Punnagiri Temple: टनकपुर से मंदिर तक की पूरी यात्रा Guide
उत्तराखंड को सिर्फ पहाड़ों, झरनों और ठंडी वादियों के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यहां कई ऐसे धार्मिक स्थल भी हैं जहां सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। चंपावत जिले के टनकपुर के पास स्थित पूर्णागिरि धाम भी ऐसी ही एक जगह है।
पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर दूर से ही अपनी धार्मिक पहचान और आसपास के प्राकृतिक नजारों की वजह से अलग दिखाई देता है। टनकपुर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान खासतौर पर चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
अगर आप 2026 में मां पूर्णागिरि के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ मंदिर तक पहुंचने की जानकारी काफी नहीं है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि टनकपुर कैसे पहुंचना है, वहां से आगे का रास्ता कैसा है, कहां वाहन मिलता है, कहां से पैदल यात्रा शुरू होती है और रात रुकने के लिए कौन-कौन से विकल्प मिल सकते हैं। इस पूरे सफर में Punnagiri Temple तक पहुंचने का रास्ता भी यात्रा का एक खास हिस्सा है।
हम Punnagiri Temple से जुड़ी मान्यताओं से लेकर टनकपुर से मंदिर तक के रूट, यात्रा के समय, ठहरने की जगह और आसपास घूमने लायक स्थानों की पूरी जानकारी आसान भाषा में समझेंगे।
पूर्णागिरि धाम आखिर कहां स्थित है?
पूर्णागिरि धाम उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर के पास स्थित है। जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार यह स्थान समुद्र तल से करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर है और टनकपुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। Punnagiri Temple पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए यहां पहुंचने के लिए यात्रा के आखिरी हिस्से में पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।
पूर्णागिरि को कई जगहों पर पुण्यगिरि के नाम से भी जाना जाता है। यहां से काली नदी मैदानों की तरफ उतरती है और आगे चलकर शारदा नदी के नाम से जानी जाती है। पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से टनकपुर, काली नदी और आसपास के कुछ नेपाली गांवों का दृश्य भी दिखाई देता है। यानी Punnagiri Temple की यात्रा में धार्मिक अनुभव के साथ पहाड़ी और नदी का खूबसूरत नजारा भी देखने को मिलता है।
मां पूर्णागिरि को लेकर क्या है धार्मिक मान्यता?
पूर्णागिरि धाम को लेकर हिंदू धार्मिक परंपरा में एक प्रसिद्ध मान्यता है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती ने अपने प्राण त्यागे और भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे, तब भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अलग करने के लिए सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया।
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मान्यता है कि सती की नाभि जिस स्थान पर गिरी, वह स्थान आज पूर्णागिरि के रूप में जाना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण Punnagiri Temple को शक्ति उपासना से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों में माना जाता है।
हालांकि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में शक्तिपीठों की सूची और उनसे जुड़ी मान्यताओं में अंतर भी मिलता है, इसलिए इन कथाओं को धार्मिक मान्यता के रूप में समझना बेहतर है।
पूर्णागिरि मंदिर को सिद्ध पीठ भी माना जाता है
उत्तराखंड पर्यटन की जानकारी में पूर्णागिरि मंदिर को सिद्ध पीठों में शामिल बताया गया है। पहाड़ी पर स्थित Punnagiri Temple तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु टनकपुर से आगे सड़क मार्ग से ठुलीगाड़ तक जाते हैं और वहां से पैदल चढ़ाई शुरू करते हैं। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार ठुलीगाड़ से मंदिर तक लगभग तीन किलोमीटर की सीढ़ियों वाली चढ़ाई है।
यही चढ़ाई इस यात्रा को सामान्य मंदिर दर्शन से थोड़ा अलग बनाती है। रास्ते में श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी दुकानें और दूसरी सुविधाएं मिल सकती हैं। ऊपर पहुंचने के बाद Punnagiri Temple के आसपास से दिखाई देने वाला पहाड़ी और नदी का दृश्य पूरी यात्रा की थकान को कुछ कम कर देता है।
पूर्णागिरि यात्रा की शुरुआत टनकपुर से होती है
अगर आप Punnagiri Temple जाने की योजना बना रहे हैं तो टनकपुर को अपनी यात्रा का मुख्य आधार बनाना सबसे आसान रहेगा। टनकपुर कुमाऊं क्षेत्र की तलहटी में बसा शहर है और यहां रेलवे स्टेशन भी है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार टनकपुर Delhi, लखनऊ, आगरा और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों से रेल संपर्क से जुड़ा हुआ है।
टनकपुर पहुंचने के बाद आप स्थानीय बस, टैक्सी या दूसरे वाहनों से पूर्णागिरि की तरफ जा सकते हैं। जिला प्रशासन के अनुसार टनकपुर रेलवे स्टेशन से पूर्णागिरि के लिए बस और टैक्सी आसानी से उपलब्ध होती हैं।
इसलिए बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए Punnagiri Temple की यात्रा का सबसे आसान तरीका यही है कि पहले टनकपुर पहुंचें और फिर वहां से स्थानीय वाहन लेकर मंदिर की ओर बढ़ें।
दिल्ली से पूर्णागिरि कैसे पहुंचें?
Delhi से पूर्णागिरि जाने वाले यात्रियों के लिए रेल और सड़क दोनों विकल्प मौजूद हैं। अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो टनकपुर रेलवे स्टेशन तक ट्रेन लेना सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। टनकपुर पहुंचने के बाद आगे सड़क मार्ग से Punnagiri Temple की तरफ जाना होता है।
सड़क से जाने वाले यात्री बस या निजी वाहन से टनकपुर पहुंच सकते हैं। उत्तराखंड के पर्यटन विभाग के अनुसार आनंद विहार आईएसबीटी से टनकपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए बसें उपलब्ध रहती हैं।
अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ जा रहे हैं तो टनकपुर तक सड़क यात्रा करके आगे स्थानीय वाहन लेना भी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि पहाड़ी रास्तों और यात्रा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निकलने से पहले स्थानीय सड़क स्थिति जरूर देख लें।
ट्रेन से Punnagiri Temple जाने का रास्ता
रेल से यात्रा करने वालों के लिए टनकपुर सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। टनकपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद वहां से Punnagiri Temple के लिए स्थानीय बस, टैक्सी या साझा वाहन लिया जा सकता है।
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जिला प्रशासन के अनुसार टनकपुर रेलवे स्टेशन से पूर्णागिरि के लिए टैक्सी और बसें उपलब्ध हैं। अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो टनकपुर स्टेशन पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों या वाहन चालकों से ठुलीगाड़ और पूर्णागिरि जाने वाले वाहनों की जानकारी ले सकते हैं। मंदिर की चढ़ाई शुरू होने से पहले जरूरी सामान भी टनकपुर या रास्ते के बाजार से लिया जा सकता है।
सड़क से Punnagiri Temple तक का सफर
टनकपुर से आगे बढ़ने पर रास्ता धीरे-धीरे पहाड़ी क्षेत्र की तरफ जाने लगता है। वाहन से यात्रा करते हुए आप ठुलीगाड़ तक पहुंचते हैं। जिला प्रशासन और उत्तराखंड पर्यटन की जानकारी के अनुसार ठुलीगाड़ तक वाहन से पहुंचा जा सकता है और इसके बाद मंदिर की तरफ पैदल यात्रा करनी होती है।
यानी Punnagiri Temple की यात्रा का अंतिम हिस्सा सड़क से नहीं बल्कि पैदल तय करना पड़ता है। इसी वजह से आरामदायक जूते पहनना काफी जरूरी है। गर्मी के मौसम में पानी साथ रखना और धूप से बचने के लिए सिर ढकना भी फायदेमंद रहेगा।
ठुलीगाड़ से शुरू होती है असली चढ़ाई
ठुलीगाड़ पहुंचने के बाद Punnagiri Temple तक पैदल चढ़ाई शुरू होती है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार यह रास्ता करीब तीन किलोमीटर का है और इसमें सीढ़ियों से चढ़ना पड़ता है।
रास्ते में कई जगह छोटी दुकानें और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सामान मिल सकता है। चढ़ाई के दौरान बीच-बीच में रुककर आराम करना बेहतर रहेगा, खासकर अगर आपके साथ बच्चे, बुजुर्ग या ऐसे लोग हैं जिन्हें लंबी चढ़ाई की आदत नहीं है।
Punnagiri Temple तक पहुंचने के बाद क्या दिखाई देता है?
ऊपर पहुंचने के बाद Punnagiri Temple के आसपास से नीचे का काफी बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है। जिला प्रशासन के अनुसार मंदिर की ऊंचाई से काली नदी का विस्तार, उसके आसपास के क्षेत्र, टनकपुर शहर और कुछ नेपाली गांवों का दृश्य देखा जा सकता है।
यहां धार्मिक वातावरण के साथ पहाड़ी प्रकृति भी दिखाई देती है। यात्रा के दौरान नीचे की तरफ दिखाई देता टनकपुर और दूर तक फैली पहाड़ियों का दृश्य इस सफर को यादगार बना सकता है।
Punnagiri Temple जाने का सबसे अच्छा समय
पूर्णागिरि में पूरे साल श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां विशेष भीड़ होती है। चंपावत जिला प्रशासन के अनुसार मार्च-अप्रैल में चैत्र नवरात्रि के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु Punnagiri Temple पहुंचते हैं।
अगर आपका उद्देश्य त्योहार का माहौल देखना और विशेष पूजा के समय दर्शन करना है तो नवरात्रि का समय अलग अनुभव दे सकता है। लेकिन अगर आप भीड़ से बचकर आराम से यात्रा करना चाहते हैं तो सामान्य दिनों में जाने का विकल्प बेहतर हो सकता है।
Punnagiri Temple की यात्रा में कितना समय लग सकता है?
यात्रा का कुल समय इस बात पर निर्भर करेगा कि आप टनकपुर कब पहुंचते हैं, किस वाहन से ठुलीगाड़ जाते हैं और पैदल चढ़ाई में कितना समय लेते हैं। सिर्फ टनकपुर से मंदिर तक की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है, लेकिन अंतिम हिस्से की चढ़ाई की वजह से आपको पर्याप्त समय रखना चाहिए।
अगर आप सुबह टनकपुर पहुंचते हैं तो उसी दिन Punnagiri Temple के दर्शन करके वापस टनकपुर लौटना संभव हो सकता है। उत्तराखंड पर्यटन के आध्यात्मिक यात्रा दस्तावेज में टनकपुर–लोहाघाट–पूर्णागिरि को एक दिन के सर्किट के रूप में भी शामिल किया गया है।
Punnagiri Temple के पास कहां ठहरें?
अगर आप सिर्फ दर्शन करके वापस नहीं लौटना चाहते और टनकपुर में रुककर आसपास की जगहें भी देखना चाहते हैं तो वहां कई तरह के ठहरने के विकल्प मिल सकते हैं। बजट यात्रियों के लिए धर्मशाला और साधारण कमरे उपयोगी हो सकते हैं, जबकि परिवार के साथ यात्रा करने वाले होटल में ठहरना पसंद कर सकते हैं।
पूर्णागिरि यात्रा की योजना बनाते समय एक रात टनकपुर में रुकना सुविधाजनक हो सकता है। इससे आप सुबह जल्दी Punnagiri Temple की तरफ निकल सकते हैं और चढ़ाई आराम से पूरी कर सकते हैं।
धर्मशालाओं में ठहरने का विकल्प
टनकपुर और पूर्णागिरि मार्ग पर यात्रियों के लिए धर्मशाला जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। बजट यात्रा करने वालों के लिए यह होटल की तुलना में कम खर्च वाला विकल्प हो सकता है।
हालांकि कमरों की उपलब्धता, किराया और सुविधाएं मौसम तथा भीड़ के हिसाब से बदल सकती हैं। अगर आप नवरात्रि जैसे व्यस्त समय में Punnagiri Temple जा रहे हैं तो ठहरने की व्यवस्था पहले से कर लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा। त्योहारों के समय टनकपुर में यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।
पूर्णागिरि मेले के समय क्या बदल जाता है?
चैत्र नवरात्रि के आसपास पूर्णागिरि में मेला आयोजित होता है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार पूर्णागिरि मेला लगभग 40 दिनों तक चलने वाला बड़ा धार्मिक आयोजन है और इस दौरान टनकपुर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मेले के दौरान Punnagiri Temple की तरफ जाने वाले रास्ते में अस्थायी दुकानें और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे समय में यात्रा का अनुभव सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग होता है, लेकिन साथ ही भीड़ और ठहरने की व्यवस्था को लेकर पहले से योजना बनाना जरूरी हो जाता है।
Punnagiri Temple जाते समय क्या सामान रखें?
पूर्णागिरि की यात्रा में सबसे जरूरी चीज आरामदायक जूते हैं। क्योंकि अंतिम रास्ते में पैदल चढ़ाई करनी होती है, इसलिए ऐसे जूते पहनें जिनकी पकड़ अच्छी हो। साथ में पानी की बोतल, हल्का नाश्ता, टोपी या गमछा और जरूरत की दवाइयां रखना उपयोगी रहेगा।
अगर आप गर्मियों में Punnagiri Temple जा रहे हैं तो धूप से बचने का इंतजाम जरूर करें। वहीं बारिश के मौसम में फिसलन वाले रास्तों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पूर्णागिरि में माता को क्या चढ़ाया जाता है?
मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को चुनरी, फूल, फल और दूसरे पूजा सामग्री चढ़ाते हैं। प्रसाद के रूप में स्थानीय दुकानों पर उपलब्ध सामग्री भी ली जा सकती है।
अगर आप पहली बार Punnagiri Temple जा रहे हैं तो मंदिर के आसपास मौजूद पूजा सामग्री की दुकानों से जरूरी चीजें ले सकते हैं। हालांकि किसी भी धार्मिक स्थल की तरह यहां भी वही सामग्री चढ़ाना बेहतर है जिसे मंदिर की परंपरा और वहां की व्यवस्था के अनुसार स्वीकार किया जाता हो।
शारदा घाट भी देख सकते हैं
टनकपुर में पूर्णागिरि यात्रा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान शारदा घाट है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार यह वही स्थान है जहां श्रद्धालु Punnagiri Temple जाने से पहले शारदा नदी में स्नान करते हैं।
इसे मां पूर्णागिरि शारदा घाट के नाम से भी जाना जाता है। अगर आपके पास समय है तो मंदिर दर्शन के साथ शारदा घाट जाना भी यात्रा का हिस्सा बनाया जा सकता है। यहां नदी के किनारे कुछ समय बैठकर आसपास का माहौल देखना यात्रा को और शांत अनुभव बना सकता है।
श्यामलाताल घूमने का भी बना सकते हैं प्लान
टनकपुर के आसपास घूमने की जगहों में श्यामलाताल भी शामिल है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार यह टनकपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित प्राकृतिक झील है और इसके किनारे स्वामी विवेकानंद आश्रम भी है।
अगर आप दो दिन की यात्रा बना रहे हैं तो पहले दिन Punnagiri Temple के दर्शन और दूसरे दिन श्यामलाताल या आसपास के दूसरे स्थानों को देखने का कार्यक्रम बनाया जा सकता है।
बनबसा और शारदा नदी का इलाका
टनकपुर के पास बनबसा भी एक जगह है जहां शारदा नदी और बैराज का क्षेत्र देखने को मिलता है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार बनबसा टनकपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है और यहां शारदा नदी पर बना बैराज भी देखा जा सकता है। इसलिए अगर आप सिर्फ Punnagiri Temple देखकर वापस नहीं लौटना चाहते तो टनकपुर और आसपास के क्षेत्रों को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
पूर्णागिरि यात्रा में नेपाल की झलक भी
पूर्णागिरि क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा के करीब स्थित है। टनकपुर से नेपाल सीमा की दूरी भी ज्यादा नहीं है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार टनकपुर भारत-नेपाल सीमा से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित है।
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मंदिर की ऊंचाई से आसपास के कुछ नेपाली गांव भी दिखाई दे सकते हैं। इस वजह से Punnagiri Temple की यात्रा धार्मिक होने के साथ सीमा क्षेत्र के भूगोल को समझने का अवसर भी देती है।
क्या बुजुर्ग और बच्चे Punnagiri Temple जा सकते हैं?
हां, लेकिन अंतिम चढ़ाई को ध्यान में रखना जरूरी है। ठुलीगाड़ के बाद लगभग तीन किलोमीटर का पैदल रास्ता और सीढ़ियां हैं। इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करते समय जल्दबाजी न करें।
अगर किसी को चलने में परेशानी होती है तो यात्रा से पहले स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं और मौजूदा रास्ते की स्थिति की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। Punnagiri Temple की यात्रा में सबसे जरूरी चीज यही है कि दर्शन के साथ अपनी शारीरिक क्षमता का भी ध्यान रखा जाए।
पहली बार जा रहे हैं तो यात्रा कैसे प्लान करें?
पहली बार Punnagiri Temple जाने वाले यात्री अपनी यात्रा को दो हिस्सों में बांट सकते हैं। पहले दिन टनकपुर पहुंचकर होटल या धर्मशाला में ठहरें और स्थानीय बाजार से जरूरी सामान ले लें। अगले दिन सुबह जल्दी मंदिर की तरफ निकलें।
सुबह ठुलीगाड़ पहुंचकर पैदल चढ़ाई शुरू करने से गर्मी और भीड़ दोनों से कुछ राहत मिल सकती है। दर्शन के बाद वापस टनकपुर लौटकर आराम किया जा सकता है। अगर आपके पास एक अतिरिक्त दिन है तो शारदा घाट, बनबसा या श्यामलाताल को यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
Punnagiri Temple यात्रा सिर्फ धार्मिक सफर नहीं
पूर्णागिरि की यात्रा को सिर्फ मंदिर तक पहुंचने और दर्शन करने तक सीमित नहीं किया जा सकता। टनकपुर की तलहटी, शारदा नदी, पहाड़ी चढ़ाई, रास्ते में मिलने वाली छोटी दुकानें और ऊपर से दिखाई देने वाला प्राकृतिक दृश्य इस यात्रा का हिस्सा हैं।
Punnagiri Temple तक पहुंचने में लगने वाली मेहनत ही इस यात्रा को थोड़ा अलग बनाती है। नीचे टनकपुर से शुरू होने वाला सफर धीरे-धीरे पहाड़ी रास्ते में बदलता है और आखिर में पैदल चढ़ाई के बाद माता के दरबार तक पहुंचाता है।
Punnagiri Temple जाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
यात्रा पर निकलने से पहले ट्रेन या बस की स्थिति, मौसम और स्थानीय रास्ते की जानकारी जरूर जांच लें। खासकर बारिश के मौसम में पहाड़ी रास्तों की स्थिति बदल सकती है। नवरात्रि और मेले के समय भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए ठहरने और आने-जाने की योजना पहले बना लेना बेहतर है।
Punnagiri Temple तक पहुंचने के लिए आरामदायक जूते, पानी और जरूरी सामान साथ रखें। रास्ते में कूड़ा न फैलाएं और धार्मिक स्थल की मर्यादा बनाए रखें। अगर आप फोटोग्राफी कर रहे हैं तो मंदिर परिसर के नियमों का पालन करें।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- सुबह जल्दी यात्रा शुरू करें। ठुलीगाड़ से चढ़ाई का रास्ता पैदल है, इसलिए सुबह जल्दी निकलना ज्यादा आरामदायक रहेगा। इससे गर्मी और भीड़ दोनों से बचने में मदद मिल सकती है।
- आरामदायक जूते जरूर पहनें। Punnagiri Temple तक पहुंचने वाले अंतिम रास्ते में सीढ़ियों और पैदल चढ़ाई का हिस्सा है। इसलिए चप्पल की जगह अच्छी पकड़ वाले आरामदायक जूते रखें।
- मेले के समय पहले से तैयारी करें। चैत्र नवरात्रि में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। अगर आप मेले के दौरान Punnagiri Temple जा रहे हैं तो ठहरने और यात्रा की योजना पहले से बना लें।
- टनकपुर को आधार बनाएं। पहली बार जाने वालों के लिए टनकपुर में रुककर अगले दिन Punnagiri Temple जाना सुविधाजनक हो सकता है। इससे यात्रा में जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी।
- आसपास की जगहें भी देखें। दर्शन के साथ शारदा घाट, बनबसा और समय मिलने पर श्यामलाताल को भी यात्रा में शामिल करें। इससे Punnagiri Temple की यात्रा सिर्फ एक मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं रहेगी।