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Best Places & Best Timings to Visit in Udaipur

Udaipur Trip: झीलों का शहर- उदयपुर

by Pardeep Kumar

लॉकडाउन से पहले उदयपुर का प्रोग्राम बना। अक्टूबर का महीना और झीलों का शहर, ऐसे जैसे किसी सपने का सच हो जाना। क्योंकि कई बार एक शहर सिर्फ शहर नही होता बल्कि आपकी ज़िंदगी का एक अहम् ठहराव बन जाता है, आपके जज़्बातों का, ख्यालों का और दिल के धड़कने का ज़रिया बन जाता है। उदयपुर उन्ही शहरों में से एक है जिनके ख़्वाब देख कर मैं बड़ा हुआ।

महाराजा उदय सिंह का बसाया उदयपुर शहर यकीनन राजा-महाराजाओं की विरासत का सबसे खूबसूरत प्रमाण है। अपनी इसी ख़ूबसूरती के कारण उदयपुर आज भी फ़िल्मी दुनिया के तमाम निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद है।(Udaipur)

लेक व्यू होटल

हम दिल्ली से उदयपुर ट्रैन से पहुंचे। टैक्सी ली और चल पड़े अपने होटल की और। हालांकि होटल पहले ही बुक कर दिया था लेकिन फिर भी किस्मत से होटल मिला उदयपुर के बेहद खास मंदिर जगदीश टेम्पल के बिलकुल पास में। और इतने पास में की होटल के रूम से मंदिर साफ़ दिखाई दे रहा था। पुराने उदयपुर शहर और लाल घाट के पास। सामने दूर तक फैली हुई पिछौला झील के पानी में चमकता सिटी पैलेस बस होटल के पैसे वसूल करवा रहा था। उदयपुर में लेक व्यू होटल लेने का ये सबसे बड़ा फ़ायदा है। एक बात आप अवश्य ध्यान रखिये की जब भी उदयपुर का ट्रिप बने होटल आप लेक व्यू देखकर ही बुक करें। रूफ टॉप पर शाम की चाय हो और सामने नीली झील को निहारने का अवसर। यकीन मानिये आपका पूरा टूर शानदार बन जायेगा।

देश के सबसे रोमांटिक शहरों में से एक- उदयपुर

वैसे उदयपुर देश के सबसे रोमांटिक शहरों में से एक है। जहां देखों वहीं पानी से लबालब झीलें गर्मियों में भी ठंडक का अहसास कराती हैं और ये तो फिर भी अक्टूबर का महीना था। दिन में ठीक-ठाक गमी थी, लेकिन रात थोड़ा-थोड़ा सर्दी का अहसास दे रही थी। दिन में, शहर में सड़कों पर ट्रैफिक और भीड़-भाड़ न के बराबर, इसलिए ज्यादा तपिश महसूस नही होती। वैसे उदयपुर में महल, हवेली, मंदिर , बाग और म्यूजियम हर चीज की भरमार है लेकिन जो एक चीज इसे दूसरे शहरों से जुदा करती है वो है चारों ओर झीलें ही झीलें- मानो जन्नत के बेइंतहां नजारे! यहां घूमने और देखने योग्य चार झीलें हैं -पिछौला लेक, फ़तेह सागर, उदय सागर और रंग सागर। चारों झीलें एक नहर से आपस में जुड़ी हैं। सिटी पैलेस की दीवार से सटकर पिछौला लेक है। और दूध तलाई नाम की झील पास ही है। किसी जमाने में यहां दूध बिकता था और आज पूजा-अर्चना होती है।(Udaipur)

किस समय यहाँ आना सबसे बेहतर

लम्बे सफ़र के बाद हम दिल्ली से उदयपुर ट्रैन से पहुंचे थे और वो भी सुबह-सुबह के वक़्त। इसलिए वक़्त का तकाज़ा था कि थोड़ा आराम कर लिया जाए। दो-तीन घटे आराम करने के बाद हमने होटल में ही चाय-नाश्ता किया। राजस्थान में हों और नाश्ते में पोहा न खाएं तो बस ये तो फिर राजस्थानी खान-पान के साथ एक तरह से ज्यादती है। आप राजस्थान के किसी भी शहर में चले जाएं, पोहा आपको हर जगह आसानी से मिल ही जाएगा।

वैसे तो साल भर यहाँ पर्यटकों का आना लगा रहता है लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहाँ आने के लिए बेस्ट रहता है। बहुत से पर्यटक यहाँ मानसून में आना पसंद करते हैं। बारिशों में यहाँ झील का दीदार करना बेहद सुखद अनुभव है।

आप जब भी किसी टूरिस्ट जगह पर घूमने जाएं तो बेहतर यही होता है की अच्छे से घूमने की प्लानिंग करें ताकि इत्मीनान से सभी जगह दखने का, खाने-पीने का, खरीददारी करने का सही ढ़ंग से लुत्फ़ उठा सकें। सो हमने उदयपुर घूमने का एक शेड्यूल बनाया और उसी के अनुसार निकल पड़े, सबसे पहले फ़तेह सागर झील के पास स्थित सहेलियों की बाड़ी।

Best Place to Visit in Udaipur-सहेलियों की बाड़ी

देश के मशहूर बागों में शुमार सहेलियों की बाड़ी नाम का यह सुन्दर बाग हरियाली और झर-झर बहते फव्वारों के लिए खूब जाना जाता है। इस बाग़ की खूबसूरती के कारण न जाने कितनी ही फिल्मों के बेहतरीन गीत यहाँ फिल्माए जा चुके हैं बताते हैं कि इसे महाराणा संग्राम सिंह (द्वितीय) ने 1710 से 1734 के बीच राज परिवार की महिलाओं के सैरगाह के लिए बनवाया था। इसीलिए इसका नाम सहेलियों की बाड़ी रखा गया।

 

 

बाग के कई भाग हैं जिनके बेहद खूबसूरत नाम भी रखे गए हैं जैसे- सावन भादो, हाथी फव्वारें, बिन बादल बरसात और रास लीला आदि। बताते हैं कि पहले फ़तेह सागर झील के करीब छोटे-छोटे बहुत सारे बाग़-बगीचे थे। इन्हें महाराणा फ़तेह सिंह ने सहेलियों की बाड़ी में मिलाकर शानदार और भव्य रूप दे दिया। हमने बाग़ की सुंदरता का खूब आनंद लिया और तकरीबन दो घंटे से भी ज्यादा का समय यहाँ बिताया, बाग़ में बने सुन्दर-सुन्दर हाथियों और माहौल को खुशनुमा बना रहे फव्वारों के साथ खूब सारे फोटो लिए, वीडियो बनाई। आखिर यादें ही तो हैं जिनकों संजो कर रखा जा सकता है। इसलिए आप उदयपुर आये और इस बाग़ को न देखा तो समझ लीजिये आप जन्नत के एक लाज़वाब टुकड़े के दीदार से महरूम रह गए। अगले पड़ाव की तरफ बढ़ते तब तक भूख ने शोर मचाना शुरू कर दिया था। सो सहेलियों की बाड़ी के पास ही बड़ा बाजार है जहां बहुत सारे छोटे-बड़े भोजनालय आपको आसानी से मिल जायेंगे। लेकिन हमने दोपहर के भोजन में राजस्थानी थाली को तवज्जो दी भारत में किसी भी शहर में घूमने का सीधा मतलब होता है अच्छे दृश्यों के साथ-साथ उस जगह के खाने की चीजों के स्वाद लेना। क्योंकि जब भी आप कहीं घूमने जाए अगर खाना वहां का स्पेशल न हो तो फिर आप शायद खाने के शौक़ीन नही हैं। थाली में राजस्थान का पारम्परिक भोजन दाल-चूरमा-बाटी के साथ लहसुन मिर्च की चटनी और तीखी सब्जियों के साथ तवे की रोटी सच में अद्भुत संजोग था। खाना अच्छा लगा इसलिए खूब खाया।

दोपहर के भोजन के बाद हम शेड्यूल के हिसाब से चल पड़े सिटी पैलेस देखने। सिटी पैलेस देखने का समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक है। सिटी पैलेस में अंदर जाने का शुल्क भी रखा गया है। आपको सिटी पैलेस देखने के लिए टिकट लेना पड़ेगा। उदयपुर में एक ऊँचे पहाड़ पर सिटी पैलेस है। जब आप फ़तेह पोल के द्वार से दाखिल होते हैं तो बिलकुल पिछौला लेक के साथ लगता है सिटी पैलेस।

Places to Visit in Udaipur- सिटी पैलेस

सिटी पैलेस जाते समय हमे दिखाई दिया पिछौला झील के बीचो-बीच स्थित लेक पैलेस जोकि पर्यटकों की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। महाराणा जगत सिंह ने इसे एक महल के रूप में गर्मियों के मौसम में झील के बीचों-बीच शीतलता प्रदान करने हेतु अपने ठहरने के लिए बनवाया था परन्तु आज यह महल एक पांच सितारा होटल बन कर रह गया है। जिसमें रसूखदार लोगों की शादियां और बहुत सारी फिल्मों की शूटिंग जरूर होती रहती है। आप सबसे खास टूरिस्ट अट्रैक्शन सिटी पैलेस से पूरे उदयपुर शहर की सुंदरता को निहार सकते हो। लगभग 5 घंटे में हमने सिटी पैलेस में राज आँगन, राणा प्रताप म्यूजियम, लक्ष्मी चौक, बड़ा महल, शिव निवास , शंभू निवास आदि खूब फुर्सत से देखे।

आपको यहां मेवाड़ की एक से एक बेहतरीन चित्रकलाओं से रूबरू होने का मौका मिलता है। आप जब भी सिटी पैलेस घूमने का प्लान बनाये तब यह बात जरूर जेहन में रखें की यह इतना बड़ा है कि 6 घटे भी इसको पूरा घूमने के लिए कम पड़ जाते हैं। सिटी पैलेस में हर शाम एक घंटे का लाइट एंड साउंड शो भी होता है जिसके जरिए आप राजस्थानी इतिहास को जान सकते हैं। बेहद ऊंचाई पर स्थित इस महल की खिड़कियों से आप पिछौला झील की ख़ूबसूरती का दीदार कर सकते हैं।

सिटी पैलेस घूमने के बाद हम काफी थक चुके थे इसलिए बिना कोई देर किये हमने होटल का रुख कर लिया। होटल में थोड़ा आराम किया और फिर शाम की चाय होटल के रूफ टॉप पर, जहां से पिछौला झील और सिटी पैलेस साफ़ दिखाई दे रहा था, इसे आप यूं समझ सकते हैं कि ऐसी रूहानी चाय हम दिल्ली में रहने वालों को दशकों में नसीब होती है। चाय की एक-एक चुस्की सामने दिख रहे विहंगम दृश्य के कारण अमतृ के समान लग रही थी। तब तक अँधेरा हो चुका था और झील में चमक रही लाइटों की रौशनी शहर और शाम दोनों को बेहद क़ातिलाना बना रही थी।

 

अगले पड़ाव पर हम आपको रू-ब-रू करवाएंगे हमारी उदयपुर यात्रा के दूसरे दिन यानी शिल्पग्राम, सज्जनगढ़ फोर्ट, फ़तेह सागर लेक और खानपान की दुनिया से………

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