मानसून का मौसम और त्योहारों की बौछार सब के दिल जीत लेती है
सावन का महीना, पवन करे सोर
जियारा रे झूमे ऐसे, जैसे बन मा नाचे मोर
भारत विविध संस्कृतियों से परिपूर्ण राष्ट्र है। जहाँ विभिन्न पारंपरिक त्योहार मनाए जाते हैं। यहाँ प्राकृतिक चक्र और कृषि से संबंधित त्योहारों की एक लंबी पंक्ति देखने को मिलती है। जिसमें, मानसून का मौसम और त्योहारों की बौछार सब के दिल जीत लेती है। ये त्योहार सामुदायिक भावना को बढ़ावा देते हैं और प्रकृति के अलग-अलग मौसमों से भी जुड़े होते हैं।
भारत में जब मानसून आता है तो ये केवल वर्षा नहीं बहुत सारे त्योहार भी लेकर आता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में मानसून के दौरान बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं जिनमें रक्षाबंधन और ओणम जैसे प्रचलित त्योहार शामिल हैं। भारत के त्योहारों की श्रृंखला केवल अध्यात्म अथवा धर्म से ही नहीं जुड़ी होती है अपितु प्रकृति के प्रति सम्मान को भी दर्शाती है।
मानसून के दौरान, प्रमुख भारतीय त्योहार
रक्षाबंधन

श्रावण माह यानी सावन का महीना हरियाली लेकर आता है। प्रकृति रंगों से भर जाती है। रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। जिस तरह सावन के महीने में बारिश हवाओं की गंदगी को मिटा देती है वैसे ही रक्षाबंधन का त्योहार भी भाई बहन के रिश्ते में एक नई ऊर्जा का संचार करता है। इस त्योहार में घेवर और सूत फेनी जैसे मिष्ठान भी खाए जाते हैं जो समय और मौसम की खूबसूरती को बयां करते हैं।
राजा पर्व

राजा पर्व जिसे मिथुन संक्रांति भी कहा जाता है। उड़ीसा में मनाया जाने वाला यह पर्व बेहद खास और अनोखा है। यह त्योहार प्राकृतिक चक्र के संबंध में मनाया जाता है जो तीन से चार दिन चलता है। बारिश की बूंद के साथ ही, इस त्योहार का भी आगमन होता है। यह आमतौर पर जून के मध्य में मनाया जाता है। यह त्योहार स्त्रीत्व से जुड़ा है और नारीत्व के सम्मान की चेतना को संदर्भित करता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय पृथ्वी अपने मासिक धर्म की अवधि में होती है और उसे आराम की आवश्यकता है इसलिए महिलाओं को मां पृथ्वी का रूप माना जाता है। वे नए वस्त्र और आभूषण पहनती हैं और उल्लास पूर्वक इस पर्व को मनाती हैं।
ओणम

केरल में मनाया जाने वाला एक भव्य और प्रचलित त्योहार है। यह त्योहार मानसून के अंतिम समय, अगस्त- सितंबर में मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान केले के पत्ते पर 20 से अधिक व्यंजन परोसे जाते हैं। मिठाइयां खाई जाती हैं और प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग कर सजावट की जाती है। यह त्योहार धर्म, जाति और लिंग से परे केरल और मलयाली समुदायों को जोड़ने वाला एक सुंदर पर्व है।मानसून की समाप्ति और फसल की तैयारी पर आधारित यह त्योहार जिस समय मनाया जाता है केरल में उसे चिंगम मास कहा जाता है।
आम्बूबाची मेला
मानसून के मौसम को प्रकृति के पुनर्जीवन रूप में देखा जाता है। गुवाहाटी का प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर नारी शक्ति की दिव्यता के रूप में संदर्भित किया जाने वाला एक प्रसिद्ध मंदिर है। आम्बुची मेला इस मंदिर में हर वर्ष जून के मध्य समय में आयोजित किया जाता है। चार दिन चलने वाला यह त्योहार देवी कामाख्या के माहवारी होने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

यह पर्व नारी शक्ति की दिव्यता के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस मंदिर और त्योहार की दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान तीन दिन के लिए इस मंदिर को बंद रखा जाता है जो यह दर्शाता है की मां कामाख्या का मासिक चक्र पूरा हो रहा है। मनुष्य जीवन का एक आम हिस्सा जिससे एक टैबू बना दिया गया है ये त्योहार उसे नकारता है।
आषाढी वारी

आषाढी वारी, महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला एक मानसून संबंधी त्यौहार है। यह त्यौहार आषाढ़ मास (जून-जुलाई) की एकादशी को मनाया जाता है। इस त्यौहार में लगभग 21 दिनों तक चलने वाली पदयात्रा होती है जिसमें वारकरी संप्रदाय के हजारों लोग शामिल होते हैं। यह पदयात्रा नदियों और सुंदर हरियाली से होती हुई गुजरती है। इसलिए भी यह मानसून के मौसम में विशेष महत्व रखती है।
भारत में आने वाला कोई भी मौसम अकेला नहीं आता, वह अपने साथ लाता है बहुत सारे खूबसूरत रंग और सार्वजनिक त्यौहार। यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि यहाँ मानसून को भी प्रकृति के पुनर्जीवन के रूप में मनाया जाता है।





