Bazar Culture Food Travel Uttarakhand

रामनगर जाओ तो एक बार चख ज़रूर लेना! दुनिया भर में और कहीं नहीं मिलती सिंघाड़े की कचरी, जान लीजिए!

सिंघाड़े की कचरी।

क्या है पूरा माजरा, इसे तैयार करने का?

सिंघाड़े की कचरी स्वाद में तो बेमिसाल है ही, इसके अलावा इसे बनाने का तरीका और भी शानदार और लाजवाब है। सबसे पहले तो लकड़ी की आग चाहिए। क्योंकि गैस पर बनाने में वो स्वाद नहीं आता, जो लकड़ी पर पकाने में बनता है। इसलिए सबसे पहले जिसकी जरूरत होती है, वह है लकड़ी का चूल्हा। जहां का जिक्र मैं कर रहा हूँ, वह रामनगर के एकमात्र कचरी वाले की रेडी है। उन्होंने अलग और खास तरीके से लकड़ी के चूल्हे को बनाकर रेडी में ही लगा रखा है। अद्भुत तरीके से सेट किया गया था। रेडी के नीचे आग के लिए जगह थी, जहां बार-बार लकड़ियां डालकर चूल्हे को ताव दिया जा रहा था। रेडी के ऊपर मिट्टी से एक बढ़िया चूल्हा बना रखा था। उसके ऊपर तांबे जैसा कढ़ाही जैसा पैन रखा गया था, जो बेहद खास था।( रामनगर में कहां मिलती है यह सिंघाड़े की कचरी?)

सिंघाड़े की कचरी।

कैसे बनती है सिंघाड़े की कचरी?

सबसे पहले तो पैन में प्याज और मिर्च को बढ़िया से बटर के साथ तलना पड़ता है। इसके बाद उसमें पहले से पीस कर रखे हुए सिंघाड़े को अच्छे से बटर के साथ मिक्स करना होता है। एक लंबे समय तक चम्मच से उसे घिसते रहना है ताकि सिंघाड़े का बढ़िया-पेस्ट बन जाए और बटर की सुगंध अच्छे से उसमें घुल-मिल जाए। आग सामान्य होनी चाहिए, क्योंकि यदि आग थोड़ी सी भी तेज़ हुई तो कचरी का स्वाद बिगड़ सकता है। इसलिए इसे पकाते समय सावधानी रखी जाती है। ग्राहक, यानी कचरी स्वाद के मुरीद, रेडी के सामने ही बेसब्री से इंतज़ार कर रहे होते हैं। यह बिलकुल आँखों देखा हाल है! वास्तव में इस स्पेशल कचरी को इतना पसंद किया जाता है कि शाम होते ही यहाँ कचरी के स्वाद के मुरीदों की लंबी कतार देखी जा सकती है

सिंघाड़े की कचरी।

जब बढ़िया से सिंघाड़े को बटर के साथ घिस लिया जाता है, उसके बाद उसमें छोटे-छोटे पीस में कटे हुए टमाटर, धनिया और प्याज डाली जाती है। अब आपकी सिंघाड़े की कचरी बिल्कुल तैयार है, लेकिन एक चीज़ अभी भी बाकी है — वह है हिमालयन नींबू! जब हिमालयन नींबू इसमें निचोड़ा जाता है, तो कचरी के स्वाद में मानो चार-चाँद लग जाते हों। इससे स्वाद में एक खास खट्टापन मिल जाता है, जो इसे बहुत ही स्वादिष्ट बनाता है। इसे परोसने का तरीका भी मजेदार और विशेष है क्योंकि सिंघाड़े की कचरी को कागज़ की प्लेटों में नहीं, न ही स्टील की प्लेट में, बल्कि पत्तों पर परोसकर दिया जाता है — एक देसी और अपनेपन के साथ!

सिंघाड़े की कचरी।

क्या खासियत है इस सिंघाड़े की कचरी में?

अनौखापन तो इसमें यही है कि यह सिर्फ और सिर्फ आपको रामनगर में मिलेगी और कहीं नहीं। दूसरी बात — इसे बनाने का तरीका कोई और नहीं जानता! लगभग तीस साल से यह रेडी रामनगर के बीच बाजार में लगती है। यकीन मानिए आप एक बार इसे चखेंगे तो बार-बार कचरी की डिमांड करेंगे। इसका पत्तों पर परोसकर देना और अपनी परंपरा व संस्कृति को उजागर करना — अलग ही बात है। रामनगर के लोग बड़े ही हसमुख और दिलेर हैं, और रेडी के जो मालिक हैं उनका व्यवहार भी बेमिसाल है जी! आपसे ज़्यादा क्या ही कहा जाए; बस यही कहा जा सकता है कि इसकी खासियत देखी नहीं जा सकती — महसूस की जा सकती है। इसलिए आप जब भी रामनगर जाएँ तो सिंघाड़े की कचरी ज़रूर आज़माएँ।

सिंघाड़े की कचरी।

आखिर इसे लोग इतना क्यों पसंद कर रहे हैं?

कचरी का नमकीन स्वाद इतना जबरदस्त है कि यह मुंह में रखते ही घुल जाती है। “जीत आपकी” पुस्तक के लेखक शिव खेड़ा का कहना है कि जीतने वाले कोई अलग काम नहीं करते, बल्कि वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं। बस यही इसको पसंद किए जाने के पीछे का सच है। जिसने इसे पहचान दी, उसने अलग ढंग से काम किया और स्वाद तगड़ा बन गया — जो सबको पसंद आ रहा है। यकीनन आपको भी यह पसंद आएगा।

सिंघाड़े की कचरी।

फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल की और से ज़रूरी यात्रा सुझाव

  • लोकल स्वाद की पहचान: सिंघाड़े की कचरी रामनगर की लंबे समय से चली आ रही एक खास डिश है, जिसका स्वाद आपको कहीं और नहीं मिलेगा। यह इलाके के पानी और मिट्टी के स्वाद से जुड़ी खासियत रखती है।
  • नेचरल फ्रेशनेस: ताज़े सिंघाड़ों से बनी यह कचरी हेल्दी और एनर्जी देने वाली स्नैक है; सर्दियों में खास तौर पर इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।
  • रामनगर का सुकून- कुमाऊँ की गोद में बसे रामनगर की शांत हवा, कॉर्बेट नेशनल पार्क की नज़दीकी और स्थानीय बाजारों का माहौल सफर को यादगार बना देता है।
  • देसी फ्लेवर एक्सपीरियंस- यहां की कचरी में देसी मसालों की हल्की खुशबू, खस्ता टेक्सचर और गर्माहट का मेल आपको पहाड़ी मेहमाननवाज़ी का एहसास कराता है।
  • ट्रैवल परफेक्ट स्पॉट- फूड लवर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए सिंघाड़े की कचरी रामनगर की गलियों में एक ‘इंस्टाग्रामेबल मोमेंट’ है स्वाद भी, दास्तान भी।
सिंघाड़े की कचरी।

नहीं खाई है तो क्यों खाना चाहिए।

अगर आपने रामनगर के सिंघाड़े की कचरी नहीं खाई, तो मान लीजिए आपने असली देसी स्वाद मिस कर दिया है! सिंघाड़े के आटे से बनी ये कचरी बाहर से मुलायम, अंदर से नरम और सुगंध से भरी होती है। इसमें हल्के मसालों का ऐसा तड़का लगता है कि एक बार खाओ तो बार-बार मन करे। सर्दियों में तो इसकी मांग और बढ़ जाती है, क्योंकि यह पेट को गरम और ताकत से भर देती है। ऊपर से खट्टी-मीठी चटनी या दही के साथ इसका स्वाद बस लाजवाब हो जाता है। रामनगर की गलियों में ढलते सूरज की किरणों के साथ कचरी की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच लाती है। सस्ती, स्वादिष्ट और सेहतमंद — यही है रामनगर की सिंघाड़े की कचरी की असली पहचान। तो जब भी रामनगर जाओ, ये स्वाद ज़रूर चखना; वरना सफर अधूरा रह जाएगा! कहने का मतलब यह है कि आप इस स्वाद से महरूम न रहें।

सिंघाड़े की कचरी।

रामनगर में कहां मिलती है यह सिंघाड़े की कचरी।

रामनगर में सिंघाड़े की कचरी खाने का असली मज़ा तभी आता है जब आप इसे वहीं की मार्केट की गलियों में ताज़ा-ताज़ा बनने के बाद खाते हैं। यह स्वादिष्ट कचरी बस स्टैंड के पास और रामनगर कोतवाली के सामने से निकली पुराने बाजार की गली में मिलती है। शाम का वक्त होते ही जब सिंघाड़े की कचरी बनती है, तो उसकी खुशबू पूरे बाजार में फैल जाती है। कचरी के स्वाद में खोए हुए एक चाचा से हमने पूछा तो वह कहते हैं, “रामनगर आए और सिंघाड़े की कचरी ना खाई, तो कुछ नहीं खाया!” अब आप समझ सकते हैं कि इसे इतना पसंद क्यों किया जाता है। आप पुराने बाजार में कहीं भी किसी भी दुकान वाले से पूछ लेंगे तो वह हाथ पकड़कर आपको कचरी की रेडी तक छोड़ देगा।

सिंघाड़े की कचरी।

admin

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल