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Railway Platform के ये 8 Designs जानकर चौंक जाएंगे

Railway Platform

अगली बार स्टेशन जाएं तो सिर्फ ट्रेन नहीं, उसके प्लेटफॉर्म का डिज़ाइन भी देखिएगा। हममें से शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने रेलवे स्टेशन पर घंटों ट्रेन का इंतजार न किया हो। कभी हाथ में चाय का कप लेकर प्लेटफॉर्म पर खड़े रहे होंगे, कभी जल्दी-जल्दी अपना सामान लेकर ट्रेन पकड़ने भागे होंगे और कभी अनाउंसमेंट सुनते हुए अपनी ट्रेन का इंतजार किया होगा।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस जगह पर खड़े होकर हम ट्रेन का इंतजार करते हैं, वह जगह आखिर बनाई कैसी जाती है? दरअसल, Railway Platform सिर्फ सीमेंट और कंक्रीट से बनी एक सीधी जगह नहीं है। इसके पीछे काफी सोच-विचार और इंजीनियरिंग होती है।

स्टेशन पर कितनी ट्रेनें आएंगी, यात्रियों की भीड़ कितनी होगी, ट्रेन किस दिशा में जाएगी, आसपास कितनी जमीन उपलब्ध है और यात्रियों को किस तरह सुरक्षित रखा जा सकता है—इन सब चीजों को ध्यान में रखकर Platform Design तैयार किया जाता है।

इसी वजह से हर स्टेशन का Railway Platform एक जैसा नहीं होता। कहीं प्लेटफॉर्म ट्रैक के एक तरफ होता है, कहीं दोनों पटरियों के बीच और कहीं ट्रेन आकर ऐसे प्लेटफॉर्म पर रुकती है जहां से उसे वापस उसी दिशा में जाना पड़ता है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में हुब्बल्ली जंक्शन का प्लेटफॉर्म दुनिया के सबसे लंबे स्टेशन प्लेटफॉर्म के रूप में जाना जाता है। इसकी लंबाई करीब 1,507 मीटर यानी लगभग 4,944 फीट बताई जाती है। तो अगली बार जब आप किसी Railway Platform पर खड़े हों, तो थोड़ा ध्यान आसपास भी दीजिएगा। हो सकता है जिस प्लेटफॉर्म को आप रोजमर्रा की चीज समझ रहे हैं, उसके पीछे काफी दिलचस्प Platform Design छिपा हो

बे प्लेटफॉर्म आखिर होता क्या है?

सबसे पहले बात करते हैं Bay Platform की। इसे समझना बहुत आसान है। आम प्लेटफॉर्म के सामने से ट्रेन आती है और आगे निकल जाती है, लेकिन बे प्लेटफॉर्म पर रेल की पटरी आगे जाकर खत्म हो जाती है। यानी ट्रेन एक तरह से डेड-एंड पर पहुंचती है। अगर उसे स्टेशन से दूसरी दिशा में जाना हो तो उसे वापस रिवर्स करना पड़ता है।

इस तरह का Railway Platform अक्सर उन ट्रेनों के लिए काम आता है जो उसी स्टेशन से शुरू होती हैं या वहीं अपनी यात्रा खत्म करती हैं। यहां ट्रेन आकर रुकती है और अपनी यात्रा पूरी करने के बाद जरूरत के हिसाब से वापस दूसरी दिशा में निकल सकती है।

Railway Platform

बे प्लेटफॉर्म देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसका Platform Design सामान्य प्लेटफॉर्म से थोड़ा अलग होता है। इसे बनाने के लिए सही जगह और पर्याप्त जगह की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि हर स्टेशन पर आपको बे प्लेटफॉर्म देखने को नहीं मिलेगा।

साइड प्लेटफॉर्म सबसे आम क्यों है?

अब आते हैं उस Railway Platform पर जिसे आपने सबसे ज्यादा देखा होगा—साइड प्लेटफॉर्म। जैसा कि इसके नाम से ही समझ आता है, यह रेलवे ट्रैक के किनारे बना होता है। ट्रेन एक तरफ से आती है, प्लेटफॉर्म पर रुकती है और फिर आगे निकल जाती है। दो पटरियों वाले किसी सामान्य स्टेशन पर अक्सर दो साइड प्लेटफॉर्म देखने को मिलते हैं।

एक तरफ से जाने वाली ट्रेनों के लिए और दूसरी तरफ आने वाली दिशा की ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म रखा जाता है। इस Platform Design का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रियों को ट्रेन की दिशा समझने में आसानी होती है।

साथ ही दोनों दिशाओं की भीड़ को अलग-अलग संभालना भी आसान रहता है। लेकिन इसकी एक कमी भी है। अगर स्टेशन पर कई ट्रैक और कई प्लेटफॉर्म बनाने हों तो पूरे स्टेशन को काफी चौड़ी जगह की जरूरत पड़ सकती है। फिर भी आज भी साइड Railway Platform सबसे आम और सबसे आसानी से समझ आने वाले प्लेटफॉर्म डिज़ाइनों में से एक है।

आइलैंड प्लेटफॉर्म पर एक ही जगह से दो तरफ की ट्रेन

अब बात करते हैं Island Platform की। यह थोड़ा अलग होता है और इसका नाम भी काफी मजेदार है। इस तरह का Railway Platform दो रेल पटरियों के बीच बनाया जाता है। यानी आप एक ही प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर दोनों तरफ से आने वाली ट्रेनों को देख सकते हैं। मान लीजिए आप प्लेटफॉर्म के बीच में खड़े हैं। आपके एक तरफ एक ट्रेन आ सकती है और दूसरी तरफ दूसरी ट्रेन।

यानी एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दोनों तरफ की ट्रेनों के यात्रियों के लिए किया जा सकता है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद कई सुविधाओं को दोनों तरफ के यात्री इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे दुकानें, शौचालय, लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग रूम। इससे स्टेशन की सुविधाओं को एक जगह व्यवस्थित करना आसान हो जाता है।

लेकिन Island Platform का Platform Design बनाते समय सुरक्षा का खास ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि प्लेटफॉर्म के दोनों तरफ रेल की पटरी होती है। अगर प्लेटफॉर्म बहुत संकरा हो और वहां यात्रियों की भीड़ ज्यादा हो जाए, तो लोगों के पटरी की तरफ गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इसकी चौड़ाई और यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखकर पूरा Platform Design तैयार किया जाता है।

कम जगह हो तो स्प्लिट प्लेटफॉर्म काम आता है

हर जगह स्टेशन बनाने के लिए बहुत चौड़ी जमीन उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार शहरों में जगह कम होती है और ऐसे में इंजीनियरों को कम जगह में ही स्टेशन तैयार करना पड़ता है। यहीं पर Split Platform जैसा Platform Design काम आता है। इसमें प्लेटफॉर्म और पटरियों को अलग-अलग स्तरों पर बनाया जा सकता है। यानी पूरा स्टेशन सिर्फ जमीन पर चौड़ाई में फैलाने के बजाय अलग-अलग स्तरों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे कम जमीन में स्टेशन तैयार करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इसका निर्माण सामान्य Railway Platform की तुलना में ज्यादा जटिल हो सकता है। यात्रियों के लिए भी रास्ते और दिशाएं थोड़ी मुश्किल लग सकती हैं। इसलिए ऐसे स्टेशन में साइन बोर्ड और सही दिशा बताने वाली व्यवस्था काफी जरूरी हो जाती है।

स्पैनिश सॉल्यूशन इतना खास क्यों है?

अब आते हैं एक ऐसे Platform Design पर जो खासतौर पर बहुत ज्यादा भीड़ वाले मेट्रो स्टेशनों में काफी काम आता है। इसे Spanish Solution या Flow-Through Platform कहा जाता है। इसमें एक ही ट्रैक के दोनों तरफ प्लेटफॉर्म बनाए जाते हैं।

Railway Platform

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों? क्योंकि यहां ट्रेन से उतरने और ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग तरफ का इस्तेमाल किया जा सकता है। जब ट्रेन स्टेशन पर आती है तो पहले उतरने वाले यात्रियों की तरफ के दरवाजे खोले जाते हैं। यात्री उतर जाते हैं और उसके बाद चढ़ने वाले यात्रियों की तरफ के दरवाजे खोले जाते हैं।

इससे उतरने और चढ़ने वाले लोगों की भीड़ एक-दूसरे के सामने नहीं आती।  यानी Railway Platform या मेट्रो प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का फ्लो ज्यादा व्यवस्थित रहता है। इससे ट्रेन को स्टेशन पर खड़े रहने का समय यानी Dwell Time भी कम किया जा सकता है। स्पेन के मैड्रिड और जर्मनी के म्यूनिख जैसे शहरों में इस तरह के Platform Design का इस्तेमाल किया गया है।

क्रॉस-प्लेटफॉर्म इंटरचेंज क्या होता है?

आपने कभी ऐसा मेट्रो स्टेशन देखा है जहां एक ट्रेन से उतरते ही सामने दूसरी ट्रेन मिल जाती है और आपको लंबी सीढ़ियां चढ़ने या नीचे जाने की जरूरत नहीं पड़ती? इसे Cross-Platform Interchange कहा जाता है। इस Platform Design का मकसद यात्रियों का समय और मेहनत दोनों बचाना है।

मान लीजिए आपको एक मेट्रो लाइन से दूसरी लाइन में जाना है। अगर दोनों ट्रेनें एक-दूसरे के सामने वाले प्लेटफॉर्म पर मिल जाएं तो यात्री एक तरफ से उतरकर सामने वाली ट्रेन में जा सकता है।

Delhi मेट्रो के सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, यमुना बैंक, आनंद विहार और बॉटनिकल गार्डन जैसे स्टेशनों पर इस तरह की सुविधा देखने को मिलती है। ऐसे Railway Platform या मेट्रो प्लेटफॉर्म यात्रियों के ट्रांसफर को काफी आसान बना देते हैं।

जमीन के ऊपर बने एलिवेटेड प्लेटफॉर्म

अब तक हमने प्लेटफॉर्म को उसके ट्रैक और लेआउट के हिसाब से समझा। लेकिन Railway Platform की पहचान उसकी जगह और ऊंचाई से भी होती है। घनी आबादी वाले शहरों में जमीन की कमी एक बड़ी समस्या होती है।

ऐसे इलाकों में रेल को सड़क के ट्रैफिक से अलग रखने के लिए एलिवेटेड सिस्टम बनाया जाता है। एलिवेटेड Railway Platform जमीन से काफी ऊपर खंभों या पिलर के ढांचे पर बनाया जाता है।

इस तरह के Platform Design का फायदा यह है कि नीचे सड़क और दूसरी शहरी गतिविधियों के लिए जगह बनी रहती है और ऊपर रेल का संचालन किया जा सकता है। यानी एक ही जगह का अलग-अलग स्तरों पर इस्तेमाल हो जाता है।

अंडरग्राउंड प्लेटफॉर्म जमीन के नीचे कैसे बनता है?

इसके बिल्कुल उलट होता है Underground Platform। जिन शहरों में जमीन के ऊपर जगह कम है या सड़क और शहर के मौजूदा ढांचे को ज्यादा प्रभावित नहीं करना चाहते, वहां जमीन के नीचे सुरंग बनाकर मेट्रो या रेल सिस्टम तैयार किया जाता है।

यहीं पर Underground Railway Platform बनाया जाता है। लेकिन जमीन के नीचे स्टेशन बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसमें सुरंग, सुरक्षा, हवा, बिजली और यात्रियों के आने-जाने जैसी कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए इस तरह का Platform Design सामान्य जमीन वाले प्लेटफॉर्म की तुलना में काफी जटिल और खर्चीला हो सकता है।

हाई-लेवल और लो-लेवल प्लेटफॉर्म में फर्क

अब बात करते हैं प्लेटफॉर्म की ऊंचाई की। High-Level Platform ऐसा प्लेटफॉर्म होता है जिसकी ऊंचाई ट्रेन के डिब्बे के फर्श के करीब या बराबर होती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रेन में चढ़ना और उतरना आसान हो जाता है। बुजुर्ग यात्रियों और दिव्यांग यात्रियों के लिए ऐसा Railway Platform काफी सुविधाजनक हो सकता है।

वहीं Low-Level Platform ट्रेन के डिब्बे के फर्श से नीचे होता है। ऐसे प्लेटफॉर्म से ट्रेन में चढ़ते समय पायदान या सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। लो-लेवल प्लेटफॉर्म बनाना तुलनात्मक रूप से कम खर्चीला हो सकता है, लेकिन यात्रियों के लिए चढ़ने-उतरने में ज्यादा मेहनत लगती है। इसलिए प्लेटफॉर्म की ऊंचाई भी पूरे Platform Design का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच गैप क्यों बनता है?

अब बात करते हैं सुरक्षा की। जब ट्रेन सीधी पटरी पर खड़ी होती है तो प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच की दूरी को समझना आसान होता है। लेकिन जब प्लेटफॉर्म किसी घुमाव पर होता है, तब ट्रेन के डिब्बों और प्लेटफॉर्म के किनारे के बीच कहीं-कहीं ज्यादा गैप बन सकता है। इसे प्लेटफॉर्म-ट्रेन इंटरफेस यानी PTI से जोड़ा जाता है। यही गैप यात्रियों के लिए खतरनाक हो सकता है।

Railway Platform

चढ़ते या उतरते समय अगर किसी यात्री का पैर फंस जाए या संतुलन बिगड़ जाए तो दुर्घटना हो सकती है। इसीलिए कई जगह Mind the Gap जैसी चेतावनियां दी जाती हैं। कुछ जगहों पर गैप को कम करने के लिए Movable Steps यानी Gap Fillers जैसी व्यवस्था भी इस्तेमाल की जाती है। यानी Railway Platform बनाते समय सिर्फ ट्रेन को रोकने की जगह बनाना ही काफी नहीं है। ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी भी बहुत मायने रखती है।

प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स क्या करते हैं?

आज के आधुनिक मेट्रो और रैपिड रेल सिस्टम में आपने प्लेटफॉर्म के किनारे कांच जैसी दीवारें जरूर देखी होंगी। इनमें लगे दरवाजों को Platform Screen Doors यानी PSDs कहा जाता है। इनका सबसे बड़ा काम यात्रियों को पटरी से सुरक्षित रखना है। जब तक ट्रेन स्टेशन पर आकर सही जगह पर रुकती नहीं है, ये दरवाजे बंद रहते हैं। ट्रेन रुकने के बाद ही दरवाजे खुलते हैं।

इससे यात्रियों के गलती से पटरी पर गिरने का खतरा काफी कम किया जा सकता है। इसके अलावा PSDs स्टेशन के अंदर का शोर कम करने में भी मदद करते हैं और AC की हवा को बाहर जाने से रोकने में मदद कर सकते हैं।

एक और फायदा यह है कि यात्री प्लेटफॉर्म से सीधे ट्रैक पर कचरा फेंक नहीं पाते। इससे ट्रैक भी ज्यादा साफ रह सकते हैं। यानी आधुनिक Platform Design में सुरक्षा के साथ-साथ साफ-सफाई और यात्री सुविधा का भी ध्यान रखा जाता है।

अब स्टेशन सिर्फ प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं हैं

आज के आधुनिक स्टेशनों में सिर्फ एक Railway Platform और कुछ बेंच लगाकर काम पूरा नहीं हो जाता। नए स्टेशनों के Platform Design में यात्रियों के पूरे अनुभव को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रवेश क्षेत्र में सार्वजनिक जगह, क्लॉक टावर, सोलर पैनल वाली छत और यात्रियों के इंतजार के लिए खास पॉड जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाता है।

दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए Tactile Paving यानी स्पर्श से रास्ता पहचानने वाली टाइल्स भी लगाई जाती हैं। इस तरह स्टेशन को ऐसा बनाने की कोशिश की जाती है कि अलग-अलग जरूरत वाले यात्रियों के लिए सफर थोड़ा आसान हो। यानी आज का Railway Platform सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं रह गया है। उसके आसपास की पूरी व्यवस्था भी यात्री सुविधा का हिस्सा बन चुकी है।

आखिर इतना अलग-अलग Platform Design क्यों चाहिए?

अब तक आपने समझ लिया होगा कि हर जगह एक जैसा Railway Platform बनाना संभव नहीं है। जहां जगह ज्यादा है, वहां एक तरह का प्लेटफॉर्म काम कर सकता है। जहां जमीन कम है, वहां दूसरा Platform Design अपनाना पड़ सकता है।

जहां बहुत ज्यादा यात्री हैं, वहां Spanish Solution या Cross-Platform Interchange जैसी व्यवस्था काम आ सकती है। जहां शहर बहुत घना है, वहां Elevated या Underground सिस्टम जरूरी हो सकता है। और जहां सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है, वहां Platform Screen Doors और Gap Fillers जैसी तकनीक काम आती है।

यानी किसी भी Railway Platform का डिजाइन सिर्फ देखने के लिए नहीं बनाया जाता। उसके पीछे यात्रियों की संख्या, ट्रेन का संचालन, जमीन, सुरक्षा और सुविधा जैसी कई बातें होती हैं।

अगली बार स्टेशन जाएं तो इन चीजों पर ध्यान दें

अगली बार जब आप Railway Platform पर खड़े हों तो बस ट्रेन आने का इंतजार मत कीजिए। थोड़ा आसपास देखिए। देखिए कि आपका प्लेटफॉर्म ट्रैक के किनारे है या दो पटरियों के बीच। देखिए कि प्लेटफॉर्म कितना चौड़ा है।

अगर मेट्रो स्टेशन है तो ध्यान दीजिए कि वहां PSDs लगे हैं या नहीं। अगर किसी स्टेशन पर दो मेट्रो लाइनें एक-दूसरे के सामने मिलती हैं तो समझिए कि वहां Cross-Platform Interchange का इस्तेमाल किया गया है। और ट्रेन में चढ़ते समय प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच के गैप को जरूर देखिए। शायद इन छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देने के बाद आपको अपना अगला Railway Platform पहले जैसा साधारण नहीं लगेगा।

Five Colors of Travel की ओर से कुछ खास सुझाव

  • प्लेटफॉर्म के किनारे से सुरक्षित दूरी बनाकर खड़े रहें।
  • ट्रेन में चढ़ते समय प्लेटफॉर्म और डिब्बे के बीच का गैप जरूर देखें।
  • बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ वाले Railway Platform पर अकेला न छोड़ें।
  • मेट्रो में Spanish Solution या Cross-Platform Design हो तो दिशा वाले बोर्ड ध्यान से पढ़ें।
  • स्टेशन पर लगे सुरक्षा संकेत और Tactile Tiles को नजरअंदाज न करें।

रेलवे स्टेशन पर हम अक्सर सिर्फ अपनी ट्रेन और सीट के बारे में सोचते हैं। लेकिन अगली बार जब आप Railway Platform पर जाएं, तो एक नजर उसके Platform Design पर भी डालिएगा। आपको महसूस होगा कि जिस जगह पर हम रोज कुछ मिनट या कुछ घंटे बिताते हैं, उसके पीछे कितनी सोच और इंजीनियरिंग छिपी हुई है।

Shivani Pal

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