हेल्थ या वेल्थ? मन की शान्ति होनी चाहिए सर्वोपरि!
बॉडी मन को कंट्रोल करती है या फिर मन बॉडी को? यह प्रश्न मैं आप पर छोड़ते हैं। खैर, स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों से मुक्त होना नहीं है। बल्कि यह एक ऐसी परिस्तिथि है, जिसमें मनुष्य की बॉडी, मेंटली और सोशल तरीके से पूरी तरह स्वस्थ होती है। यदि ह्यूमन हेल्थी नहीं है, तो वह जीवन में कोई भी काम ठीक से और स्मार्ट्नेस के साथ नहीं कर सकता। हेल्थी लाइफ ही सबसे एक्सपेन्सिव प्रॉपर्टी है। एक व्यक्ति जिसके पास सब कुछ प्रॉपर्टी है, समाज में नाम और शोहरत लेकिन वह बीमारियों से घिरा रहता है, जिससे वह उन सबका आनंद नहीं ले सकता, जो चीजें उसके पास हैं। वही व्यक्ति जिसके पास ज्यादा साधन नहीं हैं लेकिन वह स्वस्थ है, तो वह कोई भी सिच्वेसन में खुश रह सकता है।
“जिसने मन को जीत लिया,उसने सारा जहान जीत लिया,
वरना तो तन की गुलामी, हर रोज़ नया तूफ़ान देती है।”
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हेल्थी लाइफ जीने के लिए सबसे जरूरी है, अच्छी लाइफ स्टाइल। आजकल की लाइफ व्यस्त, भागदौड़, जंग फूड, लेट नाइट तक जागना, तनावपूर्ण माहौल, प्रदूषण और मशीनरी पर बढ़ती निर्भरता ने हमारी हेल्थ को सबसे अधिक एफेक्टिव बनाया है। पहले के समय में लोग नेचुरल जीवन जीते थे। खेतों में काम करना, पैदल चलना, ताजा फ्रेश कुकिंग और खाना, मिट्टी से जुड़ा रहना यह सब बातें उनके स्वास्थ्य को स्ट्रॉंग बनाती थीं।

अब स्थिति यह है कि बच्चे से लेकर बूढ़े तक, सब मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं। खाना फास्ट फूड का हो गया है, सोना देर रात और जागना देर सुबह का चलन बन गया है।स्वस्थ रहने के लिए भोजन का हेल्दी होना बहुत अहम रोल अदा करता है। हम जैसा खाते हैं, वैसा ही हमारा शरीर बनता है। पहले के समय में लोग घर का बना ताजा, सादा और पौष्टिक भोजन करते थे। दाल, चावल, रोटी, सब्जी, फल और दूध यह उनका नियमित आहार होता था।
क्या आपकी ज़िन्दगी का भी ज़रूरी हिस्सा बन गए हैं जंक फ़ूड?
आज के समय में लोग बाजार से तैयार भोजन, जंक फूड, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और मिठाइयों पर अधिक निर्भर हो गए हैं। ऐसे भोजन में न तो पोषण होता है और न ही शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है। इससे फेट, शुगर, पेट की डीसीजिस, और हार्ट संबंधी बीमारियों जैसे अनेक रोग जन्म लेते हैं। योग भी स्वस्थ जीवन के लिए नीडी है। केवल खाना खाकर और बैठे रहकर शरीर को कोई लाभ नहीं मिल सकता है। शरीर को ऐक्टिव रखना जरूरी है। पहले लोग हाथ से काम करते थे, अपने सेड़ुएल में फिजिकली हार्ड वर्क करते थे, इसलिए उन्हें अलग से योग करने की आवश्यकता नहीं होती थी। लेकिन अब अधिकांश कार्य मशीनरी से होने लगे हैं। ऑफिस में कंप्यूटर के सामने बैठना, वाहन से चलना और घर में भी आराम की स्थिति में रहना हमारी दिनचर्या बन गई है।
जरूरी है कि हम प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा सैर करें, योग करें, दौड़ लगाएँ या खेलकूद में भाग लें। योग भारत की प्राचीन परंपरा है, जिसे आज विश्वभर में अपनाया जा रहा है। योग शरीर को लचीला, ऐक्टिव और डीसीजिस से लड़ने में सक्षम बनाता है। सुबह-सुबह ब्रीदिंग से फेफड़े मजबूत होते हैं, ब्लड साइकिलिंग बेहतर होती है और मन शांत होता है। ध्यान से तनाव कम होता है, कंसन्ट्रेसन बढ़ती है और नींद अच्छी आती है। अनेक रिसर्च भी यह प्रूव कर चुके हैं कि नियमित योग और खाली पेट ब्रीदिंग करने वाले लोग मेंटली और फिजिकल रूप से अधिक हेल्दी रहते हैं।
घर बैठे योग और मेडिटेशन से कैसे बदलें अपनी ज़िंदगी
नींद का हेल्दी होने से गहरा संबंध है। आज की लाइफ स्टाइल में लोग देर रात तक जागते हैं और सुबह देर से उठते हैं। मोबाइल, टीवी और इंटरनेट पर समय बिताने की आदत से नींद का समय लगातार कम होता जा रहा है। पूरी नींद न मिलने से शरीर थका रहता है, दिमाग सुस्त हो जाता है, स्ट्रेस बढ़ता है और मन काम में नहीं लग पाता है। वास्तव में नींद के दौरान शरीर की रिपेयरिंग होती है, और एनर्जी रिप्रोड्यूस होती है और माइन्ड की केपेब्लटी बेहतर होती है। इसलिए हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए।

मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना फिजिकल हेल्थ का। एक व्यक्ति अगर फिजिकल रूप से मजबूत है, लेकिन मेंटली स्ट्रेस्ड हैं, तो वह भी बीमार ही माना जाएगा। आजकल की दुनिया में एंग्जाइटी, लॉनलीनेस और मेंटली तनाव जैसे रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। कॉम्पटीसन, नौकरी की अंसरटीनिटी, रिश्तों में दूरी, सोशल मीडिया पर अधिक निर्भरता यह सभी कारण मेंटली अन्हेल्दी को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम खुलकर बात करें, अपने एमॉसन्स को दबाएँ नहीं, अपने से समय निकालें और जीवन में संतुलन बनाए रखें। संगीत सुनना, किताबें पढ़ना, प्रकृति के साथ समय बिताना और पोजीटिव सोच अपनाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।
क्या आपका खाना ही आपकी बीमारियों की वजह है
सफाई भी स्वास्थ्य का एक बड़ा आधार है। एक गंदे वातावरण में रहने से इंफेक्सन और बीमारियाँ फैलती हैं। साफ-सुथरे कपड़े पहनना, नियमित स्नान करना, भोजन बनाने से पहले और बाद में हाथ धोना, शौच के बाद हाथ साफ करना और पीने के लिए क्लीन वाटर का उपयोग करना जरूरी है। घर, गली, मोहल्ला और स्कूल की सफाई का ध्यान रखना सभी का कर्तव्य है। अगर हम अपने आसपास सफाई रखेंगे तो मच्छर, मक्खी और कीटों से बचा जा सकता है। साफ-सफाई से न केवल शरीर सुरक्षित रहता है, बल्कि मन भी प्रसन्न रहता है।
सरकार भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और सस्ता बनाने के लिए कई स्कीम्स चला रही है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। बच्चों को समय पर टीके दिए जाते हैं ताकि वे गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रह सकें। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष पौष्टिक आहार योजना चलाई जाती है। स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत पोषक भोजन दिया जाता है ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास हो सके। लेकिन ये सभी योजनाएँ तभी सफल हो सकती हैं जब लोग स्वयं भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों।
लेट नाइट स्क्रॉलिंग आपकी हेल्थ का सबसे बड़ा दुश्मन है
स्वस्थ जीवन के लिए हमें कुछ अच्छी हैबिट्स अपनानी होंगी। जैसे समय पर खाना खाना, भूख से अधिक न खाना, ताजे और प्राकृतिक पदार्थों को प्राथमिकता देना, फ्रूट्स और हरी सब्जियाँ भोजन में शामिल करना, कम मीठा और तला-भुना खाना, रोज सुबह सैर पर जाना, तनाव को खुद पर हावी न होने देना, परिवार के साथ समय बिताना, समय पर सोना और उठना। साथ ही यह भी जरूरी है कि हम अपने शरीर की समय-समय पर जाँच कराते रहें ताकि किसी बीमारी की पहचान समय रहते हो सके।

बच्चों को बचपन से ही अच्छी स्वास्थ्य संबंधी आदतें सिखाना आवश्यक है। जैसे रोज ब्रश करना, समय पर खाना, बाहर का खाना कम खाना, साफ-सफाई रखना, खेलकूद में भाग लेना, समय पर सोना और उठना। अगर बचपन से यह आदतें डाली जाएँ तो वे जीवन भर उनका पालन करते हैं और स्वस्थ रहते हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को इनके बारे में प्रेरित कर सकते हैं। बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी हमारा कर्तव्य है। उम्र के साथ शरीर की शक्ति कम होती जाती है। उन्हें उचित देखभाल, पोषण, दवा, आराम और स्नेह की जरूरत होती है। परिवार का वातावरण अगर शांतिपूर्ण और सहयोगी हो, तो बुजुर्ग मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं और उनका जीवन आसान हो जाता है।
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कोरोना महामारी ने यह सिखाया है कि स्वास्थ्य का कोई विकल्प नहीं होता। जब पूरी दुनिया एक बीमारी के आगे बेबस हो गई, तब सभी ने यह महसूस किया कि स्वास्थ्य ही असली पूँजी है। इस महामारी ने साफ-सफाई, प्रतिरक्षा प्रणाली, मास्क पहनने, हाथ धोने, सामाजिक दूरी और टीकाकरण की महत्ता को दुनिया के सामने उजागर किया।
आज के दौर में स्वास्थ्य को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम शारीरिक रूप से तो बीमार हो ही रहे हैं, लेकिन मानसिक रूप से भी कमजोर होते जा रहे हैं। दवाइयों पर अत्यधिक निर्भरता, प्रकृति से दूरी, स्ट्रेस्ड लाइफ स्टाइल और डिजिटल उपकरणों पर अधिक समय बिताना यह सब हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि हम अपने जीवन को सरल और संतुलित बनाएं, योग और ध्यान को अपनाएँ, प्रकृति के करीब जाएँ, रिश्तों को समय दें और अपने शरीर को समझें।
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एक स्वस्थ व्यक्ति समाज की भी सेवा कर सकता है, देश के लिए उपयोगी हो सकता है और अपने परिवार को भी खुश रख सकता है। यदि व्यक्ति बीमार है तो न केवल वह स्वयं दुखी होता है, बल्कि उसके परिवार के लोग भी मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान होते हैं। इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जरूरी है। अंत में फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल्स का कहना यही है कि यदि हमें अपने जीवन को सफल, सुखद और लंबा बनाना है, तो सबसे पहले अपने स्वास्थ्य की चिंता करनी होगी।

स्वास्थ्य कोई अलग विषय नहीं है, बल्कि यह हर इंसान की प्रायोरिटी होनी चाहिए। यह न किसी एक वर्ग का विषय है और न ही केवल डॉक्टरों या अस्पतालों तक सीमित। स्वास्थ्य हर व्यक्ति की इंडीविजुअल और सोशल रेस्पोंसीब्लिटी है। हम सब अगर मिलकर अच्छे स्वास्थ्य की दिशा में कार्य करें, तो हमारा समाज, देश और आने वाली पीढ़ियाँ हेल्दी और स्ट्रॉंग बनेंगी।






