Destination Travel

3,000+ Stepwells: भारत की प्राचीन Water Engineering का कमाल!

Stepwells

आजकल भारत में पानी की किल्लत एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। हमारे पास दुनिया की 18% आबादी है, लेकिन ताजे पानी के रिसोर्सेज सिर्फ 4% हैं। ऐसे में, जब मॉडर्न तरीके फेल हो रहे हैं, तो भारत अपने पुराने ‘वाटर इंजीनियरिंग’ के मास्टरपीस—Stepwells की तरफ वापस मुड़ रहा है। ‘स्टेपवेल एटलस’ की मानें तो इंडिया में 3,000 से ज्यादा Stepwells आज भी मौजूद हैं।

Stepwells आखिर बनाई क्यों जाती थीं?

Stepwells सिर्फ पानी का गड्ढा नहीं थीं, बल्कि ये मल्टी-स्टोरी स्ट्रक्चर थे जिन्हें जमीन के अंदर के पानी (groundwater) तक पहुँचने के लिए बनाया गया था। इनका निर्माण ज्यादातर 11वीं से 18वीं शताब्दी के बीच हुआ था।

राजस्थान और गुजरात जैसे सूखे इलाकों में ये Stepwells पूरे साल पीने का पानी और सिंचाई (irrigation) का भरोसा देती थीं

ये गांव की लाइफ का सेंटर हुआ करती थीं। लोग यहाँ पूजा और उत्सवों के लिए मिलते थे। कई Stepwells ‘उल्टे मंदिर’ (inverted temple) की तरह बनाई गई थीं ताकि पानी की पवित्रता बनी रहे।

पुराने ज़माने के यात्रा मार्गों पर Stepwells इसलिए बनाई जाती थीं ताकि मुसाफिरों और उनके काफिलों को पीने का पानी और ठंडी जगह मिल सके। उदाहरण के लिए, राजस्थान की नीमराणा Stepwell 9 मंजिला है और इतनी बड़ी है कि इसमें पूरी सैन्य टुकड़ी छिप सकती थी!

क्या Stepwells आज के दौर की पानी की समस्याओं का समाधान हैं?

ब्रिटिश राज के दौरान Stepwells को ‘अनहाइजीनिक’ बोलकर नजरअंदाज किया गया और बाद में मॉडर्न पाइप सिस्टम ने इन्हें बेकार बना दिया। धीरे-धीरे ये कचरे के ढेर (dumping ground) बन गईं।

लेकिन अब कहानी बदल रही है। हैदराबाद की 17वीं सदी की बंसीलालपेट Stepwell को ही देख लीजिए, जहाँ से 3,000 टन कचरा साफ किया गया और अब वहां गर्मियों में भी 9 मीटर पानी रहता है। तेलंगाना और राजस्थान जैसी सरकारें अब इन्हें फिर से जिंदा कर रही हैं क्योंकि ये बारिश के पानी को सीधे जमीन के अंदर (aquifers) पहुँचाने का सबसे सस्ता और टिकाऊ तरीका हैं।

ट्रैवलर्स के लिए बेस्ट Stepwells (Must-Visit)

1. रानी की वाव (गुजरात)

गुजरात के पाटन में स्थित यह Stepwell भारत की सबसे भव्य Stepwells में से एक है। इसे 11वीं शताब्दी (करीब 1063 ईस्वी) में सोलंकी वंश की रानी उदयामति ने अपने पति राजा भीमदेव प्रथम की याद में बनवाया था। 2014 में इसे यूनेस्को (UNESCO) वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया गया। यह इतनी खास है कि भारत सरकार ने इसे ₹100 के नोट पर भी जगह दी है।

इसे ‘उल्टे मंदिर’ (inverted temple) की तरह डिज़ाइन किया गया है, जो पानी की पवित्रता को दर्शाता है। यह Stepwell 7 मंजिला है और इसमें 500 से ज्यादा मुख्य मूर्तियां और 1,000 से ज्यादा छोटी मूर्तियां हैं। यहाँ भगवान विष्णु के ‘दशावतार’ के साथ-साथ शिव, गणेश और अप्सराओं की बेहद बारीक नक्काशी देखने को मिलती है।

2. चांद बावड़ी (राजस्थान)

राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी गाँव में स्थित यह Stepwell 9वीं शताब्दी की है और इसे दुनिया की सबसे पुरानी और गहरी Stepwells में गिना जाता है।

यह 13 मंजिला गहरी है और इसमें पानी तक पहुँचने के लिए 3,500 सीढ़ियां एक जादुई ‘ज्यामितीय’ (geometric) पैटर्न में बनी हुई हैं। इसकी भूलभुलैया जैसी सीढ़ियों की वजह से इसे बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में भी दिखाया जा चुका है।

Stepwells

3. तूरजी का झालरा (जोधपुर)

जोधपुर के पुराने शहर के बीचों-बीच स्थित यह Stepwell लंबे समय तक कचरे के नीचे दबी रही थी। 2017 में इसका पुनरुद्धार किया गया, जहाँ महीनों तक गंदा पानी पंप से बाहर निकाला गया और जमी हुई गंदगी साफ की गई। सफाई के दौरान यहाँ हाथी, गाय और देवी-देवताओं की शानदार नक्काशी निकलकर सामने आई।

आज यह जोधपुर का सबसे ‘कूल’ टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है। Stepwell के आसपास खूबसूरत कैफे, बुटीक और दुकानें खुल गई हैं, जो इसे एक मॉडर्न और ऐतिहासिक वाइब का मिक्स देती हैं।

4. अग्रसेन की Stepwell (दिल्ली)

दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के पास स्थित यह Stepwell 60 मीटर लंबी है। ऊँची इमारतों और भीड़-भाड़ के बीच छिपी होने के बावजूद यहाँ का माहौल बेहद शांत रहता है।

यह अपनी अनूठी बनावट और रहस्यमयी शांति के लिए फोटोग्राफर्स और कपल्स के बीच बहुत पॉपुलर है। इसकी ऊँची दीवारें और मेहराबें (arches) दिल्ली के प्राचीन इतिहास की कहानी कहती हैं।

Agrasen ki baoli-Stepwells

5. बिरखा Stepwell (जोधपुर)

यह बाकी Stepwells से अलग है क्योंकि इसे 2009 में आर्किटेक्ट अनु मृदुल ने बनाया था। इसे पुराने Stepwells के स्टाइल में ही ‘लाल बलुआ पत्थर’ (red sandstone) से बनाया गया है।

यह Stepwell सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि यह 1.75 करोड़ लीटर बारिश का पानी जमा कर सकती है। यह आज भी जोधपुर की एक बड़ी हाउसिंग टाउनशिप को पानी सप्लाई करने के काम आती है। अपनी बेहतरीन डिजाइन के लिए इसे 2009 में ‘ऑल इंडिया स्टोन आर्किटेक्चर अवार्ड’ भी मिल चुका है।

Stepwells में घूमने का सही समय

  • सर्दियां (अक्टूबर से मार्च): राजस्थान, दिल्ली और गुजरात घूमने के लिए ये सबसे बेस्ट मौसम है। धूप कम होती है और आप सुकून से घूम सकते हैं।
  • मानसून (जुलाई से सितंबर): अगर आप Stepwells को उनके असली रूप में देखना चाहते हैं, तो मानसून में जाएँ जब ये बारिश के पानी से भर जाती हैं।

Five Colors of Travel की ओर से कुछ सुझाव

1. कचरे की सफाई और लगातार देख-रेख

सबसे पहले Stepwells को ‘कचरे के ढेर’ (dumping ground) की छवि से बाहर निकालना होगा। उदाहरण के लिए, हैदराबाद की बंसीलालपेट Stepwell को ज़िंदा करने के लिए वहां से 3,000 टन कचरा साफ़ किया गया। सिर्फ एक बार की सफाई काफी नहीं है, बल्कि प्रदूषण से बचाने के लिए इनकी लगातार मेंटेनेंस और निगरानी की ज़रूरत है।

2. लोकल लोगों और युवाओं को जोड़ना

Stepwells का संरक्षण तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक स्थानीय समुदाय, खासकर नौजवानों को इसमें शामिल न किया जाए। जब लोग इन्हें अपनी साझा विरासत और पानी का अपना ज़रिया मानेंगे, तभी इनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

3. मॉडर्न तकनीक और फिल्ट्रेशन का इस्तेमाल

पुरानी Stepwells को सिर्फ सजावट की चीज़ न मानकर उन्हें काम में आने लायक बनाना चाहिए। इनमें आधुनिक फिल्ट्रेशन सिस्टम (जैसे रेत और कंकड़ की परतें) लगाए जा सकते हैं, ताकि इनका पानी साफ़ हो सके और पीने के काम आ सके।

4. पर्यटन (Tourism) और सांस्कृतिक कार्यक्रम

Stepwells को ‘टूरिज्म सर्किट’ से जोड़ना एक बेहतरीन कदम हो सकता है। वहां सांस्कृतिक मेलों या कार्यक्रमों की शुरुआत करने से न केवल लोगों का रुझान बढ़ेगा, बल्कि इनसे मिलने वाले पैसे से इन ऐतिहासिक धरोहरों के रख-रखाव का खर्च भी निकाला जा सकता है।

5. वॉटर मैनेजमेंट और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग

शहरों की प्लानिंग करते समय Stepwells को ‘विकेंद्रीकृत पुनर्भरण प्रणाली’ (decentralized recharge system) के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए। छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को पाइपों के ज़रिए सीधे Stepwells या उनके एक्विफर्स (aquifers) तक पहुँचाकर ज़मीन के अंदर के वॉटर लेवल को बढ़ाया जा सकता है।

इन सुझावों पर अमल करके हम अपनी ऐतिहासिक Stepwells को न सिर्फ लुप्त होने से बचा सकते हैं, बल्कि भविष्य के लिए जल सुरक्षा भी हासिल कर सकते हैं। क्योंकि Stepwells को बचाना सिर्फ पुराने पत्थरों को बचाना नहीं है, बल्कि यह भविष्य के जल संकट से लड़ने का एक स्मार्ट तरीका है। अगली बार जब आप ट्रिप प्लान करें, तो इंडिया के इन ‘वाटर पैलेसेस’ को देखना न भूलें!

Nandani Varshney

Nandani Varshney

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल