगा देती है।  छलिया डांस और उनके करतब अनोखे देखने को मिलते हैं। सभी लोग बैंड-बाजा को परे रख छलिया डांस का आनंद लेते हैं। कुमाऊँ की मानें तो बैंड-बाजे में वो बात कहाँ जो छलियाँ डांस में है। फेमस बाजार और खानपान : अगर आप पिथौरागढ़ आए और ममता जलेबी का स्वाद अपने नहीं

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दिल्ली के नजदीक इन जगहों पर जाकर आप कर सकते है अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन दिनों को कैप्चर राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) – शिवालिक की पहाड़ियों के बीच बसा यह नेशनल पार्क हरिद्वार में स्थित है। यह अपनी खूबसूरती और शांति के लिए पूरी दुनिया में फेमस है। इस नेशनल पार्क के अंदर पवित्र नदी गंगा भी अपनी 24 किलोमीटर की यात्रा करती है। यह नेशनल पार्क दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर की दुरी पर है। राजाजी नेशनल पार्क से सबसे निकटतम हवाई अड्डा देहरादून हवाई अड्डा है जो यहां से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। अगर आप रात को यहां रुकना चाहते है तो 3,4 हजार के बजट में आपको अच्छे होटल मिल जाएंगे। इसमें नदी के किनारे बैठकर सुबह शाम की चाय पीने का और दिन में जंगल सफारी करने का मजा ही अलग है। यह जगह 15 नवंबर से 15 जून तक खुली रहती है। यकीनन आप यहां आकर तनाव से दूर हो जाओगे और एकदम चार्ज होकर ही वापस जाओगे। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे पहले हैली नेशनल पार्क भी कहा जाता था। यह हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है। यह उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी करीबन 250 किलोमीटर है। यहां पर आप किसी भी साधन से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते है। यहां पर आपको 2000 से भी ज्यादा रंग बिरंगी तितलियों की प्रजातियां मिल जाएगी। आप यहां किफायती दाम में होटल या रिसोर्ट में भी रुक सकते हैं। यह कॉर्बेट यकीनन प्रकृति के बहुत करीब और शांति प्रिय है। माउन्ट आबू (Mount Abu) – वैसे तो राजस्थान का नाम आते ही रेतीले पहाड़, पुराने किले, और रजवाड़ों की आन बान शान के चित्र सबके मन में घूमते हैं। परन्तु आपको बता दें कि राजस्थान में माउन्ट आबू बहुत ही शानदार और एक मात्र हिल स्टेशन है। यह राजस्थान की मिटटी की ऐसी खुशबु अपने आप में संजोय हुए है जिसकी खुशबु पूरी दुनिया में मशहूर है। यह एक जमाने में गर्मी से निजात पाने के लिए राजा-महाराजाओं के परिवारों का समर रिसोर्ट हुआ करते थे। यह हिल स्टेशन दिल्ली से लगभग 762 किलोमीटर है। यह गुजरात -राजस्थान बॉर्डर पर बसा बहुत ही सुंदर हिल स्टेशन है। नवंबर से फरवरी का महीना माउंट आबू स्टे करने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है। इन्ही महीनो में पर्यटक यहां बहुत ज्यादा आते है। टिहरी उत्तराखंड (Tehri Uttrakhand) – टिहरी उत्तराखंड की पहाड़ियों की गर्भ में बसा एक बहुत ही सुंदर शहर है जो प्रकृति को अपने अंदर समेटे हुए है। यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यह एक डूबा हुआ शहर है परन्तु यह करीब दो सौ सालों तक आबाद था। यहां पानी भरने की वजह से इसे टूरिस्ट्स प्लेस घोषित कर दिया। यहां अप्रैल से जून और अक्टूबर से दिसंबर तक पर्यटकों का बोलबाला रहता है। यह टिहरी शहर दिल्ली से लगभग 335 किलोमीटर है। यह आकर आप सच में प्रकृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं। तीर्थन वैली (Tirthan Valley) – तीर्थन वैली जो दिल्ली से लगभग 496 किलोमीटर है। यह नेचर लवर्स के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है यहां नदी और पहाड़ों का संगम सच में मन के अंदर के पोसिटिव्ज एनर्जी भर देता है। जिससे देश दुनिया को जाने की इच्छा ओर बढ़ती है। यकींनन यहां जाने के बाद यह जगह आपके बेस्ट प्लेसेस में से एक बन जाएगी। यहां आना मतलब किसी सपने का सच हो जाना। अक्टूबर से अप्रैल तक यह जगह अपने पीक पर होती है। यहां इन दिनों पर्यटकों का तातां लगा रहता है। यहां आपको रहने के लिए कम दाम में अच्छी डील मिल जाएगी।

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Most Popular Winter Festivals in India

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देश के ऐसे प्रसिद्ध मेले जहां आप सर्दियों में पारम्परिक कल्चर और एडवेंचर का भरपूर आनंद उठा सकते हैं भारत रंग-बिरंगे त्योहारों का देश है और देश भर में चाहे कोई भी मौसम हो आपको त्यौहार के साथ मेले हर जगह देखने को मिल जायेंगे। बच्चों की बात करें या महिलाओं की या फिर बूढ़े-बुजुर्गों की मेले की बात होते ही सभी के चेहरों में उत्साह और खुशी की झलक देखने को मिलती है। इन मेलों में बच्चो को झूलों की खुशी , महिलाओ को शॉपिंग की खुशी , और बुजुर्गो को अनेको कार्यक्रम देखने का उत्साह खूब नज़र आता है। सच में ये मेले कुछ समय के लिए एक अलग ही माहौल बना देते है। मेले की रौनक कुछ इस तरह लोगो को आकर्षित करती है कि काम में उलझा हुआ व्यस्त आदमी भी समय निकाल कर अपने परिवार के साथ मेले में जाना पसंद करता है। आज इस ब्लॉग में हम देश भर के ऐसे ही कुछ जाने पहचाने मेलों की बात करेंगे।(Most Popular Winter Festivals in India) प्रसिद्ध मेले : 1. सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेला फरीदाबाद – हरियाणा में आयोजित सूरजकुंड का मेला देश विदेश में काफी मशहूर है। इसकी भव्यता और चहल-पहल के देश विदेशो में काफी चर्चे  होते हैं । यह मेला बसंत ऋतु के दौरान फरवरी के महीने में 01 से 16 तक आयोजित किया जाता है। इस मेले की खास बात यह है कि देश विदेश के कलाकारों के सुन्दर-सुन्दर हैंड-मेड सामान यहाँ देखने व खरीदने को मिलते हैं। चंद शब्दों में इस मेले की खासियत की बात करे तो भारतीय संस्कृति , कला और संगीत सभी कुछ आपको इस मेले में देखने को मिल जायेगा। इस मेले में अपनी विभिन्न  कलाओं का प्रदर्शन करने देश-विदेश से लोग इसमें हिस्सा लेते है। कैसे पहुंचे – सूरज कुंड रोड, लेक वुड सिटी, सूरजकुंड, फरीदाबाद, हरियाणा।  आप जब भी मेट्रो से यहाँ आये तो यहाँ का नजदीकी मेट्रो स्टेशन सूरजकुंड मेले से लगभग 4.3 किमी  की दूरी पर बदरपुर मेट्रो स्टेशन है। वहाँ से आप रिक्शा, ऑटो या कैब लेकर पहुँच सकते है। 2. पुष्कर मेला (राजस्थान) – पुष्कर मेला ,राजस्थान के ही नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है। जहां राजस्थान की बात हो रही हो वहाँ ऊंटों  का जिक्र न हो, यह हो ही नहीं सकता। पुष्कर राज्य का सबसे बड़ा मेला होता है ‘ऊंट मेला’, यहाँ पशुओ पर आधारित बहुत से कार्यक्रम होते है। न केवल राजस्थान बल्कि देश भर से सभी अपने ऊंटों  को सजा कर इस मेले में शिरकत करते हैं, जहा ऊंटों की दौड़ करायी जाती है और जीतने वाले को अच्छा खासा इनाम दिया जाता है। सही मायने में कहा जाये तो ऊंट ही पुष्कर मेले की शान है। माना जाता है कि सब तीर्थों की यात्रा का फल पुष्कर स्नान व दर्शन से मिलता  है। इस बार यह मेला 31 अक्टूबर से 9 नवंबर तक आयोजित किया जायेगा। ये मेला दूर दूर तक फैले रेतीले स्थान पर लगाया जाता है और यहाँ खाने-पीने से लेकर पारम्परिक नृत्य और  सांस्कृतिक कार्यक्रम सब कुछ देखने को मिलता है। कैसे पहुंचे पुष्कर मेले तक –  पुष्कर से सबसे नियरेस्ट रेलवे स्टेशन है अजमेर। अजमेर से पुष्कर की दूरी सिर्फ 11 किलोमीटर है। वहां से आप कैब या ऑटो से पुष्कर आराम से पहुंच सकते है। इसके अलावा पुष्कर दिल्ली-जयपुर हाईवे सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है।  आप यहाँ बस के अलावा अपनी पर्सनल गाड़ी से भी आसानी से पहुँच सकते हैं। 3.रण उत्सव (गुजरात) – वैसे तो गुजरात एक ऐसा राज्य है जहाँ देखने के लिए बहुत कुछ मौजूद है , पर यूँ कहा जाता है की गुजरात जाकर कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। रण उत्सव हर साल अक्टूबर से फरवरी/मार्च के बीच धोरडो में आयोजित  होता है। इस उत्सव में टूरिस्ट यहाँ बने खूबसूरत टेंटों में रह सकते हैं,  जिसमें तमाम सुविधाएँ होती हैं। यहां गुजराती संस्‍कृति से जुड़ें फॉक डांस और म्‍यूजिक, कच्‍छ के कारीगरों का काम और उनके बनाए सामानों की खरीदारी करने व देखने का मौका मिलता है। कैसे पहुंचे रण उत्सव अगर आप कच्छ सड़क मार्ग से आना चाहते हैं तो कच्छ पहुंचने के लिए आप भुज शहर से आ सकते हैं। इसके अलावा अहमदाबाद से राजकोट से कैब बुक करके रोड ट्रिप ले सकते हैं। यदि आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो आपको भुज रेलवे स्टेशन आना होगा।  जहाँ से आप कैब बुक कर सकते हैं। कच्छ से निकटतम रेलवे स्टेशन भुज रेलवे स्टेशन है। 4. जौलजीबी मेला –  दिल्ली से लगभग 565  किलोमीटर और पिथौरागढ़ शहर से 68 किलोमीटर दूर जौलजीबी में यह मेला आयोजित किया जाता है। जौलजीबी गोरी और काली नामक दो नदियों का संगम स्थल होने के कारण प्रसिद्ध है। हर साल ये महीना 14 नवंबर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जो पूरे भारत और नेपाल के लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करता है। इस मेले में दूर-दूर से बड़े-बड़े कलाकार अपनी कलाओ का प्रदर्शन करने आते हैं  और भारी मात्रा में यहां पर्यटक देखने को मिलते हैं । जौलजीबी के मेले में कुमाऊं  और नेपाल का कल्चर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। अगर आप दो देशों नेपाल और भारत खासकर उत्तराखंड का पारम्परिक कल्चर देखना चाहते हैं तो आपको इस मेले में एक बार जरूर आना चाहिए। कैसे पहुंचे इस प्रसिद्ध मेले में – आप यहाँ अपनी पर्सनल गाड़ी से भी आ सकते हैं, नहीं तो पिथौरागढ़ से टैक्सी में आप यहाँ आसानी से पहुंच सकते है।

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दिल्ली के नजदीक ये जगह रहेंगी इन सर्दियों में आउटिंग के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन Written by Sakshi Joshi/Edited by Pardeep Kumar आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी से हर कोई तनाव ग्रस्त है। और अगर आप दिल्ली से है तो जरूर ही आप वीकेंड का इंतज़ार बड़ी ही बेसब्री से करते होंगे क्योकि दिल्ली और वीकेंड एक दूसरे के बिना अधूरे है। मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि ज्यादातर लोग शहर के शोर से दूर किसी शांत जगह में सुकून की तलाश में निकल पड़ते है। और अक्टूबर का  महीना घूमने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है ,क्योकि इस समय भारत के कुछ हिस्सों में मानसून अपने अंतिम पड़ाव पर होता है और हल्की -हलकी ठंड अपनी दस्तक दे रही होती है।  यही कारण है की ये महीना घूमने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। और अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो इन जगहों पे जरूर जाए। 1. जयपुर (Jaipur ) – राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बहुत खूबसूरत जगह है। दिल्ली से जयपुर तक की दुरी लगभग 268 km. है। जयपुर भारत के सबसे बड़े शहरो में गिना जाता है। इसे पिंक सिटी भी कहा जाता है। इस शहर में देखने को लगभग सब कुछ मौजूद है , जैसे – महल , किले , खूबसूरत पहाड़िया , बाग़ बगीचे, संग्रालय । जयपुर में घूमने की प्रसिद्ध जगहें हैं हवा महल , जंतर मंतर , सिटी प्लेस ,जल महल ,गैंटोर ,गलताजी अजमेर का किला ,गोविन्द देवाजी मंदिर , आदि। जयपुर की चका -चौंन  बाजरे गहने ,कपड़े व जूतों के लिए काफी मशहूर है। 2.  शिमला (Shimla) -बेशक ही शिमला का नाम सुनते ही हर किसी के दिलो दिमाग में पहाड़ो की खूबसूरत वादियां आने लगती है, तभी तो इसे पहाड़ो की रानी कहा जाता है।  शिमला की खूबसूरती आपको कुछ दिन और वहाँ रुकने में मजबूर कर देंगी। दिल्ली से शिमला तक का सफर  342 km. का है। अगर आप अक्टूबर या नवंबर के महीने में यहाँ घूमने जा रहे है तो आपने गरम कपडे जरूर ही साथ रखें। क्योकि अब तक इन खूबसूरत वादियों में ठंड अपनी दस्तक दे चुकी होगी। शिमला जाकर अगर आप माल रोड , कुफरी , जाखू हिल्स नहीं देखा तो क्या ही आप शिमला घूमे। 3.  नैनीताल (Nainital ) – उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक ‘नैनीताल’ किसी जन्नत से कम नहीं है। वैसे मन बना लो तो दिल्ली से नैनीताल ज्यादा दूर नहीं है जनाब (315 km.)। नैनीताल की सबसे प्रसिद्ध झील है नैनी झील। कुमाऊं में पहाड़ियों से घिरी ये ‘नैनी झील’ यहाँ सबसे मशहूर है ,और ऐसे नज़रे के साथ चाय के स्टाल्स न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। बर्फ से घिरे पहाड़ो के बीच यह झील बेशक एक अलग ही रोमांच भरा माहौल बना देती है । नैनीताल में घूमने की मशहूर जगहें हैं – ट्रिफिन टॉप (triffin top), किलबरी (kilbury),व्यू पॉइंट (snow view point),हनुमानगढ़ी , लैंड्स एन्ड ,आदि। इनकी खूबसूरती बेषक ही आपका दिल जीत लेगी। 4.  चंडीगढ़ (Chandigarh) – दिल्ली से चंडीगढ़ की दूरी लगभग 243 km. है। अगर आप दिल्ली से है तो आपके लिए चंडीगढ़ एक बहुत अच्छा विकल्प है।पंजाब की राजधनी चंडीगढ़ सिटी ऑफ़ ब्यूटी के नाम से मशहूर है। चंडीगढ़ की यात्रा के दौरान मुर्थल के फेमस पराठे खाना बिलकुल ना भूले। ये आपकी ट्रिप को यादगार बना देंगे। चंडीगढ़ जाकर  इन जगहों में जरूर जाये – फन सिटी ,अंतर्राष्ट्रीय गुड़िया संग्रालय, रोज गार्डन , रॉक गार्डन , सुखना लेक। 5. ऋषिकेश (Rishikesh) –  ऋषिकेश ,उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत जगहों में एक है। देहरादून जिले में स्थित यह शहर हिन्दुओं के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलो में से एक माना जाता है।ये एक बेहतरीन वीकेंड डेस्टिनेशन है ,अगर आप एडवेंचर लवर है तो ऋषिकेश आपके लिए एक बहुत ही अच्छी जगह साबित होने वाली है।  क्योकि यहाँ दूर- दूर से पर्यटक रिवर राफ्टिंग ,और बहुत सारी एडवेंचर्स राइड के लिए आते है। पर ये राइड्स सिर्फ गर्मियों में करायी जाती है,क्योकिअक्टूबर और नवंबर के महीने में ठंड व बारिश के कारण ये राइड्स करा पाना दुर्लभ साबित हो सकता है। त्रिवें घाट , लक्ष्मण झूला , राम झूला , परमार्थ निकेतन आश्रम ,गंगा बीच , ऋषिकेश वेली , आदि यहाँ घूमने की प्रमुख जगह हैं। पहाड़ियों के बीच वाटरफॉल् निकलना तो आम बात है , लेकिन यहाँ के कुछ वाटरफॉल्स बहुत मशहूर है , नीर गढ़ , हिमशैल आदि। इन्हें देखे बिना आपकी ट्रिप अधूरी रह सकती है।

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Joy Gaon Picnic Park – Best Picnic spot near Delhi NCR

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Joy Gaon Picnic Park Jhajjar – जहाँ आप शहरी कल्चर और एडवेंचर के साथ-साथ गाँव के ट्रेडिशनल लुक से भी रूबरू हो सकेंगे…. प्रदीप कुमार फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस शानदार ब्लॉग में आपका स्वागत है आज इस व्लॉग में हम आपको लेके चलेंगे दिल्ली से लगभग 41 किलोमीटर दूर झज्जर-बहादुरगढ़ रोड पर स्थित जॉय गांव पिकनिक पार्क में – जहाँ आप शहरी कल्चर के साथ-साथ गाँव के ट्रेडिशनल लुक से भी रूबरू हो सकेंगे। Joy Gaon Picnic Park Jhajjar How to reach Joy Gaon – रोमांचक जिप लाइन का अनुभव लेना हो या फिर दूर-दूर तक फैले हरे भरे खेतों के बीच में सुकून के पल बिताने हो तो जॉय गांव में आपका स्वागत है। यहाँ शहरी जीवन से दूर आपका बिताया हर पल ग्रामीण कल्चर को अपने में समेटे आपके दिल में बस जायेगा। दिल्ली एनसीआर  में जॉय गांव क्वालिटी टाइम बिताने के लिए एक बेहद शानदार जगह है। अगर आप दिल्ली से पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आना चाहते  हैं तो आप ग्रीन लाइन से  श्री राम शर्मा बहादुरगढ़ मेट्रो स्टेशन उतरकर टैक्सी या कैब से जॉय गांव आ सकते हैं। अगर आप दिल्ली की तरफ से अपने पर्सनल वेह्कल में आना पसंद करते हैं तो आप बहदुरगढ़ बायपास से होते हुए झज्जर रोड ले सकते हैं। यह शानदार पिकनिक स्पॉट बहादुरगढ़  से सिर्फ 15 किलोमीटर की दुरी पर ही है। click the link this vlog at Five Colors of Travel You Tube channel Tickets/टिकट्स  जॉयगाँव में जब आप अंदर जाएंगे तो आपको यहां एक टिकट काउंटर मिलेगा। इस पिकनिक पार्क में अंदर जाने के लिए 5 से 10 साल तक के बच्चों के लिए 650 रूपये  ,10 से 60 साल के लोगों के लिए 1200 रूपये  और सीनियर सिटीजन यानी 60 साल से ज्यादा के ऐज ग्रुप के लिए 1000 रूपये पर पर्सन का टिकट लगता है।  इस टिकट में स्नेक्स, ब्रेकफास्ट लंच और तमाम पिकनिक एक्टिविटीज शामिल है। बता दें कि अगर आप जॉयगांव की ऑफिसियल वेबसाइट से ऑनलाइन बुकिंग करते है तो आपको 5 % का डिस्काउंट भी मिलता है। यहां पर आपको रात को रुकने की व्यवस्था भी मिल जाएगी। यहां आपको रुकने के लिए एकदम लक्ज़री रूम मिलेंगे। जहाँ से आप दूर दूर तक फैली हरयाली और सनसेट के खूबसूरत दृश्य भी देख सकते हैं. डायनिंग हॉल  मैंन एंट्री गेट से जैसे ही आप अंदर जाएंगे तो आपको रिसेप्शन मिलेगा, जहां आप जॉय गाँव से रिलेटेड कोई भी जानकारी ले सकते हैं। हमें बेहद कॉपरेटिव स्टाफ मिला. आप यहां से जैसे ही आगे जाऐंगे तो आपको एक बहुत बड़ा डायनिंग हाल मिलेगा जहां बैठकर आप खाना खा सकते हैं, क्योंकि हम लंच के समय पंहुचे थे इसलिए हमने सबसे यहाँ पहुंच कर लंच किया।  यहां आपको एकदम लजीज खाना मिलेगा, खाने में तरह-तरह की वैराइटी मिलेगी। शाही पनीर, मिक्स वेज, कढ़ी पकोड़ा, पुलाव  से लेकर जलेबी रबड़ी तक यहाँ आपको सब फ़ूड आइटम्स मिल जायेंगे।  Rain Dance & DJ(रेन डांस और डीजे) आप जब डायनिंग हॉल से बाहर आएँगे तो आपको पूरा मस्ती भरा वातावरण मिलेगा।  अगर आप डांस के शौकीन है तो आप यहाँ पर डीजे पर जी भर कर थिरक सकते हैं। यहां आपको रेन डांस की सुविधा भी मिलेगी जिसको हर कोई एन्जॉय करना चाहता है स्पेशलय युथ. अगर आप निशानेबाजी का शोक रखते है तो आप यहाँ तीरंदाजी और शूटिंग का भी लुफ्त उठा सकते हैं। जॉय गांव में आपको लगभग हर ऐज ग्रुप के लिए खूब सारी एक्टिविटीज मिल जाएँगी. यहां आपको एक 7 डी फिल्म भी दिखाई जाती है , जिसमें स्टूडेंट्स के लिए 70 और बड़ों के लिए 100 रूपये का टिकट एक्स्ट्रा लगता है। आप यहां पर मिरर इलुजन का भी मजा उठा सकते हैं। एडवेंचर जोन आप जैसे ही आगे जाएंगे तो आपको एक एडवेंचर जोन मिलेगा यहां आपको  ज़िप लाइन, वॉल क्लाइम्बिंग जैसी बहुत सारी एक्टिविटीज मिल जाएगी, इन एडवेंचर एक्टिविटीज को युथ बड़ी ही मस्ती के साथ करते हैं , यहां पर आपको फोटोज के लिए बहुत सारे खूबसूरत सेल्फी पॉइंट्स भी मिल जाएंगे जैसे रिक्शा ,ट्रैक्टर। आप जब एडवेंचर जोन से आगे बढ़ेंगे तो आपको यहाँ ट्रेडिशनल एक्टिविटीज का जोन मिलेगा जहां जादूगर अपने जादू से सबको आपका मनोरंजन करता दिखाई देगा वहीँ आप  कुम्हार से मिटटी के बर्तन बनाने की आर्ट भी सीख सकते हैं . आपको इसी जोन में एक चम्पी मालिश वाला भी मिलेगा जिससे आप सर में मालिश करवाकर अपनी थकान उतार सकते हैं , ऊंट सवारी इस शानदार पिकनिक स्पॉट में आप झूलों के साथ साथ कार्ट राइड, ट्रेक्टर राइड,कैमल राइड का आनंद भी ले सकतें है ये सब देखकर आपको ऐसा  अनुभव होगा की आप सच में एक गांव में आ गए हो. जॉय गांव में आपको अमेजिंग टॉय ट्रैन राइड मिलेगी जो आपको एकदम रियल ट्रैन का एहसास कराएगी। बच्चों से लेकर फैमिलीज़ तक आपको यहाँ सभी एन्जॉय करते दिखाई देंगे . राजस्थानी कालबेलिया यहां पर आपको राजस्थानी लोक नृत्य कालबेलिया भी देखने को मिलेगा ,जिसे देखकर आप अपने आपको तालियां बजाने से नहीं रोक पाएंगे, आपको यहाँ ग्रामीण रसोई दिखाई देगी जहां बैठकर आप ग्रामीण खाने का लुफ्त उठा सकते ,यकीनन यहाँ आपको अपने पुराने समय की याद आ जाएगी।  अगर आप और अधिक मस्ती के मूड में हैं  तो आप यहां मड़ बाथ और टूबवेल बाथ भी कर सकते हैं। यहां आप बहुत सारे गेम भी खेल सकतें है जैसे क्रिकेट वॉलीबाल। जॉय गांव में आप ट्रेडिशनल ड्रेस पहन कर फोटोग्राफी करवा सकते है. साथ आप यहां अपने हाथों पर बहुत सुन्दर मेहँदी के डिज़ाइन भी बनवा सकते हैं। साथ ही आपको यहां पर इंडोर गेम्स की फैसिलिटीज भी मिल जाएगी जहां आप तरह तरह के गेम्स खेल सकतें है। मिनी चिड़ियाघर इस खूबसूरत पिकनिक पार्क में आपको एक मिनी ज़ू भी देखने को मिलेगा जहां पर आपको पशु पक्षी देखने को मिल जायेंगे. आप जब भी जॉय गांव आएँ तो यकीं मानिये आपका पूरा दिन कैसे बीत जायेगा पता ही नहीं चलेगा . दिल्ली के नजदीक लगभग सभी ऐज ग्रुप के लिए यह एक लाजवाब पिकनिक प्लेस है.