Kainchi Dham यात्रा: कैसे पहुंचें, कब जाएं और क्या देखें?
उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचते ही शहर की भागदौड़, काम की टेंशन और रोजमर्रा की परेशानियां कुछ देर के लिए पीछे छूट जाती हैं। चारों तरफ पहाड़, हरे-भरे पेड़, ठंडी हवा और घंटियों की आवाज के बीच बसा Kainchi Dham आज सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश-दुनिया के लोगों के बीच आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। बाबा नीम करौली महाराज के इस पवित्र आश्रम में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। कोई यहां दर्शन के लिए आता है, कोई मन की शांति के लिए और कोई सिर्फ इस जगह के बारे में सुनकर इसे अपनी आंखों से देखने चला आता है। Kainchi Dham आने वाले लोगों में आम श्रद्धालुओं के साथ कई बड़ी हस्तियों के नाम भी जुड़े रहे हैं। अगर आप भी पहली बार Kainchi Dham जाने का प्लान बना रहे हैं और सोच रहे हैं कि यहां कैसे पहुंचें, कहां रुकें, दर्शन का समय क्या है, आसपास क्या-क्या घूम सकते हैं और कितना बजट रखना चाहिए, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। यहां हम आपको Kainchi Dham यात्रा की पूरी जानकारी आसान भाषा में देंगे, ताकि आपका सफर बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके। कौन थे बाबा नीम करौली? बाबा नीम करौली महाराज भारत के सबसे प्रसिद्ध संतों में गिने जाते हैं। उनके भक्त उन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं। बाबा जी का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में लगभग साल 1900 के आसपास हुआ था। उनका असली नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा बताया जाता है। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बना ली थी और साधना के रास्ते पर निकल पड़े थे। बाबा की सबसे खास बात उनकी सादगी थी। वे साधारण कपड़े पहनते थे और अक्सर खुद को एक कंबल में लपेटे रखते थे। भक्तों के अनुसार बाबा जी कभी भी खुद को भगवान नहीं मानते थे। वे हमेशा लोगों को हनुमान जी की भक्ति करने के लिए कहते थे। उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों के बीच सुनाए जाते हैं। ट्रेन वाला मशहूर किस्सा बाबा नीम करौली से जुड़ी सबसे मशहूर कहानियों में से एक ट्रेन से जुड़ी है। बताया जाता है कि साल 1958 में बाबा जी बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में सफर कर रहे थे। जब टिकट कलेक्टर ने टिकट मांगा तो बाबा जी के पास टिकट नहीं था। इसके बाद उन्हें नीम करौली स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा जी शांत होकर प्लेटफॉर्म पर बैठ गए। कहानी के अनुसार, इसके बाद ट्रेन को चलाने की कई कोशिश की गई लेकिन ट्रेन अपनी जगह से आगे नहीं बढ़ी। रेलवे अधिकारी परेशान हो गए। बाद में उन्होंने बाबा जी से माफी मांगी और उन्हें सम्मान के साथ वापस ट्रेन में बैठाया। कहा जाता है कि जैसे ही बाबा जी ट्रेन में बैठे, ट्रेन चल पड़ी। इसी घटना के बाद लोग उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से जानने लगे। Kainchi Dham की शुरुआत कैसे हुई? उत्तराखंड की पहाड़ियों में स्थित Kainchi Dham की स्थापना बाबा नीम करौली महाराज ने की थी। साल 1961 के आसपास बाबा जी उत्तराखंड पहुंचे और नैनीताल के पास स्थित इस शांत जगह को चुना। यह जगह पहाड़ों और जंगलों से घिरी हुई थी। पास से बहती नदी और आसपास का शांत माहौल बाबा जी को पसंद आया। इसके बाद साल 1964 में बाबा नीम करौली महाराज ने अपने सहयोगियों के साथ यहां आश्रम की स्थापना की। आज Kainchi Dham बाबा नीम करौली महाराज के सबसे प्रसिद्ध आश्रमों में शामिल है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं। आखिर इसका नाम कैंची क्यों पड़ा? Kainchi Dham नाम के पीछे भी एक दिलचस्प वजह बताई जाती है। जिस जगह पर यह आश्रम स्थित है, वहां सड़क पर दो तीखे मोड़ हैं। ये दोनों मोड़ ऊपर से देखने पर कैंची के आकार जैसे दिखाई देते हैं। इसी वजह से इस जगह को कैंची कहा जाने लगा। इसके अलावा कई भक्त इसका एक आध्यात्मिक अर्थ भी बताते हैं। उनका मानना है कि यहां आने के बाद इंसान के मन से कई तरह की परेशानियां और मोह-माया के बंधन कम हो जाते हैं। आज जब आप Kainchi Dham पहुंचते हैं तो चारों तरफ पहाड़, हरे पेड़ और शांत वातावरण दिखाई देता है। यही वजह है कि यहां आने वाले लोग सिर्फ दर्शन ही नहीं बल्कि कुछ समय सुकून से बिताने के लिए भी पहुंचते हैं। दिल्ली से Kainchi Dham कैसे पहुंचें? दिल्ली से Kainchi Dham पहुंचने के लिए आपके पास बस, ट्रेन और अपनी गाड़ी तीनों विकल्प हैं। सड़क मार्ग से दिल्ली से यहां की दूरी लगभग 315 से 330 किलोमीटर के बीच है। रास्ते और ट्रैफिक के हिसाब से इस सफर में करीब 8 से 10 घंटे लग सकते हैं। बस से यात्रा दिल्ली से हल्द्वानी और काठगोदाम के लिए कई बसें चलती हैं। आप आनंद विहार ISBT, कश्मीरी गेट और आरके आश्रम के आसपास से बस पकड़ सकते हैं। कई लोग रात की बस लेना पसंद करते हैं। रात में सफर शुरू करने के बाद सुबह आप पहाड़ी इलाकों के पास पहुंच जाते हैं। सरकारी बसों के अलावा वोल्वो और स्लीपर बसों का भी विकल्प मिलता है। बजट कम है तो सरकारी बस एक अच्छा विकल्प है और अगर आराम से सफर करना चाहते हैं तो वोल्वो या स्लीपर बस ली जा सकती है। हल्द्वानी या काठगोदाम पहुंचने के बाद आप वहां से टैक्सी या बस लेकर Kainchi Dham पहुंच सकते हैं। ट्रेन से कैसे जाएं? Kainchi Dham का अपना कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से Kainchi Dham की दूरी करीब 35 से 38 किलोमीटर है। दिल्ली और कई दूसरे शहरों से काठगोदाम के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं। दिल्ली से आने वाले लोग रानीखेत एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति और शताब्दी जैसी ट्रेनों का विकल्प देख सकते हैं। काठगोदाम स्टेशन से बाहर निकलते ही शेयरिंग टैक्सी मिल जाती हैं। इनका किराया करीब ₹100 से ₹150 प्रति व्यक्ति हो सकता है। अगर बस से जाना चाहते हैं तो अल्मोड़ा या रानीखेत रूट की बसें भी मिल सकती हैं। बस का किराया लगभग ₹60 से ₹80 के