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Khonoma Village: जहां प्रकृति को बचाना लोगों की परंपरा है

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नागालैंड की पहाड़ियों के बीच बसा Khonoma Village उन जगहों में से है, जहां पहुंचकर लगता है कि जिंदगी की रफ्तार अचानक धीमी हो गई है। चारों तरफ हरियाली, सीढ़ीनुमा खेत, पुराने लकड़ी के घर और पहाड़ों के बीच बसा यह गांव सिर्फ खूबसूरत नहीं बल्कि अपने इतिहास और प्रकृति को बचाने की अनोखी सोच के लिए भी जाना जाता है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर किसी असली और शांत जगह को महसूस करना चाहते हैं, तो खोनोमा आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। खोनोमा आखिर इतना खास क्यों है? नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 20 किलोमीटर दूर बसा खोनोमा समुद्र तल से लगभग 1,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गांव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अपनी संस्कृति, बहादुरी और पर्यावरण संरक्षण की सोच के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचते ही आपको बड़े शहरों वाली भागदौड़ कहीं नजर नहीं आएगी। पहाड़ों के बीच बने घर, खेतों में काम करते लोग और शांत वातावरण इस जगह को बेहद अलग बनाते हैं। खोनोमा को अक्सर एशिया के पहले ग्रीन विलेज के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन Khonoma Village की पहचान सिर्फ एक टैग तक सीमित नहीं है। इस गांव के लोगों ने जिस तरह अपने जंगलों और वन्यजीवों को बचाने के लिए खुद नियम बनाए, वह इसे भारत के दूसरे गांवों से अलग बनाता है। जब शिकार करने वाले लोग ही बन गए जंगलों के रक्षक एक समय था जब नागालैंड के कई आदिवासी समुदायों में शिकार जीवन और परंपरा का अहम हिस्सा हुआ करता था। खोनोमा में भी जंगलों में शिकार करना आम बात थी। लेकिन धीरे-धीरे गांव के लोगों को महसूस हुआ कि लगातार शिकार की वजह से जंगलों में रहने वाले पक्षियों और जानवरों की संख्या कम होती जा रही है। 1990 के दशक में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि गांव के लोगों को अपने आसपास के जंगलों के भविष्य की चिंता होने लगी। खासतौर पर नागालैंड के दुर्लभ पक्षी ब्लीथ्स ट्रैगोपैन की संख्या पर खतरा मंडराने लगा था। इसके बाद गांव के लोगों ने एक बड़ा फैसला लिया, जिसने आगे चलकर पूरे खोनोमा की पहचान बदल दी। 1998 में लिया गया वह फैसला जिसने गांव की पहचान बदल दी लंबी बातचीत और गांव के लोगों की सहमति के बाद दिसंबर 1998 में खोनोमा के लोगों ने अपने आसपास की सामुदायिक जंगल भूमि को संरक्षित करने का फैसला किया। करीब 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को Khonoma Nature Conservation and Tragopan Sanctuary के रूप में सुरक्षित किया गया। इस फैसले के बाद शिकार, व्यावसायिक स्तर पर पेड़ों की कटाई और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की गई। नियमों की निगरानी भी गांव के लोगों ने खुद संभाली। यही वजह है कि Khonoma Village को सामुदायिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। आज यहां कई दुर्लभ पक्षियों और जंगली जानवरों को सुरक्षित वातावरण मिलता है। यह कहानी बताती है कि जब स्थानीय लोग खुद अपने जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी लेते हैं, तो बदलाव कितना बड़ा हो सकता है। दुर्लभ पक्षियों और जानवरों का सुरक्षित घर खोनोमा के आसपास के जंगल जैव विविधता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां ब्लीथ्स ट्रैगोपैन के अलावा कई तरह के फिजेंट, पार्ट्रिज और दूसरे दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। जंगलों में तेंदुए, एशियाई काले भालू और बार्किंग डियर जैसे जानवर भी देखे जा सकते हैं। हालांकि जंगल में घूमते हुए हर जानवर को देख पाना आसान नहीं होता, लेकिन यहां का प्राकृतिक वातावरण ही इस जगह को खास बनाता है। सुबह के समय पक्षियों की आवाज और जंगलों में फैली धुंध का अनुभव शहरों की जिंदगी से बिल्कुल अलग होता है। अगर आपको Bird Watching और Nature Photography पसंद है, तो Khonoma Village आपके लिए एक शानदार जगह हो सकता है। खोनोमा का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है खोनोमा सिर्फ हरियाली और प्रकृति के लिए मशहूर नहीं है। इस गांव का इतिहास भी काफी पुराना और संघर्षों से भरा हुआ है। इसे अंगामी नागा योद्धाओं का एक महत्वपूर्ण गांव माना जाता रहा है। अंगामी समुदाय अपने साहस और स्वतंत्र स्वभाव के लिए जाना जाता था। 19वीं सदी में जब ब्रिटिश शासन ने नागा पहाड़ियों की तरफ अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की, तब खोनोमा के योद्धाओं ने इसका जमकर विरोध किया। इस संघर्ष की वजह से खोनोमा का नाम नागालैंड के इतिहास में एक खास जगह रखता है। जब खोनोमा के योद्धाओं ने ब्रिटिश सेना को चुनौती दी ब्रिटिश शासन और खोनोमा के लोगों के बीच कई संघर्ष हुए। 1879 का संघर्ष इनमें सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उस समय ब्रिटिश अधिकारी जी.एच. डैमेंट अपनी सेना के साथ खोनोमा पहुंचे थे, लेकिन गांव के योद्धाओं ने उनका कड़ा मुकाबला किया। पहाड़ों के रास्तों की जानकारी और अपनी रणनीति की मदद से स्थानीय योद्धाओं ने ब्रिटिश सेना को बड़ी चुनौती दी। बाद में ब्रिटिश सेना ने भारी हथियारों के साथ गांव को घेर लिया और लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा। खोनोमा के योद्धाओं के पास आधुनिक हथियार नहीं थे। वे पारंपरिक भाले, दाओ और देसी बंदूकों का इस्तेमाल करते थे। इसके बावजूद उन्होंने लंबे समय तक मुकाबला किया। Khonoma Village का यही इतिहास आज भी यहां के लोगों के लिए गर्व की बात है। आज भी महसूस होता है उस पुराने इतिहास का असर खोनोमा की गलियों में घूमते हुए आपको कई ऐसी चीजें दिखाई देती हैं जो इसके पुराने इतिहास की याद दिलाती हैं। यहां के पारंपरिक घर, पत्थर की संरचनाएं और पुराने प्रवेश द्वार गांव की पुरानी पहचान को संभालकर रखे हुए हैं। सेमोमा क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी काफी खास है। कहा जाता है कि यहां के कुछ हिस्से उस दौर के संघर्षों की कहानियां आज भी अपने अंदर समेटे हुए हैं। अगर आप सिर्फ घूमने के बजाय किसी जगह के इतिहास को महसूस करना पसंद करते हैं, तो Khonoma Village आपको एक अलग अनुभव देगा। खोनोमा की खेती में छिपा है सदियों पुराना विज्ञान खोनोमा के लोगों की खेती करने की तकनीक भी काफी दिलचस्प है। यहां पहाड़ों की ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत दिखाई देते हैं, जो देखने में जितने खूबसूरत लगते हैं, उतने ही उपयोगी भी