Latest Travel

Munsiyari Travel Guide: घूमने की जगहें, ट्रेक, होटल और पूरी जानकारी

  • 0 Comments

क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है, जहाँ सुबह खिड़की खोलते ही बर्फ से ढकी चोटियाँ दिखाई दें, जहाँ हवा में देवदार की खुशबू घुली हो और जहाँ समय जैसे थोड़ा धीमा पड़ जाता हो? अगर नहीं, तो आपको एक बार Munsiyari जरूर जाना चाहिए। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लगभग 2,200 मीटर की ऊँचाई पर बसा Munsiyari आज उन यात्रियों की पसंद बनता जा रहा है, जो भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशनों से दूर प्रकृति के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं। यही वजह है कि कई लोग Munsiyari को उत्तराखंड का असली Hidden Gem भी कहते हैं। “सार संसार, एक मुनस्यार”- एक कहावत जो सब कुछ कह देती है कुमाऊँ में एक पुरानी कहावत काफी प्रसिद्ध है—“सार संसार, एक मुनस्यार”। इसका अर्थ है कि एक तरफ पूरी दुनिया की खूबसूरती रख दी जाए और दूसरी तरफ मुनस्यारी, तो मुनस्यारी का पलड़ा भारी पड़ेगा। जब आप Munsiyari की हरी-भरी घाटियों, दूर तक फैले जंगलों और हिमालयी चोटियों को देखते हैं, तो यह कहावत बिल्कुल सच लगने लगती है। यहाँ की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है। अभी भी यह जगह बड़े पैमाने पर व्यावसायिक पर्यटन से बची हुई है, इसलिए यहाँ प्रकृति का असली रूप देखने को मिलता है। Munsiyari को ‘छोटा कश्मीर‘ क्यों कहा जाता है? कई पर्यटक पहली बार Munsiyari पहुँचकर यही कहते हैं कि यहाँ के दृश्य उन्हें कश्मीर की याद दिलाते हैं। सर्दियों में जब पूरा इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, तब यह जगह किसी पोस्टकार्ड जैसी दिखाई देती है। वहीं गर्मियों में यहाँ की घास से ढकी पहाड़ियाँ, रंग-बिरंगे फूल और साफ आसमान एक अलग ही अनुभव देते हैं। बारिश के मौसम में Munsiyari की हरियाली और भी निखर जाती है और बादल पहाड़ों के बीच उतर आते हैं। यही कारण है कि इसे प्यार से “Little Kashmir” भी कहा जाता है। पंचाचूली की चोटियाँ: Munsiyari की सबसे बड़ी पहचान अगर किसी एक चीज ने Munsiyari को सबसे ज्यादा प्रसिद्ध बनाया है, तो वह हैं पंचाचूली की पाँच बर्फीली चोटियाँ। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग जाने से पहले पांडवों ने यहाँ अपना अंतिम भोजन बनाया था। इसी कारण इन चोटियों का नाम पंचाचूली पड़ा, जिसका अर्थ है “पाँच चूल्हे”। सुबह सूरज की पहली किरण जब इन चोटियों पर पड़ती है, तो ये सुनहरे रंग में चमकने लगती हैं। शाम के समय इनका रंग धीरे-धीरे नारंगी और गुलाबी दिखाई देने लगता है। कई फोटोग्राफर सिर्फ इस दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए Munsiyari आते हैं। ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं अगर आपको ट्रेकिंग पसंद है, तो Munsiyari आपके लिए एक शानदार डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। यहाँ से प्रसिद्ध खलिया टॉप ट्रेक शुरू होता है। इस ट्रेक के दौरान घास के मैदान, घने जंगल और बर्फ से ढकी चोटियाँ दिखाई देती हैं। ऊपर पहुँचने के बाद हिमालय का 360 डिग्री दृश्य देखने को मिलता है। इसके अलावा Munsiyari को मिलम ग्लेशियर, रालम ग्लेशियर और नामिक ग्लेशियर जैसे प्रसिद्ध ट्रेक्स का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। यही वजह है कि एडवेंचर प्रेमियों के बीच इस जगह की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पक्षियों और तितलियों की रंगीन दुनिया बहुत कम लोग जानते हैं कि Munsiyari बर्ड वॉचिंग और बटरफ्लाई वॉचिंग के लिए भी काफी प्रसिद्ध हो रहा है। पिथौरागढ़ क्षेत्र में पक्षियों और तितलियों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं। सुबह के समय जंगलों से आती पक्षियों की आवाजें पूरे वातावरण को और भी शांत बना देती हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए Munsiyari का यह पहलू किसी छिपे हुए खजाने से कम नहीं है। झरने, झीलें और सुकून भरे नज़ारे Munsiyari की यात्रा केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है। यहाँ से कुछ दूरी पर स्थित बिर्थी फॉल लगभग 125 मीटर की ऊँचाई से गिरता है और मानसून के दौरान इसका दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इसके अलावा महेश्वरी कुंड भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। स्थानीय लोग इस झील से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियाँ सुनाते हैं। आसपास फैली हरियाली और शांत वातावरण इसे और भी खास बना देते हैं। Munsiyari कैसे पहुँचें? पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद Munsiyari तक पहुँचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। यहाँ से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 10 से 12 घंटे में मुनस्यारी पहुँचा जा सकता है। यदि आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं, तो पंतनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। दिल्ली, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ से नियमित बस और टैक्सी सेवाएँ भी उपलब्ध हैं। सड़क यात्रा के दौरान पहाड़ों, घाटियों और नदियों के खूबसूरत दृश्य पूरे सफर को यादगार बना देते हैं। Munsiyari में कहाँ ठहरें? पिछले कुछ वर्षों में Munsiyari में पर्यटन सुविधाएँ काफी बेहतर हुई हैं। यहाँ आपको बजट होटल, होमस्टे और छोटे गेस्ट हाउस आसानी से मिल जाएंगे। कई होमस्टे ऐसे हैं जहाँ कमरे की खिड़की से सीधे पंचाचूली की चोटियाँ दिखाई देती हैं। अगर आप स्थानीय संस्कृति को करीब से समझना चाहते हैं, तो किसी होमस्टे में रुकना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे आपको यहाँ के खान-पान और लोगों की जीवनशैली को समझने का मौका भी मिलेगा। यहाँ के लोग और संस्कृति भी उतनी ही खास है Munsiyari सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए भी जाना जाता है। यहाँ मुख्य रूप से शौका (भोटिया) जनजाति के लोग रहते हैं। पुराने समय में ये लोग तिब्बत के साथ व्यापार करते थे। आज भी उनकी संस्कृति, पहनावा और खान-पान में उस विरासत की झलक दिखाई देती है। यहाँ स्थित ट्राइबल हेरिटेज म्यूजियम स्थानीय संस्कृति को समझने के लिए एक बेहतरीन जगह मानी जाती है। Five Colors of Travel की ओर से कुछ खास सुझाव भट्ट की चुड़कानी और मडुआ की रोटी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद जरूर लें। यदि आप ट्रेकिंग करने जा रहे हैं, तो अच्छी ग्रिप वाले जूते और गर्म कपड़े साथ रखें। स्थानीय महिलाओं द्वारा बनाए गए पश्मीना शॉल और ऊनी उत्पाद खरीदकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहयोग करें। पहाड़ों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक कचरा बिल्कुल न फैलाएँ और “Leave No Trace” के सिद्धांत का पालन करें। यदि आप बर्फ देखना चाहते हैं, तो जनवरी और

Category Destination Latest Travel Travel Stories

भारत के 10 सबसे खूबसूरत Offbeat Hill Station

  • 0 Comments

आजकल हर कोई शिमला, मनाली और मसूरी की Reels बना रहा है। लेकिन अगर आप भीड़ से दूर, सुकून से भरा और थोड़ा अलग Travel Experience चाहते हैं, तो भारत में ऐसे कई Offbeat Hill Station हैं जहाँ अब भी Tourist की भीड़ कम पहुँचती है। यहाँ की वादियाँ, ताज़ा हवा, शांत माहौल और Local Culture आपके सफर को बिल्कुल नया रंग देते हैं। अगर आपका मन भीड़-भाड़ से हटकर किसी ऐसी जगह जाने का है जहाँ सिर्फ़ पहाड़, बादल और सुकून आपका इंतज़ार कर रहे हों, तो यह लिस्ट आपके लिए है। 1. जिभी, हिमाचल प्रदेश एक Hidden Offbeat Paradise हिमाचल प्रदेश की बंजार वैली में बसा जिभी उन लोगों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं जो Nature के बीच कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं। लकड़ी के पुराने घर, देवदार के घने जंगल, बहती नदियाँ और ठंडी फ़िज़ा इस जगह को एक Perfect Offbeat Hill Station बनाते हैं। यहाँ का माहौल इतना शांत है कि शहर का शोर कुछ ही घंटों में यादों से गायब हो जाता है। अगर आपको Slow Travel पसंद है, तो जिभी आपको निराश नहीं करेगा। क्या देखें? जालोरी पास सेरोलसर झील जिभी Waterfall चेहनी कोठी Local Café और Wooden Homestays घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर सबसे बेहतरीन समय माना जाता है। सर्दियों में यहाँ Snowfall भी देखने को मिल सकती है। कैसे पहुँचें? सबसे नज़दीकी Airport भुंतर (कुल्लू) है। Chandigarh और दिल्ली से बसें बंजार तक मिल जाती हैं। बंजार से टैक्सी लेकर लगभग 8 किलोमीटर में जिभी पहुँचा जा सकता है। 2. चोपता, उत्तराखंड Mini Switzerland नहीं, अपनी अलग पहचान लोग अक्सर चोपता को Mini Switzerland कह देते हैं, लेकिन सच कहें तो इसकी अपनी अलग शान है। चारों तरफ़ Bugyal, बर्फ़ से ढकी चोटियाँ और बेहद साफ़ आसमान इसे भारत के सबसे शानदार Offbeat Hill Station में शामिल करते हैं। यहाँ सुबह की पहली धूप जब हिमालय की चोटियों पर पड़ती है, तो पूरा मंज़र किसी पोस्टकार्ड जैसा लगता है। क्या देखें? तुंगनाथ मंदिर चंद्रशिला Trek देवरिया ताल हिमालय का Sunrise View Bird Watching घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर सबसे अच्छा समय है। दिसंबर और जनवरी में Snow Experience मिलता है। कैसे पहुँचें? ऋषिकेश से सड़क मार्ग सबसे आसान है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीक है। वहाँ से टैक्सी या Shared Jeep मिल जाती है। 3. तवांग, अरुणाचल प्रदेश बादलों के बीच बसा शांत Offbeat Hill Station अगर आपको Mountains के साथ Buddhist Culture भी देखना है, तो तवांग आपकी Bucket List में होना चाहिए। यह जगह अपनी Monastery, Lakes और बर्फ़ीले नज़ारों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन फिर भी यहाँ बाकी Hill Station जैसी भीड़ नहीं मिलती। यहाँ की ठंडी हवा और शांत माहौल दिल को एक अलग ही सुकून देता है। क्या देखें? तवांग Monastery सेला पास माधुरी झील नुरानंग Waterfall War Memorial घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से अक्टूबर सबसे बढ़िया समय है। कैसे पहुँचें? सबसे नज़दीकी Airport तेज़पुर और गुवाहाटी हैं। वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा तवांग पहुँचा जा सकता है। Inner Line Permit पहले से बनवा लें। 4. ज़ीरो, अरुणाचल प्रदेश Nature और Culture का शानदार मेल ज़ीरो सिर्फ़ एक Offbeat Hill Station नहीं बल्कि एक Cultural Experience भी है। यह अपातानी जनजाति का घर है और अपनी हरियाली, धान के खेतों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। अगर आप भीड़ से दूर कुछ बिल्कुल अलग महसूस करना चाहते हैं, तो यह जगह आपको बेहद पसंद आएगी। क्या देखें? अपातानी गाँव ज़ीरो वैली Talley Valley National Park Local Handicrafts Ziro Music Festival (सीज़न में) घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से अक्टूबर सबसे अच्छा समय माना जाता है। कैसे पहुँचें? लखीमपुर रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीक है। गुवाहाटी Airport से सड़क मार्ग उपलब्ध है। टैक्सी और Shared Cab आसानी से मिल जाती हैं। 5. काकचांग, सिक्किम जहाँ हर मोड़ पर दिखती है ख़ूबसूरती अगर Gangtok की भीड़ से बचना चाहते हैं, तो काकचांग एक शानदार Offbeat Hill Station साबित हो सकता है। यहाँ की घाटियाँ, झरने और शांत माहौल इसे बेहद खास बनाते हैं। सुबह के समय बादलों के बीच से निकलती धूप पूरे इलाके को किसी Dream Destination जैसा बना देती है। क्या देखें? काकचांग Waterfall Local View Points Mountain Trails Tea Gardens Village Walk घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से मई और अक्टूबर से दिसंबर सबसे अच्छा मौसम रहता है। कैसे पहुँचें? बागडोगरा Airport सबसे नज़दीक है। न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से टैक्सी मिल जाती है। Gangtok से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। 6. लैंडौर, उत्तराखंड मसूरी के पास, लेकिन भीड़ से कोसों दूर अगर आपको मसूरी की खूबसूरती पसंद है लेकिन वहाँ की भीड़ बिल्कुल नहीं, तो लैंडौर आपके लिए एक Perfect Offbeat Hill Station है। अंग्रेज़ों के ज़माने की पुरानी इमारतें, शांत गलियाँ, देवदार के जंगल और ठंडी हवा इस जगह को बेहद ख़ास बनाते हैं। यहाँ का माहौल इतना सुकूनभरा है कि आप बिना किसी जल्दबाज़ी के घंटों पैदल घूम सकते हैं। यह वही जगह है जहाँ मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड कई सालों से रह रहे हैं। इसलिए किताबों और पुराने पहाड़ी Town का शौक रखने वालों के लिए यह किसी Dream Destination से कम नहीं। क्या देखें? लाल टिब्बा View Point चार दुकान सेंट पॉल चर्च Kellogg Memorial Church Nature Walks और Local Cafés घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर सबसे अच्छा समय है। सर्दियों में हल्की Snowfall भी देखने को मिल सकती है। कैसे पहुँचें? देहरादून Airport सबसे नज़दीक है। देहरादून Railway Station से टैक्सी आसानी से मिल जाती है। मसूरी से लैंडौर लगभग 15–20 मिनट की दूरी पर है। 7. हाफलोंग, असम पूर्वोत्तर का Hidden Offbeat Gem असम का नाम आते ही ज़्यादातर लोग Tea Gardens और Kaziranga के बारे में सोचते हैं, लेकिन हाफलोंग एक ऐसा Offbeat Hill Station है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यहाँ की हरियाली, झीलें, बादलों से ढकी पहाड़ियाँ और शांत माहौल किसी फ़िल्मी Scene जैसा एहसास कराते हैं। अगर आपको Crowd से दूर रहकर Nature Enjoy करना पसंद है, तो यह जगह

Category Culture Destination Travel Uttarakhand

चारधाम यात्रा होगी आसान- 5 KM लंबी सुरंग से अब 2 घंटे का सफर सिर्फ 15 मिनट में

  • 0 Comments

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा करना हर किसी के दिल में होता है, क्योंकि ये सिर्फ घूमने वाली ट्रिप नहीं होती, बल्कि एक तरह से आस्था और सुकून वाली यात्रा होती है। लेकिन सच ये भी है कि पहाड़ों का रास्ता इतना आसान नहीं होता। कहीं सड़कें बहुत संकरी होती हैं, कहीं तेज मोड़ आते हैं और ऊपर से मौसम का कोई भरोसा नहीं कभी बारिश, कभी बर्फबारी और कई बार भूस्खलन की वजह से रास्ता बंद तक हो जाता है। यही कारण है कि बहुत से लोग चारधाम जाने का प्लान बनाते तो हैं, लेकिन फिर ये सोचकर डर जाते हैं कि रास्ता बहुत मुश्किल होगा या सफर में ज्यादा परेशानी हो जाएगी। कई बार तो लोग टिकट देखकर भी बाद में प्लान कैंसिल कर देते हैं। लेकिन अब चारधाम यात्रियों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। हिमालय के अंदर से सिलक्यारा से पोलगांव तक एक लंबी सुरंग बनाई जा रही है, जिससे यात्रा काफी आसान और आरामदायक हो जाएगी। इस सुरंग के बनने के बाद जो सफर अभी डेढ़-दो घंटे में पूरा होता है, वो आगे चलकर सिर्फ 15 मिनट में हो जाएगा। यानी ना सिर्फ समय बचेगा, बल्कि रास्ते की टेंशन भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी और चारधाम यात्रा पहले से ज्यादा आसान लगने लगेगी। Silkyara- Polgaon Tunnel क्या है और कहां बन रही है? सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग को कई लोग सिलक्यारा बेंड–बारकोट सुरंग के नाम से भी जानते हैं। ये सुरंग उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बन रही है और चारधाम महामार्ग परियोजना का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है। इसका मुख्य मकसद गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी को कम करना है ताकि यात्रियों को पहाड़ों के कठिन मोड़ों और ऊंचे रास्तों से बार-बार ना गुजरना पड़े। ये सुरंग हिमालयी इलाके में बनाई जा रही है, जहां काम करना वैसे भी बहुत मुश्किल होता है, इसलिए इसे बनाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। सुरंग बनाना इतना मुश्किल क्यों था? हिमालय जैसे पहाड़ी इलाके में सुरंग बनाना आसान काम नहीं होता। यहां जमीन की बनावट अलग होती है, कहीं चट्टानें बहुत सख्त होती हैं तो कहीं मिट्टी कमजोर होती है। ऊपर से ये इलाका भूकंप के लिहाज से भी संवेदनशील माना जाता है। इसी वजह से इस सुरंग को आर-पार निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी। हैरानी की बात ये है कि सिर्फ 4.5 किलोमीटर खुदाई करने में करीब 3 साल लग गए। खुदाई का काम साल 2023 में शुरू हुआ था और अब जाकर सुरंग को आर-पार खोदा जा सका है। मतलब साफ है—ये सुरंग बनाना जितना दिखने में आसान लगता है, असल में उतना ही मुश्किल और मेहनत वाला काम था। 2023 में हुआ हादसा, जब 41 मजदूर सुरंग में फंस गए थे इस सुरंग का नाम सुनते ही लोगों को नवंबर 2023 का वो बड़ा हादसा भी याद आता है, जब खुदाई के दौरान सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था। उस समय अंदर करीब 41 मजदूर फंस गए थे, और पूरे देश की नजरें उसी रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई थीं। करीब 17 दिन तक लगातार बचाव अभियान चला और फिर जाकर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। ये घटना बहुत बड़ी थी और इसके बाद सुरंग की सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया पर और ज्यादा ध्यान दिया गया, ताकि आगे ऐसा कोई खतरा ना हो। सुरंग कितनी लंबी है और कब तक तैयार होगी? सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग की कुल लंबाई 4.53 किलोमीटर बताई जा रही है और अभी इसका काम अंतिम चरण में चल रहा है। उम्मीद है कि 2025 के अंत तक ये सुरंग पूरी तरह तैयार हो जाएगी और फिर इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। सुरंग के अंदर डबल लेन सड़क होगी, जिससे दोनों तरफ से आवाजाही हो सकेगी। यानी पहाड़ों के संकरे रास्तों में फंसने वाली परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इसके अलावा सुरंग का आकार घोड़े की नाल जैसा रखा गया है और इसे ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनाया गया है, ताकि हिमालयी इलाके में आने वाले झटकों और दबाव को ये झेल सके। चारधाम यात्रियों को कितना फायदा होगा? चारधाम यात्रा करने वालों के लिए ये सुरंग किसी वरदान से कम नहीं होगी। अभी तक चारधाम यात्रा ज्यादातर गर्मियों में ही होती है, क्योंकि सर्दियों में बर्फबारी और खराब मौसम के कारण कई रास्ते बंद हो जाते हैं। लेकिन सुरंग बन जाने के बाद ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिल जाएगी, यानी हर मौसम में यात्रा ज्यादा आसान हो सकती है। अभी राड़ी क्षेत्र में सड़कें संकरी हैं, जहां अक्सर घंटों जाम लग जाता है और बारिश-बर्फबारी में हादसों का खतरा भी बना रहता है। कई बार तो सर्दियों में रास्ता कई दिनों तक बंद रहता है। सुरंग बनने के बाद ये परेशानी बहुत कम हो जाएगी और यात्रा ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। 2 घंटे का रास्ता 15 मिनट में कैसे होगा पूरा? अभी सिलक्यारा से पोलगांव तक जाने के लिए लोगों को राड़ी टॉप से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें करीब डेढ़ से 2 घंटे लग जाते हैं। लेकिन जब सुरंग पूरी तरह चालू हो जाएगी, तो ये दूरी करीब 26 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसका मतलब ये है कि अब पहाड़ के ऊपर-ऊपर घूमकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सुरंग के जरिए सीधा रास्ता मिल जाएगा। इसी वजह से यात्रा का समय घटकर सिर्फ 15 मिनट रह जाएगा। इससे समय तो बचेगा ही, साथ ही ईंधन की भी बचत होगी और सफर ज्यादा आरामदायक हो जाएगा। लोकल लोगों के लिए भी बड़ी राहत इस सुरंग का फायदा सिर्फ चारधाम यात्रियों को नहीं होगा, बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए भी ये एक बड़ी राहत बनेगी। जब आवाजाही आसान होगी, तो लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए दूर तक जाने में परेशानी नहीं होगी। स्कूल, अस्पताल, बाजार जैसी जरूरी जगहों तक पहुंच आसान हो जाएगी। साथ ही जब पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, तो होटल, होमस्टे, ढाबे, टैक्सी और दूसरे छोटे कारोबार भी बढ़ेंगे। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों की कमाई और रोजगार पर पड़ेगा और इलाके का विकास तेजी से होगा। कितना खर्च आया है इस सुरंग पर? खबरों के मुताबिक इस सुरंग को बनाने की

Destination Travel Uttarakhand

एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जिसका नाम गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया है

  • 0 Comments

गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (Govind Pashu Vihar National Park) सुपीन रेंज में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पास स्थित है। गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क लगभग 958 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राजनितज्ञ गोविन्द बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया था जो उस समय होम मिनिस्टर (Home Minister) के पद पर आसीन थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में गोविन्द बल्लभ पंत का प्रमुख हाथ था। यह नेशनल पार्क गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट (Snow Leopard Project) के तहत यहाँ स्नो लेपर्ड का संरक्षण किया जाता है। आप इस नेशनल पार्क में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। फॉउना (Fauna in Govind Pashu Vihar National Park) गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 150 प्रजातियां और मैमल्स की 15 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow Leopard), भूरा भालू (Brown Bear), एशियाई काला भालू (Asian Black Bear), तेंदुआ (Leopard), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), हिमालयी तहर (Himalayan Tahr), चील (Steppe Eagle), कस्तूरी मृग (Musk Deer), भरल (Bharal), ब्लैक ईगल (Black Eagle), हिमालयन चूहा (Himalayan Field Rat), बियर्डेड वल्चर (Bearded Vulture), गोरल (Goral), गोल्डन ईगल (Golden Eagle), सिवेट (Civet), जंगली सूअर (Wild Boar) और हिमालयन मोनाल तीतर (Himalayan Monal Pheasant) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Govind Pashu Vihar National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे यहाँ निचले भागों में चिर पाइन (Chir Pine), देवदार (Deodar), ओक (Oak), आदि पाई जाती है। इसके अलावा हाई अल्टीट्यूड पर ब्लू पाइन (Blue Pine), सिल्वर फ़िर (Silver Fir), यु (Yew), स्प्रूस (Spruce), ओक (Oak), मैपल (Maple), हैज़ल (Hazel), वॉलनट (Walnut), हॉर्स चेस्टनट (Horse Chestnut) आदि पाई जाती है। बेस्ट टाइम टू विजिट गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क (Best time to visit Govind Pashu Vihar National Park) अगर आप गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है। आप यहाँ अप्रैल से जून और सितम्बर से नवंबर के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Govind Pashu Vihar National Park)? सड़क मार्ग- आप धारकाधी से गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क पहुंच सकते है जो देहरादून से जुड़ा हुआ हैं।रेल मार्ग- इस नेशनल पार्क का नजदीकी रेलवे स्टेशन है- देहरादून रेलवे स्टेशन जहाँ से आप टैक्सी बुक करके या बस लेकर गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क पहुंच सकते है।हवाई मार्ग- इस नेशनल पार्क का निकटम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट (देहरादून) में है जो 231 किलोमीटर दूर है।

Culture Travel Uttarakhand

Buddha Temple in Dehradun-Mindrolling Monastery

  • 1 Comment

Pardeep Kumar–Five Colors of Travel हेलो फ्रेंड्स, फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रवेल के इस नए ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। आज इस ब्लॉग में हम आपको लेकर आये हैं देहरादून के बुद्धा टेम्पल में…..वैसे तो देहरादून में घूमने लायक बहुत अच्छे स्थान हैं। मगर यदि आप देहरादून में कुछ अलग ढूढ़ रहे हैं, तो आपके लिए देहरादून का प्रसिद्ध बुद्ध मंदिर सबसे अच्छा विकल्प रहेगा। इसे सामान्य प्रचलित भाषा मे देहरादून का बुद्धा टेम्पल कहते हैं। यहाँ आकर आपको आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा साथ ही, बौद्ध कला और स्थापत्य कला का यह मंदिर बेजोड़ नमूना है। (Buddha Temple in Dehradun) देहरादून के क्लेमेनटाउन में स्थित बुद्धा टेंपल देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अच्छा खासा लोकप्रिय है। इसको मिंड्रोलिंग मोनेस्ट्री के नाम से भी जाना जाता है। पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल है , एक बार मंदिर में प्रवेश करने के बाद आप अपने संपूर्ण शरीर में शांति और आराम महसूस कर सकते है. एशिया की सबसे बडी Buddhist समाधि बौद्ध मंदिर का निर्माण 1965 में प्रसिद्ध “कोहेन रिनपोछे” और बौद्ध धर्म के धर्म की रक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए कई अन्य भिक्षुओं द्वारा किया गया था । यह मंदिर जापानी वास्तुकला शैली में बनाया गया है । बुद्धा मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि यह एशिया की सबसे बडी Buddhist समाधि है , हर साल हज़ारो की गिनती में देश – विदेश के टूरिस्ट यंहा दर्शन करने आते है | जिसमें लार्ड बुद्धा और गुरु पद्मसम्भावा (Guru Padmasambhava) की विशालकाय प्रतिमा है । मंदिर में स्थित बुद्धा जी की 103 feet की प्रतिमा बहुत ही सुन्दर और आकर्षण का केंद्र है । पहले तीन फ्लोर में लार्ड बुद्धा की सरूप पेंटिंग्स है , जिसमें बुद्धा जी के जीवन के बारे में दिखाया गया है । कैसे पहुंचे बुद्धा टेम्पलक्‍लेमेनटाउन स्‍थि‍त बुद्धा टेंपल देहरादून आइएसबीटी से सहारनपुर मार्ग पर सात किलोमीटर की दूरी पर स्‍थ‍ित है। यहां के लिए हर पांच मिनट बाद विक्रम चलते हैं। आप चाहें तो आइएसबीटी चौक से आटो भी बुक कर यहां तक पहुंच सकते हैं। बड़े क्षेत्र में तीन मंज‍िला बुद्धा टैंपल के दर्शन को सुबह से लोग पहुंचते रहते हैं, लेक‍िन शाम को यहां भीड़ अधिक बढ़ जाती है। हरे भरे मैदान और जंगल से सटे इस मंद‍िर पर‍िसर में व‍िभ‍िन्‍न जगहों पर कुर्सियां लगी हैं जहां आप बैठकर आनंद भी उठा सकते हैं। लोग यहां आकर सेल्‍फी के साथ इस पल को यादगार बनाते हैं। इसके अलावा मंद‍िर से बाहर न‍िकलते ही सड़क किनारे कई खाने पीने की दुकान भी हैं। जहां से आप अपनी पसंद के व्‍यंजन का लुत्फ़ उठा सकते हैं। आध्यात्मिक शांति वाला स्थलबुद्ध मंदिर देहरादून एक मधुर और आध्यात्मिक शांति वाला स्थल है। यहाँ आकर मन को सुकून मिलता है।यह मंदिर अपनी अदभुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की स्थापत्य कला जापानी कला से प्रेरित है। यहां आप इस प्रसिद्ध स्थापत्य कला और चित्रकला का आनन्द ले सकते हैं। रोलिंग मठयह बौद्ध मठ रोलिंग मठ के नाम से प्रसिद्ध है, यहाँ बड़े बड़े रोलर लगे हैं, जिनको घुमा कर आप भगवान बुद्ध से जीवन मे सुख और शांति की कामना कर सकते हैं।बुद्धा टेम्पल देहरादून में आप प्रसिद्ध तिब्बती भोजन विशेष मोमोज, चाउमीन और थोप्पा और अन्य पकवानों का आनन्द ले सकते हैं।बुद्ध मंदिर देहरादून से आप तिब्बती समान, कपड़े, सजावट की चीजे खरीद सकते हैं।