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Juggernaut: जहाँ मिलता है South India का Authentic Taste

Juggernaut

क्या आपने कभी सोचा है कि दिल्ली में रहते हुए भी आपको ऐसा अनुभव मिल सकता है, जहां रेस्टोरेंट में कदम रखते ही दक्षिण भारत की याद आने लगे? दरवाजे पर नमस्कार के साथ स्वागत हो, माथे पर चंदन का टीका लगाया जाए, चारों तरफ फूलों की सुंदर सजावट हो और मेज पर एक के बाद एक ऐसे व्यंजन आएं, जिनमें दक्षिण भारत के अलग-अलग स्वाद महसूस हों। अगर आपका जवाब हां है, तो कैलाश कॉलोनी का Juggernaut Restaurant आपके लिए दिलचस्प जगह हो सकता है।

Juggernaut केवल खाना खाने की जगह नहीं है। यहां पहुंचते ही एक अलग तरह का माहौल महसूस होने लगता है। सजावट, स्वागत करने का तरीका, खाने की विविधता और मेहमाननवाजी मिलकर पूरे अनुभव को खास बनाते हैं। दिल्ली में दक्षिण भारतीय खाना पसंद करने वालों के लिए यह जगह इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां केवल इडली और डोसा जैसे लोकप्रिय व्यंजन ही नहीं मिलते, बल्कि कई ऐसे स्वाद भी चखने को मिलते हैं जिन्हें एक साथ आजमाने का मौका मिलता है।

 कैलाश कॉलोनी में है यह खूबसूरत जगह

कैलाश कॉलोनी में स्थित यह रेस्टोरेंट दिल्ली के उन इलाकों में है, जहां पहुंचना काफी आसान है। अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो आसपास पार्किंग की सुविधा मिल सकती है। वहीं मेट्रो से आने वालों के लिए कैलाश कॉलोनी और मूलचंद मेट्रो स्टेशन आसपास के विकल्प हो सकते हैं।

लेकिन यहां पहुंचना जितना आसान है, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है रेस्टोरेंट में प्रवेश करना। जैसे ही आप प्रवेश द्वार के पास पहुंचते हैं, फूलों की सजावट और हल्की गर्म रोशनी आपका ध्यान खींचती है। सजावट में दक्षिण भारत की झलक साफ दिखाई देती है। यह जगह बहुत ज्यादा चमकदार या बनावटी नहीं लगती, बल्कि सजावट को इस तरह रखा गया है कि पूरा माहौल शांत और सुंदर महसूस हो। यानी खाना आने से पहले ही इस जगह का माहौल आपको अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर देता है।

दरवाजे पर ही महसूस होती है दक्षिण भारत की झलक

Juggernaut रेस्टोरेंट के अंदर जाने से पहले ही आपको अंदाजा हो जाता है कि यहां कुछ अलग देखने को मिलने वाला है। फूलों की सजावट, पारंपरिक अंदाज और हल्की रोशनी मिलकर प्रवेश वाले हिस्से को काफी खास बनाते हैं।

आजकल ज्यादातर रेस्टोरेंट अपने खाने के साथ सजावट को भी खास बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यहां सजावट का संबंध सीधे दक्षिण भारतीय संस्कृति से दिखाई देता है। यही वजह है कि जैसे ही आप अंदर की तरफ बढ़ते हैं, आपको ऐसा लगता है कि आप दिल्ली की भीड़भाड़ से निकलकर किसी अलग माहौल में पहुंच गए हैं।

नमस्कार और चंदन के टीके से होता है स्वागत

इस जगह की सबसे अच्छी बातों में से एक है यहां मेहमानों का स्वागत करने का तरीका। रेस्टोरेंट में प्रवेश करते ही आपका स्वागत नमस्कार के साथ किया जाता है और माथे पर चंदन का टीका लगाया जाता है। यह छोटी-सी परंपरा देखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन जब किसी Juggernaut रेस्टोरेंट में पहली मुलाकात ही इस तरह के पारंपरिक स्वागत से हो, तो उसका असर काफी अच्छा पड़ता है।

इससे आपको महसूस होता है कि यहां दक्षिण भारतीय संस्कृति को केवल दीवारों की सजावट तक सीमित नहीं रखा गया है। मेहमानों के स्वागत में भी उस संस्कृति की झलक दिखाई देती है। किसी जगह पर पहली बार जाने पर सबसे पहले जो चीज याद रहती है, वह अक्सर उसका पहला अनुभव होता है। यहां वह अनुभव नमस्कार और चंदन के टीके के साथ शुरू होता है।

प्रवेश पर है छोटी-सी प्रदर्शनी और दुकान

रेस्टोरेंट के अंदर जाते ही एक छोटी-सी प्रदर्शनी और दुकान भी देखने को मिलती है। यहां अगरबत्ती, दक्षिण भारतीय नाश्ते, मिठाइयां और कुछ पुरानी व खास चीजें रखी गई हैं। खाने के लिए मेज पर बैठने से पहले इस हिस्से को देखना अपने आप में अलग अनुभव है। अगर आपको किसी जगह के खाने के साथ वहां की संस्कृति से जुड़ी चीजें देखना अच्छा लगता है, तो यह हिस्सा आपका ध्यान जरूर खींचेगा।

यहां रखी चीजें रेस्टोरेंट के पूरे दक्षिण भारतीय माहौल से जुड़ी हुई लगती हैं। इसलिए यह प्रदर्शनी और दुकान केवल खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि पूरे अनुभव का हिस्सा महसूस होती है।

स्वागत में मिलती है नारियल की बर्फी

रेस्टोरेंट में पहुंचने के बाद मेहमानों को स्वागत के तौर पर नारियल की बर्फी का एक छोटा-सा टुकड़ा भी दिया जाता है। बर्फी का स्वाद काफी संतुलित है। इसमें नारियल का स्वाद अच्छी तरह महसूस होता है और मिठास भी बहुत ज्यादा नहीं लगती।

खाने की शुरुआत से पहले मिलने वाला यह छोटा-सा मीठा स्वाद पूरे अनुभव को थोड़ा और खास बना देता है। अक्सर किसी जगह की खासियत केवल उसके बड़े व्यंजनों में नहीं होती। कई बार ऐसी छोटी-छोटी चीजें ही उस जगह की अच्छी याद बन जाती हैं। यहां नारियल की बर्फी उसी तरह की एक छोटी लेकिन याद रहने वाली शुरुआत है।

यहां केवल दक्षिण भारतीय खाना ही नहीं मिलता

Juggernaut

इस रेस्टोरेंट की शुरुआत साल 2016 में हुई थी और यहां मुख्य रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारतीय खाने पर ध्यान दिया गया है। मेन्यू में आपको इडली, डोसा, वड़ा और उपमा जैसे कई पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन मिलते हैं। अगर आप सुबह का नाश्ता करने आए हैं, तो भी आपके पास कई विकल्प हैं। अगर आप दोपहर या रात में भरपेट खाना चाहते हैं, तो भी यहां कई तरह के व्यंजन मौजूद हैं। लेकिन यहां एक और बात खास है। अगर आपके साथ कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसे दक्षिण भारतीय खाना पसंद नहीं है, तो उसके लिए भी खाने के विकल्प मौजूद हैं।

यहां उत्तर भारतीय खाना, छोले-भटूरे, मैगी और चाट जैसी चीजें भी मिलती हैं। इस वजह से परिवार या दोस्तों के साथ आने पर हर व्यक्ति अपनी पसंद के हिसाब से खाना चुन सकता है। एक तरफ आपको इडली, डोसा और सांभर जैसे दक्षिण भारतीय स्वाद मिलेंगे, तो दूसरी तरफ ऐसे व्यंजन भी हैं, जो कुछ अलग पसंद करने वाले लोगों को अच्छे लग सकते हैं।

Juggernaut दो मंजिलों पर है बैठने की व्यवस्था

Juggernaut रेस्टोरेंट में दो मंजिलों पर बैठने की व्यवस्था की गई है और ऊपर जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध है। अगर परिवार के साथ बुजुर्ग लोग आए हों या किसी को सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती हो, तो लिफ्ट काफी उपयोगी रहती है। इसके अलावा तीसरी मंजिल पर छत वाला बैठने का हिस्सा भी है। यहां का माहौल बाकी हिस्सों से थोड़ा अलग महसूस होता है। खाने के बाद कुछ समय खुली जगह में बैठना, आसपास का माहौल देखना और परिवार या दोस्तों के साथ आराम से बातचीत करना पूरे अनुभव को बेहतर बना सकता है।

सुबह से रात तक खुला रहता है रेस्टोरेंट

इस जगह की एक और खास बात यह है कि यह सुबह काफी जल्दी खुल जाता है। रेस्टोरेंट सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक खुला रहता है। अगर आप सुबह जल्दी नाश्ता करना चाहते हैं, तो भी यहां आ सकते हैं और अगर दोपहर या रात में भोजन करना चाहते हैं, तो भी यह जगह विकल्प देती है।

दिल्ली जैसे शहर में, जहां लोगों का समय अलग-अलग होता है, सुबह से देर रात तक खुला रहना काफी सुविधाजनक बात है। खासकर अगर आप सुबह दक्षिण भारतीय नाश्ते का स्वाद लेना चाहते हैं, तो यहां दिन की शुरुआत की जा सकती है।

दोपहर के भोजन के साथ मिलता है भारतीय संगीत

यहां खाने के साथ एक और खास अनुभव देखने को मिलता है। सोमवार को छोड़कर बाकी दिनों में दोपहर के समय भारतीय वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति होती है। यह प्रस्तुति लगभग 12:30 बजे से 1:45 बजे तक होती है।

सोचिए, आप सामने गरमा-गरम दक्षिण भारतीय खाना खा रहे हैं और साथ में भारतीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुन सुनाई दे रही है। खाने के साथ संगीत का यह मेल साधारण भोजन को भी थोड़ा खास बना सकता है। अगर आपको खाने के साथ संगीत और शांत माहौल पसंद है, तो यह हिस्सा आपको काफी अच्छा लग सकता है।

अब बारी आती है दक्षिण भारतीय छोटी थाली की

रेस्टोरेंट का माहौल देखने और मेन्यू समझने के बाद अब बारी आती है खाने की। यहां दक्षिण भारतीय छोटी थाली को आजमाया गया। इस थाली की सबसे खास बात यह है कि इसमें एक ही भोजन के दौरान कई अलग-अलग दक्षिण भारतीय स्वादों को चखने का मौका मिलता है।

अगर आप केवल एक व्यंजन खाने की बजाय एक साथ कई चीजों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो ऐसी थाली आपके लिए दिलचस्प हो सकती है। थाली आने से पहले ही मेज पर गरमा-गरम रसम और पापड़ परोसे जाते हैं।

तीखे रसम से होती है शुरुआत

रसम काफी गरमा-गरम और मसालेदार है। इसमें मसालों का स्वाद अच्छी तरह महसूस होता है और हल्का खट्टापन भी खाने को अलग स्वाद देता है। पापड़ के साथ रसम खाने पर इसका स्वाद और अच्छा लगता है। खाने की शुरुआत ही ऐसे व्यंजन से होती है, जो स्वाद को जगा देता है। अगर आपको मसालेदार और थोड़ा खट्टा स्वाद पसंद है, तो रसम आपको जरूर पसंद आ सकता है।

इसके बाद जब पूरी थाली सामने आती है, तो उसमें मौजूद अलग-अलग चीजों को देखकर कुछ देर के लिए समझ नहीं आता कि सबसे पहले किसका स्वाद लिया जाए। यही इस थाली की खूबसूरती है। एक ही थाली में आपको कई अलग-अलग स्वाद देखने को मिलते हैं।

सांभर में मिलती हैं कई तरह की सब्जियां

थाली में सांभर भी गरमा-गरम परोसा जाता है। इसमें बींस, सहजन की फली और कद्दू जैसी कई सब्जियां डाली गई हैं। सब्जियों की वजह से सांभर में केवल मसालों का स्वाद नहीं आता, बल्कि सब्जियों का स्वाद और उनकी अलग-अलग बनावट भी महसूस होती है।

गरमा-गरम सांभर को चावल के साथ खाने पर इसका स्वाद और अच्छा लगता है। दक्षिण भारतीय भोजन में सांभर की अपनी खास जगह है और यहां भी इसे थाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

एक थाली में कई तरह की सब्जियां

सांभर के अलावा थाली में कई तरह की सब्जियां भी शामिल हैं। इसमें मिश्रित मसालेदार सब्जी, अरबी की सब्जी और पूरियल मिलता है। मिश्रित सब्जी में मसालों का स्वाद अच्छी तरह आता है, जबकि अरबी की सब्जी अपनी अलग बनावट और स्वाद के साथ आती है। पूरियल में दाल और सब्जी का स्वाद एक साथ मिलता है, जिससे इसका स्वाद बाकी सब्जियों से अलग लगता है। (Juggernaut)

इस तरह थाली खाते हुए आपको बार-बार एक ही तरह का स्वाद महसूस नहीं होता। हर व्यंजन अपना अलग स्वाद लेकर आता है और यही चीज भोजन को दिलचस्प बनाती है।

कोलंबो का खट्टा-मीठा और चटपटा स्वाद

थाली में मिलने वाली चीजों में कोलंबो का स्वाद बाकी व्यंजनों से थोड़ा अलग महसूस होता है। इसे काले चने से तैयार किया जाता है। इसमें खट्टे-मीठे के साथ चटपटा स्वाद आता है। अगर आपको खाने में हल्का खट्टापन और मसालों का स्वाद पसंद है, तो यह व्यंजन आपको खास तौर पर अच्छा लग सकता है। काले चने की वजह से इसमें एक अलग तरह की बनावट भी महसूस होती है। सांभर और बाकी सब्जियों के बीच कोलंबो खाने पर स्वाद में अच्छा बदलाव आता है। (Juggernaut)

चावल के साथ मिलता है पूरा दक्षिण भारतीय स्वाद

थाली में चावल भी दिए जाते हैं, जिन्हें सांभर और दूसरी सब्जियों के साथ खाया जा सकता है। गरमा-गरम सांभर को चावल में मिलाकर खाने का अपना ही मजा है। सांभर में मौजूद सब्जियां और मसाले चावल के साथ अच्छी तरह मिल जाते हैं। इसके साथ पापड़ भी मिलता है, जो खाने में कुरकुरापन जोड़ता है। दक्षिण भारतीय भोजन की बात हो और चावल न हों, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। इसलिए थाली में चावल का होना इस पूरे भोजन को पारंपरिक स्वाद देता है।

मैदा का पराठा भी है थाली का हिस्सा

चावल के साथ थाली में मैदा का पराठा भी दिया जाता है। यह बाकी दक्षिण भारतीय व्यंजनों के बीच थोड़ा अलग लगता है, लेकिन इसी वजह से थाली में स्वाद की विविधता बनी रहती है। आप इसे सब्जियों के साथ खा सकते हैं या अपनी पसंद के अनुसार दूसरी चीजों के साथ आजमा सकते हैं। एक ही थाली में चावल और पराठे दोनों का होना उन लोगों के लिए अच्छा है, जिन्हें भोजन में अलग-अलग चीजें पसंद आती हैं।

पुट्टू का स्वाद जरूर ध्यान खींचता है

थाली में मिलने वाली सबसे अलग चीजों में से एक है पुट्टू। अगर आपने पहले पुट्टू नहीं खाया है, तो यह आपके लिए एक नया स्वाद हो सकता है। इसकी बनावट बाकी चीजों से अलग है और इसमें घी का स्वाद साफ महसूस होता है। घी की खुशबू और स्वाद पुट्टू को एक अलग पहचान देते हैं। पूरी थाली में जहां सांभर, रसम और सब्जियों का स्वाद मसालेदार और चटपटा है, वहीं पुट्टू थोड़ा अलग अनुभव देता है। अगर आप दक्षिण भारतीय भोजन में नए व्यंजन आजमाना चाहते हैं, तो पुट्टू को जरूर चखना चाहिए।

Juggernaut

दही से आता है स्वाद में संतुलन

थाली में दही भी दिया जाता है। मसालेदार रसम, सांभर और सब्जियों के बीच दही का हल्का स्वाद काफी अच्छा लगता है। यह भोजन के स्वाद को संतुलित करता है और तीखे व्यंजनों के बाद हल्कापन देता है। इसके साथ दक्षिण भारतीय अचार भी मिलता है, जो खाने में खट्टापन और मसालेदार स्वाद जोड़ता है। (Juggernaut)

अगर आपको तीखा खाना पसंद है, तो साथ में दी गई तली हुई मिर्च भी आजमाई जा सकती है। मिर्च का तीखापन खाने में एक अलग तरह की तेजी लेकर आता है। इस तरह पूरी थाली में आपको अलग-अलग स्वाद मिलते रहते हैं। कभी मसालेदार स्वाद आता है, कभी खट्टापन, कभी दही का हल्कापन और कभी तीखी मिर्च का स्वाद।

नारियल के लड्डू से होता है मीठा अंत

इतनी सारी चीजें खाने के बाद आखिर में बारी आती है मीठे की। थाली में नारियल का लड्डू दिया जाता है, जिसे गुलाब की पंखुड़ियों और सूखे मेवों से सजाया जाता है। लड्डू में नारियल का स्वाद अच्छी तरह महसूस होता है और इसकी मिठास भोजन के अंत में काफी अच्छी लगती है। (Juggernaut)

ऊपर से गुलाब की पंखुड़ियां और सूखे मेवे इसे देखने में भी सुंदर बनाते हैं। रसम और सांभर जैसे मसालेदार व्यंजनों से शुरू हुआ भोजन आखिर में मीठे नारियल के लड्डू के साथ पूरा होता है।

सिर्फ खाना ही नहीं, बैठने का माहौल भी खास है

अब बात करते हैं Juggernaut रेस्टोरेंट के तीसरे फ्लोर पर बने छत वाले हिस्से की। अगर आपको खाने के साथ खुली और शांत जगह पसंद है, तो यह हिस्सा आपको अच्छा लग सकता है। यहां बैठकर आसपास का नजारा देखते हुए आराम से खाना खाया जा सकता है। परिवार या दोस्तों के साथ आने पर यहां कुछ समय बैठकर बातचीत करने का भी मौका मिलता है।

कई बार किसी रेस्टोरेंट में खाना अच्छा होता है, लेकिन बैठने की जगह आरामदायक नहीं होती। ऐसे में पूरा अनुभव उतना अच्छा नहीं बन पाता। यहां छत वाला हिस्सा इस अनुभव को थोड़ा बेहतर बनाता है। खाने के बाद कुछ समय आराम से बैठना, आसपास का माहौल देखना और बातचीत करना इस जगह की अच्छी बातों में शामिल है। (Juggernaut)

दोपहर में मिलता है भारतीय संगीत का अनुभव

इस जगह का एक और खास हिस्सा है यहां होने वाली भारतीय वाद्य यंत्रों की जीवंत प्रस्तुति। सोमवार को छोड़कर बाकी दिनों में दोपहर के समय कलाकार भारतीय वाद्य यंत्र बजाते हैं। यह प्रस्तुति लगभग 12:30 बजे से 1:45 बजे तक होती है। सोचिए, आपके सामने दक्षिण भारतीय भोजन की थाली हो और साथ में भारतीय वाद्य यंत्रों की धुन सुनाई दे रही हो। (Juggernaut)

खाने के साथ संगीत का यह मेल पूरे माहौल को शांत और सुंदर बना सकता है। अगर आप परिवार के साथ दोपहर का भोजन करने जा रहे हैं, तो यह अनुभव खास तौर पर अच्छा लग सकता है। अगर आप विशेष रूप से संगीत की प्रस्तुति देखने के लिए जाना चाहते हैं, तो जाने से पहले उसके समय की जानकारी जरूर ले लें।

Juggernaut रेस्टोरेंट के कर्मचारियों की मेहमाननवाजी भी रही अच्छी

Juggernaut रेस्टोरेंट का अनुभव केवल खाने और सजावट तक सीमित नहीं है। यहां के कर्मचारियों का व्यवहार भी पूरे अनुभव में अहम भूमिका निभाता है। शुरुआत में जिस तरह नमस्कार और चंदन के टीके के साथ स्वागत किया जाता है, उससे लेकर खाना परोसने तक कर्मचारियों का व्यवहार अच्छा और सम्मानजनक महसूस होता है। (Juggernaut)

खाना गरमा-गरम परोसा जाता है और सेवा का तरीका भी सहज है। किसी भी Juggernaut रेस्टोरेंट की पहचान केवल उसके भोजन से नहीं होती। अगर खाना अच्छा हो लेकिन मेहमाननवाजी अच्छी न हो, तो पूरा अनुभव फीका पड़ सकता है। यहां भोजन के साथ सेवा और व्यवहार पर भी ध्यान दिया गया है। (Juggernaut)

इस जगह को बाकी रेस्टोरेंट से क्या अलग बनाता है?

Juggernaut

अगर पूरे अनुभव को एक साथ देखा जाए, तो इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां खाने के साथ दक्षिण भारत की संस्कृति और माहौल को महसूस करने का मौका मिलता है। Juggernaut रेस्टोरेंट में प्रवेश करते ही फूलों की सजावट और गर्म रोशनी नजर आती है। इसके बाद नमस्कार के साथ स्वागत और चंदन का टीका इस अनुभव को और खास बना देता है।

प्रवेश के पास बनी छोटी-सी दुकान और प्रदर्शनी भी आपको दक्षिण भारत से जुड़ी चीजों को देखने का मौका देती है। फिर जब खाने की बारी आती है, तो मेन्यू में दक्षिण भारतीय भोजन के कई विकल्प दिखाई देते हैं। इडली, डोसा, वड़ा और उपमा जैसे व्यंजनों से लेकर अलग-अलग स्वादों वाली छोटी थाली तक, यहां कई चीजें आजमाई जा सकती हैं। (Juggernaut)

अगर साथ आए लोगों की पसंद अलग-अलग है, तो उनके लिए उत्तर भारतीय खाना, छोले-भटूरे, मैगी और चाट जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। यानी यह जगह केवल उन लोगों के लिए नहीं है, जो दक्षिण भारतीय खाना पसंद करते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ आने पर अलग-अलग पसंद वाले लोग भी अपनी पसंद के अनुसार भोजन चुन सकते हैं।

छोटी थाली में मिलती है स्वादों की पूरी कहानी

दक्षिण भारतीय छोटी थाली इस पूरे अनुभव का खास हिस्सा है। रसम और पापड़ से शुरू हुई यह थाली सांभर और कई तरह की सब्जियों तक पहुंचती है। इसके बाद कोलंबो का खट्टा-मीठा स्वाद, चावल, मैदा का पराठा और घी की खुशबू वाला पुट्टू खाने को अलग-अलग स्वाद देता है।

फिर दही खाने में हल्कापन लाता है, अचार खट्टा और मसालेदार स्वाद जोड़ता है और तली हुई मिर्च तीखापन बढ़ाती है। आखिर में नारियल का लड्डू पूरे भोजन को मीठे स्वाद के साथ पूरा करता है। एक ही थाली में इतने अलग-अलग स्वाद मिलना शायद इसकी सबसे बड़ी खासियत है। (Juggernaut)

खाने के बाद भी अनुभव खत्म नहीं होता

कई रेस्टोरेंट में खाना खत्म होते ही अनुभव भी खत्म हो जाता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं लगता। अगर आप छत वाले हिस्से में बैठे हैं, तो खाने के बाद भी कुछ देर वहां बैठ सकते हैं। आसपास के माहौल का आनंद ले सकते हैं और परिवार या दोस्तों के साथ आराम से समय बिता सकते हैं। अगर आप दोपहर के समय आए हैं और भारतीय वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति चल रही है, तो भोजन के साथ संगीत का आनंद भी लिया जा सकता है। यही छोटी-छोटी चीजें मिलकर इस जगह को केवल भोजन करने की जगह के बजाय एक पूरे अनुभव में बदल देती हैं। (Juggernaut)

कुल मिलाकर कैसा रहा अनुभव?

कुल मिलाकर देखें, तो कैलाश कॉलोनी का यह Juggernaut रेस्टोरेंट उन लोगों के लिए दिलचस्प जगह हो सकता है, जो अच्छे खाने के साथ एक अलग माहौल भी चाहते हैं। यहां दक्षिण भारतीय भोजन की अच्छी विविधता देखने को मिलती है और छोटी थाली के जरिए एक साथ कई अलग-अलग स्वाद आजमाने का मौका मिलता है। (Juggernaut)

खाने के अलावा पारंपरिक स्वागत, चंदन का टीका, नारियल की बर्फी, दक्षिण भारतीय सजावट, प्रवेश पर बनी छोटी प्रदर्शनी, छत वाला बैठने का स्थान और भारतीय वाद्य यंत्रों की जीवंत प्रस्तुति इस जगह के अनुभव को और खास बनाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां केवल खाना परोसने पर ध्यान नहीं दिया गया है। मेहमान जब अंदर आएं, तब से लेकर खाना खत्म करने के बाद तक उनका अनुभव अच्छा रहे, इस पर भी ध्यान दिया गया है।

अगर आपको दक्षिण भारतीय भोजन पसंद है, तो यहां की छोटी थाली एक ऐसा विकल्प है, जिसमें आपको एक साथ कई तरह के स्वाद मिल जाते हैं। और अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ आए हैं, जिसे दक्षिण भारतीय खाना पसंद नहीं है, तो उसके लिए भी मेन्यू में कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं। इस तरह यह जगह परिवार, दोस्तों या किसी खास मौके पर साथ बैठकर भोजन करने के लिए अलग अनुभव दे सकती है। (Juggernaut)

Five Colors of Travel की तरफ से खास सुझाव

  • अगर आप दिल्ली में दक्षिण भारतीय खाने का पूरा अनुभव लेना चाहते हैं, तो Juggernaut Restaurant को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं।
  • पहली बार जा रहे हैं, तो दक्षिण भारतीय छोटी थाली जरूर आजमाएं। इसमें एक साथ कई तरह के स्वाद चखने का मौका मिलता है।
  • थाली में मिलने वाले रसम, सांभर, अलग-अलग सब्जियों, कोलंबो और पुट्टू का स्वाद जरूर लें।
  • अगर आपने पहले पुट्टू नहीं खाया है, तो इसे जरूर आजमाएं। इसमें घी की खुशबू और अलग तरह का स्वाद महसूस होता है।
  • भोजन के अंत में मिलने वाले नारियल के लड्डू को भी जरूर चखें।
  • Juggernaut रेस्टोरेंट में प्रवेश करते समय होने वाले पारंपरिक स्वागत और चंदन के टीके का अनुभव जरूर लें।
  • प्रवेश के पास बनी छोटी-सी दुकान और प्रदर्शनी को देखने के लिए भी थोड़ा समय निकालें।
  • अगर आपको खुली और शांत जगह पसंद है, तो तीसरी मंजिल के छत वाले हिस्से में बैठकर भोजन का आनंद लें।
  • अगर संभव हो, तो दोपहर के समय जाएं ताकि भारतीय वाद्य यंत्रों की जीवंत प्रस्तुति का भी आनंद लिया जा सके।
  • यहां केवल एक व्यंजन खाकर वापस आने की बजाय अलग-अलग स्वाद आजमाएं, क्योंकि इस जगह की खासियत केवल खाना नहीं, बल्कि पूरा माहौल और मेहमाननवाजी भी है।

 

Shivani Pal

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