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Delhi Haat -Best Traditional Shopping Place in Delhi 

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हां, बेशक ही आपने दिल्ली हाट के बारे में तो सुना ही होगा, पर क्या आपको पता है दिल्ली में “तीन” हाट हैं। दिल्ली हाट सुनते ही सबके दिमाग में आने लगता है दिल्ली का सबसे लोकप्रिय हाट आई.एन.ए, पर इसके अलावा भी दिल्ली में दो हाट और मौजूद हैं, जनकपुरी और पीतमपुरा। आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे क्यों मशहूर हैं दिल्ली हाट और क्या है इसमें ख़ास। सबसे पहले बात करते हैं दिल्ली के सबसे मशहूर और लोकप्रिय हाट आई.एन.ए की। दिल्ली हाट आई.एन.ए तीनों हाटों में सबसे लोकप्रिय है आई.एन.ए, जहां आपको भारत की अलग-अलग कलाकृतियों की शानदार झलक देखने को मिलेगी। यहां पर आपको चंद मिनटों में पूरे भारत के दर्शन करने को मिलने वाले हैं इसके अलावा यहां पर भारत के विभिन्न क्षेत्रों की कलाओं से बने हैंडमेड आइटम्स को प्रदर्शित करती दुकानें भी मिल जाएंगी। शॉपिंग आइटम्स की बात करें तो फुलकारी दुपट्टा, कश्मीरी शॉल्स, होम डेकॉर आइटम्स, जूलरी, जूत्ती और भी लगभग सभी दुकानें, काफी वैरायटी में यहां आपको आसानी से मिल जाएंगी। इसके अलावा आपको बता दें कि आई.एन.ए मार्किट अलग-अलग फ़ूड वेरायटीज के लिए भी काफी मशहूर है। दिल्ली हाट में मिलने वाला स्वादिष्ट खान-पान ‘दिल्ली हाट’ को ख़ास बनाता है। भारत के कोने -कोने से स्वाद का पिटारा लिए व्यंजनों की दुकानें यहाँ लगी हुई हैं।  पंजाब के ‘मक्के दी रोटी सरसों दा साग’ हो, बंगाल के ‘माछेर-झोल’ और दक्षिण भारत के ‘इडली डोसा’ हो या फिर बिहार के मशहूर लिट्टी-चोखा यहाँ सब कुछ अलग-अलग संस्कृतियों के स्वाद के साथ मौजूद है। आई.एन.ए मार्किट में समय-समय पर काफी प्रोग्राम्स डांस और म्यूजिक जैसे कार्यक्रम भी लगे रहते हैं। आई.एन.ए में एडल्ट्स के लिए एंट्री टिकट 30 रुपए, और बच्चों की टिकट 20 रुपए है। इसके अलावा टाइमिंग की बात करें तो सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक हफ्ते में सातों दिन यह मार्केट खुली रहती है। नियरेस्ट मेट्रो स्टेशन (यल्लो लाइन) दिल्ली हाट आई.एन.ए  है। दिल्ली हाट -जनकपुरी अगर आप दिल्ली हाट बाजार को एक्स्प्लोर करने जा रहे हैं, तो यहां पर आप हैंडमेड क्राफ्ट्स, कपडे, होमडेकोर आइटम्स और स्वादिष्ट खाने का अनुभव ले सकते हैं, पर दिल्ली हाट जनकपुरी अब समय के साथ इसके बिलकुल विपरीत हो चुका है। ये पहले जितना मशहूर था अब उतना ही खाली पड़ा है, अब ना तो यहां पहले जितनी दुकानें हैं और ना ही खान-पान की वैराइटी, तो लाज़िम है ज्यादा भीड़ की कोई गुंजाइश ही नहीं। आप जब भी यहां आएं तो ज़हन में यह रखकर आएं कि आपको यहां आकर खाने-पीने और शॉपिंग करने के ज्यादा अलटरनेट नहीं मिलेंगे। एंट्री फीस : यहां 20 रुप्पे एडल्ट्स के लिए और 10 रुप्पे बच्चों के लिए है। नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन : जनकपुरी वेस्ट। दिल्ली हाट- पीतमपुरा दिल्ली हाट पीतमपुरा, नेताजी सुभाष प्लेस में स्थित है जब यहां कोई इवेंट्स होते हैं तो दिल्ली हाट में आपको सौ से भी ज्यादा क्राफ्ट स्टाल्स लगे दिखाई देंगे जहां आपको हैंडमेड और हैंडलूम आइटम्स आदि मिल जाएंगे और आपकी जानकारी के लिए बता दें की समय-समय पर यहां इवेंट्स भी होते रहते हैं। इसके अलावा यहां आपको ज्यादा भीड़ देखने को नहीं मिलेगी। यहां भी एंट्री टिकट और टाइम और हाटों के जैसे ही हैं। लेकिन यहाँ ध्यान देने की बात है कि रोजाना बेसिस में सिर्फ दिल्ली हाट आई.एन.ए में ही आपको दिल्ली हाट की खूबसूरती दिखाई पड़ेगी। क्योंकि यहाँ पर आपको बारह महीनों रौनक दिखाई देगी।

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Sunder Nursery- Best Picnic Spot in Delhi

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शहरों के लोगों को अगर किसी चीज़ की कमी सबसे ज्यादा खलती है, तो वो है “प्राकृतिक सौंदर्य” और दिल्ली में अगर आप ऐसी ही किसी जगह की तलाश में है तो आज आपकी तलाश मुकम्मल हो जाएगी। क्योंकि फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के आज के इस ब्लॉग में हम आपको एक ऐसी ही जगह की जानकारी दे रहे हैं, जोकि नाम से ही सुन्दर है जिसका नाम है “सुन्दर नर्सरी”। हुमायूँ टॉम्ब के सामने स्थित यह नर्सरी एक नर्सरी के साथ-साथ बायो-डाइवर्सिटी पार्क, एक ऐतिहासिक विरासत और एक गार्डन भी है। जहां आप 40 रुपए टिकट देकर प्रवेश कर सकते हैं। नाम से समझ आता है कि यह सिर्फ एक गार्डन हो। पर अंदर जाने पर आपको कुछ अलग ही माहौल देखने को मिलेगा। परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने, दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने और नेचर के करीब जाने के लिए यह जगह बिलकुल परफेक्ट है। (Sunder Nursery) सर्वश्रेष्ठ घूमने लायक जगह टाइम्स मैगज़ीन ने 2018 के अपने सर्वे में सुन्दर नर्सरी को 100 सर्वश्रेष्ठ घूमने लायक जगहों में शामिल किया था। इस नर्सरी का हर ज़र्रा-ज़र्रा इसके बदलाव की तस्वीरों की गवाही देता है। दरअसल यह जगह लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। अर्कोलॉजिकल डिपार्टमेंट के मार्ग दर्शन से इस जगह का पुनर्निर्माण शुरू किया गया। आज यह नर्सरी देखने के लिहाज़ से काफी सुन्दर है। मुग़ल आर्किटेक्चर और बैग-बगीचों से सजी ये नर्सरी लगभग 90 एकड़ में फैली हुई है। आप जब भी यहां आएं तो इस बात को ध्यान में जरूर रख लें कि खूब सारा पैदल चलना पड़ेगा, तभी इसकी नायाब खूबसूरती का आप दीदार कर पाएंगे। सुन्दर बुर्ज एंट्री करते ही सबसे पहले आपको एक मकबरा नज़र आएगा, जिसका नाम सुन्दर बुर्ज है। इस मकबरे की अंधरुनि खूबसूरती का बखान करना मुश्किल है। 13वी सदी की इस मुग़ल कालीन ईमारत के अंदरूनी हिस्से में सफ़ेद चूना पत्थर से सजावट की गई है। पूरा मकबरा कुरान की आयतों से सजा हुआ है। इस बेहतरीन मकबरे के दीदार से सफर की शुरुआत ही काफी शानदार और खूबसूरत होती है। ख़ास बात तो यह है कि यहां आपको जगह-जगह पर इस पूरी नर्सरी की बदलती तस्वीरों को दिखाया गया है। जो इस खूबसूरत छेत्र की हर कहानी को दिखने के लिए जरुरी भी है। चलते-चलते झील के सुन्दर नज़ारे भी आराम से देखने को मिलते हैं। लक्कड़ वाला बुर्ज यकीन मानिये ऐसी खूबसूरत जगह से कोई दिल लगाए बिना तो रह ही नहीं सकता। इस नर्सरी के अंदर आगे चलकर आपको एक और ईमारत दिखाई देगी। जो है 16वी सदी का लक्कड़ वाला बुर्ज। बुर्ज की ख़ास बात यह है कि इसे 2017 में इसकी बनावटी खूबसूरती को देखते हुए विश्वविरासत घोषित कर दिया गया। यह पूरी नर्सरी अलग-अलग खूबसूरत फूलों से सुसज्जित है। इसके अलावा यहाँ आपको जगह-जगह पेड़ों की अलग-अलग प्रजातियां देखने को मिलेंगी। हर पेड़ पर उसका नाम देख कर आप उसकी प्रजाति का पता आप आसानी से लगा सकते हैं। साथ ही साथ यहाँ पक्षियों की भी लगभग 80 तक प्रजातियां संरक्षित हैं। घूमते हुए रस्ते में आपको तरह-तरह के पक्षियों की आवाजें सुनाई देंगी। एक और खास बात यह है कि इस खूबसूरत जगह में बांस के पेड़ों की ओंठ में ठीक झील के सामने आपको एक कैफ़े भी मिल जायेगा। जिससे आपकी पिकनिक या फिर आपका दिन और भी लाजवाब होने वाला है। सोच के देखिये कुदरत की गोद में बैठ कर लंच करने का मज़ा कैसा होगा। इसकी दूसरी तरफ ठीक सामने फूलों से भरी रंगीन नर्सरी भी है। ऐसे में प्रेमी जोड़ों की हस्ते और खिलखिलाते चेहरे किसी का भी दिन मुकम्मल कर देती हैं। जगह-जगह बच्चों के लिए झूलों की व्यवस्था भी की गई है। न केवल युवाओं बल्कि बच्चों और परिवार वालों के लिए भी यह जगह एक बेस्ट पिकनिक स्पॉट साबित होता है। जगह-जगह गार्डन और मकबरों का ऐसा मेला आपको जरा भी बोर नहीं होने देगा। इसके अलावा इसके अंदर एक भूमिगत रंगमंच भी है जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किया जाता है।सुन्दर नर्सरी न सिर्फ बच्चों, एडल्ट्स बल्कि पूरे परिवार सभी के लिए एक बेस्ट स्पॉट माना जाता है। यह सुबह 7 बजे से शाम 10 बजे तक खुला रहता है। जिसमें लास्ट एंट्री 9:30 PM है। इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन जेएलएन या फिर लाजपत नगर है।

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Best Tourist Places in Chandigarh

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भारत की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक चंडीगढ़ Five Colors of Travel यह बात तो सभी जानते हैं कि चंडीगढ़ भारत की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। अगर रहने की बात की जाए तो पूरे भारत में रहने के लिए चंडीगढ़ को बेस्ट प्लेस कहना गलत नहीं होगा क्योंकि यहां शांत वातावरण, हरियाली और भी सुविधा के तौर पर देखें लगभग सब कुछ ही मौजूद है। सबसे अच्छी बात तो यह है चंडीगढ़ में आपको कभी पार्किंग की असुविधा नहीं होगी और यहां की व्यवस्थित सड़कें और साफ सफाई आपको इस जगह का दीवाना बना देगी। तो चलिए आपको यहां की कुछ ऐसी खूबसूरत जगहों (Best Places in Chandigarh) से रूबरू कराते हैं, जिन्हें आपको चंडीगढ़ के ट्रिप के दौरान एक बार तो जरूर एक्स्प्लोर करना चाहिए। सुखना झील सुखना लेक को पूरे चंडीगढ़ की सबसे लाजवाब टूरिस्ट प्लेस में गिना जाता है, और यही कारण है कि यहां पर आपको सबसे ज्यादा टूरिस्ट आपको दिखाई देंगे। सुखना लेक, एक बहुत बड़ी और खूबसूरत लेक है जो कि काफी बड़ी और सुन्दर है। यहां आपको बोटिंग करने का मजा भी आएगा। अगर आप चंडीगढ़ घूमने आएं तो सुखना लेक को एक्स्प्लोर करना बिलकुल ना भूलें क्योंकि यह चंडीगढ़ का बेस्ट टूरिस्ट प्लेस माना जाता है। सुखना लेक चंडीगढ़ सेक्टर 1 में पड़ती है जोकि सेक्टर 17 से 4km. की दूरी पर है। यहां तक आप बस में भी आसानी से आ सकते हैं, या फिर आप ऑटो या अपनी पर्सनल गाड़ी के माध्यम से भी पहुँच सकते हैं। यहां पर आप बच्चों या फिर पूरी फेमिली के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं, तो अगर आप पूरे दिन यहां पिकनिक के लिहाज़ से आएंगे तो यहाँ आपको खाने-पीने की भी सभी सुविधाएं मिल जाएंगी। इसके अलावा यहां आप 200 से लेकर 500 रुपए में अपनी स्केच भी बनवा सकते हैं। सुखना लेक एक काफी सुन्दर जगहों में शुमार हैं, तो इस जगह को जरूर एक्स्प्लोर करें। रोज गार्डन फूलों का दीवाना कौन नहीं होता और फिर बात गुलाब के फूल की हो तो इसके आगे तो पूरी कायनात सर जुखाए खड़ी हो जाती है। फिर चाहे कोई आशिक़ हो या दीवाना। तो चलिए आपको रूबरू करते हैं गुलाब के एक ऐसे बाग़ से जिसमें गुलाब के फूल की एक हज़ार स्पीशीज आपको देखने को मिल जाएगी। इस प्रमुख पर्यटन स्थल को जाकिर हुसैन रोज गार्डन भी कहा जाता है। रोज गार्डन को 1967 में चंडीगढ़ के फर्स्ट चीफ कमिश्नर डॉ. एम् एस रंधावा जी ने बनवाया था। रोज गार्डन 30 एकड़ की जमीन में फैला हुआ है, जिसमें एक हज़ार से भी ज्यादा रोज की स्पीशीज देखने को मिलती है। यहां आपको हर एकपौधे के नीचे उनकी स्पीशीज का नाम भी लिखा गया है। यहां विजिट करने का बेस्ट समय है फरवरी और मार्च। यह गार्डन जन मार्ग, 16 बी, सेक्टर16 में स्थित है। रॉक गार्डन रॉक गार्डन सुखना झील के पास ही मौजूद है, जिसमें आपको काफी कुछ इंट्रेस्टिंग देखने को मिलेगा, और वेस्ट चीज़ो से किस तरह सजावटी सामान बनाए जाते है यह भी आप यहां देख सकते हैं। इसके अंदर हैंड मेड झरने और कई अन्य तरह की मूर्तियां बनी हुई हैं। जिसमें इसकी खासियत यह है कि यह मूर्तियां और कलाकृतियां स्क्रैप और अन्य तरह के वेस्ट चीज़ो से बनाई गई हैं जैसे बोतलें, गिलास, चूड़ियां, बर्तन, सिंक, टूटे पाइप आदि। यह गार्डन कम-से-कम चालीस एकड़ की जगह में फैला हुआ है। इसे नेक चंद द्वारा बनाया गया था, वह कचरे व अन्य प्रकार के वेस्ट मटेरियल को उठा कर उसे मूर्तियां बनाने में इस्तेमाल करता। जिसमें उस एक लाजवाब व्यक्ति की रचनात्मकता साफ़ झलकती दिखाई पड़ती है। अगर आप चंडीगढ़ की खूबसूरती को तराश रहे हैं तो आपको इस जगह को एक बार जरूर एक्स्प्लोर करना चाहिए। यह गार्डन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है, और यह सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है। रॉक गार्डन की एंट्री टिकट 30 रूपये है। इसकी लोकेशन की बात करें तो यह सुखना झील से केवल 2 किमी दूर है। छत्तबीर चिड़ियाघर चंडीगढ़ का यह प्रसिद्ध चिड़ियाघर महेंद्र चौधरी जूलॉजिकल पार्क के नाम से भी जाना जाता है। सभी चिड़ियाघर की तरह यहां भी आपको सबसे पहले एंट्री टिकट लेनी होगी जोकि 12 साल से उप्पर सभी की टिकट 100 रूपये है और बच्चों की टिकट 50 रूपये है। और इसके अलावा अगर आप फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी के शौकीन हैं तो आपको यहां कैमरे के लिए भी आपको टिकट अलग से खरीदनी होगी जिसकी टिकट है 250 रूपये। यहां आपको कई सारे पशुओं को देखने व अलग अलग तरह की जानकारी लेने का मौका मिलेगा। तो इस चिड़ियाघर में एक बार जरूर आएं। एलांते मॉल मॉल तो वैसे हर बड़े शहर में आपको देखने को मिलते हैं वैसे ही चंडीगढ़ का सबसे बड़ा मॉल है एलांते मॉल। यहां बच्चों के फन से लेकर कपडे खाने पीने और मूवी जैसी हर एक सुविधा उपलब्ध है। यह लगभग 20 एकड़ की जगह में फैला हुआ है। एलांते मॉल न सिर्फ चंडीगढ़ बल्कि देश भर का सबसे बड़ा मॉल है। इसकी टाइमिंग सुबह 11 बजे से शाम 10 बजे तक है। एलांते मॉल फन और शॉपिंग हर लिहाज से काफी शानदार है। इसकी लोकेशन की बात करें तो 178, इंडस्ट्रियल एरिया, फेज 1, चंडीगढ़। यहां आप आपने वाहन या कैब के माध्यम से आसानी से पहुँच सकते हैं। इसके अलावा यहां के लिए बस भी उपलब्ध हैं। नेअरेस्ट बस स्टॉप है सेंट्रा मॉल बस स्टॉप। आप सेक्टर 17 बस स्टैंड से भी यहां की बस ले सकते हैं।

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Best Tourist Places to Visit in Delhi

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मेरे चर्चों की गूँज काफी है, मैं किसी परिचय की मोहताज़ नहीं, मैं दिल्ली हूँ, मेरी नीव रखी किसने, यह तो मुझे भी याद नहीं देश की विरासत को अब तक मैंने संभाला है, ग्रंथ महाभारत में इन्द्रप्रस्थ मेरे बचपन का नाम बताया है। हाँ, मैंने समेटी है, संस्कृति पूरे भारत की और देखी है अपने हर आँगन में कतारें लोगों के अरमानों की। देखा है कैसे उस जमाने में बलशाली राजा का ताज उतर गया और देखा है कितनी बार लोगों का सपना टूट गया।   कैसे गरीबी ने एक इंसान को मार दिया और कैसे किसी की मेहनत ने, दुनिया भर में अपना नाम किया मैंने देखा कैसे राजाओं ने मीनारों का निर्माण किया और चर्चे हो गए देश-विदेशों में, जब मैंने था शासन किया। और सिर्फ इतना ही नहीं  मेरे किस्सों की भरमार है क्योंकि राजधानी का खिताब  तो आज भी मेरे नाम है, पर चलिए फ़िलहाल सुनाती हूँ कहाँ-कहाँ मेरी खूबसूरती आज भी बरकरार है। (Best Tourist Places in Delhi) हां, यही है देश की राजधानी कही जाने वाली दिल्ली। दिल्ली अपने हर अंदाज और अनोखे इतिहास के लिए काफी जानी जाती है और हो भी क्यों ना , ऐतिहासिक इमारतें, अलग-अलग संस्कृतियों के लोग, स्ट्रीट फ़ूड के चर्चे और लाजवाब बाजार। यहां सब कुछ मौजूद है। यहां वो सब है जिनकी कमी आपको शायद देश के दूसरे शहरों में दिखाई पड़ती हो तभी तो इसे देश की शान कहा जाता है। इसके साथ ही दिल वालों की दिल्ली की खूबसूरती वाकई काबिल ए तारीफ है। तो चलिए आपको रूबरू कराते हैं देश की शान की बेस्ट टूरिस्ट प्लेसों से। Best Tourist Places to Visit in Delhi लाल किला देश की आन बान और शान का प्रतीक लाल किला दिल्ली शहर का सबसे फेमस टूरिस्ट प्लेस है। जी हां वो लाल किला जहां की प्राचीर से देश के प्रधानमंत्री हर साल 15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराते हैं, और लाखों करोड़ों की आबादी को सम्बोधित करते हैं। वो लाल किला जो तकरीबन दो सौ साल तक मुगलों की राजधानी बना रहा, मुगलों के शासन का प्रमुख केंद्र बना रहा। जहां से तकरीबन दो सौ साल तक मुगलों ने देश पर शासन किया। अगर पर्यटन स्थलों की बात की जाए तो लाल किला दिल्ली का सबसे बड़ा टूरिस्ट प्लेस माना जाता है। इस किले के दो द्वार हैं लाहौर दरवाजा और दिल्ली दरवाजा। लाहौर दरवाजा इसका मुख्य प्रवेश द्वार है, इसके अंदर प्रवेश करते ही आपको एक शानदार और आकर्षित बाजार दिखाई देगा। जिसे छत्ता चौक या छत्ता बाजार भी कहा जाता है। Best Tourist Places in Delhi इसके अंदर जाते ही आपको मुग़ल शासन के अनोखे अंदाज़ से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसके अलावा इस किले के बिलकुल सामने आप दिल्ली की सबसे फेमस चांदनी चौक मार्केट भी एक्स्प्लोर कर सकते हैं। इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन है चांदनी चौक। इंडिया गेट अगर आप इंडिया गेट मेट्रो से आना चाहते हैं तो इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन है केंद्रीय सचिवालय। इंडिया गेट जो कि हमारे देश की आन बान और शान है। इंडिया गेट को फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में शहीद हुए हमारे जवानों की याद में बनवाया गया। इसका निर्माण कार्य 1921 में शुरू हुआ और दस साल बाद 1931 में पूरा हुआ।  यह हमारे जवानों के सहस और शौर्य का प्रतीक है। 26 जनवरी को हर साल महामहिम राष्ट्रपति की मौजूदगी में हमारा देश यहीं से पूरी दुनिया के सामने शक्ति प्रदर्शन करता है। आपको बता दें 8 सितंबर 2022 को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इंडिया गेट के नए लुक यानि की सेंट्रल विस्टा एवेन्यू  का अनावरण किया। इसके साथ ही वर्षों पुराना राजपथ अब कर्तव्य पथ बन गया। देश की इस धरोहर का नया लुक बेहद ही शानदार है। तो अब इसको एक्स्प्लोर करना और भी मजेदार होने वाला है। अगर आप भी आपने देश के ऐतिहासिक और गौरवशाली पलों को सहेजना चाहते हैं तो यकीन मानिये सेंट्रल विस्टा एवेन्यू, इंडिया गेट का यह नया परिसर एक शानदार जगह है और यकीनन इससे दिल्ली के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। जंतर मंतर : तो चलिए बात करते हैं दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के बिलकुल सामने स्तिथ जंतर मंतर की। जो शयद अपनी अनोखी कारीगरी के साथ-साथ धरना और प्रदर्शन के कारण भी देश भर में खूब पहचाना जाता है। जंतर अंतर की एंट्री टिकट की बात करें तो यह इंडियंस के लिए 25$ है और फॉरनर्स के लिए 250 सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है और यहां आने का समय सुबह साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक है। दिल्ली के जंतर मंतर में मुख्यतः चार यंत्र हैं रामयंत्र, सम्राटयंत्र, जयप्रकाश यंत्र,और मिश्र यंत्र। जब आप जंतर मंतर के अंदर प्रवेश करेंगे तो यहां आपको इसका पूरा इतिहास समझ में आ जायेगा। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि किस तरह सैकड़ों साल पहले राजा महाराजा किस तरह सूर्य चंद्रमा और गृहों के समय और गति की सही जानकारी लेते थे तो आपको एक बार जंतर मंतर अवश्य आना चाहिए। क़ुतुब मीनार : वैसे तो दिल्ली घूमने और देखने के लिहाज़ से काफी शानदार है। पर दिल्ली की कुछ बेहद खूबसूरत इमारतों को देखे बिना दिल्ली का दर्शन अधूरा सा लगता है। इसके अंदर आपको एक से एक इतिहास समेटे इमारतें दिखाई देंगी। इस मीनार को बनाने में लाल बलुआ पत्थर और मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। और इसके अंदर गोल-गोल करीब 379 सीढ़ियां हैं। मीनार की दीवारों पर सदियों पुराने मंदिरों के अवशेष साफ दिखाई पड़ते हैं। इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर की वास्तुकला मौजूद है। इसके अंदर जाकर आपको इसकी काफी सारी ऐतिहासिक बातों का पता चलेगा। इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन क़ुतुब मीनार है। भारत दर्शन पार्क : जी हां, दोस्तों हम बात कर रहे हैं दिल्ली में स्तिथ एक बेहद ही शानदार जगह जिसका नाम है भारत दर्शन पार्क। यह पार्क लिंक रोड पर पंजाबी बाग़ में स्तिथ है। भारत दर्शन पार्क से सबसे नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन पंजाबी बाग़ वेस्ट है। आप आराम से मेट्रो स्टेशन से पैदल ही पांच मिनट में यहां पहुंच सकते हैं। इस पार्क की खासियत यह है कि इसे बहुत सारे वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल करके बनाया

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दिल्ली के दिल में बसा बाजार – जनपथ

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दिल्ली के दिल में बसा एक बहुत ही खूबसूरत बाजार “जनपथ ” जो पहले क्वीन -वे के नाम से जाना जाता था। कनॉट प्लेस में स्थित यह बाज़ार हस्तशिल्प कारीगरी के लिए काफी फेमस माना जाता है। यह मार्केट पारम्परिक , आधुनिक और फैशनेबल कपड़ो का शानदार मेल है। इसका इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है, ब्रिटिश राज में यहां से ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की सवारी गुजरा करती थी। पहले यह एक सड़क मार्ग था ,जो आजकल एक खूबसूरत बाजाऱ के रूप में जाना पहचाना जाता है। (Janpath Market) इस अद्भुत मार्केट में एक तरफ जहाँ तिब्बती बाज़ार और गुजराती बाजार की रौनक है वहीं यहाँ फैन्सी स्टोर और सड़क के दोनों और लगने वाली दुकानों तक सब कुछ है। शॉपिंग के दीवानों के लिए यह मार्केट काफी पॉपुलर मानी जाती है। दिल्ली की लड़कियों , खासकर कॉलेज की लड़कियों की जान है यह जनपथ मार्केट। लेटेस्ट फैशन के दीवानों के लिए बेहद ही बेहतरीन यह बाजार ट्रेंडी कपड़ो के लिए फेवरेट माना जाता है। स्ट्रीट शॉपिंग पसंद करने वालों के लिए तो यह पसंदीदा मार्केटों में से एक मानी जाती है। कनॉट प्लेस में होने के कारण यहां हर समय काफी भीड़ देखने को मिलती है। शाम के समय इस मार्केट की रौनक ही अलग होती है। चमचमाती रौशनी के बीच खरीददारी करती हुई लड़कियां बाजार का दृश्य काफी रंगीन बना देती है।(Janpath Market) यहाँ आपको कपड़े ,हेंडीक्राफ्ट आइटम्स, सजावट का सामान जैसे तमाम चीज़े मिल जाएगी। केवल दिल्ली वाले ही नहीं बल्कि दिल्ली से बाहर के लोग भी लेटेस्ट ट्रेंड के कपड़ो की तालाश में यहाँ आते हैं। जनपथ मार्किट में आपको सस्ते फैशनेबल ड्रेसेज़, जीन्स, प्लाज़ो ,फुटवेयर ,ज्वेलरी , स्टाल्स की वेरायटीज मिल जाएगी। सर्दियों में स्वेटर, स्वेट शर्ट्स , जैकेट्स के सैकड़ों डिज़ाइन मिल जायेंगे। जनपथ में कई प्रसिद्ध दुकानें हैं, जहां लोग अपनी जरूरत की चीजें तो खरीदने आते ही हैं, साथ ही यहां स्पाइसी स्ट्रीट फूड का भी मजा लेकर जाते हैं। जनपथ के अंदर ही आपको चार तरह के बाजार देखने को मिलेंगे – तिब्बती बाज़ार – यहां आपको सिल्वर ज्वेलरीस , हर प्रकार के कांच, हर आकार और रूप की मूर्तियां, और देवी-देवताओं की तिब्बती थांका पेंटिंग देखने को मिल जाएगी और आप खरीद भी सकते हैं। अगर आपके पास शॉपिंग करने के लिए पूरा दिन है, तो एक बार इस बाजार में भी खरीदारी करने के लिए जरूर आएं । गुजराती बाज़ार -गुजराती बाजार अपने शिल्पकार और चमकीले रंग के बैग, तकिए, चादरें, कुर्तों शीशों और कढ़ाई वाली कुर्ती के लिए जाना जाता है। आप बाजार में थोड़ा आगे बढ़ेंगे, तो आपको सस्ते दामों में अफगानी झुमकें और अंगूठियों की भी दुकानें देखने को मिल जाएंगी। मेन बाज़ार – इस मार्केट में आपको लगभग सभी जरूरत की चीजें मिल जाएंगी। यहां के फैशनेबल कपड़े, जंक ज्वैलरी और हैंडीक्राफ्ट्स से लेकर घर के लिए पुराने समय के ट्रेडिशनल घरेलू सामान मिल जाएंगे। यहां आपको हर चीज़ की क्वॉलिटी भी एकदम अच्छी मिलेगी। जहां लैदर के प्रोडक्ट्स की शुरुवात हज़ारो से शुरू होती है वहीँ इस मार्केट में लैदर के प्रोडक्ट जैसे पर्स और बैग के प्राइज 900 से शुरू होते हैं और अच्छी क्वॉलिटी के भी मिलते हैं। स्ट्रीट बाज़ार – जनपथ की सड़क पर लगा बाजार सरोजिनी मार्केट की याद जरूर दिलाता है। लेकिन यहां आपको सरोजिनी के मुकाबले थोड़ा ट्रेंडी कपड़े मिल जाएंगे, डेनिम शर्ट और जंपसूट से लेकर सेलर-प्रिंट स्नीकर्स तक आपको यहां सब कुछ मिल जाएगा। इसलिए यह बाजार अपने आप में ही एक पूर्ण मार्केट है। तो जब भी यहाँ जाए तो किसी चीज़ को मिस न करें थोड़ी सी दूरी पर क्या पसंद आजाये उसका पता नहीं चलता। जनपथ मार्केट में फेमस खाने की जगह : डिपॉल्स : अगर जनपथ मार्केट जा रहे है तो डिपॉल्स (depauls) की कॉफ़ी जरूर ट्राई करें।यहां आपको कारमेल, हेज़लनट और आयरिश क्रीम जैसे फ्लेवर में सस्ती कीमतों पर कुछ बेहतरीन कोल्ड कॉफी को टेस्ट करने का मौका मिलेगा। कॉफी के अलावा आप यहां से स्वादिष्ट चीज़बॉल, सैंडविच और मोमोज भी खा सकते हैं। सर्वना भवन: दक्षिण भारतीय खाने का स्वाद लेने के लिए यह दिल्ली की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। यह जगह हमेशा खाने के शौकीनों से भरी रहती है। बाजार जाओ और कुछ स्वादिष्ट भोजन का आनंद न लो ये तो अधूरा मामला हो जाता है। कहते है ना पेट पूजा फिर काम दूजा। प्रिंस चाट कॉर्नर: अगर आप चटपटा चाट खाने के शौकीन है, तो प्रिंस चाट कॉर्नर जा सकते हैं। यहां के मेन्यू में पापड़ी चाट, आलू चाट, आलू टिक्की, साबूदाना टिक्की, समोसा चाट, पालक पापड़ी चाट, आलू टोकरी, राज कचौरी जैसी कई टेस्टी चीजें मिलती हैं।आप एक बार खाएंगे तो बार-बार आएँगे।

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Jallianwala Bagh- Amritsar

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पंजाब के अपने सफर में आज हम आ पहुंचे हैं अमृतसर के जलियांवाला बाग में जहां ना जाने कितने लोगों ने देश के लिए क़ुरबानी दी है। वीडियो में आगे बढ़ने से पहले अगर आपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर लें ताकि आपको हमारी आगे आने वाली वीडियोस की नोटिफिकेशन टाइम से मिलती रहे। Jallianwala Bagh Massacre Amritsar Punjab दिल्ली से अमृतसर तक की दूरी दिल्ली से अमृतसर तक की दूरी लगभग 460 किलोमीटर है और अगर आप वहां अपने व्हीकल से जाते हैं तो आपको करीबन  9 से 10 घंटे लग जाएंगे। जलियांवाला बाग हत्याकांड जलियांवाला बाग में हुए हत्याकांड को आज शायद ही कोई भुला पाए।  इसी बाग़ में 103 साल पहले यानि 13 अप्रैल 1919 को एक बहुत ही भयानक नरसंहार हुआ था जिसमे सैकड़ों लोगो ने अपनी कुर्बानी दी थी जिसमे आदमी, औरत, बच्चे, और बूढ़े सब शामिल थे।Jallianwala Bagh Massacre Amritsar Punjab दरअसल रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए बैशाखी के दिन जलियांवाला बाग़ में  एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने बिना किसी वजह के उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें सैंकड़ों लोग शहीद हुए और २००० से अधिक घायल हुए। 10  मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां बताते हैं 10  मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। जलियांवाला बाग उस समय मकानों के पीछे पड़ा एक खाली मैदान था। वहाँ तक जाने या बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था और चारों ओर मकान थे। भागने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए, पर देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया। आज भी बाग में लगी पट्टिका पर आप पढ़ सकते हैं कि 120  शव तो सिर्फ कुए से ही मिले। इतना दर्दनाक मंजर सहने वाला यह जलियावाला बाग़ अमृतसर के पवित्र गोल्डन टेम्पल से लगभग 200 300 मीटर दूर हेरिटेज मार्किट में स्थित है। जैसे ही आप इस बाग़ के अंदर जाएंगे तो आपको दीवारों पर उस समय की घटना की कुछ कलाकृतियां देखने को मिलेगी जो आपको हत्याकांड के टाइम की याद दिलाएगी कि उस समय कैसा भयानक मंजर रहा होगा। Jallianwala Bagh Massacre Amritsar Punjab वॉर मेमोरियल अंदर जाते ही आपको एक बहुत ही सुंदर और बड़ा बाग़ दिखाई देगा। इस बाग़ को बड़े ही सलिखे से संभाला जाता है। इसके एंट्री गेट से ही आपको वॉर मेमोरियल दिख जाएगा जिसे हमारे उन निर्दोष स्वतंत्रता सेनानियों की याद में बनवाया गया है। यहीं पर पास में ही आपको वह मौत का कुआं दिखाई देगा जिसमें कूदकर लोगों ने उस क्रूर डायर की गोलियों की बौछार से बचना चाहा लेकिन बच नहीं पाए। खूनी गोलियों के निशान इसी कुएं के बगल में ही वो दीवार है जहां पर आपको उन खूनी गोलियों के निशान आज भी देखने को मिल जाएंगे। इस बाग़ की हर एक दीवार आज भी चींख-चींख कर उस समय की घटना को ब्यान कर रही है। बाग़ के अंदर आपको अमर ज्योति भी दिखाई देगी जो उन लोगों को श्रद्धांजलि समर्पित करती है जो 1919 के हत्याकांड में मारे गए थे। अमर ज्योति के बगल में ही आपको एक एक्सिबिशन दिखाई देगा जिसमें हमारे देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों के फोटो लगाए गए हैं जिनकी कुर्बानियों को भुला पाना शायद मुमकिन नहीं । शहीद उधम सिंह जी की अस्थियों के दर्शन भी आप इसी परिसर में कर सकतें हैं। और इसी जगह आपको इस भयावय नरसंहार की पूरी कहानी बड़े पर्दे पर दिखाई जाती है। (Jallianwala Bagh Massacre Amritsar Punjab)

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Most Famous food of Uttarakhand

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तो चलिए करवाते हैं आपको उत्तराखंड के फ़ूड से वाकिफ उत्तराखंड – नाम सुनते ही पहाड़ों की छवि मन में आना तो लाज़िमी ही है और फिर वो गाना भी तो गुनगुनाना है…… बताया गया है पुराणों में, यहीं से जाती है स्वर्ग की सीढी,रातों को गुज़रो तुम डांडो से डर लगता,भूत न मांग ले बीड़ी।।उत्तराखंड में पहाड़, वादियां, झरनें, ठण्ड और मौसम इन सब के बारे में तो आपने बेशक सुना ही होगा। पर , क्या आप जानते है उत्तराखंड के फेमस फ़ूड क्या हैं, आग में बनी भट्ट की चढ़कानी क्या है, शहर से दूर जाने पर माँ के हाथों से बनें सेल क्या हैं।और अगर आप उत्तराखंड से हैं तो इन्हें खाये बिना तो बेशक ही आपका कोई त्यौहार, त्यौहार सा नहीं लगता होगा।तो चलिए आज हम आपको पहाड़ों के खान-पान से रूबरू करवाते हैं, जहाँ बुजुर्गों के आशीर्वाद के बिना कुछ काम शुरू नहीं होता और इन पकवानों के बिना त्यौहार खत्म नहीं होता। (Famous Food of Uttarakhand) Most Famous food of Uttarakhand with name भटिया(Bhatia) अगर आप उत्तराखंड से नहीं है तो “भट्ट” क्या होता है इससे आप बिल्कुल ही अनजान होंगे। भट्ट की खेती उत्तराखंड के कुमाऊँ रीजन में जेठ और आषाढ़ के महीने में की जाती है। भट्ट को एक तरह से दाल कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इसे कुमाऊँ के लोग ज्यादातर चावल के साथ खाना पसंद करते हैं। ये ना सिर्फ एक दाल बल्कि सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी है काले भट्ट में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है और इस दाल से कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद मिलती है। इसे बहुत ही आसानी से और दालों की तरह बनाया जाता है और फिर आग में नानी या दादी के हाथों से बनी भटिया तो हर पहाड़ी का एनेर्जी बूस्टर है। भटिया बनाने की एकदम सिंपल सी रेसिपी है जिसमें भट्ट को पीस के उसे पानी में पकाया जाता है। पर वो कहते हैं ना चूल्हे में बनी सिंपल दाल का मुकाबला तो शहर की दाल-मखनी क्या ही कर पायेगी। (Famous food of Uttarakhand) बड़ी की सब्ज़ी (badi ki sabji) अब आप सोच रहे होंगे कि बड़ी की सब्ज़ी में भी क्या स्पेशल है, बाजार से न्यूट्रीला का पैकेट लेकर हम भी बना लेते हैं, फिर उत्तराखंड में ये स्पेशल कैसे। पर नहीं ये बड़ी न्यूट्रीला के पैकेट वाली बड़ी नहीं है, उत्तराखंड में स्पेशल बड़ी उड़द की दाल से बनाई जाती है। उड़द की दाल को पीस कर उसमें मसाले डालकर उसे बड़ी के शेप में बनाया जाता है, और फिर धूप में सूखाने के लिए रख दिया जाता है और फिर सूखने के बाद फ्राई करके तैयार हो जाती है मसाला बड़ी। इसके स्वाद और क्रंच का अंदाज़ा अब आप बिना खाए भी लगा चुके होंगे। हाँ, सच में ये बेहद लाजवाब होती है।(famous food of Uttarakhand) सेल सेल एक ऐसा पकवान है जिसके बिना कुमाऊँ के तो सारे त्यौहार अधुरे हैं। भाई दूज, मकर सक्रान्त, राखी, सभी तैयारों में सेल पकाने की परंपरा कई पुश्तों से चली आ रही है। खासकर ठंड के मौसम में, चूल्हे में, बड़ी सी कढ़ाई में, जलेबी की तरह बनाये गए सेल एक अलग ही माहोल बना देते हैं। सेल चावल के आटे से बनाया जाता है। जिसमें केला और दौन के साथ पानी डालकर घोल बनाया जाता है और एकदम जलेबी की तरह कढ़ाई में गोल-गोल जलेबी का आकर दिया जाता है। और एक बात बता दू कि पहाड़ों में अगर एक घर में सेल बन रहें हो तो बाकि का आधा मोहल्ला भी वहीं गप्पें मारते दिखाई पड़ता है। क्योंकि सेल कहें तो त्यौहार और त्यौहार भला कौन अकेले मनाता है। जौला उत्तराखंड में आपको न केवल सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजन मिलेंगे बल्कि यहाँ के कुछ पकवान स्वास्थ्यवर्धक है, और जौला भी उनमें से एक है। क्योंकि यह खाने में हल्का है। उत्तराखंड में छोटे-छोटे बच्चे तो जौला इतना पसंद करते हैं कि वह सिर्फ बीमारी में ही नहीं बल्कि महीने में एक बार तो जौला खाने की परंपरा का निर्वाह करते है। इसे बनाने का तरीका भी एकदम सरल है, काले भट्ट को पीस कर मसालों में चावल के साथ उबाल दिया जाता है। जौला खासकर बच्चों का पसंदीदा व्यंजन माना जाता है। डुब्का दुबका सर्दियों में बनाए जाने वाला व्यंजन है और आमतौर पर सर्दियों में ही खाया जाता है। दुबका प्रोटीन का एक पावरहाउस है और कुछ ही समय में तैयार करने के लिए एक आसान रेसिपी है। आमतौर मूंग दाल डुब्का रेसिपी को उबले हुए चावल और कलौंजी गोभी आलू के साथ दोपहर के खाने में बनाया जाता है। तो आप उत्तराखंड के इन परंपरागत और फेमस फ़ूड के बारे में तो जान ही गए पर चूल्हे के खाने का स्वाद लेने समय निकाल कर जरूर आएं इन पहाड़ों में। (Famous food of Uttarakhand)

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Best Places to visit in Munsiyari, Uttarakhand- Little Kashmir

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                          उत्तराखंड के कुमाऊं रीजन के पिथौरागढ़ में एक बेहद शांत और सौम्य जगह आपके स्वागत के लिए उत्सुक है। सोच के देखिये सुबह-सुबह कमरे की खिड़की खोलते ही हिमालय की चमक आपकी आंखों में पड़ रही हो, या फिर किसी झरने के सामने सुबह की चाय आपका इंतज़ार कर रही हो। किसी पहाड़ पर एकाएक बादल आपका रास्ता रोककर खड़े हो जाएं। हां, कुछ ऐसा ही है मुंश्यारी(Munsiyari), जिसे शायद प्रकृति ने बड़ी ही फुर्सत से बनाया है। इन पहाड़ों में सिर्फ वादियां ही नहीं बल्कि सुकून के पल और खुशनुमा आबो हवा भी है। मुंश्यारी जाते समय पहाड़ों का सफर शुरू होता है नैनीताल से, और आपकी जानकारी के लिए बता दूं ये सफर जरा भी बोरिंग नहीं होने वाला क्योंकि रस्ते में बहुत से खूबसूरत हिल स्टेशन पड़ते हैं, जैसे अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बेरीनाग। (Best places to visit in Munsiyari, Little Kashmir) पिथौरागढ़ से मुंश्यारी इनकी बेपनाह खूबसूरती के चर्चे आपने बेशक सुने ही होंगे। वैसे तो सारे हिल स्टेशन बेहद खूबसूरत होते हैं पर सभी डेस्टिनेशंस की एक अलग खूबसूरती और अलग पहचान होती है। वैसे ही मुंश्यारी की खूबसूरती भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। पिथौरागढ़ से मुंश्यारी लगभग 128km. की दूरी पर है, और सच कहें तो मुंश्यारी की खूबसूरती ही पिथौरागढ़ को मिनी कश्मीर बनाती है। पिथौरागढ़ से मुंश्यारी के सफर में ही आपको समझ आ जाएगा कि इसे छोटा कश्मीर क्यों कहा जाता है, रास्ते में पहाड़ों से ढकी रोड, रोड के किनारे झरने, और कल-कल बहती नदी इसका प्रमाण दे ही देगी। यकीन मानिये मुंश्यारी का सफर जितना शानदार है उससे कहीं ज्यादा अडवेंचरस भी, तो ये सफर आपका बेशक ही यादगार रहने वाला है। मुंश्यारी पहुंचने से पहले 33km. पहले पड़ता है बिर्थी वॉटरफॉल। Munsiyari बिर्थी फॉल (Birthi Fall) मुंश्यारी के सफर में ही आपको मुख्य रोड से ही एक बहुत ऊंचाई से बहता एक आकर्षक झरना दिखाई देगा। अगर आप यहाँ रुके बिना अगर मुंश्यारी की ओर चले गए तो यकीनन पूरी ट्रिप में आपका मन सिर्फ बिर्थी फॉल ढूढ़ता रह जायेगा। बिर्थी फॉल का झरना पहाड़ों की काफी ऊंचाई से निकलता है, लगभग 50 मीटर दूर से ही पानी की बूंदे दूर से ही चेहरे पर पड़ने लगती हैं और हवा भी काफी तेज़ महसूस होती है, तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि पानी का फ्लो कितना जबरदस्त होगा। बिर्थी फॉल की खूबसूरती बारीश के दिनों और ज्यादा निखर जाती है, जब पानी में इंद्रधनुष निकलता दिखाई देता है। और इसके पास जाने पर यूं तो चंद पानी की बूंदे पड़ती महसूस होंगी पर, कुछ देर में आप खुद को उप्पर से नीचे तक भीगा हुवा पाएंगे। वापसी में आप बिलकुल रोड में ही ढाबे में मैगी और चाय का आनंद ले सकते है। तो अब आपको महसूस हो जाएगा की जन्नत की शुरुवात हो चुकी है।  आगे बढ़कर 21km. दूर आपको रोड़ साइड ही आपको दिखाई देगा खलिया द्वार। खलिया टॉप (Khalia Top) हाँ, एक बात दावे के साथ कही जा सकती है कि खलिया टॉप में एक रात बिताने पर आप खुद कहेंगे कि दुनिया में जन्नत है तो वो यहीं है। रोड़ साइड बड़े से आर्क में खलिया द्वार लिखा आपको दिखाई देगा। खलिया द्वार वह जगह है जहां से खलिया टॉप के लिए ट्रेक्किंग शुरू की जाती है। ये ट्रेक्किंग लगभग 4 से 5 km. तक की होती है मगर ट्रेक्किंग शुरू करने से पहले आपको एंट्री टिकट लेना होगा जोकि पर-पर्सन 20 या 30 रुपए का है। और अगर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से आए हैं तो रोड़ साइड पार्किंग में रख सकते हैं। खलिया टॉप पुरे भारत के बेस्ट ट्रेक्किंग स्पॉट में से एक है, क्योंकि भारत की मशहूर पंचाचूली यहाँ से काफी पास और बेहद शानदार दिखाई देती है। यहाँ पर अगर आप मॉर्निंग व्यू देखना चाहें तो आप खलिया टॉप में कैंपिंग आसानी से बिना किसी परमिशन के कर सकते हैं, इसके अलावा केमवीएन यानि (कुमाऊँ मंडल विकास निगम ) में आप होटल भी ले सकते हैं जिसकी कॉस्ट है लगभग 1000 पर नाईट। कुछ लोगों की चाहत होती है कि जब भी सुबह उनकी आंखें खुलें तो सामने चमकता हुआ हिमालय और सूरज की लाली दिखाई दे, अगर ये ख्वाब आपका भी है तो खलिया टॉप में आपका ये ख्वाब सच होने वाला है।Munsiyari इसके बाद  खलिया टॉप से 1km. आगे आने पर आप पहुंचेंगे थमृन कुंड हाईक ट्रेल  पर। थमृन कुंड थमृन कुंड हाईक ट्रेल से ट्रेक्किंग शुरू होती है थमृन कुंड तक, जोकि लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर की है। थमृन लेक चारों तरफ पहाड़ियों से घिरी लेक है। और बर्फ के दिनों इसकी चमक और भी दो गुनी हो जाती है। ये जगह मुंश्यारी से लगभग 11km. पीछे है। अब चलते है मेन मुंश्यारी की तरफ। मुंश्यारी आने पर आपको सबसे खूबसूरत जो जगह लगने वाली है वो है ” नंदा देवी मंदिर” नंदा देवी मंदिर : आप मेन मुंश्यारी से टैक्सी लेकर आराम से नंदा देवी मंदिर पहुँच सकते हैं, जोकि मेन मुंश्यारी से लगभग 2km की दूरी पर है। मंदिर में पहुँच कर यहाँ आपको 20$ एंट्री टिकट देना होगा। अब आप सोच रहे होंगे मंदिर में भी एंट्री टिकट ये बड़ा अज़ीब है, पर ये एंट्री टिकट मुख्य मंदिर के मैंटेनैंस के लिए ली जाती है। यहाँ आप न केवल माँ नंदा के दर्शन बल्कि एकदम शानदार पहाड़ों के नज़ारों का भरपूर आनंद भी ले सकते हैं। इसे मुंश्यारी की वन ऑफ़ दा बेस्ट प्लेसेस में गिना जाता है, और सबसे महत्वपूर्ण यह जगहफोटोग्राफर्स के लिए यह बेस्ट प्लेस है। इसके बाद आप मुंश्यारी का ट्रिब्ल हेरिटेज म्यूजियम देखने जा सकते हैं, जोकि मुंश्यारी बस स्टैंड से लगभग 5km. की दूरी  पर है और जिसकी एंट्री फीस मात्र 20$ है। इस म्यूजियम में आप उत्तराखंड के कल्चर और उत्तराखंड की सभ्यता को बड़ी ही बारीकी से देख सकते हैं और समझ सकते हैं। इसके अलावा मुंश्यारी एडवेंचर के लिए भी काफी मशहूर है। तो मुंश्यारी के बेस्ट एडवेंचर स्पॉट की बात करें तो सबसे पहला नाम आता है “खलिया टॉप” खलिया टॉप स्कीइंग के लिए काफी मशहूर है वहां आप बर्फ में स्कीइंग का भरपूर आनंद  ले सकते हैं। और आप

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Best Places To Eat In Chandni Chowk, Old Delhi

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चाँदनी चौक है दिल्ली के वर्ल्ड फेमस स्ट्रीट फ़ूड की पहचान अलग-अलग संस्कृतियों में रची बसी दिल्ली देश की शान और देश की जान मानी जाती है, फिर चाहे दिल्ली के लाजपत नगर की बात करें या चाँदनी चौक की, दिल्ली अपने आप में एक गहरा इतिहास समेटे हुए है। इसके अलावा अगर दिल्ली के मशहूर खान-पान की बात करें तो यहाँ न तो बंगाल का रोशोगुल्ला इतना फेमस है और ना ही हरियाणा का चूरमा। दिल्ली में सबसे फेमस है दिल्ली का “स्ट्रीट फ़ूड”। जी हाँ, दिल्ली का स्ट्रीट फ़ूड जहाँ आपको मुंबई की भेल पूरी, तिब्बतन मोमोज़, अमृतसरी कुलचा, इंदौर का पोहा, नई दिल्ली की चाट और भी लगभग सभी राज्यों के फेमस फ़ूड का जायका यहाँ हर गली में मौजूद मिलेगा। दिल्ली जितनी अपनी विरासत और ऐतिहासिक जगहों के लिए मशहूर है उतनी ही यहाँ के स्ट्रीट फ़ूड की महक देश भर में स्वाद का परिचय देते दिखाई पड़ती है। तो आज के इस ब्लॉग में हम आपको ले चलेंगे दिल्ली के ऐतिहासिक और मशहूर चाँदनी चौक में। जहाँ के स्ट्रीट फ़ूड का ज़ायका ऐसा है कि सिर्फ खुशबू से ही मुँह में पानी आ जाता है। Best Places To Eat In Chandni Chowk, Old Delhi चाँदनी चौक की इन 5 दुकानों का स्वाद दिल्ली में आपको और कहीं नहीं मिलेगा, तो चाँदनी चौक आकर यहाँ खाना बिल्कुल ना भूलें। दौलत की चाट : अगर कभी चाट की बात हो रही हो तो सभी के मन में कुछ तीखा, मसालेदार, चटपटा आने लगता है पर दौलत की चाट एक ऐसी चाट है जिसका स्वाद मीठा है। दौलत की चाट दिल्ली की सबसे मशहूर विंटर डैज़र्ट है जो सिर्फ अक्टूबर से मार्च के महीने में ही खाने को मिलती है दिल्ली के चाँदनी चौक में और जिसके चर्चे आप लोगों ने काफी सुने भी होंगे। चाँदनी चौक की लगभग हर गली में आपको दौलत की चाट के स्टाल्स लगे दिखाई देंगे। क्यों फेमस है – दौलत की चाट एक रहस्यमय मिठाई है जिसे कहा जाता है कि यह मुग़ल शासन के टाइम से बनायी जा रही है। इस चाट का सिर्फ सर्दियों में मिलने का यह कारण है क्योंकि इसकी रेसिपी में सर्दियों की ओस का इस्तमाल किया जाता है। जरूर आप भी सोच रहे होंगे की ओस से रेसिपी ये कैसे मुकम्मल है, पर यही तो खासियत है दौलत के चाट की। इसमें सबसे पहले दूध को उबाल कर बाहर ठण्ड में रख दिया जाता है जिससे ठंडा होने पर उबले हुए दूध के ऊपर ओस बैठ जाती है। इस मिठाई को अपने सुंदर दिखने के लिए लगभग आधे दिन और पूरी रात की आवश्यकता होती है, और इसे केवल 2-3 घंटे के लिए ही खुले में रखा जा सकता है। इस चाट को लखनऊ में निमिष और कानपूर में मलाई मक्खन के नाम से जाना जाता है। नटराज दही भल्ले : चाँदनी चौक की लगभग सभी दुकानें काफी पुराने समय से हैं। और उन्हीं में से एक है नटराज दही भल्ले जो 1940 से दही भल्लों का स्वाद परोस रही है। यहाँ चौबीसों घंटे लगी भीड़ आपको इसके स्वाद का गवाह दे देगी। नरम, दानेदार, और फुले हुए भल्ले और उसके बहार चढ़ी सुपर क्रिस्पी परत , लाल इमली की चटनी , और उप्पर से छिड़के मसाले। आ गया ना मुँह में पानी ?यहाँ के दही भल्ले जितने मशहूर हैं वाकई उतने स्वादिष्ट भी हैं। तो चाँदनी चौक जाकर दही भल्ले टेस्ट करना बिलकुल ना भूलें। पराठें वाली गली : चाँदनी चौक में सबसे मशहूर पराठें वाली गली का नाम तो न सिर्फ दिल्ली बल्कि देश भर में ही काफी मशहूर है। यहाँ पर आपको पराठों की 40-50 वैरायटी मिल जाएगी। और यहाँ के पराठों की खास बात यह है कि यहाँ पर बनने वाले पराठें देसी घी में डीप फ्राई किए जाते है, और यहाँ पर आकर आप पराठों में तेल की उम्मीद ना ही रखें तो बेहतर है। और एक चीज़ यहाँ पर खास है कि यहाँ पर सभी लगभग शुद्ध शाकाहारी पराठें ही बनाते हैं जिसमे ना ही प्याज शामिल है और न ही लहसून। इन पराठों को और स्वादिष्ट बनाने के लिए बादाम काजू और सूखे मेवे भी डाले जाते है। अगर आप खाने के ज़रा भी शौकीन हो तो थाली ख़त्म किए बिना आप यहाँ से उठ नहीं पाएंगे क्योंकि यही तो खास बात है पराठें वाली गली की। कुरेशी कबाब : जामा मस्जिद के पास, मीना बाजार के बिलकुल सामने अपनी विरासत जमाए कुरेशी कबाब नॉन वेज़ लवर्स का अड्डा है। वैसे तो यहाँ आपको अलग अलग तरह के कबाब खाने को मिल जायेंगे पर लजीज आनंद के लिए आप यहाँ कबाब रायते और चटनी के साथ आर्डर करें। यहाँ कबाब इतने टेस्टी हैं कि आप दुबारा यहाँ आए बिना रह नहीं पाएंगे और ये कबाब न सिर्फ टेस्टी बल्कि बजट फ्रेंडली भी है। ज्ञानी की हट्टी : तो क्या आप भी हैं रबड़ी के दीवाने हैं तो चल पड़िये ज्ञानी दी हट्टी में खाने। पुरानी दिल्ली के सबसे सीक्रेट फूड्स में से एक है ज्ञानी दी हट्टी जोकि अपने रबड़ी फालूदा के लिए सबसे ज्यादा जानी जाती है। दाल का हलवा, मूंग का हलवा, बादाम का हलवा, सूजी का हलवा और कई तरह की मिठाइयाँ इस जगह आपको मिल जाएँगी। तो इंतज़ार किस बात का है। चल पड़िये चाँदनी चौक की इन मशहूर जगहों में और चख लीजिये दिल्ली के स्ट्रीट फ़ूड का स्वाद।

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Best Places to Visit in Almora

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अल्मोड़ा(Almora) -कुमाऊँ का दिल वो क्या है ना, ये पहाड़ थोड़े मूडी होते हैंकभी सुबह सूरज की रौशनी के साथ उठ जाते हैंतो कभी बारिश की बूदों में आराम फरमाते हैंलेकिन जब इनका मूड ठीक होतो बस इनके पास निकल पड़ना चाहिएक्योकि तब जो इनकी खूबसूरती आपको सुकून देगीवो शायद ही कहीं नसीब होऔर फिर वो गाना भी तो हैमेरा फलसफा कंधे पे मेरा बस्ताचला में जहाँ ले चला मुझे रस्ता……. तो चलिए ले चलते हैं आपको पहाड़ों के एक नए सफर में। उत्तराखंड का एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है “अल्मोड़ा” जो कि कुमाऊँ रीजन में पड़ता है। जितना खूबसूरत ये हिल स्टेशन है उतना ही खूबसूरत यहाँ पहुँचने का सफर। तो इस सफर में जैसे ही हम नैनीताल पहुंचते हैं, हमें अहसास होने लगता है कि हाँ, अब हम पहाड़ों में ऐंटर कर चुके हैं । नैनीताल में चारों ओर पहाड़ों से घिरी एक बहुत ही खूबसूरत झील आपको मुख्य सड़क से ही दिखने लगती है और यहाँ रुके बिना आप अल्मोड़ा का सफर कर लें ये तो हो ही नहीं सकता। क्योंकि ये झील इतनी खूबसूरत है कि सबको अपनी ओर खींच ही लेती है। यहाँ ठहर कर आप झीलों से घिरे एक लाज़वाब हिल स्टेशन का आनंद ले सकते हैं। और फिर नैनीताल से लगभग 64 किमी दूर आता है एक लाजवाब हिल स्टेशन अल्मोड़ा।(Almora) अल्मोड़ा का इतिहासअगर बात करें कुमाऊँ के तीन पहाड़ी जिलों की तो अल्मोड़ा उनमें से एक है। और सांस्कृतिक नज़रिये से देखें तो अल्मोड़ा उत्तराखंड की “कल्चरल कैपिटल” कही जाती है। 1798 में गोरखाओं द्वारा चंद राजवंश पर आक्रमण किया गया, और 1814-15 के गोरखा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने अल्मोड़ा को अपना मुख्यालय बनाया और अच्छी संख्या में स्कूल, अस्पताल, चर्च और अन्य संस्थान खुल गए। आज यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक नगर और प्रशासनिक केंद्र है। यह शहर कुमाऊं के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव का मेल माना जाता है। (Almora) अगर अल्मोड़ा घूमने की बात करें तो इस शहर में ऐसी बहुत सी फेमस और रहस्मयी जगह हैं जो आपकी ट्रिप को यादगार बना देंगी। क्योकि ये शहर चारों ओर से मंदिरों से घिरा हुआ है, और इन मंदिरों की खासियत और खूबसूरती बाकी सभी हिल स्टशनों से अलग हैं। तो चलिए जानते हैं क्या खास है इन मंदिरों में – चितई गोलू मंदिर यहाँ गोलू देवता को न्याय का देवता कहा जाता है। और यहाँ की खास बात यह है की यहाँ लोग चिठ्ठी में अपनी मनोकामना लिखकर उसे टांग देते है और ऐसे अपनी विश पूरी होने की कामना करते है। मनोकामना पूरी होने पर यहाँ घंटी चढाने की परंपरा है। इसी के चलते इस मंदिर में हज़ारों घंटियाँ और हज़ारो चिट्ठियाँ आपको देखने को मिल जाएगी। यह मंदिर अल्मोड़ा से लगभग 8 km. की दूरी पर है। जागेश्वर धाम जागेश्वर धाम अपने आप में एक बहुत बड़ा और मशहूर मंदिर है, जो अल्मोड़ा से लगभग 40 km. दूर है। उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक जागेश्वर धाम देवदार के जंगलों के बीचों-बीच स्थित है। ये पूरे उत्तराखंड में सबसे बड़े मंदिरों का ग्रुप है। क्योंकि जागेश्वर धाम में लगभग 150 मंदिर स्थित है। और यही इस मंदिर की खासियत है। इसे चरों धामों के बाद पांचवा धाम कहा जाता है। पुरानी मनीयता के हिसाब से इसे भगवान शिव का तपस्थल मन जाता है। यहाँ हर साल सावन के महीने में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश भर से श्रद्धालु दर्शन करने आते है। डोल आश्रम नैनीताल से जब आप अल्मोड़ा की तरफ चलेंगे तो रस्ते में पहाड़ों के बीच, पेड़ों से घिरा हुआ यह बड़ा आश्रम रोड से ही आपको दिखाई देने लगेगा। अगर आप किसी शोर से दूर शांत माहौल में रहना पसंद करते है तो यह जगह आपके लिए बेस्ट साबित होगी। ताज़ी हवा, शांत माहौल, हरे-भरे पेड़, चिड़ियाओं के चहकने की आवाज बहुत ही पॉजिटिव वाइब्स ले आती है। ऐसी जगह आकर कोई भी अपना तनाव भूल जायेगा। यह आश्रम अल्मोड़ा से 40 किलोमीटर की दूरी पर है। कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा से 8 किमी दूर देवी गांव में यह मंदिर है, और लगभग दूसरी सदी का माना जाता है। यहाँ के स्थानीय लोग माँ कसार देवी की शक्तियों पर अटूट आस्था रखते है। यह मंदिर देवी गांव में कश्यप पहाड़ी पर गुफा नुमा स्थान में बना हुआ है। कहा जाता है कि इस मंदिर में माँ दुर्गा प्रकट हुयी थी और इसी वजह से यहाँ माँ दुर्गा को पूजा जाता है।अल्मोड़ा में मंदिरों के साथ साथ और भी बहुत सी जगहें घूमने लायक हैं। ज़ीरो पॉइंट, कटारमल सूर्य मंदिर, डियर पार्क, दुनागिरि मंदिर, ब्राइट एन्ड कार्नर, पंडित गोविन्द बल्लाभ पंत संग्रालय, और भी बहुत सी ऐसी जगहें है जहाँ जाकर आपकी ट्रिप मुकम्मल हो जाएगी। इसके अलावा अल्मोड़ा में चारों तरफ रानीखेत, चौकोरी, शीतलखेत, बिनसर, कौसानी और बागेश्वर जैसे कई शांत पहाड़ी शहर बास्ते हैं। अल्मोड़ा की फेमस मिठाईबाल मिठाई – अल्मोड़ा की “बाल मिठाई” के चर्चे तो देश भर में है। अल्मोड़ा की फेमस बाल मिठाई और सिंगोड़ी यहाँ की पहचान है। बाल मिठाई एक ब्राउन चॉक्लेट की तरह होती है जिसे खोये को भून कर बनाया जाता है, और बाहर से इसमें सफ़ेद चीनी के गोले लगाए जाते है। जिससे ये देखने में बहुत टेस्टी दिखाई पड़ती है। सिंगोड़ी – अब कुमाऊँ आकर सिंगोड़ी का स्वाद नहीं लिया तो क्या ही कुमाऊँ आना। खोया (गाढ़ा दूध) से बनी यह मिठाई एक अलग ही प्रकार से देखने को मिलती है, क्योंकि यह मिठाई बनने के बाद मोलू के पत्ते में लपेटी जाती है। और सोफ्टी आइसक्रीम की तरह इसका शेप बनाया जाता है। मोलू के पत्ते की ताजी महक और इलायची और नारियल के स्वाद वाले दूध का स्वाद आपको और किसी मिठाई में नहीं मिलेगा। और पूरे कुमाऊँ में ये मिठाई आपको सिर्फ अल्मोड़ा में मिलेगी। कल्चर ऑफ़ अल्मोड़ा : क्योंकि अल्मोड़ा कुमाऊँ रीजन में पड़ता है इसलिए अल्मोड़ा में पूरा कुमाऊनी कल्चर है। जैसे हिलजात्रा, छलिया डांस आदि। इसके अलावा यहाँ की भाषा भी कुमाऊनी है, और त्यौहार भी कुमाऊनी कल्चर में मनाये जाते है। कैसे पहुंचे अगर दिल्ली से अल्मोड़ा आने की बात करें