Destination Travel Uttarakhand

Best Places to visit in Munsiyari, Uttarakhand- Little Kashmir

                         

उत्तराखंड के कुमाऊं रीजन के पिथौरागढ़ में एक बेहद शांत और सौम्य जगह आपके स्वागत के लिए उत्सुक है। सोच के देखिये सुबह-सुबह कमरे की खिड़की खोलते ही हिमालय की चमक आपकी आंखों में पड़ रही हो, या फिर किसी झरने के सामने सुबह की चाय आपका इंतज़ार कर रही हो। किसी पहाड़ पर एकाएक बादल आपका रास्ता रोककर खड़े हो जाएं। हां, कुछ ऐसा ही है मुंश्यारी(Munsiyari), जिसे शायद प्रकृति ने बड़ी ही फुर्सत से बनाया है। इन पहाड़ों में सिर्फ वादियां ही नहीं बल्कि सुकून के पल और खुशनुमा आबो हवा भी है। मुंश्यारी जाते समय पहाड़ों का सफर शुरू होता है नैनीताल से, और आपकी जानकारी के लिए बता दूं ये सफर जरा भी बोरिंग नहीं होने वाला क्योंकि रस्ते में बहुत से खूबसूरत हिल स्टेशन पड़ते हैं, जैसे अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बेरीनाग। (Best places to visit in Munsiyari, Little Kashmir)

पिथौरागढ़ से मुंश्यारी

इनकी बेपनाह खूबसूरती के चर्चे आपने बेशक सुने ही होंगे। वैसे तो सारे हिल स्टेशन बेहद खूबसूरत होते हैं पर सभी डेस्टिनेशंस की एक अलग खूबसूरती और अलग पहचान होती है। वैसे ही मुंश्यारी की खूबसूरती भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पिथौरागढ़ से मुंश्यारी लगभग 128km. की दूरी पर है, और सच कहें तो मुंश्यारी की खूबसूरती ही पिथौरागढ़ को मिनी कश्मीर बनाती है। पिथौरागढ़ से मुंश्यारी के सफर में ही आपको समझ आ जाएगा कि इसे छोटा कश्मीर क्यों कहा जाता है, रास्ते में पहाड़ों से ढकी रोड, रोड के किनारे झरने, और कल-कल बहती नदी इसका प्रमाण दे ही देगी। यकीन मानिये मुंश्यारी का सफर जितना शानदार है उससे कहीं ज्यादा अडवेंचरस भी, तो ये सफर आपका बेशक ही यादगार रहने वाला है। मुंश्यारी पहुंचने से पहले 33km. पहले पड़ता है बिर्थी वॉटरफॉल। Munsiyari

बिर्थी फॉल (Birthi Fall)

मुंश्यारी के सफर में ही आपको मुख्य रोड से ही एक बहुत ऊंचाई से बहता एक आकर्षक झरना दिखाई देगा। अगर आप यहाँ रुके बिना अगर मुंश्यारी की ओर चले गए तो यकीनन पूरी ट्रिप में आपका मन सिर्फ बिर्थी फॉल ढूढ़ता रह जायेगा। बिर्थी फॉल का झरना पहाड़ों की काफी ऊंचाई से निकलता है, लगभग 50 मीटर दूर से ही पानी की बूंदे दूर से ही चेहरे पर पड़ने लगती हैं और हवा भी काफी तेज़ महसूस होती है, तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि पानी का फ्लो कितना जबरदस्त होगा। बिर्थी फॉल की खूबसूरती बारीश के दिनों और ज्यादा निखर जाती है, जब पानी में इंद्रधनुष निकलता दिखाई देता है

और इसके पास जाने पर यूं तो चंद पानी की बूंदे पड़ती महसूस होंगी पर, कुछ देर में आप खुद को उप्पर से नीचे तक भीगा हुवा पाएंगे। वापसी में आप बिलकुल रोड में ही ढाबे में मैगी और चाय का आनंद ले सकते है। तो अब आपको महसूस हो जाएगा की जन्नत की शुरुवात हो चुकी है। 

आगे बढ़कर 21km. दूर आपको रोड़ साइड ही आपको दिखाई देगा खलिया द्वार

खलिया टॉप (Khalia Top)

हाँ, एक बात दावे के साथ कही जा सकती है कि खलिया टॉप में एक रात बिताने पर आप खुद कहेंगे कि दुनिया में जन्नत है तो वो यहीं है। रोड़ साइड बड़े से आर्क में खलिया द्वार लिखा आपको दिखाई देगा। खलिया द्वार वह जगह है जहां से खलिया टॉप के लिए ट्रेक्किंग शुरू की जाती है। ये ट्रेक्किंग लगभग 4 से 5 km. तक की होती है मगर ट्रेक्किंग शुरू करने से पहले आपको एंट्री टिकट लेना होगा जोकि पर-पर्सन 20 या 30 रुपए का है। और अगर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से आए हैं तो रोड़ साइड पार्किंग में रख सकते हैं। खलिया टॉप पुरे भारत के बेस्ट ट्रेक्किंग स्पॉट में से एक है, क्योंकि भारत की मशहूर पंचाचूली यहाँ से काफी पास और बेहद शानदार दिखाई देती है। यहाँ पर अगर आप मॉर्निंग व्यू देखना चाहें तो आप खलिया टॉप में कैंपिंग आसानी से बिना किसी परमिशन के कर सकते हैं, इसके अलावा केमवीएन यानि (कुमाऊँ मंडल विकास निगम ) में आप होटल भी ले सकते हैं जिसकी कॉस्ट है लगभग 1000 पर नाईट। कुछ लोगों की चाहत होती है कि जब भी सुबह उनकी आंखें खुलें तो सामने चमकता हुआ हिमालय और सूरज की लाली दिखाई दे, अगर ये ख्वाब आपका भी है तो खलिया टॉप में आपका ये ख्वाब सच होने वाला है।Munsiyari

इसके बाद  खलिया टॉप से 1km. आगे आने पर आप पहुंचेंगे थमृन कुंड हाईक ट्रेल  पर।

थमृन कुंड

थमृन कुंड हाईक ट्रेल से ट्रेक्किंग शुरू होती है थमृन कुंड तक, जोकि लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर की है। थमृन लेक चारों तरफ पहाड़ियों से घिरी लेक है। और बर्फ के दिनों इसकी चमक और भी दो गुनी हो जाती है। ये जगह मुंश्यारी से लगभग 11km. पीछे है।

अब चलते है मेन मुंश्यारी की तरफ। मुंश्यारी आने पर आपको सबसे खूबसूरत जो जगह लगने वाली है वो है ” नंदा देवी मंदिर”

नंदा देवी मंदिर :

आप मेन मुंश्यारी से टैक्सी लेकर आराम से नंदा देवी मंदिर पहुँच सकते हैं, जोकि मेन मुंश्यारी से लगभग 2km की दूरी पर है। मंदिर में पहुँच कर यहाँ आपको 20$ एंट्री टिकट देना होगा। अब आप सोच रहे होंगे मंदिर में भी एंट्री टिकट ये बड़ा अज़ीब है, पर ये एंट्री टिकट मुख्य मंदिर के मैंटेनैंस के लिए ली जाती है। यहाँ आप न केवल माँ नंदा के दर्शन बल्कि एकदम शानदार पहाड़ों के नज़ारों का भरपूर आनंद भी ले सकते हैं। इसे मुंश्यारी की वन ऑफ़ दा बेस्ट प्लेसेस में गिना जाता है, और सबसे महत्वपूर्ण यह जगहफोटोग्राफर्स के लिए यह बेस्ट प्लेस है।

इसके बाद आप मुंश्यारी का ट्रिब्ल हेरिटेज म्यूजियम देखने जा सकते हैं, जोकि मुंश्यारी बस स्टैंड से लगभग 5km. की दूरी  पर है और जिसकी एंट्री फीस मात्र 20$ है। इस म्यूजियम में आप उत्तराखंड के कल्चर और उत्तराखंड की सभ्यता को बड़ी ही बारीकी से देख सकते हैं और समझ सकते हैं।

इसके अलावा मुंश्यारी एडवेंचर के लिए भी काफी मशहूर है। तो मुंश्यारी के बेस्ट एडवेंचर स्पॉट की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है “खलिया टॉप”

खलिया टॉप स्कीइंग के लिए काफी मशहूर है वहां आप बर्फ में स्कीइंग का भरपूर आनंद  ले सकते हैं। और आप चाहें तो गौरी गंगा में रिवर राफ्टिंग भी कर सकते हैं

बेस्ट टाइम टू विजिट :

मुंश्यारी घूमने का बेस्ट टाइम है मार्च से जून। ये समय बेस्ट इसलिए माना जाता है क्योंकि इस समय सारी एडवेंचर एक्टिविटीज़ आप आसानी से कर सकते हैं, और इस समय न ही ज्यादा ठण्ड और न गर्मी होती है।

कैसे पहुंचे :

दिल्ली से चलना शुरू करें तो मुंश्यारी की दूरी 626km. है। अगर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से आना चाहते हैं तो दिल्ली से रूट है मुरादाबाद, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बेरीनाग, और फिर मुंश्यारी। इसके अलावा आप दिल्ली आनंद विहार से डायरेक्ट मुंश्यारी की बस भी ले सकते हैं। पर ध्यान रहे मुंश्यारी के लिए डायरेक्ट कोई भी वॉल्वो या ए.सी बस उपलब्ध नहीं है। हां, आप हल्द्वानी तक वॉल्वो, ए.सी बस या ट्रैन में आ सकते हैं फिर वहां से टैक्सी या नार्मल बस ले सकते है

admin

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल