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सैलानियों की मौज! महाराष्ट्र में खुलेगा पहला Underwater Museum, समंदर के 22 मीटर नीचे दिखेगा नौसेना का युद्धपोत

Underwater Museum Maharashtra

Underwater Museum/Maharashtra News मुंबई । अगर आप भी घूमने-फिरने के शौकीन हैं, और समंदर की अथाह गहराइयों को करीब से नापना आपका सपना है, तो अपनी ट्रेवल बकेट लिस्ट को अपडेट करने के लिए तैयार हो जाइए। भारत के समुद्री पर्यटन (Marine Tourism) के इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। महाराष्ट्र का खूबसूरत तटीय जिला सिंधुदुर्ग बहुत जल्द देश के पहले ‘अंडरवॉटर म्यूजियम’ (Underwater Museum) व सबमरीन टूरिज्म प्रोजेक्ट की मेजबानी करने के लिए तैयार है।

अबतक जिस अंडरवॉटर दुनिया और मरीन लाइफ को देखने के लिए भारतीय पर्यटकों को लाखों रुपये खर्च करके विदेश जाना पड़ता था, वह रोमांच अब बेहद कम बजट में भारत के अपने कोंकण तट पर मिलने वाला है। आइए जानते हैं, पर्यटकों के लिए इस नए डेस्टिनेशन से जुड़ी हर एक रोमांचक जानकारी। Maharashtra News

कहां बन रहा है यह म्यूजियम और क्या है इसकी खासियत?

जानकारी के मुताबिक, यह अद्भुत अंडरवॉटर म्यूजियम सिंधुदुर्ग जिले के अंतर्गत आने वाली प्रसिद्ध ‘निवाटी रॉक’ (Nivati Rock) संरचनाओं के पास विकसित किया जा रहा है। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो यह स्थान मुख्य समुद्र तट से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां का पानी बेहद साफ और स्कूबा डाइविंग के लिए पूरी तरह अनुकूल माना जाता है।

समंदर की गहराई में INS गुलदार का नया जीवन: इस अनोखे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि, इसके तहत भारतीय नौसेना (Indian Navy) के एक ऐतिहासिक और सेवानिवृत्त युद्धपोत ‘आईएनएस गुलदार’ (INS Guldar – L21) को समुद्र की गहराई में ले जाया गया है। इस युद्धपोत को समंदर की सतह से करीब 22 मीटर नीचे सुरक्षित रूप से स्थापित किया गया है। अब यह युद्धपोत लहरों के नीचे तैरने वाले जीवों का घर बनने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए कौतूहल का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।

सैलानियों को मिलेगा रोमांच का ट्रिपल डोज: शामिल होंगी ये 3 गतिविधियां

इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से महाराष्ट्र देश के प्रमुख समुद्री पर्यटन केंद्रों में सबसे ऊपर शुमार हो जाएगा। एडवेंचर के शौकीन पर्यटकों के लिए यहां कई तरह की रोमांचक गतिविधियां शुरू की जा रही हैं।

  1. स्कूबा डाइविंग (Scuba Diving): रंग-बिरंगी मछलियों और कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) के बीच तैरने का शौक रखने वाले सैलानियों के लिए यह जन्नत साबित होने वाला है। एक्सपर्ट्स की देखरेख में पर्यटक समंदर के नीचे जाकर इस अद्भुत नजारे को देख सकेंगे।

  2. व्रेक डाइविंग (Wreck Diving): भारत में यह अपने आप में बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट है। व्रेक डाइविंग का मतलब होता है, समंदर में डूबे हुए जहाजों या युद्धपोतों के अवशेषों को देखने के लिए डाइव करना। पर्यटक पानी के नीचे 12 मीटर से लेकर 30 मीटर तक की गहराई में जाकर आईएनएस गुलदार के ऐतिहासिक अवशेषों को अपनी आंखों से निहार सकेंगे।

  3. सबमरीन राइड (Submarine Ride): जो लोग पानी में भीगना नहीं चाहते या जिन्हें डाइविंग नहीं आती, उनके लिए यहां सबमरीन (पनडुब्बी) सफारी की व्यवस्था भी की जा रही है। आप सबमरीन के भीतर बैठकर कांच की खिड़कियों से पूरी अंडरवॉटर दुनिया का दीदार कर सकेंगे।

रोमांच के साथ-साथ समुद्री शिक्षा का भी बनेगा केंद्र

यह परियोजना केवल मनोरंजन या पर्यटन तक सीमित नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इससे भारत में एडवेंचर टूरिज्म, डाइविंग गतिविधियों और समुद्री शिक्षा (Marine Education) को एक बिल्कुल नई दिशा मिलेगी।

जब पर्यटक समंदर के इतने नीचे जाकर नौसेना के ऐतिहासिक युद्धपोत और उसके आसपास पनप रहे समुद्री ईकोसिस्टम को देखेंगे, तो उनके भीतर पर्यावरण संरक्षण और जलीय जीवों को बचाने की समझ भी प्राकृतिक रूप से विकसित होगी।

ट्रेवल गाइड: सिंधुदुर्ग कैसे पहुंचे? (How to Reach Sindhudurg)

अगर आप भी इस अंडरवॉटर म्यूजियम को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यहाँ पहुंचने के रास्ते बेहद सुगम हैं:

  • हवाई मार्ग (By Air): सिंधुदुर्ग का अपना घरेलू हवाई अड्डा चिपी एयरपोर्ट (Sindhudurg Airport) है, जो मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। इसके अलावा आप गोवा के मोपा (Mopa) एयरपोर्ट पर भी उतर सकते हैं, जहां से सिंधुदुर्ग महज 2 घंटे की दूरी पर है।

  • रेल मार्ग (By Train): कोंकण रेलवे नेटवर्क के तहत कुडाल (Kudal) या सिंधुदुर्ग रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी मुख्य स्टेशन हैं, जहां देश के बड़े शहरों से ट्रेनें आती हैं।

  • सड़क मार्ग (By Road): यह क्षेत्र मुंबई-गोवा हाईवे से बेहतरीन तरीके से जुड़ा हुआ है। मुंबई, पुणे या गोवा से आप अपनी कार या लक्जरी बसों के जरिए यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।

ट्रेवल टिप: सिंधुदुर्ग आने पर इस अंडरवॉटर म्यूजियम के साथ-साथ छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा समंदर के बीचों-भाई बनवाया गया ऐतिहासिक सिंधुदुर्ग किला और यहां का शांत तारकरली बीच घूमना बिल्कुल न भूलें!

Ajay Raj

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