Durga Puja से पहले घूमें Delhi का Bengal Handloom Expo
दिल्ली में रहते हुए अगर आप बंगाल को सिर्फ उसकी मिठाइयों और दुर्गा पूजा तक जानते हैं, तो यह आयोजन आपकी सोच थोड़ी बदल सकता है। यहां बंगाल के हाथों की बनी चीजें, पारंपरिक कपड़े, शिल्प और त्योहार से जुड़ा माहौल एक ही जगह देखने को मिलेगा। Bengal Pre-Puja Handloom and Handicrafts Expo 2026 दिल्ली के दिल्ली हाट, आईएनए में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन दुर्गा पूजा से पहले बंगाल की हस्तकरघा और हस्तशिल्प परंपरा को दिल्ली तक लाने का एक मौका है। Durga Puja
पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में आयोजन की अवधि 16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 दी गई है। वहीं सोशल मीडिया पर चल रहे पोस्टर में 18 से 30 सितंबर लिखा दिखाई दे रहा है, इसलिए जाने से पहले तारीख की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा। अगर आपको हाथ से बनी चीजें, बंगाल की साड़ियां, घर की सजावट, पारंपरिक शिल्प और त्योहारों की खरीदारी पसंद है, तो इस आयोजन को देखने के लिए कुछ घंटे निकाल सकते हैं।
Bengal Pre-Puja Expo 2026 कब और कहां लगाया गया है?
सबसे पहले आयोजन की जरूरी जानकारी नोट कर लीजिए। आयोजन का नाम है बंगाल प्री-पुजा हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपो 2026। यह दिल्ली हाट, आईएनए, नई दिल्ली में लग रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार के दस्तावेजों के अनुसार आयोजन की अवधि 16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 है, जबकि पोस्टर पर दी गई तारीख 18 सितंबर से 30 सितंबर दिखाई दे रही है।
प्रवेश शुल्क उपलब्ध प्रचार पोस्टर में ₹30 बताया गया है। आयोजक पक्ष पश्चिम बंगाल सरकार के नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय से जुड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय ने इस आयोजन के लिए दिल्ली हाट, आईएनए में हस्तकरघा और हस्तशिल्प प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए आधिकारिक निविदाएं जारी की हैं। Durga Puja
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इन दस्तावेजों में आयोजन की तारीख 16 से 30 सितंबर दी गई है। इसलिए पोस्टर में दिखाई दे रही 18 सितंबर की तारीख को देखकर भ्रमित होने के बजाय, जाने वाले दिन ताजा जानकारी जरूर जांचें।
एक जरूरी बात: 16 सितंबर या 18 सितंबर?
यह जानकारी खास तौर पर ध्यान रखने वाली है, क्योंकि उपलब्ध स्रोतों में तारीख को लेकर अंतर दिखाई देता है। आपके भेजे हुए पोस्टर में 18–30 सितंबर लिखा है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट और आयोजन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों में 16–30 सितंबर 2026 लिखा गया है। Durga Puja
इसलिए ब्लॉग में इसे साफ-साफ बताना जरूरी है। अगर आप 18 सितंबर के बाद जा रहे हैं तो आयोजन चलने की जानकारी दोनों स्रोतों में समान है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति 16 या 17 सितंबर को जाने की योजना बना रहा है, तो उसे पहले आयोजन स्थल या आयोजक की ताजा सूचना से पुष्टि करनी चाहिए।
आखिर इस आयोजन में देखने को क्या मिलेगा?
नाम से ही काफी कुछ समझ आता है कि यह आयोजन बंगाल की हस्तकरघा और हस्तशिल्प पर केंद्रित है। पश्चिम बंगाल की कला परंपरा काफी विविध है। राज्य सरकार की जानकारी में कांथा कढ़ाई, टेराकोटा, डोकरा, शंख-शिल्प, बांस और बेंत का काम, जूट, लकड़ी की नक्काशी, शोलापिथ, बाटिक, मुखौटे और कई दूसरी पारंपरिक कलाओं का उल्लेख मिलता है। Durga Puja
इसलिए यहां घूमते समय सिर्फ यह न देखें कि कौन-सी चीज कितने की है। यह भी देखें कि अलग-अलग वस्तुओं में बंगाल की कला किस तरह दिखाई देती है। यही इस आयोजन को सामान्य खरीदारी से थोड़ा अलग बनाता है।
बंगाल की साड़ियों और कपड़ों पर रहेगी खास नजर
अगर आपको साड़ियां और पारंपरिक कपड़े पसंद हैं, तो इस तरह के आयोजन में कपड़ों के हिस्से को आराम से देखने का समय जरूर रखें। पश्चिम बंगाल सरकार के बिस्वा बांग्ला से जुड़ी जानकारी में जामदानी, बालूचरी, नक्शी कांथा, बाटिक, तांत और मुर्शिदाबाद सिल्क जैसी साड़ियों और वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। इनमें हर कपड़े का अपना अलग रूप और काम होता है।
खासकर अगर आप त्योहारों के लिए साड़ी खरीदने की सोच रहे हैं तो सिर्फ रंग देखकर फैसला न करें। कपड़े की बुनाई, सामग्री, काम और उसकी देखभाल के बारे में भी पूछें। दुकानदार या कारीगर से यह पूछना कि कपड़ा किस तरह बुना गया है और इसे धोने या रखने का सही तरीका क्या है, बाद में काफी काम आता है। Durga Puja
कांथा से लेकर टेराकोटा तक, बंगाल की अलग-अलग कलाएं
बंगाल की पहचान सिर्फ एक तरह के हस्तशिल्प से नहीं होती। कांथा में कपड़े पर बारीक सिलाई और कढ़ाई का काम दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार कांथा परंपरा में पुराने कपड़ों की परतों को सिलकर हल्के बिछावन, सजावटी वस्तुओं और दूसरी उपयोगी चीजों में बदला जाता रहा है। वहीं टेराकोटा बंगाल की दूसरी प्रसिद्ध कला है।
मिट्टी को आकार देकर और पकाकर बनाई गई वस्तुओं में बंगाल की ग्रामीण कला की साफ झलक दिखाई देती है। डोकरा धातु की पारंपरिक ढलाई से जुड़ी कला है और पश्चिम बंगाल के कई जिलों, खासकर बांकुड़ा, बीरभूम, बर्दवान और पुरुलिया से इसका संबंध बताया गया है। अगर ऐसे सामान यहां मिलते हैं तो उन्हें ध्यान से देखने का अपना अलग मजा होगा।
बांकुड़ा और बिष्णुपुर की कला को भी समझिए
बंगाल की कला की बात हो और बिष्णुपुर का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार बिष्णुपुर टेराकोटा मंदिरों, बालूचरी साड़ियों, मिट्टी की वस्तुओं और डोकरा धातु कला के लिए जाना जाता है। बालूचरी साड़ियों में पल्लू और किनारों पर बारीक बुनाई के जरिए पौराणिक कथाओं और दृश्यों को भी दिखाया जाता है। Durga Puja
इसलिए अगर आपको ऐसी चीजें देखने को मिलती हैं, तो उन्हें सिर्फ सजावटी सामान समझकर आगे न बढ़ जाएं। थोड़ी देर रुककर उसके डिजाइन को देखिए। कई बार एक छोटी-सी वस्तु में भी उस क्षेत्र की पूरी कला परंपरा दिखाई देती है।
Durga Puja से पहले खरीदारी के लिए क्यों सही समय है?
इस आयोजन का समय भी इसे खास बनाता है। पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक सहज पूजा पोर्टल के अनुसार 2026 में बंगाल में दुर्गा पूजा के मुख्य दिन 17 से 21 अक्टूबर के बीच पड़ रहे हैं और महालया 10 अक्टूबर को है। यानी सितंबर के आखिर में लगाया गया यह प्री-पुजा आयोजन सीधे उस त्योहार के मौसम से पहले आता है।
अगर आप बंगाली परिवार के लिए उपहार लेना चाहते हैं, अपने लिए पारंपरिक कपड़ा खरीदना चाहते हैं या घर में बंगाल की कला का कोई छोटा-सा हिस्सा रखना चाहते हैं, तो यहां घूम सकते हैं। Durga Puja के लिए खरीदारी करते समय सिर्फ कपड़ों पर ही ध्यान देना जरूरी नहीं है। घर की सजावट या छोटे हस्तशिल्प भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
Durga Puja सिर्फ पूजा नहीं, बंगाल की पूरी संस्कृति का हिस्सा है
बंगाल में Durga Puja का मतलब सिर्फ पूजा पंडाल में जाकर दर्शन करना नहीं है। इसके साथ कपड़े, खाना, संगीत, कला, सजावट और लोगों का मिलना-जुलना भी जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि Durga Puja से पहले होने वाले ऐसे आयोजन में सिर्फ खरीदारी की जगह सांस्कृतिक अनुभव भी मिल सकता है।
दिल्ली में बैठकर बंगाल की किसी पारंपरिक साड़ी को देखना, मिट्टी की कलाकृति को करीब से समझना या जूट और बांस से बनी वस्तुओं को देखना आपको उस संस्कृति से थोड़ा करीब ला सकता है।
आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकते हैं
पश्चिम बंगाल सरकार के आयोजन संबंधी दस्तावेजों में केवल हस्तकरघा और हस्तशिल्प स्टॉल की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए मंच, ध्वनि व्यवस्था, रोशनी और दूसरी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख है। हालांकि उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों में अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का पूरा कार्यक्रम नहीं दिया गया है। Durga Puja
इसलिए किसी खास दिन कौन-सा कार्यक्रम होगा, यह बिना पुष्टि के लिखना सही नहीं होगा। लेकिन अगर आयोजन स्थल पर सांस्कृतिक प्रस्तुति चल रही हो तो उसे जरूर देखें। खासकर बंगाल की लोक कला और संगीत को खरीदारी के बीच देखने का मौका मिल जाए तो अनुभव और अच्छा हो सकता है।
यहां सिर्फ खरीदारी करने की गलती न करें
ऐसे आयोजनों में सबसे आम गलती होती है कि लोग अंदर जाते ही सामान खरीदना शुरू कर देते हैं। आप ऐसा न करें। पहले पूरा परिसर देखिए। किस तरह की चीजें कहां रखी हैं, अलग-अलग कारीगरों के काम में क्या अंतर है और किस वस्तु की कीमत कितनी है—इन सबका अंदाजा लगाइए। फिर वापस जाकर खरीदारी करें। इससे आपको तुलना करने का समय मिलेगा और बिना जरूरत की चीज खरीदने की संभावना भी कम होगी।
अगर कपड़ा खरीद रहे हैं तो इन बातों पर ध्यान दें
कपड़े की खरीदारी में सिर्फ रंग और डिजाइन देखकर फैसला करना ठीक नहीं है। इन बातों के बारे में पूछें—कपड़ा किस सामग्री से बना है? हाथ से बुना है या मशीन से? रंग की देखभाल कैसे करनी है? इसे धोने का सही तरीका क्या है? रंग छूटने की संभावना है या नहीं?
काम कितना हाथ से किया गया है? खरीदने के बाद इसे किस तरह रखना चाहिए? अगर आप महंगी साड़ी खरीद रहे हैं तो बिल जरूर लें। किसी खास बुनाई या शिल्प के नाम पर ज्यादा कीमत बताई जा रही हो तो उसके बारे में जानकारी लेना भी अच्छा रहेगा।Durga Puja
अगर घर के लिए हस्तशिल्प खरीदना चाहते हैं
बंगाल की कला में घर की सजावट के लिए भी काफी चीजें मिलती हैं। सरकारी स्रोतों में टेराकोटा, डोकरा, जूट, बांस, शोलापिथ, लकड़ी की वस्तुएं और मिट्टी की गुड़िया जैसी कई शिल्प परंपराओं का उल्लेख मिलता है।
अगर आप ऐसी चीज खरीद रहे हैं तो पहले यह सोच लें कि उसे घर में कहां रखेंगे। नाजुक वस्तु खरीदने के बाद उसे सुरक्षित घर तक ले जाना भी जरूरी है। टेराकोटा या मिट्टी की वस्तु को दूसरे सामान के नीचे दबाकर रखना ठीक नहीं होगा।
बच्चों के साथ जाना हो तो उन्हें भी कला समझाएं
अगर आप बच्चों के साथ दिल्ली हाट जा रहे हैं तो इस आयोजन को सिर्फ खरीदारी तक सीमित न रखें। किसी बच्चे को यह बताना कि कपड़ा मशीन से नहीं, बल्कि करघे पर भी बनाया जा सकता है, उसके लिए नया अनुभव हो सकता है।
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उसे टेराकोटा की वस्तु दिखाकर पूछ सकते हैं कि इसे मिट्टी से कैसे बनाया गया होगा। डोकरा की वस्तु दिखाकर उसके बारे में जानकारी ले सकते हैं। इस तरह बच्चे को भारतीय कला और कारीगरी के बारे में बिना किसी किताब के भी बहुत कुछ समझाया जा सकता है।
फोटोग्राफी करने वालों के लिए भी अच्छी जगह
अगर आपको तस्वीरें खींचना पसंद है तो रंग-बिरंगे कपड़े, शिल्प, सजावट और कारीगरों का काम अच्छे दृश्य दे सकते हैं। लेकिन एक बात का ध्यान रखें। किसी कारीगर की तस्वीर लेने से पहले अनुमति मांगना बेहतर है।
अगर कोई व्यक्ति अपने काम में व्यस्त है तो उसके बहुत करीब जाकर कैमरा न करें। किसी वस्तु की तस्वीर लेना और किसी व्यक्ति की तस्वीर लेना अलग बात है। इसलिए लोगों की निजता और सहजता का ध्यान रखें। Durga Puja
दिल्ली हाट जाने का सही समय क्या रहेगा?
दिल्ली पर्यटन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार दिल्ली हाट, आईएनए रोज खुलता है और वहां प्रवेश टिकट गेट पर उपलब्ध होते हैं। आधिकारिक पेज पर सामान्य समय 11 बजे से रात 8 बजे तक और वयस्क प्रवेश शुल्क ₹30 दिया गया है। हालांकि आयोजन के दिनों में समय या व्यवस्था अलग हो सकती है। इसलिए निकलने से पहले आयोजन और दिल्ली हाट की ताजा जानकारी देखना बेहतर रहेगा।
अगर आपको खरीदारी के साथ आराम से पूरा परिसर देखना है तो दोपहर के बजाय शाम का समय भी सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन सप्ताहांत और त्योहारों के आसपास भीड़ ज्यादा हो सकती है।
दिल्ली हाट कैसे पहुंचें?
दिल्ली हाट, आईएनए पहुंचने के लिए मेट्रो सबसे आसान विकल्पों में से एक है। दिल्ली पर्यटन के अनुसार इसका निकटतम मेट्रो स्टेशन आईएनए है, जो येलो लाइन पर है। मेट्रो से उतरने के बाद दिल्ली हाट तक पहुंचना आसान है।
अगर आप अपनी गाड़ी से जा रहे हैं तो पार्किंग की उपलब्धता पहले देख लें। खासकर सप्ताहांत या शाम के समय आसपास भीड़ हो सकती है। अगर आपका मुख्य उद्देश्य खरीदारी है तो सार्वजनिक परिवहन से जाना कई बार ज्यादा सुविधाजनक रहेगा, क्योंकि खरीदारी के बाद सामान लेकर वापस लौटते समय भी आपको वाहन चलाने की चिंता नहीं रहेगी।
क्या-क्या सामान साथ लेकर जाएं?
ऐसे आयोजन में बहुत ज्यादा सामान लेकर जाने की जरूरत नहीं होती। आप अपने साथ ये चीजें रख सकते हैं—मोबाइल फोन, पहचान पत्र, पावर बैंक, पानी की बोतल, छोटा और हल्का बैग, जरूरी दवाइयां, थोड़ा नकद पैसा और भुगतान के लिए मोबाइल में पर्याप्त सुविधा।
अगर आपको Durga Puja की खरीदारी करनी है तो थोड़ा अतिरिक्त बैग रखने की जगह पहले से सोच लें। खासकर अगर साड़ी, सजावटी सामान या नाजुक हस्तशिल्प खरीदने का मन है तो सामान रखने के लिए जगह जरूरी होगी। Durga Puja
क्या-क्या सामान लेकर जाने से बचें?
दिल्ली हाट में घूमने के लिए हल्का सामान सबसे अच्छा रहेगा। इन चीजों से बचें—बहुत बड़ा और भारी बैग, अनावश्यक महंगे सामान, नुकीली वस्तुएं, कांच की अनावश्यक चीजें, जरूरत से ज्यादा नकद और बहुत ज्यादा सामान।
अगर आप कैमरा लेकर जा रहे हैं तो उसे भीड़ में संभालकर रखें। और अगर आपको Durga Puja से जुड़ी खरीदारी करनी है तो पूरे बाजार को देखते हुए आराम से चलें। जल्दबाजी में किसी स्टॉल से टकराने या नाजुक वस्तु गिरने की स्थिति बन सकती है।
खरीदारी करते समय बजट पहले तय कर लें
दिल्ली हाट में एक ही जगह पर बहुत सारी खूबसूरत चीजें देखकर मन बदलना आसान है। इसलिए घर से निकलने से पहले यह तय कर लें कि आपको क्या खरीदना है और लगभग कितना खर्च करना है।
उदाहरण के लिए अगर आपका उद्देश्य Durga Puja के लिए साड़ी खरीदना है तो पहले साड़ी का बजट तय करें। अगर घर के लिए सजावट की चीज लेनी है तो उसी हिसाब से पैसा अलग रखें। इससे आप सिर्फ इसलिए महंगी चीज नहीं खरीदेंगे क्योंकि वह देखने में अच्छी लग रही है।
नाजुक सामान खरीद रहे हैं तो पैकिंग जरूर करवाएं
टेराकोटा, मिट्टी, कांच या किसी दूसरी नाजुक वस्तु को खरीदने के बाद उसे सीधे सामान्य थैले में डालकर न चलें। दुकानदार से अच्छी तरह पैक करने के लिए कहें। अगर आप मेट्रो से वापस जा रहे हैं तो रास्ते में सामान को संभालकर रखें। नाजुक वस्तु को बैग के सबसे नीचे रखना भी ठीक नहीं होगा। घर पहुंचने तक उसे अलग और सुरक्षित रखें।
भीड़ में अपने सामान का ध्यान रखें
दिल्ली हाट का पूरा अनुभव घूमने और खरीदारी का है, इसलिए मोबाइल देखते हुए लगातार चलने के बजाय आसपास भी ध्यान रखें। पर्स और मोबाइल सुरक्षित जगह पर रखें। अगर परिवार या दोस्तों के साथ हैं तो सभी लोग एक ही जगह अलग-अलग दुकानों में चले जाएं तो बाद में मिलने के लिए एक जगह तय कर लें। छोटे बच्चों के साथ जा रहे हैं तो उन्हें भीड़ में अकेला न छोड़ें। Durga Puja
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Durga Puja की खरीदारी के साथ बंगाल के स्वाद को भी समझें
दिल्ली हाट सिर्फ हस्तशिल्प के लिए नहीं जाना जाता। यहां अलग-अलग राज्यों के खान-पान के स्टॉल भी होते हैं। इसलिए अगर आप काफी समय के लिए जा रहे हैं तो खरीदारी के बाद कुछ खाने का भी मन बना सकते हैं। लेकिन अगर आप व्रत रख रहे हैं तो खाने से पहले सामग्री के बारे में जरूर पूछें। और अगर आप Durga Puja के माहौल को महसूस करने के लिए जा रहे हैं तो Bengal के पारंपरिक स्वाद को भी जानने का यह अच्छा मौका हो सकता है।
पहली बार Bengal के हस्तशिल्प मेले में जा रहे हैं तो यह तरीका अपनाएं
पहले आधे घंटे में कुछ खरीदने की कोशिश न करें। पूरा आयोजन देखें। फिर अपनी पसंद की चीजों की सूची मन में बनाएं। इसके बाद वापस जाकर खरीदारी करें। कारीगर या विक्रेता से वस्तु के बारे में पूछें। अगर चीज नाजुक है तो पैकिंग करवाएं। और अगर महंगी वस्तु है तो बिल जरूर लें। यह छोटा-सा तरीका आपकी खरीदारी को काफी व्यवस्थित बना सकता है।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- दिल्ली हाट में आपको काफी चलना पड़ सकता है। अगर खरीदारी के साथ पूरा आयोजन देखना है तो ऐसे जूते पहनें जिनमें लंबे समय तक चलने में परेशानी न हो।
- तस्वीरें, भुगतान और रास्ता देखने में मोबाइल की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए निकलने से पहले फोन पूरी तरह चार्ज कर लें और साथ में पावर बैंक रखें।
- शुरुआत में बैग हल्का रखें। बाद में खरीदी गई चीजें उसी में रखने की कोशिश करने पर भीड़ में चलना मुश्किल हो सकता है।
- टेराकोटा, मिट्टी या दूसरी नाजुक कलाकृति खरीदने पर उसे घर तक सुरक्षित पहुंचाना उतना ही जरूरी है जितना उसे खरीदना। निकलने से पहले पैकिंग जरूर देख लें।
- किसी हस्तशिल्प को खरीदने से पहले उसके बारे में दो मिनट बात कर लें। वह किस जगह की कला है, कैसे बनती है और उसकी देखभाल कैसे करनी है—यह जानकारी आपकी खरीदारी को ज्यादा खास बना देगी।
इस बार Durga Puja से पहले दिल्ली में देखिए बंगाल की कारीगरी
Bengal Pre-Puja Handloom and Handicrafts Expo 2026 सिर्फ एक खरीदारी वाला आयोजन नहीं है। यह दिल्ली में बैठकर बंगाल की कला और हस्तशिल्प को करीब से देखने का एक मौका है। पश्चिम बंगाल सरकार की आधिकारिक जानकारी में इस आयोजन को दिल्ली हाट, आईएनए में 16 से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित करने की बात कही गई है।
आयोजन से जुड़े दस्तावेजों में हस्तकरघा और हस्तशिल्प स्टॉल के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था का भी उल्लेख है। वहीं आपके साझा किए गए पोस्टर में 18 से 30 सितंबर और ₹30 प्रवेश शुल्क लिखा है। दिल्ली हाट की आधिकारिक पर्यटन जानकारी में भी वयस्क प्रवेश शुल्क ₹30 दिया गया है। इसलिए जाने से पहले उस दिन की ताजा जानकारी देखना सबसे सही रहेगा। इस आयोजन का समय भी दिलचस्प है, क्योंकि इसके कुछ ही हफ्तों बाद बंगाल में Durga Puja का मुख्य उत्सव शुरू होगा।
2026 में महालया 10 अक्टूबर और मुख्य पूजा के दिन 17 से 21 अक्टूबर के बीच हैं। यानी अगर आप इस साल Durga Puja से पहले बंगाल के रंग, कपड़े और हस्तशिल्प को दिल्ली में ही करीब से देखना चाहते हैं, तो दिल्ली हाट की यह यात्रा आपकी अक्टूबर की योजनाओं से पहले ही बंगाल की एक छोटी-सी झलक दे सकती है।
शायद इस बार वहां से खरीदी गई कोई साड़ी, मिट्टी की छोटी-सी कलाकृति या हाथ से बनी सजावटी चीज आपके घर में सिर्फ एक सामान बनकर न आए, बल्कि Bengal की उस कारीगरी की याद लेकर आए, जिसे किसी कारीगर ने अपने हाथों और अपने हुनर से तैयार किया है। Durga Puja