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गुलाबी शहर के नाम से प्रसिद्ध जयपुर से कोई विरला ही होगा जो वाकिफ न हो। भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक राजस्थान की राजधानी जो अपने खानपान से लेकर समृद्ध इतिहास, संस्कृति और कला के कारण भी दुनिया भर में फेमस है।
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कहा जाता है कि इस शहर को वेल्स के राजकुमार के स्वागत की खुशी में गुलाबी रंग से रंगा गया था और तभी से इसे गुलाबी शहर (पिंक सिटी ) के नाम से जाना जाता है। जयपुर शहर का नाम आते ही यहाँ के बड़े-बड़े और भव्य किले दिलोदिमाग में तैरने लगते हैं। और इन्हीं किलों में निसंदेह सबसे पहले जिस किले की छवि उभरती है वो है खूबसूरत आमेर का किला। राजस्थान के जयपुर शहर को और ज्यादा खूबसूरत बना देने वाला ये आमेर का किला, अम्बर किला के नाम से भी जाना जाता है। ये किला ना केवल जयपुर शहर बल्कि पूरे राजस्थान के शानदार पर्यटन स्थलों में से एक है। आमेर का किला इतना प्रसिद्ध है कि यहाँ पर हर रोज छह हजार से भी अधिक लोग घूमने के लिए आते हैं। यह किला राज्य की राजधानी जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर है।

अगर आप इस किले की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, तो सर्दियों के समय में नवंबर से मार्च महीने के बीच यहां जाना सबसे अच्छा माना जाता है। इसका कारण ये है कि रेतीले राजस्थान में दिन के समय मौसम गर्म ही रहता है। ऐसे में धूप और सूरज की गर्मी कभी-कभी आपको बहुत ज्यादा परेशान कर सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप सर्दियों में ही जयपुर जैसे शहर की यात्रा करने की प्लानिंग करें।
इस किले तक पहुंचने के लिए जयपुर से बस, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या कैब ली जा सकती है। आप अजमेरी गेट और एमआई रोड से आमेर शहर के लिए रोडवेज या प्राइवेट बसों से भी जा सकते हैं। आमेर का किला एक पहाड़ी पर है, इसलिए किले का दीदार करने के लिए आपको किले के थोड़ी दूर पहले से ही या तो पैदल चलना होगा या फिर आप टैक्सी या जीप से भी किले के मुख्य द्वार तक पहुँच सकते हैं। या फिर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से भी यहां जा सकते हैं। किले के मुख्य द्वार के पास थोड़ी सपाट चढ़ाई है, इसलिए अगर आप एक्सपर्ट ड्राइवर हैं तो ही अपनी पर्सनल गाड़ी से किले तक जाने का रिस्क लें। अगर आप सीजन के दौरान यहां जा रहे हैं, तो खुद की गाड़ी से जाने से बचना ही बेहतर होगा, क्योंकि ट्रैफिक जाम आपके लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। हालांकि ऐसा सीजनल टाइम में ही ज्यादा होता है।

अंदर प्रवेश करके आप हाथी की सवारी का भी अपना आनंद और रोमांच ले सकते हैं। हाथी सवारी आपके लिए तब और ज्यादा फायदेमंद साबित हो जाती है, जब आप परिवार के साथ किला घूमने गए हो, हालांकि अगर आप हाथी की सवारी करते हुए किले की सैर करना चाहते है, तो एक हाथी की सवारी के लिए आपको लगभग 1000-1,200 रुपये का तक देना पड़ सकता है। याद रहे कि एक हाथी पर दो से ज्यादा पर्यटक सवार नहीं हो सकते। हाथियों की ये सवारी सुबह से ही शुरू हो जाती है।
आमेर के किले के लिए विदेशी सैलानियों से 250 रुपये और भारतीयों सैलानियों से टिकट के 50 रुपये लिए जाते हैं। अगर आप स्टूडेंट हैं, तो जयपुर शहर की यात्रा करते समय अपना स्कूल या कॉलेज आईडी कार्ड ले जाना कभी मत भूलिए, किले की सैर के लिए मिलने वाली टिकटों पर स्टूडेंट्स को भारी छूट दी जाती है, इसके अलावा सात साल से कम उम्र के बच्चे के लिए यहां ज्यादातर जगहों पर टिकट निःशुल्क हैं।


आमेर के किले में टिकट काउंटर सूरज पोल के सामने जलेब चौक प्रांगण में मौजूद है। आप वहां एक ऑफिसियल टूरिस्ट गाइड भी ले सकते हैं। इसके अलावा लंबी लम्बी लाइनों से बचने के लिए आप टिकट ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं।
आमेर के किले की इतिहास की बात करें, तो यह कभी जयपुर रियासत की राजधानी हुआ करती थी। यह किला राजपूत शासकों का निवास स्थान हुआ करता था। मुगल सम्राट अकबर की सेना का नेतृत्व करने वाले महाराजा मान सिंह प्रथम ने 1592 में 11वीं सदी के किले के अवशेषों पर इसका निर्माण शुरू करवाया था।

राजस्थान में छह पहाड़ी किलों के समूह के हिस्से के रूप में किले को 2013 में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी घोषित किया गया। इस किले की वास्तुकला राजपूत (हिंदू) और मुगल (इस्लामी) शैलियों का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
माना जाता है कि 967 ई. में मीणाओं के एक उप कुल में आमेर शहर और आमेर का किला राजा एलन सिंह चंदा द्वारा बसाया और बनाया गया था. चूंकि मीना अंबा माता की भक्त थीं, इसलिए उन्होंने अपने किले का नाम उनके नाम पर आमेर का किला रखा. पहाड़ी पर ऊंचे स्थान पर स्थित इस किले से माओटा झील दिखाई देती है, यह झील ही आमेर पैलेस के लिए पानी का मुख्य स्रोत है।

आपको बता दें आमेर और जयगढ़ किले को एक ही संरचना के रूप में माना जाता है, क्योंकि ये दोनों किले लगभग एक ही परिसर में हैं और खास बात ये कि एक ही भूमिगत मार्ग दोनों किलों को आपस में जोड़ता है। ऐसा माना जाता है कि किसी युद्ध के समय या जब कभी दुश्मन हमला कर दें तो उन हमलों से बचने के लिए इस मार्ग का उपयोग किया जाता था। किले का निर्माण सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मान सिंह प्रथम ने करवाया था। बाद में, अन्य राजपूत शासकों द्वारा इसका आगे विस्तार किया गया। अपनी अद्भुत वास्तुकला के साथ, जो मुगल और हिंदू शैलियों को जोड़ती है, लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना किला, अपने उच्च प्राचीर, कई द्वारों, पत्थरों वाले रास्तों और शानदार दृश्यों के कारण खासा प्रसिद्ध है। वैसे आमेर का यह किला चार भागों में बँटा है जिसका प्रत्येक भाग अपने अलग प्रवेश द्वार और आंगन से सजा हुआ है।

आप किले के परकोटों या खिड़कियों से माओटा झील की खूबसूरती को निहार सकते हैं। बारिशों के बाद यह झील शानदार दिखती है। इन्हीं खूबसूरत वजहों से यह किला जयपुर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है, यही कारण है कि यहां लगभग बारहों महीने अच्छी खासी भीड़-भाड़ रहती है।
हालांकि भीड़-भाड से बचने का एक तरीका ये भी है कि वीकेंड्स से अलग दिनों में यहां आया जाए। तब निसंदेह आप यहाँ आकर और भी बेहतर महसूस करेंगे, और इत्मीनान से इस किले की अद्भुत निर्माण कला का आनंद ले पाएंगे।
किले के विशाल परिसर की सुंदरता का आनंद लेने के लिए ध्यान रखें कि आपने आरामदायक जूते और कपड़े पहन रखें हों। क्योंकि यह किला काफी बड़ा है इसलिए पानी की बोतलें, शेड्स और हैट या कैप अपने साथ जरूर रखें। आपको जानकार अवश्य ही अच्छा फील होगा कि परिसर के भीतर विश्राम कक्ष और कैफे मौजूद हैं, घूमते-घूमते थक जाएँ तो इनका आनंद भी लिया जा सकता है और एनर्जी बूस्ट की जा सकती है।

यह एक ऐसा स्थान है, जहां हर भारतीय और हर कला प्रेमी को जरूर जाना चाहिए, क्योंकि यह अद्भुत कलात्मक चमत्कारों से भरा है, चाहे इसकी पेंटिंग हो, दीवारों की खूबसूरत नक्काशी हो, या फिर किले की वास्तुकला हो। आपको रिझाने के लिए यहाँ लगभग सब कुछ है।
यहां मौजूद अंबर फोर्ट पैलेस इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है. किले के भीतर मुख्य परिसर में दीवान-ए-आम, जनता के लिए एक हॉल, दीवान-ए-खास, निजी दर्शकों के लिए एक अलग हॉल और शानदार शीश महल, जय मंदिर, सुख निवास महल आदि मौजूद है। आप किले का दीदार करते करते इन शानदार इमारतों के कारण आपने आप को एक अलग ही दुनिया में महसूस करोगे।

जैसे ही आप शीश महल में जायेंगे आपको हैरान कर देने वाली नक्काशी दिखाई देगी, जिसे ‘जादुई फूल’ के रूप में जाना जाता है. इसे महल के एक स्तंभ पर संगमरमर के पैनल पर उकेरा गया है. इस पर कमल, शेर की पूंछ, बिच्छू, हुड वाला कोबरा, मछली की पूंछ, सिल या मकई और एक हाथी की सूंड सहित सात सुंदर डिजाइन उकेरे गए हैं. हर एक डिज़ाइन को देखने के लिए आपको पैनल को अपने हाथों से आंशिक रूप से ढंकना होगा. यह नक्काशी एक कलात्मक चमत्कार से कम नहीं लगती.
शीश महल आमेर किले के मुख्य आकर्षणों में से एक है, जिसमें चारों ओर दर्पण और रंगीन कांच का प्रयोग किया गया हैं। यहां अगर एक भी मोमबत्ती जलाई जाती है, तो शीश महल के अंदर हजारों दर्पणों में उसके प्रतिबिंब हजारों सितारों की तरह दिखाई देते हैं। अद्भुत कारीगरी का बेहतरीन नमूना है ये शीश महल।



बलुआ पत्थर और संगमरमर से बने, एम्बर किले में चार आंगनों, महलों, हॉल और उद्यानों की एक श्रृंखला है। आपको इसके प्रवेश द्वार पर एक प्रमुख प्रांगण दिखाई देगा, जिसे जलेब चौक के नाम से जाना जाता है। यहीं पर राजा के सैनिक इकट्ठे होते थे और चारों ओर परेड करते थे। सूरज पोल और चांद पोल इस प्रांगण में आते हैं।


किले के अंदर जलेब चौक प्रांगण से आप इसकी आलीशान सीढ़ियों से दूसरे प्रांगण में पहुंचेंगे जिसमें दीवान-ए-आम है, जहाँ आपको अनेक स्तम्भ दिखाई देंगे ।
किले के पीछे चौथा प्रांगण और मान सिंह का महल है, जो कि महिलाओं के लिए बनाया गया था। किले के सबसे पुराने हिस्सों में से एक, यह 1599 में बनकर तैयार हुआ था। इसके चारों ओर कई कमरे हैं जहाँ राजा अपनी सभी पत्नियों को रखते थे और जब चाहें उनसे मिलने जाते थे। इसके केंद्र में एक मंडप है, जहां रानियां मिलती थीं। आंगन का निकास आमेर शहर की ओर जाता है।

राज्य के समृद्ध इतिहास, परंपरा और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आमेर किले में हर शाम लाइट एंड साउंड शो दिखाया जाता है। अधिकतर टूरिस्ट स्पेशली यह शो देखने भी आते हैं। यह शो लगभग 50 मिनट तक चलता है। टूरिस्ट्स को इस शो के लिए अलग से टिकट लेनी होगी।



आमेर किले में पर्यटकों के लिए मीना बाजार भी बनाया गया है जहाँ से देसी विदेशी पर्यटक अलग-अलग तरह के परफ्यूम, राजस्थानी ज्यूलरी, परम्परागत परिधान और अन्य होम डेकोरेटिव आइटम्स भी खरीद सकते हैं। राजस्थान के इस सबसे भव्य और आकर्षित किले में कई सुपरहिट हिंदी फिल्मों जिसमें बाजीराव मस्तानी, शुद्ध देसी रोमांस, मुगले आजम, भूल भुलैया, जोधा अकबर आदि शामिल हैं, की भी शूटिंग हो चुकी है।
Photo Gallery– Amer Fort









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