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भारत का एक मात्र मंदिर जहाँ मूषक नहीं मोर है गणेश जी की सवारी-खासियत जानकर रह जायेंगे दंग

त्रिशुंड गणपति मंदिर-भारत का एक मात्र मंदिर

कब हुआ था मंदिर का निर्माण

मंदिर की नींव 1754 में भिक्षुगिरि गोसावी ने रखी और 1770 में यह बन कर पूरा हुआ। मान्यताओं के अनुसार शुरुआत में यह एक शिव मंदिर था, फिर गणपति मंदिर बन गया। मंदिर संगमरमर व देक्कन बेसाल्ट पत्थर से बना है। बाहरी दीवारों की नक्काशी में घोड़ों, गैंडों, अंग्रेज़ सैनिकों और युद्ध के मैदानों जैसे दृश्य बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि ये नक्काशी 1757 में हुई प्लासी की लड़ाई के बाद बंगाल और असम पर अंग्रेजों की जीत को दिखाती है। वहीं दूसरी ओर मंदिर की बनावट में मालवा, राजपूताना और द्रविड़ शैलियों का खूबसूरत मेल दिखता है। दीवारों पर तीन लिपियाँ—देवनागरी, संस्कृत और फ़ारसी—मानना हैं कि यह मंदिर सांस्कृतिक और धार्मिक सार्वभौमिकता को दर्शाता है।

त्रिशुंड गणपति मंदिर-भारत का एक मात्र मंदिर

गुरु पूर्णिमा पर खुलता है मंदिर के विशेष तहखाने का दरवाजा

त्रिशुंड गणपति मंदिर-भारत का एक मात्र मंदिर

गणेश चतुर्थी पर जगमगा उठता है मंदिर

भारत का यह एक मात्र मंदिर -त्रिशुंड गणपति मंदिर खासतौर पर गणेश चतुर्थी और गुरु पूर्णिमा पर रौशनी से जगमगा उठता है। इन दिनों मंदिर को अच्छे से सजाया जाता है,ऐसे खास मौकों पर भजन-कीर्तन, ढोल-मंजीरे और भक्तों की सामूहिक प्रार्थना और भक्ति भाव  पूरे वातावरण को दिव्यता और सौन्दर्यता से भर देते हैं। दूर-दूर से यहाँ भक्त आकर न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि आत्मिक शांति और आस्था की अनुभूति भी करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां से भावपूर्ण भक्ति द्वारा हर मनोकामना पूर्ण होती है

यह मंदिर पुणे के सोमवार पेठ (Somwar Peth) इलाके में स्थित है, कमला नेहरू हॉस्पिटल के पास।

भक्तों के लिए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के विशेष सुझाव

त्रिशुंड गणपति मंदिर-भारत का एक मात्र मंदिर

1*भीड़-भाड़ और तंग गलियों में स्थित होने के कारण पार्किंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है; सुझाव है कि ऑटो या लोकल परिवहन से आएँ। 2*यदि संभव हो तो सुबह (7–8 ) या शाम (4–6 ) में दर्शन करिए — तब मौसम सुहावना होता है और भीड़ भी थोड़ी कम रहती है। 3*आसपास स्थित अन्य मंदिर (जैसे नागेश्वर मंदिर, जूनी बेलबाग मंदिर) भी दर्शन योग्य हैं। अगर आप यहाँ आये ही हैं तो इन मंदिरों के भी दर्शन कर सकते हैं। बाकी तो सब बढ़िया ही है…..

A story by Pardeep Kumar

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