Bhairavgarh Destination Travel

पर्यटकों का आकर्षण है सह्याद्री की पहाड़ियों में स्थित भैरवगढ़ ट्रेक

  • 0 Comments

सह्याद्री की पहाड़ियों की खूबसूरती के बारे में तो आपने बहुत कुछ सुन रखा होगा। लेकिन आज हम आपको ले जाने वाले हैं सह्याद्री की पहाड़ियों के सबसे खतरनाक ट्रेक के सफर पर। भारत में कई ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस हैं, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी और आकर्षित करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा ट्रैकिंग डेस्टिनेशन भी है जिसकी चढ़ाई करने से पहले एक एक सामान्य पर्यटक को सौ बार सोचना पड़ता है? भारत के इस खतरनाक ट्रेक का नाम है- “भैरवगढ़ ट्रेक” (Bhairavgarh Treck) महाराष्ट्र के जंगलों में बहुत से ऐसे ट्रेक हैं जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं, उन्हीं में से एक ट्रेक भैरवगढ़ भी है। लेकिन भैरवगढ़ ट्रेक पर चढ़ाई इतनी भी आसान नहीं! क्योंकि यहां सीधे 90 डिग्री ढलान पर आपको ट्रैकिंग करनी होती है। कई जगह तो आपको रैपलिंग करने की भी जरूरत पड़ेगी। यह सुनने में जितना एडवेंचरस है उतना ही ज्यादा खतरनाक ट्रेक भी है। क्योंकि इस ट्रेक पर आपको एक तरफ गहरी हजारों फीट की खाई और दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़ देखने को मिलेंगे। इस ट्रेक पर चढ़ाई के लिए सीढियाँ बनाई गई है लेकिन कुछ जगहों पर तो यह सीढियाँ एक फीट से भी कम चौड़ाई वाली हैं। ऐसे में इतनी पतली सीढियों और एक ओर दिखने वाली सैकडों फीट गहरी खाई को देखकर किसी भी इंसान का दिल एक बार को थम जाता है। आज हम आपको इसी ट्रेक के बारे में बताएंगे। कैसे पहुंचे भैरवगढ़ (How to reach Bhairavgarh) अगर आप ट्रैकिंग को पसंद करते हैं और इस तरह के एडवेंचरस ट्रेक पर जाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले मोरोशी गांव पहुंचना होगा। भैरवगढ़ मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर और पुणे से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भैरवगढ़ की चढ़ाई शुरू करने के लिए आपको मोरोशी गांव तक पहुंचना होगा जो की मालशेज घाट रीजन में एक छोटा सा गांव है। मोरोशी गांव से भैरवगढ़ तक का ट्रेक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा ट्रेक है। कैसे करें ट्रेकिंग (How to do trekking) भैरवगढ़ ट्रेक के दो भाग हैं। पहले पथरीले रास्तों से ट्रैकिंग करते हुए और घने जंगलों से गुजरते हुए आपको भैरवगढ़ ट्रेक के एक्चुअल बेस तक पहुंचना होगा। जहां से सीधे 90 डिग्री की ढलान की चढ़ाई शुरू होगी। मरोशी से भैरवगढ़ तक आपको लगभग 3.5 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होगी। यह ट्रैकिंग इतनी आसान नहीं होगी क्योंकि कई जगह आपको घने जंगलों से होकर गुजरना होगा। इस ट्रेक के रास्ते में कई जगह ऐसे भी हैं जहां झाड़ियां दिखाई पड़ती हैं, लेकिन झाड़ियों के तुरंत बाद सैकड़ों फीट गहरी खाई होती है। इसीलिए आपको इस ट्रेक पर संभाल कर चलना होगा। भैरवगढ़ फोर्ट से मिलने वाला व्यू बहुत ही खूबसूरत होता है। जब आप घंटों की ट्रैकिंग के बाद भैरवगढ़ के पीक पर पहुंचेंगे तो आप अपनी सारी थकान को भूलकर उसे मूमेंट को एंजॉय करने में लग जाएंगे। भैरवगढ़ फोर्ट के पिक से आपके आसपास के पहाड़ियों का बहुत ही क्लियर व्यू देखने को मिलेगा। अगर आप साफ वेदर वाले दिन चढ़ाई कर रहे हैं तो आप अपने आसपास गोकन कड़ा, तारामती पिक और अजोबा फोर्ट का क्लियर व्यू देख पाएंगे। भैरवगढ़ पिक का उपयोग ओल्ड मालशेज घाट के ट्रेड रूट पर नजर रखने के लिए किया जाता था। यहां से मालशेज घाट के ट्रेड रूट पर आने जाने वाले व्यापारियों और सामानों की देखरेख की जाती थी। इस ट्रैकिंग के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :

Category Destination Travel

एडवेंचर से भरपूर है नासिक के हरिहर फोर्ट की चढ़ाई

  • 0 Comments

क्या आप एडवेंचर के शौकीन हैं और क्या आपको ट्रैकिंग पसंद है? अगर हाँ तो जरा दिल थाम लीजिये! क्योंकि आज हम जिस ट्रैक की बात कर रहे हैं उस ट्रेक को भारत के सबसे खतरनाक ट्रकों के लिस्ट में में गिना जाता है। इस ट्रैक में आपको 30-45 डिग्री नहीं बल्कि सीधे 80 डिग्री वर्टिकल ढलान की चढ़ाई करनी होगी। सोच के ही डर लग रहा है ना? लेकिन डरिये मत क्योंकि यहां हर रोज कई ऐसे विजिटर्स भी ट्रैकिंग करने आते हैं जो ट्रैकिंग के एक्सपर्ट नहीं होते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी खतरनाक ट्रैक पर लोग क्यों आना चाहते हैं? आपके इस सवाल का जवाब यह है कि इस जगह ट्रैकिंग करके आने के लिए लोगों की दीवानगी के पीछे का कारण यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आपको लगेगा ही नहीं कि आप इस दुनिया में हैं। यह जगह आपको बताएगी की प्रकृति कितनी खूबसूरत हो सकती है। इस जगह को देखकर कोई भी नेचर लवर अपने आप को यहां जाने से रोक नहीं सकता और अगर बरसात के सीजन या फिर विंटर की बात की जाए तो इस समय अगर आप इस ट्रैकिंग प्वाइंट के टॉप पर जाएंगे तो यहां आपको आज मैं ऊपर आसमां नीचे का एहसास होगा। हम बात कर रहे हैं हरिहर फोर्ट की! जो भारत के सबसे खतरनाक ट्रैकों में से एक है और लगभग 75 डिग्री की ढलान वाली पहाड़ी पर स्थित है। हरिहर फोर्ट की ऊंचाई को देखकर एक बार को धड़कनें थम जाती हैं, लेकिन दिल रुकना भी नहीं चाहता है। क्योंकि इसके टॉप पॉइंट से मिलने वाले व्यू का इमेजिनेशन करते हीं शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। जिसके कारण आप भी अपने आप को इस ट्रैक को पूरा करने से रोक नहीं पाएंगे।यह किला दूर से देखने पर चकोर प्रतीत होता है, लेकिन असल में यह पहाड़ी प्रिज्म के आकार की है। हरिहर फोर्ट कैसे पहुंचे (How to visit)? हरिहर फोर्ट पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले महाराष्ट्र के नासिक पहुंचना होगा। नासिक शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है हरिहर फोर्ट। जिसके लिए आपको सबसे पहले नासिक से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित निर्गुणपाड़ा गांव पहुंचाना पड़ेगा। जहां से इस किले की ट्रैकिंग शुरू होती है। इस ट्रैक पर जाते वक्त निम्नलिखित बातों का रखें ध्यान (keep these things in your mind while treckking)

Category Destination Travel Ujjain

महाकालेश्वर की नगरी -उज्जैन

  • 0 Comments

उज्जैन~ इस शहर को महाकाल की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। मध्य प्रदेश के इस शहर को पहले पूरे भारतवर्ष में अवंतिका नगरी कहा जाता था। यह शहर महाकालेश्वर महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। भारत के कोने-कोने से लोग यहां महाकालेश्वर महादेव के दर्शन करने और उनकी पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं। इस शहर में इसके अलावा और भी कई पर्यटन स्थल हैं, जिनमें काल भैरव मंदिर और मंगलनाथ मंदिर प्रमुख हैं। जिनके बारे में हम आपको इस ब्लॉ में बताएंगे हम आपको यह भी बताएंगे कि इस शहर तक कैसे पहुंच जाए और आप इस शहर में कहां ठहर सकते हैं। महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन (Mahakaleshwara Temple Ujjain) इस मंदिर में देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है। इस मंदिर में दर्शन के लिए आपको दो तरह की टिकटें मिल जाएंगी। पहला ₹250 का और दूसरा ₹750 का। ₹250 के टिकट से आप भगवान महाकाल के दूर से दर्शन कर सकते हैं। जबकि 750 के टिकट से आप महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में जाकर शिवलिंग के नजदीक से पूजा अर्चना कर सकते हैं। इस मंदिर में आप फ्री में भी महाकालेश्वर महादेव के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर में फ्री एंट्री की टाइमिंग 1:00 से 4:00 बजे तक की होती है। हालांकि इस समय आपको भीड़ का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अगर आप वीक डेज में 1:00 बजे से 4:00 बजे के बीच आएंगे तो आप बहुत हीं आसानी से महाकाल के दर्शन बिना किसी टिकट के कर पाएंगे। वीकेंड पर यहां बहुत ज्यादा भीड़ होती है। ऐसे में आप कोशिश करें कि आप वीक डेज में आए और अगर आपका बजट न अलाव करें तो आप 1:00 बजे से 4:00 बजे के बीच दर्शन करने के लिए जाए। 750 रुपए की टिकट लेकर मंदिर के गृह गर्भ गृह में जाने वाले पुरुषों को धोती पहनना पड़ता है। जो कि आपको मंदिर में हीं उपलब्ध हो जाएगा। वहीं गर्भ गृह में जाने वाली महिलाओं को साड़ी पहनना पड़ता है। तो अगर आप महिला हैं और गर्भ में जाकर महाकालेश्वर महादेव के दर्शन करना चाहती हैं तो आप घर से हीं साड़ी पहन कर जाएं। यह आपके लिए बेहतर होगा। काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Temple) इस शहर में महाकालेश्वर मंदिर के अलावा और भी कई मंदिर हैं, जिनमें से एक प्रसिद्ध मंदिर काल भैरव मंदिर भी है। काल भैरव मंदिर पहुंचने के लिए आप महाकालेश्वर मंदिर से ₹200 से ₹250 रुपए में ऑटो ले सकते हैं। यह ऑटो महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित काल भैरव मंदिर तक आपको पहुंचा देगा। काल भैरव मंदिर में वीक डेज पर आप बिना किसी भीड़ के बहुत ही आसानी से काल भैरव के दर्शन कर लेंगे। काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav Temple) के प्रांगण में तीन मंदिर हैं। जिनमें एक काल भैरव का मंदिर है, दूसरा शिव मंदिर (Shiva Temple) है और तीसरा दत्तात्रेय मंदिर (Dattatreya Temple) है। मंगलनाथ मंदिर (Mangal Nath Temple) महाकालेश्वर मंदिर से काल भैरव मंदिर के रास्ते में हीं मंगल नाथ मंदिर पड़ता है। जहां आप किसी भी प्रकार के दोष के निवारण के लिए पूजा अर्चना करवा सकते हैं। मंगलनाथ टेंपल में आप भगवान के दर्शन और भात पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां अपने कुंडली के किसी भी दोष के निवारण के लिए पूजा अर्चना करवा सकते हैं। सस्ते में कैसे घूम उज्जैन (How to explore Ujjain in cheapest way)? अगर आप उज्जैन नगरी को पूरी तरह से एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो इसके लिए आप उज्जैन दर्शन बस का भी उपयोग कर सकते हैं। जो आपको सिर्फ ₹100 में उज्जैन के सभी प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का भ्रमण करवाएगी। कैसे पहुंचे उज्जैन (How to reach Ujjain)? उज्जैन पहुंचाना बहुत हीं आसान है, क्योंकि शहर का अपना रेलवे स्टेशन भी है। जहां देश के अलग-अलग राज्यों से ट्रेनें आती हैं। इसके अलावा अगर आप फ्लाइट से उज्जैन पहुंचाना चाहते हैं तो आप इंदौर एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। इंदौर उज्जैन से लगभग 50 किलोमीटर की ही दूरी पर स्थित है। इसलिए आप बहुत ही आसानी से इंदौर से उज्जैन पहुंच सकते हैं। उज्जैन शहर सड़क मार्ग के द्वारा भी देश के अन्य राज्यों से बहुत अच्छे से जुड़ा हुआ है। आप उज्जैन अपनी गाड़ी से भी आ सकते हैं। उज्जैन में कहां ठहरे (Where to stay in Ujjain)? उज्जैन में ठहरने के लिए आपको हर तरह के होटल अवेलेबल हो जाएंगे। सिंगल ऑक्युपेंसी के लिए यहां आपको 700 से 1000 के बीच अच्छे होटल मिल जाएंगे। वहीं अगर आप डबल बेड ऑक्युपेंसी वाला होटल लेंगे तो आपको इसके लिए लगभग 1200 से ₹1500 का खर्च आएगा। अगर आप धर्मशाला में रुकना चाहते हैं तो वह भी यहां एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। उसके लिए आपको लगभग 400 से 500 के भीतर धर्मशालाएं भी मिल जाएंगी। उज्जैन किस समय आए (Best time to visit Ujjain)? अगर आप उज्जैन आना चाहते हैं तो आप साल के किसी भी समय उज्जैन का रुख कर सकते हैं। लेकिन उज्जैन आने का सबसे सही समय मॉनसून या उसके बाद का माना जाता है। क्योंकि गर्मी के समय इस शहर में गर्मी ज्यादा होती है। ऐसे में शायद आप इस शहर को अच्छे से एक्सप्लोर नहीं कर पाएं। मॉनसून के समय में इस शहर में काफी ग्रीनरी भी देखने को मिलती है। साथ ही साथ मॉनसून में यहाँ का टेंपरेचर भी सामान्य हो जाता है। जिससे घूमने में भी बहुत ही आसानी होती है और इस समय आप पूरे इंटरेस्ट के साथ इस शहर को बहुत हीं अच्छे से एक्सप्लोर भी कर पाएंगे।

Category Destination Travel

MP के इन जगहों पर भारतीय स्थापत्य कला और प्राकृतिक खूबसूरती की दिखती है झलक

  • 0 Comments

मध्य प्रदेश में भारत के कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं जो न सिर्फ आर्कियोलॉजिस्ट को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, बल्कि सामान्य पर्यटकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। सबसे अधिक क्षेत्रफल पर वन होने के कारण मध्य प्रदेश में कई सारे नेशनल पार्क्स भी हैं। इसी वजह से यह राज्य प्राकृतिक रूप से भी सुंदर और मनमोहक है। अगर आप भी मध्य प्रदेश घूमना चाहते हैं तो हम आपको बताने वाले हैं मध्य प्रदेश के कुछ ऐसे जगहों के बारे में जहाँ एक बार जाना तो बनता है। 1. उज्जैन (Ujjain) इस शहर को महाकाल की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। मध्य प्रदेश के इस शहर को पहले पूरे भारतवर्ष में अवंतिका नगरी कहा जाता था। यह शहर महाकालेश्वर महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। भारत के कोने-कोने से लोग यहां महाकालेश्वर महादेव के दर्शन करने और उनकी पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं। इस शहर में इसके अलावा और भी कई पर्यटन स्थल हैं। जिनमें रामघाट, काल भैरव मंदिर और मंगलनाथ मंदिर प्रमुख हैं। कैसे पहुंचे उज्जैन (How to reach Ujjain) : उज्जैन पहुंचाना बहुत हीं आसान है, क्योंकि शहर का अपना रेलवे स्टेशन भी है। जहां देश के अलग-अलग राज्यों से ट्रेनें आती हैं। इसके अलावा अगर आप फ्लाइट से उज्जैन पहुंचाना चाहते हैं तो आप इंदौर एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। इंदौर उज्जैन से लगभग 50 किलोमीटर की ही दूरी पर स्थित है। इसलिए आप बहुत ही आसानी से इंदौर से उज्जैन पहुंच सकते हैं। उज्जैन शहर सड़क मार्ग के द्वारा भी देश के अन्य राज्यों से बहुत अच्छे से जुड़ा हुआ है। आप उज्जैन अपनी गाड़ी से भी आ सकते हैं। 2. मैहर माता मंदिर सतना (Maihar Mata Temple Satna) त्रिकूट पर्वत की ऊंचाइयों पर स्थित मैहर मंदिर की कहानी आदिशक्ति सती के आत्मदाह से जुड़ी हुई है। देश के 108 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ (Shaktipeeth) त्रिकूट पर्वत के इस पहाड़ी पर भी स्थित है। जिस स्थान पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया है। बताया जाता है कि इस स्थान पर माता का हार टूट कर गिरा था, इसलिए इस जगह को मैहर का नाम दिया गया। यह मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिला के त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। जहां तक पहुंचाने के लिए भक्तों को पहाड़ी पर चढ़ाई करनी होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे भारत में माता शारदा का यह इकलौता मंदिर है। इस मंदिर में माता शारदा के साथ ही अन्य देवी देवताओं की पूजा भी की जाती है। 3. खजुराहो (Khajuraho) इस स्थान को मध्य प्रदेश का सम्मान माना जाता है। यह वही स्थान है जहां आपको विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों से समृद्ध मंदिरों का समूह देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश का खजुराहो भारत के प्राचीन कालीन इतिहास को बखूबी बयां करता है। खजुराहो के मंदिरों के समूह का निर्माण आज से लगभग 1300 साल पहले हुआ था। मंदिरों पर बनाई गई कलाकृतियां यह दर्शाती हैं कि हमारा भारत आज से हजार साल पहले भी कितना मॉडर्न (modern) था।खजुराहो में आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम (Archaeological Museum) है, जहां आपको कई सारे छोटे बड़े मंदिरों का समूह देखने को मिलेंगे। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम के इस एरिया को पश्चिमी मंदिर समूह के नाम से भी जाना जाता है। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में जैसे ही आप इंटर करेंगे आपको बहुत ही खूबसूरत से गार्डन से होकर गुजर कर जाना होगा। यहाँ के मंदिरों में कंदरिया मंदिर, मतंगेश्वर मंदिर, लक्ष्मण मन्दिर, विश्वनाथ मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर और विष्णु गुप्त मंदिर प्रमुख हैं। 4. भोपाल (Bhopal) इस शहर को महाराजा भोज की नगरी के नाम से जाना जाता है। यह शहर आज के समय में मध्य प्रदेश की राजधानी है और इस शहर को एक अच्छा टूरिस्ट डेस्टिनेशन माना जाता है। क्योंकि यहां के टूरिस्ट प्लेसेस इतने बेहतरीन हैं कि यहां आने वाले लोगों को यही का हो कर रह जाने का मन करने लगता है। अगर आपको भी कभी मौका मिले मध्य प्रदेश जाने का तो आप एक बार भोपाल जरुर विजिट करें। (Visiting places of Bhopal) भोपाल की घूमने लायक जगहों की सूची में अपर लेक (Upper Lake), वन विहार (Van Vihar), सैर सपाटा (Sair Sapata), गौहर महल (Gauhar Mahal), मध्य प्रदेश ट्राईबल म्यूजियम (Madhya Pradesh Tribal Museum), पीपल्स मॉल (People’s Mall), भीमबेटका की गुफ़ाएँ (Bhimvetka caves), ताज उल मस्जिद (Taj ul Masjid) और सांची स्तूप (Sanchi Stupa) का नाम आता है। 5. कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है। बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचे (How to reach Kuno National Park) ग्वालियर एयरपोर्ट कूनो नेशनल पार्क के सबसे नजदीक स्थित एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट देश के अन्य शहरों जैसे दिल्ली, कोटा, पटना, जयपुर आदि से भली भांति जुड़ा हुआ है। दिल्ली एयरपोर्ट से ग्वालियर के लिए फ्लाइट लगभग ₹2000 से ₹3000 तक की आती है। आप नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से भी ग्वालियर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप बाय रोड भी कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं।

Category Destination Travel

मध्य प्रदेश के सतना में स्थित है एक ऐसा शक्तिपीठ, जहां गिरा था माता सती का हार

  • 0 Comments

त्रिकूट पर्वत की ऊंचाइयों पर स्थित मैहर मंदिर की कहानी आदिशक्ति सती के आत्मदाह से जुड़ी हुई है। देश के 108 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ (Shaktipeeth) त्रिकूट पर्वत के इस पहाड़ी पर भी स्थित है। जिस स्थान पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया है। बताया जाता है कि इस स्थान पर माता का हार टूट कर गिरा था, इसलिए इस जगह को मैहर का नाम दिया गया। यह मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिला के त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। जहां तक पहुंचाने के लिए भक्तों को पहाड़ी पर चढ़ाई करनी होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे भारत में माता शारदा का यह इकलौता मंदिर है। इस मंदिर में माता शारदा के साथ ही अन्य देवी देवताओं की पूजा भी की जाती है। क्या है पूजा की विधि व्यवस्था? (What are the rituals of worship?) जब आप त्रिकूट पहाड़ी के गेट पर जाएंगे तो वहीं आपको ढेर सारे पूजा के समान बिकते हुए नजर आएंगे। आप वहां से माता के लिए चुनरी, फुल और प्रसाद खरीद सकते हैं। पूजा के लिए आवश्यक सामग्रियों को खरीदने के बाद आप आगे की ओर बढ़ सकते हैं। जहां से मंदिर के लिए चढ़ाई शुरू होती है। त्रिकूट पहाड़ी के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है। साथ ही दंडवत प्रणाम करते हुए माता तक पहुंचने की अभिलाषा (Desire) रखने वाले भक्तों के लिए भी रास्ता बनवाया गया है। अगर बात करें सीढ़ियों के संख्या की तो मैहर माता मंदिर पहुंचने के लिए आपको 1000 से भी ज्यादा सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ेगी। मंदिर पहुंचकर आपको पूजा करने में कितने घंटे का समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस समय यहां माता के दर्शन के लिए जाते हैं और आए हुए श्रद्धालुओं की संख्या कितनी है। मैहर माता मंदिर में दूर-दूर से भक्तजन (Devotees) पूजा करने के लिए आते हैं। इसलिए यहां श्रद्धालुओं (devotees) की संख्या हमेशा ही अधिक होती है। लेकिन साल के दोनों ही नवरात्रियों में यहां भक्तों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। अगर आप शांति से पूजा अर्चना करना चाहते हैं तो आप त्यौहार के दिनों में यहां जाना अवॉयड (avoid) कर सकते हैं।मंदिर से नीचे उतरने के बाद आप वहीं कहीं आसपास खाना खा सकते हैं। क्योंकि पहाड़ी के तलहटी में बहुत सारे खाने की दुकान भी लगे हुए हैं। जहां लगभग डेढ़ सौ रुपए में एक आदमी बहुत ही अच्छे से खाना खा सकता है। घूमने में कितना समय लगेगा? (How much time will it take to travel?) इस मंदिर के लिए चढ़ाई में आपको लगभग 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। वहां पूजा करने में आपको एक से डेढ़ घंटे का समय लग सकता है। साथ ही पहाड़ी से नीचे उतरने में आपको डेढ़ से 2 घंटे का समय लग सकता है। अगर मोटे तौर पर कहा जाए तो आपको पूरे मंदिर घूमने और पूजा करने में लगभग 6 से 7 घंटे का समय लग सकता है। कैसे पहुंचे? (How to reach?) यह मंदिर मध्य प्रदेश राज्य के सतना जिले के त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। जहां तक आप बाय रोड बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से भी मैहर आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप दिल्ली से मैहर के लिए जाना चाहते हैं तो दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आपको ट्रेन मिल जाएगी।हवाई मार्ग द्वारा मैहर पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले मध्य प्रदेश के जबलपुर हवाई अड्डे तक पहुंचना होगा। मध्य प्रदेश का जबलपुर हवाई अड्डा देश के अन्य हवाई अड्डों से अच्छे तरीके से कनेक्टेड है। जबलपुर हवाई अड्डा पहुंचकर आपको 165 किलोमीटर दूरी तय करके मैहर पहुंचना होगा। जिसके लिए आप किसी भी टैक्सी या फिर बस का सहारा ले सकते हैं।

Category Destination Travel

अद्भुत वास्तुकला को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं खजुराहो के मंदिर

  • 0 Comments

खजुराहो इस स्थान को मध्य प्रदेश का सम्मान माना जाता है। यह वही स्थान है जहां आपको विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों से समृद्ध मंदिरों का समूह देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश का खजुराहो भारत के प्राचीन कालीन इतिहास को बखूबी बयां करता है। खजुराहो के मंदिरों के समूह का निर्माण आज से लगभग 1300 साल पहले हुआ था। मंदिरों पर बनाई गई कलाकृतियां यह दर्शाती हैं कि हमारा भारत आज से हजार साल पहले भी कितना मॉडर्न (modern) था। कहते हैं मॉडर्निटी (modernity) कपड़ों से नहीं आती, मॉडर्निटी सोच में होनी चाहिए और वही मॉडर्निटी आज से हजार साल पहले के भारत के लोगों में भी थी। जिसके कारण भारत उस समय दुनिया में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। आईए जानते हैं खजुराहो के मन्दिर समूहों के बारे में। खजुराहो की मूर्तियाँ (sculptures of khajuraho) 1. कंदरिया मंदिर (Kandariya Temple) 2. चित्रगुप्त मंदिर (Chitragupta Temple) 3. विश्वनाथ मन्दिर(Vishwanath Temple) कैसे पहुंचे खजुराहो?(How to reach khajuraho) खजुराहो में कहां ठहरे? (Where to stay in Khajuraho?) खजुराहो की मूर्तियाँ (sculptures of khajuraho) खजुराहो में आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम (Archaeological Museum) है, जहां आपको कई सारे छोटे बड़े मंदिरों का समूह देखने को मिलेंगे। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम के इस एरिया को पश्चिमी मंदिर समूह के नाम से भी जाना जाता है। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में जैसे ही आप इंटर करेंगे आपको बहुत ही खूबसूरत से गार्डन से होकर गुजर कर जाना होगा। यहाँ के प्रमुख मंदिरों में कंदरिया मंदिर, मतंगेश्वर मंदिर, लक्ष्मण मन्दिर, विश्वनाथ मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर और विष्णु गुप्त मंदिर का नाम आता है। 1. कंदरिया मंदिर (Kandariya Temple) कंदरिया मंदिर यहां की सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। जो यहां की सबसे ऊंची और बड़ी मंदिर है। यह यहां की इकलौती ऐसा मंदिर जिसके दो तोरण प्रवेश द्वार हैं। साथ ही साथ यह मंदिर इसलिए भी और खास हो जाता है क्योंकि यहां के दीवारों पर काम कला को प्रदर्शित करती हुई कुछ मूर्तियां उकेरी गई हैं। यहां के दीवारों में आपको शिकार करते हुए लोगों की, मूर्तियों नाचते हुए लोगों की, हाथियों और घोड़ों की और भी न जाने कई प्रकार की मूर्तियां के उकेरी गई हैं। इस मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के राजा विद्याधर ने करवाया था।इस मंदिर को कंदरिया महादेव के नाम से भी जाना जाता है। 2. चित्रगुप्त मंदिर (Chitragupta Temple) बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कंदरिया महादेव मंदिर के निर्माण से भी पहले हुआ था। इस मंदिर में कंदरिया महादेव मंदिर से अलग तरह की नकाशियां की गई हैं। इस मंदिर में जगह-जगह दीवारों पर विष्णु जी की कलाकृतियों को उकेरा गया है। साथ हीं आपको इस मंदिर में अन्य देवी देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां भी देखने को मिलेंगी। अगर आप इस मंदिर के अंदर जाएंगे तो अंदर मंडप भी देखने को मिलेगा। साथ ही आपको चित्रगुप्त जी की मूर्ति भी देखने को मिलेगी। यह खजुराहो का इकलौता ऐसा मंदिर है जो कि सूर्य भगवान को समर्पित मंदिर है। 3. विश्वनाथ मन्दिर(Vishwanath Temple) कंदरिया मंदिर और चित्रगुप्त मंदिर के ठीक सामने स्थित है- विश्वनाथ मंदिर। इस मंदिर का नाम विश्वनाथ मंदिर इसलिए है, क्योंकि इस मंदिर में एक शिवलिंग है। जिसके कारण इसको विश्वनाथ महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि सन 1002 में राजा धन द्वारा शिव मार्केटेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया गया था। इस मंदिर के ठीक सामने नंदी की प्रतिमा विराजमान है। कैसे पहुंचे खजुराहो?(How to reach khajuraho)खजुराहो पहुंचने के लिए खजुराहो का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन खजुराहो रेलवे स्टेशन है। जो कि मुख्य शहर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। साथ ही खजुराहो में खजुराहो का एक हवाई अड्डा भी है। लेकिन यहां सिर्फ दिल्ली से एक फ्लाइट आती है। अगर आप बाय रोड खजुराहो जाना चाहते हैं तो यह भी एक बहुत ही अच्छा ऑप्शन है। खजुराहो सड़क मार्ग के द्वारा देश के अन्य भागों से बहुत हीं अच्छे तरीके से कनेक्ट है। खजुराहो में कहां ठहरे? (Where to stay in Khajuraho?) खजुराहो में ठहरने के लिए बहुत सारे ऑप्शंस हैं। आप यहां होम स्टेज, रिजॉर्ट, हॉस्टल आदि देख सकते हैं। आप अपने बजट के हिसाब से अपने स्टे के लिए ऑप्शन का चुनाव कर सकते हैं। यहां आपको हर प्राइस रेंज में होटल और हॉस्टल्स में रूम मिल जाएंगे।

Category Destination Travel Uttarakhand

जन्नत का दूसरा नाम है वैली ऑफ फ्लावर्स

  • 0 Comments

“क्या आपने कभी किसी ऐसे जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितना खूबसूरत होगा वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी? ….और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे?” यह सब पढ़ कर आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि मैं ऐसा क्यों सोचूं? वैसी जगह थोड़ी ना एक्जिस्ट करती है! तो मेरे दोस्तों यह जगह सच में एक्जिस्ट करती है, वह भी भारत में। यह जगह है उत्तराखंड की वैली ऑफ़ फ्लावर!आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस खूबसूरत से जगह के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं- क्या है वैली ऑफ़ फ्लावर?( what is valley of flower?) वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। कैसे पहुंचे वैली ऑफ फ्लावर? (How to visit valley of flowers? ) बद्रीनाथ से 25 किलोमीटर पहले एक जगह पड़ता है, जिसका नाम है गोविंद घाट। जहां अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा का संगम होता है। गोविंद घाट से आपको फूलों की घाटी जाने के लिए पहले आपको पुलना गांव जाना होगा। पुलना गांव जाने के लिए आप शेयरिंग टैक्सी भी ले सकते हैं। पुलना पहुंचने के बाद आपको घांगरिया के लिए पैदल ट्रैकिंग करना होगा। लेकिन घांगरिया के लिए निकलने से पहले आप पुलना में ही रुक कर वैली ऑफ फ्लावर के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा ले। रजिस्ट्रेशन के बाद आप घांगरिया के लिए निकल सकते हैं।अगर आप अपने बाइक या फिर कार से आ रहे हैं तो पुलना में आपको छोटे-छोटे होमस्टे, ढाबे और मोटरसाइकिल या कार की पार्किंग मिल जाएगी। पुलना से घांगरिया लगभग 10 किलोमीटर दूर है और इसकी चढ़ाई आपको पैदल ही करनी होगी।थकान तो बहुत होगी, लेकिन यकीन मानिए इस ट्रैकिंग के रास्ते में आने वाले खूबसूरत नजारे देख कर आप खुद को आगे बढ़ने से रोक नहीं पाएंगे। ये रास्ते इतनी खूबसूरत होते हैं कि आपको पहले से ही एक्साइटमेंट होने लगेगी कि अगर रास्ता इतना खूबसूरत है तो मंजिल कितना खूबसूरत होगा? और यकीन मानिए, जब आप फूलों की घाटी तक पहुंचेंगे तो आपको लगेगा कि आप किसी जन्नत में उतर आए हैं। घांगरिया के रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम का एक बाजार मिलेगा। जो एक बहुत ही छोटा सा बाजार है। जिसके बाद फिर जब आप आगे बढ़ेंगे तो आपको भ्युवदार गांव से गुजरना होगा। यह गांव इस ट्रैक का एक इंपॉर्टेंट पॉइंट माना जाता है। जहां आपको कई सारे ढाबे देखने को मिल जाएंगे। आप यहां कुछ देर रुक कर लंच कर सकते हैं और थोड़ा रेस्ट कर सकते हैं। इस गांव को क्रॉस करते हुए हीं आप लक्ष्मण गंगा को पार करेंगे।पुलना से भ्युवदार गांव के रास्ते में आपको पानी लेकर चलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। क्योंकि इस रास्ते में जगह-जगह मिनरल वाटर के नल लगाए गए हैं। जहां से आप पानी पी सकते हैं। लेकिन भ्युवदार गाँव से आगे आपको सीधा घांगरिया पहुंचने पर ही पानी मिलेगा। इसीलिए आप घांगरिया के लिए निकलने से पहले आप अपने साथ पानी का बोतल रख ले। ट्रैकिंग का समय (Timing of treckking)घंगारिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और सुबह के 7:00 बजे से दोपहर के 12:00 बजे के तक हीं यहां से आगे की ट्रैकिंग के लिए रास्ता खुला होता है। 12:00 बजे के बाद घंगारिया से फ्लावर वैली के लिए आपको ट्रैकिंग करने नहीं दिया जाएगा। इसीलिए आपको घंगारिया पहुंचकर उस दिन वहीं रुकना होगा। घांगरिया में आपको बहुत सारे होटल और टेंट्स भी रहने के लिए मिल जाएंगे। घांगरिया से आप अगले दिन सुबह 7:00 बजे के बाद फ्लावर वैली के लिए निकल सकते हैं। पुलना से घांगरिया का रास्ता जितना खूबसूरत है, घांगरिया से फ्लावर वैली का रास्ता उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो जाता है। जब आप घांगरिया से निकलेंगे तो आपको बहुत ही जल्दी ग्लेशियर दिखने शुरू हो जाएंगे। जैसे-जैसे आप फूलों की घाटी की ओर बढ़ेंगे, आपको रास्ते में कई सारे झरने और देवदार के पेड़ देखने को मिलेंगे। देवदार पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला एक ऐसा पेड़ है जिसके छाल से पुराने जमाने में भोजपत्र बनाए जाते थे। इस फ्लॉवर वैली में खास क्या है? (What’s special in this valley of flower?) बेस्ट टाइम टू विजिट (Best time to visit) वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है।

Destination Haryana Travel

Delhi-NCR में रहने वाले लोगों के हैंगआउट के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन है फरीदाबाद

  • 0 Comments

अगर आप दिल्ली एनसीआर में रह रहे हैं और अपने वीकेंड पर  किसी ऐसे विजिटिंग प्लेस को एक्सप्लोर करना चाहते हैं जहां आपको हिल स्टेशन वाली वाइब आ जाए और वह जगह दिल्ली एनसीआर से नजदीक भी हो तो फरीदाबाद आपके लिए सबसे बेस्ट विजिटिंग ऑप्शन हो सकता है। क्योंकि यह शहर दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) का हिस्सा है और एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।अगर आप भी फरीदाबाद जाना चाहते हैं तो फरीदाबाद में घूमने लायक जगह के बारे में जानना आपके लिए बहुत ही जरूरी है। इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि फरीदाबाद की कौन सी ऐसी जगहें हैं जहां आप अपने पिकनिक के लिए या फिर वीकेंड (weekend) के लिए जा सकते हैं। फरीदाबाद के बारे में अगर बात की जाए तो यह एक इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) है और बीते कुछ सालों में एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर रहा है। अब तो इस शहर को मिनी हिल स्टेशन भी कहा जाने लगा है। फरीदाबाद के मुख्य पर्यटन स्थलों की सूची निमनांकित हैं : 1. राजा नाहर सिंह पैलेस (Naharsingh’s palace) इस पैलेस को फरीदाबाद आने वाले पर्यटकों का सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन भी कह सकते हैं। इस पैलेस को बल्लभगढ़ पैलेस (Ballabhgarh Palace) के नाम से भी जाना जाता है। यह पैलेस बहुत हीं विशाल तथा खूबसूरत है। इस पैलेस का निर्माण राजा नाहर सिंह के पूर्वज राजा राम बलराम जी ने करवाया था। राजा नाहर सिंह एक शक्तिशाली योद्धा थे जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान दे दी थी। इस महल में कार्तिक संस्कृति उत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं। इस कार्यक्रम में बहुत तरह के संगीत और कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जाता है। यह महल इतना खूबसूरत है कि यहां कई सारे फिल्मों और गानों की शूटिंग भी हुई है। 2. इस्कॉन टेंपल फरीदाबाद (Isckon temple faridabad) फरीदाबाद के सेक्टर 36 में स्थित इस्कॉन मंदिर (iskcon temple) कृष्ण भक्तों के लिए आस्था का एक पवित्र केंद्र है। जहाँ दूर दूर से पर्यटक पूजा करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को गोविंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बाहर से देखने में जितना खूबसूरत है, अंदर से इसका माहौल उतना ही शांत सुकून देने वाला है। यह मंदिर फरीदाबाद मेन सिटी से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भगवान श्री कृष्ण और राधा को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर हर समय श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा हुआ होता है। अगर आप भी फरीदाबाद आ रहे हैं तो इस्कॉन टेंपल फरीदाबाद को विजिट करना ना भूलें। 3. सूरजकुंड (Surajkund)दसवीं शताब्दी में बने इस सूरजकुंड का निर्माण तोमर वंश के राजा सूरजपाल द्वारा करवाया गया था। यह फरीदाबाद से केवल 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शानदार जगह है। जहां आप पिकनिक मनाने के लिए जा सकते हैं। यहां सामान्य दिनों में बहुत ही शांति होती है। आप सूरजकुंड आकर यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित सूर्य मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं। यूं तो सामान्य दिनों में सूरजकुंड बहुत ही शांत होता है, लेकिन मेले के समय यहां लोगों की चहल कदमी बढ़ जाती है। यहां लगने वाले इंटरनेशनल आर्ट एंड क्राफ्ट मेला (International Art and Craft Fair) की वजह से सूरजकुंड को पूरी दुनिया में जाना जाने लगा है। हर साल यहां इस मेले में अलग-अलग देशों से आने वाले लोग अपनी कलाकृतियों को दुनिया के सामने पेश करते हैं। अगर आप सूरजकुंड जाना चाहते हैं तो इसका सबसे सही समय इंटरनेशनल आर्ट एंड क्राफ्ट मेले का समय होता है। क्योंकि इस समय यहां पर्यटकों को अलग-अलग देशों के संस्कृतियों को जानने का मौका मिलता है और उनके आर्ट एंड क्राफ्ट्स को खरीदने का अवसर मिलता है। साथ ही साथ इस मेले में पर्यटकों को अलग-अलग देशों के पकवानों का जायका लेने का भी अवसर प्राप्त होता है। 4. टाउन पार्क (Town park) फरीदाबाद के सबसे फेमस पार्क के तौर पर जाना जाने वाला यह पार्क फरीदाबाद के सेक्टर 12 में स्थित है। यह पार्क बहुत हीं बड़ा और सुंदर भी है। यहां बच्चों और बड़ों सभी के लिए मनोरंजन के बहुत सारे साधन उपलब्ध हैं। इस पार्क में बहुत सारे झूले लगे हुए हैं, जहां फ्री और पेड दोनों तरह की राइड्स (Free Pads and Rides) का मजा लिया जा सकता है। इस पार्क की सबसे खास बात यह है कि इस पार्क में एक फ्लोरल क्लॉक बनी हुई है। जिसे फूलों से बनाया गया है और जो यहाँ की शोभा में चार चांद लगाने का काम करती है। अगर आप फरीदाबाद आ रहे हैं तो आप इस जगह को अपने विजिटिंग प्लेस की लिस्ट में डेफिनेटली ऐड करें।

Category Culture Destination Food Travel Uttar Pradesh

मन को मोह लेते हैं मोक्ष नगरी बनारस के ये खूबसूरत घाट

  • 0 Comments

1. गंगा घाट (Ganga Ghaat)अब क्योंकि यह शहर नदी के किनारे बसा हुआ है इसलिए यहां 80 से भी अधिक घाट हैं और इसे घाटों का शहर भी कहते हैं।अगर बात करें यहां के प्रमुख घाटों की तो उनमें दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, पंच गंगा घाट आदि प्रमुख हैं। (i) मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat)मणिकर्णिका घाट को शमशान स्थल के रूप में भी जाना जाता है। जहां हर साल रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन चिता के भस्म से होली खेली जाती है, जिसे मसान होली या भस्म होली के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है की महादेव स्वयं अपने गणों के साथ उस दिन होली खेलते हैं। (ii) दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat)यहां का दशाश्वमेध घाट बनारस की सबसे प्रसिद्ध घाटों में से एक है। मान्यता है कि आदि काल में ब्रह्मा जी ने यहां 10 अश्वमेध यज्ञ करवाया था। जिसके कारण इसे दशाश्वमेध घाट के नाम से जाना जाने लगा। इसे बनारस के सबसे पुराने घाट के रूप में भी जाना जाता है। (iii) अस्सी घाट (Assi Ghat)अस्सी घाट बनारस का दक्षिणतम घाट है जो आगंतुकों और विदेशी पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। यह बनारस के सबसे खूबसूरत घाटों में से एक माना जाता है। 2. गंगा आरती (Ganga Aarti)गंगा घाट की बात हो और गंगा आरती का जिक्र ना हो भला ऐसा हो सकता है?जब यहां के घाटों पर संध्या के समय गंगा आरती होती है तब, चारों ओर हो रहे शंखनाद, गंगा की कलकल बहती धारा, ठंडी हवा के झोंके और मंत्र उच्चारण की मधुर ध्वनि वातावरण में एक अलग ही प्रकार की सकारात्मकता का प्रसार करती है। जिसके कारण यहां आने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, और कई खास मौकों पर तो यहां पैर रखने का भी जगह नहीं होता है।यहां के घाट नदियां और यहां के प्राचीन मंदिर, प्रकृति और संस्कृति के एक अद्भुत समन्वय को दर्शाती है। यही वजह है कि बनारस सिर्फ घाटों ही नहीं बल्कि अपने गंगा आरती के लिए भी सुप्रसिद्ध है। काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple)भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग भी बनारस में ही स्थित है। जिसे काशी विश्वनाथ के नाम से भी जाना जाता है।काशी विश्वनाथ दशाश्वमेघ घाट के निकट स्थित है और श्रद्धालु दशाश्वमेध घाट के पानी में डुबकी लगाकर महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर जाया करते हैं। कुछ समय पहले तक घाट और मंदिर के बीच में भवनों के बन जाने के कारण घाट से मंदिर जाना कठिन होता था। लेकिन हाल ही में यहां गंगा कॉरिडोर के निर्माण हो जाने के बाद गंगा नदी से मंदिर पूरी तरह जुड़ गया है।मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ वास किया था। इस मंदिर का इतिहास भी काफी चर्चा और विवाद का विषय रहा है क्योंकि इसे बार-बार तोड़ा और बनाया गया। वर्तमान के मंदिर को रानी अहिल्याबाई ने मंदिर के बचे अवशेषों के साथ 1770 ईस्वी में बनवाया था। जिसके बाद 1835 में राजा रंजीत सिंह ने इसके गुंबद को सोने से मंडवा दिया था जो इस मंदिर को और भी आकर्षक बनाता है। 3. रामनगर का किला (Ramnagar Fort)घाटों और मंदिरों के अतिरिक्त यहां एक बेहद खूबसूरत 18वीं शताब्दी का रामनगर का किला भी है, जिसकी शिल्प कला मुगल शिल्प का बेहतरीन उदाहरण पेश करती है। 4. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University)बनारस सिर्फ संस्कृति के क्षेत्र में आगे नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत आगे है और इसका जीता जागता उदाहरण है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जिसे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है। इस की स्थापना स्वतंत्रता पूर्व ही हुई थी। जिसकी नींव पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा रखी गई थी। इसके स्थापना में एनी बेसेंट का भी बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भारत के सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है। इस विश्वविद्यालय को “राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान” का दर्जा प्राप्त है। इस विश्वविद्यालय के दो परिसर हैं, जिनमें मुख्य परिसर वाराणसी में स्थित है। इसके परिसर में हाल ही में एक नए काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना की गई है। जो लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। 75 छात्रावासों के साथ यह विश्वविद्यालय एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है। 5. बनारस का खान पान (food of banaras)बनारस के खानपान भी बाकी शहरों से काफी अलग हैं। यहां के बनारसी पान और मलइयो की तो बात ही अलग है। यहां के सबसे प्रसिद्ध व्यंजन में से एक है टमाटर चाट, जो आपको बनारस की गलियों में कहीं भी मिल जाएगा। चाट का खट्टा मीठा और तीखा स्वाद आपको उंगलियां चाटने पर मजबूर हो जाएंगे। बनारस आने का सबसे सही समय (Best time to visit Banaras)यूं तो आप बनारस कभी भी जा सकते हैं यह शहर हर समय हर मौसम में आने वाले पर्यटकों का भी खोलकर स्वागत करता है लेकिन महाशिवरात्रि और देव दीपावली के अवसर पर यहां जाना आपके लिए सबसे वर्थईट साबित होगा।अगर बात महाशिवरात्रि की हो तो इस दिन भारत के कोने कोने से महादेव के भक्त बनारस आकर काशी विश्वनाथ के दर्शन और गंगा स्नान करते हैं। यूं तो बनारस की गलियों में गंगा आरती को लेकर हर दिन ही भीड़ होती है, लेकिन महाशिवरात्रि एक ऐसा दिन है जिस दिन यहां अन्य दिनों के मुकाबले कई गुनी हो जाती है। पुराणों के अनुसार इस नगरी का महादेव के साथ विशेष संबंध रहा है। इसलिए शिव भक्तों के लिए यह शहर किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। इस दिन भी विवाह उत्सव से पहले बाबा विश्वनाथ को हल्दी लगाई जाती है और मंगल गीत गाए जाते हैं। शाम के समय भगवान शिव को हल्दी लगाते देखने के लिए श्रद्धालुओं में बेहद उत्साह होता है। इसके बाद शिव की बारात निकलती है। बनारस में देव दिवाली(Dev Diwali in Banaras)अगर यहां के देव दीपावली की बात की जाए तो यहां गंगा किनारे घाटों पर जलाए जाने वाले दियों और घाटों पर चलने वाले लेजर शो बनारस की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। देव दीपावली दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। आस्था के पर्व के

Category Destination Travel Uttarakhand

आईए जानते हैं देश के योग कैपिटल ऋषिकेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के बारे में

  • 0 Comments

ऋषिकेश भारत का एक ऐसा शहर है जहां के कण-कण में अध्यात्म बसता है। ऋषिकेश की पावन धरती पर आते हीं आपको ऐसा एहसास होगा की इससे ज्यादा सुकून तो कहीं और हो ही नहीं सकता है। पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ यह शहर, अपने शांत और खूबसूरत माहौल के लिए जाना जाता है। यहां आपको हर ओर सिर्फ पॉजिटिविटी हीं नजर आएगी और यहाँ आने के बाद आपका स्ट्रेस तुरंत छूमंतर हो जाएगा।आज के इस ब्लॉग में हम आपको इसी शहर के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं इस शहर के बारे में:- भारत के योगा कैपिटल के नाम से मशहूर इस शहर में घूमने लायक बहुत सी ऐसी जगहें हैं जहां जाने के बाद आपको वापस लौटने का बिल्कुल मन भी नहीं होगा। ऐसे हीं कुछ दूर प्लेसेस के नाम नीचे दिए गए हैं। 1. शिव प्रतिमा (Statue of Shiva)2. नीलकंठ महादेव मन्दिर (Neelkanth Mahadev temple)3. नीलगढ़ वाटरफॉल्स (Neelgarh waterfalls)4. बीटल्स आश्रम (Beatles Ashram)5. त्रंबकेश्वर मंदिर (Triyambkeshwara temple)6. भरत मंदिर (Bharat mandir)7. त्रिवेणी घाट की आरती (Ganga aarti of Triveni ghaat)8. ऋषिकुंड (Rishi kund)9. लक्ष्मण झूला (laxman jhoola) शिव प्रतिमा (Statue of Shiva)ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में भगवान शिव की बहुत बड़ी प्रतिमा है। जहाँ भगवान शिव ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए हैं और इस मूर्ति की खास बात यह है कि यह मूर्ति गंगा नदी में बनी हुई है। जिसके कारण यह और भी अनोखी प्रतीत होती है। बहती गंगा के धारा के बीच में स्थित विशालकाय शिव की प्रतिमा को देखकर आने वाले पर्यटकों का भी मन योगा की और आकर्षित हो जाता है। परमार्थ निकेतन आश्रम से जब आप इस मूर्ति को देखेंगे तो आपको बहुत हीं अलौकिक और अद्भुत एहसास होगा। परमार्थ निकेतन का यह भाग बहुत ही खूबसूरत और मनमोहक है। जब आप परमार्थ निकेतन में प्रवेश करेंगे तो आपका मन खुद-ब-खुद शांत हो जाएगा और आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। आश्रम जितना शान्त है उतना ही ज्यादा खूबसूरत भी है। इसीलिए दूर दूर से पर्यटक इस स्थान पर घूमने के लिए आते हैं। नीलकंठ महादेव मन्दिर (Neelkanth Mahadev temple)ऋषिकेश के नजदीक स्थित चित्रकूट पर्वत पर बना यह मंदिर हजारों साल पुराना है। पुरानी कथाओं के अनुसार ऋषिकेश के इसी स्थान पर महादेव ने समुंद्र मंथन से निकले हलाहल को पिया था और उनका शरीर नीला हो गया था। यही कारण है कि इस मंदिर को नीलकंठ महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि यह मन्दिर तीन पर्वतों से घिरा हुआ है। जिनका नाम है- मनिकुट, विष्णुकुट और ब्रह्मकुट। इस मंदिर का आर्किटेक्चर बहुत हीं कलरफुल है। जब आप इस मंदिर में एंटर करेंगे तो आपको सबसे पहले समुंद्र मंथन का दृश्य दिखेगा। जिसमें नागराज वासुकी को रस्सी बनाकर देवता और दानव समुंद्र का मंथन कर रहे होते हैं। ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर कि दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। अगर आप नीलकंठ महादेव मंदिर जाना चाहते हैं तो कोशिश करें कि आप 6:00 बजे तक इस मंदिर में पहुंच जाएं। ताकि आप यहां सुबह की आरती में हिस्सा ले सके। नीलगढ़ वाटरफॉल (Neelgarh waterfall) तीन वॉटर फॉल्स को मिलाकर बना हुआ यह वाटरफॉल ऋषिकेश के सीक्रेट वाटरफॉल के नाम से भी जाना जाता है। यह वाटरफॉल इतना खूबसूरत है कि इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। जंगलों से घिरे हुए इस वाटरफॉल की खास बात यह है कि यहां का पानी इतना क्लीयर है कि आप वाटरफॉल के नीचे की जमीन को भी साफ साफ देख सकते हैं। अगर आप ऋषिकेश घूमने आ रहे हैं तो इस वाटरफॉल को विजिट करना बिल्कुल ना भूलें।यहाँ पहुँचने के लिए 1-1.5 किलोमीटर की ट्रैकिंग भी करनी पड़ती है। लेकिन आपका यह सफर बहुत हीं खूबसूरत होने वाला है। साथ ही रास्ते में आपको दो ब्रिज क्रॉस करने होंगे। झांसी दिखने वाला नजारा इतना खूबसूरत होता है कि आप एक पल को सब कुछ भूल कर खुशी पल में हो जाएंगे। इस वॉटर फॉल तक पहुंचने के लिए आपको ऋषिकेश बस स्टैंड से 8.5 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ेगा। आप इसके लिए कोई प्राइवेट टैक्सी में बुक कर सकते हैं। अगर आप यहाँ के वॉटर फॉल में जाना चाहते हैं तो यहां जाने का सबसे बेहतरीन समय मॉनसून की ठीक बाद सितंबर या अक्टूबर का होता है। क्योंकि इस समय वाटरफॉल में पानी ज्यादा होता है और आसपास का माहौल भी बहुत हीं खूबसूरत होता है। वहाँ जाने के लिए आप अपने साथ कुछ स्नैक्स, पानी की बॉटल और अपने साथ एक कपड़ा ले जा सकते हैं। ताकि आप इस विज़िट को बहुत अच्छे से एंजॉय कर सके। बीटल्स आश्रम (Beatles Aashram)बीटल्स आश्रम को चौरासी कुटिया के नाम से भी जाना जाता है। यह आश्रम महा ऋषि महेश योगी के विद्यार्थियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर था। इस आश्रम को पहचान तब मिली जब रॉकबैंड द बीटल्स यहां पर मेडिटेशन करने के लिए आए थे। बैंड के लोगों का कहना था कि जो समय उन्होंने यहाँ बिताया वह उनकी लाइफ का सबसे बेस्ट टाइम था और यही पर उन्होंने अपने बहुत से फेमस गाने लिखे। बीटल्स आश्रम 1990 में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के हवाले कर दिया गया था। 2015 में इस आश्रम को पर्यटकों के लिए खोला गया। बिट्स आश्रम में जाने की टाइमिंग सुबह के 10:00 बजे से शाम के 4:00 बजे तक की है। यहां जाने के लिए पर्यटकों को किसी भी प्रकार का टिकट नहीं लेना पड़ता है। यह बिल्कुल फ्री ऑफ कॉस्ट है। त्रंबकेश्वर मंदिर ऋषिकेश (Triyambkeshwara Temple Rishikesh)त्रंबकेश्वर मंदिर को तेरह मंजिला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के हर एक फ्लोर पर अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा की जाती हैं। यह मंदिर लक्ष्मण झूला के बहुत नजदीक है। जहां से आप लक्ष्मण झूला का व्यू देख सकते हैं। साथ हीं इस मंदिर से दिखने वाला गंगा जी का दृश्य बहुत खूबसूरत होता है। यहाँ का वातावरण बहुत शांत है और दिल को सुकून देने वाला है। कुछ किंवदंतियों के अनुसार इस मंदिर को शंकराचार्य द्वारा 8 शताब्दी के आसपास बनवाया था। इस मंदिर के सबसे ऊपर के फ्लोर पर भगवान महादेव की शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर से दिखने