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मंजिल से कहीं ज्यादा खूबसूरत हैं ये सफर- जानिए भारत के सबसे खूबसूरत रोड ट्रिप्स के बारे में….

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मंजिल पर पहुँच जाने की खुशी और एक्साइटमेंट तो सभी को होती है, लेकिन क्या कभी आपने सफर को इंजॉय किया है? इस सवाल पर आप में से ज्यादातर लोगों का यही जवाब होगा कि नहीं! लेकिन यकीन मानिए, आज हम आप सभी को कुछ ऐसे रोड ट्रिप्स के बारे में बताएंगे जो मंजिल से कहीं ज्यादा खूबसूरत हैं। बस जरूरत है उन्हें महसूस करने की और अपनी सारी परेशानियों को भूल कर उस सफर के हर लमहे को जीने की। इस ब्लॉग में हम आपको उन रास्तों के बारे में तो बताएंगे हीं लेकिन उनके साथ साथ हम आपको किन-किन बातों का ख्याल रखना है जिससे कि आपकी ट्रिप खराब ना हो और एक यादगार ट्रिप बन सके इसके बारे में भी बताएंगे। कुफरी से चैल (Kufri to Chail) : कुफरी से चैल के सफर में आपको कहीं घने जंगलों के बीच से जा रही सांप की तरह घुमावदार सड़के दिखेंगी तो कहींएक ओर ऊंची ऊंची पहाड़ियां और दूसरी और गहरी खाई। यह सफर जितना खूबसूरत होता है, उतना हीं ज्यादा एडवेंचरस (Adventure) भी। खास करके बाईकर्स (biker) के लिए तो यह जगह सबसे बेस्ट मानी जाती है। ना शोर-शराबा और ना हीं पॉल्यूशन, एक साफ-सुथरे माहौल में नेचर (nature) को फील करते हुए बाइक राइडिंग (Bike riding) करना अपने आप में ही एक बेहतरीन फीलिंग होती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह जगह सिर्फ बाइकर्स को पसंद आती है। आप यहां अपने कार में या किसी कैब को बुक करवा कर अपनी फैमिली के साथ भी टाइम स्पेंड (Time spending) करने आ सकते हैं। यहां कहीं आपको चारों ओर देवदार के घने जंगल और ऊंची पहाड़ियां तो कहीं गहरी खाई देखने को मिल जाएंगी। नेचर फोटो शूट के लिए भी यह जगह बेस्ट है। अगर आप भी फोटोग्राफी पसंद करते हैं कुफरी से चैल तक का यह सफर आपके लिए और इंटरेस्टिंग (Interesting) हो जाएगा। लेकिन यहां आपको ड्राइविंग (driving) करते वक्त स्पीड (speed) का खास ख्याल रखना होगा। क्योंकि यहां की सड़कें काफी घुमावदार हैं और सड़क की दूसरी ओर गहरी खाई है जो इस सफर को खूबसूरत तो बनाती है लेकिन साथ ही साथ रिस्कीे (risky) भी बनाती है। इसके अलावा इस जगह पर आप को सितंबर के महीने में भी घना कोहरा देखने को मिल जाएगा। यहां मौसम भी बहुत ज्यादा चेंज होता है। कहीं आपको धूप दिख जाएगी तो कहीं कोहरा। कभी खुशनुमा माहौल होगा तो कभी बरसात! ऐसे में टूरिस्ट (tourists) के लिए लिए अपने साथ रेनकोट (rain coat) रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है। कुफरी से चैल के रास्ते में आपको देवदार के जंगल देखने को मिलेंगे। साथ ही साथ इस रास्ते में कुछ गिने-चुने घर भी देखने को आपको मिल जाएंगे।इस सफ़र पर निकलने से पहले आपको मौसम की पूरी जानकारी रखनी होगी। क्योंकि कई बार यहां लैंडस्लाइड (landslide) की घटना हो जाती है। ऐसे में मौसम विभाग की दी गई जानकारियों का भी आपको ख्याल रखना होगा। जिससे आप सुरक्षित रोड ट्रिप का मजा ले सके। कुफरी से चैल का रास्ता लगभग 25 किलोमीटर का है। जिसे पार करने में आपको लगभग 1 घंटे का समय लग सकता है। क्योंकि यहां आप तेज ड्राइविंग नहीं कर सकते हैं। आपको अपनी गाड़ी की स्पीड स्लो (slow) ही रखनी पड़ेगी। शिमला से नारकंडा (Shimla to Narkanda) : अगर आप भी कभी शिमला जाओ तो शिमला से नारकंडा के लिए रोड ट्रिप पर जाना ना भूले। यकीनन यह आपके जिंदगी की सबसे बेस्ट एक्सपीरिएंस (Best experience) में से एक होगा। साफ और खुला आसमान सुहाना का मौसम और घुमावदार सड़क देख कर आपको ऐसा लगेगा जैसे मानो किसी जन्नत में आ गए हो। पहाड़ी इलाकों की यहीं तो खास बात होती है। यहाँ हरियाली भी होती है, बर्फ भी होता है और तो और खुला आसमान भी होता है। बस नहीं होता है तो शोर शराबा और पॉल्यूशन (Pollution)।अगर आप भी भागदौड़ की जिंदगी से दूर जाकर खुद के साथ समय बिताना हो तो आप शिमला से नारकंडा के रोड पर जा सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप सोलो ट्रिप (solo trip) पर जाना चाहते हैं या फिर फैमिली और फ्रेंड्स (family and friends) के साथ। अगर आप सोलो ट्रिपल जा रहे हैं तो बाइक राइडिंग का भी मजा ले सकते हैं। यहां भी आपको उन्हीं बातों का ख्याल रखना है, जिनका जिक्र मैंने पहले भी किया है। अपने साथ एक रेनकोट कैरी (Carry) करना होगा। साथ ही साथ स्पीड का भी ध्यान रखना होगा। शिमला से नारकंडा का सफर लगभग 60 किलोमीटर के आसपास का है। इस सफर को पूरा करने के लिए आपको 2 से ढाई घंटे का समय लग सकता है। यहां आपको समय का भी का ख्याल रखना होगा। क्योंकि शिमला में बहुत ज्यादा ट्रैफिक (Trafic) रहती हैं। खासकर गर्मी के समय यहां ट्रैफिक की बहुत ज्यादा समस्या देखने को मिलती है। तो ट्राफिक से बचने के लिए आप अर्ली मॉर्निंग (early morning) हीं नारकंडा के लिए निकल सकते हैं।क्योंकि अर्ली मॉर्निंग रश (rush) कम होता है या ना के बराबर होता है। ऐसे में आप अपने ट्रिप को अच्छे से इंजॉय (enjoy) कर पाएंगे। मनाली से लेह (Manali to Leh) : मनाली से लेह तक का रोड ट्रिप दुनिया के सबसे खूबसूरत रोड ट्रिप्स (world’s best road trips) में से एक है। इस सफर को और भी ज्यादा खास बनाते हैं यहां के खतरनाक रास्ते (dangerous roads)। जहां आपको कहीं दूर-दूर तक बर्फ के चादर नजरआएंगे तो कहीं रास्ते इतने पथरीले हो जाएंगे कि उन रास्तों पर ड्राइविंग करना अपने आप में ही एक चैलेंज हो जाएगा। मनाली से लेह (लद्दाख) का डिस्टेंस (distance between Manali to Leh) लगभग 427 किलोमीटर के आसपास है। जो आप आसानी से अपने बाइक या कार से कवर कर सकते हैं।

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10 Reasons Why You Should Visit the Most Visited Fort of India | Agra Fort❓

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अगर आपको ऐतिहासिक स्थलों (historical places) के बारे में जानने का शौक है और आपकी रूचि सिर्फ इतिहास के पन्नों में ना सिमटकर बाहर घूमने फिरने में है, दुनिया देखने में है तो आपके लिए आपका अगला डेस्टिनेशन हो सकता है आगरा का किला। आपने यह तो सुना ही होगा कि आगरा में एक किला है, जहां के महलों से खड़े होकर दूर ताजमहल को देखा जा सकता है। अगर नहीं सुना तो भी कोई बात नहीं। क्योंकि इस ब्लॉग में हम आपको इसे किले के बारे में बहुत सी ऐसी जानकारी देने वाले हैं जिनके बारे में जानना आपके लिए भी एक नया अनुभव होगा। जैसा कि नाम से ही जाहिर होता है, यह किला दिल्ली से लगभग 232 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आगरा शहर में है। आगरा में दुनिया का सातवां अजूबा (7th Wonder of the World) ताजमहल तो है ही, इसके साथ हीं यहां एक किला भी है। जिसे आगरा के लाल किले के नाम से भी जाना जाता है। आगरा के किले का इतिहासHistory of Agra Fort : अगर इस किले के इतिहास की बात की जाए तो मुगल वंश (Mughal Empire) के 4 शासकों ने इस किले पर राज किया। जिनमें अकबर फिर जहाँगीर फिर शाहजहाँ और फिर बहादुर शाह जफर का नाम आता है। इसके निर्माण के बारे में बताया जाता है कि, इस जगह पर पहले खंडहर हुआ करता था। अकबर जब 1558 में फतेहपुर सीकरी से आगरा आए तो उन्होंने राजस्थान के धौलपुर जिले के बरौली क्षेत्र से लाल बलुआ पत्थर मंगवा कर, इसको दोबारा नए सिरे से बनवाया था। इसलिए इस किले को अकबर का किला (Akbar’s Palace) भी कहा जाता है। इस किले को बनवाने के लिए उस समय के बेहतरीन आर्किटेक्टों को बुलाया गया था। इसके बाहरी कोर को बलुआ पत्थर और अंदर के कोर को ईटों के साथ बनवाया गया है। उस समय लगभग 4000 कारीगरों ने लगातार 8 वर्षों तब इस किले के निर्माण के लिए काम किया और इस किले को 1573 में बना कर तैयार किया गया। अगर इस किले के आधुनिक इतिहास जाना जाए तो यह किला यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल (UNESCO World Heritage Site) की सूची में शामिल होने वाला भारत का पहला ऐतिहासिक स्थल (Historical Monument) था। जिसे यूनेस्को ने वर्ष 1983 में अपने वैश्विक धरोहरों की सूची में शामिल किया था। क्योंकि इस किले के निर्माण में लाल बलूआही पत्थरों (Red Sandstone) का इस्तेमाल किया गया है। इसीलिए इस किले को आगरा का लाल किला भी कहा जाता है। बेहतरीन है यहां का आर्किटेक्चर(Amazing Architecture of this Fort) : शीश महल (glass palace) : बात की जाए इस किले के आर्किटेक्चर की तो, दुनिया का सबसे खूबसूरत बाथरूमशमों से एक बाथरूम शीश महल, जिसे ग्लास पैलेस के नाम से भी जाना जाता है, इसी किले में मौजूद है। जिसे शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज के स्नान के लिए बनवाया था। इस शीश महल में चारों ओर शीशे लगे हुए हैं और नहाने के लिए गर्म पानी की सुविधा की गई थी। शीश महल तीन भागों में बँटा हुआ था। जिसमें पहला हिस्सा ठंडे पानी के लिए था, दूसरा हिस्सा गर्म पानी के लिए और तीसरा हिस्सा मसाज के लिए था। शीश महल की बनावट ऐसी थी कि अगर वहां एक दिया जलाया जाता था तो चारों ओर 100 दिए के जितने उजाला होता था। बादशाह का आरामगाह : शीश महल के अलावा इस किले में जहांगीर का आरामगाह भी था। जिसमें रियल सोने की पेंटिंग (Real Gold Painting) की गई थी। दूसरे भाग में ब्रिटिश के द्वारा पिघला पिघला कर अपने देश ले जाया गया। लेकिन अभी इसके अवशेष किले में मौजूद है। किले के दीवारों में की गई नक्काशी में जड़े गए हर एक रत्न की अपनी एक अलग ही खासियत थी और सारे रत्न अलग-अलग रंगों में चमकते थे। जब आप दोपहर के 3:00 से 4:00 के बीच इसके लिए आएंगे सोने की नक्काशी के अवशेष उस समय सूरज की रोशनी में जगमगाते हुए दिखेंगे। जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब इस पर पूरी सोने की परत चढ़ी हुई होगी तब यह कितना चमकता होगा। हवा महल (Hawa Mahal) : इस किले में एक हवा महल भी है। अकबर ने अपने बेटे सलीम को उपहार में दिया था। इस हवा महल की बनावट ऐसी थी कि बिना बिजली और एसी के भी इस महल में ऐसी (Air conditioner) के जितना ठंडक होता था। अगर इसके बनावट की बात की जाए तो इसके दीवारों को दोहरे लेयर में बनाया गया था और दोनों दीवारों के बीच में पानी डाला गया था। पानी से दीवार में सीलन ना लगे इसके लिए दीवारों को बनाने में मुल्तानी मिट्टी (Multani Clay) का उपयोग किया गया था। इस सफेद संगमरमर से बने महल खिड़कियों को बाहर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि ये खिड़कियां बंद है। लेकिन जब आप अंदर जाएंगे तो आपको दिखेगा कि वह सब बस एक आंखों का इल्युजन (illusion) है। असल में खिड़कियां खुली हुई होती हैं। दीवान-ए-खास (Diwan-i-khas) : इस महल में दीवान-ए-खास नाम से भी एक जगह था। जहां बादशाह अपने मुलाजिमों के साथ बैठकर सलाह मशवरा किया करते थे। दीवान-ए-खास दो हिस्सों में बटा हुआ था। एक अंदर का और एक बाहर का। बाहर के हिस्से में भी बादशाह शाम के समय बैठा करते थे। जहां काले रंग के सिंहासन पर बादशाह बैठते थे और सफेद रंग का सिंहासन उनके सलाहकार के लिए होता था। वहीं बाकी मुलाजिम कार्पेट पर बैठा करते थे। जब आप दीवान ए खास के काले सिंहासन के पास जाएंगे तो आपको वहां से ताजमहल साफ साफ दिखाई देगा। रंग महल (Rang Mahal) : इन सभी के अलावा महल में एक हिस्सा मनोरंजन के लिए भी होता था। जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता था। रंग महल में सबसे ऊपर बादशाह का सिंहासन होता था। वहीं उससे नीचे परदे में रानियां बैठा करती थीं और आसपास की खिड़कियों से सैनिक और अन्य मुलाजिम समारोह और नृत्य प्रदर्शन का आनंद लिया करते थे। रंग महल का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। सुरक्षा घेरा (Defensive structure) : शाहजहाँ का कैदखाना (Shah Jahan’s

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Top 5 South Indian Food Restaurants in Delhi Ncr | People Don’t Know🥣

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•Navaidyam •Padmanabham •Jaggarnaut •SarvanaBhavan •Bheemeshwara इस ब्लॉग हम आपको बताने जा रहे हैं दिल्ली स्थित कुछ ऐसे रेस्टोरेंट्स के बारे में जहां आप प्रॉपर साउथ इंडियन डिशेज (proper south Indian dishes) का आनंद उठा सकते हैं। यहां आकर आपको ऐसा लगेगा कि आप केरल या फिर तमिलनाडु में बैठकर खाना खा रहे हैं। 1. नवैद्यम : कनॉट प्लेस(Navaidyam Connaught place) दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित नैवेद्यम रेस्टोरेंट अपने साउथ इंडियन अंदाज़ के लिए काफी फेमस है। इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दिल्ली एनसीआर में इसके 10 ब्रांचेस है।कनॉट प्लेस स्थित इस रेस्टोरेंट के भीतर आते हीं आपको प्रॉपर साउथ इंडियन वाइब्स आने लगेंगे। यहां आते ही सबसे पहले आपको छोटे से गिलास में छाछ सर्व किया जाएगा जिसकी ठंडी तासीर आप को गर्मी से तुरंत रिलीफ दिला देगी। यहां के मेन्यू कार्ड में बहुत सारी साउथ इंडियन डिशेज की वैरायटी उपलब्ध है। आपको यहां हर तरह के साउथ इंडियन डिश खाने को मिल जाएंगे। यहां आपका ऑर्डर केले के पत्ते में परोस कर लाया जाता है। इसके साथ ही यहां काम करने वाले सभी स्टाफ प्रॉपर साउथ इंडियन गेट-अप (South Indian get up) में होते हैं। जिसे देखकर आपको बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगेगा कि आप दिल्ली में हैं। यहां के मैन्यू कार्ड में आपको 15 से भी ज्यादा टाइप के डोसा, इडली, वडा और उत्तपम देखने को मिल जाएंगे। अगर आप खाने के बाद डेजर्ट खाना पसंद करते हैं तो आपको डेजर्ट के ऑप्शन भी यहां मिल जाएंगे। खाने के बाद दिया जाने वाला सौंफ और मिश्री सोने पर सुहागा का काम करता है। यह रेस्टोरेंट दिल्ली के कनॉट प्लेस में रीगल बिल्डिंग के पास स्थित है। You Should Also Read: Best Water Parks in Delhi Ncr 2. पदमनाभम : ग्रेटर कैलाश(Padmanabham Greater Kailash) ग्रेटर कैलाश स्थित यह पद्मनाभम रेस्टोरेंट अपने साउथ इंडियन टेक्सचर (South Indian texture) के लिए पूरे दिल्ली में काफी मशहूर है। इस रेस्टोरेंट का खाना ही नहीं बल्कि यहां की इंटीरियर भी वाकई लाजवाब है। आप जब रेस्टोरेंट के अंदर एंटर करते हैं तो आपको चारों ओर वॉल पर लगाई गई पेंटिंग्स और रेस्टोरेंट के एक कोने में बनाए गए छोटे से मंदिर में रखी गई बालाजी की मूर्ति को देख कर भारतीय संस्कृति की संपन्नता का अद्भुत झलक देखने को मिलेगा। अगर बात करें यहां के मैन्यू की तो यहां के मैन्यू वीक में दिनों के हिसाब से चेंज होती रहती है। या यूं कहें की यहां के मैन्यू कार्ड दिन-ब-दिन बदलते रहते हैं। इस रेस्टोरेंट में चार दक्षिण भारतीय राज्य केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के पारंपरिक भजनों को परोसा जाता है। यहां सप्ताह में दिन के हिसाब से किसी एक राज्य पर फोकस किया जाता है। इस रेस्टोरेंट की एक और खास बात यह है कि यहां के डिशेज में स्पेशल साउथ इंडिया से मंगाए गए मसाले डाले जाते हैं, जो यहां के खाने का स्वाद और निखार देते हैं। यहीं वजह है कि आपको हर बाइट (Bite) में स्पेशल साउथ इंडियन जायके का अनुभव होगा। अपने अनोखे साउथ इंडियन स्वाद के लिए मशहूर पदमनाभम खाने के शौकीन लोगों के आकर्षण का केंद्र है। यहीं वजह है कि यहां वीकेंड्स (weekend) में आपको पहले ही बुकिंग करवा कर रखना होगा।हो सकता है कि वीकडेज (weekdays) में भी आपको यहां लंच करने के लिए इंतजार करना पड़े। 3. जगरनॉट रेस्टोरेंट : ग्रेटर कैलाश(Juggernaut Restaurant Greater Kailash) यह रेस्टोरेंट दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में स्थित है। आप दिल्ली के किसी भी कोने से यहां पहुंच सकते हैं। बात करें इस रेस्टोरेंट्स के बारे में तो यह सिर्फ खाने की डिश के लिए हीं मशहूर नहीं है बल्कि यहां की प्रेजेंटेशन भी लाजवाब है। रेस्टोरेंट में इंटर करते ही आपका अतिथि सत्कार किया जाता है और आपको टीका लगाया जाता है। जिसमें अतिथि देवो भवः की झलक देखने को मिलती है। इस तरह का अतिथि सत्कार भारतीय संस्कृति की संपन्नता को दर्शाता है। एंट्री के पास हीं आपको साउथ इंडियन स्नैक्स (South Indian snacks) मिल जाएंगे, जिन्हें आप अपनी इच्छा अनुसार खरीद सकते हैं। इस रेस्टोरेंट में बैठने की व्यवस्था फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर की गई है। अगर आप वीकेंड में आते हैं तो आपको यहां अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ेगा। हो सकता है, इंतजार एक घंटे का भी हो जाए। वहीं वीकडेज में भी कभी-कभार आपको रश देखने को मिल सकता है। ऐसे में आप पहले से ही अतिरिक्त समय लेकर आए। अगर बात किया जाए यहां के इंटीरियर की तो यहां के हर एक कोने कोने से आपको भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इस रेस्टोरेंट की बनावट कुछ ऐसी है कि यहां आप खाना खाते हुए बाहर के ग्रीनरी व्यू का भी मजा ले सकते हैं। अगर यहां के खाने की बात की जाए तो यहां बैठने के साथ ही आपको और पापड़ और रसम सर्व किए जाएंगे। जिसका स्वाद आपकी भूख को और जगाने का काम करेगा। यहां के मैन्यू में आपको हर तरह के साउथ इंडियन फूड जैसे इडली, डोसा, मेदू वडा, अप्पम और उत्तपम आदि मिल जाएंगे। 4. सर्वाना भवन : कनॉट प्लेस(Sarvana Bhavan Connaught Place) दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित यह रेस्टोरेंट सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। इसकी प्रसिद्धि के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। अगर आप यहां आते हैं तो यहां आपको टाइम मार्जिन लेकर चलना होगा। क्योंकि हो सकता है आपको अपनी बारी के लिए घंटे भर तक वेट करना हो। यह एक प्रॉपर साउथ इंडियन रेस्टोरेंट है। जिसके 33 ब्रांच इन इंडिया में और 78 ब्रांच इंडिया से बाहर हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि, यह कितना पॉपुलर है। जनपथ मेट्रो स्टेशन (Janpath Metro Station) से वॉकिंग डिस्टेंस (walking distance) पर स्थित यह रेस्टोरेंट लोगों के बीच अपने साउथ इंडियन जायके के लिए जाना जाता है। अगर बात करें यहां के खाने की तो अगर आप डोसा खाना पसंद करते हैं तो यह रेस्टोरेंट आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। यहां डोसा की इतनी वैरायटी है कि, यहां के मेन्यू कार्ड को देखकर आप खुद सोच में पड़ जाएंगे कि कौन सा डोसा

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5 Most Famous Highly Recommended National Parks to Visit Near Delhi NCR🏝

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शहरों की बढ़ती आबादी और पॉल्यूशन (pollution) पूरी दुनिया में एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। भारत में भी महानगरों की स्थिति ऐसी हो गई है कि पेड़ों की संख्या कम और इंसानों की गिनती ज्यादा है। यह ना सिर्फ स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को उत्पन्न करता है, बल्कि लोगों में बढ़ रहे मानसिक तनाव का भी एक बड़ा कारण है। ऐसे में नेचर को अपने करीब महसूस करने के लिए और जिंदगी से कुछ सुकून के पल चुराने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है, जंगल सफारी। आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे नेशनल पार्क्स के बारे में जहां आप आसानी से जंगल सफारी कर सकते हैं और प्रकृति को अपने करीब से महसूस कर सकते हैं। यह नेशनल पार्क प्रकृति के खजाने( Natural Treasure Of India)  को संजो कर रखते हैं और धरती के वातावरण को जीवन के अनुकूल बनाए रखने में मदद करते हैं। तो आइए आपको बताते हैं कि आप कैसे इंडिया के वाइल्ड लाइफ को एक्सप्लोर कर सकते हैं(exploring india’s wilderness) : कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है।  बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। इतिहास (history) : बात करें अगर कूनो नेशनल पार्क के इतिहास की तो इसे 1981 में एक वन अभ्यारण्य के रूप में स्थापित किया गया था जिसे 2018 में नेशनल पार्क की उपाधि दे दी गई। जब 1992 गुजरात के गिर से शेरों को विस्थापित कर किसी दूसरे जगह भेजने का प्रस्ताव पारित हुआ तो, कूनो को इस सिंह परियोजना के लिए चुना गया था। मध्य प्रदेश सरकार ने कूनो में शेरों के स्वागत के लिए 2003 तक कूनो के आसपास के क्षेत्र में बसे 29 गांव को विस्थापित कर शेरों को लाने की सारी तैयारी कर ली थी। इसके बाद से ही गुजरात सरकार से शेर मांगे जा रहे हैं लेकिन गुजरात सरकार किसी ना किसी बहाने से इस प्रोजेक्ट में अड़ंगा लगा रही है। कैसे पहुंचे? (how to reach?) ग्वालियर एयरपोर्ट कूनो नेशनल पार्क के सबसे नजदीक स्थित एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट देश के अन्य शहरों जैसे दिल्ली, कोटा, पटना, जयपुर आदि से भली भांति जुड़ा हुआ है। दिल्ली एयरपोर्ट से ग्वालियर के लिए फ्लाइट लगभग ₹2000 से ₹3000 तक की आती है। आप नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से भी ग्वालियर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप बाय रोड भी कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (Jim Corbette National Park) पहाड़ियों की गोद में बसे हुए इस नेशनल पार्क में आकर आपके सारे थकान दूर हो जाएंगे और मन तरोताजा हो जाएगा। यह एक हिल स्टेशन(hill station) नेशनल पार्क है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहां 480 से भी ज्यादा प्रकार के पौधे पाए जाते हैं (rich biodiversity)। नैनीताल के पास बसा यह नेशनल पार्क हाल फिलहाल के दिनों में पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र रहा है। इतिहास (history) यह पार्क उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। जिम कार्बेट नेशनल पार्क को 1936 में हेली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। जिम कॉर्बेट ने इस पार्क की स्थापना में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उन्हीं के सम्मान के लिए इस पार्क का नाम बदलकर जिम कार्बेट नेशनल पार्क किया गया। इस नेशनल पार्क का क्षेत्रफल लगभग 1318 वर्ग किलोमीटर है और यह नेशनल पार्क ना सिर्फ जंगली जानवरों बल्कि कई प्रकार के प्रवासी पक्षियों और तितलियों का भी घर है। यह नेशनल पार्क हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है और इसकी स्थापना लुप्त हो चुके बंगाली बाघों (Royal Bengal tiger) के रक्षा के लिए किया गया था। बाघों के संरक्षण के लिए यहां सबसे पहले पहल किया गया था। कार्बेट नेशनल पार्क में पहाड़ी, नदी, दलदल के गड्ढे, घास के मैदान और एक बड़ी झील शामिल है। इस पार्क में आपको ताल, पीपल, रोहिणी और आम आदि के पेड़ देखने को मिल जाएंगे। यह पार्क नम पर्णपाती वनों की सूची में आता है। इस पार्क में आपको कई प्रकार के टूरिस्ट जोन देखने को मिलते हैं। जिनमें से कुछ निम्नांकित हैं (types of tourist zone) – बिजरानी सफारी जोन : इस सफारी जोन की खासियत यहां के खुले घास के मैदान हैं। यह सफारी जोन रामनगर से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ढेला सफारी जोन : यह नया इको टूरिज्म सफारी जोन है। जिसे नवंबर 2014 में शुरू किया गया था। यह सफारी जोन इकलौता ऐसा सफारी जोन है जो नेशनल पार्क के बफर जोन में स्थित है। बफर जोन की रिच बायोडायवर्सिटी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। यहीं वजह है कि इस सफारी जोन के लिए लोगों की भीड़ ज्यादा होती है। झिरना सफारी जोन : यह सफारी जोन पूरे साल भर पर्यटकों के लिए खुला रहता है और यह रामनगर सिटी से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इनके अतिरिक्त यहां दुर्गा देवी जोन, सीताबनी जोन जैसे सफारी जॉन भी हैं। जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कैसे पहुंचे? (How to reach?) जिम कार्बेट नेशनल पार्क से नियरेस्ट एयरपोर्ट है पटनागर एयरपोर्ट। जिसके लिए दिल्ली एयरपोर्ट से आपको लगभग 3000 रुपए से 5000 रुपए तक के बीच में टिकट मिल जाएंगे। आप यहां जाने के लिए ट्रेन मार्ग या फिर सड़क मार्ग का भी उपयोग कर सकते हैं। राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है।

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Why Delhi Ncr’s People Visiting Hill Stations Nowadays | 2023

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•Solang •Shimla •Tirthan valley (kullu) •Rajgarh hills •Mussoorie •Dhanoulti मई का महीना चल रहा है और गर्मी काफी बढ़ गई है। ऐसे में चिलचिलाती धूप और बढ़ते हुए तापमान (temperature) से निजात पाने का सबसे बेस्ट(best) तरीका है कि कुछ दिनों के लिए छुट्टियां मनाने किसी हिल स्टेशन(hill station) जाने की प्लानिंग की जाए। तो आइए जानते हैं दिल्ली एनसीआर (Delhi-NCR) के आसपास के कुछ ऐसे पापुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशंस(Popular tourists destinations) के बारे में जहां आप इस गर्मी में छुट्टियां मनाने जा सकते हैं। Solang Valley Hill Station पहाड़ियों के गोद में बसे हुए हिमाचल प्रदेश के इस शहर की खूबसूरती देखने लायक है। सोलंग वैली पहुंचते हीं आपको सबसे पहले दिखेगा नेहरू कुंड मंदिर। जहां आप दर्शन करने रुक सकते हैं। इसी रूट में आगे जाकर आपको वह ब्रिज दिखेगा जहां टैंगो चार्ली मूवी की शूटिंग भी हुई थी। सोलंग वैली में आपको हर ओर पैराग्लाइडिंग और बाइक राइडिंग जैसी कई तरह की एडवेंचर एक्टिविटी (adventures activities)  होती दिखाई देंगी। यूं तो सोलंग वैली आप कभी भी आ सकते हैं लेकिन, अगर आप बर्फ देखना चाहते हैं तो आपको दिसंबर या जनवरी के महीने में यहां आना चाहिए। इस समय यहां चारों ओर बर्फ हीं बर्फ दिखाई देंगे। यहाँ आप बहुत सारे स्नो एक्टिविटीज (snow activities) का लुफ्त उठा सकते हैं। Best activities to do in sholang valley सोलन वैली में स्कीइंग (skiing) करने का पूरा खर्च आपको ₹500 से ₹600 तक आएगा। यहां आप सुबह 9:00 से श्याम 4:00 तक कभी भी 15 से 20 मिनट के लिए स्कीइंग (skiing) कर सकते हैं।अगर आप की भी इच्छा खुले आकाश में उड़ने की है तो, आप यहां पैराग्लाइडिंग (paragliding) भी कर सकते हैं। जिसका खर्च आपको ₹2000 तक का आ सकता है। यहां सुबह के 8:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक 5 से 10 मिनट के लिए पैराग्लाइडिंग कर सकते हैं। सोलंग वैली पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ है, इसीलिए यहां एडवेंचर टूरिज्म(adventure tourism) बहुत ज्यादा फल फूल रहा है।यहां ट्रेकिंग की एक्टिविटीज (activities) भी की जा सकती हैं जिसका खर्च आपको ₹1200 से ₹1500 तक का आ सकता है। यहां आप लगातार 2 दिन तक ट्रैकिंग (tracking) भी कर सकते हैं। जो पहले दिन के 10:00 बजे सुबह शुरू होता है और दूसरे दिन के 1:00 बजे दोपहर में जाकर खत्म होता है।अगर आपको भी कैंपिंग करना पसंद है और टेंट हाउस और बोनफायर मैं दिलचस्पी है तो, आप सोलंग में कैंपिंग भी कर सकते हैं। जिसकी कीमत आपको ₹1000 से ₹1500 तक की पड़ेगी। अगर आप सोलंग वैली जा कर अच्छे से घूमना चाहते हैं तो, आपको पूरे ट्रिप का मिनिमम खर्च 15000 रुपए तक का आएगा। आपको सोलंग वैली को अच्छे से एक्सप्लोर(explore) करने लिए कम से कम 3 दिन के ट्रिप की प्लानिंग करनी होगी। सोलंग वैली के आसपास होटल में रहने के लिए आपको एक रात का खर्च ₹1000 से ₹2000 तक का आ सकता है। यहां होटल की बहुत सारी वैरायटी है। आप अपने बजट के अनुसार अपना होटल चुन सकते हैं। How to reach sholang valleyइस हिल स्टेशन (hill station) की दिल्ली से दूरी लगभग 540 किलोमीटर है। बाय रोड टैक्सी से यहां जाने का लगभग खर्च ₹7000 से ₹8000 रुपए तक का आता है। वहीं अगर आप न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से ट्रेन से सोलंग वैली जाते हैं, तो इसका खर्च ₹1500 तक का आता है। अगर आप फ्लाइट (flight) के द्वारा सोलंग वैली पहुंचना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको दिल्ली इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) से कुल्लू मनाली एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट (flight) ₹9000 से ₹25000 तक में मिल सकती है। SHIMLA अपने आप को नेचुरल रिट्रीट(natural retreat) देने का सबसे बेहतरीन तरीका है पहाड़ों की सैर पर निकल जाना। अब पहाड़ों की बात हो और शिमला का नाम ना आए ऐसा हो नहीं सकता। शोर-शराबे से दूर और प्रकृति के नजदीक स्थित इस शहर की ओर कपल्स का काफी रुझान होता है। पनोर्मिक व्यूज़(panoramic views) वाला यह जगह काफी रोमांटिक डेस्टिनेशन(romantic destination) के रूप में जाना जाता है। चारों ओर दिखने वाली बर्फ से ढकी सफेद पहाड़ियां और हरे-भरे देवदार के पेड़ किसी का भी मन मोह लेने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। यह जगन सिर्फ सीनरी(scenery) के लिए नहीं बल्कि शॉपिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। शिमला स्थित माल रोड शॉपिंग के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां आपको खान-पान से लेकर पुरानी एंटिक चीजों तक का एक बड़ा कलेक्शन देखने को मिल जाएगा। यहां शिमला के पारंपरिक परिधान भी खरीद सकते हैं। शिमला में एक और फेमस जगह है वह जाखू हिल्स। इस जगह पर हनुमान जी का एक बड़ा मंदिर है। साथ हीं एक बहुत बड़ी मूर्ति भी है, जो काफी दूर से हीं दिख जाती है। इस मंदिर की खासियत है यहां आपको सैकड़ों दर्जनों लंगूर और बंदर खेलते हुए मिल जाएंगे। चारों ओर हरियाली से घिरा यह मंदिर उन लंगूरों और बंदरों के लिए घर की तरह है। How to reach shimla शिमला की दिल्ली से दूरी लगभग 340 किलोमीटर है और यहां आप बाय रोड, ट्रेन और फ्लाइट तीनों ही रास्तों से जा सकते हैं। अगर आप टैक्सी(taxi) से शिमला जाना चाहते हैं तो आपको ₹5500 से ₹6000 तक का खर्च आता है। वहीं अगर आप ट्रेन से शिमला जाते हैं तो ₹700 से ₹800 में आपको टिकट मिल जाएगी। अगर आप फ्लाइट से शिमला जाते हैं तो इकोनामी क्लास के फ्लाइट की टिकट्स ₹2900 से शुरू हो जाते हैं। Tirthan Valley अगर आप रोजमर्रा के शोर-शराबे से दूर कुछ दिन शांत और शुद्ध वातावरण में बिताना चाहते हैं तो, तीर्थन वैली आपके लिए एक अच्छा डेस्टिनेशन (destination) हो सकता है। चारों ओर हरे भरे पेड़ों और वनस्पतिक घासों से घिरा हुआ यह जगह ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क(Great Himalayan National Park) के बफर जोन( Buffer Zone) में स्थित है। आप यहां फिशिंग (fishing), रॉक क्लाइंबिंग (Rock climbing), रैपलिंग(rapling), साइट सीइंग (sightseeing) आदि जैसे एडवेंचरस एक्टिविटीज का आनंद ले सकते हैं। यह सारे एक्टिविटीज पूरी तरह फैमिली फ्रेंडली family-friendly हैं। Best things to do in tirthan valley तीर्थन वैली में कैंपिंग (camping) के पैकेज में ट्रैकिंग, फिशिंग, रैपलिंग आदि एक साथ ही इंक्लूड(include) होता है। यहां कैंपिंग(camping)

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Gurudwara Sis Ganj Sahib | A Gateway to Sikh Heritage | Delhi

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You Should also read: Best Tourist Places to Visit in Delhi दिल्ली में कुल 9 प्रमुख गुरुद्वारे हैं और उन्हीं में से एक है चांदनी चौक स्थित शीश गंज साहिब गुरुद्वारा। तो आइए हम आपको बताते हैं इस विशेष ऐतिहासिक महत्व वाले गुरुद्वारे के बारे में : गुरुद्वारे के सामने रोड के दूसरे ओर सती दास जी, मती दास जी और दयाला जी के याद में स्मारक बनाए गए हैं। बताया जाता है कि यहां मती दास जी को आरे से काट दिया गया था। सती दास जी को रुई में लपेटकर जला दिया गया और दयाला जी को उबलते देग में डाल कर उबाल दिया गया था। गुरुद्वारा के सामने औरा स्मारक के बगल में हीं मती दास म्यूजियम भी है जहां उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से जाना जा सकता है। इस गुरुद्वारे को सेना भी करती है सलाम आपको यह जानकर हैरानी होगी कि, गणतंत्र दिवस की परेड में भारतीय सेना के सिक्ख रेजीमेंट के जवान राष्ट्रपति को सलामी देने के बाद गुरुद्वारा शीश गंज साहिब पर भी सलामी देते हैं। इस गुरुद्वारे को मिलने वाला यह सम्मान इसे अन्य गुरुद्वारों से अलग बनाती है। प्राचीन स्थापत्य कला की दिखती है यहां झलक यह गुरुद्वारा हल्के केसरिया और सफेद रंग के पत्थरों से बना हुआ है। इसके गुंबदों को सोने से मंडवाया गया है। इस गुरुद्वारे में उस कुए को भी संरक्षित किया गया है जहां गुरु तेग बहादुर ने अंतिम बार स्नान किया था। भक्तगण यहां जाकर भी मत्था टेकते हैं। गुरुद्वारा दो मंजिलों में बँटा हुआ है। जिसमें निचली मंजिल में जूता घर, सामान घर, पैर हाथ धोने के जगह, पीने के पानी की व्यवस्था और पार्किंग है। वहीं पहली मंजिल पर मुख्य गुरुद्वारा और लंगर घर है। गुरुद्वारे के दीवारों पर हर जगह पंजाबी भाषा में उपदेश खुदवाए गए हैं। गुरुद्वारे के मुख्य भवन में तख्त के सामने का स्थान लोगों के बैठने के लिए है। मुख्य भवन के सामने वाले भवन में लंगर गृह है। जहां एक साथ 100 से भी अधिक लोगों को बिठा कर खिलाया जा सकता है। यहां लोग अपनी स्वेच्छा से सेवा भी कर सकते हैं और बर्तनों को साफ करने में मदद भी कर सकते हैं। लोग तख्त के सामने मत्था टेकने के बाद वहां से निकलकर प्रसाद लेने जाते हैं। जहां शुद्ध घी और आटे की बनी हलवा प्रसाद में दी जाती है। इस हलवे के स्वाद की बराबरी दुनिया का कोई भी व्यंजन नहीं कर सकता, क्योंकि यह हलवा एक व्यंजन नहीं बल्कि भगवान का प्रसाद है जिसे आस्था और प्रेम भाव से तैयार किया जाता है। हलवा खाने के बाद लोग लंगर गृह में लंगर खाने जाते हैं। जहां आपको थाली देने से पहले वह आपसे वाहेगुरु जी की जय बोलने को कहेंगे। जिसके बाद लंगर के लिए लगी पंक्तियों में बैठकर लंगर का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

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Places to Visit in Mathura and Vrindavan

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मथुरा और वृंदावन को कृष्ण की भूमि कहे या फिर यह कहे कि ये मंदिरों के शहर हैं। दोनों ही नाम इस शहर के परिचायक हैं और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम हैं। कहते हैं यह वह भूमि है, जहां दुनिया को गीता का ज्ञान देने वाले श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। यह शहर ना सिर्फ़ आस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि प्रेम के दृष्टिकोण से भी समृद्ध है। यहीं वजह है कि मथुरा और वृन्दावन दोनों ही युवाओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आइए जानते हैं मथुरा और वृंदावन के बारे में वो तमाम बातें जो इन्हें सिर्फ श्रद्धा और आस्था के केंद्र के तौर पर ही नहीं बल्कि फेमस पर्यटन स्थल के रूप में भी मशहूर बनाते हैं – मथुरा वृंदावन को कृष्ण की भूमि और मंदिरों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि पुराणों के अनुसार यहां भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार में जन्म लिया था। इस शहर के हर गली में कोई ना कोई मंदिर देखने को मिल जाता है। वृंदावन के उन सैकड़ों हजारों मंदिरों में से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो विशेष महत्व रखते हैं और जिनका श्री कृष्ण से सीधा संबंध माना जाता है। इन मंदिरों की प्रसिद्धि इतनी है कि दूर दूर से लोग यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं। इस शहर की लोकप्रियता का एकमात्र कारण ये मंदिर हीं हैं। आज के दौर में विज्ञान भी यह मानता है कि मंदिर के परिसर में पहुंचते ही लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन बिल्कुल शांत हो जाता है। यहीं वजह है कि तनाव के इस दौर में वृंदावन जाना पर्यटकों के लिए एक अच्छा विकल्प है। इन मंदिरों के नाम और उनसे जुड़ी जानकारियां नीचे दिए गए हैं : यह पढ़ना न भूलें : Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था श्री कृष्ण जन्मभूमि : यह मंदिर मूलतः मंदिर नहीं बल्कि एक कारावास है। कहते हैं कि यह वहीं कारावास है जहां, कंस ने श्री कृष्ण के माता पिता ‘देवकी और वासुदेव’ को कैद करके रखा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्री कृष्ण का जन्म इसी कारावास में हुआ था। बाद में उसी कारावास के जगह मंदिर बना दिया गया। जहां दूर-दूर से भक्तगण पूजा करने आते हैं। यहां वह स्थान भी है जहां, देवकी के पहले 7 संतानों की बलि दी गई थी। यह मंदिर मथुरा रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्री बांके बिहारी मंदिर : वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर मथुरा जंक्शन से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिहारीपुरा में है। जहां श्री कृष्ण की काली पत्थर से बनी प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर का निर्माण स्वामी हरिदास द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर में पर्दा प्रथा को माना जाता है और यह प्रथा इस मंदिर को वृंदावन के बाकी मंदिरों से अलग बनाती है। इस प्रथा के तहत श्री कृष्ण की मूर्ति के आगे हर कुछ मिनट में पर्दा गिरा दिया जाता है। माना यह जाता है कि ऐसा करने से श्री कृष्ण किसी भक्त पर मोहित होकर उनके साथ कहीं और नहीं जाएंगे और वहीं विराजमान रहेंगे। इस मंदिर से जुड़ी एक और खास बात यह है कि इस मंदिर को सुबह सवेरे मंगला आरती के लिए नहीं खोला जाता है। कहा जाता है कि, भगवान रात को गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। ऐसे में सुबह सवेरे आरती करके उन्हें जगा कर उनकी नींद को खराब नहीं किया जाता है। प्रेम मंदिर इस मंदिर को सफेद संगमरमर से बनाया गया है और इसके दीवारों पर श्री कृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण कहानियों को कलाकृतियों में उकेरा गया है। जो इस मंदिर को और भी खूबसूरत बनाता है। चारों ओर सफेद संगमरमर और मार्बल से बनाए गए इस मंदिर के परिसर में छोटी-छोटी वाटिकाऐं भी हैं। जहां कहीं कृष्ण के बचपन की झांकियां मिलती हैं, तो कहीं श्री कृष्ण अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए मिलते हैं। यहां कृष्ण की गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाने की मुद्रा में भी मूर्ति स्थापित है। वृंदावन स्थित इस मंदिर की आधारशिला 2001 में रखी गई थी और इसे तैयार होने में 12 वर्षों का समय लग गया। इस मंदिर की आधारशिला जगतगुरु कृपाल आचार्य ने रखी थी। यहीं वजह है कि इस मंदिर के परिसर में उनके स्मृतियों को भी सहेज कर रखा गया है। प्रेम मंदिर आने का सबसे उचित समय शाम का होता है। क्योंकि शाम ढलते हीं यहां लाइटिंग शो शुरू हो जाते हैं, जो इस मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं। यह पढ़ना न भूलें : Gorakhnath Temple: गोरखपुर के गोरखनाथ बाबा का प्रसिद्ध मंदिर -जहाँ मिलता हैं हर दिल को सुकून इस्कॉन मंदिर इस्कॉन का फुल फॉर्म इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस होता है। इस मंदिर की स्थापना 1966 में स्वामी प्रभुपाद ने की थी। भारत की शानदार स्थापत्य कला का एक बेहतरीन उदाहरण है मथुरा स्थित इस्कॉन मंदिर। इसकी भव्यता और विशालता किसी भी शख्स को अपने में बांध लेने में सक्षम है। इस्कॉन मंदिर का बड़ा सा द्वार और उस द्वार से दिखता अंदर के मंदिर परिसर का झलक किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकती है। इस्कॉन मंदिर भगवान श्री कृष्ण और उनके भाई श्री बलराम को समर्पित है, इसीलिए इसे कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस्कॉन को वृंदावन के सबसे भव्य मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर के सफेद संगमरमर पत्थर से बने दीवारों पर की गई नक्काशी और चित्रकारी में भगवान श्री कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं के झलक देखने को मिलते हैं। जिन्हें देखना बेहद मनमोहक होता है और यह पर्यटकों को अपनी ओर काफी आकर्षित करता है। निधिवन निधिवन का हिंदू धर्म में विशेष स्थान रहा है। निधिवन देखने में जितना सरल है, उतना ही रहस्यमयी भी। इस वन में स्थित सभी पेड़ की शाखाएं साधारण पेड़ों से काफी अलग और जटिल होते हैं। निधिवन का अर्थ होता है, तुलसी का वन। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वहीं वन है जहां, श्री कृष्ण गोपियों के साथ रासलीला रचाते थे। यह माना

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5 Best Tourist Places to Visit in Jodhpur | Rajasthan | 2023

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मेहरानगढ़ का किला और इस फ़ेहरिस्त में सबसे पहले आता है- भारत के सबसे पुराने और विशाल किलों में से एक मेहरानगढ़ का किला जिससे भारत के समृद्धशाली अतीत की अनोखी झलक मिलती है। क्योंकि मेहरानगढ़ का यह किला देश के सबसे बड़े किलों में से एक है और बेहद ऊंचाई पर भी स्थित है  इसलिए आपको यह जोधपुर शहर के किसी भी हिस्से से दिखाई देगा। आपको जानकर थोड़ी हैरानी होगी कि मेहरानगढ़ का किला आज भी जोधपुर की रॉयल फेमिली के संरक्षण में है। जोधपुर का शाही परिवार ही किले का रख रखाव कर रहा है।  शायद यही कारण है कि यहाँ की एंट्री टिकट भारतीय टूरिस्ट के लिए भी 200 रुपए की है। देश के बाकी किलों की तुलना में यह थोड़ा ज्यादा लगता है। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि किले को देखने के बाद यह पूरा पैसा वसूल लगता है। क्योंकि यह किला काफी बड़ा है और संरचनात्मक तौर पर शानदार भी, इसलिए इसको अच्छे से विजिट करने के लिए चार से पांच घंटे अवश्य रिज़र्व रखें। यह ऐतिहासिक किला भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय किलों में से एक हैं। यह किला करीब 125 मीटर की ऊंचाई पर बना है। 15वीं शताब्दी में इस किले की नींव राव जोधा ने रखी थी, जो रणमल के चौबीस पुत्रों में से एक पन्द्रहवां  राठौर राजा था। मेहरानगढ़ का यह किला भारत की समृद्धि व महानता का प्रतीक माना जाता है और प्राचीन समय मे की गई कारीगरी और खूबसूरत नक्काशी का बेजोड़ नमूना है। देश की अन्य बेहद प्रसिद्ध इमारतों की तरह  मेहरानगढ़ किले का निर्माण भी सुंदर बलुआ पत्थरों से किया गया है। यह किला धरातल से लगभग 400 फिट की ऊंचाई पर है। मेहरानगढ़ किले के भीतर कई भव्य महल अद्भुत नक्काशी वाले दरवाजे अनेकों जालीदार खिड़कियां देखने लायक है। मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है, जो भारत के मजबूत और गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है. मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राजस्थान के बेहतरीन और फेमस म्यूजियम में से एक है., जिसमें राजा-महाराजाओं की पोशाकें और उनके हथियार रखे गए हैं. साथ ही, उनके रहन-सहन, दैनिक जीवन और संस्कृति से जुड़ी चीजें आज भी यहां मौजूद हैं। यह पढ़ना न भूलें : Jaisalmer: जैसलमेर – रेगिस्तान, शानदार किलों, पुरानी हवेलियों और राजसी ठाठ-बाट का शहर जसवंत थड़ा आप अगर जोधपुर विजिट करने निकले हैं तो जसवंत थड़ा देखना बिलकुल न भूलें। मेहरानगढ़ फोर्ट के बिलकुल पास में स्थित जसवंत थड़ा जोधपुर राजपरिवार का मेमोरियल है।  जसवंत थड़ा  जोधपुर शहर से लगभग 10  किमी. की दूरी पर स्थित है, जो सफेद संगमरमर से बना हुआ है, जिसे “मारवाड़ का ताजमहल” भी कहते है। जसवंत थड़ा की संरचना तो ताजमहल जैसी नहीं दिखती है, लेकिन सफेद संगमरमर से बना जसवंत थड़ा ताजमहल जैसा ही लगता है। दोस्तों आपको बता दें कि जोधपुर में स्थित जसवंत थड़ा को देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक देश और विदेश से आते हैं। अगर आप भी जोधपुर शहर में जा रहे हैं, तो जसवंत थड़ा को विजिट जरूर करें।जसवंत थड़ा में जाने के लिए भारतीय पर्यटकों के लिए एंट्री टिकट  30 रुपए  है और विदेशी पर्यटकों का एंट्री टिकट  50 रुपए है। उम्मेद भवन पैलेस मेहरानगढ़ फोर्ट के बाद जोधपुर की दूसरी सबसे खूबसूरत जगह है उम्मेद भवन पैलेस। मण्डोर गार्डन जोधपुर में एक और बेहतरीन जगह है मण्डोर गार्डन। इस स्थान का प्राचीन नाम माण्डवपुर था। यह पुराने समय में मारवाड़ राज्य की राजधानी हुआ करता था। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण का ससुराल हुआ करता था। यहाँ सदियों से होली के दूसरे दिन रावण का मेला लगता है। मारवाड़ की प्राचीन राजधानी मण्डोर जोधपुर के उत्तर में स्थित है। यहां जोधपुर के  शासकों के स्मारक एवं छतरियां हैं। राजस्थान स्थापत्य कला से बनी परम्परागत छतरियों की अपेक्षा ये हिन्दू मंदिरों की संरचना पर आधारित है। यहाँ पर्यटकों के लिए एंट्री बिलकुल फ्री है।  लेकिन यहाँ पर बने म्यूजियम में जाने के लिए आपको 25 रुपए का टिकट लेना पड़ेगा। कायलाना झील अगर आप पहाड़ियों के बीच खूबसूरत झील में बोटिंग का आनंद लेना चाहते हैं तो जोधपुर की कायलाना झील एक बेहतरीन विकल्प है। जैसलमेर रोड पर यह कायलाना झील, एक सुंदर पिकनिक स्पॉट है। माछिया सफारी जैसलमेर मार्ग पर कायलाना झील से लगभग 1 किलोमीटर दूर माछिया सफारी उद्यान स्थित है। यह एक पक्षीविहार है। यहां हिरण, रेगिस्तान की लोमड़ियां, विशाल छिपकली, नीलगाय, ख़रगोश, जंगली बिल्लियां, लंगूर, बंदरों जैसे कई पशु पाये जाते हैं। यह बायोडायवर्सिटी पार्क सूर्यास्त के खूबसूरत दृश्य के लिए भी फेमस है। यह पढ़ना न भूलें : अलवर फोर्ट सफारी – दिल्ली के नजदीक लीजिये जंगल सफ़ारी का मजा घंटाघर बाजार जोधपुर शहर के बीचोबीच स्थित ऐतिहासिक घंटाघर बाजार यहाँ आने वाले टूरिस्ट्स को अपनी और जरूर आकर्षित करता है। जोधपुर शहर के बीच में स्थित घंटाघर का निर्माण जोधपुर के महाराजा श्री सरदार सिंह ने करवाया था। यहां के सबसे व्यस्त सदर बाज़ार में स्थित यह घंटाघर अद्भुत व ऐतिहासिक है। सदर बाजार देशी व विदेशी पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है। यहां राजस्थानी वस्त्र, लाख की चूड़ियां, स्थानीय छपाई के कपड़े, मिट्टी की मूर्तियां व बर्तन, खिलौने, पीतल, लकड़ी व संगमरमर के बने ऊँट-हाथी और मार्बल-इन-ले में बना सजावटी सामान प्रचुर मात्रा तथा उचित दामों पर मिलता है। चांदी के जड़ाऊ गहने खरीदने के लिए भी यह उपयुक्त स्थान है। कब जाएँगर्मियों के मौसम में जोधपुर की यात्रा करने की बजाए अगस्त, सितंबर, फरवरी और मार्च के महीनों के दौरान यात्रा करें। क्योंकि अप्रैल से जुलाई तक पूरे राजस्थान में चिलचिलाती गर्मी पड़ती है। आज के इस ब्लॉग में फ़िलहाल इतना ही, फिर मिलते हैं किसी नए ब्लॉग में किसी नयी डेस्टिनेशन पर। तब तक हँसते रहिये, मुस्कुराते रहिये ।।

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Maldevta | Dehradun’s Haven for Nature Lovers | #1 Destination

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How to reach Maldevta देहरादून से सिर्फ 17-18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ‘मालदेवता’। यहां जाने के लिए आप देहरादून सिटी बस या फिर लोकल ट्रैवल में ऑटो, स्‍मॉल कैब्‍स ले सकते हैं। अगर आप अपनी कार से यहाँ आते हैं तो इससे बेहतर तो क्या ही कुछ होगा। क्योंकि यहाँ का सफर ही यहाँ का पैसा वसूल है। यह पढ़ना न भूलें : Buddha Temple in Dehradun-Mindrolling Monastery यह भी करें इंजाय मालदेवता में आप नेचर वॉक के अलावा तमाम तरह के गेम्‍स खेल सकते हैं। अगर चिडि़यों का चहचहाना पसंद है तो आप बर्ड वॉचिंग का भी लुत्‍फ उठा सकते हैं। ट्रैकिंग और कैंपिंग यहां की खूबसूरत वादियों को देखकर आपका भी मन कैंपिंग करने को कहेगा, तो आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं। यहां आसानी से आपको रेंट पर कैंप मिल जाएंगे। लोग यहां रेस्‍टोरेंट में जाने से ज्‍यादा खुद चूल्‍हा बनाकर या पेट्रोमैक्‍स में खाना बनाना पसंद करते हैं। इसके अलावा आप यहाँ ट्रैकिंग कर सकते हैं , ट्रैकिंग के लिए अगर आप अकेले हैं और आपको रास्‍ता समझ न आ रहा हो तो आपको यहाँ गाइड भी मिल जाएंगे जो आपके ट्रैकिंग के इस शौक को पूरा करने में मदद करेंगे। क्‍या- क्‍या कर सकते हैं यहां आप कैंपिंग कर सकते हैं। पिकनिक के लिए यह बेहतर आप्‍शन है। इसके अलावा ट्रैकिंग और पैराग्‍लाडिंग भी कर सकते हैं। यहां कई रेस्‍टोरेंट और होटल भी हैं। जहां बेहतरीन खाने के साथ कुछ दिन प्रकृति के बीच में रुक भी सकते हैं।वैसे अधिकतर यहाँ वीकेंड पर ज्यादा भीड़ दिखाई देती है। क्योंकि वीकेंड पर यहाँ देहरादून के लोकल लोग भी पिकनिक मनाने आ जाते हैं। चाहे वह किसी भी ऐज ग्रुप के क्यों न हो। वैसे यहाँ आने का सबसे बेहतर समय सर्दियों का ही माना जाता है या फिर आप अगर नदी के एडवेंचर का मजा लेना चाहते हैं तो जुलाई अगस्त में भी आ सकते है उस समय यहाँ आपको चारो और हरियाली ही हरियाली दिखाई देगी।

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St. Peter’s Basilica Vatican City | Rome | Get All Information

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St. Peter’s Basilica is one of the most iconic and recognizable buildings in the world. Located in Vatican City, it is the largest church in the world and a pilgrimage site for millions of Catholics and tourists every year. The history and architecture of St. Peter’s Basilica Facts, and there are many interesting facts and details to discover about this incredible landmark. History of St. Peter’s Basilica The original St. Peter’s Basilica was built in the fourth century by Emperor Constantine. It was located on the same site as the current basilica and was the largest church in the world at the time. However, by the fifteenth century, the building was in a state of disrepair and no longer met the needs of the growing Catholic Church. In 1506, Pope Julius II decided to demolish the old basilica and commission a new one. The project took over a century to complete, with many different architects and artists working on the building over the years. The new St. Peter’s Basilica was finally consecrated in 1626. Architecture of St. Peter’s Basilica The architecture of St. Peter’s Basilica is a mix of different styles, reflecting the many different artists and architects who worked on the building over the centuries. The most famous architects associated with the basilica include Bramante, Michelangelo, and Bernini. One of the most striking features of the basilica is its massive dome. Designed by Michelangelo, it is 137 meters tall and 42 meters in diameter. It is made of brick and covered in lead and is one of the largest domes in the world. Another iconic feature of the basilica is the colonnade surrounding the piazza in front of the building. Designed by Bernini, the colonnade is made up of 284 columns and 88 pillars. It is meant to represent the embracing arms of the Catholic Church, welcoming pilgrims from all over the world. Inside the basilica, there are many beautiful works of art, including statues, mosaics, and frescoes. One of the most famous pieces is Michelangelo’s Pieta, a sculpture of Mary holding the body of Jesus after his crucifixion. St. Peter’s Basilica is one of the most iconic and recognizable buildings in the world and a must-visit destination for many travelers. As the largest church in the world and the center of the Catholic Church, it is an important pilgrimage site for millions of Catholics and tourists every year. However, before visiting St. Peter’s Basilica, it is important to be aware of the dress code, which is strictly enforced. In this article, we will explore the St. Peter’s Basilica dress code and provide some tips on what to wear when visiting this incredible landmark. What is the St. Peter’s Basilica Dress Code? The dress code at St. Peter’s Basilica is quite strict and is enforced to ensure that the church remains a place of reverence and respect. The following are the basic guidelines for the dress code: -Shoulders and knees must be covered at all times. -No shorts or skirts above the knee are allowed. -No sleeveless or low-cut tops are allowed. -Hats and sunglasses must be removed before entering the basilica. -Shoes must be worn at all times. It is important to note that the dress code is not just for visitors to the basilica, but also for anyone entering St. Peter’s Square. This means that if you plan to visit the square, you should also dress appropriately. Why is the Dress Code Enforced? The dress code at St. Peter’s Basilica is enforced to maintain the sanctity of the church and to show respect for the religious traditions of the Catholic Church. The church is a place of worship and pilgrimage, and the dress code is a way of ensuring that visitors treat it as such. The dress code is also important because St. Peter’s Basilica is not just a tourist attraction, but also a functioning church. Masses are held at the basilica every day, and many people come to the church to pray and reflect. The dress code is a way of ensuring that these religious activities are not disrupted by tourists who may not understand the significance of the church. Tips for Dressing Appropriately at St. Peter’s Basilica -If you are planning a visit to St. Peter’s Basilica, it is important to dress appropriately in order to avoid any issues with the dress code. Here are some tips to help you dress appropriately: -Wear clothing that covers your shoulders and knees. This could include long pants or a skirt, and a top that covers your shoulders and does not reveal any cleavage. -Choose comfortable shoes that you can wear for an extended period of time. Remember that you will be walking around the basilica for quite some time, so you want to be comfortable. -Consider bringing a scarf or shawl that you can use to cover your shoulders if necessary. This can be especially useful if you are wearing a sleeveless top or dress. -Avoid wearing hats or sunglasses inside the basilica. You can always wear them outside and then remove them before entering the church. -Plan your outfit in advance to avoid any last-minute stress. Remember that the dress code is strictly enforced, so it is better to be safe than sorry. Conclusion St. Peter’s Basilica is a must-visit destination for anyone traveling to Rome, but it is essential to be aware of the dress code before visiting. By dressing appropriately and showing respect for the religious traditions of the Catholic Church, you can ensure that your visit to St. Peter’s Basilica is a memorable and meaningful experience.