Destination Haryana Latest Travel

Brahma Sarovar: महाभारत के इस सरोवर का इतिहास जानिए

Brahma Sarovar

महाभारत से जुड़ी इस ऐतिहासिक जगह पर सुबह की शांति, शाम की आरती और सदियों पुरानी कहानियों का अलग ही अनुभव मिलता है। अगर आप Delhi की भागदौड़ से थोड़ा दूर निकलकर ऐसी जगह तलाश रहे हैं, जहां शांति भी मिले और इतिहास से जुड़ने का मौका भी, तो कुरुक्षेत्र का Brahma Sarovar आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।

यहां आपको न बहुत शोर मिलेगा और न ही किसी आम पर्यटन स्थल जैसा माहौल। इसके बजाय चारों तरफ पानी, घाट, मंदिर और सदियों पुरानी कहानियों से जुड़ा वातावरण नजर आता है।

कुरुक्षेत्र का Brahma Sarovar सिर्फ एक बड़ा जलाशय नहीं है। इसे भारत की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जाता है। सुबह के समय यहां शांत माहौल में टहलना और शाम को घाट पर होने वाली आरती देखना अपने आप में अलग अनुभव है।

खास बात यह है कि Brahma Sarovar का संबंध महाभारत और कई पुरानी धार्मिक मान्यताओं से भी बताया जाता है। यही वजह है कि यहां सिर्फ श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति में दिलचस्पी रखने वाले लोग भी पहुंचते हैं। अगर आप कुरुक्षेत्र घूमने का मन बना रहे हैं, तो Brahma Sarovar को अपनी यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस जगह से जुड़ी खास बातें

Brahma Sarovar का पुराना इतिहास क्या है?

Brahma Sarovar से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात इसकी पौराणिक कहानी है। मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने कुरुक्षेत्र की इसी पवित्र धरती पर एक विशाल यज्ञ किया था और यहीं से सृष्टि की रचना की शुरुआत हुई थी। इसी वजह से इस सरोवर का नाम Brahma Sarovar पड़ा। इसे हमारी सभ्यता के पुराने केंद्रों में से एक के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि इससे जुड़ी कई बातें धार्मिक मान्यताओं और पुरानी कथाओं पर आधारित हैं, लेकिन यही कहानियां इस जगह को खास बनाती हैं।

Brahma Sarovar का संबंध महाभारत से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के आखिरी दौर में दुर्योधन ने खुद को इसी सरोवर के पानी में छिपा लिया था। ऐसे में जब कोई व्यक्ति आज इसके किनारे खड़ा होता है, तो उसके मन में अपने आप हजारों साल पुरानी महाभारत की कहानी घूमने लगती है।

इस जगह का जिक्र पुराने यात्रियों और लेखकों के विवरणों में भी मिलता है। ग्यारहवीं शताब्दी के प्रसिद्ध यात्री और लेखक अल-बिरूनी ने अपनी किताब ‘किताब-उल-हिंद’ में इस विशाल सरोवर का उल्लेख किया था।

मुगल बादशाह अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने भी कुरुक्षेत्र की यात्रा के दौरान इसकी विशालता का वर्णन किया था। फ्रांस के यात्री फ्रैंकोइस बर्नियर ने भी अपनी यात्रा के दौरान इसका जिक्र किया था। यानी Brahma Sarovar सिर्फ आज का पर्यटन स्थल नहीं है। सदियों से यह जगह यात्रियों, श्रद्धालुओं और इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोगों का ध्यान खींचती रही है।

Brahma Sarovar

इतना बड़ा है Brahma Sarovar

जब आप पहली बार Brahma Sarovar के सामने पहुंचते हैं, तो इसकी विशालता देखकर अंदाजा लगाना आसान नहीं होता कि यह कितना बड़ा है। यह लगभग 3,600 फीट लंबा, 1,500 फीट चौड़ा और करीब 45 फीट गहरा बताया जाता है। इसकी विशालता की वजह से इसे एशिया के बड़े मानव-निर्मित पवित्र जलाशयों में गिना जाता है।

Brahma Sarovar को दो हिस्सों में बांटा गया है। इन्हें पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के रूप में देखा जाता है। दोनों हिस्सों के बीच में पुरुषोत्तमपुरा बाग नाम का एक सुंदर बाग बना हुआ है। इस बाग के दोनों तरफ रास्ते हैं, जो सरोवर के दोनों हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं। चारों तरफ बने पक्के लाल पत्थरों के घाट इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं।

यहां पहुंचकर आप घाट की सीढ़ियों पर बैठ सकते हैं और कुछ देर पानी को देखते हुए अपना समय बिता सकते हैं। अगर आप सुबह जल्दी पहुंचते हैं, तो आसपास का माहौल और भी शांत नजर आता है। Brahma Sarovar के चारों तरफ बना परिक्रमा मार्ग करीब 3.4 किलोमीटर लंबा है। सुबह इस रास्ते पर टहलना या परिक्रमा करना काफी सुकून देने वाला अनुभव हो सकता है।

यहां स्नान के लिए भी खास इंतजाम हैं

Brahma Sarovar एक धार्मिक स्थल भी है, इसलिए यहां श्रद्धालुओं के लिए स्नान की व्यवस्था की गई है। स्नान वाले हिस्से को गहरे पानी से अलग रखने के लिए रेलिंग लगाई गई है, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। महिलाओं की सुविधा और निजी जगह का ध्यान रखते हुए यहां ढके हुए चेंजिंग रूम और अलग घाट भी बनाए गए हैं।

इस वजह से धार्मिक यात्रा के लिए आने वाले लोगों को यहां जरूरी सुविधाएं मिल जाती हैं। हालांकि अगर आप सिर्फ घूमने के लिए आ रहे हैं, तो भी Brahma Sarovar के घाटों पर कुछ समय बैठना और आसपास का माहौल देखना आपकी यात्रा को खास बना सकता है। स्नान करते समय पानी की गहराई, मौसम और स्थानीय निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है। बच्चों को पानी के पास अकेला न छोड़ें।

सूर्य ग्रहण के समय बदल जाता है पूरा माहौल

Brahma Sarovar पर साल भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सूर्य ग्रहण के समय यहां का माहौल बिल्कुल अलग हो जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान Brahma Sarovar में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। पुराणों में भी ग्रहण के समय यहां स्नान के महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस दौरान यहां स्नान करने से बहुत बड़ा धार्मिक पुण्य मिलता है। इसी वजह से सूर्य ग्रहण के समय देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुरुक्षेत्र पहुंचते हैं।

ऐसे समय में Brahma Sarovar के आसपास मंत्रों की आवाज, पूजा-पाठ और श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। घाटों पर जलते दीये और धार्मिक माहौल इसे एक अलग ही रूप दे देते हैं। अगर आपको भीड़ पसंद नहीं है और आप शांति से Brahma Sarovar देखना चाहते हैं, तो ऐसे बड़े धार्मिक अवसरों के बजाय सामान्य दिनों में यहां जाना बेहतर रहेगा।

Brahma Sarovar

गीता महोत्सव में Brahma Sarovar की रौनक

कुरुक्षेत्र में हर साल नवंबर के आखिरी सप्ताह या दिसंबर की शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान Brahma Sarovar की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। शाम होते ही घाट रोशनी से जगमगा उठते हैं। महाआरती के समय पूरा माहौल बेहद सुंदर दिखाई देता है। घाटों पर हजारों दीये जलाए जाते हैं और दीपदान के समय जब दीये पानी में तैरते दिखाई देते हैं, तो पूरा सरोवर रोशनी से भर जाता है।

गीता महोत्सव के दौरान यहां हस्तशिल्प से जुड़ा मेला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खाने-पीने के कई स्टॉल भी लगाए जाते हैं। इसलिए अगर आपको धार्मिक जगहों के साथ संस्कृति और स्थानीय माहौल देखना पसंद है, तो इस समय Brahma Sarovar की यात्रा काफी खास हो सकती है। इस दौरान तस्वीरें लेने का शौक रखने वाले लोगों के लिए भी यह समय अच्छा होता है। हालांकि भीड़ ज्यादा रहती है, इसलिए परिवार और बुजुर्गों के साथ जा रहे हों तो आने-जाने की योजना पहले से बना लें।

आसपास भी हैं कई खास जगहें

कुरुक्षेत्र घूमने जा रहे हैं तो सिर्फ Brahma Sarovar देखकर वापस न आएं। इसके आसपास कई ऐसी जगहें हैं जिन्हें एक ही यात्रा में देखा जा सकता है। सबसे पहले आप सन्निहित सरोवर जा सकते हैं। यह भी कुरुक्षेत्र का एक पवित्र जलाशय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां सात पवित्र सरस्वती नदियों का मिलन होता है। पितरों की शांति के लिए यहां स्नान और पूजा करने की भी मान्यता है।

इसके बाद ज्योतिसर जाना भी जरूरी है। इसे वही स्थान माना जाता है जहां भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। यहां मौजूद पुराने बरगद के पेड़ को भी इस घटना से जोड़कर देखा जाता है।

ज्योतिसर में शाम के समय होने वाला प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम भी देखा जा सकता है। अगर आप महाभारत की कहानी को थोड़ा अलग तरीके से समझना चाहते हैं, तो यह अनुभव अच्छा रहेगा। कुरुक्षेत्र को अक्सर महाभारत और गीता से जुड़े प्रमुख स्थलों के रूप में देखा जाता है। ज्योतिसर, Brahma Sarovar और श्री कृष्ण म्यूजियम एक साथ घूमने पर यह यात्रा और ज्यादा दिलचस्प बन सकती है।

श्री कृष्ण म्यूजियम भी जरूर देखें

अगर आपको इतिहास और पुरानी कलाकृतियों में रुचि है, तो श्री कृष्ण म्यूजियम आपके लिए अच्छी जगह है। यह म्यूजियम भगवान कृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और उनसे जुड़ी कलाकृतियों को समर्पित है। Brahma Sarovar घूमने के बाद यहां जाना आपकी यात्रा को और दिलचस्प बना सकता है।

म्यूजियम में भगवान कृष्ण से जुड़ी मूर्तियां, चित्र, पुरानी कला और अलग-अलग काल की झलक देखने को मिलती है। यह जगह बच्चों के साथ आने वाले परिवारों के लिए भी अच्छी हो सकती है।

वहीं कुरुक्षेत्र पैनोरमा एंड साइंस सेंटर परिवार और बच्चों के साथ घूमने वालों के लिए अच्छा विकल्प है। यहां महाभारत युद्ध से जुड़े चित्र, मॉडल और पैनोरमा पेंटिंग्स देखने को मिलती हैं। इस वजह से बच्चों को भी इतिहास समझने में आसानी होती है और यात्रा सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं रहती।

भद्रकाली मंदिर और शेख चिल्ली का मकबरा

कुरुक्षेत्र में भद्रकाली मंदिर भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे भारत के 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां सती माता का टखना गिरा था। महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार युद्ध से पहले पांडवों ने भी यहां जीत के लिए प्रार्थना की थी।

इसके अलावा शेख चिल्ली का मकबरा भी देखा जा सकता है। यहां की वास्तुकला कुरुक्षेत्र के धार्मिक माहौल से थोड़ा अलग नजर आती है और आपको मुगल दौर की झलक देखने को मिलती है। इस तरह Brahma Sarovar के साथ इन जगहों को भी अपनी यात्रा में जोड़ने पर कुरुक्षेत्र को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलता है।

Brahma Sarovar के पानी को साफ रखने की कोशिश

समय के साथ Brahma Sarovar के पानी की सफाई और गुणवत्ता को लेकर भी काम किया गया है। पहले नहर से खुले रास्ते के जरिए पानी आने की वजह से उसमें गंदगी मिलने की समस्या रहती थी। इसके बाद पानी की सप्लाई के लिए खुले रास्ते की जगह बंद पाइपलाइन की व्यवस्था की गई।

यह पाइपलाइन नहर से पानी को सीधे Brahma Sarovar तक पहुंचाती है। पानी को एक जगह रुका रहने से बचाने के लिए उसके दोबारा प्रवाह की व्यवस्था भी की गई है। पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सफाई, कचरा प्रबंधन और पानी के प्रवाह जैसी चीजों पर लगातार ध्यान देना जरूरी है। यहां आने वाले लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे घाट या पानी में प्लास्टिक, खाने की चीजें और दूसरा कचरा न डालें।

Delhi से Brahma Sarovar कैसे पहुंचें?

Delhi से Brahma Sarovar पहुंचना काफी आसान है। कुरुक्षेत्र Delhi और चंडीगढ़ के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर स्थित है। सड़क से Delhi से कुरुक्षेत्र की दूरी करीब 160 किलोमीटर है। अपनी कार से जाएं तो ट्रैफिक और रास्ते की स्थिति के अनुसार करीब ढाई से तीन घंटे में पहुंच सकते हैं।

ट्रेन से जाने वालों के लिए कुरुक्षेत्र जंक्शन सबसे सुविधाजनक विकल्प है। रेलवे स्टेशन शहर के बीच से करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है। Delhi और चंडीगढ़ से यहां के लिए कई ट्रेनें चलती हैं।

Brahma Sarovar

स्टेशन से Brahma Sarovar तक पहुंचने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी ली जा सकती है। अगर हवाई सफर करना हो तो चंडीगढ़ का हवाई अड्डा करीब 90 से 100 किलोमीटर दूर है। Delhi का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा करीब 160 से 200 किलोमीटर की दूरी पर है।

Brahma Sarovar के पास कहां रुकें?

अगर आप एक दिन से ज्यादा रुकने का प्लान बना रहे हैं, तो कुरुक्षेत्र में धर्मशाला, बजट होटल और हरियाणा पर्यटन के ठहरने वाले विकल्प मिल जाते हैं। अगर आपका मुख्य मकसद Brahma Sarovar और आसपास की धार्मिक जगहें देखना है, तो कुरुक्षेत्र में रुकना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।

होटल बुक करते समय Brahma Sarovar, कुरुक्षेत्र जंक्शन और ज्योतिसर से दूरी जरूर जांच लें। इससे स्थानीय यात्रा आसान रहेगी। गीता महोत्सव, सूर्य ग्रहण या किसी बड़े धार्मिक आयोजन के समय कमरों की मांग काफी बढ़ सकती है। ऐसे समय में ठहरने की बुकिंग पहले कर लेना बेहतर रहेगा।

Five Colors of Travel की ओर से 5 छोटे सुझाव

  • सुबह के समय Brahma Sarovar की शांति सबसे अच्छी लगती है। परिक्रमा के लिए भी यह समय अच्छा है।
  • अगर समय हो तो शाम को घाट पर होने वाली आरती जरूर देखें। Brahma Sarovar का माहौल उस समय काफी सुंदर हो जाता है।
  • Brahma Sarovar धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण है, इसलिए घाट और पानी में कचरा न डालें।
  • अगर आपको शांत माहौल चाहिए तो सूर्य ग्रहण और बड़े धार्मिक आयोजनों के मुख्य दिनों से बचकर यात्रा करें।
  •  सिर्फ Brahma Sarovar तक सीमित न रहें। ज्योतिसर, सन्निहित सरोवर, श्री कृष्ण म्यूजियम और बाकी जगहों को भी अपनी यात्रा में शामिल करें।

एक बार Brahma Sarovar घूमने का प्लान तो बनता है

कुरुक्षेत्र का Brahma Sarovar उन जगहों में से है जहां घूमना सिर्फ एक सामान्य यात्रा जैसा नहीं लगता। यहां पहुंचने के बाद आपको पानी के शांत घाटों के साथ महाभारत की कहानियां, धार्मिक मान्यताएं और पुराने इतिहास की झलक एक साथ देखने को मिलती है।

सुबह की ठंडी हवा में Brahma Sarovar के किनारे टहलना हो या शाम को घाट पर आरती देखना, दोनों का अपना अलग अनुभव है। वहीं गीता महोत्सव या सूर्य ग्रहण जैसे खास मौकों पर इसकी रौनक बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

Delhi से करीब 160 किलोमीटर की दूरी और सड़क व रेल दोनों से आसान पहुंच होने के कारण Brahma Sarovar एक ऐसी जगह है जहां परिवार, दोस्तों या अकेले भी छोटी यात्रा की जा सकती है। अगर आपको इतिहास, धार्मिक जगहें और शांत माहौल पसंद है, तो अगली बार कुरुक्षेत्र जाएं तो Brahma Sarovar को अपनी सूची में सबसे ऊपर जरूर रखें।

Shivani Pal

Shivani Pal

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल