Sao Joao Festival: जहाँ लोग खुशी-खुशी कुओं में कूद जाते हैं!
गोवा का नाम सुनते ही अक्सर ज़हन में बीच और पार्टी आती है, लेकिन क्या आपने कभी गोवा की असली “मानसून वाइब” देखी है? हर साल 24 जून को गोवा एक बिल्कुल अलग रंग में रंगा होता है। इस दिन मनाया जाता है Sao Joao फेस्टिवल, जिसे स्थानीय भाषा में “ज़ांवोयामचेम फेस्ट” (Zanvoiamchem Fest) भी कहा जाता है। यह सेंट जॉन द बैपटिस्ट (St. John the Baptist) को समर्पित है।
इस त्योहार की सबसे खास बात यह है कि लोग फूलों और पत्तियों से बने रंग-बिरंगे मुकुट, जिन्हें कोपेल कहा जाता है, पहनकर कुओं और तालाबों में छलांग लगाते हैं। ऐसा सेंट जॉन द बैपटिस्ट की याद में किया जाता है, यह कोई साधारण धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि मस्ती, संगीत और पानी में कूदने का एक अनोखा जश्न है।
Sao Joao: आखिर कूँए और तालाबों में क्यों कूदते हैं लोग?
इस त्योहार की सबसे बड़ी पहचान है लोगों का कूँए, तालाबों और नदियों में कूदना, जिसे “Leap of Joy” कहा जाता है।

बाइबल की कहानी के मुताबिक, जब कुंवारी मैरी ने अपनी कज़िन एलिजाबेथ (सेंट जॉन की माँ) से मुलाकात की थी, तो उनकी कोख में नन्हे जॉन खुशी से उछल पड़े थे। इसी खुशी के पल को याद करने के लिए आज भी लोग “Sao Joao! Viva Sao Joao!” चिल्लाते हुए पानी में छलांग लगाते हैं। यह बारिश के आने और धरती के फिर से हरा-भरा होने का भी जश्न है।
Sao Joao festival में सिर पर फूलों का ताज क्यों पहना जाता है और उसके पीछे का मतलब
Sao Joao के दिन हर किसी के सिर पर फूलों, पत्तियों और फलों से बना एक सुंदर ताज होता है, जिसे ‘कोपल’ (Kopel) कहते हैं।
ये कोपल सिर्फ सजावट के लिए नहीं होते, बल्कि पर्यावरण से जुड़े हैं। इन्हें बनाने में अक्सर ‘संज़ुआची वाल’ या शतावरी नाम की एक जंगली बेल का इस्तेमाल होता है। डॉक्टर बताते हैं कि यह औषधीय बेल सेहत के लिए बहुत अच्छी होती है और इसे फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) का प्रतीक माना जाता है।
Sao Joao नए दामाद जी के लिए खास: ‘जवायेचें फेस्त‘ (Zanvoiamchem Fest)
गोवा में यह दिन नए शादीशुदा जोड़ों, खासकर दामादों के लिए बहुत स्पेशल होता है। इसे ‘जवायेचें फेस्त’ यानी दामादों का त्योहार भी कहा जाता है।
पुरानी कहानियों के अनुसार, एक बार एक नया दामाद अपने ससुराल गया लेकिन गांव वाले उसे पहचान नहीं पाए, जिसके बाद से उसे पूरे गांव से मिलवाने की परंपरा शुरू हुई। आज भी सासू माँ अपने दामाद को दावत पर बुलाती हैं, फूलों का कोपल पहनाती हैं और उसे फलों से भरी टोकरी, जिसे ‘ओज़ेम’ (Ojem) कहते हैं, भेंट करती हैं।
सिओलिम की बोट परेड: जब नदी बन जाती है स्टेज
अगर आपको Sao Joao का असली मज़ा लेना है, तो सिओलिम (Siolim) जाना सबसे बेस्ट है। यहाँ चपोरा नदी में एक शानदार बोट परेड होती है।
लोग दो नावों को आपस में जोड़कर एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाते हैं जिसे ‘सांगोड’ (Sangodd) कहा जाता है। इन नावों को बहुत खूबसूरती से सजाया जाता है और उन पर लोग नाचते-गाते हुए निकलते हैं। यह परंपरा लगभग 175 साल पुरानी है और इसे देखने के लिए हज़ारों की भीड़ उमड़ती है।
घुमोट का जादू और गोवा का लोक संगीत
बिना संगीत के गोवा का कोई भी त्योहार अधूरा है। Sao Joao में ‘घुमोट’ (Ghumot) की थाप हर तरफ सुनाई देती है। घुमोट मिट्टी के घड़े से बना एक पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जिसे गोवा का ‘हेरिटेज इंस्ट्रूमेंट’ घोषित किया गया है।
लोग पारंपरिक कोंकणी गाने गाते हुए एक कूँए से दूसरे कूँए तक जाते हैं। संगीत के साथ-साथ कांसालेम (झांझ) और मढालम जैसे वाद्य यंत्रों का भी प्रयोग होता है जो माहौल को एकदम संगीतमय बना देते हैं।
पातोलेओ से लेकर सोरपोतेल तक: Sao Joao का जायका
फेस्टिवल में अगर लज़ीज़ खाना न हो तो बात नहीं बनती। Sao Joao के मौके पर ‘पातोलेओ’ (Patoleos) सबसे मशहूर डिश है। यह चावल के आटे का एक डंपलिंग होता है जिसे हल्दी के पत्तों में लपेटकर भाप में पकाया जाता है, इसके अंदर गुड़ और नारियल की फिलिंग होती है।
खाने की टेबल पर सान्नास (चावल के केक), सोरपोतेल (मसालेदार मांस), आमदाश और मौसमी फल जैसे कटहल, आम और अनानास की भरमार होती है। साथ ही, गोवा की खास फेनी के बिना जश्न अधूरा माना जाता है।
क्या बदल रहा है Sao Joao?
आजकल Sao Joao का स्वरूप थोड़ा बदल रहा है। अब सिर्फ गाँवों के कूँए ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े होटलों और रिसॉर्ट्स में पूल पार्टीज़ और कमर्शियल इवेंट्स भी होने लगे हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि इससे त्योहार की पुरानी सादगी कम हो रही है, लेकिन नई पीढ़ी इसे सोशल मीडिया और टूरिज्म के साथ जोड़कर एक नए अंदाज़ में मना रही है। हालाँकि, सिओलिम जैसे गाँवों ने आज भी अपनी जड़ों और परंपराओं को बचाकर रखा है।
Sao Joao फेस्टिवल में कैसे पहुँचें?
अगर आप गोवा के इस अनोखे मानसून फेस्टिवल का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो वहाँ पहुँचना काफी आसान है। अपनी सुविधा और बजट के अनुसार आप फ्लाइट, ट्रेन या बस—तीनों में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।
फ्लाइट से:
गोवा पहुँचने का सबसे तेज़ तरीका फ्लाइट है। यहाँ दो एयरपोर्ट हैं—डाबोलिम एयरपोर्ट और मोपा इंटरनेशनल एयरपोर्ट। देश के लगभग सभी बड़े शहरों से यहाँ के लिए नियमित फ्लाइट्स मिल जाती हैं।
ट्रेन से:
अगर आप बजट में सफर करना चाहते हैं और रास्ते के खूबसूरत नज़ारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो ट्रेन एक बेहतरीन विकल्प है। गोवा के लिए आप मडगांव (Madgaon) या थिवी (Thivim) रेलवे स्टेशन तक टिकट बुक कर सकते हैं।
बस से:
मुंबई, पुणे और बैंगलोर जैसे शहरों से गोवा के लिए स्लीपर, वोल्वो और लग्जरी बसें आसानी से मिल जाती हैं। यह एक किफायती और आरामदायक विकल्प है, खासकर उन यात्रियों के लिए जो रोड ट्रिप का मज़ा लेना चाहते हैं।
फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ़ से कुछ सुझाव
- सुरक्षा का ध्यान रखें: कुएँ या तालाब में कूदते समय सावधानी बरतें। अगर पानी की गहराई का अंदाज़ा नहीं है, तो जोखिम लेने से बचें।
- कोपेल पहनना न भूलें: स्थानीय बाज़ार से एक सुंदर कोपेल खरीदें और इस रंग-बिरंगे उत्सव की परंपरा का हिस्सा बनें।
- स्थानीय व्यंजन ज़रूर चखें: Sao Joao के दौरान मिलने वाले खास गोअन व्यंजन जैसे पटोलेओस और सन्नास का स्वाद लेना न भूलें।
- बोट परेड का आनंद लें: अगर आप सिओलिम जैसे इलाकों में हैं, तो सजी हुई नावों की परेड जरूर देखें। यह उत्सव के सबसे आकर्षक हिस्सों में से एक है।
- स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें: यह सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि गोवा की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, इसलिए स्थानीय रीति-रिवाजों और लोगों की भावनाओं का सम्मान करें।
तो अगली बार जब मानसून में गोवा जाने का प्लान बने, तो Sao Joao की इस शानदार मस्ती का हिस्सा ज़रूर बनें!





