Brahma Sarovar Kurukshetra – Best Place to Visit in Haryana
कुरुक्षेत्र का ब्रह्मसरोवर - एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित सरोवर
हमारे देश में बहुत-सी ऐसी जगह हैं जिनका जिक्र हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। और यह स्थान कई हजार साल पुराने हैं। यही कारण है कि लोग उन जगहों पर घूमना बहुत पसंद करते हैं,जो बहुत प्राचीन हैं और हमारी आस्था के साथ भी जुड़े हुए हैं। महाभारत के युध्द को कौन नहीं जानता, महाभारत के सभी मुख्य किरदार आज भी हमारे दिलों दिमाग में बैठे हुए हैं। महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था यह बात तो सभी जानते हैं, मगर बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो कुरुक्षेत्र से ज्यादा दूरी होने की वजह से वहां पर नहीं जा पाते हैं। और कुरुक्षेत्र में कौन-सी जगह क्यों प्रसिद्ध है, इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं है। अगर आप कुरुक्षेत्र जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

स्टेशन से ब्रह्मसरोवर
आप जैसे ही कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन के बाहर निकलेंगे तो आपको यह रेलवे स्टेशन किसी राजमहल से कम नहीं लगेगा। आप स्टेशन की डेकोरेशन देखकर ही अनुमान लगा लेंगे कि जरूर इस शहर में कोई ना कोई खास बात है। स्टेशन के बाहर कई ऑटो वाले खड़े होते हैं आप चाहे तो ऑटो स्पेशल रिजर्व करा कर भी जा सकते हैं या सवारी के हिसाब से भी सफर कर सकते हैं। ब्रह्मसरोवर जाने का किराया प्रति सवारी मात्र 20 रुपये है। स्टेशन से ब्रह्मसरोवर की दूरी 3.5 किलोमीटर की है। ब्रह्मसरोवर की ओर जाते हुए छठी पातशाही गुरुद्वारा, सन्निहित सरोवर, पैनारोमा एवं विज्ञान केंद्र, श्री कृष्ण संग्रहालय इसी मार्ग में मिलेंगे। लेकिन आज इस ब्लॉग में हम आपको रूबरू करवाएंगे कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध ब्रह्म सरोवर से।
जानिए ब्रह्मसरोवर का इतिहास
सबसे पहले समझते हैं ब्रह्म सरोवर के इतिहास को, यह जगह क्यों फेमस है और क्यों यहाँ देश के दक्षिणी राज्यों केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटका तक से श्रद्धालु आते हैं। जिन लोगों की धर्म में अटूट आस्था है वो साल भर यहाँ बड़े श्रद्धा भाव से आते हैं। बाकी बहुत से लोग विशेष अवसरों पर जैसे सोमवती अमावस्या, सूर्य ग्रहण पर यहाँ आते हैं। दरअसल ब्रह्मसरोवर का संबंध सृष्टिकर्ता ब्रह्मा से माना गया है। भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम का इस सरोवर से विशेष संम्बंध रहा है। पौराणिक अध्ययनों के अनुसार इस सरोवर की सर्वप्रथम खुदाई राजा कुरु ने करवाई थी इन्ही के नाम पर इस स्थान का नाम कुरुक्षेत्र पड़ा। इसी स्थल पर प्रजापति ब्रह्मा ने सबसे पहले युद्ध किया था।

द्रोपदी कूप
सूर्य ग्रहण के अवसर पर ब्रह्म सरोवर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। पौने चार किलोमीटर में फैला यह प्राचीन सरोवर भारत के मानव निर्मित सरोवरों में से सबसे बड़ा सरोवर है। इसी स्थान पर सरोवर के मध्य भाग में प्राचीन द्रोपदी कूप भी है जिसे चंद्रकूप कहा जाता है। ब्रह्म सरोवर आने वाले श्रृद्धालु सरोवर में स्नान करने के उपरांत इस कूप के दर्शन अवश्य करते है, जिसे बहुत शुभ माना जाता है।

इस सरोवर की विशालता को देखते हुए अकबर के कवि अबुल फजल ने इसे लघु समुद्र की संज्ञा दी थी। इस सरोवर में स्नान करना हजारों अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर माना जाता है। महाभारत का युद्ध जीतने के बाद युधिष्ठिर ने इस के मध्य भाग में विजय स्तंभ निर्माण करवाया।

महाभारत में भी ब्रह्म सरोवर का जिक्र है कि महाभारत युद्ध के अंतिम दिन, युद्ध में हार जाने के बाद, दुर्योधन इसी सरोवर में आकर छुप गया था। आप को ब्रह्मसरोवर के मुख्य द्वार के सामने, बाहर की और कई तरह की दुकानें दिखाई देंगी, जहाँ आपको हर तरह के सजावट और वुडेन क्राफ्ट का सामान मिल जायेगा। यहाँ से आप हल्की फुलकी शॉपिंग कर सकते हैं। बाहर काफी सारे भोजनालय भी आपको आसानी से मिल जायेंगे लेकिन यहाँ खाने से पहले थोड़ा क्वालिटी रिसर्च कर लें तो बेहतर होगा। यहां पर रविवार के दिन काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। बाकी सप्ताह में भीड़ इतनी ज्यादा नहीं होती। हां, अगर कोई पर्व या त्यौहार हो तो यहां पर अच्छी खासी भक्तों की भीड़ देखने को मिल सकती है।

ब्रह्मसरोवर में प्रवेश करते ही आपको शानदार नजारा देखने को मिलता है जो सामान्यतः किसी सरोवर को देखने पर नहीं मिलता। एकबारगी यह सरोवर किसी लघु समुंदर से कम नही लगता। इसकी विशालता और भव्यता को देखकर आप मनमोहित हो जाओगे। सरोवर के बीचोबीच पुल बना हुआ है जहाँ खड़े होकर आप सरोवर की ख़ूबसूरती का आनंद ले सकते हैं। साथ ही यहां पर आप प्राचीन ऐतिहासिक और हस्तशिल्प की कलाओं से परिचित होंगे।



सरोवर के पास बनी दीवारों पर आपको कई तरह के चित्र देखने को मिलेंगे। सरोवर के चारो और अलग अलग पौराणिक दैवीय पात्रों के नाम पर स्नान घाट बने हुए हैं जो सूर्यास्त के समय या संध्या के समय एक अलग ही छटा बिखेरते हैं। इन घाट पर बैठकर आप आसानी से योग, अध्यात्म और ध्यान कर सकते हैं। सुबह शाम यहाँ आपको मंदिर की आरती और घंटियों की आवाज़ सुनाई देती है।
ऐतिहासिक शिव महादेव मंदिर


श्रीकृष्ण की अर्जुन को उपदेश देते हुए विराट प्रतिमा
सरोवर के बीच में ऐतिहासिक शिव महादेव मंदिर भी है जहाँ काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और वहीँ मंदिर के किनारे सीढ़ियों पर बैठकर मछलियों को आटा दाना खिलाते हैं। कहते हैं यहाँ मछलियों को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यह मंदिर एक छोटे से पुल द्वारा सरोवर के किनारे से जुडा हुआ है। नवंबर दिसंबर के महीने में गीता जयंती के अवसर पर देश भर से श्रद्धालु ब्रह्म सरोवर में स्नान करने आते हैं। साथ ही गीता जयंती के उपलक्ष्य में हरियाणा सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेले का भव्य आयोजन किया जाता है जिसमें देश विदेश से कलाकार भाग लेते हैं। ब्रह्म सरोवर में श्रीकृष्ण की अर्जुन को उपदेश देते हुए विराट प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र है।



अगर आप श्रद्धा और आस्था के अलावा परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहते हैं तो भी यह बेस्ट डेस्टिनेशन है। अगर आप इस सरोवर को पूरा और अच्छे से घूमना चाहते हैं तो उसके लिए आपको थोड़े अधिक समय की जरूरत पडेगी। साथ ही यहाँ काफी पैदल भी चलना पड़ेगा, इसलिए मानसिक रूप से तैयार होकर ही यहाँ आएं।
कैसे जाएँ –
कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर स्थित है। कुरुक्षेत्र देश के सभी बड़े और महत्वपूर्ण शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। कुरुक्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1 से जुड़ा है, हाईवे पर स्थित पिपली से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर है।
Research by Pravesh Chauhan
Edited by Pardeep Kumar





