Durga Puja से पहले घूमें Delhi का Bengal Handloom Expo
दिल्ली में रहते हुए अगर आप बंगाल को सिर्फ उसकी मिठाइयों और दुर्गा पूजा तक जानते हैं, तो यह आयोजन आपकी सोच थोड़ी बदल सकता है। यहां बंगाल के हाथों की बनी चीजें, पारंपरिक कपड़े, शिल्प और त्योहार से जुड़ा माहौल एक ही जगह देखने को मिलेगा। Bengal Pre-Puja Handloom and Handicrafts Expo 2026 दिल्ली के दिल्ली हाट, आईएनए में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन दुर्गा पूजा से पहले बंगाल की हस्तकरघा और हस्तशिल्प परंपरा को दिल्ली तक लाने का एक मौका है। Durga Puja पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में आयोजन की अवधि 16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 दी गई है। वहीं सोशल मीडिया पर चल रहे पोस्टर में 18 से 30 सितंबर लिखा दिखाई दे रहा है, इसलिए जाने से पहले तारीख की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा। अगर आपको हाथ से बनी चीजें, बंगाल की साड़ियां, घर की सजावट, पारंपरिक शिल्प और त्योहारों की खरीदारी पसंद है, तो इस आयोजन को देखने के लिए कुछ घंटे निकाल सकते हैं। Bengal Pre-Puja Expo 2026 कब और कहां लगाया गया है? सबसे पहले आयोजन की जरूरी जानकारी नोट कर लीजिए। आयोजन का नाम है बंगाल प्री-पुजा हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपो 2026। यह दिल्ली हाट, आईएनए, नई दिल्ली में लग रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार के दस्तावेजों के अनुसार आयोजन की अवधि 16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 है, जबकि पोस्टर पर दी गई तारीख 18 सितंबर से 30 सितंबर दिखाई दे रही है। प्रवेश शुल्क उपलब्ध प्रचार पोस्टर में ₹30 बताया गया है। आयोजक पक्ष पश्चिम बंगाल सरकार के नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय से जुड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय ने इस आयोजन के लिए दिल्ली हाट, आईएनए में हस्तकरघा और हस्तशिल्प प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए आधिकारिक निविदाएं जारी की हैं। Durga Puja इन दस्तावेजों में आयोजन की तारीख 16 से 30 सितंबर दी गई है। इसलिए पोस्टर में दिखाई दे रही 18 सितंबर की तारीख को देखकर भ्रमित होने के बजाय, जाने वाले दिन ताजा जानकारी जरूर जांचें। एक जरूरी बात: 16 सितंबर या 18 सितंबर? यह जानकारी खास तौर पर ध्यान रखने वाली है, क्योंकि उपलब्ध स्रोतों में तारीख को लेकर अंतर दिखाई देता है। आपके भेजे हुए पोस्टर में 18–30 सितंबर लिखा है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट और आयोजन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों में 16–30 सितंबर 2026 लिखा गया है। Durga Puja इसलिए ब्लॉग में इसे साफ-साफ बताना जरूरी है। अगर आप 18 सितंबर के बाद जा रहे हैं तो आयोजन चलने की जानकारी दोनों स्रोतों में समान है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति 16 या 17 सितंबर को जाने की योजना बना रहा है, तो उसे पहले आयोजन स्थल या आयोजक की ताजा सूचना से पुष्टि करनी चाहिए। आखिर इस आयोजन में देखने को क्या मिलेगा? नाम से ही काफी कुछ समझ आता है कि यह आयोजन बंगाल की हस्तकरघा और हस्तशिल्प पर केंद्रित है। पश्चिम बंगाल की कला परंपरा काफी विविध है। राज्य सरकार की जानकारी में कांथा कढ़ाई, टेराकोटा, डोकरा, शंख-शिल्प, बांस और बेंत का काम, जूट, लकड़ी की नक्काशी, शोलापिथ, बाटिक, मुखौटे और कई दूसरी पारंपरिक कलाओं का उल्लेख मिलता है। Durga Puja इसलिए यहां घूमते समय सिर्फ यह न देखें कि कौन-सी चीज कितने की है। यह भी देखें कि अलग-अलग वस्तुओं में बंगाल की कला किस तरह दिखाई देती है। यही इस आयोजन को सामान्य खरीदारी से थोड़ा अलग बनाता है। बंगाल की साड़ियों और कपड़ों पर रहेगी खास नजर अगर आपको साड़ियां और पारंपरिक कपड़े पसंद हैं, तो इस तरह के आयोजन में कपड़ों के हिस्से को आराम से देखने का समय जरूर रखें। पश्चिम बंगाल सरकार के बिस्वा बांग्ला से जुड़ी जानकारी में जामदानी, बालूचरी, नक्शी कांथा, बाटिक, तांत और मुर्शिदाबाद सिल्क जैसी साड़ियों और वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। इनमें हर कपड़े का अपना अलग रूप और काम होता है। खासकर अगर आप त्योहारों के लिए साड़ी खरीदने की सोच रहे हैं तो सिर्फ रंग देखकर फैसला न करें। कपड़े की बुनाई, सामग्री, काम और उसकी देखभाल के बारे में भी पूछें। दुकानदार या कारीगर से यह पूछना कि कपड़ा किस तरह बुना गया है और इसे धोने या रखने का सही तरीका क्या है, बाद में काफी काम आता है। Durga Puja कांथा से लेकर टेराकोटा तक, बंगाल की अलग-अलग कलाएं बंगाल की पहचान सिर्फ एक तरह के हस्तशिल्प से नहीं होती। कांथा में कपड़े पर बारीक सिलाई और कढ़ाई का काम दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार कांथा परंपरा में पुराने कपड़ों की परतों को सिलकर हल्के बिछावन, सजावटी वस्तुओं और दूसरी उपयोगी चीजों में बदला जाता रहा है। वहीं टेराकोटा बंगाल की दूसरी प्रसिद्ध कला है। मिट्टी को आकार देकर और पकाकर बनाई गई वस्तुओं में बंगाल की ग्रामीण कला की साफ झलक दिखाई देती है। डोकरा धातु की पारंपरिक ढलाई से जुड़ी कला है और पश्चिम बंगाल के कई जिलों, खासकर बांकुड़ा, बीरभूम, बर्दवान और पुरुलिया से इसका संबंध बताया गया है। अगर ऐसे सामान यहां मिलते हैं तो उन्हें ध्यान से देखने का अपना अलग मजा होगा। बांकुड़ा और बिष्णुपुर की कला को भी समझिए बंगाल की कला की बात हो और बिष्णुपुर का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। पश्चिम बंगाल पर्यटन के अनुसार बिष्णुपुर टेराकोटा मंदिरों, बालूचरी साड़ियों, मिट्टी की वस्तुओं और डोकरा धातु कला के लिए जाना जाता है। बालूचरी साड़ियों में पल्लू और किनारों पर बारीक बुनाई के जरिए पौराणिक कथाओं और दृश्यों को भी दिखाया जाता है। Durga Puja इसलिए अगर आपको ऐसी चीजें देखने को मिलती हैं, तो उन्हें सिर्फ सजावटी सामान समझकर आगे न बढ़ जाएं। थोड़ी देर रुककर उसके डिजाइन को देखिए। कई बार एक छोटी-सी वस्तु में भी उस क्षेत्र की पूरी कला परंपरा दिखाई देती है। Durga Puja से पहले खरीदारी के लिए क्यों सही समय है? इस आयोजन का समय भी इसे खास बनाता है। पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक सहज पूजा पोर्टल के अनुसार 2026 में बंगाल में दुर्गा पूजा के मुख्य दिन 17 से 21 अक्टूबर के बीच पड़ रहे हैं और महालया 10 अक्टूबर को है। यानी सितंबर के आखिर में लगाया गया यह