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एक होली महोत्सव ऐसा भी जिसमें की जाती है परेड-Shigmo Festival

गोवा का जिक्र होते हीं हमारे मन में सबसे पहले क्या आता है? वहां के खूबसूरत बीच और वहां के रिजॉर्ट्स, क्लब्स और पब! जो वेस्टर्न कल्चर की निशानी है। इसीलिए कई लोगों का मानना है कि इंडिया में अगर वेस्टर्न कल्चर के प्रभाव को देखना है तो इसके लिए गोवा सबसे बेस्ट जगह है। क्योंकि यहां के बीचों की वाइब्स यहाँ आने वाले पर्यटकों का ड्रेसिंग सेंस, पबों में चल रही कॉकटेल पार्टी, सब वेस्टर्न कल्चर की ओर हमें लेकर चलता है।

लेकिन क्या आपको पता है? इसी गोवा में एक ऐसा फेस्टिवल मनाया जाता है, जो इंडियन कल्चर को दुनिया के सामने प्रजेंट करता है। जिसमें आपको भारतीय देवी-देवताओं की झलक देखने को मिलेगी। और तो और इस महोत्सव का गोवा में इतना क्रेज है कि वहां आपको खड़े होने के लिए भी जगह ना मिले। इस ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहे हैं, गोवा (Goa) के इसी फेस्टिवल के बारे में। जिसे दुनिया शिगमो महोत्सव (shigmo mahotsav) के नाम से जानती है। यह उत्सव गोवा की संस्कृति (culture of Goa) की आन बान शान है।

कब मनाया जाता है शिगमो महोत्सव?(when the shigmo festival is celebrated?)

अगर गोवा के शिगमो महोत्सव की बात की जाए तो, यह महोत्सव हिंदी कैलेंडर के फाल्गुन महीने में मनाया जाता है। जो अधिकतर मार्च के महीने में पड़ता है। यह फेस्टिवल फाल्गुन महीने के नवमी के दिन से पूर्णिमा के दिन तक मनाया जाता है। इसे स्प्रिंग फेस्टिवल ऑफ गोवा(Spring festival of Goa) भी कहा जाता है क्योंकि और वसंत ऋतु (spring season) में मनाया जाता है। यह फेस्टिवल (festival) गोवा के कोंकण बीच पर आयोजित किया जाता है। इसे गोवा की होली का भी नाम दिया जाता है।

शिगमो महोत्सव में क्या है खास? (What is special in shigmo festival?)

अब क्योंकि शिगमो महोत्सव होली (Holi) का ही एक दूसरा रूप है, इसलिए आप जिधर भी नजर दौड़ाएंगे उधर सभी को रंगों (colours) से सने हुए पाएंगे। लोगों को एक दूसरे को रंग लगाते, उत्साह के साथ नाचते, जगह-जगह इकट्ठा होकर पारंपरिक नृत्य करते और मंदिरों के परिसर में इकट्ठा होकर पारंपरिक लोकगीत गीत और लोक नृत्य की प्रस्तुति करते देख कर आपको ऐसा लगेगा भारतीय संस्कृति की इस खूबसूरत झलक कहीं भी नहीं दिख सकती है।

शिगमो महोत्सव की खास बात वहां की फ्लोटिंग परेड (floating parade) होती है।
जिसे आप आम भाषा में शोभायात्रा (shobhayatra ) के तौर पर समझ सकते हैं। जो पर्यटकों के लिए सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन (Center Of Attraction) का काम करती है। इस परेड में बड़े-बड़े रिक्शों (Rickshaw) पर कई तरह की झांकियों का प्रदर्शन देखने को मिल जाएंगे। जो इंडियन कल्चर को और उसके हिस्ट्री को बहुत हीं अच्छे तरीके से लोगों के सामने रखती हैं।


शिगमो महोत्सव में हर दिन यहां के लोगों का दिनचर्या अलग अलग होता है। पहले दिन यहां के ग्राम देवता को स्नान करवाया जाता है। उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। फिर पांचवें दिन रंग पंचमी मनाया जाता है। जब सूखे रंग गुलाल का प्रयोग करके होली खेली जाती है। सभी एक दूसरे को रंग लगाते हैं और एक दूसरे से गले मिलते हैं। शिगमो महोत्सव के 11वें और 15वें दिन लोग अलग-अलग तरह के आकर्षक परिधान (colourful costumes) पहनकर ढोल नगाड़ों के साथ गांव में एक परेड निकालते हैं। इस दिन यहां एक झांकी निकलती है, जिसमें भारतीय संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिलती है।

यहां आपको नृत्य के भगवान माने जाने वाले नटराज (Natraj) की प्रतिमा भी झांकी में देखने को मिल जाएगी। लोग ढोल नगाड़े के साथ तलगड़ी, घोड़े मोरनी, फुगड़ी, गोफा और लैंप डांस जैसे कल्चरल डांस (traditional dances) करते हैं और साथ में तरह-तरह के वाद्य यंत्र जैसे ढोल नगाड़े और बांसुरी मधुर धुन (sweet tune) भी बजाते हैं। इस परेड में सब एक दूसरे के साथ मिलकर अपने सारे गमों को भूल कर नाचते गाते और हंसते खेलते नजर आते हैं। यह भाईचारा सामरस्य का एक बेहतरीन उदाहरण होता है।
यह फेस्टिवल (Festival) गोवा के लोकल कल्चर (Local culture) का एक बेहतरीन नजारा दुनिया को दिखाता है।

कैसे पहुंचे शिगमो महोत्सव ?(how to reach?)

अगर आप भी शिगमो महोत्सव में शामिल होना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे आसान और बेहतरीन माध्यम है- हवाई मार्ग द्वारा गोवा पहुंचना! आप गोवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अपने फ्लाइट की टिकट बुक कर सकते हैं। अगर आप ट्रेन से गोवा जाना चाहते हैं तो इसके लिए आप मडगांव के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं और अगर आप वाया रोड जाकर शिगमो महोत्सव सब में शामिल होना चाहते हैं तो यह भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। आप चाहें तो कैब बुक कर सकते हैं या फिर अपनी कार से भी गोवा जा सकते हैं।

By Five Colors Of Travel

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