The sacred Char Dham Yatra in Uttarakhand is one of the most popular Hindu pilgrimages in India.
उत्तराखंड की वादियों में विद्यमान
मैं गंगा की धार हूं
हिंदुत्व का सार हूं
और बद्री का द्वार हूं
मैं छोटी चार धाम हूं।हिन्दुओं का मान हूं
उत्तराखंड की शान हूं
मैं केदारनाथ में बस्ता पंच केदार हूं
और लाखों की आस्था का प्रतीक हूं
मैं चार धाम हूंभगवन शिव को हूँ समर्पित
केदारनाथ का धाम हूं
विष्णु का हूं पवित्र स्थल
हां, मैं ही बद्रीनाथ हूंछः महीने बाद खुलते कपाट
श्रद्धालुओं का करता सत्कार हूं
मैं चार धाम हूं
मैं चार धाम हूं।

हिंदू धर्म के पवित्र स्थल
चार धाम यात्रा भारत की सबसे बड़ी और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है। (Char dham Yatra)जिसमें उत्तराखंड के गढ़वाल रीजन में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री की यात्रा शामिल है। लेकिन इस यात्रा को छोटी चार धाम यात्रा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि चार धाम की एक और यात्रा होती है। जिसमें उत्तराखंड का बद्रीनाथ, गुजरात में द्वारका, उड़ीसा में जगरनाथ पुरी, और तमिलनाडु का रामेश्वरम जैसे पवन स्थल शामिल हैं। हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य माना गया है। और ये माना जाता है कि चार धाम की यात्रा इस लक्ष्य तक पहुंचने की एक मंजिल है। Char Dham Yatra- Kedarnath, Badrinath, Gangotri, Yamunotri.

हिमालय की गोद में बसा चार धाम
पहाड़ो की ऊंचाइयों और श्रद्धालुओं की सेफ्टी का पूरा-पूरा ध्यान रखते हुए यह मंदिर गर्मियों यानि अप्रैल या मई में खुलते हैं, और वहीं सर्दियों की सुरुवात यानि अक्टूबर और नवंबर में बंद हो जाते हैं। माना जाता है कि चार धाम यात्रा दक्षिणावर्त दिशा में पूरी करनी चाहिए और यही कारण है कि, इस चार धाम यात्रा की शुरुआत यमनोत्री से शुरू होती है और बद्रीनाथ में जाकर खतम होती है। श्रद्धालु कोई दो तीर्थ यात्रा जैसे सिर्फ बद्रीनाथ और केदारनाथ के दर्शन भी कर सकते हैं।
Time to Visit Chardham Yatra
चार धाम यात्रा यूं तो सिर्फ छः महीने खुलती है। गर्मियों में अप्रैल से मई तक इसके कपाट खोले जाते हैं।
यमनोत्री धाम

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमनोत्री धाम के कपाट 3 मई से 24 अक्टूबर 2023 तक खोले जायेंगे।
दर्शन का समय सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक है।
गंगोत्री मंदिर

देवी गंगा को समर्पित यह मंदिर समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, गंगोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यहाँ से हरिद्वार 285 किमी और देहरादून 240 किमी है। गंगोत्री के कपाट खुलने का समय 3 मई से 25 अक्टूबर तक है।
यहां मंदिर में पूजा सुबह चार बजे साथ शुरू होती है और शाम को सात बजे आरती के साथ समाप्त होती है |
मंदिर सुबह 6 बजे तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खोल दिया जाता है।
केदारनाथ धाम

भगवान शिव को समर्पित और हिमालय की गोद में स्थित यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र ताल से 3553 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। इस प्राचीन मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भी माना जाता है। केदारनाथ धाम 7 मई से 24 अक्टूबर 2023 तक खुलेगा |
यहाँ सुबह 4 बजे महाभिषेक आरती होती है, और शाम 7 बजे आरती के बाद दर्शन बंद कर दिए जाते हैं।
मंदिर सुबह 6 बजे तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खुलता हैं |
बद्रीनाथ धाम

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से 3300 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। बद्रीनाथ के कपाट 8 मई से 20 नवंबर 2023 तक खोले जायेंगे |
यहाँ अभिषेक पूजा सुबह 4 :30 बजे और सयन पूजा रात्रि 9 बजे होती हैं|
मंदिर आम जनता के लिए सुबह 7 बजे खुलता हैं |
कैसे करें चार धाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन
उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने इस बार रजिस्ट्रेशन में श्रद्धालुओं के लिए कई विकल्प रखे हैं। आप पर्यटन विभाग की ऑफिसियल वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in के जरिये रजिस्ट्रशन करा सकते हैं। इसके अलावा वाट्सएप नंबर 8394833833, टोल फ्री नंबर 1364 और मोबाइल ऐप touristcare uttrakhand app के जरिए भी अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आसानी से करवा सकते हैं। आपको बता दें कि रजिस्ट्रेशन और पैकेज बुकिंग के बाद आप 21 दिन पर अपनी यात्रा कैंसल करते हैं। जिसमें आपके बुकिंग अमाउंट में से 30 प्रतिशत पैसे कट जाते हैं। इसके साथ ही 8 दिन पहले कैंसल करने पर 80 प्रतिशत राशि काटी जाती है, और यात्रा वाले दिन कैंसिल कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा।
यात्रा के दौरान कहाँ ठहरे ? (Where to stay During Chardham Yatra)
चार धाम यात्रा के दौरान रुकने के लिए काफी होटल, गेस्ट हाउस, रिसॉर्ट्स, आश्रम, और धर्मशाला आदि आपको आसानी से मिल जाएंगे। लक्ज़री होटल्स से लेकर अफोर्डेबल रेंज के होटल्स भी आपको मिल जाएंगे। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार गेस्ट हाउस या होटल्स चुन सकते हैं।
कैसे पहुंचे : (How to reach Char Dham)
चारधाम यात्रा देहरादून या हरिद्वार से शुरू होती है। यात्रा शुरू करने के दो तरीके हैं – सड़क और हेलीकाप्टर। आप दोनों में से किसी भी साधन का उपयोग कर तीर्थ स्थलों तक जा सकते हैं।
सड़क मार्ग
आप चार धाम यात्रा हरिद्वार, दिल्ली, ऋषिकेश,और देहरादून से शुरू कर सकते हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन इन पवित्र स्थानों से सबसे निकटम रेलवे स्टेशन है। जहां से आप सबसे पहले हरिद्वार में गंगा आरती कर इन पवित्र स्थलों तक पहुँच सकते हैं। हरिद्वार सड़क और रेल लाइन्स के ज़रिये दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड परिवहन और निजी बसें इन पवित्र तीर्थ स्थलों के लिए उपलब्ध हैं । आपको हिरद्वार, ऋषिकेश, और देहरादून से टैक्सी भी आसानी से मिल जाएगी।
हेलीकॉप्टर द्वारा
देहरादून सहस्त्रधारा हेलीपैड से चार धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध है। हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून से खरसाली तक है, जो यमुनोत्री मंदिर से लगभग 6 किमी दूर है। गंगोत्री मंदिर के लिए निकटतम हेलिपैड हरसिल हेलीपैड है, जो मंदिर से 25 किमी दूर स्थित है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के हेलिपैड मंदिर के पास ही स्थित हैं।
Research by Sakshi Joshi/ Edited by Pardeep Kumar

Five Colors of Travel भारत का एक भरोसेमंद Hindi Travel Blog है जहां आप ऑफबीट डेस्टिनेशन, culture, food, lifestyle और travel tips की authentic जानकारी पढ़ते हैं
2 replies on “Char Dham Yatra 2023 – Kedarnath, Badrinath, Yamunotri and Gangotri ”
[…] जिसकी वजह से ही लोग इस महल को रहस्यमय मानते हैं।कहते हैं कि इसी महल में 30 अगस्त 1773 की रात 18 साल के नारायण राव की हत्या कर दी गई थी, जो मराठा साम्राज्य के नौवें पेशवा बने थे। कहा जाता है कि उनके चाचा ने ही उनकी हत्या करवाई थी। आस-पास के लोगों का कहना है कि आज भी अमावस्या की रात महल से किसी की दर्द भरी आवाज सुनाई देती है, जो बचाओ-बचाओ चिल्लाती है। […]
[…] हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला पहाड़ी क्षेत्र होने के साथ-साथ घाटियों के लिए जाना पहचाना जिला है। इन घाटियों में छोटी बड़ी कई नदियां बहती हैं। अगर पश्चिमी हिमालय में एक ऐसा पहाड़ी क्षेत्र चुना जाए जो प्राकृतिक सौन्दर्य और संसाधनों से भरपूर हो, जिसका अधिकांश क्षेत्र जंगल, नदी,नालों, झीलों, झरनों से भरा हो,जहां बहुत कम लोग निवास करते हो शायद इसका जबाब यही होगा कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला की तीर्थन घाटी। जहां की वादियां शान्त और प्रदूषण मुक्त हो, जहां पर नदी नाले ,झील झरने यहां के दृश्य को बेहद खूबसूरत बनाते हैं। बात चाहे धर्म की हो या धरम स्थली की, कुदरत के नजारों की हो या जैविक विविधिता के अनूपम खजाने की, वास्तव में तीर्थन घाटी का कोई सानी नहीं है। […]