Bihar Culture

सिर्फ बिहार नहीं, देश के ये 5 राज्य भी छठ पूजा के लिए हैं मशहूर, आस्था और लोक-संस्कृति के महापर्व में एक साथ

छठ पूजा को सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का महापर्व कहा जाता है, मुख्य रूप से बिहार का एक लोक पर्व है। लेकिन, समय के साथ-साथ यह त्यौहार अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों और यहां तक कि, विदेशों में भी पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसका श्रेय उन लाखों लोगों को जाता है जो रोजगार और जीवनयापन के लिए देश के कोने-कोने में प्रवास कर चुके हैं और अपनी संस्कृति को अपने साथ ले गए हैं। यह चार दिवसीय व्रत, जिसमें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल है, संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। बिहार के अलावा देश के पांच ऐसे राज्य हैं, जहां छठ पूजा की भव्यता देखते ही बनती है।

छठ पूजा

उत्तर प्रदेश में छठ पूजा (पूर्वी उत्तर प्रदेश)

बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश (जैसे वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर) में छठ पूजा का महत्व किसी भी मायने में कम नहीं है।

अद्भुत संगम: वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध घाट, जैसे दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट, छठ पूजा के दौरान आस्था के अद्भुत संगम बन जाते हैं। गंगा के किनारे हजारों की संख्या में व्रती इकट्ठा होते हैं। (छठ पूजा संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।)

छठ पूजा

प्रयागराज (इलाहाबाद): यहां त्रिवेणी संगम तट पर छठ अनुष्ठान करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि संगम पर अर्घ्य देने से अपार आशीर्वाद प्राप्त होता है।

लखनऊ: नवाबों के शहर लखनऊ में भी गोमती नदी के किनारे घाटों पर हजारों श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं, और पूरा माहौल छठ गीतों की मधुर धुन से गूंज उठता है

छठ पूजा

झारखंड में छठ पूजा

बिहार से अलग होकर बने झारखंड में छठ पूजा की परंपरा पूरी तरह से जीवंत है। यह पर्व यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग है।

जमशेदपुर (डोमुहानी घाट): यहां सुवर्णरेखा और खरकाई नदियों के संगम स्थल डोमुहानी पर छठ की विशेष रौनक देखने को मिलती है। नदी के किनारे सजावट और रोशनी से जगमगाते हैं।

रांची और धनबाद: राज्य के इन प्रमुख शहरों में भी प्राकृतिक जल स्रोतों और कृत्रिम तालाबों पर भव्य आयोजन किए जाते हैं, जहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।

छठ पूजा

दिल्ली-एनसीआर में छठ पूजा

देश की राजधानी दिल्ली, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की बड़ी आबादी का केंद्र है, जिसके कारण यह महापर्व यहां एक विशाल रूप ले चुका है।

यमुना घाट: दिल्ली में यमुना नदी के किनारों पर छठ पूजा का भव्य आयोजन होता है। यमुना घाट, आईटीओ घाट, और कालिंदी कुंज घाट जैसे स्थानों पर हजारों लोग इकट्ठा होते हैं।

अस्थायी घाट: भीड़ को देखते हुए, दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा पार्कों में कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया जाता है ताकि व्रतियों को अर्घ्य देने में कोई परेशानी न हो। यहाँ की भीड़ और उत्साह पर्व को  नेशनल स्वरूप प्रदान करता है।

छठ पूजा

पश्चिम बंगाल में छठ पूजा

पश्चिम बंगाल में बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी लोगों की उपस्थिति के कारण, यह त्योहार भी एक महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है। यहाँ की बंगाली-बिहारी संस्कृति का संगम इस पर्व को एक खास पहचान देता है।

हुगली नदी (बाबू घाट): कोलकाता में हुगली नदी के किनारे स्थित बाबू घाट छठ पूजा का एक प्रमुख केंद्र है। यह घाट छठ के लोक-संगीत, ठेकुआ की खुशबू और पारंपरिक अनुष्ठानों से भरा रहता है। रबीन्द्र सरोवर: कोलकाता का मशहूर रबीन्द्र सरोवर (झील) भी एक ऐसा स्थल है, जहां बड़ी संख्या में छठ व्रती एकत्रित होते हैं, और यहां की रौनक देखते ही बनती है।

छठ पूजा

महाराष्ट्र में छठ पूजा

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, छठ पूजा के आयोजन के कारण इस पर्व को एक ‘अंतर-राज्यीय’ पहचान देने में सफल रहा है।

जुहू चौपाटी (मुंबई): मुंबई में सबसे बड़ा और मशहूर छठ घाट जुहू चौपाटी (समुद्र तट) पर बनता है। अरब सागर के किनारे, जुहू चौपाटी पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जमा होते हैं। यहां आस्था का सैलाब देखने को मिलता है, जब लोग एक साथ समुद्र के जल में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अन्य शहर::::मुंबई के अलावा नासिक, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में भी स्थानीय नदियों और जलाशयों के किनारे छठ पूजा का आयोजन भव्य रूप से किया जाता है।

छठ पूजा

सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक

छठ पूजा आज केवल एक क्षेत्रीय त्यौहार नहीं रहा, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकजुटता और समन्वय का प्रतीक बन गया है। इन राज्यों में यह महापर्व यह दिखाता है कि कैसे प्रवासी भारतीय अपनी जड़ों और परंपराओं को देश के हर कोने में जीवित रखे हुए हैं। सूर्य देव की उपासना का यह अनुपम लोकपर्व, नदी के किनारे की गई सजावट, छठ के पारंपरिक लोकगीत और प्रसाद के रूप में बनने वाले ठेकुआ की सुगंध के साथ, हर जगह एक अलौकिक और पवित्र माहौल बना देता है।

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