अप्पम-स्टू: लजीज इतना कि पढ़कर ही मुंह में पानी आ जाएगा! Appam Stew
केरल में खाए जाने वाले व्यंजन- अप्पम का नाम तो आपने सुना ही होगा लेकिन आज जानिए अप्पम-स्टू के बारे में। बहुत बार आपने ये तीन शब्द जरुर सुने होंगे कि मनुष्य की मूलभूत जरूरत रोटी, कपड़ा, और मकान है। इनमें से दो चीजें कपड़ा और मकान न हों तो चल भी सकता है, व्यक्ति इसके बगैर गुजर बसर कर सकता है। लेकिन खाने के बगैर इंसान का जीवित रह पाना, इसकी कल्पना भी करना असंभव सा महसूस होता है। हालांकि कपड़ा और मकान भी इंसान की अहम जरूरतों का हिस्सा हैं, लेकिन जब इंसानों ने इन चीजों का इस्तेमाल करना नहीं सीखा था, तब भी वे इस पृथ्वी पर सरवाइव कर पा रहे थे। लेकिन बिना आहार के जिंदा रह पाना संभव नहीं था। न ही आज संभव है।

खैर, आज मनुष्य के पास कई तरह के संसाधन मौजूद हैं। वह कई तरह से बना सकता है, खा सकता है। आज हमारे खाने में कई तरह के नए-नए पकवान शामिल हो चुके हैं। वैसे भारत विविधताओं का देश है, अनेक भाषाएं, संस्कृतियां इस देश का गौरव है। यही भाव एवं विविधताएं इस देश को अन्य देशों, जिनमें हमारे पड़ोसी और दूसरी दुनिया के देशों से हमें अलग बनाती है।
विविधताओं से भरपूर, मेरा भारत देश महान!
इस देश में पहनावे और रंग-रूप में तो विविधता है ही लेकिन यहाँ के भोजन में जो विविधता है, वह अद्भुत है, स्वाद के लिहाज से या संस्कृति से लिहाज से यह हमारी भारतीय पहचान का अभिन्न हिस्सा है। इस विविधता से होता यह है की खुद की संस्कृति के अलावा हम दूसरी संस्कृति को परख सकते हैं। चाहे वह भोजन के रूप में हो या फिर पोशाक के रूप में। खाने की विविधता के चलते हम अपने स्वाद का दायरा बढ़ा सकते हैं। आज हम ऐसे ही एक स्वादिष्ट भोजन की बात करने वाले हैं। जो एक बार चखने पर ही किसी को भी अपने स्वाद का मुरीद बना सकता है।

भारत के एक खूबसूरत राज्य केरल में इसका शुभारंभ हुआ और आज अलावा केरल के पूरे देश में इसके चाहने वाले हैं। जिसने इस लजीज डिस को नहीं चखा, शायद उसने केरल की संस्कृति को नहीं पहचाना। केरल के इस जाने-माने व्यंजन का नाम “अप्पम-स्टू” है। स्वाद से मजबूत, मुह में डालो तो मिश्री सी घुले, खाने में एकदम लाजबाब चाहे नास्ते में शामिल करो या फिर सुबह के खाने में। वैसे यह व्यंजन विशेष रूप से नास्ते के लिए ही बनाया जाता है। इसकी भूमिका कहीं भी हो चाहे नास्ते में हो या फिर हो ब्रेकफ़ास्ट में। लेकिन स्वाद का जबरदस्त है केरल का यह प्रसिद्ध व्यंजन अप्पम-स्टू। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है, एक बार आप भी आजमाइये, मुरीद न हुए तो फिर कहना।
बाद में खा भी लेना, पहले अप्पम-इष्टू की विकास यात्रा तो जानो!
निश्चित तौर पर इसके विकास में तयशुदा कोई तारीख नहीं है, हम बता पाने में असमर्थ हैं। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है की इसका विकास केरल और तमिलनाडु के दक्षिणवर्ती इलाकों में हुआ है। अप्पम इष्टू का विकास समय की घड़ी के साथ होता गया और आज हमें इसमें कई-कई तरह के बदलाव भी देखने को मिलते हैं। अप्पम के साथ इष्टू की जगह आज नॉन वेज इष्टू, ऐग इष्टू, मटन इष्टू आदि ने ले ली है। दरअसल कई तरह से इष्टू को तैयार किया जाने लगा है। हालांकि अप्पम में ज्यादा बदलावों की गुंजाइश नहीं है क्योंकि यह बिल्कुल मलाई, और मक्खन के जैसे प्रतीत होता है और इसमें हुए बदलावों को चिह्नित कर पाना भी बमुश्किल है।
ये दिखता कैसा होगा?
रोटी के भांति दिखने वाला अप्पम, वास्तव में होता तो रोटी की आकृति जैसा ही है लेकिन इसकी रेसेपी बहुत अलग है और विशेष भी। मात्र आकृति से किसी चीज की तुलना करना भी तो ठीक नहीं है। क्या कहते हो? वैसे इसकी रेसेपी में, चावल का आटा, नारियल का दूध, चीनी, नमक और पानी का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ जब इष्टू बनाने के लिए जायका लगता है, उसकी सुगंध से पूरा घर महक उठता है। इसको तैयार करना बड़ा दुर्लभ है, कभी आप प्रयास कीजिए बने तो ठीक है, नहीं तो ज़ोमेटो, ब्लिंकिट पर भी मिल जाएगा।

ऑर्डर कीजिए और मजे लीजिए इसके लबाबदार स्वाद का। थोड़ा सा नमकीनी, बस थोड़ा सा मलाईदार। सोचना क्या है? सोचते तो वे लोग हैं, जो बिना खाए रहते हैं, जोक्स अपार्ट। बिना खाए भले कौन ही जीवित रहता है। कहने का बस इतना सा अर्थ है की कभी केरल के इस पारंपरिक नास्ते को भी आजमाइए। इसके मनोरम स्वाद के साक्षी बनिए। अब ऐसा है की केरल में तो नारियल वैसे ही है जैसे बरसात में मेंढक। मतलब हर दो कदम पर नारियल का पेड़। इसीलिए हर घर में, प्रत्येक व्यंजन में कहीं न कहीं किसी न किसी बहाने से घोल दिया जाता है। इधर ही देख लो, नमूना पेश है। अप्पम में भी नारियल का उपयोग और इष्टू में भी। क्या रोचक बात है, नई। हर जगह बस नारियल ही नारियल।
यहां तक आ ही गए हो, तो थोड़ा विस्तार से जानिए!
अप्पम वास्तव में एक तरह का पतला, मुलायम सा और फूला हुआ चावल का पैनकेक है, जो आमतौर पर कड़ाही के आकार की गहरी तली में पकाया जाता है। इसके किनारे कुरकुरे होते हैं, जबकि बीच में मोटा और मलाईदार होने के कारण नरम और स्पंजी होता है। जैसा की मैने पहले बताया, इसे बनाने के लिए चावल और नारियल को भिगोकर पीसा जाता है, सिलबट्टे से नहीं अब तो मिक्सी, और गिरेंडर आ गया है। हाँ, लेकिन बहुत जगह अभी भी सिलबट्टे का इस्तेमाल किया जाता है, आप चाहें तो अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल कर सकते हैं। पीसने के बाद इस घोल को रातभर खमीर उठाने के लिए छोड़ दिया जाता है। अगली सुबह जब यह खमीर उठ जाता है, तो इसे धीमी आंच पर कड़ाही में पकाया जाता है। बिल्कुल पराठे के जैसे।
खाने की बात करूंगा तो, आपका मन करने लगेगा लेकिन फिर भी बता देता हूँ। अप्पम खाने में हल्का, सुपाच्य और बेहद लजीज होता है। यह दिखने में जितना आकर्षक होता है, कसम से उतना ही खाने में मजेदार और चटखार लिए होता है। बस इसी बजह से इसे किसी भी तीखे या मलाईदार करी के साथ परोसा जाता है। इसके बाद तो स्वाद में सोने पर सुहाग सा लगने लगता है।
इष्टू का है अपना अलग ही मजा!
सूखी रोटी खाना किसे पसंद है, किसी को पसंद नहीं। पर मुझे है! मजाक कर रहा हूँ किसी को नहीं है, “इंक्लुडिंग मी”। वैसे ही इष्टू अप्पम के साथ खाई जाने वाली एक तरह की सब्जी ही है। वैसे सब्जी तो नहीं है, लेकिन मान लीजिए! आपका क्या ही जाएगा? अच्छा चलो मत मानो। तो सुनो! इष्टू एक हल्की, मलाईदार और सौम्य नारियल आधारित करी है, जो आमतौर पर सब्जियों, आलू और नारियल के दूध से बनती है। केरल में यह नॉनवेज वर्जन में भी मिलता है, लेकिन वेज इष्टू अपने आप में एक परिपूर्ण व्यंजन है। इष्टू में न तेज मिर्च होती है, न भारी मसाले, बल्कि इसमें काली मिर्च, अदरक, करी पत्ता और नारियल के दूध की मिठास होती है। मिठास ऐसी बिल्कुल की आपके पसंदीदा व्यंजन जैसी। वैसे यह स्वाद और खुशबू में अत्यंत सुगंध से भरा होता है। यही कारण है कि अप्पम और इष्टू की जोड़ी बहुत ही खास, जो खाने वालों को रास आती है।
मजेदार स्वाद ने बड़ा दिया सांस्कृतिक पहचान का दायरा..
अलबत्ता, अप्पम-इष्टू केवल एक व्यंजन नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत और खान-पान की सूझबूझ का एक प्रतीक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कैसे सादगी, स्वास्थ्य और स्वाद तीनों को एक साथ परोसा जा सकता है। नारियल के पेड़ों की छांव, बर्तन में उठती भाप, और पारिवारिक प्रेम की गर्माहट। यदि अब भी आपका मन अप्पम-इष्टू खाने का नहीं हुआ तो खाने से परहेज करते हैं। मत करिए कुछ भी पीठ पर बांधकर नहीं ले जाओगे। इसलिए खाओ-पिओ और मौज करो।
एक सलाह है लेते जाओ, सलाह यह है की यदि आपने अब तक अप्पम-इष्टू नहीं चखा है, तो अगली बार केरल जाएं या किसी अपने मलयाली दोस्त से कहिए कि वह यह डिश जरूर बनाकर खिलाए। यकीन मानिए, इसके स्वाद के मुरीद हो जाओगे, और बार-बार अप्पम-इष्टू (Appam stew) माँगोगे।
Written by: Pushpendra Gautam





