एक नजर गिरिजा देवी मंदिर पर
रामनगर का चमत्कारी गिरिजा देवी मंदिर – आज हम बात करने वाले हैं नैनीताल जिले में स्थित रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर की, जहां आप रोमांच और श्रद्धा दोनों पा सकते हैं। नदी के पानी की सरगम के बीचों-बीच स्थित इस मंदिर की अपनी एक अनोखी कहानी है, जो हर किसी को अचंभित करने वाली है। खूबसूरत वादियों से घिरा यह मंदिर अध्यात्म के साथ-साथ घुमक्कड़ों के लिए एक बेमिसाल डेस्टिनेशन है। आप यहां कोसी नदी के किनारे पत्थरों पर बैठकर जीवन की सारी थकान को अलविदा कह सकते हैं। पानी में पैर डालकर, तन और मन को तृप्त करती ठंडी हवाएं आपको यहां आने के लिए मजबूर करती हैं। मंदिर सौ फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है।

इसका पहाड़ियों के बीचों-बीच खड़ा होना हृदय में और मिठास भरता है। तन और मन की थकान उतारने के वास्ते यह जगह वास्तव में किसी जन्नत से कम नहीं है। 90 सीढ़ियां चढ़कर आप यहां गिरिजा देवी जी के दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर के दरवाजे पर ही लगे बाजार से मनचाहा सामान खरीद सकते हैं। आइए, परत-दर-परत आज हम इस खूबसूरत डेस्टिनेशन को समझते हैं।(रामनगर का चमत्कारी गिरिजा देवी मंदिर)

क्या है इस वादियों के बीच बने मंदिर का अतीत?
लोकल लोगों के अनुसार हमने पाया कि यह मंदिर सनातनी नहीं है, न ही यहां इसकी स्थापना की गई थी। यह तो मां गिरिजा देवी की काया है। उनका यह मंदिर हजारों साल पहले बाढ़ के पानी में बहकर आया था। माना जाता है कि गिरिराज पुत्री देवी गिरिजा, जो भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही एक रूप हैं, उनकी मूर्ति एक बार यहां खुदाई में पाई गई थी। दूसरा मानना यह है कि कोसी नदी में बाढ़ आने के कारण पर्वत गिरी के कटाव से एक बड़े पर्वत का टुकड़ा बहकर यहां से गुजरा। उस दौरान भगवान भैरव ने कहा – “थी राऊ, बैना थी राऊ” मतलब “रुक जाओ बहन, रुक जाओ।

” तब यह चट्टान वहां रुक गई और फिर यहां मंदिर बन गया। आज लाखों श्रद्धालु यहां भक्ति भाव से आते हैं। मंदिर के नीचे भगवान भैरव का मंदिर है। भक्तजन जब तक भगवान भैरव के दर्शन न करें, तो उनका यहां आना अधूरा माना जाता है। भगवान भैरव के इस मंदिर में खिचड़ी का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

100 फीट ऊंचे टीले पर बने इस मंदिर में काले ग्रेनाइट से बनी 9वीं शताब्दी की लक्ष्मीनारायण की मूर्ति भी है। इस मंदिर को सबसे पहले रामनगर के शासक कत्यूरी राजाओं ने 1840 में खोजा था। तब से 1970 के दशक तक यह मंदिर अपनी उसी स्थिति में था जैसे कि बाढ़ में बहकर आया था। लेकिन 1940 के समय ही इस मंदिर को व्यवस्थित किया गया था। आज यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं — कोई दर्शन करने तो कोई कोसी नदी में स्नान करने।

गिरिजा देवी से गर्जिया देवी मंदिर कैसे हुआ?
जब आप रामनगर से मंदिर की ओर कूच करेंगे तो आपको कई जगह हाइवे पर साइनबोर्ड पर शेर, हिरण और अन्य जानवरों के चित्र देखने को मिल जाएंगे। ये संकेत देते हैं कि आप सावधानी से वाहन चलाएं, क्योंकि अक्सर रोड पर जानवर आ जाते हैं और हादसे हो जाते हैं।

कारण यह है कि जिम कॉर्बेट से यह मंदिर महज 7 से 8 किलोमीटर की दूरी पर ही है और देवी का यह मंदिर चारों तरफ से जंगल से घिरा हुआ है। माना जाता है कि यहां पहले शेर आया करते थे और वे इस मंदिर की परिक्रमा किया करते थे। साथ ही अपनी तेज गर्जना देते थे। शेरों की इस गर्जना और देवी गिरिजा के प्रति उनके भक्ति भाव को देखते हुए इस जगह का नाम गर्जिया देवी मंदिर कर दिया गया।

यहां आसपास घूमने के लिए और क्या-क्या है?
सबसे पहले तो आप जंगल सफारी कीजिए और जंगल का आनंद लीजिए। इस तरफ यानी रामनगर के आसपास बफर जोन है, जिसमें जानवर दिखने की संभावना कम होती है। फिर भी यदि आप जंगल का रोमांच जीना चाहते हैं तो यह आपकी ट्रिप का बेहतरीन हिस्सा हो सकता है।

इसके अलावा आप जिम कॉर्बेट का घर (बंगला) भी देख सकते हैं, जो बहुत प्यारा और जानकारियों से भरपूर संग्रहालय है। साथ ही आप यहां पर कॉर्बेट झरना और कैम्पिंग साइट भी विज़िट कर सकते हैं। दो घंटे की दूरी पर आप नैनीताल जैसी बेहतरीन और दिल को गदगद कर देने वाली डेस्टिनेशन का मजा भी ले सकते हैं। यदि यह कहा जाए कि प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

कैसे पहुंचें गिरिजा देवी मंदिर?
नैनीताल से 73 किलोमीटर और रामनगर से 19 किलोमीटर दूर कोसी नदी की बहती धारा में खड़े इस मंदिर तक पहुंचना बहुत आसान है। जैसा कि हम जानते हैं, रामनगर हाइवे से जुड़ा हुआ है। तो रामनगर तक आप बस, कार या बाइक से सफर कर सकते हैं। इसके अलावा यदि आप ट्रेन से यात्रा करना चाहते हैं, तब भी आपका स्वागत है क्योंकि रामनगर इंडियन रेलवे से जुड़ा हुआ है।

मतलब आप जैसे भी आना चाहें, यहां बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं। फ्लाइट से आने का विचार है तो वह भी बुरा नहीं है। यहां से मात्र 83 से 85 किलोमीटर दूर पंतनगर में हवाई सेवा उपलब्ध है। तो आप निश्चिंत रहें। बैग पैक कीजिए और जल्द ही गिरिजा देवी मंदिर का प्लान बनाइए, इस खूबसूरत नज़ारे का लुत्फ उठाने के लिए।

कहां रुकें और क्या खाएं?
उत्तराखंड का यह पूरा इलाका टूरिज्म के लिए जाना जाता है। यहां हर 100 मीटर पर आपको अच्छे-अच्छे होटल, गेस्ट हाउस और रिज़ॉर्ट मिल जाएंगे, जो बेहद आरामदायक और सुविधाओं से लैस होते हैं — सस्ते से लेकर महंगे तक। खाने की बात करें तो यहां का लोकल फूड आज़माना सबसे बेहतर रहेगा।

जब हम घर से बाहर निकलते हैं, तो हर जगह का कल्चर और फूड हमें जीना चाहिए। बाकी आपकी इच्छा — आप जैसा उचित समझें। यदि एक दिन के लिए आप घूमने आ रहे हैं, तो खाना जैसी चीजें साथ ला सकते हैं। लेकिन यदि आपका ट्रिप एक दिन से ज्यादा का है, तो फिर तो आप बचना भी चाहें तो नहीं बच पाएंगे। वैसे इसे बचना नहीं कहना चाहिए, अनुभव कहना चाहिए — और इससे उम्दा अनुभव तो कुछ नहीं।

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