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पहली बार Assam जा रहे हैं? ये पूरी गाइड जरूर पढ़ें

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अगर आप 2026 में किसी ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं, जहाँ प्रकृति, संस्कृति, वन्यजीव और इतिहास एक साथ देखने को मिले, तो Assam आपके लिए एक शानदार डेस्टिनेशन हो सकता है। उत्तर-पूर्व भारत का यह खूबसूरत राज्य विशाल ब्रह्मपुत्र नदी, हरे-भरे चाय के बागानों, घने जंगलों और रंग-बिरंगी संस्कृति के लिए जाना जाता है। Assam में आपको प्राचीन मंदिर, शांत गांव, नदी द्वीप, ऐतिहासिक स्मारक और देश के प्रसिद्ध नेशनल पार्क देखने का मौका मिलता है। अगर आपने अब तक उत्तर-पूर्व भारत की यात्रा नहीं की है, तो अपनी पहली यात्रा की शुरुआत Assam से करना एक अच्छा फैसला हो सकता है। Assam घूमने का सबसे अच्छा समय किसी भी यात्रा को यादगार बनाने के लिए सही मौसम चुनना बहुत जरूरी होता है। Assam  घूमने का सबसे अच्छा समय आमतौर पर अक्टूबर से अप्रैल के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और ज्यादातर पर्यटन स्थल घूमने के लिए सुविधाजनक होते हैं। अगर आपका सपना काजीरंगा नेशनल पार्क में गैंडे देखने का है, तो नवंबर से मार्च तक का समय बेहतर रहेगा। वहीं चाय के बागानों की हरियाली देखने के लिए मार्च और अप्रैल भी अच्छे महीने माने जाते हैं। मानसून के दौरान Assam की प्राकृतिक खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन भारी बारिश और बाढ़ की वजह से कई इलाकों में यात्रा प्रभावित हो सकती है। पहली बार Assam घूमने वाले यात्रियों के लिए सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है।  गुवाहाटी से शुरू करें Assam की यात्रा लगभग हर पर्यटक की Assam यात्रा गुवाहाटी से शुरू होती है। यह राज्य का सबसे बड़ा शहर होने के साथ-साथ उत्तर-पूर्व भारत का प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब भी है। देश के कई बड़े शहरों से यहां फ्लाइट और ट्रेन की सुविधा मिल जाती है। गुवाहाटी की सबसे प्रसिद्ध जगह कामाख्या मंदिर है। नीलाचल पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। अगर आप शाम के समय गुवाहाटी में हैं, तो ब्रह्मपुत्र नदी पर रिवर क्रूज का अनुभव जरूर लें। सूर्यास्त के समय नदी से शहर का नजारा बेहद सुंदर दिखाई देता है। इसके अलावा उमानंद मंदिर भी गुवाहाटी का प्रमुख आकर्षण है। यह मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित एक छोटे से द्वीप पर बना है। नाव से यहां पहुंचना अपने आप में यादगार अनुभव होता है। काजीरंगा नेशनल पार्क: Assam की सबसे बड़ी पहचान जब भी Assam का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले काजीरंगा नेशनल पार्क का ख्याल आता है। यह पार्क एक सींग वाले भारतीय गैंडे के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी प्राप्त है। काजीरंगा में गैंडे के अलावा जंगली हाथी, रॉयल बंगाल टाइगर, जंगली भैंसे, दलदली हिरण और कई तरह के पक्षी देखने को मिलते हैं। सुबह की जीप सफारी और हाथी सफारी यहां के सबसे लोकप्रिय अनुभवों में शामिल हैं। जंगल के बीच सूर्योदय के समय सफारी करना रोमांच से कम नहीं लगता। अगर आपको वन्यजीव और फोटोग्राफी पसंद है, तो काजीरंगा देखे बिना असम की यात्रा अधूरी मानी जाएगी। सफारी की बुकिंग पहले से करना बेहतर रहता है, खासकर व्यस्त पर्यटन सीजन में।  मानस नेशनल पार्क: प्रकृति के बीच शांत अनुभव काजीरंगा जितना प्रसिद्ध है, मानस नेशनल पार्क उतना ही शांत और प्राकृतिक अनुभव देने वाला स्थान है। भूटान की सीमा के पास स्थित यह पार्क अपनी जैव विविधता और खूबसूरत जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां गोल्डन लंगूर, पिग्मी हॉग, हाथी, तेंदुए और कई दुर्लभ पक्षी देखने को मिल सकते हैं। अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ शांत समय बिताना चाहते हैं, तो मानस नेशनल पार्क जरूर घूमना चाहिए। यहां जाने से पहले पार्क के खुले रहने, सफारी और स्थानीय मौसम की जानकारी जरूर ले लें, क्योंकि जंगलों में मौसम के अनुसार सुविधाओं में बदलाव हो सकता है।  माजुली: ब्रह्मपुत्र नदी का खूबसूरत द्वीप Assam की असली सांस्कृतिक पहचान माजुली में देखने को मिलती है। ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित माजुली अपनी वैष्णव संस्कृति, पुराने सत्रों, मिट्टी और बाँस के घरों तथा शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आबाद नदी द्वीपों में गिना जाता है। माजुली पहुंचने के बाद आपको ऐसा महसूस होगा जैसे शहर की तेज रफ्तार से दूर समय धीरे-धीरे चल रहा हो। यहां साइकिल या स्कूटर किराये पर लेकर गांवों की सैर करना बेहद अच्छा अनुभव होता है। स्थानीय मिशिंग समुदाय की संस्कृति, पारंपरिक भोजन, लोक संगीत और लोगों की सादगी हर यात्री का दिल जीत लेती है। माजुली जाने के लिए फेरी का समय पहले से देखना जरूरी है। शाम के बाद फेरी सेवाएं सीमित हो सकती हैं, इसलिए अपनी यात्रा उसी हिसाब से तैयार करें। जोरहाट: चाय के बागानों की खुशबू से भरा शहर अगर Assam की पहचान किसी एक चीज से जुड़ी है, तो वह है यहां की प्रसिद्ध चाय। जोरहाट को असम की टी सिटी के रूप में भी जाना जाता है। यहां दूर-दूर तक फैले चाय के बागान किसी हरी चादर की तरह दिखाई देते हैं। सुबह की हल्की धूप जब चाय के पौधों पर पड़ती है, तो पूरा इलाका बेहद सुंदर नजर आता है। कई चाय बागान पर्यटकों को टी टूर का मौका भी देते हैं। इस दौरान आप चाय की पत्तियां तोड़ने से लेकर उन्हें तैयार करने तक की प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं। अगर आप प्रकृति के बीच कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं, तो जोरहाट आपके लिए अच्छी जगह है।  शिवसागर: अहोम साम्राज्य का गौरव इतिहास पसंद करने वालों के लिए शिवसागर किसी खजाने से कम नहीं है। यह शहर लंबे समय तक अहोम साम्राज्य की राजधानी रहा था। यहां मौजूद रंग घर, तलातल घर और शिव डोल मंदिर उस दौर की शानदार वास्तुकला और इतिहास की कहानी बताते हैं। रंग घर का अनोखा आकार और तलातल घर की भूमिगत संरचना पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है। वहीं शिव डोल मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अगर आप असम के इतिहास और संस्कृति को करीब से जानना चाहते हैं, तो शिवसागर को अपनी यात्रा में जरूर शामिल करें।  हाफलॉन्ग: असम का खूबसूरत हिल

Assam Chai Gardens Travel North East

Assam Chai Gardens: असम के 10 खूबसूरत चाय बागान और प्राकृतिक पर्यटन स्थल

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जब भी भारत की सबसे खूबसूरत और सुकून भरी जगहों की बात होती है, तो असम का नाम दिल में एक अलग सी जगह बना लेता है। हरे-भरे पहाड़, दूर-दूर तक फैले Chai बागान, बहती हुई ब्रह्मपुत्र नदी, रंग-बिरंगी संस्कृति और लज़ीज़ खाने की खुशबू- असम हर travel lover के लिए किसी ख़्वाब से कम नहीं है। अगर आप शहर की भागदौड़ और रोज़ की hustle life से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो असम की वादियां आपको सुकून और ताज़गी का एहसास कराएंगी। यहां की सुबह चाय की पत्तियों की महक के साथ होती है और शामें प्रकृति की खूबसूरती में खो जाती हैं। यह जगह सिर्फ घूमने के लिए नहीं बल्कि एक ऐसा तजुर्बा है, जो आपके सफर की यादों में हमेशा शामिल रहेगा। तो आइए जानते हैं असम की उन खूबसूरत जगहों के बारे में, जहां आपको चाय बागानों की असली दुनिया और प्रकृति का शानदार नज़ारा देखने को मिलेगा। 1. जोरहाट के चाय बागान 1. इस जगह के बारे में जानकारी जोरहाट को असम की चाय राजधानी कहा जाता है। यहां फैले विशाल chai बागान दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता और खूबसूरती के लिए मशहूर हैं। सुबह की हल्की धूप जब हरी पत्तियों पर पड़ती है, तो पूरा नज़ारा किसी फिल्मी scene जैसा लगता है। 2. इस स्थान की विशेषता जोरहाट के चाय बागानों की सबसे खास बात यहां की शांति और प्राकृतिक सुंदरता है। यहां आप चाय बनाने की प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं और एक शानदार countryside experience का आनंद ले सकते हैं। 3. यहां क्या देखें? 1. विशाल चाय बागान 2. चाय फैक्ट्री टूर 3. सूर्योदय और सूर्यास्त के खूबसूरत नज़ारे 4. स्थानीय गांवों की संस्कृति 4. घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल के बीच का समय यहां घूमने के लिए सबसे शानदार माना जाता है। सुबह और शाम का मौसम खासतौर पर बेहद खूबसूरत होता है। 5. कैसे पहुंचे? जोरहाट एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। 2. डिब्रूगढ़ के चाय बागान 1. इस जगह के बारे में जानकारी डिब्रूगढ़ भारत के सबसे बड़े चाय उत्पादन क्षेत्रों में से एक है। यहां के अनगिनत चाय बागान हर तरफ हरियाली की चादर बिछा देते हैं। यह जगह nature lovers और photography के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। 2. इस स्थान की विशेषता यहां की premium quality Assam chai और शांत माहौल हर किसी को अपनी ओर खींचता है। यहां का सफर आपको सुकून और ताज़गी से भर देता है। 3. यहां क्या देखें? 1. पुराने और ऐतिहासिक chai बागान 2. chai फैक्ट्रियां 3. ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे का नज़ारा 4. लोकल मार्केट और संस्कृति 4. घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च तक का समय यहां यात्रा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। 5. कैसे पहुंचे? डिब्रूगढ़ में एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन दोनों मौजूद हैं, जहां से देश के कई हिस्सों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। 3. तिनसुकिया के chai बागान 1. इस जगह के बारे में जानकारी असम के पूर्वी भाग में स्थित तिनसुकिया अपने खूबसूरत chai बागानों और प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की हरियाली और शांति आपके दिल को सुकून देती है। 2. इस स्थान की विशेषता तिनसुकिया में आपको असम की असली रूह और प्रकृति की सादगी देखने को मिलती है। यहां घूमना किसी postcard जैसी दुनिया में कदम रखने जैसा महसूस होता है। 3. यहां क्या देखें? 1. हरे-भरे chai बागान 2. प्राकृतिक दृश्य 3. लोकल गांव और उनकी जीवनशैली 4. photography के शानदार spots 4. घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का समय यहां घूमने के लिए बेहतरीन रहता है। 5. कैसे पहुंचे? तिनसुकिया रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। नजदीकी हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ में स्थित है। 4. हाफलोंग के chai बागान और पहाड़ी खूबसूरती 1. इस जगह के बारे में जानकारी हाफलोंग असम का एकमात्र हिल स्टेशन है। पहाड़ों, झीलों और हरियाली के बीच बसे इसके chai बागान आपकी trip को यादगार बना देते हैं। 2. इस स्थान की विशेषता यहां की untouched beauty, ठंडी हवाएं और शांत माहौल इसे एक perfect escape बनाते हैं। यहां आप प्रकृति के बीच खुद को refresh महसूस करेंगे। 3. यहां क्या देखें? 1. हाफलोंग झील 2. आसपास के chai बागान 3. पहाड़ी घाटियां और जंगल 4. सूर्योदय और सूर्यास्त के नज़ारे 4. घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल तक का समय यहां घूमने के लिए शानदार रहता है। 5. कैसे पहुंचे? हाफलोंग ट्रेन और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। नजदीकी एयरपोर्ट सिलचर में है। 5. गोलाघाट के chai बागान 1. इस जगह के बारे में जानकारी गोलाघाट के chai बागान प्रकृति की खूबसूरत तस्वीर पेश करते हैं। यहां की हरियाली और ताज़ा हवा आपको शहर के शोर से दूर एक अलग दुनिया का एहसास कराती है। 2. इस स्थान की विशेषता यहां आपको chai बागानों के साथ असमी संस्कृति और गांवों की सादगी देखने को मिलती है। 3. यहां क्या देखें? 1. विशाल chai बागान 2. पारंपरिक असमी गांव 3. प्राकृतिक दृश्य 4. स्थानीय भोजन और संस्कृति 4. घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल तक का समय यात्रा के लिए बेहतरीन है। 5. कैसे पहुंचे? गोलाघाट सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। नजदीकी एयरपोर्ट जोरहाट और डिब्रूगढ़ हैं। 6. काज़ीरंगा के आसपास के चाय बागान 1. इस जगह के बारे में जानकारी अगर आप wildlife और चाय gardens दोनों का मज़ा लेना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए शानदार है। यहां प्रकृति और रोमांच का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। 2. इस स्थान की विशेषता एक तरफ हरे-भरे चाय बागान और दूसरी तरफ जंगली जीवन की दुनिया इस जगह को बेहद खास बनाती है। 3. यहां क्या देखें? 1. चाय बागान 2. जंगल सफारी 3. दुर्लभ वन्यजीव 4. प्राकृतिक दृश्य 4. घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल तक का समय यहां घूमने के लिए आदर्श है। 5. कैसे पहुंचे? गुवाहाटी और जोरहाट से सड़क मार्ग द्वारा काज़ीरंगा आसानी से पहुंचा जा सकता है। 7. गुवाहाटी के पास के चाय बागान 1. इस जगह के बारे में जानकारी गुवाहाटी सिर्फ मंदिरों

Majuli Island Travel North East

Majuli Island: दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप क्यों हो रहा है छोटा?

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क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है जो अपनी संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी पहचान के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हो, लेकिन साथ ही अपने अस्तित्व की लड़ाई भी लड़ रही हो? असम का Majuli Island ऐसी ही एक जगह है। ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित Majuli Island दुनिया का सबसे बड़ा बसा हुआ नदी द्वीप माना जाता है। हर साल हजारों पर्यटक यहाँ की संस्कृति, सादगी और प्राकृतिक सुंदरता को देखने आते हैं, लेकिन इसके साथ ही एक सवाल लगातार चर्चा में बना हुआ है-क्या माजुली धीरे-धीरे गायब हो रहा है? क्यों खास है Majuli Island? Majuli Island सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह द्वीप अपनी वैष्णव परंपरा, प्राचीन सत्रों और स्थानीय जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यहाँ के सत्र सदियों से असम की कला, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक परंपराओं को संरक्षित करते आ रहे हैं। Majuli Island में रहने वाला मिसिंग समुदाय अपनी अलग संस्कृति और जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लोग बांस के बने ऊँचे घरों, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘चांगघर’ कहा जाता है, में रहते हैं ताकि बाढ़ के दौरान सुरक्षित रह सकें। वर्ष 2016 में माजुली को भारत का पहला नदी द्वीप जिला घोषित किया गया था, जिससे इसकी पहचान और भी मजबूत हुई। क्या सच में आधा हो चुका है Majuli Island? यह सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि Majuli Island का आकार पिछले कई दशकों में तेजी से घटा है। 1950 के आसपास इसका क्षेत्रफल लगभग 1,250 वर्ग किलोमीटर बताया जाता था, जबकि आज यह घटकर लगभग 450 से 515 वर्ग किलोमीटर के बीच रह गया है। यानी पिछले कुछ दशकों में Majuli Island का बड़ा हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव की भेंट चढ़ चुका है। यही कारण है कि पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय लोग लगातार इसके भविष्य को लेकर चिंता जताते रहे हैं। कई रिपोर्टों में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि यदि कटाव की यही गति जारी रही तो आने वाले वर्षों में माजुली को और बड़ा नुकसान हो सकता है। आखिर क्यों सिकुड़ रहा है Majuli Island? ब्रह्मपुत्र का लगातार कटाव Majuli Island के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदी का कटाव है। ब्रह्मपुत्र भारत की सबसे शक्तिशाली नदियों में से एक मानी जाती है। इसकी तेज धाराएँ हर साल द्वीप के किनारों की मिट्टी को काटती रहती हैं। चूँकि Majuli Island की मिट्टी काफी हद तक रेतीली और नरम है, इसलिए यह कटाव का ज्यादा सामना नहीं कर पाती। 1950 का विनाशकारी भूकंप साल 1950 में आए बड़े भूकंप ने पूरे क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को प्रभावित किया था। विशेषज्ञों के अनुसार इस भूकंप के बाद नदी के बहाव और तल में बदलाव आया, जिसका असर Majuli Island पर भी पड़ा। इसके बाद कटाव की समस्या और गंभीर होती चली गई। Monsoon और जलवायु परिवर्तन का असर हर साल Monsoon Season के दौरान ब्रह्मपुत्र का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। भारी वर्षा और बाढ़ के कारण Majuli Island के कई हिस्सों में कटाव बढ़ जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में आए बदलावों को भी इस समस्या का एक बड़ा कारण माना जाता है। मानवीय हस्तक्षेप और तटबंध विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के ऊपरी क्षेत्रों में बने तटबंधों और अन्य परियोजनाओं ने भी जल प्रवाह के स्वरूप को प्रभावित किया है। इसका दबाव कई बार Majuli Island के किनारों पर अधिक पड़ता है, जिससे कटाव की गति बढ़ जाती है। जहाँ संकट है, वहीं उम्मीद भी है कटाव की चुनौती के बावजूद Majuli Island के लोग लगातार अपने द्वीप को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रयास का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हैं Jadav Payeng, जिन्हें ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने वर्षों की मेहनत से एक बंजर क्षेत्र को सैकड़ों हेक्टेयर में फैले घने जंगल में बदल दिया, जिसे आज मोलाई फॉरेस्ट के नाम से जाना जाता है। यह जंगल मिट्टी को मजबूती देने और कटाव कम करने में मददगार माना जाता है। इसके अलावा कई स्थानीय गाँवों के लोग भी बांस के अस्थायी तटबंध बनाकर अपनी जमीन बचाने का प्रयास करते हैं। Majuli Island में क्या देखें? यदि आप Majuli Island की यात्रा पर जा रहे हैं, तो यहाँ के प्रसिद्ध सत्र, मिसिंग समुदाय के पारंपरिक गाँव, मुखौटा कला (Mask Making), स्थानीय हस्तशिल्प और ब्रह्मपुत्र के शांत किनारे जरूर देखें। यहाँ का ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक वातावरण शहरों की भागदौड़ से बिल्कुल अलग अनुभव देता है। Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव स्थानीय कारीगरों से सामान खरीदें, ताकि उनकी आजीविका को सहयोग मिल सके। प्लास्टिक का उपयोग कम करें और प्राकृतिक स्थलों पर कचरा न फैलाएँ। होमस्टे में ठहरने का अनुभव लें, इससे स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलता है। Majuli Island के संरक्षण के बारे में लोगों को जागरूक करें, ताकि इसके बचाव के प्रयासों को समर्थन मिल सके। यात्रा की योजना समय रहते बनाएं, क्योंकि यह जगह प्राकृतिक बदलावों के कारण लगातार चर्चा में रहती है। Majuli Island सिर्फ असम की पहचान नहीं बल्कि प्रकृति और इंसान के रिश्ते की एक अनोखी कहानी है। यह हमें याद दिलाता है कि नदियाँ केवल पानी की धाराएँ नहीं होतीं, बल्कि उनके साथ पूरी सभ्यताएँ और संस्कृतियाँ जुड़ी होती हैं। आज माजुली अपनी सुंदरता से लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी देता है कि अगर प्रकृति के साथ संतुलन नहीं बनाया गया, तो हमारी कई अनमोल धरोहरें धीरे-धीरे हमसे दूर हो सकती हैं।

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Top 7 National Parks in Assam

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। यहां आप शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं असम के सभी नेशनल पार्क्स (National Parks in Assam) के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। कैसे पहुंचे काजीरंगा नेशनल पार्क (How to reach Kaziranga National Park)?  2. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। कैसे पहुंचे मानस नेशनल पार्क (How to reach Manas National Park)?  3. नामेरी नेशनल पार्क (Nameri National Park) नामेरी राष्ट्रीय उद्यान हिमालय की तलहटी में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, असम के सोनितपुर जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क एक टाइगर रिजर्व भी है जो असम में मानस टाइगर रिजर्व के बाद दूसरा है। नामेरी नेशनल पार्क लगभग 210 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1998 में हुई थी। नामेरी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), जंगली हाथी (Wild Elephant), क्लाउडेड लेपर्ड (Clouded Leopard), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), जंगली सुअर (Wild Pig) आदि शामिल है। कैसे पहुंचे नामेरी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nameri National Park)? 4. ओरांग राष्ट्रीय उद्यान (Orang National Park) ओरांग राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के darang और सोनितपुर जिले में स्थित है। ओरांग नेशनल पार्क लगभग 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1985 में हुई थी। सर्वप्रथम ओरांग राष्ट्रीय उद्यान को 1985 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात 13 अप्रैल 1999 को इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया। ओरांग राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), एशियाई एलीफैंट (Asian Elephant), पिग्मी हॉग (Pygmy Hog), भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ मछलियों की 50 से अधिक प्रजातियां पायी जाती है। कैसे पहुंचे ओरांग राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Orang National Park)? 5. रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान असम का छठा नेशनल पार्क है जो, असम के कोकराझार जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र इंडो-भूटान बॉर्डर और पश्चिम बंगाल की राज्य सीमा से लगती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), हॉर्नबिल (Hornbill), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), भारतीय गौर (Indian Gaur), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां तथा तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां निवास करती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि का कारण यह है कि, यहाँ गोल्डन लंगूर पाए जाते है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ वनस्पतियों की लगभग 380 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कैसे पहुंचे रायमोना राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Raimona National Park)? 6. डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Dibru-Saikhowa National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क लगभग 340 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी उत्तर में एवं डिब्रू नदी इस पार्क के दक्षिण में बहती है। डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), स्पॉटेड तेंदुआ (Spotted Leopard), तेंदुआ (Leopard), स्लॉथ बीयर (Sloth Bear), जंगली बिल्ली (Wild Cat), जंगली घोड़ा (Wild Horse), एशियाई हाथी (Asian Elephant) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां रहती है। कैसे पहुंचे डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dibru-Saikhowa National Park)? 7. देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Dehing Patkai National Park) देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान असम में एक नेशनल पार्क है जो, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। देहिंग पटकाई नेशनल पार्क लगभग 231 वर्ग किलोमीटर के

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जंगली बिल्लियों की सात अलग-अलग प्रजातियों का घर है दिहिंग पाटकाई नेशनल पार्क

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दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Dehing Patkai National Park) असम में एक नेशनल पार्क है जो, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। दिहिंग पाटकाई नेशनल पार्क लगभग 231 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 2004 में हुई थी। सर्वप्रथम, दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान को 13 जून 2004 को वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात 13 दिसंबर 2020 को इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया। इस नेशनल पार्क को एलीफैंट प्रोजेक्ट के तहत एक एलीफैंट रिजर्व घोषित कर दिया गया था। देहिंग पटकाई नेशनल पार्क भारत में तराई वाले भागों में वर्षावनों का सबसे बड़ा क्षेत्र है। यह भारत का एकमात्र नेशनल पार्क है जहाँ वाइल्ड कैट्स की सात अलग-अलग प्रजातियां रहती है, जिसमें टाइगर, लेपर्ड, क्लाउडेड तेंदुआ, लेपर्ड कैट, गोल्डन कैट, जंगली बिल्ली और मार्बल कैट शामिल हैं। फॉउना (Fauna in Dehing Patkai National Park) दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 293 प्रजातियां, मछलियों की 50 प्रजातियां, रेप्टाइल्स की 47 प्रजातियां, मैमल्स की 50 प्रजातियां और तितलियों की 310 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से स्टंप-टेल्ड मकाक (Stump-tailed macaque), पिग-टेल्ड मकाक (pig-tailed macaque), मलायन सन भालू (Malayan sun bear), एशियाई जंगली कुत्ता (Asian wild dog), छोटे दांतों वाला पाम सिवेट (small-toothed palm civet), चाईनीज पैंगोलिन (Chinese pangolin), क्रैब ईटिंग मोंगूज़ (crab-eating mongoose), हिमालयी काला भालू (Himalayan black bear), बिंटूरोंग (Binturong), एशियाई सुनहरी बिल्ली (Asian golden cat), तेंदुआ बिल्ली (leopard cat), जंगल बिल्ली (Jungle cat), स्लो लोरिस (slow loris), असमिया मकाक (Assamese macaque), हूलॉक गिब्बन (hoolock gibbon), कैप्ड लंगूर (capped langur) और रीसस बंदर (rhesus monkey) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Dehing Patkai National Park) वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- ओउ-टेंगा (Ou–tenga), मेकाई (Mekai), होलोंग (Hollong), उरीयम (Uriyam), नाहोर (Nahor), धूना (Dhuna), भर (Bhar), होलॉक (Hollock) और चामकोटखाल (Chamkotkhal)। यहाँ लकड़ियों की कुछ महत्वपूर्ण किस्में भी पायी जाती है जिनमे मेसुआ फेरिया (Mesua ferrea), शोरिया असामिका (Shorea assamica), डिप्टरोकार्पस मैक्रोकार्पस (Dipterocarpus macrocarpus), अमोरा वालिची (Amoora wallichii), कास्टानोप्सिस इंडिका (Castanopsis indica), डायसॉक्सिलम बिनेक्टीफ़ेरम (Dysoxylum binectiferum) और वेटिका लांसएफ़ोलिया (Vatica lanceaefolia) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Dehing Patkai National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान साल के बारहों महीने खुला रहता है। आप यहाँ किसी भी महीने में आ सकते है। लेकिन अगर आप यहाँ माइग्रेटरी बर्ड्स (Migratory Birds) की ज्यादा प्रजातियाँ देखना चाहते है तो आप विंटर और स्प्रिंग (नवंबर से मार्च) में आने का कोशिश करें। क्योंकि इस समय ही माइग्रेटरी बर्ड्स यहाँ आते हैं। कैसे पहुंचे दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dehing Patkai National Park)?

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सुनहरे लंगूरों का घर है रायमोना नेशनल पार्क

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नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन आप यहां शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। रायमोना नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान असम का छठा नेशनल पार्क है जो, असम के कोकराझार जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र इंडो-भूटान बॉर्डर और पश्चिम बंगाल की राज्य सीमा से लगती है। 5 जून 2021 को पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री श्री हिमन्त बिश्व शर्मा के द्वारा घोषणा की गई जिसके तहत इस उद्यान को नेशनल पार्क घोषित कर दिया गया था। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में फॉउना और फ्लोरा (Fauna and Flora in Raimona National Park) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), हॉर्नबिल (Hornbill), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), भारतीय गौर (Indian Gaur), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां तथा तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां निवास करती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि का कारण यह है कि, यहाँ गोल्डन लंगूर पाए जाते है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ वनस्पतियों की लगभग 380 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कैसे पहुंचे रायमोना राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Raimona National Park)?

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पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां का निवास स्थल है असम का डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क

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नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी (Rich Biodiversity) देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Dibru-Saikhowa National Park) पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन आप यहां शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप (Weekend Trip) प्लान कर सकते हैं। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ (Wildlife) की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। यह राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क लगभग 340 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी उत्तर में एवं डिब्रू नदी इस पार्क के दक्षिण में बहती है। इतिहास (History of Dibru-Saikhowa National Park) डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान को 1995 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। इसके पश्चात 1997 में इसे बायोस्फियर रिजर्व बनाने की घोषणा की गयी जिसमे इस 765 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले उद्यान को दो भागों में बाँट दिया गया। कोर जोन क्षेत्र (340 वर्ग किमी) और बफर जोन क्षेत्र (425 वर्ग किमी)। इसके बाद में कोर जोन क्षेत्र को 1999 में नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। फॉउना (Faunas in Dibru-Saikhowa National Park) डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), स्पॉटेड तेंदुआ (Spotted Leopard), तेंदुआ (Leopard), स्लॉथ बीयर (Sloth Bear), जंगली बिल्ली (Wild Cat), जंगली घोड़ा (Wild Horse), एशियाई हाथी (Asian Elephant) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां रहती है। फ्लोरा (Floras in Dibru-Saikhowa National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ आर्किड वनस्पतियों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- सैलिक्स टेट्रास्पर्मा (Salix tetrasperma), बिशोफिया जावानिका (Bischofia javanica), डिलेनिया इंडिका (Dillenia indica), बॉम्बेक्स सीइबा (Bombax ceiba), टर्मिनलिया मायरियोकार्पा (Terminalia myriocarpa) और लेगरस्ट्रोमिया परविफ्लोरा (Lagerstroemia parviflora)। बेस्ट टाइम टू विजिट डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Best time to visit Dibru-Saikhowa National Park) अगर आप यहाँ घूमने जाना चाहते है तो मानसून के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे क्योंकि मानसून में विज़िटर्स के लिए ये पार्क खुला नहीं होता है। इसका कारन यह है कि इस अवधि में यहाँ गर्मी और भारी बारिश होती है। आप यहाँ ठंड के महीनों (नवंबर से अप्रैल) में आ सकते है। कैसे पहुंचे डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dibru-Saikhowa National Park)?

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टूर के लिए बेस्ट है मानस नेशनल पार्क जानिए यहां के टूर पैकेजों के बारे में

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असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है।मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। ब्रह्मपुत्र नदी इस नेशनल पार्क की जीवन दायिनी नदी है। आइये जानते है मानस नेशनल पार्क के जंगल सफारी के पैकजों के बारें में मानस नेशनल पार्क में जंगल सफारी के लिए दो तरह के टूर पैकेजेस उपलब्ध है पहला टूर पैकेज टूर प्लानर (Tour Planner) पहला दिनबारपेटा/बंगईगांव/गुवाहाटी से आपको पिकअप किया जायेगा। इसके बाद आपको मानस नेशनल पार्क ले जाया जायेगा। मानस नेशनल पार्क उत्तर पूर्व भारत के प्रमुख नेशनल पार्कों में से एक है। आप रात्रि में मानस नेशनल पार्क में ही रहेंगे। दूसरा दिनअगले दिन आपको एलीफैंट सफारी करने ले जाया जायेगा। एलीफैंट सफारी करने के बाद आप होटल वापस लौटेंगे। आप होटल आकर फ्रेश होने के बाद नाश्ता करेंगे। दोपहर में आपको जीप सफारी के लिए ले जाया जायेगा। जीप सफारी के दौरान आपको एक सींग वाले गैंडे, बाघ, एशियाई हाथी, जंगली भैंसे आदि जंगली जानवर देखने को मिलेंगी। तीसरा दिनअंतिम दिन आपको बारपेटा/बंगईगांव/गुवाहाटी वापस छोड़ दिया जायेगा। दूसरा टूर पैकेज टूर प्लानर (Tour Planner) पहला दिनबोंगाईगांव/बारपेटा/गुवाहाटी से आपको पिकअप किया जायेगा। इसके बाद आपको मानस राष्ट्रीय उद्यान के जंगल गांव बशबारी ले जाया जायेगा। मानस नेशनल पार्क उत्तर पूर्व भारत के प्रमुख नेशनल पार्कों में से एक है। आप रात्रि में बशबारी गांव में रहेंगे। दूसरा दिनअगले दिन आप नाश्ते के बाद मानस राष्ट्रीय उद्यान के मेन एरियाज को कवर करेंगे। आप इन एरियाज में एक सींग वाले गैंडे, बाघ, एशियाई हाथी, जंगली भैंसे आदि जंगली जानवर देखेंगे। आप रात्रि विश्राम बशबारी गांव में ही रहेंगे। तीसरा दिनअगले दिन आप एलीफैंट सफारी और नाश्ता करके काजीरंगा नेशनल पार्क की ओर रवाना हो जायेंगे। काजीरंगा नेशनल पार्क भारत के प्रमुख नेशनल पार्कों में आता है। आप काजीरंगा नेशनल पार्क के कोहोरा रेंज में रात्रि विश्राम करेंगे। चौथा दिनअगले दिन आप सुबह एलीफैंट सफारी करेंगे। एलीफैंट सफारी करने के बाद नाश्ता करने रिसॉर्ट वापस आएंगे। नाश्ता करके आप जिप्सी द्वारा जंगल सफारी करेंगे। आप कोहोरा रेंज में ही रात्रि विश्राम करेंगे। पांचवा दिनअंतिम दिन आपको नाश्ते के बाद गुवाहाटी वापस छोड़ दिया जायेगा।

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काजीरंगा नेशनल पार्क घूमने का है प्लान तो जानिए टूर पैकेजों के इन ऑपशंस के बारे में

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असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle Safari in Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क के चार रेंज हैं। जिनमें सबसे पहला है वेस्टर्न रेंज, जिसे बागरी रेंज के नाम से भी जाना जाता है। सेंट्रल रेंज को कोहरा रेंज कहा जाता है। पूर्वी रेंज को अगरतोली रेंज के नाम से पुकारा जाता है। बुरापहाड़ रेंज का कोई दूसरा उपनाम नहीं है। अगर आप भी काजीरंगा नेशनल पार्क का टूर करना चाहते हैं तो इसके लिए यहां चार तरह के टूर पैकेज उपलब्ध हैं। 1. काजीरंगा फन टूर 1 जीप सफार:- टूर पैकेज 2 दिन और एक रात का है, जिसका टूर प्लानर कुछ इस प्रकार का होगा:- पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) यात्रा के पहले दिन आप गुवाहाटी पहुंचेंगे और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकल जाएंगे। जहां पहुंचकर आप जंगल के रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे। दोपहर के समय आपको भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। दोपहर का खाना खाकर आप काजीरंगा नेशनल पार्क के वेस्टर्न रेंज यानी बागोरी रेंज और केंद्रीय रेंज यानी कोर रेंज में जीप सफारी के लिए जाएंगे। आपको रात इसी रिसोर्ट में बितानी होगी। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) सुबह के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के सेंट्रल रेंज यानी कोहरा रेंज और वेस्टर्न रेंज यानी बागोरी रेंज में हाथी की सफारी के लिए निकल जाएं। एलिफेंट सफारी के बाद आप काजीरंगा ऑर्किड पार्क घूमने के लिए चले जाएंं। यहां आपको ऑर्किड की 500 से भी अधिक अलग-अलग तरह की प्रजातियां देखने को मिलेगी। इसके अलावा भी आप यहां 132 अलग-अलग तरह की पत्तेदार सब्जियों की वैरायटी और बेत की 12 प्रजातियों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके बाद आप असम के खूबसूरत चाय के बागानों का दौरा करने जाएंगे। चाय के बागानों में घूमने के बाद आप गुवाहाटी हवाई अड्डा के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आपकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। 2. जीप और हाथी सफारी के साथ काजीरानागा मनोरंजन यात्रा:- यह टूर पैकेज तीन दिनों और दो रातों का होगा। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) पहले दिन आप गुवाहाटी हवाई अड्डे या फिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकलेंगे। जहां पहुंचकर आप रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे और शाम को इधर-उधर टहलने के बाद रात को रिजॉर्ट में हीं आराम करेंगे। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)दूसरे दिन सुबह के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी और केंद्रीय रेंज में हाथी सफारी के लिए निकल जाएंगे। हाथी सफारी के बाद आप काजीरंगा ऑर्किड पार्क का दौरा करेंगे। जहां आप 500 से भी अधिक प्रकार की ऑर्किड के प्रजातियों का निरीक्षण करेंगे और इसके अलावा खट्टे फलों और पत्तेदार सब्जियों की कई प्रजातियों के बारे में भी जानेंगे और समझेंगे। ऑर्किड पार्क से लौट कर असम के चाय बागानों के दौरे के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आप दोपहर में लौट कर आएंगे और भोजन करके काजीरंगा के केंद्रीय रेंज में जीप सफारी के लिए चले जाएंगे। जीप सफारी के बाद वापस रिजॉर्ट लौट कर वहीं रात को आराम करेंगे। तीसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) अगले दिन आप पहले सुबह नाश्ता करने के बाद गुवाहाटी हवाई अड्डा या रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आपकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। 3. काजीरंगा हॉलिडे टूर:- यह टूर पैकेज तीन रातों और चार दिनों का है। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)यात्रा के पहले दिन आप गुवाहाटी रेलवे स्टेशन या फिर हवाई अड्डा से काजीरंगा नेशनल पार्क के लिए आगे बढ़ेंगे। नेशनल पार्क पहुंचकर आप वहीं के जंगल रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे और रात को यहीं आराम करेंगे। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)अगले दिन आप सुबह नाश्ता करने के बाद काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी क्षेत्र यानी बागोरी और केंद्रीय क्षेत्र यानी कोहरा रेंज में हाथी की सफारी का आनंद लेंगे। इस दिन आप भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को जानने और समझने के लिए काजीरंगा नेशनल पार्क को एक्सप्लोर करेंगे। यहां आप ऑर्किड पार्क के विजिट के लिए भी जा सकते हैं। जहां आपको 500 से अधिक तरह की और किट की प्रजातियां देखने को मिलेगी। इसके अलावा आप काजीरंगा में 132 प्रकार की पत्तेदार सब्जियों की प्रजातियां और 46 प्रकार के बँसो की प्रजातियां को करीब से देखेंगे और उनके बारे में जानेंगे। तीसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) सुबह नाश्ता करने के बाद आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पूर्वी रेंज में जीप सफारी के लिए जाएंगे इसके बाद आप काजीरंगा नेशनल पार्क के पास बसे हुए आदिवासी गांव कार्बी का दौरा करेंगे और कार्बी के लोगों की ग्रामीण जीवन शैली के बारे में जानने और समझने का प्रयास करेंगे। कार्बी गांव से लौटकर आप दोपहर का भोजन करेंगे और फिर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के केंद्रीय रेंज में जीप सफारी के तीसरे दौर के लिए चले जाएंगे। फिर रात में जंगल रिजॉर्ट में आराम करेंगे चौथा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) यह आपके इस सफर का आखिरी दिन होगा। जहां आप सुबह नाश्ता करने के बाद नेशनल पार्क से गुवाहाटी हवाई अड्डा या फिर रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएंगे। आपकी यात्रा यहीं समाप्त हो जाएगी। 4. काजीरंगा शिलांग यात्रा:- यह टूर पैकेज चार रातों और पाँच दोनों का होगा। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क) इस टूर पैकेज का पहला दिन भी बाकी के टूर पैकेज की तरह ही होगा। जिसमें आप गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क की ओर आएंगे और जंगल रिसॉर्ट में चेकिंग करके वही रात को आराम करेंगे। दूसरा दिन काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान सुबह के समय आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बागोरी और कोहरा रेंज में हाथी के सफारी के लिए जाएंगे। हाथी के सफारी से लौट