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Mount Abu: Rajasthan का सबसे अलग Monsoon Escape

Mount Abu

राजस्थान का नाम सुनते ही अक्सर हमारे दिमाग में रेगिस्तान, गर्मी, किले और दूर तक फैली रेत का ख्याल आता है। लेकिन इसी राजस्थान में एक ऐसी जगह भी है, जहां मानसून आते ही पहाड़ियां हरी हो जाती हैं, बादल सड़कों तक उतर आते हैं और मौसम कई दूसरे हिल स्टेशनों जैसा महसूस होने लगता है। यह जगह है Mount Abu।

अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा Mount Abu राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है। समुद्र तल से करीब 1,220 मीटर की ऊंचाई पर होने के कारण यहां का मौसम राजस्थान के बाकी हिस्सों से काफी अलग रहता है। गर्मियों में भी यहां लोगों को राहत मिलती है, लेकिन मानसून के दौरान Mount Abu की खूबसूरती कुछ और ही नजर आती है।

जुलाई से सितंबर के बीच जब यहां बारिश होती है, तो सूखी दिखाई देने वाली पहाड़ियां धीरे-धीरे हरे रंग में बदलने लगती हैं। जंगलों में नई पत्तियां दिखाई देती हैं, छोटे झरनों में पानी आने लगता है और पहाड़ियों के बीच धुंध का असर बढ़ जाता है। कई बार ऐसा लगता है कि सामने वाली पहाड़ी बादलों के पीछे छिप गई है। सड़क पर चलते हुए अचानक धुंध का एक टुकड़ा सामने आ जाता है और कुछ दूरी तक रास्ता बिल्कुल सफेद दिखाई देने लगता है।

अगर आप मानसून में Mount Abu जाने की सोच रहे हैं, तो इस बार केवल नक्की झील, बाजार या सामान्य पर्यटन स्थलों तक खुद को सीमित न रखें। यहां कुछ ऐसे पहाड़ी रास्ते भी हैं, जहां जाकर आप बारिश, हरियाली और बादलों के इस मौसम को ज्यादा करीब से महसूस कर सकते हैं। इनमें कुछ रास्ते आसान हैं, जबकि कुछ जगहों पर जाने के लिए अच्छी तैयारी और स्थानीय गाइड की जरूरत पड़ सकती है।

मानसून में Mount Abu क्यों है खास?

Mount Abu

गर्मियों में राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों में तापमान काफी ज्यादा रहता है। इसके मुकाबले Mount Abu की ऊंचाई के कारण यहां का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। मानसून आने के बाद तापमान आमतौर पर 20 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। हालांकि बारिश और ऊंचाई के हिसाब से इसमें बदलाव होता रहता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम में यहां घूमने का अनुभव काफी अलग हो जाता है। पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ने के साथ-साथ कई छोटे जलस्रोत और झरने भी दिखाई देने लगते हैं।

जिन रास्तों पर गर्मियों में धूल और सूखी झाड़ियां नजर आती हैं, उन्हीं जगहों पर बारिश के बाद घास और नई वनस्पतियां दिखाई देने लगती हैं। अगर आपको शांत जगहें, पहाड़ी मौसम और प्रकृति के बीच घूमना पसंद है, तो मानसून में Mount Abu आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। सुबह के समय धुंध और बादल पहाड़ियों को ढक लेते हैं। दोपहर तक कभी धूप निकलती है, तो कभी अचानक बारिश शुरू हो जाती है। यही बदलता मौसम Mount Abu की यात्रा को बाकी मौसमों से अलग बनाता है।

पालनपुर पॉइंट: बारिश में बदल जाता है पूरा रास्ता

अगर आप Mount Abu में कुछ अलग करना चाहते हैं, तो पालनपुर पॉइंट का ट्रेक आपके लिए ध्यान देने लायक है। यह सामान्य पर्यटन स्थल जैसा रास्ता नहीं है, जहां आप गाड़ी से पहुंचकर कुछ मिनट में वापस लौट आएं। यहां पहुंचने के लिए पैदल रास्ता तय करना पड़ता है और मानसून के दौरान यह रास्ता और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

यह ट्रेक फिल्टर हाउस की तरफ से शुरू होता है और आगे जंगल तथा पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है। बारिश के दिनों में रास्ते की स्थिति लगातार बदल सकती है। कहीं मिट्टी गीली मिलती है, तो कहीं पत्थरों पर पानी जमा रहता है। कुछ हिस्सों में रास्ता काफी संकरा भी हो सकता है। कई जगहों पर पेड़ों से लगातार पानी गिरता रहता है और जमीन पर फिसलन बढ़ जाती है।

इस ट्रेक की सबसे खास बात यह है कि यहां आपको शहर की सामान्य भीड़ कम दिखाई देती है। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, आसपास का माहौल ज्यादा शांत होता जाता है। पेड़ों से टपकता पानी, गीली मिट्टी और दूर से आती पक्षियों की आवाजें पूरे रास्ते को खास बना देती हैं।

कोदरा डैम के पास से गुजरता रास्ता बनाता है ट्रेक को खास

पालनपुर पॉइंट के रास्ते में कोदरा डैम का इलाका भी आता है। मानसून में डैम और उसके आसपास की पहाड़ियों का दृश्य काफी खूबसूरत दिखाई देता है। बारिश के बाद पानी बढ़ने से पूरा इलाका पहले के मुकाबले ज्यादा हरा नजर आता है। लेकिन यही जगह सावधानी भी मांगती है। बारिश के दौरान पानी का बहाव कभी भी बढ़ सकता है। इसलिए पानी वाले हिस्से को पार करने से पहले स्थानीय गाइड या आसपास के लोगों से रास्ते की स्थिति जरूर पूछें। अगर पानी ज्यादा हो या रास्ता सुरक्षित न लगे, तो आगे बढ़ने की कोशिश बिल्कुल न करें। ट्रेक का उद्देश्य रोमांच लेना है, जोखिम उठाना नहीं। अगर मौसम अचानक खराब हो रहा हो, तो डैम के पास ज्यादा देर रुकने की बजाय सुरक्षित रास्ते से वापस लौटना बेहतर रहेगा।

चोटी तक पहुंचने के बाद दिखता है असली नजारा

पालनपुर पॉइंट तक पहुंचने में रास्ते की स्थिति और आपकी गति के हिसाब से करीब 2 से 4 घंटे लग सकते हैं। शुरुआत में रास्ता सामान्य लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे आप ऊपर जाते हैं, आसपास की पहाड़ियां और घाटियां ज्यादा साफ दिखाई देने लगती हैं। जब आप ऊंचाई पर पहुंचते हैं, तो मेहनत का सबसे खूबसूरत हिस्सा सामने आता है।

नीचे Mount Abu का इलाका दिखाई देता है और दूर तक फैली अरावली की पहाड़ियां एक के बाद एक नजर आती हैं। मानसून में अगर बादल नीचे हों, तो कई बार ऐसा लगता है जैसे पहाड़ियों के नीचे सफेद धुंध की मोटी परत बिछी हुई है। कुछ समय के लिए बादल हटते हैं, तो नीचे की घाटियां दिखाई देती हैं और फिर कुछ ही मिनट में वही दृश्य दोबारा धुंध में छिप सकता है। यही बदलता हुआ मौसम पालनपुर पॉइंट को खास बनाता है।

फोटोग्राफी पसंद है तो पालनपुर पॉइंट निराश नहीं करेगा

मानसून में यहां फोटो खींचने के लिए आपको किसी खास सजावट की जरूरत नहीं पड़ती। गीली चट्टानें, हरी पहाड़ियां, धुंध और बादल अपने आप तस्वीर को अलग रूप दे देते हैं। सुबह के समय रोशनी बहुत तेज नहीं होती, इसलिए बादलों और पहाड़ियों की तस्वीरें ज्यादा प्राकृतिक लग सकती हैं।

बारिश के बाद रास्तों पर बनी पानी की छोटी धाराएं और पेड़ों से गिरती बूंदें भी तस्वीरों को खास बना देती हैं। लेकिन फोटो लेते समय एक बात जरूर ध्यान रखें। गीली चट्टान पर खड़े होकर किनारे तक जाने की कोशिश न करें। पहाड़ी पर जमीन जितनी मजबूत दिखाई देती है, बारिश के बाद वह उतनी ही फिसलन भरी हो सकती है। एक अच्छी तस्वीर के लिए खुद को खतरे में डालना बिल्कुल जरूरी नहीं है।

ट्रेवर टैंक: जंगल और पक्षियों के बीच शांत जगह

Mount Abu

अगर आपको भीड़ से ज्यादा जंगल पसंद हैं, तो ट्रेवर टैंक आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। यह Mount Abu के मुख्य इलाके से कुछ दूरी पर स्थित है और घने जंगलों के बीच बना जलाशय है। इस जगह को खास तौर पर मगरमच्छों और पक्षियों के लिए जाना जाता है।

बारिश के बाद आसपास की वनस्पति काफी घनी हो जाती है। पेड़ों और झाड़ियों के बीच चलने पर आपको शहर का शोर लगभग सुनाई नहीं देता। यहां का माहौल उन लोगों के लिए खास हो सकता है, जो यात्रा में थोड़ी शांति चाहते हैं। पानी के आसपास चट्टानों पर मगरमच्छों को आराम करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि वन्यजीवों को देखने के लिए हमेशा दूरी बनाए रखें। किसी भी जानवर के पास जाकर फोटो लेने या उसे खाना खिलाने की कोशिश बिल्कुल न करें।

ट्रेवर टैंक में पक्षियों की आवाजें भी सुनाई देती हैं

ट्रेवर टैंक को Bird Watching के लिए भी जाना जाता है। सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन मानसून में स्थानीय पक्षियों की आवाजें जंगल को जीवंत बनाए रखती हैं। सुबह के समय यहां जाना ज्यादा अच्छा रहता है, क्योंकि उस समय पक्षियों की गतिविधि अधिक हो सकती है। अगर आप कैमरा लेकर जा रहे हैं, तो धैर्य रखें। जंगल में वन्यजीवों को देखने की कोई गारंटी नहीं होती। किसी जानवर को देखने के लिए उसके बहुत करीब जाना या उसे खाने की चीजें देना बिल्कुल सही नहीं है। प्रकृति को उसके अपने तरीके से देखना ही यहां की यात्रा का सबसे अच्छा हिस्सा है।

गुरु शिखर: अरावली की सबसे ऊंची चोटी

Mount Abu की यात्रा में गुरु शिखर का नाम लगभग हर यात्री की सूची में होता है। करीब 1,722 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुरु शिखर अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है। मानसून में यहां पहुंचने वाला रास्ता काफी खूबसूरत हो सकता है।

कई जगहों पर सड़क के आसपास हरियाली दिखाई देती है और बारिश के बाद पहाड़ों पर धुंध छाई रहती है। ऊपर पहुंचने के बाद मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कुल मिलाकर करीब 300 सीढ़ियों का रास्ता है। बारिश के कारण सीढ़ियां गीली और फिसलन वाली हो सकती हैं। इसलिए यहां आराम से चलना बेहतर है। अच्छी पकड़ वाले जूते पहनें और सीढ़ियों पर जल्दबाजी न करें।

गुरु शिखर पर बादल नीचे दिखाई दें तो नजारा याद रह जाता है

Mount Abu

मानसून में गुरु शिखर की सबसे खास चीज उसका मौसम है। अगर बादल सही ऊंचाई पर हों, तो नीचे की घाटियां धुंध में ढकी दिखाई देती हैं। कभी-कभी बादल इतने नीचे होते हैं कि ऐसा महसूस होता है जैसे आप उनके ऊपर खड़े हैं। हालांकि यह दृश्य हर दिन या हर समय मिलेगा, ऐसा जरूरी नहीं है। Mount Abu में मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है। इसलिए अगर पहली बार में साफ नजारा नहीं मिला, तो थोड़ी देर इंतजार करने पर स्थिति बदल सकती है। गुरु शिखर पर गुरु दत्तात्रेय का मंदिर भी स्थित है। इसलिए धार्मिक महत्व रखने वाले लोगों के लिए यह जगह प्राकृतिक सुंदरता के साथ आस्था का केंद्र भी है।

क्रेग्स पाथ: जंगल के बीच चलने का अनुभव

अगर आपको मुख्य पर्यटन स्थलों से हटकर जंगल में पैदल चलना पसंद है, तो क्रेग्स पाथ एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह रास्ता Mount Abu Wildlife Sanctuary के इलाके से होकर गुजरता है। मानसून में यहां पेड़ों और झाड़ियों में नई हरियाली दिखाई देती है।

रास्ते में आपको पथरीले हिस्से, ढलान और छोटे जलस्रोत मिल सकते हैं। कुछ जगहों पर रास्ता आसान होता है, तो कुछ हिस्सों में थोड़ा ध्यान देना पड़ता है। बारिश के कारण जमीन नरम हो सकती है और पत्थरों पर काई जमने से फिसलन बढ़ सकती है। इस तरह के रास्तों पर अकेले जाने की बजाय स्थानीय जानकारी लेकर या अनुभवी गाइड के साथ जाना बेहतर रहता है।

रास्ते में क्या दिखाई दे सकता है?

यह इलाका वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। रास्ते में लंगूर, पक्षी और कुछ दूसरे छोटे जानवर दिखाई दे सकते हैं। लेकिन याद रखें कि आप उनके प्राकृतिक क्षेत्र में जा रहे हैं। जानवरों को परेशान करना, उनके बहुत करीब जाना या उन्हें खाने की चीजें देना सही नहीं है। अगर कोई जानवर रास्ते में दिखाई दे, तो कुछ दूरी बनाकर उसे रास्ता देना ही सबसे अच्छा तरीका है। जंगल में तेज आवाज में संगीत बजाने और प्लास्टिक फैलाने से भी बचें।

बेलीज वॉक: धीमी रफ्तार में प्रकृति देखने का रास्ता

बेलीज वॉक उन लोगों के लिए ज्यादा अच्छा हो सकता है, जो बहुत कठिन ट्रेक नहीं करना चाहते, लेकिन फिर भी जंगल और पहाड़ी रास्ते का अनुभव लेना चाहते हैं। यह रास्ता नक्की झील के इलाके से जुड़ा हुआ है और आगे प्राकृतिक वातावरण के बीच ले जाता है। मानसून में यहां चारों तरफ हरियाली दिखाई देती है। अगर बारिश हल्की हो रही हो, तो यहां पैदल चलने का अनुभव काफी अच्छा हो सकता है। पेड़ों से गिरती पानी की बूंदें, गीली मिट्टी और ठंडी हवा इस रास्ते को आरामदायक बना देती हैं। लेकिन तेज बारिश होने पर रास्ते की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ें। अगर जमीन पर पानी जमा हो या रास्ता बहुत फिसलन वाला हो, तो वापस लौटना बेहतर रहेगा।

ध्रुधिया वॉटरफॉल: आसान नहीं, लेकिन यादगार

जो लोग ज्यादा चुनौती वाला ट्रेक करना चाहते हैं, उनके लिए ध्रुधिया वॉटरफॉल का रास्ता अलग अनुभव दे सकता है। यह झरना मानसून के दौरान ज्यादा सक्रिय होता है और बारिश के बाद पानी की मात्रा बढ़ जाती है। इसका रास्ता आसान नहीं माना जाता। घने जंगल, फिसलन वाले पत्थर और लंबा पैदल रास्ता इसे सामान्य घूमने की जगह से अलग बनाते हैं।

पहली बार जाने वाले यात्रियों के लिए स्थानीय गाइड की मदद लेना समझदारी होगी। झरने तक पहुंचने के बाद पानी की तेज धार को देखकर आगे बढ़ने की कोशिश न करें। मानसून में झरने खूबसूरत जरूर लगते हैं, लेकिन उनका पानी अचानक तेज हो सकता है। झरने के ठीक नीचे खड़े होकर फोटो लेने या पानी में उतरने से बचें।

मानसून ट्रेकिंग के लिए क्या सामान लेकर जाएं?

अगर आप Mount Abu में मानसून के दौरान ट्रेकिंग करने जा रहे हैं, तो तैयारी पहले से कर लेना बेहतर है। सबसे जरूरी चीज अच्छे ग्रिप वाले जूते हैं। बारिश में सामान्य स्पोर्ट्स शूज कई बार गीले पत्थरों पर फिसल सकते हैं। इसलिए ऐसे जूते पहनें, जो पानी और कीचड़ वाले रास्तों पर भी पकड़ बनाए रखें। इसके अलावा रेनकोट या पोंचो जरूर रखें। मोबाइल, पावर बैंक और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान को पानी से बचाने के लिए वाटरप्रूफ पाउच या ड्राई बैग इस्तेमाल करें। एक छोटी फर्स्ट-एड किट, पानी की बोतल और हल्के स्नैक्स भी साथ रखें। बारिश के मौसम में रास्ते पर छोटे कीड़े और जोंक भी मिल सकते हैं। इसलिए शरीर को ढकने वाले आरामदायक कपड़े पहनना बेहतर रहेगा।

ट्रेक पर निकलने से पहले मौसम जरूर जांचें

मानसून में पहाड़ों का मौसम मैदानी इलाकों से अलग तरीके से बदल सकता है। सुबह मौसम ठीक दिखाई दे सकता है और कुछ समय बाद तेज बारिश शुरू हो सकती है। इसलिए केवल मोबाइल के मौसम ऐप पर निर्भर रहने की बजाय स्थानीय लोगों या गाइड से भी रास्ते की स्थिति पूछें। अगर किसी रास्ते पर पानी का बहाव बढ़ गया हो, तो उसे पार करने की कोशिश न करें। खासकर झरनों, डैम और गहरी घाटियों के आसपास अतिरिक्त सावधानी रखें। अगर भारी बारिश हो रही हो, बिजली चमक रही हो या रास्ते पर पानी तेजी से बह रहा हो, तो ट्रेक जारी न रखें।

Mount Abu कैसे पहुंचें?

Mount Abu जाने के लिए सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन आबू रोड है। आबू रोड से Mount Abu की दूरी करीब 28 किलोमीटर है। स्टेशन से टैक्सी या दूसरी स्थानीय गाड़ियों के जरिए शहर तक पहुंचा जा सकता है। रेलवे स्टेशन से निकलते ही पहाड़ी रास्ता शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे मैदान की जगह अरावली की पहाड़ियां नजर आने लगती हैं। अगर आप हवाई रास्ते से आ रहे हैं, तो उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट एक प्रमुख विकल्प हो सकता है। एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा Mount Abu पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। इसलिए यात्रा की योजना पहले से बनाना बेहतर है। सड़क मार्ग से भी यह जगह राजस्थान और गुजरात के कई शहरों से जुड़ी हुई है।

मानसून में कहां रुकें?

Mount Abu में ठहरने के लिए बजट होटल से लेकर अच्छे रिसॉर्ट और हेरिटेज प्रॉपर्टी तक कई विकल्प मिल जाते हैं। अगर आप पहली बार आ रहे हैं और आसपास की जगहें आसानी से देखना चाहते हैं, तो मुख्य बाजार और नक्की झील के आसपास रहना सुविधाजनक हो सकता है। इन इलाकों में होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें और स्थानीय परिवहन आसानी से मिल जाते हैं।

अगर आपका उद्देश्य शांत माहौल में रहना है, तो शहर से थोड़ा बाहर के होटल या रिसॉर्ट बेहतर लग सकते हैं। मानसून में कई बार होटल के दाम पीक सीजन के मुकाबले कम मिल जाते हैं, लेकिन सप्ताहांत और छुट्टियों में मांग बढ़ सकती है। इसलिए अगर आपकी तारीख तय है, तो होटल पहले से बुक करना बेहतर रहेगा। होटल बुक करते समय यह भी देख लें कि वहां तक पहुंचने वाली सड़क बारिश में सुरक्षित रहती है या नहीं।

क्या मानसून में Mount Abu जाना सही रहेगा?

अगर आपको पहाड़, बारिश और हरियाली पसंद है, तो मानसून Mount Abu देखने का अच्छा समय हो सकता है। यहां आपको राजस्थान का वह रूप देखने को मिलता है, जो आमतौर पर राज्य की तस्वीर में नजर नहीं आता। सूखी जमीन की जगह हरी पहाड़ियां दिखाई देती हैं। गर्मी की जगह ठंडी हवा महसूस होती है और साफ आसमान की जगह कई बार बादल पूरे पहाड़ को ढक लेते हैं। लेकिन मानसून में यहां घूमने के लिए थोड़ी समझदारी भी जरूरी है।

हर रास्ता हर दिन सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। किसी झरने में पानी ज्यादा हो सकता है, किसी ट्रेक पर फिसलन हो सकती है और कभी-कभी तेज बारिश के कारण रास्ते भी बदल सकते हैं। इसलिए Mount Abu की मानसून यात्रा में सबसे जरूरी चीज है मौसम को समझना और अपनी योजना को उसके हिसाब से बदलना। अगर बारिश बहुत ज्यादा हो जाए, तो ट्रेक छोड़कर शहर की दूसरी जगहें देखना बेहतर है। आखिर यात्रा का मकसद केवल हर जगह पहुंचना नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से उस जगह का अनुभव करना भी है।

परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो ध्यान रखें

अगर आपके साथ छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं, तो बहुत कठिन ट्रेक चुनने से बचें। गुरु शिखर और नक्की झील जैसी जगहें परिवार के साथ घूमने के लिए अपेक्षाकृत आसान हो सकती हैं। वहीं पालनपुर पॉइंट और ध्रुधिया वॉटरफॉल जैसे ट्रेक पर जाने से पहले मौसम, रास्ते और परिवार के सदस्यों की फिटनेस जरूर देखें। बारिश में बच्चों को झरनों, डैम और गहरी घाटियों के पास अकेला न छोड़ें। अगर मौसम खराब हो जाए, तो घूमने की योजना बदलने में बिल्कुल संकोच न करें।

दोस्तों के साथ दो दिन का आसान प्लान

अगर आप दोस्तों के साथ दो दिन के लिए Mount Abu जा रहे हैं, तो पहले दिन नक्की झील, मुख्य बाजार और सनसेट पॉइंट देख सकते हैं। शाम को स्थानीय खाना ट्राई करें और अगले दिन के ट्रेक की तैयारी करें। दूसरे दिन सुबह जल्दी गुरु शिखर की तरफ निकलें। इसके बाद ट्रेवर टैंक और आसपास की जगहें देखी जा सकती हैं। अगर मौसम ठीक हो, तो बेलीज वॉक या किसी आसान ट्रेल को भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। अगर बारिश ज्यादा हो, तो कठिन ट्रेक करने की बजाय दिलवाड़ा मंदिर, अचलगढ़ या आसपास के दूसरे पर्यटन स्थल देखना बेहतर रहेगा।

बारिश में फोटो खींचते समय इन बातों का ध्यान रखें

Mount Abu

मानसून में Mount Abu फोटो खींचने वालों के लिए काफी अच्छा हो सकता है। धुंध, हरी पहाड़ियां, गीली सड़कें और बादलों से ढका आसमान तस्वीरों में अलग माहौल बनाते हैं। लेकिन कैमरा या मोबाइल लेकर बारिश में निकल रहे हैं, तो उसे सुरक्षित रखना जरूरी है।

मोबाइल के लिए वाटरप्रूफ कवर रखें। कैमरा इस्तेमाल करते समय अचानक बारिश आने पर उसे तुरंत बैग में सुरक्षित रखें। झरने या पहाड़ी किनारे पर फोटो लेने के लिए बहुत आगे तक न जाएं। अच्छी तस्वीर के लिए अपनी सुरक्षा को जोखिम में डालना बिल्कुल जरूरी नहीं है।

एक यात्रा, कई अलग अनुभव

Mount Abu को केवल राजस्थान का हिल स्टेशन कह देना शायद इसके पूरे अनुभव को बताने के लिए काफी नहीं है। यहां आप एक ही यात्रा में प्रकृति, पहाड़, जंगल, मंदिर, झील, स्थानीय खाना और ट्रेकिंग का अनुभव ले सकते हैं। मानसून इस पूरे अनुभव को और खास बना देता है। पालनपुर पॉइंट पर बादलों के बीच खड़े होना हो, गुरु शिखर से अरावली को देखना हो, ट्रेवर टैंक के जंगल में पक्षियों की आवाज सुननी हो या नक्की झील के किनारे बैठकर बारिश देखनी हो, हर जगह का अपना अलग अनुभव है।

बस इस यात्रा में एक बात हमेशा याद रखें। पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद तभी अच्छा है, जब आप प्रकृति और मौसम दोनों का सम्मान करें। बारिश में घूमते समय जल्दबाजी न करें, रास्तों पर कचरा न छोड़ें, वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें और स्थानीय लोगों की सलाह को नजरअंदाज न करें। अगर इस मानसून आप राजस्थान में कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जो आमतौर पर रेगिस्तान वाली पहचान से बिल्कुल अलग हो, तो Mount Abu आपकी यात्रा सूची में जरूर होना चाहिए।

FiveColorsOfTravel की ओर से कुछ खास सुझाव

  • पालनपुर पॉइंट, ध्रुधिया वॉटरफॉल या जंगल वाले रास्तों पर स्थानीय गाइड की मदद लेना बेहतर रहेगा।
  • तेज बारिश या पानी का बहाव ज्यादा होने पर ट्रेक को टालने में ही समझदारी है।
  • मानसून में अच्छी पकड़ वाले जूते पहनें, क्योंकि गीली चट्टानें और सीढ़ियां फिसलन भरी हो सकती हैं।
  •  मोबाइल, पावर बैंक और जरूरी कागजात के लिए वाटरप्रूफ पाउच या ड्राई बैग जरूर रखें।
  • जंगल, झरने और पहाड़ी रास्तों पर कचरा न फैलाएं और किसी भी वन्यजीव को परेशान न करें।

 

Shivani Pal

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