Sariska Bala Quila Jungle Safari
अलवर फोर्ट सफारी – दिल्ली के नजदीक लीजिये जंगल सफ़ारी का मजा
–प्रदीप कुमार –
दोस्तों हम जब भी मानसून में घूमने के लिए प्लानिंग करते हैं हम हमेशा हिल्स एरियाज में जाने से बचते हैं क्योंकि बरसात के समय हिल स्टेशन्स पर लैंड स्लाइडिंग का जोखिम हमेशा बना रहता है। ऐसे में हम आज आपको रूबरू करवाएंगे एक ऐसी ही खूबसूरत जगह जो न केवल हिल स्टेशन की कमी को पूरा करेगी बल्कि आप यहाँ आकर जंगल सफारी का भी आनंद ले सकते हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं दिल्ली से मात्र ढाई घंटे की दूरी पर स्थित राजस्थान के अलवर की। मानसून के समय जब सभी टाइगर रिज़र्व आम पब्लिक के लिए बंद कर दिए जाते हैं ऐसे में आप अलवर आकर सरिस्का के बफर ज़ोन की सफारी का आनंद ले सकते हैं। दोस्तों इन दिनों में मौसम इतना खूबसूरत होता है की यहाँ आकर आप न केवल नेचर को एन्जॉय कर सकते हैं बल्कि अलवर की दूसरी खूबसूरत जगहों को एक्स्प्लोर कर सकते हैं।(Alwar Fort)

अलवर, दिल्ली से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह शहर कभी राजपूतों का गढ़ हुआ करता था और यहां आज भी उनकी भव्यता के अवशेष देखे जा सकते हैं। (Alwar Fort)
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दोस्तों हमने शुरुआत करनी चाही अलवर के फेमस बाला फोर्ट से। लेकिन हमें टिकट खिड़की पर पता चला कि अभी फिलहाल अलवर का यह किला रेनोवेशन के कारन पिछले एक साल से बंद है। और इस साल रेनोवेशन का कार्य कंटिन्यू रहेगा। लेकिन आप निराश न हों यहाँ आपके पास एक बेहतरीन विकल्प है और वो है सरिस्का के नार्थ ज़ोन की जंगल के बफर जोन की सफारी का।(Alwar Fort)

बाला किला बफर जोन
यहां पर करीब 15 जिप्सयां लगाई गई हैं जो कि पर्यटक को बालाकिला के अंदर 25 किलोमीटर की सैर करवाती हैं। इसमें सलीम सागर, बाला किला, जयविलास, सूरज कुंड आदि शामिल है। शनिवार व रविवार को भीड़ बहुत अधिक रहती हैं। पर्यटकों को जिप्सी का करीब 1440 रुपए का भुगतान करना पड़ता है। एक जिप्सी में नेचर गाइड के साथ करीब 6 पर्यटकों के बैठने की सुविधा रहती है। बफर जोन में कई बार पर्यटकों को जंगली जीव बारह सिंहा, सेही, जंगली सुअर,जंगली गाय, बाघ आदि भी दिख जाते हैं।(Alwar Fort)

एक समय था जब अलवर के सरिस्का बाघ परियोजना क्षेत्र में पर्यटकों की भीड़ रहती थी , लेकिन अब दो सालों से अलवर में बाला किला बफर जोन ने सरिस्का को पीछे छोड़ दिया है। हरी भरी अरावली की पहाडिय़ों के बीच स्थित बाला किला बफर जोन बनने के बाद यहां पर पर्यटकों के लिए सफारी की सुविधा शुरु की गई है। पहले केवल सरिस्का में ही यह सुविधा मिलती थी, जिससे पर्यटक वहां जाते थे। अब बाला किला हर पर्यटक की फर्स्ट चॉइस बन गया है। जब इन दिनों मानसून में तीन महिने सरिस्का बंद रहता है तो उस दौरान डेली बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पर आते हैं। बारिश के सुहावने मौसम में तो पर्यटकों को घ्ंाटों इंतजार के बाद भी यहां सैर करने का मौका नहीं मिलता है। लेकिन हमने टिकट लेकर एक जीप सफारी के लिए बुक की और निकल पड़े अरावली की खूबसूरत वादियों में। …. अपने जंगल सफारी के दौरान हमें ड्राइवर के अलावा एक गाइड भी मिले शिवराम। जिन्होंने हमारी ढाई तीन घंटे की सफारी को यादगार बना दिया।(Alwar Fort)
सफारी के दौरान हमारा पहला पड़ाव था यहाँ की बेहद खूबसूरत बाउल वैली। सच में इन दिनों इस घाटी की हरियाली को देखकर एक बार तो आपको लगेगा की आप शिमला की कुफरी वैली में आ गए हों। अद्भुत और सच में देखने लायक घंटों निहारने लायक। मानसून में यहाँ आकर सच में आप हिल स्टेशन जैसा फील करेंगे।
इस घाटी के बाद हमारा अगला पड़ाव था करनी माता का प्रसिद्ध मंदिर।
करणी माता का यह मंदिर दुनिया के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक है। यहाँ की खासियत यह कि यह मंदिर “कब्बा” नामक लगभग 20,000 काले चूहों का घर है जो यहाँ रहते हैं और उनकी पूजा की जाती है। इन चूहों को करणी माता के नर वंशज माना जाता है।

बाला किला जिसे अलवर किले के नाम से भी जाना जाता है, अलवर शहर में एक पहाड़ी पर स्थित है। इस किले को 1550 में हसन खान मेवाती ने बनवाया था।

वैसे इस किले के छह प्रमुख द्वार हैं -जय पोल, लक्ष्मण पोल, सूरत पोल, चाँद पोल, अंधेरी द्वार और कृष्णा द्वार जो किले की ओर जाते हैं। लेकिन इस किले में आने जाने के लिए जय पोल द्वार का ही प्रयोग किया जाता है।
इस किले में 15 बड़े टॉवर और 51 छोटे टॉवर हैं। यह किला जो अपनी वास्तुकला के डिज़ाइन के लिए प्रसिद्द है, मुगल काल में बनाया गया था और बाद में इस पर कछवाहा राजपूतों ने कब्ज़ा कर लिया।
किले के पास ही एक परकोटे से आप अलवर शहर और दूर दूर तक फैली अरावली की खूबसूरत वादियों का दीदार कर सकते हैं।
यहाँ सफारी के दौरान आपको सांभर, जंगली सूअर और नाचते हुए मोर दिखाई देंगे।(Alwar Fort)
हमें गाइड ने बताया की यहाँ पर लेपर्ड भी दिखाई देते हैं लेकिन यह पूरी तरह आपकी किस्मत पर निर्भर करता है। लेकिन इस किले के अंदर फैले इस जंगल में कुछ पॉइंट्स इतने सुन्दर हैं की वो आपकी यात्रा को मेमोरेबल बनाने के लिए काफी है। इन्ही पॉइंट्स में से एक हैं जयविलास पैलेस। बताते हैं किसी ज़माने में यह दुनिया के सबसे खूबसूरत महलों में से एक था।
सूरजकुंड
यही जंगल के अंदर हम यहाँ की एक और पुराणी और सुन्दर जगह सूरजकुंड पहुंचे जो कि किसी समय इस बाला किले की पानी की पूर्ति करता था। आप इसकी अद्भुत बनावट के कायल हुए बिना नहीं रह सकते। यहीं हमें दिखाई दिए ढाक के पेड़। वही फेमस कहावत ढाक के तीन पात वाला पेड़।
हम लगभग तीन घंटे जंगल सफारी करने के बाद निकल पड़े अलवर की एक और शानदार जगह सिलीसेढ़ झील की और।
सिलीसेढ़ झील
7 किलोमीटर के क्षेत्र में फेली हुई सिलीसेढ़ झील राजस्थान की सबसे खुबसूरत झीलो और अलवर कि लोकप्रिय जगहों में से एक है। इस झील का निर्माण 1845 में अलवर शहर को पानी की आपूर्ति के लिए किया गया था। इस झील में एक शानदार लेकपैलेस है जो कि यहाँ के महाराजा का प्रिय माना जाता था। अलवर शहर से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिलीसेढ़ झील टूरिस्ट्स के लिए एक फेवरेट डेस्टिनेशन है।
अगर आप शहर के भीड़-भाड़ से दूर शांति, शुकून और मनोरंजन के लिए कही घूमने का सोच रहे तो सिलीसेढ़ झील की यात्रा करना आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
वैसे यहाँ आप बोटिंग का लुफ्त उठा सकते हैं। साथ ही झील के किनारे टूरिस्टस के लिए आरामदायक गार्डन भी बनाया गया है जहाँ से आप झील की ख़ूबसूरती का दीदार कर सकते हैं।
और शाम को हरियाली के बीच सनसेट का सुंदर नजारा देख सकते हैं।
सिलीसेढ़ झील सुबह के 9.00 से शाम के 6.00 बजे तक पर्यटकों के घूमने के लिए खुली रहती है।
अगर आप सिलीसेढ़ झील जाने का प्लान बना रहे है तो हम आपको बता दे की सिलीसेढ़ झील घूमने जाने के लिए जुलाई से मार्च का समय सबसे बेहतर समय माना जाता है।वैसे सिलीसेढ़ झील जाने के लिए सर्दियाँ का समय आदर्श समय है क्योंकि इस दौरान मौसम बहुत सुहावना होता है। सिलीसेढ़ झील चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है, यही वजह है कि वहां का मौसम ज्यादातर समय खुशनुमा बना रहता है। सिलीसेढ़ झील मानसून में और भी सुन्दर दिखाई देती है वजह है चारो और फैली हरियाली। इसलिए आप बरसात के मौसम में भी यहाँ मजे से विजिट कर सकते हैं। यहाँ की टिकट एडल्ट के लिए सौ रुपए है जिसमे आपको लेक पैलेस के रेस्टोरेंट में पानी की बोतल और कॉफी सर्वे की जाएगी। लेक पैलेस में आप को बहुत सारे बंदर उछलकूद करते दिखाई देंगे। यहाँ आएं तो इन बंदरों से थोड़ा सावधान रहें क्योंकि कई बार ये आपके सामान को छीन लेते हैं। लेक पैलेस में आप रात्रि ठहराव के लिए रूम बुक कर सकते हैं। और सिलीसेढ़ झील के मनभावन नज़ारों का लुत्फ़ उठा सकते हैं। यहाँ एक रेस्टोरेंट है जहाँ आपको चाय कॉफी के अलावा दूसरे फ़ूड आइटम्स भी रिजनेबल रेट पर मिल जायेंगे।
7 किलोमीटर के क्षेत्र में फेली हुई सिलीसेढ़ झील राजस्थान की सबसे खुबसूरत झीलो और अलवर कि लोकप्रिय जगहों में से एक है। इस झील का निर्माण 1845 में अलवर शहर को पानी की आपूर्ति के लिए किया गया था जिसकी स्थापना का श्रेय महाराजा विनय खान को दिया जाता है। इस झील में एक शानदार झील महल है जो कि महाराजा का प्रिय माना जाता था। अलवर शहर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिलीसेढ़ झील पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है।






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