8 Hidden Weekend Getaways Near Delhi
हर हफ्ते की भागदौड़ के बाद जब वीकेंड आता है, तो मन करता है कि बस कहीं दूर निकल जाएं। लेकिन Delhi से बाहर घूमने का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में शिमला, मनाली, मसूरी या नैनीताल घूमने लगता है। इन जगहों की अपनी खूबसूरती जरूर है, लेकिन छुट्टी के दिनों में यहां पहुंचते ही ट्रैफिक, लंबी लाइनें, पार्किंग की परेशानी और पर्यटकों की भीड़ कई बार पूरा मजा खराब कर देती है।
अगर आप भी इस बार कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो Delhi के आसपास ऐसी कई जगहें हैं जहां पहाड़ों की शांति, जंगलों की हरियाली, झीलों का सुकून और पुराने इतिहास की झलक एक साथ मिल सकती है। खास बात यह है कि इनमें कुछ जगहें ऐसी हैं जिनके बारे में लोग जानते तो हैं, लेकिन वहां जाने वाले पर्यटकों की संख्या अभी भी कई मशहूर हिल स्टेशनों से कम है।
यानी अगर आपका मन भीड़ से दूर दो दिन आराम से बिताने का है, तो Delhi से निकलकर इन जगहों की तरफ जाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां आपको बड़े-बड़े मॉल, हर वक्त बजता संगीत और भीड़भाड़ वाले बाजार नहीं मिलेंगे। इसके बदले आपको शांत सड़कें, पहाड़, जंगल, पुराने किले, झीलें और प्रकृति के बीच कुछ सुकून के पल मिलेंगे। तो इस बार Delhi से वीकेंड पर निकलने की सोच रहे हैं, तो शिमला-मनाली का वही पुराना रास्ता छोड़कर इन आठ जगहों को अपनी सूची में जरूर शामिल करें।
लैंसडाउन में मिलेगा असली पहाड़ी सुकून
Delhi से करीब 258 किलोमीटर दूर उत्तराखंड का लैंसडाउन उन लोगों के लिए बढ़िया जगह है जिन्हें पहाड़ पसंद हैं लेकिन बहुत ज्यादा भीड़ बिल्कुल पसंद नहीं। गढ़वाल की शांत पहाड़ियों में बसा यह छोटा सा शहर कोटद्वार के रास्ते पहुंचा जा सकता है। जैसे-जैसे आप Delhi से आगे बढ़ते हुए पहाड़ी रास्ते की तरफ जाते हैं, आसपास का नजारा भी बदलने लगता है।
आखिरी एक घंटे का रास्ता खास तौर पर काफी खूबसूरत है। शिवालिक की पहाड़ियां, घने जंगल और शांत सड़कें सफर को ही यादगार बना देती हैं। लैंसडाउन करीब 1,706 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। Delhi की गर्मी से परेशान लोगों के लिए यहां का मौसम काफी राहत देने वाला हो सकता है। ब्रिटिश दौर में लैंसडाउन को गढ़वाल राइफल्स की सैन्य छावनी के तौर पर विकसित किया गया था। आज भी शहर की साफ-सुथरी सड़कें और शांत माहौल उस सैन्य छावनी की पुरानी पहचान की याद दिलाते हैं।
यहां भुल्ला लेक के किनारे आराम से टहला जा सकता है। तारकेश्वर महादेव मंदिर भी घूमने के लिए अच्छी जगह है। सुबह टिप एन टॉप पहुंचकर दूर दिखाई देने वाली हिमालय की चोटियों को देखना इस सफर को और खास बना सकता है। अगर Delhi से दो दिन के लिए ऐसी जगह चाहिए जहां ज्यादा शोर न हो और बस प्रकृति के बीच समय बिताने का मौका मिले, तो लैंसडाउन को जरूर देखा जा सकता है।
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अलवर में इतिहास और झील दोनों
Delhi से करीब 150 किलोमीटर दूर राजस्थान का अलवर एक ऐसा शहर है जिसे लोग जानते तो बहुत हैं, लेकिन घूमने के लिए अक्सर अपनी पहली पसंद नहीं बनाते। यही वजह है कि यहां आपको कुछ दूसरी लोकप्रिय जगहों की तुलना में ज्यादा शांत माहौल मिल सकता है। अलवर की पहाड़ी पर बना बाला किला इस जगह का बड़ा आकर्षण है। यह किला अपने पुराने रूप में आज भी इतिहास की कहानी सुनाता हुआ नजर आता है। किले को देखकर आपको पुराने राजघरानों और उस दौर की याद आ जाती है।
अगर Delhi से अलवर जा रहे हैं तो सरिस्का टाइगर रिजर्व भी यात्रा का हिस्सा बनाया जा सकता है। अलवर से करीब 30 से 40 किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका अपने सूखे जंगल और चट्टानी रास्तों के लिए जाना जाता है। जंगल सफारी के दौरान बाघ दिखेगा ही, इसकी कोई गारंटी नहीं है, लेकिन जंगल का अनुभव अपने आप में काफी रोमांचक है। सफारी की बुकिंग और प्रवेश से जुड़ी ताजा जानकारी पहले ही देख लेना बेहतर रहेगा।
इसके अलावा सिलीसेढ़ लेक पैलेस भी देखने लायक जगह है। पहाड़ी जलाशय के किनारे बना यह पुराना महल आज एक होटल के रूप में इस्तेमाल होता है। यहां का शांत माहौल और झील का दृश्य काफी सुंदर लगता है। और अगर घूमते-घूमते भूख लग जाए तो अलवर की कचौरी और मशहूर मिल्क केक का स्वाद लेना न भूलें। Delhi के पास एक छोटी सी छुट्टी में इतिहास, जंगल, झील और स्वादिष्ट खाना सब मिल जाए, तो इससे बेहतर क्या होगा।
चकराता में पहाड़ों का शांत रूप
अगर Delhi से निकलकर आपका मन ऐसी पहाड़ी जगह देखने का है जहां हर तरफ पर्यटकों की भीड़ न मिले, तो चकराता आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। उत्तराखंड के जौनसार-बावर इलाके में स्थित चकराता करीब 330 किलोमीटर दूर है। यह करीब 2,118 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। लंबे समय तक आम लोगों के लिए यहां पहुंचना आसान नहीं था, जिसकी वजह से यह इलाका दूसरी मशहूर पहाड़ी जगहों की तरह बहुत ज्यादा व्यावसायिक नहीं बन पाया।
Delhi से चकराता जाते समय जैसे-जैसे आप पहाड़ों के बीच पहुंचते हैं, शहर का शोर पीछे छूटता जाता है। यहां बड़े-बड़े होटल और लगातार लगने वाला ट्रैफिक बहुत कम दिखाई देता है। चकराता का सबसे खास आकर्षण टाइगर फॉल्स है। करीब 312 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना देखने के लिए घने जंगलों के बीच पैदल चलना पड़ता है।
इसके अलावा देवबन भी यहां घूमने लायक जगह है। यह करीब 2,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मौसम साफ हो तो यहां से बंदरपूंछ और ब्लैक पीक जैसी हिमालय की चोटियां दिखाई देती हैं। चकराता की एक और खासियत यहां की जौनसारी संस्कृति है। स्थानीय लोगों की अपनी परंपराएं, खान-पान और लकड़ी से बनी वास्तुकला इस जगह को बाकी पहाड़ी इलाकों से अलग बनाती है। अगर Delhi की भीड़भाड़ से कुछ समय के लिए पूरी तरह दूर होना है, तो चकराता आपको निराश नहीं करेगा।
ओरछा में इतिहास के बीच वीकेंड
Delhi से करीब 450 किलोमीटर दूर ओरछा बाकी जगहों से थोड़ा ज्यादा दूर है। लेकिन अगर शुक्रवार रात निकलकर रविवार को लौटने की योजना बनाएं तो यह एक अच्छा वीकेंड सफर बन सकता है। झांसी के रास्ते बेतवा नदी की घाटी में पहुंचते ही आपको एक बिल्कुल अलग दुनिया दिखाई देती है। यहां 16वीं और 17वीं शताब्दी के महल, मंदिर और छतरियां आज भी पुराने दौर की कहानी बताते हैं।
ओरछा का राम राजा मंदिर इस जगह की सबसे खास पहचान है। यहां भगवान राम की पूजा राजा के रूप में की जाती है। मंदिर से जुड़ी शाही परंपराएं और शाम की आरती देखने लायक होती है। Delhi से आने वाले इतिहास पसंद करने वाले लोगों के लिए जहांगीर महल भी खास जगह है। बुंदेला राजा बीर सिंह देव ने इसे मुगल सम्राट जहांगीर के स्वागत के लिए बनवाया था।
इसकी ऊंचाई से बेतवा नदी और आसपास के इलाके का सुंदर नजारा दिखाई देता है। ओरछा की शाम भी इसकी खूबसूरती का हिस्सा है। यहां शाम जल्दी शांत हो जाती है और बेतवा नदी के किनारे बैठकर बहते पानी की आवाज सुनना अपने आप में एक अलग अनुभव है। अगर Delhi से इस बार पहाड़ों के बजाय इतिहास और नदी के बीच वीकेंड बिताने का मन है, तो ओरछा अच्छा विकल्प हो सकता है।
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मुनस्यारी में सामने दिखेंगी हिमालय की चोटियां
Delhi से करीब 600 किलोमीटर दूर मुनस्यारी उन लोगों के लिए है जिन्हें लंबी ड्राइव से कोई परेशानी नहीं और जो पहाड़ों का बड़ा और खुला रूप देखना चाहते हैं। पिथौरागढ़ जिले में करीब 2,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुनस्यारी की सबसे खास बात यहां से दिखाई देने वाली पंचचूली चोटियां हैं।
सुबह के समय जब मौसम साफ होता है, तो ये बर्फ से ढकी चोटियां इतनी करीब नजर आती हैं कि ऐसा लगता है जैसे वे आंखों के सामने ही खड़ी हों। Delhi से मुनस्यारी का सफर लंबा जरूर है, लेकिन यहां पहुंचने के बाद जो नजारा मिलता है, वह इस लंबी यात्रा की थकान कम कर देता है।
मुनस्यारी मिलाम और रालम ग्लेशियर जैसे लंबे ट्रेक का शुरुआती बिंदु भी है। यानी अगर आपको पहाड़ों में पैदल घूमने और लंबी यात्राओं का शौक है, तो यहां आपके लिए काफी कुछ है। यहां का ट्राइबल हेरिटेज म्यूजियम भी देखने लायक है। इसमें स्थानीय शौका समुदाय के इतिहास और उनकी पुरानी तिब्बत व्यापारिक संस्कृति की झलक मिलती है।
अगर Delhi से निकलकर हिमालय को उसके बड़े और शांत रूप में देखना चाहते हैं, तो मुनस्यारी का अनुभव बाकी आम पहाड़ी यात्राओं से काफी अलग हो सकता है। हालांकि केवल दो दिन के लिए मुनस्यारी जाना जल्दबाजी वाला सफर हो सकता है। यहां के लिए कम से कम तीन से चार दिन रखना ज्यादा बेहतर रहेगा।
पांगोट में सिर्फ जंगल और पक्षियों की आवाज
नैनीताल घूमने का मन तो बहुत लोगों का करता है, लेकिन वहां की भीड़ कई बार परेशान कर देती है। ऐसे में Delhi से जाने वाले लोग नैनीताल के पास स्थित पांगोट को देख सकते हैं। नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर पांगोट छोटा सा पहाड़ी गांव है। यहां का माहौल काफी शांत और हरा-भरा है।
पांगोट की सबसे बड़ी खासियत यहां के पक्षी हैं। यह इलाका नैना देवी हिमालयन बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व के आसपास स्थित है और पक्षी देखने के लिए जाना जाता है। सुबह के समय जंगल में पक्षियों को देखना और उनकी आवाज सुनना इस जगह का सबसे खूबसूरत अनुभव हो सकता है। अगर Delhi में सुबह उठते ही ट्रैफिक और हॉर्न सुनने की आदत हो गई है, तो पांगोट की सुबह बिल्कुल अलग महसूस होगी।
यहां से किलबरी फॉरेस्ट रेस्ट हाउस तक आसान पैदल रास्ते भी मिलते हैं। मौसम साफ हो तो दूर हिमालय की चोटियां दिखाई दे सकती हैं। रात में कैंपिंग और स्थानीय कुमाऊंनी खाना इस छोटे से वीकेंड को और यादगार बना सकता है। डुबुक और चुदकानी जैसे स्थानीय व्यंजन भी यहां जरूर चखने चाहिए।
बिनसर में जंगलों के बीच खो जाइए
Delhi से दूर कुमाऊं क्षेत्र में करीब 2,412 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बिनसर उन लोगों के लिए है जिन्हें जंगल और शांति दोनों पसंद हैं। बिनसर को अल्मोड़ा पर राज करने वाले चंद राजाओं ने गर्मियों में रहने के लिए अपनी राजधानी बनाया था। बाद में ब्रिटिश अधिकारियों ने भी यहां अपने एस्टेट बनाए।
बिनसर वाइल्डलाइफ सेंचुरी की खास बात यह है कि यहां जंगलों के बीच पैदल घूमने के कई रास्ते मिलते हैं। यहां शांत माहौल में टहलना और पक्षियों की आवाज सुनना काफी सुकून देने वाला अनुभव हो सकता है। बिनसर के जीरो पॉइंट से हिमालय की लंबी बर्फीली श्रृंखला दिखाई देती है। मौसम साफ होने पर नंदा देवी, केदारनाथ और पंचचूली जैसी चोटियां नजर आ सकती हैं।
चीड़ और देवदार के पेड़ों के बीच चलती ठंडी हवा और शांत जंगल बिनसर को बाकी पहाड़ी जगहों से अलग बनाते हैं। Delhi से बिनसर की दूरी और पहाड़ी रास्ते को देखते हुए इसे भी दो दिन से ज्यादा समय देकर जाना बेहतर रहेगा। अगर आपके पास तीन दिन हैं, तो यहां की यात्रा ज्यादा आरामदायक हो सकती है।
मोरनी हिल्स में कम समय में पहाड़
अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं और Delhi से बहुत दूर नहीं जाना चाहते तो मोरनी हिल्स को देखा जा सकता है। हरियाणा के पंचकूला जिले में शिवालिक की पहाड़ियों के बीच स्थित मोरनी हिल्स करीब 1,220 मीटर की ऊंचाई पर है। इसे हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन माना जाता है।
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यहां टिककर ताल की जुड़वां झीलें यानी बड़ा ताल और छोटा ताल खास आकर्षण हैं। झीलों के आसपास का शांत माहौल परिवार या दोस्तों के साथ कुछ समय बिताने के लिए अच्छा हो सकता है. इसके अलावा मोरनी फोर्ट भी इस इलाके की पहचान है। इसे अब नेचर म्यूजियम के रूप में देखा जा सकता है।
Delhi से मोरनी हिल्स जाने वालों को यहां की शांत सड़कें, झीलें और चीड़-ओक के जंगल काफी पसंद आ सकते हैं। ठाकुर द्वार मंदिर की पुरानी पत्थर की नक्काशी भी देखने लायक है। अगर Delhi से सिर्फ दो दिन के लिए निकलना है और बहुत लंबी यात्रा नहीं करनी, तो मोरनी हिल्स एक आसान विकल्प हो सकता है।
इस बार वीकेंड थोड़ा अलग बनाइए
Delhi के आसपास घूमने के लिए हमेशा वही पुरानी जगहें चुनना जरूरी नहीं है। लैंसडाउन में शांत पहाड़ हैं, अलवर में इतिहास और झील है, चकराता में जंगल और झरने हैं, ओरछा में पुरानी विरासत है, मुनस्यारी में विशाल हिमालय है, पांगोट में पक्षियों की दुनिया है, बिनसर में घने जंगल हैं और मोरनी हिल्स में कम समय में पहाड़ी माहौल का मजा लिया जा सकता है।
इन जगहों की सबसे अच्छी बात यही है कि हर जगह का अपना अलग रंग है। इसलिए अगली बार Delhi से वीकेंड की योजना बनाते समय सिर्फ इस बात पर ध्यान न दें कि कौन सी जगह सबसे ज्यादा मशहूर है। कभी-कभी कम मशहूर जगह ही ज्यादा सुकून दे जाती है। अगर आपको शोर से दूर जाना है, तो लैंसडाउन या चकराता चुन सकते हैं। इतिहास पसंद है तो अलवर या ओरछा बेहतर रहेंगे।
लंबी ड्राइव और ऊंचे पहाड़ पसंद हैं तो मुनस्यारी का रास्ता आपका इंतजार कर रहा है। पक्षियों और जंगलों के बीच समय बिताना है तो पांगोट और बिनसर बढ़िया विकल्प हैं। वहीं कम समय में पहाड़ों का मजा लेना है तो मोरनी हिल्स का रुख किया जा सकता है।
यानी Delhi से निकलने के बाद आपके पास घूमने के लिए सिर्फ हिमाचल ही एक रास्ता नहीं है। थोड़ा अलग सोचेंगे तो कई ऐसी जगहें मिल जाएंगी जहां वीकेंड सिर्फ घूमने में नहीं, बल्कि सच में आराम करने में बीतेगा।
Five Colors of Travel की ओर से छोटे सुझाव
- वीकेंड पर निकलते समय बहुत मशहूर जगहों के बजाय शांत जगह चुनें। संभव हो तो शुक्रवार रात या शनिवार सुबह जल्दी निकलें।
- पहाड़ी इलाकों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो सकता है, इसलिए पहले से नक्शा डाउनलोड कर लें।
- जहां जाएं, वहां के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद जरूर लें। इससे यात्रा का अनुभव और अच्छा हो सकता है।
- जंगल, झील और पहाड़ों पर कचरा बिल्कुल न फैलाएं। अपना प्लास्टिक और खाली बोतलें वापस साथ लेकर आएं।
- बारिश, कोहरे और पहाड़ी रास्तों में रात के समय गाड़ी चलाने से बचना ज्यादा सुरक्षित है।