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मध्य प्रदेश के सतना में स्थित है एक ऐसा शक्तिपीठ, जहां गिरा था माता सती का हार

त्रिकूट पर्वत की ऊंचाइयों पर स्थित मैहर मंदिर की कहानी आदिशक्ति सती के आत्मदाह से जुड़ी हुई है। देश के 108 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ (Shaktipeeth) त्रिकूट पर्वत के इस पहाड़ी पर भी स्थित है। जिस स्थान पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया है। बताया जाता है कि इस स्थान पर माता का हार टूट कर गिरा था, इसलिए इस जगह को मैहर का नाम दिया गया। यह मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिला के त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। जहां तक पहुंचाने के लिए भक्तों को पहाड़ी पर चढ़ाई करनी होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे भारत में माता शारदा का यह इकलौता मंदिर है। इस मंदिर में माता शारदा के साथ ही अन्य देवी देवताओं की पूजा भी की जाती है।

क्या है पूजा की विधि व्यवस्था? (What are the rituals of worship?)

जब आप त्रिकूट पहाड़ी के गेट पर जाएंगे तो वहीं आपको ढेर सारे पूजा के समान बिकते हुए नजर आएंगे। आप वहां से माता के लिए चुनरी, फुल और प्रसाद खरीद सकते हैं। पूजा के लिए आवश्यक सामग्रियों को खरीदने के बाद आप आगे की ओर बढ़ सकते हैं। जहां से मंदिर के लिए चढ़ाई शुरू होती है। त्रिकूट पहाड़ी के शीर्ष तक पहुंचाने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है। साथ ही दंडवत प्रणाम करते हुए माता तक पहुंचने की अभिलाषा (Desire) रखने वाले भक्तों के लिए भी रास्ता बनवाया गया है। अगर बात करें सीढ़ियों के संख्या की तो मैहर माता मंदिर पहुंचने के लिए आपको 1000 से भी ज्यादा सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ेगी।

मंदिर पहुंचकर आपको पूजा करने में कितने घंटे का समय लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस समय यहां माता के दर्शन के लिए जाते हैं और आए हुए श्रद्धालुओं की संख्या कितनी है। मैहर माता मंदिर में दूर-दूर से भक्तजन (Devotees) पूजा करने के लिए आते हैं। इसलिए यहां श्रद्धालुओं (devotees) की संख्या हमेशा ही अधिक होती है। लेकिन साल के दोनों ही नवरात्रियों में यहां भक्तों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है। अगर आप शांति से पूजा अर्चना करना चाहते हैं तो आप त्यौहार के दिनों में यहां जाना अवॉयड (avoid) कर सकते हैं।
मंदिर से नीचे उतरने के बाद आप वहीं कहीं आसपास खाना खा सकते हैं। क्योंकि पहाड़ी के तलहटी में बहुत सारे खाने की दुकान भी लगे हुए हैं। जहां लगभग डेढ़ सौ रुपए में एक आदमी बहुत ही अच्छे से खाना खा सकता है।

घूमने में कितना समय लगेगा? (How much time will it take to travel?)

इस मंदिर के लिए चढ़ाई में आपको लगभग 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। वहां पूजा करने में आपको एक से डेढ़ घंटे का समय लग सकता है। साथ ही पहाड़ी से नीचे उतरने में आपको डेढ़ से 2 घंटे का समय लग सकता है। अगर मोटे तौर पर कहा जाए तो आपको पूरे मंदिर घूमने और पूजा करने में लगभग 6 से 7 घंटे का समय लग सकता है।

कैसे पहुंचे? (How to reach?)

यह मंदिर मध्य प्रदेश राज्य के सतना जिले के त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। जहां तक आप बाय रोड बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग से भी मैहर आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप दिल्ली से मैहर के लिए जाना चाहते हैं तो दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आपको ट्रेन मिल जाएगी।
हवाई मार्ग द्वारा मैहर पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले मध्य प्रदेश के जबलपुर हवाई अड्डे तक पहुंचना होगा। मध्य प्रदेश का जबलपुर हवाई अड्डा देश के अन्य हवाई अड्डों से अच्छे तरीके से कनेक्टेड है। जबलपुर हवाई अड्डा पहुंचकर आपको 165 किलोमीटर दूरी तय करके मैहर पहुंचना होगा। जिसके लिए आप किसी भी टैक्सी या फिर बस का सहारा ले सकते हैं।

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