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Hotels vs Hostels – which is best during travelling

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The choice between staying in hotels vs hostels during traveling depends on various factors, including personal preferences, budget, travel style, and the destination. Both options have their advantages and disadvantages, and what might be considered the “best” can vary from one traveller to another. Here’s a comparison to help you decide which option suits you best: Hotels Advantages: Disadvantages: Hostels Advantages: Disadvantages: Ultimately, the decision comes down to your preferences, travel goals, and budget. If you prioritize comfort, privacy, and are willing to spend more, hotels may be the better option. On the other hand, if you want to meet other travellers, have a limited budget, and don’t mind shared spaces, hostels can be a fantastic choice for a social and cost-effective travel experience. Many travellers often mix and match, staying in hotels for some portions of their trip and hostels for others to get the best of both worlds.

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कश्मीर को धरती का स्वर्ग बनाते हैं वहां के ये टूरिस्ट प्लेस

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जब भी कश्मीर का जिक्र होता है तो खूबसूरत वादियों और बर्फ से ढ़की पहाड़ियों की कल्पनाएँ दिल में हलचल मचाने लगती हैं। चाहे बच्चे हो या जवान कश्मीर के पहाड़ों में खो जाने की ख्वाहिश सभी को होती है। शायद ही कोई घुमक्कड़ ऐसा होगा जो कश्मीर नहीं जाना चाहता होगा। कश्मीर की प्राकृतिक खुबसुरती इसे भारत का स्वर्ग बनाती है। जिस स्वर्ग को देखने के लिए यहां दुनिया भर से लाखों लोग घूमने आते हैं।हम आपको इस ब्लॉग में कश्मीर के कुछ बेहद खूबसूरत जगहों के बारे में बताएंगे। अगर आप भी कश्मीर जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कश्मीर की इन जगहों पर जरूर जाएं। 1. वैष्णो देवी मंदिर (vaishno devi mandir) : त्रिकुटा पहाड़ियों में कटरा से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 5300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माता वैष्णो देवी मंदिर कश्मीर हीं नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। जहां हर साल लाखों भक्त पूजा अर्चना करने और अपनी मनोकामना मांगने आते हैं। बर्फीली पहाड़ियों में बसा हुआ यह मंदिर काफी शांत और सुंदर है। जहां जाकर आपको अलग हीं तरह की पॉजिटिव एनर्जी और मन की शांति का एहसास होगा। आध्यात्मिक लोगों के लिए यह मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है।वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थ यात्रियों को लगभग 13 किलोमीटर तक पैदल चलकर ट्रैकिंग करते हुए मंदिर की गुफाओं तक पहुंचना होता है। मां वैष्णो देवी का यह मंदिर भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक है। वैष्णो देवी मंदिर जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Vaishno Devi Mandir) : वैष्णो देवी मंदिर पूरे साल श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। इसीलिए वहां कभी भी जाया जा सकता है, लेकिन मार्च से मई और सितंबर से नवंबर तक का समय यहां आने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। इस समय अवधि में यहां श्रद्धालुओं की भी बहुत ज्यादा भीड़ होती है। क्योंकि इस समय में यहां का मौसम बहुत हीं बेहतरीन होता है। जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 2. ट्यूलिप गार्डन (Tulip Garden) : जैसा कि आप जानते होंगे कि कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के रूप में जाना जाता है। यहां की खूबसूरती देखने के लिए हर साल दूर-दूर से देशी और विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि बेशक ये ट्यूलिप सिर्फ 4-5 दिन के लिए खिलते हैं, लेकिन इस बाग़ में काम करने वाले स्टाफ को यह ध्यान रखना पड़ता है कि ट्यूलिप के बल्ब की क्वालिटी हर साल अच्छी हो। इसके लिए वह साल भर कड़ी मेहनत करते हैं | 2007 में इस गार्डन को इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि इससे कश्मीर वैली में फूलों की खेती और पर्यटन को बढ़ावा मिले। इस गार्डन को ढलान वाले क्षेत्र में सीढ़ीदार तरीके से बनाया गया है। यह इंदिरा गाँधी ट्यूलिप गार्डन 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। टयूलिप गार्डन जाने का सबसे बेस्ट समय (Best time to visit Tulip garden) : ट्यूलिप हर साल मार्च से मई के महीने के बीच में खिलते हैं। इनके खिलने की समय अवधि फिक्स नहीं होती है। क्योंकि यह मौसम के अनुरूप हीं खेलते हैं। एक अनुमान के तौर पर कहा जाए तो यह लगभग 1 से 2 सप्ताह के लिए खिलते हैं। इसीलिए ट्यूलिप गार्डन के खुलने की अवधि भी हर साल फिक्स नहीं होती है। अगर आप टयूलिप गार्डन घूमना चाहते हैं तो आपको मार्च से मई तक के समय के लिए प्लानिंग करके रखनी होगी। 3. अमरनाथ की गुफा (Amarnath temple) : भारत के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक अमरनाथ की गुफा हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक बहुत हीं प्रमुख साधना स्थल है। भगवान शिव में आस्था रखने वाले लोगों के लिए अमरनाथ की गुफा सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। अमरनाथ के गुफा में प्राकृतिक रूप से बने हुए बर्फ के शिवलिंग की पूजा की जाती है। यहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने के लिए जाते हैं। अमरनाथ की गुफा तक के लिए यात्रा को लोग अमरनाथ यात्रा के नाम से जानते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मई जून की गर्मी में भी अमरनाथ के गुफा में यह शिवलिंग बिल्कुल भी नहीं पिघलता है और ज्यों का त्यों ही बना रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वहीं गुफा है, जहां महादेव ने माता पार्वती को जीवन और मृत्यु के सत्य के बारे में बताया था। अमरनाथ जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Amarnath temple): अमरनाथ की गुफा के लिए यात्रा करने का सबसे सही समय मई से अगस्त तक का होता है। सर्दियों में अमरनाथ का मौसम बहुत हीं अधिक कठोर हो जाता है और उस समय यहां बहुत ज्यादा सर्दी होती है। इसीलिए सर्दियों में अमरनाथ यात्रा का प्लान बनाने से बचें। 4. सोनमर्ग (sonamarg) : कश्मीर की वादियों में स्थित सोनमर्ग एक काफी खूबसूरत शहर है। बर्फ से भरे मैदानों, ग्लेशियरों और शांत झीलों वाला यह शहर हमेशा से हीं पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां का माहौल बहुत ही खूबसूरत और शांत है। सोनमर्ग श्रीनगर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसा हुआ शहर है। जो कि समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता, लुभावने ग्लेशियरों और जीवंत झीलों से भरा या शहर कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जो अपने खुबसुरती से हर साल हजारों भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। सोनमार्ग जाने का सबसे सही समय (Best time तो visit sonamarg) सोनमर्ग जाने के लिए सबसे सही समय अप्रैल से सितंबर के बीच का होता है। क्योंकि इस समय भारत के दूसरे राज्य में प्रचंड गर्मी पड़ रही होती है। ऐसे में सोनमर्ग का खुशनुमा मौसम आपको इस भयानक गर्मी से छुटकारा दिला सकता है। 5. पहलगाम (Pahalgam): अगर आप भी केसर के नीले खेतों को देखना चाहते हैं तो पहलगाम इसके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। पहलगाम अपने केसर के खेतों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के केसर के

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Best Places to visit in Alwar

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Alwar is a beautiful city in the state of Rajasthan, India, known for its rich history, stunning palaces, and scenic landscapes. Here are some of the best places to visit in Alwar: Bala Quila (Alwar Fort) This ancient fort is perched on a hilltop and offers breath-taking panoramic views of the city and surrounding areas. It is an excellent spot for history enthusiasts and photographers. Location: Bala Quila is situated atop the Aravalli Range, approximately 5 kilometers from the main city of Alwar. The strategic location provides stunning views of the surrounding landscape. Points of Interest: Within the fort, you can explore various structures, including palaces, temples, and cenotaphs. Some notable attractions include Jai Mahal, Nikumbh Mahal, Salim Sagar Tank, and Suraj Kund. Panoramic Views: Bala Quila offers breathtaking panoramic views of the Alwar city below and the picturesque hills of the Aravalli Range. It’s an excellent spot for photography and enjoying the scenic beauty. Visiting Bala Quila is not only an opportunity to witness a historical marvel but also a chance to immerse yourself in the rich heritage and culture of Alwar. If you plan to visit, make sure to wear comfortable shoes and carry water, especially if you decide to trek to the top. The fort is a must-visit attraction for history enthusiasts, architecture admirers, and nature lovers alike. Sariska Tiger Reserve Sariska Tiger Reserve is a well-known wildlife sanctuary located in the Alwar district of Rajasthan, India. It is one of the important protected areas in the Aravalli Range and is famous for its diverse flora and fauna, including the majestic Royal Bengal Tigers. Here are some key details about the Sariska Tiger Reserve: 1. History: Sariska was declared a wildlife sanctuary in 1958 and later became a Tiger Reserve in 1978 under India’s Project Tiger initiative, aimed at conserving the endangered Bengal tiger population. 2. Location: The reserve is situated around 200 kilometres from Delhi and approximately 107 kilometres from Jaipur, making it easily accessible from both cities. 3. Geography: The Sariska Tiger Reserve covers an area of approximately 866 square kilometers. It encompasses hills, valleys, dry deciduous forests, and rocky landscapes typical of the Aravalli Range. 4. Wildlife: The reserve is home to a variety of wildlife species, including tigers, leopards, wild boars, sambar deer, spotted deer (chital), nilgai (blue bull), langurs, hyenas, jackals, and various bird species. 5. Bengal Tigers: Sariska is known for its Bengal tiger population, though the numbers have fluctuated over the years due to various factors, including poaching and habitat loss. Conservation efforts have been made to protect and increase the tiger population in the reserve. 6. Safari and Tourism: Visitors can explore the Sariska Tiger Reserve through guided safaris. The reserve offers both Jeep safaris and Canter (open-top bus) safaris, allowing tourists to get a glimpse of the wildlife in their natural habitat. 7. Other Attractions: Apart from wildlife, Sariska has several historical and architectural attractions nearby, such as the 17th-century Kankwari Fort, Neelkanth Temple, and the ancient Pandupol Temple. 8. Best Time to Visit: The best time to visit Sariska Tiger Reserve is during the cooler months between October and March when the weather is pleasant for wildlife viewing. Siliserh Lake:  A serene lake located about 13 km from Alwar, surrounded by hills and adorned with a beautiful palace-turned-hotel. Boating in the lake and enjoying the scenic beauty is a must. Siliserh Lake is a picturesque lake located near Alwar city in the state of Rajasthan, India. It is a popular tourist destination known for its serene surroundings and historical significance. Here are some key details about Siliserh Lake: 1. Location: Siliserh Lake is situated about 13 kilometers southwest of Alwar city, nestled amidst the Aravalli Range. 2. Origin: The lake was built in 1845 by Maharaja Vinay Singh as a part of a water conservation project to provide water to the residents of Alwar and nearby villages. It was named after the queen, Shila, the consort of Maharaja Vinay Singh. 3. Scenic Beauty: The lake is surrounded by lush green hills, making it a tranquil and picturesque spot. The scenic beauty of the lake and its surroundings attracts visitors throughout the year. 4. Boating: Boating facilities are available at Siliserh Lake, allowing visitors to enjoy a peaceful boat ride on the serene waters. It’s a popular activity and provides an opportunity to take in the beauty of the lake from a different perspective. 5. Siliserh Palace: The lake also houses the beautiful Siliserh Palace, which was originally built as a royal hunting lodge. It has now been converted into a heritage hotel by the Rajasthan Tourism Development Corporation (RTDC). The palace offers a royal ambiance and a chance to experience the regal lifestyle. 6. Birdwatching: The lake and its surroundings attract a variety of bird species, making it a good spot for birdwatching. Bird enthusiasts can spot several resident and migratory birds around the lake. 7. Picnicking and Relaxation: Siliserh Lake is an ideal spot for picnics and leisurely walks. Many visitors come here to relax and enjoy the serene environment. 8. Light and Sound Show: The Siliserh Lake also hosts an evening light and sound show that narrates the history and legends associated with the lake and the surrounding region. 9. Accessibility: The lake is easily accessible from Alwar city, and it takes around 30 minutes by road to reach the lake. 10. Best Time to Visit: The best time to visit Siliserh Lake is during the monsoon and winter seasons, from July to March, when the weather is pleasant, and the surroundings are lush green. Moosi Maharani ki Chhatri Moosi Maharani ki Chhatri, also known as Moosi Rani ki Chhatri or Moosi Rani ki Chatri, is a historic cenotaph (chhatri) located in Alwar, Rajasthan, India. It is one of the notable architectural landmarks in the city and holds historical significance. Here are some key details about Moosi Maharani ki Chhatri: 1. History: Moosi Maharani ki Chhatri was constructed in the memory of Maharaja Bakhtawar

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नोएडा में खुला देश का पहला वैदिक थीम पार्क : वेद वन(Ved Van Park)

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जैसे जैसे हम मॉडर्न (Modern) होते जा रहे हैं वैसे वैसे हीं हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। आज के समय में तो पार्क भी काफी मॉडर्न हो गए हैं। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा में एक ऐसा पार्क खुला है, जो हमारी संस्कृति को दुनिया के सामने बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत (represents our culture) कर रहा है। इस पार्क का नाम है वेद वन! जी हाँ आपने बिल्कुल सही पढ़ा। नोएडा के सेक्टर 78 (Noida sector-78) में वेदों की थीम पर एक पार्क बना है, जो कि भारत का पहला वैदिक थीम पार्क (Vaidik theme park) है। वेदवन पार्क का इनॉग्रेशन (Inaugration) 4 जुलाई को किया गया और फिलहाल इसकी एंट्री फ्री (free entry) है। अभी इस पार्क के उद्घाटन को ज्यादा दिन नहीं हुआ है, फिर भी यहां लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। दूर-दूर से लोग यहां हैंग आउट (hangout) करने आते हैं। यह पार्क दिल्ली एनसीआर में काफी पॉपुलर हो चुका है।….और हो भी क्यों ना इस पार्क का थीम हीं कुछ ऐसा है कि जो भी इसके बारे में सुनता है वह यहां आना चाहता है। 1. क्या है खास?(what is special about this park?) : वैदिक थीम पर बने होने के कारण यह पार्क बहुत ही शांत वातावरण (peaceful environment) वाला है। यहां आने पर आपको इंटरनल पीस (internal peace) फील होगा। जिसकी जरूरत आज के भाग दौर वाले समय में सभी को है। यहां जगह-जगह वैदिक कलाकृतियां बनी हुई है जो देखने में तो खूबसूरत है हीं साथ ही बहुत सारे मैसेज भी लोगों को देते हैं। इस पार्क में चारों वेदों के बारे में जानकारियां दी गई हैं। जिससे आज का यूथ हमारे वैदिक कल्चर (vaidik culture) को समझ सके। 2. लेजर शो है मुख्य आकर्षण (Laser show is centre of attraction) : वेदों पर आधारित इस खूबसूरत से पार्क का सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन यहां हर रोज शाम को होने वाला लेजर शो है। जिसमें वेदों के बारे में बहुत सारी जानकारियां दी जाती हैं। दिन भर तो आपको यहां बहुत कम भीड़ देखने को मिलेगी, लेकिन जैसे ही शाम गहरी होती जाती है और लेजर शो का वक्त होता है, यहां सैकड़ों लोग आ जाते हैं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह पार्क दिल्ली एनसीआर (Delhi-NCR) में इतने कम दिनों में हीं कितना फेमस (famous) हो चुका है। 3. क्या है टाइमिंग? (What is the timing of Ved Van park?) :इस पार्क की टाइमिंग सुबह 6:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक की है और इस पार्क में कोई भी एंट्री टिकट (entry ticket) नहीं लगता है। वहीं अगर इस पार्क में होने वाले लेजर शो की टाइमिंग की बात की जाए तो लेजर शो हर रात 8:00 बजे शुरू होता है। 4. वेदवन जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Ved van) :यूं तो वेद वन हमेशा हीं खूबसूरत लगता है। इसलिए यहाँ घूमने कभी भी जाया जा सकता है, लेकिन शाम के समय में यहां घूमना वाकई बहुत खूबसूरत एहसास होता है। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ता है और लाइट्स ऑन होते जाते हैं, इस पार्क की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है। लेजर शो की टाइमिंग (timing of laser show) भी 8:00 बजे शाम की है। इसलिए शाम में आकर पार्क को एक्सप्लोर (explore) करना एक अच्छा डिसीजन होगा। Also Read- Best Places to visit in Alwar

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Top 6 Amazing & Most Famous Museums of India

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इतिहास में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति की खोज म्यूजियम पर आकर ठहर जाती है, क्योंकि म्यूजियम एक ऐसा जगह होता है जहां सालों के सभ्यताओं और इतिहास को एक ही बार में समझा और जिया जा सकता है। अगर आपकी भी रुचि इतिहास में है और आप भी म्यूजियम जाना पसंद करते हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। क्योंकि यहां हम आपको बताने वाले हैं देश के कुछ बेहतरीन म्यूजियम्स के बारे में। आइए जानते हैं देश के उन म्यूजियम के बारे में जहां ना सिर्फ भारत के बल्कि संसार के इतिहास से जुड़े हुए वस्तुओं को भी देखा और समझा जा सकता है। 1. राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली (National Museum Delhi) : राजधानी दिल्ली में स्थित इस संग्रहालय के स्थापना की नींव आजादी से पहले ही रखी गई थी। इस म्यूजियम का उद्घाटन 15 अगस्त 1949 को भारत के गवर्नर जनरल श्री आरसी राजगोपालाचारी ने राष्ट्रपति भवन में किया था। 12 मई 1955 को भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसके नए भवन की आधारशिला रखी। इस संग्रहालय में आकर भारत के समृद्धि इतिहास को बहुत अच्छे तरीके से समझा जा सकता है। यहां कई तरह की ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह किया गया है। जिनमें कुछ भारतीय तो कुछ विदेशों से लाई गयी वस्तुएँ हैं। यहां लगभग 2,00,000 एंटीक चीजों का कलेक्शन किया गया है। जो अपने आप में हीं एक बहुत बड़ी संख्या है। https://fivecolorsoftravel.com/know-about-cultural-heritage-best-places-of-jaipur/ 2. नेशनल रेल म्यूजियम दिल्ली (National rail museum Delhi) : यह म्यूजियम दिल्ली में स्थित है और पूरी तरह से भारतीय रेलवे को समर्पित है। इस म्यूजियम की खास बात यह है कि यहां जाकर आप भारतीय रेलवे के इतिहास को बहुत ही अच्छी तरीके से समझ पाएंगे। यह रेल म्यूजियम करीब 11 एकड़ से अधिक जगह पर फैला हुआ है और भारत के 166 वर्षों के गौरवशाली यात्रा को अपने आप में सहेजे हुए है। इस म्यूजियम में भाप से चलने वाले इंजन से लेकर अत्याधुनिक इंजन तक की यात्रा को सहेज कर रखा गया है।यहां आपको भाप, डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों के साथ-साथ वैगन, गाड़ियां, बख्तरबंद ट्रेनें आदि का संग्रह देखने को मिल जाएगा।यहां आप टॉय ट्रेन की सवारी भी कर सकते हैं। साथ ही 3D वर्चुअल कोच, डीजल और स्टीम इंजन के कोच में सैर करने के साथ-साथ हाल ही में बने रेल रेस्टोरेंट में लंच का भी आनंद ले सकते हैं। 3. सालार जंग म्यूजियम हैदराबाद (Salar jung museum Hyderabad) :सालार जंग म्युजियम एक कला संग्रहालय (Art Museum) है जो कि हैदराबाद में स्थित है। इस म्यूजियम का उद्घाटन 16 दिसंबर 1951 को हुआ था।यह भारत के सबसे समृद्ध संग्रहालय में से एक है और यहां मुख्यतः सालारजंग परिवार का एक निजी कला संग्रह किया गया है। इसमें फारसी, जापानी, नेपाली, चीनी, एवं उत्तरी अमेरिका और यूरोप से लाई गई मूर्तियों, पेंटिंग्स, नक्काशी किए गए वस्तुओं और पांडुलिपियों का संग्रह किया गया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह म्यूजियम दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयओं की सूची में भी शामिल है। 4. गवर्नमेंट म्यूजियम चेन्नई (Government Museum Chennai) : चेन्नई का यह गवर्नमेंट म्यूजियम एक आर्ट म्यूजियम है और यह भारत का दूसरा सबसे पुराना म्यूजियम है। इसकी शुरुआत 1851 ईसवी में हुई थी। इस म्यूजियम का मुख्य आकर्षण यहाँ की पुरातत्विक और शास्त्रीय वस्तुओं का कलेक्शन है। बताया जाता है कि यूरोप के बाहर यह दुनिया का सबसे बड़ा पुरातात्विक अवशेषों का संग्रह है। इस म्यूजियम में जाकर आप मनुष्यों के इतिहास और उनके विकास के बारे में काफी कुछ जान सकते हैं। यहां कई सारी दुर्लभ पेंटिंग्स भी रखी गई हैं। जिन्हें ना सिर्फ़ एशिया बल्कि यूरोप के देशों से भी लाया गया है। इस म्यूजियम को फिलहाल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है। यहां कई सारी मूर्तियां ऐसी भी हैं जो 500 से 1000 ईसा पूर्व की हैं। इसी बात से पता चलता है कि यह म्यूजियम कितना विशाल और ज्ञानवर्धक है। अगर आपको भी कभी चेन्नई जाने का मौका मिले तो आप इस म्यूजियम को एक बार विजिट कर सकते हैं। यह आपके लिए टोटली वर्थ इट होगा। 5. द कैलिको म्यूजियम आफ टैक्सटाइल्स अहमदाबाद ( The Calico museum of textiles Ahmedabad) : आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे भारत में कपड़ों का भी एक म्यूजियम है, जोकि अहमदाबाद में स्थित है। म्यूजियम का नाम द कैलिको म्यूजियम ऑफ टैक्सटाइल्स है, जोकि साराभाई फाउंडेशन के द्वारा चलाया जाता है। यह भारत का सबसे प्रमुख टैक्सटाइल म्यूजियम है। यहां के भारतीय कपड़ों के संग्रह को दुनिया में बेहतरीन और वाइड माना जाता है। यहां आपको कपड़ों के साथ-साथ साराभाई फाउंडेशन के दक्षिण भारतीय कला और जैन कलाओं के लघु चित्रों के संग्रहों के बारे में भी जानने को मिलेगा। इस संग्रहालय की स्थापना गौतम साराभाई और गिरा साराभाई द्वारा किया गया था। उस समय अहमदाबाद कपड़ा उद्योग का केंद्र था। यह संग्रहालय मूल रूप से कपड़ा उद्योग के एक कैलिको मिल्स में लगाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे यह संग्रह बढ़ता गया। वर्ष 1983 में शाहीबाग के साराभाई हाउस में इस म्यूजियम को ट्रांसफर कर दिया गया। 6. छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय मुंबई ( Chhatrapati shivaji maharaj Museum Mumbai) :छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय का पुराना नाम प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय है। जो कि मुंबई में स्थित है। इसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक भारत तक की यात्रा को बहुत ही आसानी से देखा और समझा जा सकता है। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान ही हुई थी। बताया जाता है कि इसे प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत यात्रा के याद में बनवाया गया था। यह संग्रहालय गेटवे ऑफ इंडिया के पास ही है और यहां लगभग 50000 से भी ज्यादा कलाकृतियों को सहेज कर रखा गया है। 1998 में इस म्यूजियम का नाम बदलकर मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रख दिया गया था। यहां आपको मुगल, मराठा और जैन शैली की वास्तुकलाओं (architecture) का संग्रह देखने को मिल जायेगा।

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राजस्थान के राजसी ठाठ बाट का जीता जागता उदाहरण है जयपुर

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“कुछ शहर खूबसूरत होते हैं और कुछ सुन्दर बनने की चाहत रखते हैं। लेकिन राजस्थान का जयपुर शहर तो शायद सुंदरता के लिए बनाया गया है जिसका नाम जेहन में आते ही मन गुलाबी हो उठता है। चाहे दिन का समय हो या रात का, इस शहर की चमक और बनावट मन से उतरती ही नहीं। चारों और अरावली की पहाडयों से घिरा, चौड़ी और साफ़ सुथरी सड़कों और अपने चमकीले और सैकड़ों साल पुराने बाज़ारों के कारण यह शहर किसी भी पर्यटक के मन को खुश करने में पूरी तरह सक्षम हैं।” इस शहर में बने बेहतरीन ऐतिहासिक इमारतें (Historical sites in Jaipur) जयपुर के कल्चरल हेरीटेज (Cultural heritage of Jaipur) को खुद में समेटे हुए हैं। शायद इसीलिए तो यूनेस्को ने इस पुरे शहर को ही वर्ल्ड हेरिटेज साइट (word heritage site) के सूची में शामिल कर लिया। 1. आमेर का किला (Amer fort): कहा जाता है कि इस शहर को वेल्स के राजकुमार (prince of wales) के स्वागत की खुशी में गुलाबी रंग से रंगा गया था और तभी से इसे गुलाबी शहर (pink city) के नाम से जाना जाता है। जयपुर शहर का नाम आते ही यहाँ के बड़े-बड़े और भव्य किले दिलोदिमाग में तैरने लगते हैं। और इन्हीं किलों में निसंदेह सबसे पहले जिस किले की छवि उभरती है वो है खूबसूरत आमेर का किला। राजस्थान के जयपुर शहर को और ज्यादा खूबसूरत बना देने वाला ये आमेर का किला, अम्बर किला के नाम से भी जाना जाता है। ये किला ना केवल जयपुर शहर बल्कि पूरे राजस्थान के शानदार पर्यटन (jaipur tourist attraction) स्थलों में से एक है। आमेर का किला इतना प्रसिद्ध है कि यहाँ पर हर रोज छह हजार से भी अधिक लोग घूमने के लिए आते हैं। यह किला राज्य की राजधानी जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर है। आमेर कैसे पहुंचे? (How to reach Amer): इस किले तक पहुंचने के लिए जयपुर से बस, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या कैब ली जा सकती है। आप अजमेरी गेट और एमआई रोड से आमेर शहर के लिए रोडवेज या प्राइवेट बसों से भी जा सकते हैं। आमेर का किला एक पहाड़ी पर है, इसलिए किले का दीदार करने के लिए आपको किले के थोड़ी दूर पहले से ही या तो पैदल चलना होगा या फिर आप टैक्सी या जीप से भी किले के मुख्य द्वार तक पहुँच सकते हैं। या फिर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से भी यहां जा सकते हैं। किले के मुख्य द्वार के पास थोड़ी सपाट चढ़ाई है, इसलिए अगर आप एक्सपर्ट ड्राइवर हैं तो ही अपनी पर्सनल गाड़ी से किले तक जाने का रिस्क लें। अगर आप सीजन के दौरान यहां जा रहे हैं, तो खुद की गाड़ी से जाने से बचना ही बेहतर होगा, क्योंकि ट्रैफिक जाम आपके लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। हालांकि ऐसा सीजनल टाइम में ही ज्यादा होता है। 2. जल महल (Jal mahal) : जयपुर स्थित जलमहल एक पाँच मंज़िला इमारत है, जिसकी 4 मंज़िल पानी के भीतर बनी हैं और एक पानी के ऊपर नज़र आती है। उस समय के राजा इस महल का उपयोग अपने मनोरंजन के लिए करते थे। जलमहल का इतिहास (History of Jal mahal) : पिंक सिटी जयपुर की ‘मानसागर’ झील के बीचों बीच बना ‘जलमहल’ अनोखे सौन्दर्य और अद्भुत स्थापत्यकला का बेजोड़ उदाहरण है। इस महल का निर्माण आज से लगभग 300 साल पहले आमेर के महाराज सवाई मानसिंह ने सन् 1799 में करवाया था। आपको बता दें यह पाँच मंज़िला इमारत और इस झील की सुंदरता उस समय के राजाओं के आकर्षण का केंद्र (centre of attraction) हुआ करती थी और राजा अक्सर नाव में बैठकर इस महल की सैर किया करते थे। कैसे पहुंचे जलमहल (How to reach Jal mahal?) झील के बीचोंबीच बना ये जलमहल राजस्थान के जयपुर जिले के आमेर मार्ग पर स्थित है, दिल्ली से लगभग 260 किलो मीटर और अजमेर से 146 किलो मीटर की दूरी पर बना ये महल पर्यटकों के आकर्षण (jaipur tourist attraction) का विशेष केंद्र है। 3. मसला चौक जयपुर (Masala Chauk Jaipur) : जयपुर शहर सिर्फ अपने राजसी ठाठ-बाट (jaipur traditional culture) के लिए नहीं बल्कि खाने के लिए भी काफी मशहूर है। क्योंकि यहां के प्रसिद्ध व्यंजन(Famous Foods), तरह-तरह की स्टाइल और तरह-तरह की चीजों से बने हुए होते हैं। इस रॉयल सिटी के लोग खाने के बहुत ही शौकीन माने जाते हैं और यह शहर फूड लवर्स (Food Lovers) के लिए खास मायने रखता है। अगर बात खाने से संबंधित हो तो जयपुर की खूबसूरत जगहों में से एक जगह है मसाला चौक! जो कि खाने को लेकर अपनी वैरायटी के लिए और अपनी क्वालिटी के लिए बहुत ही नामी जगह है।किसी भी शहर में बहुत सारी पसंदीदा चीजों का एक साथ एक जगह पर मिलना बहुत ही मुश्किल हो जाता हैं। लेकिन जयपुर का मसाला चौक एक ऐसी जगह है जहां आपको सभी लोकप्रिय व्यंजन और स्ट्रीट फूड एक ही जगह पर आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। जयपुर के मसाला चौक की शुरुआत जयपुर के सभी प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड को सिर्फ एक जगह पर लाने के उद्देश्य से हुई। यह एक ओपन-एयर फूड कोर्ट (Open air food court) है जिसमें बैठने की अच्छी व्यवस्था है, जिसने इसे उन सभी लोगों के लिए एक टॉप हैंगआउट डेस्टिनेशन बना दिया है जो स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेना पसंद करते हैं। मसाला चौक तक कैसे पहुंचे? (How to reach masala chauk?) 4. जंतर मंतर (jantar mantar) : राजस्थान की राजधानी जयपुर में सवाई जय सिंह द्वारा बनवाया गया जंतर-मंतर यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage Site) सूची में शामिल है। यहाँ पर मौजूद उपकरण और यंत्र बेहद पुराने होने के बावजूद भी आधुनिकता (Modernity) का प्रमाण देते हैं। इन बेहद पुराने उपकरणों से समय को मापा जाता है। जंतर मंतर में स्थित यहाँ के उपकरण आपको एक पल के लिए बांध देने की क्षमता रखते हैं और जैसे ही आप इनकी बनावट देखोगे, इनकी खूबियां देखते ही रह जाओगे। यहाँ पर बहुत सारे उपकरण हैं जो आपको अलग-अलग ज्यामितीय आकारों (geometrical shapes) के दिखाई देंगे। यही वो उम्दा उपकरण हैं जो जयपुर के जंतर मंतर को दुनिया के बेहतरीन वेधशालाओं में से एक बनाते

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एशिया की सबसे सस्ती मार्किट दिल्ली का चोर बाजार(Chor Bazar)

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जानिए एशिया की सबसे सस्ती मार्किट(Cheapest Market of Asia) दिल्ली के चोर बाजार की कहानी : जहाँ सुबह चार बजे लोग आने लगते हैं शॉपिंग के लिए चोर बाजार के बारे में सुना तो बचपन से बहुत कुछ था। मगर वहां जाने का मौका अब मिला। चोर बाजार को लेकर ऐसी अफवाहें हैं कि वहां पर चोरी का सामान मिलता है। आप जानते ही हैं भारत में लोग कम दाम की चीजों को ज्यादा महत्व देते हैं। इसके पीछे कारण कोई भी हो चाहे वह चीज चोरी की हो या कैसी भी हो, लोग उसे खरीदना जरूर पसंद करते हैं क्योंकि वह कम दाम की होती है। आपको बता दें इसे एशिया की सबसे सस्ती मार्केट भी कहा जाता है। यहां हर तरह के हजारों आइटम मिलते हैं। यदि आपके पास 1000 रुपए है, तो आप यहां बैग, ईयरफोन, सॉक्स, कॉसमेटिक और कई यूटिलिटी आइटम भी खरीद सकते हैं। खास बात ये कि आउटडेटेड प्रोडक्ट्स को तो यहाँ कई गुना कम कीमत में खरीदा जा सकता है।Chor Bazaar Delhi यहाँ जाने का सही वक्त (Best Time to Visit) चोर बाजार जाने के लिए आपको सूर्य देवता के उदय होने से पहले ही पहुंचना होता है। वहां जाने के लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता है। मगर याद रहे कि यह बाजार केवल रविवार के दिन ही लगता है। अगर आप दिल्ली के रहने वाले हैं  तो आप मार्केट में आसानी से पहुंच सकते हैं। अगर आप कहीं बाहर से आ रहे हैं तो आपको करीब 4-5 बजे के आसपास बाजार में पहुंचना होगा। अभी फिलहाल रात ही थी सूर्य देवता ने अभी दर्शन नहीं दिए थे। आप बस से जैसे ही लाल किला स्टॉप पर उतरते हो, उतरते ही सामने ही आपको बड़ी संख्या में लोग देखने को मिलते हैं। एक बारगी ऐसा लगेगा मानो वहां पर किसी तरह का मेला लगा हुआ है। इतनी भीड़ सुबह तड़के आपको आम तौर पर किसी भी मार्किट में दिखाई नहीं देगी । हां, दिन के समय की बात अलग है । मगर एकदम सुबह किसी बाजार में हजारों की संख्या में लोगों का होना आपको भी हैरान कर सकता है। अभी दिन निकलना बाकी था ऐसे समय में जब दिन भी ना निकला हो और लोगों की संख्या हजारों में हो तो इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि इस मार्केट को लेकर लोगों में कितना उत्साह है। बता दें कि लोग इस मार्केट में रात 3 बजे से ही पहुंचने लग जाते हैं। एक वजह ऐसी भी इतनी बड़ी संख्या में लोग सुबह-सुबह वहां पर इसलिए पहुंचते हैं क्योंकि रात के अंधेरे में बहुत-सा कीमती सामान कम रूपयों में मिल जाता है। सड़क के किनारे ही हजारों की संख्या में लोगों का जमावड़ा देखने को मिलता है। पास जाकर देखा तो वहां पर एक बोरी में जूते लेकर लोग बेच रहे होते हैं और ऐसे ही जूते बेचने वालों की संख्या भी कई गुना थी। तड़के सुबह अँधेरा होने के कारण लोग मोबाइल की टॉर्च जलाकर सामान की परख करते हैं और तोलमोल करके सामान को खरीद रहे होते हैं। गारमेंट्स की बात करें तो वहां पर कपड़े भी आपको कम रुपए में मिल जाते हैं। कबूतर मार्केट– Chor Bazaar Delhi इसे कबूतर मार्केट भी कहा जाता है, क्योंकि यहां पर आपको कोयल, बुग्गी, जावा, कबूतर, खरगोश, आदि सस्ते दामों में आसानी से मिल जाएंगे। जैसे ही दिन चढ़ने लगता है, वैसे ही सड़क पर सामान बेचने वालों की संख्या कम होने लग जाएगी। इसके अंदर जो मार्केट लगती है वह पूरे दिन ही लगी रहती है। जिसे संडे मार्केट कहा जाता है। जो सुबह सड़क के किनारे सामान मिलता है वह रात के अंधेरे में भी मिलता है। रात के अंधेरे में मिलने वाले समान को संदिग्ध माना जाता है। यही कारण है इसे चोर बाजार का नाम दिया गया है। जैसा कि आपको पहले भी बताया है कि कपड़ों से लेकर जूते तक, कॉस्मेटिक से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का सारा सामान यहाँ पर उपलब्ध है। खास बात ये कि इस मार्केट में आपको किसी भी सामान का जितना मूल्य बताया जाता है, आपको उसका रेट आधे से कम लगाना होता है यानि कि आपको बार्गेनिंग या तोलमोल करना आना चाहिए। यहाँ शॉपिंग का मन बनाने से पहले अच्छा होगा कि आपके साथ कोई ऐसा व्यक्ति जाए जिसे गैजेट्स और टेक्नोलॉजी की बारीक़ समझ हो। जैसे-जैसे समय बीतता जायेगा, वैसे-वैसे मार्केट में भीड़ भी बढ़ती जाएगी। रविवार को दिन के समय यहाँ आपको अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल जाएगी। दिन के समय अगर आप यहाँ शॉपिंग करने आएं तो इस संडे बाजार के सामने ही प्रसिद्ध लाल क़िला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक भी है जिसे आप मजे से घूम सकते हैं। लैपटॉप लेना खतरे से खाली नहीं (Taking a laptop is not free from danger) लैपटॉप की बात करें तो लैपटॉप यहाँ से लेना किसी खतरे से कम नहीं है। लैपटॉप का मूल्य आपको 6 हजार से 10 हजार तक का बताया जाता है। लोग तोल मोल करके ले जाते हैं। लेकिन हम आपको सलाह देंगे कि यहाँ से लेपटॉप लेना किसी खतरे से खाली नहीं है। हां, अगर कोई इस फील्ड में एक्सपर्ट है तो वह जाँच परख कर लैपटॉप ले सकता है। अन्यथा लैपटॉप लेना किसी खतरे से खाली नहीं है! यहाँ लैपटॉप देखने में तो बहुत अच्छे लगते हैं। ऐसा लगता है मानो कि यह बिल्कुल ही नए हैं। इसकी पैकिंग ही ऐसी होती है कि लैपटॉप यहाँ आने वाले खरीददारों को खूब आकर्षित करता है और लोग इसकी डेकोरेशन और प्रेजेंटेशन को देखकर ही उसे खरीद लेते हैं और बाद में घर जाकर पछताते हैं। आपको यह भी बता दें कि इस मार्किट में आप अपना मोबाइल और पर्स संभाल कर रखें क्योंकि यहाँ पर मोबाइल और पर्स बहुत अधिक चोरी होता है। क्या चोरी का मिलता है सामान ? ऐसा कहा जाता है कि जो लोग रात के अंधेरे में सामान बेचते हैं यह चोरी का सामान होता है। जिस वजह से ब्रांडेड सामान भी आपको आधे से कम रुपए में भी मिल जाता है। लेकिन यहाँ सभी चीजें चोरी की नहीं होती हैं। यह केवल लोगों के मन में धारणा बन

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जानिए बुद्ध की भूमि बोधगया के बारे में…

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अगर भागदौड़ की जिंदगी से कहीं दूर जाना चाहते हैं और खुद को नेचर (Nature) के करीब महसूस करना चाहते हैं तो, आपके लिए बोधगया सबसे बेस्ट ऑप्शन (best option) हो सकता है।जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है, बोधगया महात्मा बुद्ध की धरती है। यह शहर बिहार की राजधानी पटना (Patna) से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। खूबसूरत पहाड़ियों और बुद्ध स्मृतियों से जुड़े हुए इस शहर में आकर लाइफ की सारी निगेटिविटी (Negativity) को खत्म किया जा सकता है। बोधगया का इतिहास (History of Bodhgaya) : बोधगया एक प्राचीन शहर है। जहां लगभग 500 साल पहले भगवान बुद्ध को फल्गु नदी के तट पर, बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। कहते हैं भगवान बुद्ध को वैशाख महीने में पूर्णिमा के दिन ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जिसके बाद से वह बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए और यहां बौद्ध भिक्षुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। वैशाख की पूर्णिमा जिस दिन भगवान महावीर को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, उस दिन को बौद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने लगा। माना जाता है कि, बोधगया के महाबोधि मंदिर में स्थित बुद्ध की प्रतिमा उसी अवस्था में है, जिस अवस्था में महावीर बुद्ध ने तपस्या की थी। 13वीं शताब्दी तक यह शहर पूरी दुनिया भर में काफी प्रसिद्ध था। बोधगया में घूमने की जगह : 1. महाबोधि मंदिर (Mahabodhi temple):बोधगया आने वाले लोगों के लिए महाबोधि मंदिर एक खास आकर्षण (Attraction) का केंद्र होता है। दुनिया भर से भगवान बुद्ध के भक्त यहां इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर को महाबोधि वृक्ष के चारों ओर बनाया गया है। इस मंदिर को सम्राट अशोक ने बनवाया था।इस मंदिर के बीच स्थित महाबोधि वृक्ष और उसके नीचे मौजूद भगवान बुद्ध की मूर्ति लोगों के बीच काफी पॉपुलर (popular) है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय और नालंदा विश्वविद्यालय में भी इस मूर्ति के प्रतिरूप को स्थापित किया गया है। 2. थाई मठ (Thai Monastery):इस शहर में कई सारे प्रसिद्ध बौद्ध मठ भी हैं। इन्हीं प्रसिद्ध मठों में से एक है थाई मठ। इस मठ के निर्माण में सोने से बनी टाइलों (Golden Tiles) का इस्तेमाल किया गया है। इसके दीवारों और छतों में की गई नक्काशी भारतीय संस्कृति का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां का शांत माहौल और स्वच्छ वातावरण इतना सुकून देने वाला है कि आपको यहीं का होकर रह जाने का मन करेगा। 3. भगवान बुद्ध की प्रतिमा (Statue of Buddha) :इस शहर में भगवान बुद्ध की एक 80 फीट ऊंची प्रतिमा भी है। इस प्रतिमा को भगवान बुद्ध के प्रसिद्ध स्मारकों में से एक माना जाता है। इस मूर्ति को देश के सबसे ऊंची बुद्ध की मूर्तियों में से एक माना जाता है। इसका का उद्घाटन (Inaugration) दलाई लामा द्वारा 1989 में किया गया था। इसे बलुआ पत्थर के ब्लॉक (Block of sand stone) और लाल ग्रेनाइट (Red granite) से बनाया गया है। इस मूर्ति की लोकप्रियता (Popularity) का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पर्यटक (Tourist) विशेषकर इस मूर्ति को देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं। 4. जापानी मंदिर (Japanese temple) :प्राकृतिक खूबसूरती (Natural beauty) से भरा हुआ यह शहर वास्तु कला में भी धनी है। इस शहर में एक जापानी मंदिर है, जिसमें जापानी आर्किटेक्चर (Architecture) देखने को मिलता है। इस मंदिर के दीवारों पर महात्मा बुद्ध के उपदेशों की नक्काशी की गई है। इस मंदिर का निर्माण 1972 में किया गया था। यह मंदिर मुख्य शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 4. आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम (Archaeological Museum):इस शहर में आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम भी है। यहाँ बौद्ध और हिंदू धर्म तरह-तरह की मूर्तियां और कलाकृतियां मौजूद हैं। साथ ही साथ यहां खुदाई में मिले हुए अन्य वस्तुओं को भी रखा गया है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 5. पितृपक्ष मेला (Pitrupaksha Mela):गया का हिंदू धर्म में भी विशेष महत्व रहा है। क्योंकि हिंदू धर्म में इसे मोक्ष भूमि के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि, पितृपक्ष के समय यहां आकर पिंडदान करने से पूर्वजों के आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर साल भाद्रपद के पूर्णिमा से अश्विन के कृष्ण पक्ष तक यहां पितृपक्ष का मेला लगता है। गया जाने के लिए सबसे सही समय (Best time to visit Gaya) : वैसे तो गया में साल भर सैलानियों (Visitors) की भीड़ लगी रहती है। लेकिन अगर आप मौसम का लुफ्त उठाते हुए और बिना किसी परेशानी के गया घूमना चाहते हैं तो, फरवरी से अप्रैल और सितंबर से नवंबर तक के समय में यहां घूमने जा सकते हैं। सितंबर से नवंबर के बीच यहां पितृपक्ष का मेला लगता है। इस समय लोग यहां जाकर अपने पूर्वजों के मोक्ष की प्राप्ति के लिए पिंडदान करते हैं। कैसे पहुँचें? (How to reach): बोधगया हवाई, रेल और सड़क तीनों ही मार्गो से जुड़ा हुआ है। बोधगया जाने के लिए सबसे आसान रास्ता हवाई मार्ग है। गया जिला का एयरपोर्ट बिहार का इंटरनेशनल एयरपोर्ट(International Airport) है, जो भारत के अन्य शहरों से भी अच्छी तरह से जुड़ा (Well connected) हुआ है। बोध गया आने का दूसरा सबसे सरल मार्ग रेल मार्ग है। बोधगया से 13 किलोमीटर दूर स्थित गया जंक्शन (Junction) भी भारत के अलग-अलग शहरों से जुड़ा हुआ है। गया आने के लिए आप पटना जंक्शन तक की ट्रेन भी ले सकते हैं। पटना गया की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। जिससे रोड रेल दोनों ही रास्तों से आसानी से तय किया जा सकता है।

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Amritsar- आस्था और सुकून का शहर

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मुझे जब भी अपने व्यस्त शेड्यूल में या रोज़मर्रा की ज़िंदगी में थोड़े सुकून के पल चाहिए होते हैं तब अनायास ही यात्रा का ख्याल आता है। जब कभी ऐसा लगता है कि इस तनावपूर्ण और भागदौड़ भरी ज़िंदगी से थोड़ी निजात चाहिए तब मेरे पास अंतिम विकल्प यात्रा का ही बचता है। इस बार कार्यक्रम बना अमृतसर का। वो भी प्रसिद्ध त्यौहार बैसाखी के अगले दिन। स्टेशन से उतरते ही फ्री बस बैसाखी के त्यौहार की शुरुआत भारत के पंजाब राज्य से ही हुई है और इसे रबी की फसल की कटाई शुरू होने की ख़ुशी के रूप में मनाया जाता है। बैसाखी के दिन गोल्डन टेम्पल को जगमगाती लाइटों से सजाया जाता है। देश भर से सिख श्रद्धालु इस दिन अमृतसर पहुँचते हैं। बैसाखी से अगले दिन जाने का फायदा ये हुआ कि भीड़ इतनी नहीं थी। वैसे अमृतसर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च ही रहता है। हम हिसार से अमृतसर ट्रैन से पहुंचे। स्टेशन से उतरते ही बाहर फ्री बस सेवा का भी इंतेज़ाम रहता है जो ‘सतनाम वाहेगुरु’ के जयकारें लगाते हुए सीधे गोल्डन टेम्पल ले जाती है। गुरूद्वारे पहुँचते-पहुँचते रात के 11 बज चुके थे। हमनें अंदर परिसर में ही स्थित गंगा निवास में वातानुकूलित रूम बुक करवाया था। भले ही अप्रैल के महीने में ठीक-ठाक गर्मी होती है पर अंदर परिसर में ठंडक थी। थोड़ा आराम करने के बाद जैसे ही हमनें हरमंदिर साहिब में कदम रखा एक हमें अलग ही वातावरण की अनुभूति हुई। और लगा जैसे यहाँ आना पूरी तरह सार्थक हो गया। मेन हाल में दर्शन के लिए लम्बी-लम्बी लाइनें लगी हुयी थी। सुबह तड़के पालकी के दर्शन किये। दर्शन के लिए भले ही भीड़ कितनी ही क्यों न हो पर थकान जरा-सी भी नहीं होती, बस यही खासियत है यहाँ की। परमात्मा एक है और वो सब जगह मौज़ूद है।एक औंकार, सतनाम करता पुरख निरभउ निरवैर…… गोल्डन टेम्पल में दिन रात शब्द कीर्तन और गुरुबाणी चलती रहती है जो दुनिया की भाग दौड़ से थके हारे मन को रूहानी सुकून देती है। अद्भुत और अलौकिक गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार है जो इस बात के प्रतीक हैं की यहाँ के दरवाज़े हर धर्म के लोगो के लिए खुले हैं। रात में जगमगाती रौशनी में संगमरमर और सोने के आवरण से बना यह गुरुद्वारा अद्भुत और अलौकिक लगता है। दुनिया की सबसे बड़ी रसोई अंदर परिसर में ही दुनिया की सबसे बड़ी रसोई में से एक गुरु के लंगर में रोज़ाना हज़ारों लोग प्रशाद रूप में भोजन ग्रहण करते है। इतनी बेहतरीन व्यवस्था, इतना स्वाद और इतना अपनापन। सच में अद्भुत। इसी कारण कहते हैं अमृतसर में कोई भूखा नहीं सोता। पवित्र जल के तालाब के बीचों-बीच गुरुद्वारा साहिब है व चारों तरफ बड़ा-सा प्रांगण है। जहाँ आपको सैंकड़ों श्रद्धालु सिमरन करते मिल जायेंगे। गुरूद्वारे में एक भव्य म्यूजियम भी है जहां सिख धर्म से जुडी ऐतिहासिक चीज़ें रखी गयी है। गुरुओं की देन- अमृतसर शहर वैसे तो अमृतसर को देश विदेश में सब जानते हैं लेकिन दरबार साहिब (गोल्डन टेम्पल ) इस शहर की लाइफ लाइन है। पूरा अमृतसर शहर गोल्डन टेम्पल के इर्द गिर्द ही बसा हुआ है। अमृतसर शहर गुरुओं की देन माना जाता है। चौथे गुरु रामदास जी ने पांच सौ बीघा जमीन लेकर यह शहर बसाया था। तभी इसका नाम पड़ा रामदासपुर। महाराज रंजीत सिंह ने हरमिंदर साहिब पर उन्नीसवीं शताब्दी में सोने का आवरण चढ़वाया था और तब से अमृतसर को स्वर्ण नगरी भी कहा जाने लगा। एक शहर के तौर पर देखें तो यह सिर्फ अपने गुरुद्वारों के लिए प्रसिद्ध नहीं है बल्कि कौमी एकता का एक बेहतरीन उदाहरण भी है – यहाँ जहां एक तरफ बेहद खूबसूरत दुर्गियाना मंदिर है वहीँ आज़ादी की लड़ाई की गवाह दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी दिखती खैरउद्दीन मस्जिद भी है। जहाँ हज़ारों लोग इबादत के लिए आते हैं।(Golden Temple, Amritsar) वाघा बॉर्डर अमृतसर शहर से 30-32 किलोमीटर एकऔर डेस्टिनेशन है वाघा बॉर्डर। यहाँ पर रोज़ शाम को दोनों देशों के सिपाहियों द्वारा बहुत ही जोशीले ढंग से अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज को वापिस उतरा जाता है। इस दौरान देशभक्ति का ऐसा रंग चढ़ जाता है जिसकी कल्पना करना भी सम्भव नहीं। यहाँ की ये जोशीली परेड देखने के लिए आपको समय से पहले ही जाना पड़ता है वरना भीड़ इतनी हो जाती है कि वहां पर खड़े होने की भी जगह नसीब नहीं होती। जलियावालां बाग अमृतसर में ही भारत की आज़ादी के इतिहास का साक्षी प्रसिद्ध जलियावालां बाग भी है। आज जलियावालां बाग एक पर्यटक स्थल बन गया है और रोजाना हजारों सैलानी इसे देखने आते हैं। यहाँ की दीवार पर आज भी उन गोलियों के निशान मौज़ूद हैं जो जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर चलवाई थी जिसमे हज़ारों लोग मारे गए थे। अमृतसर शहर के पुराने बाजार आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जैसे किसी ज़माने में हुआ करते थे। आप शाम के समय पैदल ही बाजार की सैर पर निकल सकते हैं। भीड़-भाड़ वाले ये बाजार एक बार तो आपको चांदनी चौक की याद दिला देंगे। अगर आप खाने के शौकीन हैं तो अमृतसर आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं होगा। अमृतसर लस्सी, छोले भटूरे, राजमा चावल और पिन्नी का स्वाद पूरी दुनिया में मशहूर है। बात चाहे धार्मिक आस्था की हो, इतिहास की हो, संस्कृति की या फिर खानपान की, अमृतसर का कोई सानी नहीं। by Pardeep Kumar

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Best places to visit in Chandigarh –

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पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ एक बहुत खूबसूरत शहर है। ये भारत के केंद्र शासित प्रदेशों में से भी एक है। चंडीगढ़ सिटी को बेहद खूबसूरती के साथ बसाया गया है जो अपनी कला और संस्कृति (art and culture) के लिए जाना जाता है। दोस्तों हम लोगों में अक्सर ये इच्छा रहती है कि सभी जगह के कल्चर को अच्छे से जाने, इसलिए अगर आप भी छुट्टियों के लिए हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले हैं तो आप पंजाब और हरियाणा के कल्चर को ठीक से समझने के लिए चंडीगढ़ भी जरूर आए। हेरिटेज (Heritage) को अच्छे से समझने वालो के लिए और बाकी सबके लिए भी चंडीगढ़ एक बेस्ट डेस्टिनेशन (Best Destination) है क्योंकि यहां आपको हर दूसरे कदम पर कलाओं का भंडार (art store) मिलेगा। चंडीगढ़ अपने कई खूबसूरत पार्कों और बगीचों की वजह से ‘गार्डन सिटी’ (Garden City) के नाम से फेमस है। ये पार्क और बगीचे भी चंडीगढ़ में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक हैं। चंडीगढ़ में ऐसे कई टूरिस्ट प्लेस हैं जहां आप न जाकर बड़ी गलती कर सकते हैं। 1. जाकिर हुसैन रोज़ गार्डन (Zakir Hussain Rose Garden)- गुलाबों से भरा यह खूबसूरत और खुशबूदार गार्डन (Nice and Smelling garden) काफी बड़ा है जो की भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन को डेडिकेटिड (Dedicated) है। ज़ाकिर हुसैन गार्डन में अमेजिंग आर्किटेक्चर (Amazing Architecture) है जो फूलों की खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ाती है। इस गार्डन सबसे की स्पेशल बात ये है कि यहां 1500 से भी ज्यादा वैरायटी (Variety) के गुलाब लगाए गए हैं । पूरे इंडिया से गुलाब कलेक्ट (Collect) करके यहां लगाए गए हैं। अगर आप अपने हनीमून (Honeymoon) पर हैं और अपने हिमाचल हनीमून पैकेज (Himachal honeymoon package) पर चंडीगढ़ में रुक रहे हैं, तो इस गार्डन का विजिट (Visit) करना एक बढ़िया ऑप्शन (Option) है।कपल्स (Couples) अक्सर ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं जहां वो एक दूसरे के साथ कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड (Qualitiy time spend) कर पाएं तो जाकिर हुसैन गार्डन आपकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए एक दम सही जगह है। जहां आप फूलों के बीच एक दूसरे से तसल्ली से समय बिता पायेंगे। यहां आने का सबसे अच्छा समय फरवरी और मार्च रहेगा। तो आप भी इस जगह को अपनी डेस्टिनेशन लिस्ट (Destination list) में शामिल कर लें। 2. इस्कॉन मंदिर (Iskcon temple)- पूरे भारत में कृष्ण भगवान की पूजा करने वाले लोगो की संख्या हमारे इमेजिनेशन (Imazination) से भी कई ज्यादा है। और आजकल हम सब ने रील्स (Reels), पोस्ट (Post) और न्यूज (News) में भी इस्कॉन मंदिर का नाम तो सुना ही होगा जो कि काफी कम समय में काफी ज्यादा पॉपुलर (Popular) हो चुका है। इस्कॉन मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित एक बहुत लोकप्रिय मंदिर है। भारत भर में कई इस्कॉन मंदिर फैले हुए हैं और ये सभी मंदिर कृष्ण मंदिर हैं। हिंदू कैलेंडर (Hindu calender) में कुछ त्यौहार (Festivals) के दिनों में, इस्कॉन मंदिर में काफी ग्रैंड इवेंट्स (Grand events) होते हैं और कृष्ण भजन से पूरा माहौल भक्ति भरा होता है। इस्कॉन मंदिर भारत आने वाले इंटरनेशनल ट्रैवलर्स (International travelers) के बीच एक बहुत फेमस डेस्टिनेशन (Famous destination) है। ये मंदिर चंडीगढ़ के फेमस प्लेसिस (Famous Places) में से एक माना जाता है। किसी भी दिन, आप इस मंदिर में भक्तों की भीड़ को देख सकते हैं । परिवारों को मंदिर घुमाने और पिकनिक (Picnic) मनाने के लिए लोग अक्सर यहां समय निकालकर आते है। अक्टूबर से अप्रैल का मंथ (Month) इस जगह को विजिट करने के लिए एक दम परफेक्ट रहेगा। 3. सेक्टर 17 मार्केट (Sector 17 Market)- चंडीगढ़ का 17 सेक्टर चंडीगढ़ शहर का सबसे ज्यादा बिजी एरिया (Busy area) माना जाता है। शॉपिंग और खाने पीने के लिए ये जगह सबसे बढ़िया है। इस जगह पर टीनएजर्स (teenagers) काफी ज्यादा आते है खासकर वो लोग, जो कपल्स है। ये जगह दिल्ली के चांदनी चौक से कम बिल्कुल नही है। यहां भी आप हैंड क्राफ्ट (Hand craft), और कई ऐसे मीमेंटो (Memento) मिल जाएंगे जिसे देख कर आपके गेस्ट (Guest) आपसे जरूर पूछ बैठेंगे की कहाँ से लिया ये आपने? अगर आप अपनी बीवी बच्चो के साथ घूमने निकले है तो इस जगह पर जरूर आए, आफ्टरऑल वूमेन लव्स शॉपिंग (after all women’s love shopping)। 4. सुखना लेक (Sukhna lake)- चंडीगढ़ का ये फेमस लेक काफी बड़े एरिया (Big area) में है और यह एक ऐसी जगह है जहाँ कई माइग्रेटरी बर्ड्स आते हैं। कुछ फेमस बर्ड्स (Famous Birds) जो यहां देखे जा सकते हैं वो हैं क्रेन (Crane) और साइबेरियन बत्तख (Siberian Duck)। अगर आप बर्ड्स (birds) के शौकीन हैं या फोटोग्राफर (Photographer) हैं तो ये जगह घूमने के लिए काफी शानदार है। सुखना लेक उन रोमांटिक जोड़ों (Romantic couples) के लिए एक दम सही है जो यहां पीस (peace) के लिए आते हैं। अगर आप हिमाचल जाने के लिए चंडीगढ़ से गुजर रहे हैं तो आप अपने ट्रेवलिंग प्रोग्राम (Traveling program) में सुखना लेक को ऐड (Add) करने के लिए अपने किसी भी हिमाचल हनीमून पैकेज को आसानी से बुक कर सकते हैं। वैसे तो ये जगह कपल्स के लिए है लेकिन आप यहां अपने फ्रेंड्स ग्रुप (Friends Group) या अपने फैमिली (Family) के साथ या फिर अकेले भी आ सकते हैं। यहां आप कई सारी फन एक्टिविटीज (Fun Activities) को एंजॉय (Enjoy) कर सकते है जैसे कि, वाटर स्कीइंग (Water Skiing), फिशिंग (Fishing) और बोटिंग (Boating) हैं। ये चंडीगढ़ के मोस्ट फेमस प्लेस (Most famous place) में से एक है। 5. हॉप्स एन ग्रेन्स (Hops n Grains)- जो चीज़ चंडीगढ़ को एक ग्रेट सिटी (Great city) बनाती है वो है इसकी नाइटलाइफ़ (Nightlife)। फ्रेंड सर्कल या पार्टनर (Friend circle or partner) के साथ ट्रैवल (Travel) कर रहे एक एडल्ट (Adult) होने के नाते, आप हॉप एन ग्रेन्स को शाम या देर रात बिताने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक पाएंगे। यह सिटी का बेस्ट रेस्टोरेंट है जहाँ आपको डिलीशियस फूड (Delicious Food) और अमेजिंग ड्रिंक्स एंजॉय (Enjoy amazing drinks) करने को मिलेंगी।चिंता मत कीजिए यह फैमिली के लिए स्पेशल प्लेस है जहां गुड अमाउंट (Good amount) पर टेस्टी फूड (Taty food) का टेस्ट (Taste) ले