आभानेरी गांव दौसा जिले में स्थित है, जो जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर है। इस गांव का नाम आभानेरी महोत्सव से जुड़ गया है, यह एक ऐसा उत्सव है जो प्राचीन स्मारकों को जीवित कर देता है। आभानेरी का पुराना नाम अभा नगरी था, जिसका मतलब है “उज्ज्वल शहर”। यह नाम इसके सूर्य मंदिर और चाँद बावड़ी जैसे स्थानों से आया है। महोत्सव की शुरुआत 2008 में हुई थी, जब राजस्थान पर्यटन विभाग ने इसे शुरू किया था। इसका मकसद था, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और पर्यटकों को आकर्षित करना।
एक गांव जहां हजारों साल पुरानी सीढ़ियां नीचे उतरती चली जाती हैं, और ऊपर से सूर्य की किरणें चमकती हैं। चाँद बावड़ी, जो दुनिया की सबसे गहरी और बड़ी स्टेपवेल में से एक है, इस महोत्सव का मुख्य केंद्र बन चुकी है। इसे 9वीं शताब्दी में राजा चाँद ने बनवाया था। बावड़ी में 3500 सीढ़ियां हैं, जो 13 मंजिल नीचे तक जाती हैं। पास में हर्षत माता मंदिर है, जो देवी हर्षत को समर्पित है।

मौसम की ललक और उत्सव की झलक
महोत्सव इन्हीं स्थानों पर आयोजित होता है। यह उत्सव आमतौर पर सितंबर में होता है। इस समय मौसम भी सुहावना होता है, न ज्यादा गर्मी न ज्यादा ठंड। गांव छोटा सा है, लेकिन महोत्सव के दौरान हजारों लोग आते हैं। स्थानीय लोग उत्साह से तैयारी करते हैं। वे घर साफ करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं। महोत्सव राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता हुआ प्रतीत होता है।
यहां मेवाड़, मारवाड़ और शेखावाटी की परंपराएं मिलती-जुलती देखने को मिल जाती हैं। आभानेरी महोत्सव की शुरुआत एक शोभायात्रा से होती है। कलाकार सजे हुए ऊंटों पर सवार होकर आते हैं। संगीत की धुनें गूंजती हैं जिसमें सब नाचते गाते हैं। यह महोत्सव तीन दिनों तक चलता है। पहले दिन उद्घाटन, दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, तीसरे दिन समापन होता है। पर्यटक यहां आकर इतिहास को महसूस करते हैं। गांव की गलियां रंगों से भर जाती हैं। यह महोत्सव हमें सिखाता है कि पुरानी धरोहर को कैसे संजोया जाता है।
चाँद बावड़ी दुनिया की सबसे गहरी बावड़ी
आभानेरी महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण चाँद बावड़ी है। यह स्टेपवेल इतनी गहरी है कि नीचे उतरते ही ठंडक महसूस होने लगती है। बावड़ी के चारों तरफ सीढ़ियां हैं, जो ज्यामितीय आकार में बनी हुईं हैं। महोत्सव के दौरान यहां लोक नृत्य होते हैं। कलाकार सीढ़ियों पर खड़े होकर भवाई नृत्य करते हैं जो यहां की संस्कृति की अनमोल कला है और महिलाएं सिर पर घड़े रखकर नाचती हैं। महोत्सव में कच्छी घोड़ी नृत्य भी होता है। यह लोक नृत्य राजस्थान का प्रसिद्ध है। कलाकार कठपुतलियों जैसे दिखते हैं। वे घोड़ों पर सवार होकर नाचते हैं एवं कहानियां गाते हैं। पास के हर्षत माता मंदिर में पूजा होती है।

मंदिर की नक्काशी देखने में कमाल की है। महोत्सव में मंदिर को सजाया जाता है। पपेट्री शो भी होता है जो आकर्षण का मुख्य केंद्र है। कठपुतलियां राजस्थानी लोककथाएं सुनाती हैं तो वही महोत्सव में हस्तशिल्प मेला लगता है। ऊंट गाड़ी की सवारी भी होती है चाहो तो आप ऊंट सवारी भी यहां आकर कर सकते हैं। चाँद बावड़ी इतनी रहस्यमयी है कि पर्यटक घंटों देखते इसे रहते हैं। एक तो बावड़ी का पानी एकदम साफ रहता है। इसके अलावा नीचे उतरकर फोटो लेना रोमांच से काम् नहीं होता।
महोत्सव में नृत्य, संगीत और कला
आभानेरी महोत्सव सांस्कृतिक रंगों से भरपूर होता है। लोक नृत्य और संगीत यहां का मुख्य हिस्सा हैं। घूमर नृत्य देखने तो यहां की शान है। महिलाएं सज धजकर रंगीन घाघरों में घूमती हुईं नजर आ जाती हैं। उनकी चाल ऐसी है कि लगता है हवा में उड़ रही हों। कालबेलिया नृत्य भी देखने को मिल जाता है। संगीत कार्यक्रम में भी भाग लिया जा सकता है, वैसे संगीत कार्यक्रम शाम को होते हैं। स्थानीय कलाकार ही लोकगीत गाते हैं। गीत प्रेम, वीरता और प्रकृति पर होते हैं। जो राजस्थान की सांकृतिक परंपरा को उजागर करते हैं। तबला, सारंगी और ढोल की धुनें गूंजती हैं तो कोई भी थिरकने पर मजबूर हो जाता है।
कला प्रदर्शनी में राजस्थानी चित्रकला दिखाई देखकर आप हैरान हो जाएंगे। मिनिएचर पेंटिंग्स छोटी लेकिन बारीक होती हैं। कारीगर लाइव काम करते हैं जिससे विश्वास में दमखम नजर आता है। पर्यटक चाहें तो सीख भी सकते हैं। महोत्सव में ब्राइडल कॉस्ट्यूम शो भी होता है। महिलाएं राजपूत वेशभूषा में सजती हैं। पुरुष पगड़ी बांधते हैं। नृत्य और संगीत की धुनें गांव की गलियों में गूंजती हैं जो पूरे गांव को ऊर्जा देती हैं। आभानेरी महोत्सव राजस्थान की आत्मा को दिखाता है।
स्वादिष्ट राजस्थानी भोजन महोत्सव के दौरान का मजा
महोत्सव के दौरान भोजन का मजा दोगुना हो जाता है। स्टॉल पर राजस्थानी व्यंजन मिलते हैं। जिनमें दाल बाटी चूरमा प्रसिद्ध है। बाटी गोल और कुरकुरी होती है। चूरमा मीठा होता है जो खाने पर किसी को भी आनंदित कर सकते हैं। गट्टे की सब्जी भी अको चखनी चाहिए, यह बेसन के गोले वाली है। मिठाइयों में घेवर और मालपुआ खाकर तो मजा ही आ जाता है। स्नैक्स में कचौड़ी और मिर्ची वड़ा मिलते हैं। ये तीखे और स्वादिष्ट होते हैं। इसके अलावा आप चाय और लस्सी भी पी सकते हैं। वैसे आपको बता दूं की स्थानीय लोग देसी घी से बने व्यंजन बनाते हैं।
महोत्सव में खाना खाते हुए नृत्य देखना अलग और मजेदार होता है। पर्यटक इन सभी व्यंजनों को ट्राई करते हैं आप जाएं तो आप भी करना। स्वाद इतना अच्छा होता है कि घर लौटकर भी याद रह जाता है। यही भोजन महोत्सव को पूरा करता है। राजस्थानी स्वाद का यह अनुभव अविस्मरणीय है।
कैसे पहुंचें आभानेरी?
आभानेरी महोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचना लगभग आसान है। जयपुर से सड़क मार्ग से 90 किलोमीटर है। बस या टैक्सी लेकर आसानी से पहुंचा जा सकता हैं। यदि एयरपोर्ट से आना चाहते हैं तो जयपुर एयरपोर्ट से भी कैब मिल जाती हैं। ट्रेन से जयपुर स्टेशन पहुंचें, फिर बस लें यह भी अच्छा सफर हो सकता है। महोत्सव के दौरान विशेष बसें चलती हैं इसमें भी आप सफर और सैर कर सकते हैं।
गांव तो छोटा है, इसलिए ठहरने के लिए नजदीकी होटल चुनें सकते हैं। जयपुर या दौसा में रह सकते हैं यहां आपको होटल वगैरह मिल जाएंगे। फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से एक सुझाव यह है की महोत्सव के समय भीड़ होती है, इसलिए पहले से होटल बुकिंग करें। आरामदायक जूते पहनें तो बेहतर है, क्योंकि बावड़ी पर चलना पड़ता है मेले में भी घूमने के लिए आरामदायक जूते जरूरी है। वैसे पानी और खाने की उम्दा व्यवस्था होती है लेकिन यदि आप पानी साथ रखें तो और भी अच्छा है।
महोत्सव का समय सितंबर में है, मौसम अच्छा रहता है। यह सफर आपको आसान और रोमांचक हो सकता है। आभानेरी महोत्सव राजस्थान की संस्कृति की अनमोल प्रदर्शनी है। यहां आकर आप इतिहास और जश्न दोनों का मजा लेंगे।

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