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Kainchi Dham के पास घूमने की 8 खूबसूरत जगहें

Kainchi Dham

नीम करोली बाबा के दर्शन के बाद झीलों, पहाड़ों और शांत गांवों की ऐसी यात्रा, जो आपकी कुमाऊं ट्रिप को और यादगार बना देगी। उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा Kainchi Dham सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था से जुड़ी एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचते ही मन अपने आप शांत होने लगता है। नीम करोली बाबा के इस प्रसिद्ध आश्रम में हर दिन देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

किसी के लिए यह आस्था का केंद्र है, तो किसी के लिए पहाड़ों के बीच कुछ पल सुकून से बिताने की जगह। Delhi और आसपास के शहरों से लोग अक्सर सुबह जल्दी निकलते हैं, Kainchi Dham पहुंचते हैं, बाबा के दर्शन करते हैं और फिर उसी दिन वापस लौटने का प्लान बना लेते हैं। लेकिन अगर आप भी ऐसा करने वाले हैं, तो थोड़ा रुकिए।

क्योंकि बाबा नीम करोली के दर्शन के बाद आसपास ऐसी कई खूबसूरत जगहें हैं, जिन्हें देखकर आपकी पूरी कुमाऊं यात्रा और भी खास बन सकती है। Kainchi Dham के आसपास करीब 50 किलोमीटर के दायरे में झीलें हैं, शांत गांव हैं, पुराने मंदिर हैं, घने जंगल हैं और ऐसी पहाड़ी सड़कें हैं, जहां सफर करते हुए बार-बार गाड़ी रोककर बस नजारा देखने का मन करेगा।

भवाली से लेकर भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल, रामगढ़ और मुक्तेश्वर तक, हर जगह का अपना अलग रंग और अलग अनुभव है। तो अगर आप Kainchi Dham जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ दर्शन करके वापस मत आइए। थोड़ा समय निकालिए और कुमाऊं की इन खूबसूरत जगहों को भी अपनी ट्रिप में शामिल कीजिए

सबसे पहले जान लें, कैंची धाम कब पहुंचना बेहतर रहेगा

पहाड़ों की यात्रा में सबसे ज्यादा जरूरी चीज होती है सही समय पर निकलना। खासकर Kainchi Dham के रास्ते में वीकेंड और छुट्टियों के दौरान काफी ट्रैफिक देखने को मिलता है। हल्द्वानी से भवाली और फिर कैंची धाम तक जाने वाली सड़कें कई जगह संकरी हैं, इसलिए सुबह देर से निकलने पर जाम में काफी समय निकल सकता है। अगर आप आराम से दर्शन करना चाहते हैं, तो कोशिश करें कि सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच Kainchi Dham पहुंच जाएं।

सुबह का समय शांत रहता है और भीड़ भी कम मिलती है। इस समय पहाड़ों की हवा, आसपास की हरियाली और आश्रम का माहौल एक अलग ही अनुभव देता है। सुबह जल्दी दर्शन करने का एक और फायदा है। आपके पास पूरा दिन बच जाता है और फिर आप आसपास की जगहों को आराम से एक्सप्लोर कर सकते हैं। अब आइए जानते हैं कि Kainchi Dham के आसपास कौन-कौन सी जगहें आपकी ट्रिप में जरूर होनी चाहिए।

भवाली: पहाड़ों के बीच छोटा लेकिन बेहद काम का शहर

Kainchi Dham

Kainchi Dham से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर भवाली स्थित है। यह जगह भले ही छोटी हो, लेकिन कुमाऊं घूमने वालों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां से नैनीताल, भीमताल, सातताल और कई दूसरी जगहों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। भवाली खासतौर पर अपने फलों के बाजार के लिए जाना जाता है।

यहां आपको मौसम के हिसाब से ताजे सेब, आड़ू, प्लम और खुबानी मिल सकते हैं। पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए सड़क किनारे फलों की छोटी-छोटी दुकानें दिखना यहां आम बात है। अगर आपने सुबह जल्दी Kainchi Dham के दर्शन कर लिए हैं, तो भवाली में रुककर पहाड़ी चाय और पकौड़े खाना एक अच्छा ब्रेक हो सकता है। यहां का माहौल ज्यादा भागदौड़ वाला नहीं है और आप आराम से अपनी आगे की यात्रा प्लान कर सकते हैं।

भीमताल: झील के किनारे बिताइए कुछ शांत पल

Kainchi Dham से लगभग 16 से 20 किलोमीटर दूर भीमताल है। अगर आपको पहाड़ों में झील के किनारे बैठना पसंद है, तो यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी। नैनीताल की तुलना में यहां भीड़ थोड़ी कम महसूस होती है और माहौल भी ज्यादा शांत है। भीमताल झील इस जगह का सबसे बड़ा आकर्षण है।

झील के बीच एक छोटा सा आइलैंड भी है, जहां नाव के जरिए पहुंचा जा सकता है। झील के आसपास बैठकर पहाड़ों को देखना, ठंडी हवा महसूस करना और कुछ समय बिना किसी जल्दी के बिताना यहां का सबसे अच्छा अनुभव है। भीमताल में बोटिंग भी की जा सकती है।

इसके अलावा झील के किनारे स्थित भीमेश्वर महादेव मंदिर भी लोगों की आस्था का केंद्र है। अगर आप Kainchi Dham के बाद धार्मिक और प्राकृतिक दोनों तरह की जगहों को देखना चाहते हैं, तो भीमताल अच्छा विकल्प हो सकता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए आसपास हिडिम्बा पर्वत और पंखुड़िया फॉल्स जैसी जगहें भी हैं। हालांकि यहां घूमने से पहले मौसम और रास्ते की स्थिति जरूर देख लें।

सातताल: जहां जंगल और झीलें एक साथ मिलती हैं

अगर आप भीड़ से दूर किसी शांत जगह की तलाश में हैं, तो Kainchi Dham के आसपास सातताल आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए। यहां घने जंगलों के बीच कई झीलें फैली हुई हैं और पूरा इलाका प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं लगता। सातताल का नाम ही इसकी पहचान बताता है। यहां सात आपस में जुड़ी झीलों का क्षेत्र है, जो चीड़ और बांज के जंगलों से घिरा हुआ है।

सुबह के समय यहां पक्षियों की आवाज और जंगल की शांति आपको शहर की भागदौड़ से बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाती है। यह जगह खासतौर पर बर्डवॉचिंग के लिए जानी जाती है। यहां कई तरह के स्थानीय और प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। राम ताल, सीता ताल और गरुड़ ताल के आसपास सुबह घूमना एक अलग अनुभव देता है।

सातताल में तितली संग्रहालय भी मौजूद है, जहां तितलियों की कई प्रजातियों का संग्रह देखने को मिलता है। अगर आपको थोड़ा एडवेंचर पसंद है, तो यहां कयाकिंग और दूसरी एक्टिविटीज का भी आनंद लिया जा सकता है। Kainchi Dham की यात्रा के बाद अगर आप कुछ घंटे बिल्कुल शांत माहौल में बिताना चाहते हैं, तो सातताल आपके लिए सही जगह हो सकती है।

नौकुचियाताल: नौ कोनों वाली खूबसूरत झील

कुमाऊं की सबसे दिलचस्प झीलों में से एक है नौकुचियाताल। Kainchi Dham से इसकी दूरी लगभग 15 से 26 किलोमीटर के बीच है। इस झील की सबसे खास बात इसका आकार है। कहा जाता है कि इस झील के नौ कोने हैं, इसलिए इसका नाम नौकुचियाताल पड़ा।

यह झील काफी गहरी मानी जाती है और इसके आसपास का शांत वातावरण लोगों को खूब पसंद आता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति एक ही जगह से झील के सभी नौ कोनों को देख लेता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। हालांकि यह लोककथा है, लेकिन झील की खूबसूरती सच में देखने लायक है।

नौकुचियाताल में पैराग्लाइडिंग भी काफी लोकप्रिय है। अगर आप पहाड़ों और झीलों को ऊपर से देखने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो यहां सर्टिफाइड पायलट के साथ पैराग्लाइडिंग कर सकते हैं। यहां हनुमान गढ़ी मंदिर भी आसपास की खूबसूरत जगहों में शामिल है। पहाड़ी की ऊंचाई से दिखाई देने वाला नजारा आपकी यात्रा को और यादगार बना सकता है।

नैनीताल: कुमाऊं की यात्रा नैनी झील के बिना अधूरी है

Kainchi Dham से लगभग 18 से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल है। वैसे तो यहां अक्सर पर्यटकों की काफी भीड़ रहती है, लेकिन अगर आप पहली बार कुमाऊं घूमने आए हैं, तो नैनीताल को नजरअंदाज करना मुश्किल है। पहाड़ों के बीच बसी नैनी झील इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है।

शाम के समय जब आसपास की रोशनी झील के पानी में दिखाई देती है, तो पूरा नजारा बेहद खूबसूरत लगता है। नैनीताल में नैना देवी मंदिर जरूर जाना चाहिए। यह मंदिर झील के किनारे स्थित है और श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध है। इसके बाद आप मॉल रोड पर घूम सकते हैं, भोटिया मार्केट में शॉपिंग कर सकते हैं और सड़क किनारे मिलने वाले भुट्टे या मोमोज का स्वाद ले सकते हैं।

अगर आपके पास समय है, तो टिफिन टॉप भी जा सकते हैं। यहां से आसपास के पहाड़ों का शानदार नजारा दिखाई देता है। वहीं हाई एल्टीट्यूड जू भी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिन्हें वन्यजीव देखना पसंद है। Kainchi Dham आने वाले बहुत से लोग नैनीताल को अपनी ट्रिप में शामिल करते हैं, इसलिए अगर आपका प्लान दो दिन का है तो दोनों जगहों को आराम से कवर किया जा सकता है।

घोड़ाखाल: घंटियों की आवाज से गूंजता गोलू देवता मंदिर

Kainchi Dham से करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर घोड़ाखाल स्थित है। यहां का गोलू देवता मंदिर कुमाऊं के सबसे अनोखे मंदिरों में गिना जाता है। गोलू देवता को न्याय का देवता माना जाता है। यहां आने वाले लोग अपनी समस्याओं और इच्छाओं को कागज पर लिखकर मंदिर परिसर में लगाते हैं।

जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो लोग वापस आकर मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं। मंदिर में चारों तरफ लगी हजारों घंटियां इस जगह को बेहद अलग बनाती हैं। हवा चलने पर जब घंटियां एक साथ बजती हैं, तो पूरा वातावरण एक अलग ही एहसास देता है। घोड़ाखाल के आसपास श्यामखेत चाय बागान भी है।

यहां हरे-भरे चाय के बागानों के बीच घूमना और ताजी पहाड़ी चाय का स्वाद लेना अच्छा अनुभव हो सकता है। अगर आप Kainchi Dham की यात्रा में आस्था और प्रकृति दोनों को शामिल करना चाहते हैं, तो घोड़ाखाल जरूर जाएं।

रामगढ़: फलों के बागों और पहाड़ों के बीच बसा शांत गांव

Kainchi Dham

Kainchi Dham से करीब 22 से 26 किलोमीटर दूर रामगढ़ है। इसे कुमाऊं का फ्रूट बाउल भी कहा जाता है। यहां की पहाड़ियों पर सेब, आड़ू, खुबानी और प्लम के बाग दिखाई देते हैं। वसंत के मौसम में जब पेड़ों पर फूल खिलते हैं, तो पूरी घाटी बेहद सुंदर दिखाई देती है। रामगढ़ उन लोगों के लिए अच्छी जगह है जो भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशन से दूर रहकर कुछ दिन शांति में बिताना चाहते हैं।

इस जगह का साहित्य से भी खास रिश्ता रहा है। टैगोर पॉइंट और महादेवी वर्मा से जुड़ी जगहें यहां आने वाले साहित्य प्रेमियों को आकर्षित करती हैं। महादेवी वर्मा का ग्रीष्मकालीन निवास भी आसपास के क्षेत्र में स्थित है। तल्ला रामगढ़ में श्री अरविंदो आश्रम की शाखा मधुबन भी है, जहां लोग ध्यान और शांति के लिए आते हैं। अगर आप Kainchi Dham से आगे किसी शांत और कम भीड़ वाली जगह जाना चाहते हैं, तो रामगढ़ अच्छा विकल्प है।

मुक्तेश्वर: जहां से हिमालय को करीब से देखने का मौका मिलता है

Kainchi Dham से लगभग 30 से 50 किलोमीटर के बीच स्थित मुक्तेश्वर कुमाऊं की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। समुद्र तल से करीब 2,286 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह छोटा सा हिल स्टेशन अपने पुराने शिव मंदिर और हिमालय के शानदार दृश्यों के लिए जाना जाता है। मुक्तेश्वर धाम मंदिर करीब 350 साल पुराना माना जाता है। पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के बाद आसपास की हिमालय श्रृंखलाओं का नजारा देखने को मिलता है।

साफ मौसम में नंदा देवी, त्रिशूल और पंचचूली जैसी चोटियां दिखाई दे सकती हैं। मंदिर के पास चौली की जाली स्थित है। यह जगह ऊंची चट्टानों और गहरी घाटियों के लिए जानी जाती है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए यहां रॉक क्लाइम्बिंग और रैपलिंग जैसी गतिविधियां भी लोकप्रिय हैं। मुक्तेश्वर के पास भालू गाड वाटरफॉल भी एक खूबसूरत जगह है।

जंगलों के बीच से होकर जाने वाला रास्ता और झरने तक पहुंचने का अनुभव प्रकृति प्रेमियों को काफी पसंद आता है। अगर आपके पास दो दिन हैं, तो Kainchi Dham के साथ मुक्तेश्वर को जोड़ना एक शानदार प्लान हो सकता है।

प्योरा विलेज: असली पहाड़ी जिंदगी को करीब से देखिए

अगर आपको होटल, भीड़ और मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स से थोड़ा अलग अनुभव चाहिए, तो प्योरा विलेज जा सकते हैं। Kainchi Dham से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव अपनी सादगी और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचकर आपको बड़े-बड़े होटल और भीड़भाड़ वाले बाजार नहीं मिलेंगे।

इसके बजाय पत्थर और मिट्टी से बने पारंपरिक घर, शांत रास्ते और चारों तरफ फैले पहाड़ दिखाई देंगे। यह जगह जंगल वॉक और फोटोग्राफी के लिए अच्छी है। सुबह या शाम के समय गांव की पगडंडियों पर घूमते हुए आपको कुमाऊं की असली जिंदगी को करीब से देखने का मौका मिल सकता है। Kainchi Dham की यात्रा के बाद अगर आप कुछ समय बिल्कुल शांत वातावरण में बिताना चाहते हैं, तो प्योरा आपके लिए एक अच्छा ऑफबीट विकल्प है।

कुमाऊं आए हैं तो ये पहाड़ी खाना जरूर चखें

किसी भी जगह को समझने का सबसे अच्छा तरीका वहां का स्थानीय खाना खाना भी होता है। Kainchi Dham और आसपास के इलाकों में घूमते समय स्थानीय ढाबों या होमस्टे में पहाड़ी खाने का स्वाद जरूर लें। भट्ट की चुड़कानी यहां की मशहूर डिश है।

काले भट्ट से बनने वाली यह दाल स्वाद में अलग होती है और चावल के साथ काफी पसंद की जाती है। इसके अलावा आलू के गुटके भी जरूर ट्राई करें। पहाड़ी मसालों के साथ बने ये मसालेदार आलू चाय के साथ भी खूब पसंद किए जाते हैं।

मीठे में बाल मिठाई और सिंगोरी को बिल्कुल मिस मत कीजिए। सिंगोरी को खास पत्तों में लपेटकर तैयार किया जाता है, जबकि बाल मिठाई अपनी अलग बनावट और स्वाद के लिए जानी जाती है।

अगर सिर्फ एक दिन है तो ऐसे घूमिए

अगर आपके पास Kainchi Dham और आसपास घूमने के लिए सिर्फ एक दिन है, तो सुबह जल्दी दर्शन करके दिन की शुरुआत करें। कोशिश करें कि 5:30 से 6 बजे के बीच आश्रम पहुंच जाएं। दर्शन के बाद भवाली की तरफ निकलें और वहां पहाड़ी नाश्ता करें।

इसके बाद घोड़ाखाल स्थित गोलू देवता मंदिर जा सकते हैं। दोपहर तक भीमताल पहुंचकर झील के किनारे समय बिताइए और अगर समय मिले तो बोटिंग कीजिए। शाम होने से पहले आप हल्द्वानी या काठगोदाम की तरफ वापस निकल सकते हैं। इस तरह एक दिन में आप Kainchi Dham, भवाली, घोड़ाखाल और भीमताल को आराम से कवर कर सकते हैं।

दो दिन की ट्रिप है तो यह प्लान बेहतर रहेगा

अगर आपके पास पूरा वीकेंड है, तो यात्रा को जल्दी-जल्दी खत्म करने की कोशिश मत कीजिए। पहले दिन सुबह Kainchi Dham के दर्शन करें। इसके बाद भवाली होते हुए भीमताल या सातताल की तरफ जाएं। झील के किनारे समय बिताइए, कयाकिंग या बोटिंग कीजिए और रात में भीमताल या भवाली के किसी होमस्टे में रुक सकते हैं।

दूसरे दिन सुबह रामगढ़ की तरफ निकलें। रास्ते में फलों के बाग और पहाड़ी नजारे देखते हुए मुक्तेश्वर पहुंचिए। वहां मुक्तेश्वर धाम, चौली की जाली और आसपास की प्राकृतिक जगहों को देखने के बाद शाम तक वापसी की जा सकती है।

दो दिन में इस पूरे क्षेत्र को समझने और महसूस करने का समय भी मिल जाता है। यही वजह है कि Kainchi Dham की यात्रा को सिर्फ कुछ घंटों में खत्म करने के बजाय इसे एक छोटी कुमाऊं ट्रिप में बदल देना ज्यादा अच्छा अनुभव हो सकता है।

कैंची धाम सिर्फ दर्शन नहीं, एक पूरा पहाड़ी सफर है

कई बार हम किसी प्रसिद्ध जगह पर सिर्फ इसलिए जाते हैं क्योंकि वहां पहुंचना हमारा मुख्य उद्देश्य होता है। लेकिन Kainchi Dham की यात्रा का सबसे खूबसूरत हिस्सा सिर्फ आश्रम तक पहुंचना नहीं है। असली मजा उस सफर में भी है जो आपको भवाली की गलियों, भीमताल की झीलों, सातताल के जंगलों और मुक्तेश्वर की ऊंचाइयों तक ले जाता है।

सुबह बाबा नीम करोली के दर्शन करने के बाद जब आप इन पहाड़ी सड़कों पर आगे बढ़ते हैं, तो धीरे-धीरे शहर की भागदौड़ पीछे छूटने लगती है। कहीं सड़क किनारे फल बेचता स्थानीय दुकानदार मिलता है, कहीं चाय की छोटी दुकान से आती खुशबू आपको रोक लेती है और कहीं अचानक सामने खुलती पहाड़ों की घाटी आपको कुछ देर के लिए बस चुप होकर देखने पर मजबूर कर देती है।

Kainchi Dham

यही कुमाऊं की खूबसूरती है। यहां हर जगह जल्दी में देखने के लिए नहीं बनी। कुछ जगहें ऐसी हैं जहां बस बैठना होता है, हवा महसूस करनी होती है और कुछ देर के लिए फोन को जेब में रखना होता है। इसलिए अगली बार जब आप Kainchi Dham जाएं, तो कोशिश करें कि अपने सफर में इन आसपास की जगहों को भी शामिल करें। हो सकता है बाबा के दर्शन आपकी यात्रा की शुरुआत हों और पहाड़ों की ये खूबसूरत जगहें उसे यादगार बना दें।

Five Colors of Travel की ओर से कुछ खास सुझाव

  • सुबह जल्दी Kainchi Dham पहुंचें, ट्रैफिक और पार्किंग की परेशानी कम मिलेगी।
  • पहाड़ी रास्तों पर ड्राइव का अनुभव नहीं है तो लोकल टैक्सी लेना बेहतर रहेगा।
  • बैग में हल्की जैकेट जरूर रखें, पहाड़ों का मौसम जल्दी बदल सकता है।
  • दूर-दराज के इलाकों में नेटवर्क कमजोर हो सकता है, इसलिए जरूरी कैश साथ रखें।
  • झीलों और पहाड़ों पर प्लास्टिक या कचरा बिल्कुल न फैलाएं और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें।
Shivani Pal

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