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Chand Baori Rajasthan: घूमने से पहले जानें ये जरूरी बातें

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अगर राजस्थान की सबसे अलग और सबसे हैरान कर देने वाली जगहों की बात करें, तो Chand Baori Rajasthan का नाम सबसे ऊपर आता है। पहली बार इसे देखने वाला लगभग हर इंसान कुछ मिनट तक बस इसकी सीढ़ियों को ही देखता रह जाता है। ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे किसी ने हजारों सीढ़ियों से एक बड़ा डिजाइन बना दिया हो। लेकिन जैसे-जैसे आप इसके बारे में जानने लगते हैं, आपको समझ आता है कि यह सिर्फ एक बावड़ी नहीं, बल्कि करीब बारह सौ साल पुरानी इंजीनियरिंग का कमाल है। राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी गांव में बनी Chand Baori Rajasthan भारत की सबसे प्रसिद्ध बावड़ियों में गिनी जाती हैं। यह जयपुर से करीब 95 किलोमीटर दूर है और हर साल हजारों भारतीय और विदेशी पर्यटक इसे देखने आते हैं। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी 3500 से ज्यादा सीढ़ियां और करीब 100 फीट की गहराई है। यही वजह है कि यह जगह सोशल मीडिया, ट्रैवल ब्लॉग और फिल्मों में भी खूब दिखाई देती है। बहुत से लोग पहली बार फोटो देखकर सोचते हैं कि यह किसी फिल्म का सेट होगा, लेकिन सच यह है कि Chand Baori Rajasthan असली है और आज भी उसी तरह खड़ी है जैसे सदियों पहले थी। Chand Baori Rajasthan कहाँ है और यहाँ कैसे पहुँचे? Chand Baori Rajasthan जयपुर-आगरा हाईवे के पास आभानेरी गांव में स्थित है। अगर आप जयपुर से निकलते हैं, तो सड़क के रास्ते यहां पहुंचने में लगभग दो से ढाई घंटे का समय लगता है। इसलिए जयपुर घूमने आने वाले बहुत से लोग एक दिन का छोटा ट्रिप बनाकर यहां जरूर आते हैं। अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बांदीकुई जंक्शन है। वहां से टैक्सी या लोकल कैब आसानी से मिल जाती है। हवाई यात्रा करने वालों के लिए जयपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीक है। रास्ता बिल्कुल आसान है और सड़क भी अच्छी है। इसलिए परिवार या दोस्तों के साथ रोड ट्रिप के लिए Chand Baori Rajasthan एक बेहतरीन जगह मानी जाती है। करीब 1200 साल पुरानी कहानी इतिहासकारों के अनुसार Chand Baori Rajasthan का निर्माण आठवीं और नौवीं शताब्दी के बीच गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा चंद ने करवाया था। माना जाता है कि उसी राजा के नाम पर इस बावड़ी का नाम ‘चाँद बावड़ी’ पड़ा। उस समय राजस्थान में पानी की बहुत कमी होती थी। बारिश का पानी बचाकर रखने के लिए ऐसी बावड़ियां बनाई जाती थीं। लेकिन Chand Baori Rajasthan सिर्फ पानी जमा करने की जगह नहीं थी। यह गांव के लोगों के मिलने की जगह भी थी। लोग यहां बैठते थे, आराम करते थे और गर्मी से बचने के लिए नीचे बने हिस्सों में समय बिताते थे। आज भी जब आप नीचे की तरफ देखते हैं, तो समझ आता है कि उस समय के कारीगर कितने आगे की सोच रखते थे। बिना किसी आधुनिक मशीन के इतना बड़ा निर्माण करना आसान काम नहीं था। 3500 सीढ़ियां आखिर क्यों बनाई गई थीं? Chand Baori Rajasthan की सबसे बड़ी पहचान इसकी 3500 सीढ़ियां हैं। ये सीढ़ियां तीन तरफ बनी हुई हैं और चौथी तरफ महल जैसे कमरे और गलियारे दिखाई देते हैं। बहुत से लोग सोचते हैं कि इतनी ज्यादा सीढ़ियां सिर्फ सुंदर दिखने के लिए बनाई गई थीं, लेकिन ऐसा नहीं है। पहले पानी का स्तर मौसम के हिसाब से ऊपर-नीचे होता रहता था। इसलिए लोग पानी तक आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए हर स्तर तक जाने वाली सीढ़ियां बनाई गई थीं। इन सीढ़ियों की डिजाइन इतनी सटीक है कि ऊपर से देखने पर पूरा ढांचा किसी ज्यामितीय पैटर्न जैसा दिखाई देता है। यही वजह है कि Chand Baori Rajasthan दुनिया की सबसे ज्यादा फोटो खींची जाने वाली बावड़ियों में शामिल हो चुकी है। चाँद बावड़ी कैसे पहुँचें और घूमने की पूरी जानकारी अगर आप Chand Baori Rajasthan देखने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और आराम से पूरी बावड़ी देखी जा सकती है। गर्मियों में राजस्थान में तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है, इसलिए दोपहर के समय घूमना मुश्किल हो सकता है। अगर आप फोटोग्राफी करना चाहते हैं, तो सुबह 8 से 10 बजे या फिर शाम 4 बजे के बाद जाएँ। इस समय धूप भी कम रहती है और तस्वीरें भी बहुत अच्छी आती हैं। Chand Baori Rajasthan जयपुर से लगभग 95 किलोमीटर दूर आभानेरी गाँव में स्थित है। जयपुर से यहाँ तक सड़क के रास्ते करीब 2 से 2.5 घंटे लगते हैं। अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन बांदीकुई जंक्शन है। वहाँ से टैक्सी या स्थानीय वाहन आसानी से मिल जाते हैं। जयपुर एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है। बावड़ी रोज़ सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक खुली रहती है। यहाँ आने के लिए किसी तरह की एंट्री फीस नहीं देनी पड़ती, इसलिए यह बजट ट्रैवलर्स के लिए भी एक शानदार जगह है। हालांकि समय के साथ नियम बदल सकते हैं, इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी एक बार जरूर देख लें। यहाँ घूमते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। सीढ़ियों पर बिना अनुमति नीचे उतरने की कोशिश न करें क्योंकि कई हिस्सों में सुरक्षा कारणों से प्रवेश बंद रहता है। आरामदायक जूते पहनकर आएँ क्योंकि परिसर में काफी पैदल चलना पड़ता है। गर्मी के दिनों में पानी की बोतल, टोपी और सनस्क्रीन साथ रखें। अगर आप कैमरा लेकर आ रहे हैं, तो वाइड एंगल लेंस यहाँ की पूरी बनावट को कैद करने में काफी मदद करेगा। चाँद बावड़ी के पास क्या देखें? अगर आप Chand Baori Rajasthan तक पहुँच ही गए हैं, तो आसपास की कुछ और जगहें भी देख सकते हैं। सबसे पहले हर्षत माता मंदिर जरूर जाएँ, जो बावड़ी के बिल्कुल पास है। यह मंदिर भले ही आज खंडहर की स्थिति में है, लेकिन इसकी नक्काशी आज भी लोगों का ध्यान खींच लेती है। अगर आपके पास पूरा दिन है, तो जयपुर लौटते समय रास्ते में कई छोटे ऐतिहासिक स्थल और स्थानीय बाजार भी देख सकते हैं। गाँव के बाजार से राजस्थानी हस्तशिल्प, कपड़े और छोटी-छोटी यादगार चीजें खरीदी जा सकती हैं। स्थानीय ढाबों में दाल-बाटी-चूरमा और

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दुनिया की सबसे बड़ी बावड़ी आभानेरी महोत्सव का केंद्र कैसे बनी? जानें!

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आभानेरी गांव दौसा जिले में स्थित है, जो जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर है। इस गांव का नाम आभानेरी महोत्सव से जुड़ गया है, यह एक ऐसा उत्सव है जो प्राचीन स्मारकों को जीवित कर देता है। आभानेरी का पुराना नाम अभा नगरी था, जिसका मतलब है “उज्ज्वल शहर”। यह नाम इसके सूर्य मंदिर और चाँद बावड़ी जैसे स्थानों से आया है। महोत्सव की शुरुआत 2008 में हुई थी, जब राजस्थान पर्यटन विभाग ने इसे शुरू किया था। इसका मकसद था, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और पर्यटकों को आकर्षित करना। एक गांव जहां हजारों साल पुरानी सीढ़ियां नीचे उतरती चली जाती हैं, और ऊपर से सूर्य की किरणें चमकती हैं। चाँद बावड़ी, जो दुनिया की सबसे गहरी और बड़ी स्टेपवेल में से एक है, इस महोत्सव का मुख्य केंद्र बन चुकी है। इसे 9वीं शताब्दी में राजा चाँद ने बनवाया था। बावड़ी में 3500 सीढ़ियां हैं, जो 13 मंजिल नीचे तक जाती हैं। पास में हर्षत माता मंदिर है, जो देवी हर्षत को समर्पित है। मौसम की ललक और उत्सव की झलक महोत्सव इन्हीं स्थानों पर आयोजित होता है। यह उत्सव आमतौर पर सितंबर में होता है। इस समय मौसम भी सुहावना होता है, न ज्यादा गर्मी न ज्यादा ठंड। गांव छोटा सा है, लेकिन महोत्सव के दौरान हजारों लोग आते हैं। स्थानीय लोग उत्साह से तैयारी करते हैं। वे घर साफ करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं। महोत्सव राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता हुआ प्रतीत होता है। यहां मेवाड़, मारवाड़ और शेखावाटी की परंपराएं मिलती-जुलती देखने को मिल जाती हैं। आभानेरी महोत्सव की शुरुआत एक शोभायात्रा से होती है। कलाकार सजे हुए ऊंटों पर सवार होकर आते हैं। संगीत की धुनें गूंजती हैं जिसमें सब नाचते गाते हैं। यह महोत्सव तीन दिनों तक चलता है। पहले दिन उद्घाटन, दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, तीसरे दिन समापन होता है। पर्यटक यहां आकर इतिहास को महसूस करते हैं। गांव की गलियां रंगों से भर जाती हैं। यह महोत्सव हमें सिखाता है कि पुरानी धरोहर को कैसे संजोया जाता है। चाँद बावड़ी दुनिया की सबसे गहरी बावड़ी आभानेरी महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण चाँद बावड़ी है। यह स्टेपवेल इतनी गहरी है कि नीचे उतरते ही ठंडक महसूस होने लगती है। बावड़ी के चारों तरफ सीढ़ियां हैं, जो ज्यामितीय आकार में बनी हुईं हैं। महोत्सव के दौरान यहां लोक नृत्य होते हैं। कलाकार सीढ़ियों पर खड़े होकर भवाई नृत्य करते हैं जो यहां की संस्कृति की अनमोल कला है और महिलाएं सिर पर घड़े रखकर नाचती हैं। महोत्सव में कच्छी घोड़ी नृत्य भी होता है। यह लोक नृत्य राजस्थान का प्रसिद्ध है। कलाकार कठपुतलियों जैसे दिखते हैं। वे घोड़ों पर सवार होकर नाचते हैं एवं कहानियां गाते हैं। पास के हर्षत माता मंदिर में पूजा होती है। मंदिर की नक्काशी देखने में कमाल की है। महोत्सव में मंदिर को सजाया जाता है। पपेट्री शो भी होता है जो आकर्षण का मुख्य केंद्र है। कठपुतलियां राजस्थानी लोककथाएं सुनाती हैं तो वही महोत्सव में हस्तशिल्प मेला लगता है। ऊंट गाड़ी की सवारी भी होती है चाहो तो आप ऊंट सवारी भी यहां आकर कर सकते हैं। चाँद बावड़ी इतनी रहस्यमयी है कि पर्यटक घंटों देखते इसे रहते हैं। एक तो बावड़ी का पानी एकदम साफ रहता है। इसके अलावा नीचे उतरकर फोटो लेना रोमांच से काम् नहीं होता। महोत्सव में नृत्य, संगीत और कला आभानेरी महोत्सव सांस्कृतिक रंगों से भरपूर होता है। लोक नृत्य और संगीत यहां का मुख्य हिस्सा हैं। घूमर नृत्य देखने तो यहां की शान है। महिलाएं सज धजकर रंगीन घाघरों में घूमती हुईं नजर आ जाती हैं। उनकी चाल ऐसी है कि लगता है हवा में उड़ रही हों। कालबेलिया नृत्य भी देखने को मिल जाता है। संगीत कार्यक्रम में भी भाग लिया जा सकता है, वैसे संगीत कार्यक्रम शाम को होते हैं। स्थानीय कलाकार ही लोकगीत गाते हैं। गीत प्रेम, वीरता और प्रकृति पर होते हैं। जो राजस्थान की सांकृतिक परंपरा को उजागर करते हैं। तबला, सारंगी और ढोल की धुनें गूंजती हैं तो कोई भी थिरकने पर मजबूर हो जाता है। कला प्रदर्शनी में राजस्थानी चित्रकला दिखाई देखकर आप हैरान हो जाएंगे। मिनिएचर पेंटिंग्स छोटी लेकिन बारीक होती हैं। कारीगर लाइव काम करते हैं जिससे विश्वास में दमखम नजर आता है। पर्यटक चाहें तो सीख भी सकते हैं। महोत्सव में ब्राइडल कॉस्ट्यूम शो भी होता है। महिलाएं राजपूत वेशभूषा में सजती हैं। पुरुष पगड़ी बांधते हैं। नृत्य और संगीत की धुनें गांव की गलियों में गूंजती हैं जो पूरे गांव को ऊर्जा देती हैं। आभानेरी महोत्सव राजस्थान की आत्मा को दिखाता है। स्वादिष्ट राजस्थानी भोजन महोत्सव के दौरान का मजा महोत्सव के दौरान भोजन का मजा दोगुना हो जाता है। स्टॉल पर राजस्थानी व्यंजन मिलते हैं। जिनमें दाल बाटी चूरमा प्रसिद्ध है। बाटी गोल और कुरकुरी होती है। चूरमा मीठा होता है जो खाने पर किसी को भी आनंदित कर सकते हैं। गट्टे की सब्जी भी अको चखनी चाहिए, यह बेसन के गोले वाली है। मिठाइयों में घेवर और मालपुआ खाकर तो मजा ही आ जाता है। स्नैक्स में कचौड़ी और मिर्ची वड़ा मिलते हैं। ये तीखे और स्वादिष्ट होते हैं। इसके अलावा आप चाय और लस्सी भी पी सकते हैं। वैसे आपको बता दूं की स्थानीय लोग देसी घी से बने व्यंजन बनाते हैं। महोत्सव में खाना खाते हुए नृत्य देखना अलग और मजेदार होता है। पर्यटक इन सभी व्यंजनों को ट्राई करते हैं आप जाएं तो आप भी करना। स्वाद इतना अच्छा होता है कि घर लौटकर भी याद रह जाता है। यही भोजन महोत्सव को पूरा करता है। राजस्थानी स्वाद का यह अनुभव अविस्मरणीय है। कैसे पहुंचें आभानेरी? आभानेरी महोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचना लगभग आसान है। जयपुर से सड़क मार्ग से 90 किलोमीटर है। बस या टैक्सी लेकर आसानी से पहुंचा जा सकता हैं। यदि एयरपोर्ट से आना चाहते हैं तो जयपुर एयरपोर्ट से भी कैब मिल जाती हैं। ट्रेन से जयपुर स्टेशन पहुंचें, फिर बस लें यह भी अच्छा सफर हो सकता है। महोत्सव के दौरान विशेष बसें चलती हैं इसमें भी आप सफर और सैर कर सकते हैं। गांव तो छोटा है, इसलिए ठहरने के लिए नजदीकी होटल चुनें सकते हैं। जयपुर या दौसा में रह सकते हैं