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Bengaluru-Mangaluru Vande Bharat का बड़ा अपडेट

Mumbai Local

अगर आपने कभी बेंगलुरु से मंगलुरु तक सड़क या ट्रेन से सफर किया है, तो आप जानते होंगे कि यह रास्ता जितना खूबसूरत है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। एक तरफ पश्चिमी घाट की हरी-भरी पहाड़ियां, घने जंगल और सुरंगों से भरा रेल मार्ग है, तो दूसरी तरफ लंबा सफर और रास्ते की मुश्किलें। कई यात्रियों के लिए बेंगलुरु से मंगलुरु पहुंचना हमेशा से समय लेने वाला सफर रहा है।

लेकिन अब इस रूट पर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच Vande Bharat चलाने की तैयारी कर रही है। इस नई सेवा का महत्वपूर्ण ट्रायल रन 5 सितंबर 2026 को किया जाना है। यह सिर्फ एक सामान्य ट्रायल नहीं माना जा रहा, क्योंकि जिस रास्ते से यह ट्रेन गुजरेगी, वह भारत के सबसे खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण रेल मार्गों में शामिल है।

Vande Bharat का यह संभावित नया सफर यशवंतपुर से शुरू होकर हासन, सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड होते हुए मंगलुरु सेंट्रल तक पहुंचेगा। खास बात यह है कि ट्रेन को पश्चिमी घाट के उस मुश्किल हिस्से से गुजरना होगा, जहां दर्जनों सुरंगें और सैकड़ों घुमावदार मोड़ हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो आने वाले समय में Vande Bharat बेंगलुरु और तटीय कर्नाटक के बीच यात्रा का एक नया विकल्प बन सकती है।

तो चलिए आसान भाषा में जानते हैं कि 5 सितंबर के ट्रायल रन में क्या होने वाला है, ट्रेन का रूट क्या रहेगा, घाट सेक्शन इतना मुश्किल क्यों है और यात्रियों के लिए यह ट्रेन कितनी खास साबित हो सकती है

5 सितंबर को होगा Vande Bharat का बड़ा ट्रायल

रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर को बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर 16 कोच वाली Vande Bharat ट्रेन का ट्रायल रन किया जाएगा। इस दौरान ट्रेन में सामान्य यात्रियों की बजाय तकनीकी परीक्षण पर ज्यादा ध्यान रहेगा। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि Vande Bharat पश्चिमी घाट के कठिन रेल मार्ग पर किस तरह प्रदर्शन करती है।

खासतौर पर सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड के बीच का हिस्सा रेलवे के लिए काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तेज ढलान, घुमावदार ट्रैक और सुरंगों की लंबी श्रृंखला है। इसलिए ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच Vande Bharat की नियमित सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

Vande Bharat

यशवंतपुर से मंगलुरु तक क्या रहेगा ट्रायल का टाइम टेबल?

5 सितंबर को होने वाले ट्रायल रन के लिए अस्थायी समय सारिणी भी सामने आई है। ट्रेन सुबह बेंगलुरु के यशवंतपुर जंक्शन से रवाना होगी और दोपहर तक मंगलुरु सेंट्रल पहुंचने का कार्यक्रम है। सुबह 6:05 बजे ट्रेन यशवंतपुर जंक्शन से रवाना होगी।

इसके बाद ट्रेन सुबह करीब 9:00 बजे हासन जंक्शन पहुंचेगी और पांच मिनट के ठहराव के बाद आगे बढ़ेगी। सुबह 9:55 बजे Vande Bharat सकलेशपुर पहुंचेगी। यहां से आगे पश्चिमी घाट का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा शुरू माना जाता है।

इसके बाद ट्रेन दोपहर 12:30 बजे सुब्रह्मण्य रोड पहुंचेगी और फिर आगे बढ़ते हुए दोपहर करीब 2:25 बजे मंगलुरु सेंट्रल पहुंचने का कार्यक्रम है। यानी ट्रायल रन के दौरान ट्रेन लगभग आठ घंटे से ज्यादा समय में यह यात्रा पूरी करेगी।

वापसी में मंगलुरु से फिर बेंगलुरु आएगी ट्रेन

मंगलुरु पहुंचने के बाद ट्रेन की तकनीकी जांच की जाएगी और फिर यह वापसी यात्रा शुरू करेगी। ट्रेन दोपहर करीब 3:00 बजे मंगलुरु सेंट्रल से रवाना होने की योजना है। इसके बाद यह सुब्रह्मण्य रोड, सकलेशपुर और हासन होते हुए वापस यशवंतपुर पहुंचेगी। अस्थायी कार्यक्रम के अनुसार ट्रेन शाम 4:30 बजे सुब्रह्मण्य रोड पहुंचेगी। इसके बाद शाम करीब 6:30 बजे सकलेशपुर और फिर हासन पहुंचेगी।

वापसी यात्रा में हासन के समय को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में थोड़ा अंतर बताया गया है। इसलिए इसे अंतिम समय सारिणी नहीं माना जा सकता। ट्रेन के रात करीब 11:00 बजे यशवंतपुर पहुंचने का अनुमान है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह केवल ट्रायल रन की समय सारिणी है। नियमित सेवा शुरू होने पर रेलवे अलग और अंतिम टाइम टेबल जारी करेगा।

असली रोमांच शुरू होगा सकलेशपुर के बाद

बेंगलुरु से मंगलुरु का यह रेल रूट सामान्य रूट जैसा बिल्कुल नहीं है। खासकर सकलेशपुर से सुब्रह्मण्य रोड के बीच का हिस्सा यात्रियों के लिए किसी रोमांचक यात्रा से कम नहीं है। करीब 55 किलोमीटर लंबे घाट सेक्शन में ट्रेन को पहाड़ों के बीच से गुजरना पड़ता है। चारों तरफ घने जंगल, गहरी घाटियां और बादलों से ढकी पहाड़ियां इस सफर को बेहद खूबसूरत बनाती हैं।

लेकिन यही खूबसूरती रेलवे संचालन के लिए चुनौती भी है। इस छोटे से 55 किलोमीटर के हिस्से में करीब 57 सुरंगें और 108 घुमावदार मोड़ मौजूद हैं। यही वजह है कि यहां ट्रेन को बहुत सावधानी के साथ चलाना पड़ता है।

कई जगह ट्रैक इतना घुमावदार है कि ट्रेन की गति सीमित रखनी पड़ती है। सुरक्षा के लिहाज से इस घाट सेक्शन में ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित रहती है। यही कारण है कि यह छोटा सा पहाड़ी हिस्सा पार करने में काफी समय लग जाता है।

10 से 11 घंटे का सफर कितना कम हो सकता है?

मौजूदा समय में बेंगलुरु से मंगलुरु के बीच चलने वाली कई ट्रेनों को यात्रा पूरी करने में करीब 10 से 11 घंटे लग जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण घाट सेक्शन की गति सीमा और कुछ जगहों पर सिंगल ट्रैक होना है। लेकिन नई Vande Bharat के आने से यात्रियों को यात्रा समय में राहत मिलने की उम्मीद है।

शुरुआती योजनाओं और चर्चाओं के अनुसार, यह ट्रेन बेंगलुरु से मंगलुरु की दूरी करीब 8 से 8.5 घंटे में तय कर सकती है। हालांकि नियमित सेवा शुरू होने के बाद ही वास्तविक यात्रा समय साफ होगा। भविष्य में अगर ट्रैक सुधार और डबलिंग का काम तेजी से आगे बढ़ता है, तो यात्रा समय को और कम करने की संभावना जताई जा रही है।

कुछ योजनाओं में इस सफर को लगभग 5 घंटे तक लाने का लक्ष्य भी बताया गया है, हालांकि इसके लिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव जरूरी होंगे। अगर ऐसा होता है तो तटीय कर्नाटक और बेंगलुरु के बीच यात्रा करने वाले हजारों लोगों के लिए Vande Bharat एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

इतना कठिन रास्ता, फिर ट्रेन सुरक्षित कैसे चलेगी?

अब आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि जब घाट सेक्शन इतना खतरनाक और घुमावदार है, तो Vande Bharat यहां सुरक्षित तरीके से कैसे चलेगी? दरअसल, इस रूट की सबसे बड़ी चुनौती ढलान है। पहाड़ी सेक्शन में भारी ट्रेनों को नियंत्रित करने के लिए कई बार अतिरिक्त इंजन की जरूरत पड़ती है। इन्हें आम भाषा में बैंकर इंजन कहा जाता है।

बैंकर इंजन का काम ट्रेन को मुश्किल ढलान और चढ़ाई वाले हिस्सों में अतिरिक्त ताकत और नियंत्रण देना होता है। लेकिन इसमें एक समस्या है। इंजन जोड़ने और हटाने में अतिरिक्त समय लगता है। कई मामलों में इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट तक का समय लग सकता है। आधुनिक डिजाइन वाली Vande Bharat के लिए यह व्यवस्था आसान नहीं मानी जाती। इसलिए रेलवे ने इस रूट के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था पर काम किया है।

क्या है AEB सिस्टम, जिस पर सबकी नजर है?

Vande Bharat

इस रूट पर Vande Bharat के लिए सबसे खास बात इसका Automatic Emergency Braking यानी AEB सिस्टम माना जा रहा है। यह एक ऐसी तकनीक है जो ट्रेन की गति और ब्रेकिंग पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद करती है। घाट सेक्शन में उतरते समय ट्रेन की गति अचानक बढ़ना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। ऐसे में AEB सिस्टम यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि ट्रेन सुरक्षित गति सीमा के अंदर रहे।

बताया गया है कि इस तकनीक का परीक्षण पहले से ही इस चुनौतीपूर्ण रूट पर किया जा रहा था। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि Vande Bharat को हर बार बाहरी बैंकर इंजन की जरूरत न पड़े। यानी आधुनिक तकनीक के जरिए ट्रेन अपने सिस्टम की मदद से कठिन घाट सेक्शन को पार कर सकती है। 5 सितंबर का ट्रायल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान इसी तकनीक और ट्रेन की परफॉर्मेंस पर खास ध्यान दिया जाएगा।

सिंगल ट्रैक भी है बड़ी समस्या

बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच यात्रा समय लंबा होने की एक और वजह सिंगल ट्रैक है। सिंगल ट्रैक वाले रूट पर दोनों दिशाओं से आने वाली ट्रेनों को एक-दूसरे को रास्ता देने के लिए कई बार स्टेशनों पर इंतजार करना पड़ता है। इससे ट्रेन की औसत गति कम हो जाती है और यात्रा लंबी हो जाती है।

अब दक्षिण पश्चिम रेलवे इस रूट पर डबलिंग यानी दोहरी रेल लाइन को लेकर काम और योजनाएं आगे बढ़ा रहा है। अगर डबल ट्रैक बनता है तो ट्रेनों को एक-दूसरे के लिए बार-बार रुकना नहीं पड़ेगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होगी और यात्रा समय कम हो सकता है। यही वजह है कि भविष्य में इस रूट को तेज बनाने के लिए सिर्फ Vande Bharat ही नहीं बल्कि ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार भी उतना ही जरूरी है।

मंगलुरु के लिए प्रशासनिक बदलाव भी बना बड़ा कारण

इस नई रेल सेवा के पीछे एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की भी चर्चा है। हाल ही में जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, मंगलुरु रेलवे क्षेत्र को दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर डिवीजन के अंतर्गत शामिल किया गया है। इस बदलाव के बाद कर्नाटक के अंदर बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच रेल सेवाओं की योजना बनाना आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का लंबे समय से मानना था कि तटीय कर्नाटक और बेंगलुरु के बीच बेहतर रेल कनेक्टिविटी की जरूरत है। अब जब प्रशासनिक स्तर पर बदलाव हुआ है, तो इसका फायदा नई ट्रेन सेवाओं के रूप में देखने को मिल सकता है। Vande Bharat को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गोमतेश्वर एक्सप्रेस को लेकर क्यों हुआ विवाद?

नई Vande Bharat सेवा की चर्चा के साथ एक दूसरा मुद्दा भी सामने आया था। बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच चलने वाली गोमतेश्वर एक्सप्रेस को लेकर स्थानीय यात्रियों ने चिंता जताई थी। ट्रेन नंबर 16575 और 16576 वाली गोमतेश्वर एक्सप्रेस कई यात्रियों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

साल 2017 में शुरू हुई इस ट्रेन से छात्र, नौकरीपेशा लोग, महिलाएं और इलाज के लिए यात्रा करने वाले लोग बड़ी संख्या में सफर करते हैं। इसकी टाइमिंग यात्रियों के लिए सुविधाजनक मानी जाती है, क्योंकि लोग दिन के समय यात्रा करके अपने गंतव्य तक पहुंच पाते हैं।

लेकिन नई Vande Bharat सेवा को जगह देने के लिए गोमतेश्वर एक्सप्रेस के समय में बदलाव की संभावना की चर्चा सामने आई। इसके बाद स्थानीय रेल यात्री संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि अगर ट्रेन की टाइमिंग बदलती है और यात्रा देर रात तक पहुंच जाती है, तो महिलाओं, मरीजों और नियमित यात्रियों को परेशानी होगी।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हुई। कुछ संगठनों ने यहां तक कहा कि यात्रियों की सुविधा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखने का भरोसा दिया है।

क्या होगा Vande Bharat का टिकट किराया?

अभी तक बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर Vande Bharat की नियमित सेवा और किराए को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस रूट पर एसी चेयर कार का किराया करीब ₹1,200 हो सकता है। वहीं एग्जीक्यूटिव क्लास का संभावित किराया लगभग ₹2,200 रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

यह केवल संभावित कीमत है और अंतिम किराया रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही तय माना जाएगा। अगर ट्रेन दिन के समय चलती है, तो यात्रियों के लिए यह सफर खास अनुभव बन सकता है। बड़ी खिड़कियों से पश्चिमी घाट की पहाड़ियां, जंगल, सुरंगें और घाटियां देखने का मौका मिलेगा। यानी यह सिर्फ एक ट्रेन यात्रा नहीं बल्कि एक तरह का खूबसूरत रेल सफर हो सकता है।

57 सुरंगों के बीच से गुजरने का अनुभव होगा खास

इस रूट की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका घाट सेक्शन है। कल्पना कीजिए, आप ट्रेन में बैठे हैं और कुछ देर पहले खिड़की के बाहर घने जंगल दिखाई दे रहे थे। अचानक ट्रेन एक सुरंग में चली जाती है। कुछ सेकंड बाद बाहर निकलते ही सामने पहाड़, घाटी और बादलों से भरा नजारा दिखने लगता है।

सकलेशपुर से सुब्रह्मण्य रोड के बीच यही अनुभव बार-बार मिलता है। 57 सुरंगों से गुजरने वाला यह सफर उन यात्रियों के लिए खास हो सकता है जिन्हें ट्रेन यात्रा और प्राकृतिक नजारे पसंद हैं।

Vande Bharat के जरिए अगर यह यात्रा दिन के समय होती है, तो यात्रियों को इस खूबसूरत रूट को देखने का बेहतर मौका मिल सकता है। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पसंद करने वालों के लिए भी यह रूट काफी शानदार माना जा सकता है।

पर्यावरण के लिए भी हो सकती है अच्छी खबर

पश्चिमी घाट दुनिया के महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यह इलाका घने जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सड़क यातायात बढ़ने से पर्यावरण पर दबाव पड़ता है। बेंगलुरु से मंगलुरु के बीच बड़ी संख्या में बसें और निजी वाहन चलते हैं।

ऐसे में अगर ज्यादा लोग आधुनिक इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो सड़क यातायात पर दबाव कम हो सकता है। Vande Bharat बिजली से चलने वाली आधुनिक ट्रेन है। इसलिए इसे सड़क आधारित लंबी यात्रा के मुकाबले अपेक्षाकृत बेहतर सार्वजनिक परिवहन विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि पर्यावरण संरक्षण के लिए रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के दौरान भी प्राकृतिक क्षेत्रों की सुरक्षा बेहद जरूरी रहेगी।

बेंगलुरु और तटीय कर्नाटक के लोगों के लिए क्यों है जरूरी?

बेंगलुरु में बड़ी संख्या में तटीय कर्नाटक के लोग काम, पढ़ाई और व्यवसाय के लिए रहते हैं। मंगलुरु और आसपास के इलाकों से लोग अक्सर बेंगलुरु आते-जाते रहते हैं। अभी लंबी यात्रा समय लेने वाली हो सकती है। खासकर सप्ताहांत या त्योहारों के दौरान टिकट मिलना और यात्रा करना आसान नहीं होता।

अगर Vande Bharat नियमित रूप से चलती है और यात्रा समय कम करती है, तो यह छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। सुबह बेंगलुरु से निकलकर दोपहर या शाम तक मंगलुरु पहुंचना और फिर वापसी का बेहतर विकल्प मिलना लोगों की यात्रा योजना को बदल सकता है। यही वजह है कि इस ट्रायल रन को लेकर यात्रियों में उत्सुकता देखने को मिल रही है।

क्या 5 सितंबर के बाद शुरू हो जाएगी नियमित सेवा?

यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में है। फिलहाल 5 सितंबर का कार्यक्रम मुख्य रूप से ट्रायल रन के लिए है। ट्रायल के दौरान रेलवे ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रैक परफॉर्मेंस और सुरक्षा से जुड़े कई पहलुओं की जांच करेगा। इसके बाद रेलवे अधिकारी रिपोर्ट तैयार करेंगे।

अगर सभी तकनीकी मानक सही पाए जाते हैं, तो आगे नियमित सेवा शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। लेकिन यात्रियों को नियमित टाइम टेबल, टिकट बुकिंग और उद्घाटन की तारीख के लिए रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। इसलिए अभी से टिकट बुकिंग या अंतिम किराए को लेकर किसी भी अनौपचारिक जानकारी पर भरोसा करने के बजाय रेलवे के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना बेहतर होगा।

Vande Bharat के आने से बदल सकती है यात्रा की तस्वीर

भारत में पिछले कुछ वर्षों में Vande Bharat ट्रेनों का नेटवर्क लगातार बढ़ा है। इन ट्रेनों का मकसद सिर्फ तेज यात्रा नहीं बल्कि यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर रेल अनुभव देना भी है। बेंगलुरु-मंगलुरु जैसा रूट सामान्य रूट से काफी अलग है।

यहां ट्रेन को सिर्फ सीधी और तेज पटरी पर दौड़ना नहीं है, बल्कि उसे पहाड़ों, सुरंगों और घुमावदार घाट सेक्शन से होकर गुजरना है। इसलिए इस रूट पर Vande Bharat का सफल संचालन रेलवे के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकता है। अगर भविष्य में ट्रैक डबलिंग और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पूरे होते हैं, तो यह रूट दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में और मजबूत बन सकता है।

Vande Bharat

Five Colors of Travel की ओर से कुछ खास सुझाव

  • विंडो सीट चुनें: घाट सेक्शन के शानदार नजारे देखने के लिए खिड़की वाली सीट बेहतर रहेगी।
  • दिन के सफर का मजा लें: सकलेशपुर के बाद सुरंगों, जंगलों और पहाड़ों का नजारा कैमरे में जरूर कैद करें।
  • समय से अपडेट देखें: ट्रायल के बाद नियमित टाइम टेबल बदल सकता है, इसलिए यात्रा से पहले रेलवे की जानकारी जरूर जांचें।
  • हल्का सामान रखें: दिनभर के सफर में कम सामान रखने से यात्रा ज्यादा आरामदायक रहेगी।
  • मंगलुरु घूमने का समय निकालें: ट्रेन से पहुंचने के बाद शहर के समुद्र तट और स्थानीय माहौल को देखने का प्लान जरूर बनाएं।

कुल मिलाकर बेंगलुरु से मंगलुरु के बीच प्रस्तावित Vande Bharat सिर्फ एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि पश्चिमी घाट के शानदार रेल सफर को आधुनिक रूप देने की एक बड़ी कोशिश है। 57 सुरंगों, 108 घुमावदार मोड़ों और पहाड़ों के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता पहले से ही बेहद खास है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 5 सितंबर का ट्रायल रन कितना सफल रहता है और रेलवे कब इस सेवा को आम यात्रियों के लिए शुरू करता है। अगर सब कुछ सही रहा, तो आने वाले दिनों में बेंगलुरु से मंगलुरु का सफर सिर्फ तेज ही नहीं बल्कि पहले से कहीं ज्यादा शानदार अनुभव बन सकता है। आखिर पश्चिमी घाट की हरी-भरी वादियों के बीच Vande Bharat से सफर करने का अपना अलग ही मजा होगा।

Shivani Pal

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