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Abu Dhabi Travel Guide: आजकल बन रहा है कपल्स का फेवरेट लग्ज़री हॉलिडे स्पॉट

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अरब की खाड़ी के किनारे बसा Abu Dhabi संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी होने के साथ-साथ अपनी आधुनिक वास्तुकला, सांस्कृतिक विरासत और विश्वस्तरीय सुविधाओं के लिए जाना जाता है। शांत समुद्री तट, भव्य म्यूजियम, आलीशान होटल्स और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर इस शहर को एक ग्लोबल ट्रैवल हब बनाते हैं। अब यही अबू धाबी धीरे-धीरे कपल्स और लग्जरी ट्रैवल पसंद करने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है, जहां सुकून भरे स्पा, रोमांटिक डिनर और खास अनुभव छुट्टियों को यादगार बना देते हैं। तो आईए जानते है अबू धाबी क्यों है लोगों की पहली पसंद। Abu Dhabi : लग्जरी और रोमांस की नई पहचान अगर आप ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां शांति, शाही ठाठ और रोमांस एक साथ महसूस हो, तो अबू धाबी तेजी से इंटरनेशनल ट्रैवलर्स की पहली पसंद बनता जा रहा है। भव्य होटल्स, प्राइवेट स्पा एक्सपीरियंस, मिशलिन स्टार रेस्टोरेंट्स और रेगिस्तान के बीच खास डिनर जैसी सुविधाएं इस शहर को एक प्रीमियम हॉलिडे डेस्टिनेशन बनाती हैं। खासतौर पर कपल्स और हनीमून पर जाने वालों के लिए अबू धाबी अब दुबई का मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। लक्जरी स्पा: जहां वक्त थम सा जाता है अबू धाबी के रोज़वुड होटल में स्थित सेंस, अ रोज़वुड स्पा को सुकून और रिफ्रेशमेंट का बेहतरीन ठिकाना माना जाता है। यहां दिए जाने वाले हम्माम चैंबर रिचुअल्स मिडिल ईस्ट की सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित हैं, जिनमें स्टीम बाथ, डीप क्लीनिंग और रिलैक्सिंग मसाज शामिल है। जो मेहमान खुद को रॉयल ट्रीट देना चाहते हैं, उनके लिए 180 मिनट का अरेबियन नाइट्स एक्सपीरियंस खास है। इस पैकेज में खुशबूदार दूध से स्नान, सुगंधित तेलों से मसाज और मानसिक शांति देने वाले थैरेपी सेशन शामिल होते हैं। वहीं कपल्स के लिए तैयार वैलेंटाइन एस्केप पैकेज प्राइवेट जकूजी, चॉकलेट बॉडी स्क्रब और कैंडल लाइट सेटअप के साथ रोमांस को नया आयाम देता है। मिशलिन गाइडेड रेस्टोरेंट्स: हर स्वाद के लिए खास अबू धाबी का फूड सीन अब इंटरनेशनल लेवल पर पहचान बना चुका है। मिशलिन गाइड में शामिल रेस्टोरेंट्स यहां खाने को एक अनुभव में बदल देते हैं।हक्कासन अपने सिग्नेचर पेकिंग डक और बेहतरीन डिम सम के लिए दुनियाभर में मशहूर है। अल मारिया आइलैंड पर स्थित कोया पेरूवियन फ्लेवर्स के साथ फाइन डाइनिंग का शानदार विकल्प है।अगर आप समंदर के किनारे बैठकर जापानी डिशेज का मज़ा लेना चाहते हैं, तो नीरी एक परफेक्ट चॉइस है। वहीं रोज़वुड होटल में मौजूद दाई पाई डोंग अपनी कैंटोनीज़ डिशेज, सॉफ्ट म्यूजिक और डिम लाइट माहौल के कारण रोमांटिक डिनर के लिए बेहद पसंद किया जाता है। लूव्र Abu Dhabi : कला और रोमांस का खास अनुभव अबू धाबी का लूव्र म्यूजियम सिर्फ कला प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांटिक पलों की तलाश में आए कपल्स के लिए भी खास है। इसकी छत पर बने आर्ट लाउंज में सितारों के नीचे सीफूड प्लैटर का आनंद लेना एक यादगार अनुभव माना जाता है। यहां आने वाले जोड़े अपने रिश्ते की याद के तौर पर ‘लव लेटर’ लिखकर एक खूबसूरती से रोशन पेड़ पर टांग सकते हैं, जो इस जगह को और भी भावनात्मक बना देता है। प्राइवेट ड्यून डिनर जो लोग एडवेंचर के साथ रोमांस का अनुभव लेना चाहते हैं, उनके लिए प्राइवेट ड्यून डिनर एक खास आकर्षण है। इसमें 4×4 लैंड क्रूजर के जरिए ड्यून बैशिंग कराई जाती है, जिसके बाद रेगिस्तान के बीचों-बीच एक प्राइवेट सेटअप में रोमांटिक म्यूजिक, बारबेक्यू और कैंडल लाइट डिनर का इंतजाम होता है। यह अनुभव खासतौर पर हनीमून कपल्स और सेलिब्रेशन ट्रिप पर आए लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। समंदर के किनारे बेरूत सुर मेर पर सैर करना हो या अल मारिया आइलैंड की चमकती शामों को करीब से देखना, अबू धाबी हर तरह के ट्रैवलर को अलग अनुभव देता है। अगर आप अपनी अगली इंटरनेशनल ट्रिप में लग्जरी, प्राइवेसी और यादगार पलों की तलाश में हैं, तो अबू धाबी आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल होना चाहिए।

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राखीगढ़ी: सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख केंद्र और भारतीय इतिहास का वैश्विक सबूत

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हरियाणा के हिसार ज़िले में स्थित प्राचीन हड़प्पा स्थल राखीगढ़ी आज भारतीय इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में इसके विकास के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो इस बात को साफ़ करता है कि अब राखीगढ़ी को सिर्फ़ एक खुदाई स्थल नहीं, बल्कि एक वैश्विक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, इस राशि का उपयोग राखीगढ़ी के संरक्षण, शोध कार्य, पर्यटन विकास और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इस स्थल को उसी श्रेणी में लाना है, जहाँ आज मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे विश्व प्रसिद्ध नाम मौजूद हैं। इतिहास की गहराई में छिपा राखीगढ़ी राखीगढ़ी को आज दुनिया का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल माना जाता है। इसका फैलाव लगभग 350 हेक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में है, जो इसे पाकिस्तान में स्थित मोहनजोदड़ो से भी बड़ा बनाता है। पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक, यहाँ पाई गई सभ्यता की जड़ें 7,000 से 8,000 साल पुरानी हैं। इसी वजह से यह स्थल सिंधु घाटी सभ्यता के शुरुआती दौर को समझने के लिए बेहद अहम माना जाता है। राखीगढ़ी सिर्फ़ टूटी-फूटी दीवारों और खंडहरों का ढेर नहीं है, बल्कि यह उस समय के सुनियोजित शहरी जीवन की पूरी तस्वीर पेश करता है। खुदाई में यहाँ चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित रिहायशी इलाके, उन्नत जल निकासी व्यवस्था और पक्की ईंटों से बने मकान मिले हैं। इससे साफ़ होता है कि उस दौर में नगर नियोजन और नागरिक सुविधाओं की समझ काफ़ी विकसित थी। उन्नत इंजीनियरिंग और सामाजिक जीवन की झलक राखीगढ़ी में खुदाई के दौरान मिली संरचनाओं में एक विशाल ढांचा सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा है, जिसे कई विशेषज्ञ सार्वजनिक सभा स्थल या स्टेडियम मानते हैं। मिट्टी की ईंटों से बना यह ढांचा इस बात की ओर इशारा करता है कि हड़प्पा कालीन समाज में सामूहिक गतिविधियों और सामाजिक आयोजनों को खास महत्व दिया जाता था। इसके अलावा, यहाँ मिले कुएँ, स्नानागार और जल निकासी चैनल बताते हैं कि स्वच्छता और जल प्रबंधन उस समय के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा थे। यह पूरी व्यवस्था आज के आधुनिक शहरों जैसी ही एक सुव्यवस्थित सामाजिक संरचना को दर्शाती है। डीएनए शोध जिसने इतिहास की सोच बदल दी राखीगढ़ी से मिले मानव कंकालों पर किए गए डीएनए अध्ययन ने भारतीय इतिहास से जुड़ी कई पुरानी धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन शोधों से संकेत मिलता है कि यहाँ रहने वाले लोग स्थानीय और स्वदेशी थे और उनका आनुवंशिक संबंध आज के भारतीय समाज से जुड़ता है।कई विद्वान इस शोध को ‘आर्य आक्रमण सिद्धांत’ को खारिज करने वाला अहम प्रमाण मानते हैं। अगर इन निष्कर्षों को व्यापक मान्यता मिलती है, तो यह भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास को देखने और समझने का नजरिया ही बदल सकता है। UNESCO विश्व धरोहर बनने की तैयारी सरकार राखीगढ़ी को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए ज़रूरी प्रक्रियाओं पर काम कर रही है। इसी दिशा में यहाँ हड़प्पन नॉलेज सेंटर की स्थापना की गई है, ताकि शोधकर्ताओं, छात्रों और आम लोगों को इस प्राचीन सभ्यता के बारे में गहराई से जानकारी मिल सके।इसके साथ ही, करीब 22 से 23 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक पुरातात्विक संग्रहालय भी तैयार किया गया है। इस संग्रहालय में खुदाई से मिली कलाकृतियाँ, औज़ार, मुहरें, कंकाल और रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े अवशेष प्रदर्शित किए जाने की योजना है। विकास के साथ सामने आती ज़मीनी सच्चाइयाँ हालाँकि सरकारी योजनाएँ काफ़ी बड़ी हैं, लेकिन ज़मीन पर राखीगढ़ी के संरक्षण और विकास में कई दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। कुछ जगहों पर मिट्टी की ईंटों को बचाने के लिए अस्थायी और गैर-वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है, जो लंबे समय में संरचनाओं को नुकसान पहुँचा सकता है। इसके अलावा, पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या है। न तो वहाँ पर्याप्त सूचना पटल हैं और न ही प्रशिक्षित गाइडों की ठीक-ठाक व्यवस्था। जब कोई पर्यटक राखीगढ़ी देखने पहुँचता है, तो उसे ज़्यादातर खुदाई स्थल ढके हुए मिलते हैं। इस वजह से लोग राखीगढ़ी के कई खास और महत्वपूर्ण हिस्सों को ठीक से देख ही नहीं पाते। हालाँकि, पर्यटकों की सीमित आवाजाही के लिए कुछ चुनिंदा जगहों को खोला गया है, लेकिन इससे पूरे प्राचीन नगर की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व का पूरा अनुभव नहीं हो पाता। राखीगढ़ी के बेहतर और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी कदम राखीगढ़ी में खुदाई और संरक्षण से जुड़े सभी काम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार होने चाहिए, ताकि नाज़ुक संरचनाओं को किसी तरह का नुकसान न पहुँचे और यह कार्य अनुभवी संरक्षण विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाए। साथ ही, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल ऑडियो गाइड, व्यूइंग प्लेटफॉर्म, सूचना केंद्र और एक व्यवस्थित टिकटिंग सिस्टम विकसित करना ज़रूरी है। इसके विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी बेहद अहम है। स्थानीय युवाओं को हेरिटेज गाइड और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें रोज़गार मिले और वे अपनी विरासत को लेकर ज़्यादा जागरूक हों। इसके अलावा, खुदाई स्थलों पर बार-बार अवशेषों को ढकने के बजाय पारदर्शी कवर और स्थायी शेड लगाए जाएँ, ताकि शोधकर्ताओं और पर्यटकों दोनों को साल भर इसका लाभ मिल सके। वहीं, संग्रहालय को जल्द से जल्द पूरी तरह शुरू कर उसमें खुदाई से मिली वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए, ताकि यह जगह एक जीवंत ज्ञान और इतिहास केंद्र बन सके। राखीगढ़ी सिर्फ़ अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यतागत निरंतरता, वैज्ञानिक समझ और सांस्कृतिक समृद्धि का मज़बूत प्रमाण है। अगर संरक्षण और विकास का काम संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से किया गया, तो आने वाले समय में राखीगढ़ी न सिर्फ़ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए इतिहास, शोध और पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।

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भारत के 7 सबसे रहस्यमयी मंदिर! जानिए इनके पीछे छिपी कहानियाँ

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भारत अपनी प्राचीन सभ्यता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गहरी धार्मिक आस्था के लिए पूरी दुनिया में विशिष्ट पहचान रखता है। यहाँ के मंदिर केभारत के रहस्यमयी मंदिर जैसे कामाख्या, पद्मनाभस्वामी, लेपाक्षी, मेहंदीपुर बालाजी और स्तंभेश्वर महादेव, जिनसे जुड़े हैं अनसुलझे रहस्य और चमत्कारभारत के रहस्यमयी मंदिर जैसे कामाख्या, पद्मनाभस्वामी, लेपाक्षी, मेहंदीपुर बालाजी और स्तंभेश्वर महादेव, जिनसे जुड़े हैं अनसुलझे रहस्य और चमत्कारवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं हैं, बल्कि वे हजारों वर्षों के इतिहास, लोककथाओं और रहस्यमयी घटनाओं के जीवंत साक्ष्य भी हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कई रहस्यमयी मंदिर ऐसे हैं जिनसे जुड़ी मान्यताएँ, अनोखी परंपराएँ और अद्भुत स्थापत्य आज भी वैज्ञानिकों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए पहेली बने हुए हैं। कहीं मंदिर समुद्र में डूबकर फिर प्रकट हो जाते हैं, तो कहीं तैरते स्तंभ, बंद तहखाने या स्वयंभू मूर्तियाँ लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं। यही कारण है कि ये रहस्यमयी मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं, बल्कि यात्रियों और खोजी प्रवृत्ति वाले लोगों को भी भारत की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक गहराई से रूबरू कराते हैं। 1. Kamakhya Temple, असम – रज उगलती देवी कामाख्या मंदिर असम के गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख तीर्थ है, जहाँ देवी कामाख्या की पूजा किसी मूर्ति के बजाय प्राकृतिक योनिस्थान के रूप में की जाती है। यह योनिस्थान हमेशा जल से नम रहता है और शक्ति व सृजन का प्रतीक माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला नीलाचल शैली की है, जिसका मूल निर्माण आठवीं–नौवीं शताब्दी में हुआ और 16वीं शताब्दी में कोच वंश के शासकों द्वारा इसका पुनर्निर्माण कराया गया। यह स्थल तंत्र साधना का बड़ा केंद्र माना जाता है और यहां नित्य पूजा, अर्चना तथा परंपरागत रूप से पशु बलि की प्रथा भी प्रचलित है, हालांकि मादा पशुओं की बलि नहीं दी जाती। जून माह में आयोजित अंबुबाची मेले के दौरान देवी के वार्षिक रजस्वला होने की मान्यता के कारण मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है, जो इसे भारत के सबसे अनोखे और रहस्यमयी मंदिरों में शामिल करता है। 2. Padmanabhaswamy Temple, केरल – अनछुए खज़ाने का रहस्य पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित है और यह भगवान विष्णु के श्री पद्मनाभस्वामी स्वरूप को समर्पित है। माना जाता है कि इसका मूल निर्माण छठी शताब्दी के आसपास हुआ था, जबकि वर्तमान भव्य स्वरूप 18वीं शताब्दी में त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने तैयार करवाया। मंदिर की वास्तुकला केरल और द्रविड़ शैली का सुंदर संगम है, जिसमें शेषनाग पर शयन करते भगवान विष्णु की लगभग 18 फीट लंबी प्रतिमा स्थापित है, जिसे हजारों शालिग्रामों से बनाया गया माना जाता है। यह मंदिर अपने विशाल खजाने के कारण विश्व का सबसे समृद्ध मंदिर कहा जाता है, जहां तहखानों में भारी मात्रा में सोना, चांदी और आभूषण मिले हैं। कुल सात तहखानों में से एक तहखाना आज भी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के कारण बंद है, जिसे मंदिर के रहस्यमय इतिहास से जोड़ा जाता है। त्रावणकोर शाही परिवार आज भी मंदिर का संरक्षक है और इसे धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 3. Veerabhadra Temple, आंध्र प्रदेश – झूलता स्तंभ वीरभद्र मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के लेपाक्षी में स्थित है और इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के काल में हुआ माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव के उग्र स्वरूप वीरभद्र को समर्पित है और द्रविड़ शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर चट्टानों को काटकर बनाया गया है और इसके स्तंभों व छतों पर रामायण, महाभारत और पुराणों से जुड़े दृश्य उकेरे गए हैं। यहां लगभग 70 पत्थर के स्तंभ हैं, जिनमें एक प्रसिद्ध झूलता हुआ स्तंभ भी है, जो जमीन से आंशिक रूप से जुड़ा होने के बावजूद संतुलन बनाए रखता है। मंदिर परिसर में एक ही पत्थर से बनी विशाल नंदी की मूर्ति भी स्थापित है। अपने स्थापत्य कौशल, भित्ति चित्रों और रहस्यमय झूलते स्तंभ के कारण यह मंदिर धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक और कलात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है 4.Mehandipur Balaji Temple, राजस्थान – भय और आस्था की सीमा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है और इसका इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर भगवान हनुमान के बाल रूप बालाजी को समर्पित है, जिनकी मूर्ति को स्वयंभू बताया जाता है। यहां बालाजी के साथ प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की भी पूजा होती है। मंदिर मुख्य रूप से मानसिक, शारीरिक और नकारात्मक बाधाओं से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है, जहां नारियल चढ़ाना, काला धागा बांधना और विशेष मंत्रों के साथ पूजा जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर का वातावरण विशिष्ट माना जाता है और इसे चमत्कारी स्थल के रूप में देखा जाता है। यह मंदिर दौसा जिले के मेहंदीपुर गांव में स्थित है और सड़क व रेल मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। 5. Sthambheshwar Mahadev Temple, गुजरात – लुप्त मंदिर स्तंभेश्वर महादेव मंदिर गुजरात के भड़ौच जिले के कवी कम्बोई, जंबूसर क्षेत्र में अरब सागर के किनारे स्थित है और इसे लगभग 150 वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान कार्तिकेय द्वारा स्थापित शिवलिंग से जुड़ा हुआ है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। मंदिर की सबसे खास विशेषता यह है कि यह ज्वार-भाटा के दौरान दिन में दो बार समुद्र में डूब जाता है और भाटा आने पर फिर प्रकट हो जाता है। यहाँ शिवलिंग की पूजा तेल से की जाती है, दूध का प्रयोग नहीं होता। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के समय यहाँ विशेष भीड़ रहती है और दर्शन के लिए ज्वार-भाटा का समय ध्यान में रखना आवश्यक माना जाता है। भारत के ये रहस्यमयी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था और पुरातन कहानियों का केंद्र हैं, बल्कि इतिहास, वास्तुकला और लोकविश्वास के अनगिनत रहस्यों से भरे हुए हैं। चाहे वे प्रकृति के अद्भुत चमत्कार हों या अनसुलझे लोककथाएँ, ये मंदिर आज भी शोधकर्ताओं, भक्तों और यात्रियों के लिए आकर्षण का स्रोत बने हुए हैं।

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Udaipur- Bollywood से Hollywood तक, फिल्म निर्माताओं का फेवरेट शहर

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उदयपुर – झीलों के शहर का नाम लेते ही आँखों के सामने पानी पर तैरती रोशनियाँ, पहाड़ियों से उतरती ठंडी हवा और इतिहास की ख़ामोश गूँज उभरने लगती है। उदयपुर पहुँचना सिर्फ़ एक जगह पर पहुँचना नहीं होता, बल्कि एक अलग ही खूबसूरत दुनिया में प्रवेश करना होता है। यहाँ समय तेज़ नहीं दौड़ता—वो झीलों के पानी की तरह ठहर-ठहर कर चलता है। फ़रवरी की हल्की ठंड में शहर कुछ ज़्यादा ही अपनापन ओढ़ लेता है, जैसे मुसाफ़िरों से कह रहा हो, ठहरो, जल्दी किसे है। क्योंकि कई बार एक शहर सिर्फ शहर नही होता बल्कि आपकी ज़िंदगी का एक अहम् ठहराव बन जाता है, आपके जज़्बातों का, ख्यालों का और दिल के धड़कने का ज़रिया बन जाता है। उदयपुर उन्ही शहरों में से एक है जिनके ख़्वाब देख कर मैं बड़ा हुआ। Udaipur महाराजा उदय सिंह का बसाया उदयपुर शहर यकीनन राजा-महाराजाओं की विरासत का सबसे खूबसूरत प्रमाण है। अपनी इसी ख़ूबसूरती के कारण उदयपुर आज भी फ़िल्मी दुनिया के तमाम निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद है।(Udaipur) लेक व्यू होटल हम दिल्ली से उदयपुर ट्रैन से पहुंचे। टैक्सी ली और चल पड़े अपने होटल की और। हालांकि होटल पहले ही बुक कर दिया था लेकिन फिर भी किस्मत से होटल मिला उदयपुर के बेहद खास मंदिर जगदीश टेम्पल के बिलकुल पास में। और इतने पास में की होटल के रूम से मंदिर साफ़ दिखाई दे रहा था। पुराने उदयपुर शहर और लाल घाट के पास। सामने दूर तक फैली हुई पिछौला झील के पानी में चमकता सिटी पैलेस बस होटल के पैसे वसूल करवा रहा था। उदयपुर में लेक व्यू होटल लेने का ये सबसे बड़ा फ़ायदा है। एक बात आप अवश्य ध्यान रखिये की जब भी उदयपुर का ट्रिप बने होटल आप लेक व्यू देखकर ही बुक करें। रूफ टॉप पर शाम की चाय हो और सामने नीली झील को निहारने का अवसर। यकीन मानिये आपका पूरा टूर शानदार बन जायेगा। देश के सबसे रोमांटिक शहरों में से एक- उदयपुर वैसे उदयपुर देश के सबसे रोमांटिक शहरों में से एक है। जहां देखों वहीं पानी से लबालब झीलें गर्मियों में भी ठंडक का अहसास कराती हैं और ये तो फिर भी अक्टूबर का महीना था। दिन में ठीक-ठाक गमी थी, लेकिन रात थोड़ा-थोड़ा सर्दी का अहसास दे रही थी। दिन में, शहर में सड़कों पर ट्रैफिक और भीड़-भाड़ न के बराबर, इसलिए ज्यादा तपिश महसूस नही होती। वैसे उदयपुर में महल, हवेली, मंदिर , बाग और म्यूजियम हर चीज की भरमार है लेकिन जो एक चीज इसे दूसरे शहरों से जुदा करती है वो है चारों ओर झीलें ही झीलें- मानो जन्नत के बेइंतहां नजारे! यहां घूमने और देखने योग्य चार झीलें हैं -पिछौला लेक, फ़तेह सागर, उदय सागर और रंग सागर। चारों झीलें एक नहर से आपस में जुड़ी हैं। सिटी पैलेस की दीवार से सटकर पिछौला लेक है। और दूध तलाई नाम की झील पास ही है। किसी जमाने में यहां दूध बिकता था और आज पूजा-अर्चना होती है।(Udaipur) किस समय यहाँ आना सबसे बेहतर लम्बे सफ़र के बाद हम दिल्ली से उदयपुर ट्रैन से पहुंचे थे और वो भी सुबह-सुबह के वक़्त। इसलिए वक़्त का तकाज़ा था कि थोड़ा आराम कर लिया जाए। दो-तीन घटे आराम करने के बाद हमने होटल में ही चाय-नाश्ता किया। राजस्थान में हों और नाश्ते में पोहा न खाएं तो बस ये तो फिर राजस्थानी खान-पान के साथ एक तरह से ज्यादती है। आप राजस्थान के किसी भी शहर में चले जाएं, पोहा आपको हर जगह आसानी से मिल ही जाएगा। वैसे तो साल भर यहाँ पर्यटकों का आना लगा रहता है लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहाँ आने के लिए बेस्ट रहता है। बहुत से पर्यटक यहाँ मानसून में आना पसंद करते हैं। बारिशों में यहाँ झील का दीदार करना बेहद सुखद अनुभव है। आप जब भी किसी टूरिस्ट जगह पर घूमने जाएं तो बेहतर यही होता है की अच्छे से घूमने की प्लानिंग करें ताकि इत्मीनान से सभी जगह दखने का, खाने-पीने का, खरीददारी करने का सही ढ़ंग से लुत्फ़ उठा सकें। सो हमने उदयपुर घूमने का एक शेड्यूल बनाया और उसी के अनुसार निकल पड़े, सबसे पहले फ़तेह सागर झील के पास स्थित सहेलियों की बाड़ी। Best Place to Visit in Udaipur-सहेलियों की बाड़ी देश के मशहूर बागों में शुमार सहेलियों की बाड़ी नाम का यह सुन्दर बाग हरियाली और झर-झर बहते फव्वारों के लिए खूब जाना जाता है। इस बाग़ की खूबसूरती के कारण न जाने कितनी ही फिल्मों के बेहतरीन गीत यहाँ फिल्माए जा चुके हैं। बताते हैं कि इसे महाराणा संग्राम सिंह (द्वितीय) ने 1710 से 1734 के बीच राज परिवार की महिलाओं के सैरगाह के लिए बनवाया था। इसीलिए इसका नाम सहेलियों की बाड़ी रखा गया। बाग के कई भाग हैं जिनके बेहद खूबसूरत नाम भी रखे गए हैं जैसे- सावन भादो, हाथी फव्वारें, बिन बादल बरसात और रास लीला आदि। बताते हैं कि पहले फ़तेह सागर झील के करीब छोटे-छोटे बहुत सारे बाग़-बगीचे थे। इन्हें महाराणा फ़तेह सिंह ने सहेलियों की बाड़ी में मिलाकर शानदार और भव्य रूप दे दिया। हमने बाग़ की सुंदरता का खूब आनंद लिया और तकरीबन दो घंटे से भी ज्यादा का समय यहाँ बिताया, बाग़ में बने सुन्दर-सुन्दर हाथियों और माहौल को खुशनुमा बना रहे फव्वारों के साथ खूब सारे फोटो लिए, वीडियो बनाई। आखिर यादें ही तो हैं जिनकों संजो कर रखा जा सकता है। इसलिए आप उदयपुर आये और इस बाग़ को न देखा तो समझ लीजिये आप जन्नत के एक लाज़वाब टुकड़े के दीदार से महरूम रह गए। अगले पड़ाव की तरफ बढ़ते तब तक भूख ने शोर मचाना शुरू कर दिया था। सो सहेलियों की बाड़ी के पास ही बड़ा बाजार है जहां बहुत सारे छोटे-बड़े भोजनालय आपको आसानी से मिल जायेंगे। लेकिन हमने दोपहर के भोजन में राजस्थानी थाली को तवज्जो दी। भारत में किसी भी शहर में घूमने का सीधा मतलब होता है अच्छे दृश्यों के साथ-साथ उस जगह के खाने की चीजों के स्वाद लेना। क्योंकि जब भी आप कहीं घूमने जाए अगर खाना वहां का स्पेशल न हो तो फिर आप शायद खाने के शौक़ीन नही हैं। थाली में राजस्थान का पारम्परिक भोजन दाल-चूरमा-बाटी के साथ

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सफर के दौरान मोबाइल नेटवर्क गायब होने पर अपनाएं येआसान और ज़रूरी ट्रिक्स

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यात्रा के दौरान मोबाइल नेटवर्क अचानक गायब हो जाना आज के दौर में बड़ी परेशानी बन सकता है। पहाड़ी इलाकों, जंगलों, दूर-दराज़ के रास्तों या लंबी रोड ट्रिप के दौरान अक्सर फोन में नेटवर्क नहीं मिलता, जिससे अपनों से संपर्क टूटने का डर बना रहता है। ऐसे हालात में घबराने के बजाय अगर कुछ आसान ट्रिक्स पहले से पता हों, तो मुश्किल समय में भी मदद मिल सकती है। जानिए सफर के दौरान नेटवर्क न होने पर क्या करें। सफर में बार-बार गायब हो रहा है मोबाइल नेटवर्क? अपनाएं ये आसान ट्रिक्स आज के समय में मोबाइल फोन सिर्फ़ बातचीत का ज़रिया नहीं रहा, बल्कि यह नेविगेशन, होटल बुकिंग, ऑनलाइन पेमेंट और इमरजेंसी मदद का सबसे अहम साधन बन चुका है। ऐसे में सफर के दौरान अचानक मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाना किसी भी यात्री के लिए चिंता का कारण बन सकता है। पहाड़ी इलाकों, जंगलों, समुद्र किनारे या दूर-दराज़ के रास्तों पर अक्सर नेटवर्क कमजोर या पूरी तरह खत्म हो जाता है। अगर आप पहले से कुछ जरूरी बातें जान लें, तो ऐसी स्थिति में भी खुद को और अपनों को सुरक्षित रख सकते हैं। सफर के दौरान मोबाइल नेटवर्क कैसे पाएं: एयरप्लेन मोड का सही इस्तेमाल जब फोन में नेटवर्क बार-बार आ-जा रहा हो या बिल्कुल गायब हो जाए, तो सबसे आसान तरीका है एयरप्लेन मोड का इस्तेमाल। कुछ सेकंड के लिए एयरप्लेन मोड ऑन करके फिर बंद करने से मोबाइल दोबारा आसपास के टावर को सर्च करता है। कई बार इससे नेटवर्क वापस आ जाता है, खासकर पहाड़ी सड़कों या चलती गाड़ी में सफर करते समय यह तरीका काफी कारगर साबित होता है। नेटवर्क को ऑटो की जगह मैन्युअली चुनें अक्सर फोन ऑटोमैटिक नेटवर्क सेलेक्शन में सही टावर नहीं पकड़ पाता। ऐसे में मोबाइल की सेटिंग में जाकर मैन्युअल नेटवर्क सर्च करना बेहतर रहता है। हो सकता है आपके सिम का नेटवर्क उपलब्ध न हो, लेकिन किसी दूसरे नेटवर्क पर इमरजेंसी कॉल संभव हो जाए। सफर से पहले इस सेटिंग को समझ लेना भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकता है। Wi-Fi Calling को पहले से रखें ऑन अगर आपका स्मार्टफोन और सिम Wi-Fi Calling को सपोर्ट करता है, तो यात्रा पर निकलने से पहले इसे जरूर एक्टिवेट करें। होटल, गेस्ट हाउस, ढाबे या किसी सार्वजनिक जगह पर Wi-Fi मिलने की स्थिति में आप बिना मोबाइल नेटवर्क के भी कॉल कर सकते हैं। पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में यह फीचर बेहद उपयोगी माना जाता है, जहां मोबाइल टावर दूर होते हैं लेकिन Wi-Fi मिल सकता है। जरूरी जानकारी और मैप रखें ऑफलाइन नेटवर्क न होने की स्थिति में ऑनलाइन मैप, टिकट या होटल डिटेल न खुलना बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए सफर से पहले जरूरी फोन नंबर, होटल का पता, यात्रा से जुड़े डॉक्यूमेंट और मैप को ऑफलाइन सेव कर लेना समझदारी है। आजकल कई नेविगेशन ऐप्स ऑफलाइन मैप की सुविधा देते हैं, जिससे रास्ता भटकने का खतरा काफी कम हो जाता है। इमरजेंसी कॉलिंग फीचर की जानकारी रखें बहुत कम लोगों को पता होता है कि कमजोर नेटवर्क में भी कई बार इमरजेंसी कॉल काम कर जाती है। भारत में 112 जैसे इमरजेंसी नंबर किसी भी उपलब्ध नेटवर्क से कनेक्ट होने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा स्मार्टफोन में मौजूद इमरजेंसी SOS फीचर भी कई हालात में मददगार हो सकता है। सफर से पहले फोन की इन सेटिंग्स को जांच लेना जरूरी है। सफर के दौरान मोबाइल नेटवर्क का न होना आज भी एक आम समस्या है, लेकिन थोड़ी सी तैयारी और सही जानकारी से इसे संभाला जा सकता है। एयरप्लेन मोड, मैन्युअल नेटवर्क, Wi-Fi Calling, ऑफलाइन डेटा और इमरजेंसी फीचर्स जैसे छोटे कदम मुश्किल वक्त में बड़ा सहारा बन सकते हैं। अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो नेटवर्क की चिंता किए बिना सफर का मज़ा ले सकेंगे और किसी भी आपात स्थिति में खुद को सुरक्षित रख पाएंगे।

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मेहरानगढ़ फोर्ट-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

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आप सभी जानते हैं भारत को मंदिरों का देश माना जाता है, लेकिन अगर भारत को ऐतिहासिक किलों का देश कहा जाये तो बिलकुल भी गलत नहीं होगा, क्योंकि देश का चाहे कोई भी हिस्सा हो उत्तर से लेकर दक्षिण तक आपको देश भर में 500 से भी ज्यादा किले देखने को मिल जाएंगे, जो देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। इनमें से कई किले सैकड़ों साल पुराने हैं, बहुत से किले तो ऐसे भी हैं, जो कब बने और इन्हें किसने बनाया, के बारे में कोई नहीं जानता। (Mehrangarh Fort) आज हम आपको इस ब्लॉग में एक ऐसे ही किले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह किला भारत के सबसे पुराने और विशाल किलों में से एक है, जिससे भारत के समृद्धशाली अतीत की झलक मिलती है। किले का ऐतिहासिक दृष्टिकोण इस किले को मेहरानगढ़ दुर्ग या मेहरानगढ़ फोर्ट के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के जोधपुर शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित यह किला करीब 125 मीटर की ऊंचाई पर बना है। अगर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो 15वीं शताब्दी में इस किले की नींव राव जोधा ने रखी थी, लेकिन इसके निर्माण का कार्य बाद में महाराज जसवंत सिंह ने पूरा किया। मेहरानगढ़ किले के बनने की कहानी कुछ इस तरह है कि राव जोधा जब जोधपुर के 15वें शासक बने, उसंके एक साल बाद ही उन्हें लगने लगा कि मंडोर का किला उनके लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने तत्कालीन किले से एक किलोमीटर दूर पहाड़ी पर एक किला बनवाने की सोची। उस पहाड़ी को ‘भोर चिड़ियाटूंक‘ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहां काफी संख्या में पक्षी रहते थे। आठ दरवाजों और अनगिनत बुर्जों से युक्त यह किला ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है। दूर से देखने पर ही आपको इस किले की विशालता का पता चल जायेगा। जोधपुर शहर के किसी भी हिस्से से आप इस किले को देख सकते हैं।  वैसे तो इस किले के सात ही द्वार(पोल) हैं, लेकिन कहते हैं कि इसका आठवां द्वार भी हैं जो रहस्यमयी है। और ऐसे रहस्यों के पीछे बहुत सी कहानियां जुड़ी होती हैं जिनको समझना आसान नहीं। किले के मुख्य द्वार  पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगवाई गई थीं। सुरक्षा के लिहाज़ से इस तरह की कारीगरी आपको कुछ दूसरे किलों में दिखाई देगी। चामुंडा माता का मंदिर किले में चामुंडा माता का मंदिर भी है, जिसे राव जोधा ने 1460 ईस्वी में बनवाया था। नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताते हैं जब राव जोधा ने अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर शिफ्ट किया था तब वह अपने साथ दुर्गा माता की मूर्ति को भी ले गए थे। इस मूर्ति को मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया गया था जिसे आज चामुंडा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहीं इसी जगह हर साल माता का प्रसिद्ध मेला भी लगता है जिसमे दूर दराज से हज़ारों श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं। किले की इमारतों की बनावट जब आप इस किले की इमारतों की बनावट देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे। महाराजा अजीत सिंह के शासन के समय इस किले की कई इमारतों का निर्माण मुगल डिजाइन में किया गया है। इस किले में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले सात विशाल दरवाज़ों के अलावा मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (फूल महल), दौलत खाना, शीश महल (दर्पण पैलेस) जैसे कई शानदार शैली में बने कमरें हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था। शीश महल, या हॉल ऑफ मिरर्स बेहद आकर्षक ढंग से बनाया गया है जो अपनी दर्पण के टुकड़ों पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। फेमस म्यूजियम मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है, जो भारत के मजबूत और गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है. मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राजस्थान  के बेहतरीन और फेमस म्यूजियम में से एक है., जिसमें राजा-महाराजाओं की पोशाकें और उनके हथियार रखे गए हैं. साथ ही, उनके रहन-सहन, दैनिक जीवन  और कल्चर से जुड़ी चीजें आज भी यहां मौजूद हैं जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी और आकर्षित जरूर करती है। मेहरानगढ़ किले के परकोटों से पूरे जोधपुर शहर का बेहतरीन नजारा आप देख सकते हैं. इस फोर्ट की दीवार 10 किलोमीटर तक फैली है और दीवार की ऊंचाई 20 फीट से 120 फीट तक है. वहीं, दीवार की चौड़ाई 12 फीट से 70 फीट तक है. ट्रेडिशनल बाजार  इस किले में पर्यटकों के लिए एक छोटा सा बाजार भी बनाया गया है जहाँ से आप राजस्थानी  पारम्परिक परिधानों और जूतियो के अलावा विभिन्न प्रकार के अन्य डेकोरेटिव आइटम्स की खरीदारी भी  कर सकते हैं। इसके अलावा इस किले के अंदर एक शाही रेस्टोरेंट भी मौजूद है, जहां पर आप अपने पार्टनर के साथ कैंडल लाइट डिनर का आनंद भी ले सकते हैं। इस किले की एंट्री टिकट पर व्यक्ति 200 रुपए है। क्योंकि यह किला आज भी जोधपुर के राज घराने के संरक्षण में है न की भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन, इसलिए यहाँ के रख रखाव के लिए टिकट की कीमत ज्यादा रखी गई है। लेकिन किला इतना शानदार है कि आपको लगेगा की टिकट के पैसे वसूल हो गए। कितना समय काफी रहेगा इस किले को देखने के लिए-Mehrangarh Fort timingsक्योंकि मेहरानगढ़ फोर्ट देश के सबसे पुराने और बड़े किलो में से एक है इसलिए इस पूरे किले को देखने के लिए आप तीन से चार घंटे मान कर चलिए। अगर आप ऐतिहासिक इमारतों और चीजों को पसंद करते हैं तब थोड़ा एक्स्ट्रा समय इसमें और जोड़ लीजिये। किले की बनावट, महल और विशेषकर यहाँ का म्यूजियम आपको जल्दी से यहाँ से रुख़्सत नहीं होने देगा। कैसे पहुंचें मेहरानगढ़ का किला मेहरानगढ़ किला पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर में स्थित है। वहीं, यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोधपुर जंक्शन है। । क्योंकि जोधपुर राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है इसलिए  यहां पर सड़क मार्ग से भी बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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बजट की चिंता छोड़िए-₹3,500 में New Honda Shine के साथ हर वीकेंड होगी यादगार रोड ट्रिप!

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हम सभी के भीतर एक घुमक्कड़ छिपा होता है जो हर शुक्रवार की दोपहर दफ्तर की खिड़की से बाहर देखते हुए बस एक ही सपना बुनता है। किसी अनजानी सड़क पर बाइक दौड़ाना, पहाड़ों की ताजी हवा को महसूस करना और डूबते सूरज को किसी ऊंचे पॉइंट से देखना। अक्सर भारी-भरकम एडवेंचर बाइक्स की कीमत और उनका महंगा रखरखाव हमारे इन ‘रोड ट्रिप’ वाले सपनों पर ब्रेक लगा देता है। लेकिन क्या हो अगर आपकी अगली बड़ी यात्रा की चाबी आपके महीने के मोबाइल बिल या जिम की फीस जितने खर्च पर मिल जाए? (Honda Shine) सड़कों की नब्ज पहचानने वाली कंपनी होंडा ने मुसाफिरों के इसी जज्बे को सलाम करते हुए अपनी सबसे भरोसेमंद साथी Honda Shine 125 को अब Limited Edition अवतार में पेश किया है। ₹86,211 की शुरुआती कीमत और महज़ ₹3,500 की आसान ईएमआई (EMI) के साथ यह बाइक अब सिर्फ ऑफिस जाने का जरिया नहीं, बल्कि आपके वीकेंड गेटवे का सबसे किफायती टिकट बनने वाली है। रास्तों पर आपकी चमक बढ़ाएगा यह नया अवतार! एक सच्चे ट्रैवलर के लिए उसकी बाइक सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि उसकी रूह का हिस्सा होती है। जब आप किसी पहाड़ी कैफे या हाईवे किनारे बने किसी ढाबे पर अपनी बाइक खड़ी करते हैं, तो उसका लुक आपकी शख्सियत का आईना होता है। नई होंडा शाइन 125 लिमिटेड एडिशन में कंपनी ने ‘प्रीमियम टच’ का तड़का लगाया है। इसके नए मेटाडोर सिल्वर मेटालिक और रेबेल रेड मेटालिक रंग न केवल आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि धूल भरे कच्चे रास्तों पर भी अपनी चमक नहीं खोते। इसके ब्लैक-आउट ग्राफिक्स और क्रोम की फिनिशिंग इसे एक ऐसी ‘क्लासी’ बाइक बनाती है जिसे आप अपनी इंस्टाग्राम रील और ट्रैवल व्लॉग्स में गर्व के साथ फ्लॉन्ट करना चाहेंगे। माइलेज की आज़ादी: अब पेट्रोल की चिंता को कहें अलविदा यात्रा का सबसे बड़ा खर्च ‘फ्यूल’ होता है, जो अक्सर बजट बिगाड़ देता है। एक सोलो ट्रेवलर हमेशा ऐसी सवारी की तलाश में रहता है जो कम पेट्रोल में ज़्यादा दूरी तय करे ताकि बचा हुआ पैसा वो नए अनुभवों, लोकल ज़ायके और किसी खूबसूरत होमस्टे पर खर्च कर सके। यहाँ होंडा शाइन का 125cc PGM-FI इंजन किसी जादू की तरह काम करता है। यह इंजन न केवल मक्खन जैसी स्मूथ परफॉर्मेंस देता है, बल्कि आपको वो ‘अनबिलीवेबल’ माइलेज देता है जिसकी उम्मीद अक्सर लोग छोटी बाइक्स से करते हैं। इसका सीधा मतलब है। लंबी दूरी की बेधड़क यात्रा और पेट्रोल पंप के कम चक्कर। अब आप बिना अपनी जेब की फिक्र किए किसी भी ‘ऑफबीट’ रास्ते पर मुड़ने का रिस्क ले सकते हैं। बेजोड़ कंफर्ट: मीलों का सफर, फिर भी थकान का नाम नहीं एक मुसाफिर के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है पीठ और कंधों की थकान। अगर आपकी बाइक की सीट आरामदायक नहीं है, तो मंज़िल का आनंद आधा रह जाता है। होंडा ने इस लिमिटेड एडिशन में राइडर के आराम को अपनी प्राथमिकता बनाया है। इसकी लंबी और चौड़ी सीट आपको एक सीधा ‘राइडिंग पॉस्चर’ देती है, जिससे आप घंटों तक बिना रुके राइड कर सकते हैं।  हाईवे पर इसकी परफॉर्मेंस को और निखारता है इसका 5-स्पीड गियरबॉक्स, जो तेज रफ्तार में भी बाइक को वाइब्रेशन-फ्री रखता है। चाहे आप शहर के शोर से बाहर निकल रहे हों या किसी घुमावदार घाट की चढ़ाई कर रहे हों, इसकी स्मूथनेस आपको थकान का अहसास नहीं होने देगी। इसमें दिया गया Enhanced Smart Power (eSP) सिस्टम इंजन को इतना शांत रखता है कि आप सफर के दौरान चिड़ियों की चहचहाहट और हवाओं की सरसराहट का पूरा आनंद ले सकें। बजट जो आपके घुमक्कड़ी के शौक को पंख लगा दे अक्सर लोग बाइक खरीदने के लिए सालों बचत करते हैं, लेकिन ₹3,500 की मासिक किस्त (EMI) के साथ यह बाइक आपके महीने के बजट को जरा भी प्रभावित नहीं करेगी। अगर आप रेंटल बाइक्स के रोज के खर्च का हिसाब जोड़ें, तो आप पाएंगे कि अपनी खुद की नई बाइक पर निवेश करना कहीं ज़्यादा समझदारी भरा फैसला है। ₹86,211 के निवेश में आपको मिलता है होंडा का वो वैश्विक भरोसा जो दूर-दराज के इलाकों में भी आपका साथ नहीं छोड़ता। यह उन युवाओं के लिए परफेक्ट चॉइस है जो अपनी पहली सोलो ट्रिप की शुरुआत करना चाहते हैं। सुरक्षा का भरोसा: हर मोड़ पर आपके साथ पहाड़ों या अनजान रास्तों पर सुरक्षा सबसे ज़रूरी है। नई शाइन 125 में कॉम्बी-ब्रेक सिस्टम (CBS) और डिस्क ब्रेक का विकल्प दिया गया है, जो गीली सड़कों या अचानक आए मोड़ों पर आपको गजब का आत्मविश्वास देते हैं। इसके मजबूत ट्यूबलेस टायर्स उन रास्तों पर किसी वरदान से कम नहीं हैं जहाँ मीलों तक मैकेनिक का नामोनिशान नहीं होता। साथ ही, इसका Silent Start फीचर इसे एक आधुनिक पहचान देता है। आपके नए सफर का सबसे भरोसेमंद हमसफ़र क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो पुरानी यादों को पीछे छोड़ नई सड़कों पर अपनी कहानी लिखना चाहते हैं? Honda Shine 125 Limited Edition उन सभी के लिए है जो सादगी, मजबूती और स्टाइल का एक शानदार मिश्रण चाहते हैं। यह बाइक आपको वो आज़ादी और सुकून देती है जिसे आप बस या ट्रेन की खिड़की से कभी महसूस नहीं कर सकते। तो अब और इंतज़ार मत कीजिए.. अपना हेलमेट उठाइए, मैप चेक कीजिए और इस नई शाइन के साथ निकल पड़ें एक ऐसे सफर पर जहाँ कोई मंजिल तय न हो, बस रास्ते हसीन हों। क्योंकि असली ज़िंदगी वही है जो हम दो पहियों पर आज़ादी के साथ जीते हैं।

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Dilli Haat INA- जरूर देखें डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की याद में बना ये म्यूजियम

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अगर आप इस वीकेंड दिल्ली घूमने का प्लान बना रहे हैं और दिल्ली की किसी यूनीक जगह या भीड़भाड़ से हटकर कुछ प्रेरणादायक देखना चाहते हैं, तो Dilli Haat INA के गेट नंबर 2 के पास स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मेमोरियल आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मेमोरियल का उद्घाटन 30 जुलाई 2016 को किया गया था। यह मेमोरियल भारत के ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरित होकर बनाया गया है। इसी वजह से यहां आपको कलाम जी की सादगी और महानता की जीती-जागती मिसालें देखने को मिलती हैं। इसके साथ ही मेमोरियल में कलाम जी की कई निजी वस्तुएं और उनके द्वारा लिखे गए पत्र (लेटर्स) जैसी कई अहम चीजें भी देखने को मिलती हैं। तो आइए जानते हैं कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की कौन-सी निजी वस्तुएं इस मेमोरियल में रखी गई हैं और क्या खासियत है इस मेमोरियल की, जिसकी वजह से लोग इसे देखना पसंद करते हैं, और आखिर इसे दिल्ली हाट (INA) में ही क्यों बनाया गया। यह संग्रहालय दूसरे संग्रहालयों से क्यों अलग है? यह मेमोरियल दूसरे संग्रहालयों से इसलिए अलग है क्योंकि यहां आपको डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के पूरे जीवन की कहानी, या यूं कहें कि उनके जीवन की एक संक्षिप्त यात्रा देखने को मिलती है। यहां उनकी निजी वस्तुएं जैसे उनके जूते, चश्मा, कपड़े, पेन, यहां तक कि उनके इस्तेमाल किए गए बर्तन भी देखने को मिलते हैं। जिन लोगों के लिए कलाम जी एक प्रेरणा हैं, वे यहां आकर उन कई सवालों के जवाब पा सकते हैं, जो अक्सर उनके मन में होते हैं- जैसे कलाम जी किस तरह अपना जीवन व्यतीत करते थे या उन्हें कौन-सी चीजें ज्यादा पसंद थीं। अगर आप भी कलाम जी को अपना इंस्पिरेशन मानते हैं, तो यह संग्रहालय आपको जरूर विजिट करना चाहिए। इसके साथ ही इस संग्रहालय में आपको कुछ ऐसी बातें भी पता चलती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कलाम जी को संगीत का भी शौक था और वे एक बेहतरीन संगीतकार थे। इस मेमोरियल में उनकी पसंदीदा वीणा भी रखी गई है, जिसका वे अक्सर इस्तेमाल किया करते थे। मेमोरियल के फ्रंट में उनकी एक शानदार प्रतिमा लगी हुई है और दीवारों पर उनके लिखे हुए कोट्स और किताबों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से प्रदर्शित किया गया है। इस मेमोरियल की थीम देखकर आपको रामेश्वरम की याद आ जाएगी, क्योंकि यहां का माहौल बिल्कुल साफ-सुथरा, शांत और सादगी से भरा हुआ है। सिर्फ मेमोरियल ही नहीं दिल्ली हाट और आस पास की जगहों को भी एक्सप्लोर करें क्योंकि यह मेमोरियल दिल्ली हाट के अंदर ही स्थित है, इसलिए यहां आपको एक ही जगह पर कई डेस्टिनेशन एक्सप्लोर करने का मौका मिल जाता है। अगर आप डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मेमोरियल देखने जा रहे हैं, तो दिल्ली हाट (INA) में आप अलग-अलग राज्यों के फूड कोर्ट का मज़ा ले सकते हैं और साथ ही हस्तशिल्प की खरीदारी भी कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर आप दिल्ली की और जगहें एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो इस इलाके के 2–3 किलोमीटर के दायरे में ही लोधी गार्डन और सफदरजंग का मकबरा जैसी मशहूर जगहें भी देखी जा सकती हैं। दिल्ली सरकार ने इस जगह को सिर्फ एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह के रूप में विकसित किया है, जहां आपको पूरे भारत की संस्कृति, खान-पान और कला देखने को मिलती है। पर्यटकों के लिए जरूरी जानकारी यह मेमोरियल सुबह 11:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहता है, जबकि सोमवार को बंद रहता है। यहां पहुंचने के लिए सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन INA है, जो पिंक लाइन पर स्थित है। मेट्रो स्टेशन से यह मेमोरियल पैदल दूरी पर ही मौजूद है। इस मेमोरियल को देखने के लिए अलग से कोई टिकट लेने की आवश्यकता नहीं होती। जब आप दिल्ली हाट (INA) का टिकट लेते हैं, उसी टिकट के जरिए आप इस मेमोरियल में भी प्रवेश कर सकते हैं। Written by Shivani Pal

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Marine Drive के पास खाने के लिए 7 लोकप्रिय और आइकॉनिक ठिकाने

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मुंबई का Marine Drive सिर्फ़ “क्वीन ऑफ़ नेकलेस” के नाम से ही मशहूर नहीं है, बल्कि इसके आसपास का फ़ूड सीन भी उतना ही आइकॉनिक है। सुबह की हल्की धूप हो या रात की ठंडी हवा, यहाँ खाने के ऐसे-ऐसे ठिकाने हैं जो हर फ़ूड लवर को अपनी ओर खींच लेते हैं। लोकल मुम्बइकर से लेकर टूरिस्ट तक, हर कोई यहाँ के स्वाद का दीवाना है। अगर आप भी Marine Drive के पास खाने का प्लान बना रहे हैं, तो ये 7 जगहें आपकी लिस्ट में ज़रूर होनी चाहिए। Gaylord- पुरानी मुंबई का क्लासिक स्वाद मुंबई का मशहूर गेयलोर्ड (Gaylord) रेस्टोरेंट 1956 में चर्चगेट में पिशोरी लाल लांबा और इकबाल घई द्वारा खोला गया था। यह जगह राज कपूर, दिलीप कुमार और लता मंगेशकर जैसे बड़े फिल्मी सितारों की मनपसंद रही है, और यहाँ तक कि द बीटल्स (The Beatles) और पंडित रवि शंकर ने भी यहाँ के माहौल का लुत्फ उठाया था। इस रेस्टोरेंट को इसके खास पकवानों जैसे चिकन ए ला कीव (Chicken A’la Kiev), लॉबस्टर थर्मिडोर और बटर चिकन के लिए जाना जाता है, और यहाँ की बेकरी भी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय है। हाल ही में इसे “गेयलोर्ड 2.0” के रूप में नए इंटीरियर्स के साथ फिर से खोला गया है, जिसमें पुराने औपनिवेशिक आकर्षण (Colonial Charm) और 150 से ज़्यादा पुरानी तस्वीरों के ज़रिए इसकी विरासत को बरकरार रखा गया है। गेयलोर्ड की अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे 1997-98 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से ‘बेस्ट रेस्टोरेंट’ का अवार्ड मिला था और आज भी यह मुंबई के पाक-कला इतिहास का एक अहम हिस्सा है। Mockingbird Cafe Bar- यंग क्राउड का फेवरेट मुंबई के चर्चगेट में वीर नरीमन रोड पर स्थित ‘मॉकिंगबर्ड कैफे बार’ एक बहुत ही प्यारा और अनूठा साहित्यिक (literary) थीम वाला कैफे है, जो मरीन ड्राइव के काफी करीब है। दीपक पुरोहित द्वारा शुरू किया गया यह स्थान किताबों के प्रति प्रेम और बेहतरीन खाने-पीने के शौक का एक शानदार संगम है, जहाँ आपको एक शांत लाइब्रेरी कोना, बोर्ड गेम्स और 2020 से शुरू हुए लाइव म्यूजिक का आनंद भी मिलता है। यहाँ का मेन्यू काफी बड़ा और दिलचस्प है, जिसमें पत्थर की भट्टी वाली पिज्जा और पास्ता जैसे कॉन्टिनेंटल व्यंजनों के साथ-साथ ‘टकीला मॉकिंगबर्ड’ और ‘जिन आयर’ जैसे साहित्यिक नामों वाले अनोखे कॉकटेल मिलते हैं। यह स्थान सुबह 9 बजे से रात 12:30 बजे तक खुला रहता है और यहाँ फ्री वाई-फाई, पार्किंग और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं, जो इसे दोस्तों के साथ समय बिताने या सुकून से अकेले बैठकर पढ़ने के लिए एक बेहतरीन जगह बनाती हैं। Khyber Restaurant– शाही खाने का भरोसेमंद नाम मुंबई के काला घोड़ा इलाके में स्थित खैबर (Khyber) एक ऐतिहासिक और मशहूर रेस्टोरेंट है, जिसकी शुरुआत 1958 में ओम प्रकाश बहल ने की थी। यह रेस्टोरेंट अपनी ‘नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर’ शैली के व्यंजनों, जैसे कि पनीर कोरमा, रान (Raan) और माँ की दाल के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। 1985 में यहाँ एक भीषण आग लग गई थी, जिसके बाद परमेश्वर गोदरेज ने इसे एक नए और भव्य रूप में डिजाइन किया। इस रेस्टोरेंट की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की दीवारों पर मौजूद एम.एफ. हुसैन और अंजली इला मेनन जैसे महान कलाकारों की मूल पेंटिंग्स हैं। खैबर की गेस्ट लिस्ट में अमिताभ बच्चन, ब्रैड पिट, शकीरा और सर पॉल मेकार्टनी जैसे कई अंतरराष्ट्रीय सितारे शामिल रहे हैं। वर्तमान में सुधीर बहल और उनके बेटे ईशान इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और उन्होंने हाल ही में इसके मशहूर ‘हुसैन रूम’ का नवीनीकरण (renovation) भी किया है। Bademiya– रात का असली स्ट्रीट फ़ूड स्टार मुंबई का मशहूर ‘बडेमियाँ’ (Bademiya) रेस्टोरेंट 1946 में मोहम्मद यासीन द्वारा एक छोटी सी कबाब की दुकान के रूप में शुरू किया गया था। यह कोलाबा में ताज महल पैलेस होटल के ठीक पीछे स्थित है और अपने लज़ीज़ सीक कबाब, बोटी कबाब, बैदा रोटी और रूमाली रोटी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। मोहम्मद यासीन ने केवल 20 रुपये के मामूली निवेश से इस काम की शुरुआत की थी, जो उन्हें उनके गुरु हज़रत फिदा मोहम्मद आदम चिश्ती ने दिए थे। उनकी लंबी दाढ़ी की वजह से ग्राहकों ने उन्हें प्यार से ‘बडेमियाँ’ पुकारना शुरू कर दिया, जो बाद में इस मशहूर दुकान का नाम बन गया। आज यह जगह मुंबई की एक ऐतिहासिक पहचान बन चुकी है, जहाँ आम लोगों के साथ-साथ अमिताभ बच्चन और अजय देवगन जैसे बड़े सितारे भी आधी रात को यहाँ के खाने का लुत्फ उठाने आते हैं। हालाँकि, सितंबर 2023 में साफ-सफाई और लाइसेंस की कमी से जुड़े मुद्दों के कारण प्रशासन द्वारा इसे ‘काम रोकने’ का नोटिस भी दिया गया था। Cafe Madras – साउथ इंडियन स्वाद का भरोसा मुंबई के माटुंगा में स्थित कैफे मद्रास एक बेहद प्रतिष्ठित साउथ इंडियन रेस्टोरेंट है, जिसकी शुरुआत 1940 में गोपाल पुरुषोत्तम कामथ ने की थी और अब इसे उनकी तीसरी पीढ़ी के सदस्य देवव्रत और जयप्रकाश कामथ चला रहे हैं। यह जगह अपनी सादगी और असली उडुपी स्वाद के लिए मशहूर है, जहाँ इडली, मैसूर डोसा, बिसीबेले भात और खासतौर पर यहाँ की फिल्टर कॉफी और घर का बना सफेद मक्खन लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। हाल ही में बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन को भी यहाँ दक्षिण भारतीय व्यंजनों का आनंद लेते हुए देखा गया था। चूँकि यहाँ हमेशा भीड़ रहती है, इसलिए ग्राहकों को अक्सर टेबल के लिए 20 से 30 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ता है, लेकिन यहाँ का किफायती और स्वादिष्ट खाना उस इंतज़ार के बिल्कुल काबिल माना जाता है। K Rustom & Co – मीठे पल बनाने वाली जगह मुंबई की मशहूर आइसक्रीम दुकान, के रुस्तम एंड कंपनी (K Rustom & Co.), की शुरुआत 1953 में खोदाबक्स रुस्तम ईरानी ने की थी, जो पहले एक डिपार्टमेंटल स्टोर हुआ करता था। यह पार्लर अपने खास आइसक्रीम सैंडविच के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ आइसक्रीम की एक मोटी परत को दो कुरकुरे वेफर्स के बीच रखकर परोसा जाता है। हाल ही में एक कहानी वायरल हुई जिसमें एक महिला ने अनजाने में इस शॉप की मालकिन के साथ टैक्सी शेयर की और उन्हें पहचान नहीं

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Top 5 Places to Visit in Dharamshala धर्मशाला जा रहे हैं? इन 5 जगहों को गलती से भी न भूलें!

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हिमाचल प्रदेश की गोद में बसा धर्मशाला आज देश के सबसे पसंदीदा ट्रैवल डेस्टिनेशन्स में गिना जाने लगा है। कभी सिर्फ एक शांत हिल स्टेशन मानी जाने वाली यह जगह अब आध्यात्म, एडवेंचर, नेचर और कल्चर का बेहतरीन मेल बन चुकी है। धौलाधार की बर्फीली चोटियां, देवदार के घने जंगल, ठंडी हवा और तिब्बती संस्कृति का शांत असर- ये सब मिलकर धर्मशाला को एक अलग ही पहचान देते हैं। यहां आने वाले लोग सिर्फ तस्वीरें लेने नहीं, बल्कि सुकून और अनुभव बटोरने आते हैं। (Top 5 Places to Visit in Dharamshala) मैक्लोडगंज में तिब्बती संस्कृति को महसूस कीजिए- Top 5 places to visit in Dharamshala धर्मशाला का सबसे मशहूर इलाका मैक्लोडगंज तिब्बती संस्कृति और बौद्ध परंपराओं का केंद्र माना जाता है। यहां दलाई लामा का निवास, नामग्याल मठ और त्सुगलाखांग कॉम्प्लेक्स लोगों को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास कराते हैं। सुबह के वक्त मठों में प्रार्थना की आवाज़ और हवा में लहराते रंग-बिरंगे प्रेयर फ्लैग्स इस जगह को खास बना देते हैं। तिब्बती बाजारों में घूमते हुए हस्तशिल्प और लोकल चीज़ें खरीदना भी एक अच्छा अनुभव होता है। त्रिउंड ट्रेक पर जाकर पहाड़ों के करीब आइए धर्मशाला आने वाले एडवेंचर लवर्स के लिए त्रिउंड ट्रेक सबसे बड़ा आकर्षण है। यह ट्रेक ज्यादा कठिन नहीं है, इसलिए पहली बार ट्रेक करने वालों के लिए भी सही माना जाता है। रास्ते में हरियाली, छोटे झरने और खुला आसमान सफर को खास बना देते हैं। ऊपर पहुंचने पर धौलाधार रेंज का नज़ारा और नीचे फैली कांगड़ा घाटी मन मोह लेती है। रात में कैंपिंग और तारों से भरा आसमान धर्मशाला के सबसे यादगार पलों में से एक होता है। भागसू झरना और भागसूनाथ मंदिर में सुकून के पल बिताइए भागसू वॉटरफॉल और भागसूनाथ मंदिर धर्मशाला के सबसे शांत और खूबसूरत स्थानों में शामिल हैं। खासकर मानसून के दौरान झरना पूरे जोश में बहता है और आसपास की हरियाली और भी ज्यादा निखर जाती है। मंदिर में कुछ वक्त बिताने के बाद झरने के पास बैठकर बहते पानी की आवाज़ सुनना मन को गहरी शांति देता है। यह जगह उन लोगों के लिए खास है जो भागदौड़ से दूर कुछ सुकून भरे पल चाहते हैं। लोकल कैफे और हिमाचली खाने का स्वाद लीजिए धर्मशाला के कैफे कल्चर की चर्चा आज देश-विदेश तक है। यहां आपको तिब्बती मोमोज़, थुकपा, शाफले से लेकर हिमाचली और इंटरनेशनल फूड तक सब कुछ मिल जाएगा। पहाड़ों के बीच बैठकर गर्म कॉफी या चाय का मज़ा लेना अपने आप में एक अलग अनुभव है। कई कैफे से सूरज ढलने का नज़ारा दिखता है, जो शाम को और भी खास बना देता है। क्रिकेट स्टेडियम और लोकल बाज़ार में घूमें धर्मशाला का हिमाचल प्रदेश क्रिकेट स्टेडियम दुनिया के सबसे खूबसूरत क्रिकेट ग्राउंड्स में गिना जाता है। अगर यहां मैच हो रहा हो, तो माहौल देखने लायक होता है। इसके अलावा कोतवाली बाजार और लोकल मार्केट में घूमकर ऊनी कपड़े, हस्तशिल्प और स्मृति-चिह्न खरीद सकते हैं। यहां की लोकल लाइफ को करीब से देखने का ये सबसे अच्छा तरीका है। क्यों हर ट्रैवलर के लिए खास है धर्मशाला- Top 5 places to visit in Dharamshala धर्मशाला उन जगहों में से है जहां हर तरह के यात्री को कुछ न कुछ खास मिलता है। कोई यहां शांति ढूंढने आता है, कोई रोमांच के लिए, तो कोई संस्कृति और प्रकृति के करीब आने के लिए। यही वजह है कि एक बार जो धर्मशाला आता है, वो यहां दोबारा लौटने की ख्वाहिश जरूर रखता है।